Wednesday, March 11, 2026

ए आई का नैतिक और कानूनी रूप से शिक्षा शिक्षण मे प्रयोग -रमेश बडोनी

वर्तमान डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से उपयोग में लाई जा रही है। एआई आधारित टूल्स की सहायता से शिक्षक पाठ योजनाएँ, ई-कॉन्टेन्ट, प्रश्नपत्र, चित्र, वीडियो और शैक्षणिक गतिविधियाँ तैयार कर सकते हैं। इससे शिक्षण अधिक रोचक और प्रभावी बन सकता है। लेकिन इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण नैतिक, कानूनी और शैक्षणिक जिम्मेदारियाँ भी जुड़ी हुई हैं। यदि एआई का उपयोग सावधानीपूर्वक नहीं किया गया, तो यह बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR), कॉपीराइट उल्लंघन, साहित्यिक चोरी (Plagiarism) या शैक्षणिक नैतिकता के विरुद्ध माना जा सकता है। 

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें 

एससीईआरटी उत्तराखण्ड आईटी विभाग द्वारा आयोजित ई-कॉन्टेन्ट निर्माण कार्यशाला का सफल समापन

एससीईआरटी उत्तराखण्ड के आईटी विभाग द्वारा आयोजित दस दिवसीय ई-कॉन्टेन्ट निर्माण कार्यशाला का समापन दिनांक 11 मार्च 2026 को उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना तथा कक्षा 3 और कक्षा 6 के लिए विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन (EVS) विषयों पर रोचक, शिक्षण-सहायक और पाठ्यक्रम आधारित ई-कॉन्टेन्ट विकसित करना था।

वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे शिक्षकों को आधुनिक तकनीकी साधनों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री तैयार करने की दक्षता प्राप्त होती है।

यह कार्यशाला दो चरणों में आयोजित की गई, जिसमें विषय विशेषज्ञ शिक्षकों, आईटी विशेषज्ञों तथा शैक्षिक सामग्री निर्माताओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को ई-कॉन्टेन्ट निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया से परिचित कराया गया, जिसमें विषय चयन, स्क्रिप्ट लेखन, एआई आधारित टूल्स का उपयोग, दृश्य-श्रव्य सामग्री का निर्माण, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा संपादन जैसी गतिविधियाँ शामिल थीं। इस कार्यशाला का संचालन सहायक निदेशक कैलाश डंगवाल और पुष्पा असवाल के मार्गदर्शन में किया गया, जिन्होंने प्रतिभागियों को निरंतर दिशा-निर्देश प्रदान करते हुए कार्य को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।

कार्यशाला के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके अंतर्गत एआई आधारित तकनीकों और प्रभावी स्क्रिप्टिंग के माध्यम से लगभग 50 ई-कॉन्टेन्ट और शैक्षिक वीडियो तैयार करने का उद्देश्य रखा गया। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिभागियों ने समूहों में कार्य करते हुए विभिन्न विषयों पर स्क्रिप्ट तैयार कीं और उन पर आधारित वीडियो का निर्माण किया। इस पूरी प्रक्रिया में आईटी विशेषज्ञों और विद्यालयों से आए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के बीच उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला, जिससे उच्च गुणवत्ता की डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार हो सकी।

कंटेन्ट निर्माण के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकों और आधुनिक पेडगोजिकल दृष्टिकोण को आधार बनाया गया, ताकि तैयार की गई सामग्री राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा और शैक्षिक मानकों के अनुरूप हो। कार्यशाला के दौरान कई समीक्षकों ने भी प्रतिभागियों के कार्यों का अवलोकन करते हुए अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। विशेष रूप से यह सुझाव दिया गया कि तैयार किए जा रहे ई-कॉन्टेन्ट को दीक्षा पोर्टल और पीएम ई-विद्या चैनलों की गाइडलाइनों के अनुरूप बनाया जाए, जिससे इन सामग्रियों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा सके।

