Saturday, January 31, 2026

कर्तव्य, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक: एससीईआरटी उत्तराखंड में ओमप्रकाश सेमवाल को भावभीनी विदाई

 देहरादून | एससीईआरटी उत्तराखंड

आज राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के सभागार में एक अत्यंत भावुक एवं गरिमामय वातावरण के बीच परिषद के प्रवक्ता एवं विधि अधिकारी ओमप्रकाश सेमवाल को उनकी अधिवर्षता आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त होने के अवसर पर भावभीनी विदाई दी गई।

सेवा, अनुशासन और निष्ठा की 15 वर्षों की यात्रा

ओमप्रकाश सेमवाल ने शिक्षा विभाग में लगभग 15 वर्षों तक विभिन्न दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्होंने शिक्षक एवं विधि अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए न केवल प्रशासनिक दायित्वों को कुशलता से निभाया, बल्कि अपने कार्यों से परिषद को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया।

वे एक अनुशासनप्रिय, समयबद्ध, कर्तव्यनिष्ठ एवं बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न अधिकारी के रूप में सदैव स्मरण किए जाएंगे। कार्यों को समयसीमा के भीतर पूर्ण करना और जिम्मेदारियों के प्रति पूर्ण समर्पण उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान रही।

सम्मान एवं अभिनंदन का गरिमामय क्रम

सेवानिवृत्ति समारोह के दौरान सर्वप्रथम अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी द्वारा सेमवाल को पुष्पमाला पहनाकर, अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं पुष्प भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात परिषद के संकाय सदस्यों द्वारा भी पुष्पमालाएँ अर्पित कर उनका आत्मीय स्वागत किया गया।

इसी क्रम में सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानंद बिजलवान ने  सेमवाल को शाल ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर सम्मानित किया और उनके विशिष्ट कार्यशैली, विधिक दक्षता तथा समस्याओं को अनोखे ढंग से सुलझाने की क्षमता पर अपने विचार साझा किए।

निदेशक का संबोधन: एक योग्य विधि अधिकारी और निपुण शिक्षक

कार्यक्रम के मध्य निदेशक  बंदना गर्ब्याल सभागार में पहुँचीं और उन्होंने श्री ओमप्रकाश सेमवाल को माला पहनाकर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि—

श्री ओमप्रकाश सेमवाल न केवल एक जिम्मेदार और योग्य विधि अधिकारी रहे हैं, बल्कि एक कुशल और निपुण शिक्षक के रूप में भी उन्होंने परिषद को अपनी सेवाएँ दी हैं। उनका अनुभव और समर्पण सदैव प्रेरणादायक रहेगा।”

वायु सेना से शिक्षा सेवा तक का प्रेरक सफर

ओमप्रकाश सेमवाल पूर्व में भारतीय वायु सेना में भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। एक एक्स-सर्विसमैन के रूप में वायु सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के पश्चात उन्होंने सिविल सेवा में प्रवेश कर शिक्षा विभाग को अपना कर्मक्षेत्र बनाया।

उन्होंने अध्यापन के साथ-साथ उन्हें सौंपी गई प्रत्येक जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन किया, जो उनके व्यक्तित्व की दृढ़ता और समर्पण को दर्शाता है।

परिवार का साथ और भावनाओं की अभिव्यक्ति

इस अवसर पर  सेमवाल की धर्मपत्नी, जो वर्तमान में शिक्षिका हैं, भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। उन्होंने कविता के माध्यम से सेमवाल के संघर्षपूर्ण जीवन, सेवा काल और अनुभवों को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया, जिससे सभागार भावनाओं से भर उठा।

कार्यक्रम का मंच संचालन कर रहे सुनील भट्ट द्वारा भी सेमवाल के लिए स्वरचित कविता प्रस्तुत की गई, जिसमें उनके सेवा-शौर्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस मौके पर डॉ शक्ति प्रसाद पूर्व प्रवक्ता एस सी ई आर टी ने भी उन्हे शुभ कांनाए दी । 

लघु फिल्म के माध्यम से जीवन-यात्रा का चित्रण

आईटी विभाग द्वारा ओमप्रकाश सेमवाल के जीवन एवं शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित सभी अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों को उनकी प्रेरक यात्रा से पुनः जोड़ दिया।

भावुक क्षण और विदाई संदेश

अपने संबोधन में  ओमप्रकाश सेमवाल ने अपने जीवन के संघर्षों को साझा किया। उन्होंने वायु सेना से VRS लेकर एक नए कार्यक्षेत्र को चुनने की चुनौतियों का उल्लेख किया, जिसे सुनकर सभागार में उपस्थित सभी लोग भावुक हो उठे।

