Monday, June 08, 2026

आईटीडीए की राज्य स्तरीय साइबर सुरक्षा कार्यशाला: डेटा सुरक्षा और डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुवात

 

उत्तराखंड राज्य में डिजिटल सेवाओं और ई-गवर्नेंस के बढ़ते विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक बन चुके हैं। इसी उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी विकास अभिकरण (ITDA), उत्तराखंड द्वारा भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से “Stage III – State Level Workshop on Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य में संचालित विभिन्न वेबसाइटों, वेब पोर्टलों, एप्लिकेशनों तथा डेटा प्रबंधन प्रणालियों की साइबर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करना, संभावित खतरों की पहचान करना तथा भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम के दौरान सभी विभागों द्वारा अपने-अपने संस्थानों में वर्तमान साइबर सुरक्षा व्यवस्था, डेटा प्रबंधन प्रक्रियाओं, सुरक्षा ऑडिट, साइबर खतरों, चुनौतियों तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए गए। प्रतिभागियों ने रैनसमवेयर, फिशिंग, डेटा चोरी, अनधिकृत पहुंच, सर्वर सुरक्षा, बैकअप प्रबंधन, नेटवर्क सुरक्षा और डिजिटल अवसंरचना से जुड़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए।

विद्यालयी शिक्षा विभाग की ओर से एससीईआरटी उत्तराखंड के आईटी विभाग से रमेश प्रसाद बड़ोनी तथा महानिदेशालय विद्यालयी शिक्षा से मुकेश  बहुगुणा ने कार्यशाला में प्रतिभाग किया। विद्यालयी शिक्षा विभाग के प्रस्तुतीकरण में विशेष रूप से उन विभिन्न अकादमिक वेबसाइटों, पोर्टलों एवं डिजिटल सेवाओं पर चर्चा की गई जो वर्तमान में आईटीडीए और एनआईसी के माध्यम से होस्ट की जा रही हैं। प्रस्तुतीकरण के दौरान वेबसाइट सुरक्षा के लिए नियमित सुरक्षा जांच (Security Checkpoints), समय-समय पर सॉफ्टवेयर एवं सुरक्षा अपडेट, उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण, डेटा बैकअप तथा सर्वर प्रबंधन से संबंधित चुनौतियों को रेखांकित किया गया।

चर्चा के दौरान साइबर हमलों और सुरक्षा खतरों से बचाव के लिए मजबूत फायरवॉल व्यवस्था, सर्वर हार्डनिंग, सुरक्षा पैच प्रबंधन, राज्य डेटा केंद्र (SDC) में सुरक्षित डेटा भंडारण तथा नियमित सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि संस्थागत स्तर पर साइबर सुरक्षा जागरूकता और क्षमता निर्माण भी उतना ही आवश्यक है।

आईटीडीए के महाप्रबंधक आशीष उपाध्याय एवं उनकी तकनीकी टीम ने विभिन्न साइबर सुरक्षा खतरों, उभरती चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने सभी विभागों को आश्वस्त किया कि राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए आईटीडीए आवश्यक तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर सुरक्षा एक निरंतर प्रक्रिया है और इसके लिए सभी विभागों को योजनाबद्ध एवं समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वर्तमान युग में डेटा सुरक्षा और डेटा प्रबंधन की नई चुनौतियों को समझना आवश्यक है। एआई आधारित प्रणालियाँ जहां कार्यकुशलता और निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बना सकती हैं, वहीं इनके सुरक्षित उपयोग, डेटा गोपनीयता और नैतिक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। भविष्य में एआई आधारित डेटा विश्लेषण, निगरानी और प्रबंधन प्रणालियाँ सरकारी कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन तथा तकनीकी दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

यह कार्यशाला राज्य के विभिन्न विभागों के बीच सहयोग, अनुभव साझा करने और साइबर सुरक्षा के प्रति एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। डिजिटल शासन के इस दौर में सुरक्षित, विश्वसनीय और सुदृढ़ साइबर सुरक्षा ढांचे का निर्माण ही राज्य की डिजिटल प्रगति का आधार बनेगा।