कार्यशाला के दौरान समय-समय पर सहायक निदेशक डॉ. के.एन. बीजलवान ने भी मार्गदर्शन प्रदान किया और प्रतिभागियों को गुणवत्ता पूर्ण ई-कॉन्टेन्ट निर्माण के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त संदर्भदाता मनोधर नैनवाल, प्रवक्ता शिव वर्मा , सुप्रिया बहुखंडी तथा आईटी टीम के अन्य सदस्यों ने तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग प्रदान करते हुए कार्यशाला को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला के मध्य चरण में अपर निदेशक पी.के. बिष्ट, पदमेन्द्र सकलानी और आईटी संकाय आर.पी. बडोनी ने भी प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा किए तथा डिजिटल शिक्षण सामग्री के प्रभावी उपयोग पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। कुछ विषय विशेषज्ञों ने अपने पूर्व में तैयार किए गए ई-कॉन्टेन्ट भी प्रतिभागियों के साथ साझा किए, जिससे उन्हें व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सीखने का अवसर मिला।

कार्यशाला के समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने बताया कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें न केवल आधुनिक डिजिटल टूल्स और तकनीकों की जानकारी दी, बल्कि शिक्षण को अधिक रोचक, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में नई सोच भी प्रदान की। प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ शिक्षकों की डिजिटल क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ राज्य में गुणवत्तापूर्ण ई-लर्निंग संसाधनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


इस प्रकार एससीईआरटी उत्तराखण्ड के आईटी विभाग द्वारा आयोजित यह ई-कॉन्टेन्ट निर्माण कार्यशाला न केवल अपने निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल रही, बल्कि भविष्य में डिजिटल शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुई। इससे तैयार किए गए ई-कॉन्टेन्ट राज्य के विद्यार्थियों के लिए शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को अधिक सुलभ, आकर्षक और प्रभावी बनाने में सहायक होंगे।



Sunday, March 08, 2026

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एससीईआरटी उत्तराखंड में सम्मान और उत्सव का आयोजन

 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर SCERT Uttarakhand के सभागार में विद्यालयी शिक्षा परिवार द्वारा अत्यंत हर्षोल्लास और सम्मान के साथ इस विशेष दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व और निर्देशन निदेशक अकादमिक वंदना गर्ब्याल द्वारा किया गया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के अनेक अधिकारी, संकाय सदस्य, कर्मचारी तथा विभिन्न संस्थानों से आई हुई महिला अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।


कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन निदेशक वंदना गर्ब्याल की माताजी तथा अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी की उपस्थिति में किया गया, जिससे पूरे सभागार में उत्साह और सम्मान का वातावरण बन गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहन सिंह बिष्ट (प्रोफेशनल, SIEMAT) द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया, जबकि कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. के. एन. बिजल्वाण की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पदोन्नति प्राप्त अधिकारियों का अभिनंदन

कार्यक्रम के प्रारंभ में निदेशक वंदना गर्ब्याल द्वारा हाल ही में पदोन्नति प्राप्त अपर निदेशक विद्यालयी शिक्षा कुंवर सिंह रावत , मेहरबान सिंह बिष्ट  तथा वर्तमान में कार्यरत अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी को पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएँ दी गईं।

महिला कर्मियों का सम्मान

इस अवसर पर माध्यमिक शिक्षा, समग्र शिक्षा, प्रारम्भिक शिक्षा, विद्या समीक्षा केंद्र, एससीईआरटी, सीमेट  तथा अकादमिक प्रशिक्षण एवं शोध कार्यालय में कार्यरत सभी महिला कर्मियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित बाहरी अतिथि महिलाओं को भी विशेष रूप से सम्मान प्रदान किया गया।

विशेष रूप से पुष्पा असवाल, अनुग्या पैन्यूली, हिमानी भट्ट तथा गंगा गुघतियाल  को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त राजकीय इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या प्रेमलता बौडाई  को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में यह भी सुनिश्चित किया गया कि कार्यालय में कार्यरत प्रत्येक महिला कर्मी के योगदान को मान्यता मिले। कई छोटी बालिकाओं को भी विशेष रूप से सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया गया।