कार्यक्रम के अंत में एससीईआरटी उत्तराखंड के समस्त संकाय सदस्य, अधिकारी एवं निदेशक परिवार ने खड़े होकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।

ओमप्रकाश सेमवाल की सेवानिवृत्ति परिषद के लिए एक प्रशासनिक अध्याय का समापन अवश्य है, किंतु उनका अनुशासन, अनुभव और सेवा-भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

एससीईआरटी उत्तराखंड परिवार उनके स्वस्थ, सक्रिय एवं सम्मानपूर्ण भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएँ देता है।

Friday, January 30, 2026

NCERT-SCERT Uttarakhand : DIKSHA पर e-Content विकास कार्यशाला समापन

मनोज किशोर बहुगुणा एन ई पी उत्तराखण्ड 

DIKSHA 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में -सामग्री विकास, LMS आधारित पाठ्यक्रम निर्माण, तथा राज्य-स्तरीय कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का तीसरा एवं अंतिम दिन अत्यंत महत्वपूर्ण एवं निष्कर्षात्मक रहा। इस दिन का मुख्य फोकस राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपने अनुभव, प्रगति, चुनौतियों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना तथा भविष्य की दिशा (Way Forward) तय करना रहा।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रतिभागियों के साथ दूसरे दिन की प्रमुख गतिविधियों की संक्षिप्त समीक्षा की गई। DIKSHA 2.0 की विशेषताओं, LMS आधारित कोर्स निर्माण, कंटेंट माइग्रेशन एवं राज्यों की तैयारी स्तर (Readiness) पर हुई चर्चाओं का पुनरावलोकन किया गया। प्रतिभागियों ने अपने सीखने के अनुभव साझा किए तथा तीसरे दिन की कार्ययोजना से अवगत हुए। बाद मे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, चंडीगढ़ ,  उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश , राजस्थान, गुजरात ने  प्रस्तुतियों में राज्यों द्वारा DIKSHA प्लेटफॉर्म पर -सामग्री विकास, पाठ्यक्रम निर्माण, उपयोगकर्ता नामांकन, भाषाई विविधता, तकनीकी चुनौतियाँ तथा भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने अपने राज्यों में DIKSHA अपनाने से जुड़े नवाचार एवं सफल प्रयोग भी साझा किए।  दूसरे सत्र मे असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड ने प्रस्तुतियों में दूरदराज़ एवं भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में DIKSHA के उपयोग, बहुभाषी सामग्री विकास, क्षमता निर्माण तथा सामुदायिक पहुँच (Community Outreach) पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने संसाधनों की सीमाओं के बावजूद अपनाई गई व्यावहारिक रणनीतियों को साझा किया। अंतिम सत्र मे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, पुदुच्चेरी ,बिहार, झारखंड, ओडिशासिक्किम महाराष्ट्रCBSE एवं NIOS ने प्रस्तुतियों में बड़े पैमाने पर नामांकन, शिक्षक प्रशिक्षण, LMS आधारित पाठ्यक्रमों का प्रभाव, तथा राष्ट्रीय स्तर पर DIKSHA के एकरूप एवं समावेशी उपयोग पर चर्चा की गई। CBSE एवं NIOS द्वारा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से DIKSHA के उपयोग और भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया गया।

सत्र का समापन पदमेंद्र सकलानी, अपर निदेशक, SCERT उत्तराखंड द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह कार्यशाला राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के DIKSHA एवं तकनीकी समन्वयकों की क्षमताओं के संवर्धन हेतु आयोजित की गई है, ताकि वे अपने-अपने DIKSHA टेनेंट्स पर ई-कंटेंट, डिजिटल पाठ्यपुस्तकों एवं ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता, पहुँच, उपयोगिता तथा सृजन को सुदृढ़ कर सकें। 


अंतिम सत्र में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत सुझावों और चर्चाओं के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना (Way Forward) पर सहमति बनाई गई। इसमें शामिल प्रमुख बिंदु रहे:

  1.    DIKSHA 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य-स्तरीय समयबद्ध कार्ययोजनाएँ
  2.   -सामग्री निर्माण, माइग्रेशन एवं LMS आधारित शिक्षण में सुधार
  3.   बहुभाषी सामग्री विस्तार एवं उपयोगकर्ता नामांकन बढ़ाने की रणनीतियाँ
  4.  CIET-NCERT और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश DIKSHA टीमों के बीच समन्वय सुदृढ़ करना

समापन सत्र के प्रारम्भ में अपर निदेशक एस.सी..आर.टी.उत्तराखण्ड  पदमेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।  सकलानी ने डिजिटल सामग्री में मानवीय भावनाओं को सम्मिलित करने पर जोर दिया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला के दौरान प्राप्त सीख, अनुभव एवं सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा कीं।