— रमेश प्रसाद बड़ोनी
आईटी विभाग, एससीईआरटी उत्तराखंड

आकांक्षा कोंडे ने संभाला महानिदेशक का दायित्व: उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा के लिये प्रयास

 

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग को नई नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक ऊर्जा प्राप्त हुई है। वर्ष 2018 बैच की आईएएस आकांक्षा कोंडे ने विद्यालयी शिक्षा विभाग के महानिदेशक (Director General School Education) का पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग के तीनों प्रमुख निदेशालयों—माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा तथा अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण (SCERT)—की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित कर विभागीय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

बैठक में निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती तथा प्राथमिक शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित कार्यक्रमों, उपलब्धियों एवं वर्तमान प्रगति की विस्तृत प्रस्तुति दी। विभागीय अधिकारियों ने राज्य में चल रही विभिन्न शैक्षिक योजनाओं, नवाचारों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए संचालित पहलों की जानकारी साझा की।

समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न विभागाध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों, उपलब्धियों तथा सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही इन चुनौतियों के समाधान हेतु तैयार की गई रणनीतियों और आगामी कार्ययोजनाओं को भी प्रस्तुत किया गया। बजट प्रबंधन, प्रस्तावित योजनाओं, प्रशिक्षण गतिविधियों तथा विभागीय कार्यक्रमों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर डॉ के एन बिजलवान सहायक निदेशक ने एससीईआरटी उत्तराखंड द्वारा संचालित नवाचारी कार्यक्रमों को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। आईटी विभाग की ओर से राज्यभर के शिक्षकों के लिए संचालित ऑनलाइन MOOCs पाठ्यक्रम, AI एवं ICT आधारित क्षमता विकास कार्यक्रम, इनोवेट उत्तराखंड हैकाथॉन, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विकास तथा तकनीकी नवाचारों से संबंधित पहलों की जानकारी साझा की गई। इन कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों में नवाचार, डिजिटल दक्षता और समस्या समाधान कौशल विकसित करने के प्रयासों को रेखांकित किया गया।

बैठक के दौरान महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने सभी अधिकारियों एवं विभागीय प्रतिनिधियों को अपने कार्यक्रमों का सुव्यवस्थित एवं प्रभावी संचालन जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा, समयबद्ध रिपोर्टिंग तथा परिणाम-आधारित कार्य संस्कृति को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर यदि किसी योजना या कार्यक्रम के क्रियान्वयन में बाधा आती है अथवा उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, तो उसे निर्धारित रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से तत्काल निदेशालय और महानिदेशक कार्यालय तक पहुंचाया जाए, ताकि समय रहते उसका समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि विभाग के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी समन्वित प्रयासों के माध्यम से राज्य की विद्यालयी शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नई नेतृत्व टीम के मार्गदर्शन में शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल नवाचार, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है।

आकांक्षा कोंडे का यह पहला समीक्षा संवाद केवल विभागीय कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विद्यालयी शिक्षा के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी, नवाचारी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

एससीईआरटी उत्तराखंड की पहल: विद्यालयों में विकसित होगा सड़क सुरक्षा का मॉडल

 

सड़क दुर्घटनाएँ आज देश के सामने एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रही हैं। इन दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा विद्यार्थियों के भीतर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखंड ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इस पहल के अंतर्गत विद्यालयों के लिए सड़क सुरक्षा नियमों पर आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित यातायात व्यवहार के प्रति प्रशिक्षित किया जा सके।

यह कार्यक्रम सर्वोच्च न्यायालय की मॉनिटरिंग समिति के निर्देशों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है और सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान-2017 की भावना को आगे बढ़ाता है। इसका उद्देश्य केवल नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है ताकि वे स्वयं सुरक्षित रहें और समाज में भी जागरूकता फैलाएँ।

मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से होगा  प्रशिक्षण

एससीईआरटी द्वारा पहले चरण में सड़क सुरक्षा विषयक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया जा रहा है। इसके बाद राज्य स्तर पर 40 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। ये प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स राज्य के सभी 13 जिलों में जाकर लगभग 60-60 प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे।

प्रशिक्षित शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों, सुरक्षित यातायात व्यवहार, पैदल चलने के नियम, साइकिल एवं दोपहिया वाहन सुरक्षा तथा दुर्घटना रोकथाम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करेंगे। इसके साथ ही विद्यालयों में सड़क सुरक्षा क्लबों का गठन भी किया जाएगा, जो वर्षभर विभिन्न गतिविधियों और जागरूकता अभियानों का संचालन करेंगे।

पाठ्यक्रम में स्थान

सड़क सुरक्षा को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा नियमों पर आधारित विषयवस्तु को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए छह ऑडियो-वीडियो सामग्री तथा अन्य प्रशिक्षण संसाधन भी विकसित किए जा चुके हैं। सड़क सुरक्षा सप्ताह और जागरूकता रैलियों जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भी इस अभियान को विद्यालय स्तर तक पहुँचाया जा रहा है।

विभिन्न विभागों का सहयोग

इस महत्वपूर्ण पहल में परिवहन विभाग और एससीईआरटी के विशेषज्ञों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है। मॉड्यूल निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्य में सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ के राज्य समन्वयक विनय थपलियाल सहित विभिन्न विषय विशेषज्ञों और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) के संकाय सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

एससीईआरटी की निदेशक वंदना गर्ब्याल के नेतृत्व में यह प्रयास शिक्षा और सुरक्षा को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है।

माड्यूल निर्माण में, परिवहन विभाग से डा पपने  , एससीईआरटी से , अखिलेश डोभाल,डा दिनेश रतूडी ,डा मनोज शुक्ला,रविदर्शन तोपाल,मनोज बहुगुणा,डा संजय भटट ,डा राकेश गैरोला,एंव डायटस से  प्रेरणा बहुगुणा,डा दिनेश रावत,डा शांति रतूडी,डा सुषमा महर,ऋतु कुकरेती,मनोज महर,आदि प्रतिभाग कर रहे हैं और समापन 10जून को होगा । 

Friday, June 05, 2026

विश्व पर्यावरण दिवस पर SCERT उत्तराखंड में विचार संगोष्ठी का आयोजन

 

देहरादून, 5 जून 2026

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर SCERT उत्तराखंड के सभागार में एक विचार संगोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा व्यक्तिगत स्तर पर अपनाए जाने वाले व्यवहारिक उपायों पर विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम में निदेशक अकादमिक एवं प्रशिक्षण, वंदना गर्ब्याल  द्वारा सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर इसे जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया गया। उनके मार्गदर्शन में सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण द्वारा संगोष्ठी का संचालन किया गया।

संगोष्ठी में तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई—

  1. वर्तमान समय में पर्यावरण के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ।

  2. पर्यावरण संरक्षण हेतु किए जा सकने वाले छोटे-छोटे व्यवहारिक प्रयास।

  3. दैनिक जीवन में अपनाई जाने वाली ऐसी आदतें जो पर्यावरण को सतत एवं संतुलित बनाए रखने में सहायक हों।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संकाय सदस्यों एवं कार्मिकों  को अपने विचार रखने के लिए खुला मंच प्रदान किया गया। सर्वप्रथम प्रवक्ता शुभ्रा सिंघल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बचपन से ही स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन की आदतों को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने प्लास्टिक बैग के स्थान पर जूट एवं कपड़े के थैलों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

रवि दर्शन तोपवाल ने उत्तराखंड की पर्यावरणीय विरासत का उल्लेख करते हुए चिपको आंदोलन और गौरा देवी के योगदान को स्मरण किया तथा वन संरक्षण की दिशा में समाज की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।