महिला योगदान पर प्रस्तुतीकरण



कार्यक्रम के दौरान संकाय सदस्य सुनील भट्ट द्वारा महिला दिवस के महत्व पर एक प्रेरक प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में महिलाओं के योगदान के साथ-साथ विश्व स्तर पर महिलाओं द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों का भी विस्तृत वर्णन किया गया।


अधिकारियों के प्रेरक विचार

पदोन्नति प्राप्त अपर निदेशक मेहरबान सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में क्षमताओं का विकेंद्रीकरण आवश्यक है, ताकि घर और कार्यालय दोनों स्थानों पर जिम्मेदारियों का संतुलन स्थापित हो सके और समता का भाव मजबूत बने।

अपर निदेशक कुंवर सिंह रावत ने महिलाओं द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जो महिलाएँ अभी भी अवसरों से वंचित हैं, उन्हें आगे लाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज के समय में महिलाओं के पास आगे बढ़ने के अनेक अवसर हैं और उन्होंने अपनी क्षमता और परिश्रम से यह सिद्ध भी किया है कि वे समाज और परिवार दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।


इसी क्रम में निदेशक बन्दना गर्ब्याल  ने सभी महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने दायित्वों और अधिकारों के प्रति सजग रहें। उन्होंने कहा कि यदि कभी उन्हें अपने अधिकारों के हनन का अनुभव हो, तो उन्हें अपने अधिकारों का उचित प्रयोग करना चाहिए, साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अधिकारों का उपयोग सदैव सकारात्मक और संतुलित तरीके से हो, जिससे व्यवस्था में सामंजस्य बना रहे और समाज में समानता की भावना मजबूत हो।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. के एन बिजलवान  द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात सभी उपस्थित सदस्यों को भोजन अवकाश के लिए आमंत्रित किया गया।



इस प्रकार SCERT Uttarakhand में आयोजित यह महिला दिवस समारोह न केवल महिलाओं के सम्मान और उनके योगदान को रेखांकित करने का अवसर बना, बल्कि यह कार्यक्रम समाज में समानता, सम्मान और सहभागिता के संदेश को भी मजबूती से प्रस्तुत करने में सफल रहा।

Click Here to See Event Gallary 


Saturday, February 28, 2026

डाइट नैनीताल में आकर्षक विज्ञान मेले के साथ मनाया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस-2025-26

भीमताल। कबाड़ समझी जाने वाली अनुपयोगी वस्तुओं से तैयार विज्ञान मॉडलों की प्रदर्शनी के साथ राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महरागाँव के बच्चों ने इस वर्ष आकर्षक राष्ट्रीय विज्ञान दिवस आयोजित कर दर्शकों का दिल जीत लिया। विद्यालय की 6ठी, 7वीं और 8वीं कक्षा के 60 बच्चे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) भीमताल के विज्ञान गतिविधि केंद्र द्वारा आयोजित चार दिवसीय अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे थे। 25-28 फरवरी को आयोजित इस कार्यशाला में बच्चों ने अपने विज्ञान पाठ्यक्रम से संबंधित विभिन्न अवधारणाओं पर निष्प्रयोज्य वस्तुओं से 30 से अधिक वर्किंग मॉडल बनाए। कार्यशाला के अंतिम दिन 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर बच्चों ने अपने हाथों से बने इन मॉडलों का एक भव्य विज्ञान मेले के रूप में प्रदर्शन किया। ये मॉडल न्यूटन के नियम, संतुलन, हवा के दाब, प्रकाश, चुम्बकत्व, खगोलविज्ञान तथा शरीर की कार्यप्रणाली से संबंधित अवधारणाओं पर आधारित थे। कार्यशाला के पहले दो दिनों में प्रतिभागियों ने मॉडलों को तैयार किया, तीसरे दिन उन के पीछे छुपे सिद्धांतों पर चर्चा की और चौथे व अंतिम दिन विज्ञान मेले के रूप में अपने-अपने मॉडलों का प्रदर्शन किया। 