डॉ. रिजुअल करीम राष्ट्रीय तकनीकी समन्वयक दीक्षा नें कार्यक्रम की सम्पूर्ण रूपरेखा एवं भावी योजना को सबके सम्मुख रखा। दीक्षा की राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. इन्दु कुमार ने सभी राज्य समन्वयकों से गुणवत्तापरक पाठ्य सामग्री निर्माण का आवहान किया।



 इस अवसर पर निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखण्ड बन्दना गर्ब्याल ने सभी प्रतिभागियों से निरन्तर बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा सुधार की सम्भावनाओं पर कार्य करने का संदेश दिया। इसके पश्चात सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए

अन्त में सहायक निदेशक आई टी विभाग एस.सी..आर.टी.उत्तराखण्ड कैलाश डंगवाल के आयोजकों एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

समापन सत्र का संचालन मनोज किशोर बहुगुणा समन्वयक एन..पी. प्रकोष्ठ एस.सी..आर.टी.उत्तराखण्ड द्वारा किया गया। इस अवसर पर आई टी विभाग SCERT उत्तराखंड से सहायक निदेशक कैलाश डंगवाल, रमेश बडोनी,  पुष्पा असवाल, शिवप्रकाश वर्मा, रमेश पंत, अतुल, रजत, हिमानी भट्ट, विनय उनियाल, सौरव जोशी आदि उपस्थित रहे।


राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा 2025–26 का परिणाम घोषित

 उत्तराखंड के 1616 विद्यार्थियों को मिलेगी छात्रवृत्ति

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड द्वारा कक्षा 8 में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए आयोजित राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (NMMSS), डॉ. शिवानंद नौटियाल छात्रवृत्ति योजना (SNSS) एवं श्री देव सुमन छात्रवृत्ति योजना (SMSS) परीक्षा 2025–26 का परिणाम आज दिनांक 30 जनवरी 2026 को विधिवत घोषित कर दिया गया।

यह परीक्षा दिनांक 16 दिसंबर 2025 को राज्य के 95 विकासखंडों के 97 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए कुल 18,224 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 16,957 परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए। निर्धारित 1623 सीटों के सापेक्ष 1616 पात्र विद्यार्थियों का चयन छात्रवृत्ति के लिए किया गया है।

छात्रवृत्ति वितरण का विवरण

  • डॉ. शिवानंद नौटियाल छात्रवृत्ति:
    श्रेष्ठ अंक प्राप्त करने वाले 100 विद्यार्थियों का चयन
  • राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति (NMMSS):
    1048 विद्यार्थियों का चयन
  • श्री देव सुमन छात्रवृत्ति:
    468 विद्यार्थियों का चयन

राज्य स्तरीय टॉपर्स

  • प्रथम स्थान:
    कुमारी खुशी, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चोपता, विकासखंड नारायणबगड़ (चमोली)
    77.22% अंक
  • द्वितीय स्थान:
    आदर्श गौड़, राजकीय इंटर कॉलेज घंघाटी, विकासखंड दुगड्डा (पौड़ी)
    73.88% अंक
  • तृतीय स्थान:
    मयंक शर्मा, राजकीय इंटर कॉलेज गुमटी, विकासखंड स्यालदे (अल्मोड़ा)
    73.33% अंक

छात्रवृत्ति राशि का प्रावधान

  • NMMSS: चयनित 1048 विद्यार्थियों को ₹12,000 प्रतिवर्ष
  • डॉ. शिवानंद नौटियाल छात्रवृत्ति:
    100 श्रेष्ठ विद्यार्थियों को ₹15,000 प्रतिवर्ष
  • श्री देव सुमन छात्रवृत्ति:
    468 विद्यार्थियों को ₹10,000 प्रतिवर्ष

यह छात्रवृत्ति कक्षा 9 से 12 तक प्रदान की जाएगी।

परिणाम की घोषणा निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, SCERT उत्तराखंड द्वारा की गई। परिषद ने सभी चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए इसे राज्य की प्रतिभाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

  • NMMSS के अंतर्गत चयनित सभी 1048 विद्यार्थियों के लिए National Scholarship Portal (NSP) पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
  • NSP पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया जून माह से प्रारंभ होगी।
  • सभी परीक्षार्थी अपना विस्तृत परीक्षा परिणाम SCERT उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट
    पर देख सकते हैं।

RESULT:https://drive.google.com/file/d/1d7Ybtq9akvVyOc8nmBzyvGWITNEiyZ-m/view?usp=sharing