प्रवक्ता सुशील गैरोला  ने कारपूलिंग, साइकिल के उपयोग तथा अनावश्यक प्रिंटिंग को कम करने जैसे उपाय सुझाए। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कदम भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रवक्ता मनोज बहुगुणा ने त्योहारों के दौरान होने वाले प्रदूषण को कम करने पर जोर देते हुए विशेष रूप से दीपावली में पटाखों के सीमित उपयोग की आवश्यकता बताई। अन्य वक्ताओं ने भी दैनिक जीवन की उन आदतों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को प्रभावित करती हैं।

डॉ. दिनेश रतूड़ी ने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, नैतिक मूल्यों तथा यजुर्वेद में वर्णित प्रकृति संरक्षण संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता बताई।

शिव प्रकाश वर्मा, विनय थपलियाल , डॉ अवनीश उनियाल , अखिलेश डोभाल , डॉ आलोक प्रभा , नमिता सिंह , डॉ मनोज शुक्ला , सौरभ जोशी एवं की अन्य प्रवक्ताओं ने संगोष्ठी में  देश-विदेश के ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए, जहाँ व्यक्तियों और समुदायों ने वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आई टी प्रवक्ता ने डिजिटल युग में बढ़ते कार्बन उत्सर्जन पर चर्चा करते हुए  डिजिटल कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने अनावश्यक डेटा स्टोरेज, अत्यधिक अपलोडिंग-डाउनलोडिंग तथा उच्च गुणवत्ता वाले बड़े वीडियो फ़ाइलों के अनियंत्रित साझा करने से बचने की सलाह दी।

कार्यक्रम के समापन चरण में डॉ. के एन बीजल्वान  ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रसिद्ध 3R सिद्धांत – Reduce, Reuse और Recycle को अपनाने का संदेश दिया और इसे सतत जीवनशैली का आधार बताया।

अंत में निदेशक  वंदना गर्ब्याल को डॉ संजीव चेतन द्वारा निर्मित पर्यावरण पेंटिंग भेंट की । निदेशक ने सभी प्रतिभागियों द्वारा व्यक्त विचारों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों या अभियानों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने होंगे। उन्होंने सभी से पर्यावरण हितैषी आदतों को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्यों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने विचार साझा किए। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह संगोष्ठी पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।

Wednesday, June 03, 2026

Empowering Young Minds Through Digital Learning: CLAP Uttarakhand April 2026 Impact Report

CLAP Digital Literacy Program Continues to Transform Learning in Uttarakhand Schools

The Continued Learning Access Project (CLAP), a collaborative initiative of SARD and SCERT Uttarakhand, continued its mission of empowering children through digital literacy during April 2026. The program successfully reached students across multiple government primary, junior, high, and intermediate schools in Dehradun district, providing them with hands-on exposure to technology-enabled learning.

Through the use of HP laptops, digital learning resources, and interactive educational content, students from Classes 3 to 10 engaged in Mathematics, Science, and English learning activities aligned with their school curriculum. The initiative focused on strengthening foundational learning while enhancing digital skills, critical thinking, creativity, communication, and problem-solving abilities.

Report Link

The report highlights encouraging student participation across schools, with attendance ranging from 54% to 86%. Notably, Primary and Junior Sunderwala recorded the highest participation rate of approximately 86%, while Garhwali Colony and Vani Vihar schools also demonstrated strong engagement. Students actively participated in digital lessons covering topics such as Addition, Building with Bricks, Rational Numbers, Nutrition in Plants, Crop Production, Chemical Reactions, and various English language activities including storytelling, reading, vocabulary development, and puzzle-solving.

The CLAP sessions created an interactive and motivating learning environment where students and teachers enthusiastically embraced digital education. By integrating technology into classroom learning, the project is helping bridge the digital divide and preparing students for a technology-driven future. The Report April 2026 report demonstrates that CLAP is not only supporting academic achievement but also fostering confidence, curiosity, and digital readiness among young learners across Uttarakhand.