जनपद, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर नवाचार को गति देने के लिए मेंटर शिक्षकों को पोर्टल, आवेदन, डिजाइन थिंकिंग और प्रोटोटाइप निर्माण की जानकारी
देहरादून, 12 सितम्बर 2026।
SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग द्वारा Innovate Uttarakhand – Hackathon 3.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रथम चरण की Mentor–Supervisor Orientation Workshop ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य जनपद, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर हैकथॉन की पहुँच बढ़ाना, अधिक से अधिक शिक्षक एवं विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रेरित करना तथा चयनित मेंटर–सुपरवाइजर शिक्षकों को उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों से विस्तारपूर्वक परिचित कराना था।
यह अभिमुखीकरण विशेष रूप से उन शिक्षकों, DIET के आईटी से जुड़े कार्मिकों, हैकथॉन कार्यक्रम के प्रभारी प्रवक्ताओं, कौशलम् से जुड़े शिक्षकों तथा अन्य प्रतिभागियों के लिए आयोजित किया गया, जो अपने-अपने क्षेत्रों में Hackathon 3.0 के मार्गदर्शक और समन्वयक की भूमिका निभाएंगे।
नए विचार से समाधान तक — Hackathon 3.0 का उद्देश्य
कार्यशाला में बताया गया कि Hackathon 3.0 केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि समस्या पहचानने, नया विचार विकसित करने, समाधान खोजने और उसे प्रोटोटाइप में बदलने की प्रक्रिया है। विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपने विद्यालय, समुदाय, शिक्षा व्यवस्था तथा आसपास की वास्तविक चुनौतियों को पहचानकर उनके समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
प्रतिभागियों से अपेक्षा की गई कि वे Innovate Uttarakhand Portal पर Hackathon 3.0 के अंतर्गत उपलब्ध विभिन्न Challenge Categories को समझें और ऐसे विचार प्रस्तुत करें जिन्हें आगे चलकर AI आधारित समाधान, डिजिटल सॉल्यूशन, कार्यशील मॉडल, प्रोटोटाइप अथवा स्पष्ट रोडमैप के रूप में विकसित किया जा सके।
विशेष रूप से शिक्षा एवं स्मार्ट लर्निंग, पर्यावरण एवं जलवायु, आपदा एवं सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, जल संरक्षण, कृषि एवं ग्रामीण विकास, पर्यटन एवं स्थानीय आजीविका, बालिका शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण, समावेशी शिक्षा, विद्यालय प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, कोडिंग, गेम-बेस्ड लर्निंग, रोबोटिक्स तथा अन्य स्थानीय एवं सामाजिक समस्याओं पर उपयोगी समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
मेंटर–सुपरवाइजर होंगे Hackathon 3.0 महत्वपूर्ण कड़ी
कार्यशाला में मेंटर–सुपरवाइजर शिक्षकों की भूमिका को विस्तार से स्पष्ट किया गया। उनसे कहा गया कि वे अपने जनपद, विकासखंड और विद्यालयों तक Hackathon 3.0 की सूचना पहुँचाएं, नवाचारी शिक्षक एवं विद्यार्थियों की पहचान करें, उन्हें आवेदन के लिए प्रेरित करें और आवश्यकतानुसार उनके विचारों को सही दिशा देने में सहयोग करें।
मेंटर शिक्षकों को अपने क्षेत्र से प्राप्त आवेदनों एवं प्रतिभागिता का विवरण व्यवस्थित रूप से तैयार करने तथा आवश्यक सूचना SCERT उत्तराखंड को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया, जिससे Innovate Uttarakhand Dashboard के माध्यम से जनपदवार प्रतिभागिता, प्रगति और आवेदन की स्थिति का विश्लेषण किया जा सके।