विज्ञान मेले का उद्घाटन करते हुए एन.सी.टी.ई. दिल्ली की कोऑर्डिनटर डॉ. शुभा मिश्रा ने बच्चों के प्रदर्शन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके अलावा एन.सी.टी.ई. दिल्ली की टीम के अन्य सदस्यों- डॉ. जगमोहन साहू, डॉ. टी. पांडेय,  हिना जोशी,  गोपाल,  राहुल रॉय, ब्लॉक संसाधन केंद्र के अधिकारियों, विद्यालय के प्रधानाध्यापक  प्रकाश सिंह नगदली, शिक्षक- डॉ. मधू साह, डॉ. ज्योत्सना चंदोला, एसएमसी अध्यक्ष माला देवी, डीएलएड प्रशिक्षु व अनेक अभिभावकों तथा निकटवर्ती विद्यालयों के बच्चों व शिक्षकों ने भी विज्ञान मेले का अवलोकन किया। 

इस अवसर पर विज्ञान गतिविधि केंद्र के समन्वयक डॉ. शलेन्द्र धपोला ने बताया कि डायट विगत वर्ष स्थापित विज्ञान गतिविधि केंद्र के माध्यम से जिले के विभिन्न विद्यालयों में सीधे बच्चों के साथ विज्ञान शिक्षण संबंधी नवाचारी प्रयोग संचालित कर रहा है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर इस चार दिवसीय बाल विज्ञान कार्यशाला के संयोजक डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी ने बताया अनुभव आधारित विज्ञान कार्यशालाएं बच्चों को ‘लर्निंग बाय डूइंग’ का मौका देती हैं। कक्षा में विज्ञान से भय खाने वाले बच्चे भी बड़े आत्मविश्वास से खुद को अभिव्यक्त कर पाते हैं। कार्यशाला  में बाल विज्ञान खोजशाला समिति, बेरीनाग के संदर्भदाता विनोद उप्रेती, आशीष कांडपाल और आशुतोष उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।

गरिमामय समारोह - शिक्षा विभाग के दो कर्मयोगियों को भावभीनी विदाई स्वरूप सम्मान

आज उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा विभाग के लिए एक भावनात्मक और यादगार क्षण रहा, जब निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा उत्तराखण्ड अजय कुमार नौडियाल तथा अपर निदेशक विद्यालयी शिक्षा बृजमोहन सिंह रावत सेवा निवृत्त हुए।

इस अवसर पर तीनों निदेशालयों, State Council of Educational Research and Training Uttarakhand (SCERT) एवं SIEMAT Uttarakhand के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरा सभागार भावनाओं, सम्मान और कृतज्ञता से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

अजय कुमार नौडियाल ने अपने कार्यकाल में शिक्षा विभाग के विभिन्न निदेशालयों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कुशल कार्यप्रणाली, प्रशासनिक दक्षता और समन्वयकारी दृष्टिकोण ने विभाग को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने सदैव पारदर्शिता, अनुशासन और परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति को बढ़ावा दिया।

वहीं बृजमोहन सिंह रावत ने बोर्ड परीक्षाओं के सफल संचालन के साथ-साथ अनेक जनपदों में अधिकारी के रूप में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया। उनकी कार्यशैली में दृढ़ता, संवेदनशीलता और टीम भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला। उनके मार्गदर्शन में कई प्रशासनिक एवं शैक्षिक व्यवस्थाएँ सुदृढ़ हुईं।

निदेशक माध्यमिक डॉ मुकुल सती एवं निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल ने दोनों अधिकारियों के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की कामना की। अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी उनके साथ बिताए कार्यकाल को स्मरण करते हुए अनुभव साझा किए। कई क्षण ऐसे आए जब वर्षों की साझी यात्राओं और संघर्षों की यादों ने वातावरण को भावुक कर दिया।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने कहा कि यह विदाई केवल दो अधिकारियों की सेवा समाप्ति नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायी अध्याय का सम्मानपूर्ण समापन है। उनके द्वारा स्थापित कार्य संस्कृति, प्रशासनिक अनुशासन और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता आने वाले वर्षों में विभाग के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।

शिक्षा विभाग परिवार की ओर से दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को स्वस्थ, सुखद और सार्थक जीवन की हार्दिक शुभकामनाएँ। उनका अनुभव और मार्गदर्शन समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।