कार्यशाला के दौरान SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग के प्रवक्ता रमेश प्रसाद बडोनी द्वारा मेंटर–सुपरवाइजर शिक्षकों को विस्तृत Hands-on Orientation दिया गया। इसमें पोर्टल पर उपलब्ध Hackathon 3.0 की संरचना, Challenge Categories, आवेदन प्रक्रिया, आइडिया प्रस्तुत करने की पद्धति, उपलब्ध संसाधनों तथा प्रतिभागियों को मार्गदर्शन देने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।
विशेष रूप से यह बताया गया कि किसी सामान्य विचार को किस प्रकार Design Thinking Process के माध्यम से समस्या-आधारित नवाचार में बदला जा सकता है और फिर उस विचार को एक व्यवहारिक Prototype Solution की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
प्रतिभागियों को पोर्टल पर उपलब्ध tutorials और exemplar ideas का उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया गया। ये उदाहरण किसी विचार की नकल करने के लिए नहीं, बल्कि यह समझने के लिए हैं कि किसी समस्या की पहचान, उसके विश्लेषण, समाधान की अवधारणा और प्रोटोटाइप की रूपरेखा किस प्रकार विकसित की जा सकती है।
श्रेष्ठ शिक्षकों की Case Studies और Success Stories भी होंगी प्रदर्शित
Hackathon 3.0 को केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रखते हुए इसे उत्तराखंड के नवाचारों का एक व्यापक डिजिटल मंच बनाने की दिशा में भी चर्चा हुई। मेंटर शिक्षकों से अनुरोध किया गया कि वे अपने जनपदों के ऐसे श्रेष्ठ एवं नवाचारी शिक्षकों की पहचान करें, जिनकी Case Studies, Innovative Practices और Success Stories अन्य शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को प्रेरित कर सकती हैं।
ऐसे शिक्षकों का विवरण, संबंधित सामग्री और वीडियो SCERT को उपलब्ध कराया जा सकता है, ताकि उपयुक्त सामग्री को Innovate Uttarakhand Portal पर ऑनबोर्ड कर राज्य के अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों तक पहुँचाया जा सके।
ऑनलाइन कार्यशाला में विभिन्न जनपदों, DIET, विकासखंडों एवं विद्यालयों से जुड़े लगभग 18 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। साझा की गई बैठक स्क्रीन में दिखाई देने वाले प्रतिभागियों में Rictcha Juyal DIET Dehradun, Shalini Bhatt DIET Pauri, Divakar Prasad Painuly, DIET Barkot, Nitish Kumar, Vikas Gaur, Hemlata Bisht, DIET U.S. Nagar, Shiv Kumar Bhardwaj, Prakash Chandra Upadhyay, Raghunath Kaintura, Bhupal Negi तथा Ankit Joshy Science Pathshala से जुड़े प्रतिभागी शामिल थे। स्क्रीन पर कुछ अन्य प्रतिभागी भी उपस्थित दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनके नाम पूर्ण रूप से दृश्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें अनुमान के आधार पर सूचीबद्ध करना उचित नहीं होगा।
स्कूल से राज्य स्तर तक बनेगा Innovation Ecosystem
इस प्रथम अभिमुखीकरण का केंद्रीय संदेश स्पष्ट रहा—Hackathon 3.0 में संख्या से अधिक महत्वपूर्ण गुणवत्तापूर्ण सहभागिता और समस्या-आधारित नवाचार है। प्रयास है कि दूरस्थ विद्यालय का विद्यार्थी या शिक्षक भी अपने आसपास की किसी वास्तविक समस्या को पहचान सके, उसका समाधान सोच सके और उचित मेंटरिंग के माध्यम से उस विचार को राज्य स्तर तक पहुँचा सके।
इस पूरी प्रक्रिया में Mentor–Supervisor Teachers विद्यालयों और Hackathon 3.0 के राज्य स्तरीय तंत्र के बीच महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करेंगे। उनका मार्गदर्शन विद्यार्थियों और शिक्षकों के विचारों को केवल आवेदन तक सीमित न रखकर Idea → Design Thinking → Mentoring → Prototype → Presentation → Innovation की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।