Monday, April 06, 2026

मिशन कर्मयोगी साधना सप्ताह वेबिनार संगोष्ठी

 

2–8 अप्रैल 2026 |  ऑनलाइन (Zoom एवं YouTube लाइव)


शिक्षा के बदलते परिदृश्य में डिजिटल दक्षता और निरंतर सीखने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसी दिशा में मिशन कर्मयोगी साधना सप्ताह के अंतर्गत एक भव्य वेबिनार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसने उत्तराखण्ड के शिक्षा जगत को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।

यह आयोजन केवल एक वेबिनार नहीं था, बल्कि शिक्षकों और अधिकारियों के लिए आत्म-विकास, तकनीकी सशक्तिकरण और नवाचार की ओर एक संगठित कदम था।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखण्ड एवं विद्यालयी शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में—

  • प्रदेश के 13 जनपदों से 500+ अधिकारी एवं शिक्षक Zoom के माध्यम से जुड़े
  • YouTube लाइव पर 7,000+ प्रतिभागियों ने सहभागिता की
  • कार्यक्रम ने राज्यव्यापी डिजिटल सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया

यह सहभागिता दर्शाती है कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों के प्रति जागरूकता और रुचि तेजी से बढ़ रही है।

कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल द्वारा किया गया।

उन्होंने अपने संबोधन में—

  • सभी प्रतिभागियों को साधना सप्ताह (2–8 अप्रैल) के दौरान 4 घंटे का ऑनलाइन कोर्स पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया
  • मिशन कर्मयोगी को आत्म-विकास का अभियान बताते हुए इसे शिक्षकों और अधिकारियों के लिए एक सुनहरा अवसर बताया

उनका संदेश स्पष्ट था—
👉 “डिजिटल युग में शिक्षक का निरंतर सीखना ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।”

प्रगति समीक्षा और डेटा आधारित दृष्टिकोण

माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक पंकज शर्मा ने—

  • मिशन कर्मयोगी पोर्टल पर अब तक की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की
  • चार्ट और डेटा के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया

यह सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा क्योंकि—

  • इससे प्रतिभागियों को अपनी स्थिति का मूल्यांकन करने का अवसर मिला
  • डेटा आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को बढ़ावा मिला

iGOT कर्मयोगी पोर्टल का अभिमुखीकरण

अकादमिक नोडल रमेश बडोनी द्वारा iGOT कर्मयोगी पोर्टल का विस्तृत परिचय दिया गया।

इस सत्र में शामिल मुख्य बिंदु—

  • REM लॉगिन प्रक्रिया का चरणबद्ध प्रदर्शन
  • पोर्टल की उपयोगिता और नेविगेशन
  • कोर्स चयन और पूर्णता की प्रक्रिया
  • डिजिटल लर्निंग के व्यावहारिक पहलू

इस प्रस्तुतीकरण ने प्रतिभागियों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक दक्षता भी प्रदान की।

सहभागिता: संवाद और सुझाव

इस संगोष्ठी की एक विशेषता रही इसकी इंटरएक्टिव प्रकृति

  • प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से अपने विचार साझा किए
  • अधिकारियों ने सुझावों को गंभीरता से सुना और चर्चा में शामिल किया
  • इससे कार्यक्रम अधिक सहभागी और प्रभावी बना


कार्यक्रम के अंत में निदेशक द्वारा सभी प्रतिभागियों से—

  • मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों को आत्मसात करने
  • साधना सप्ताह में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने
  • निरंतर सीखने की संस्कृति अपनाने

का आह्वान किया गया। उनका संदेश था— 

“सच्चा कर्मयोगी वही है जो सीखने को अपनी दिनचर्या बना ले।”

यह वेबिनार संगोष्ठी केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि—

  • डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत कदम
  • शिक्षकों और अधिकारियों के लिए आत्म-विकास का मंच
  • शिक्षा प्रणाली में सतत सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने वाला प्रयास

मिशन कर्मयोगी के माध्यम से उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि—

भविष्य की शिक्षा प्रणाली तकनीक, नवाचार और सहयोग पर आधारित होगी- यह संगोष्ठी केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत थी— जहाँ शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि निरंतर सीखने वाले कर्मयोगी बनते हैं।

कौशलम् कार्यक्रम: उत्तराखण्ड में शिक्षा का नया आयाम-2026-27

 

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी) उत्तराखण्ड द्वारा उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के सहयोग से संचालित कौशलम् कार्यक्रम वास्तव में बच्चों में उद्यमशीलता और 21वीं सदी के कौशल विकसित करने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल व्यावसायिक कौशल प्रदान कर रहा है, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों को अवसर में बदलने की सोच भी दे रहा है।

विद्यार्थियों का उत्साह और नवाचार

कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी जिस उत्साह और नवाचार के साथ इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, वह इस बात का प्रमाण है कि हमारी नई पीढ़ी अब केवल जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बनने की ओर अग्रसर है। यह परिवर्तन शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को दर्शाता है — आत्मनिर्भरता और सृजनशीलता।

राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखण्ड की पहचान

विशेष गर्व की बात है कि राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज बाढ़वाला, राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज नथुवा वाला और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज करगी, देहरादून के विद्यार्थियों ने अपने उत्कृष्ट प्रोडक्ट्स के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनके कार्यों को प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा सराहा जाना और स्वयं के ब्रांड के रूप में उभरना अत्यंत प्रेरणादायक है।

शिक्षा में सकारात्मक बदलाव

कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखण्ड के शिक्षा जगत में एक सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन चुका है। यह पहल विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, आत्मविश्वास और नवाचार की भावना से जोड़ रही है।

देखें प्रेरणादायक वीडियो:

कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखण्ड के विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर कर रहा है। यह पहल शिक्षा को जीवन से जोड़ने और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।

Mission Koshish: Strengthening Academic Support in Uttarakhand Schools-2026-27

The State Council of Educational Research and Training (SCERT), Uttarakhand has issued important directives for the academic session 2026-27 under the initiative Mission Koshish. This mission is designed to provide structured academic support to teachers and ensure effective learning outcomes for students across government primary and upper primary schools. 

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Key Highlights of the Directive

  • Target Audience: Teachers from Class 3 to Class 8 in government schools.

  • Objective: To support teachers in addressing learning gaps among students and to strengthen classroom processes.

  • Timeline: April to June 2026 (8 weeks) for the first phase of implementation.


Materials Provided: 
  • Academic reference documents with lesson plans and teaching methodologies.
  • Class-wise and subject-wise learning outcomes to focus on areas where students are lagging.
  • Monthly cluster-level academic meeting plans.

Implementation Strategy

  1. Orientation Sessions:

    • Conducted during April and May 2026 in monthly cluster-level academic meetings.

    • All headmasters and teachers of government primary and upper primary schools must participate.

  2. Academic Meetings:

    • Cluster-level monthly academic meetings will serve as platforms for teachers to discuss strategies, share experiences, and align with the mission’s objectives.

    • Separate documents outlining the meeting plans for April–June 2026 have been circulated.

  3. Availability of Resources:

    • All reference materials and plans are uploaded on the SCERT Uttarakhand website.

    • Additional materials for July–September 2026 will be made available in June 2026.

Expected Outcomes

  • Improved teaching practices tailored to address specific learning gaps.

  • Enhanced collaboration among teachers through structured academic meetings.

  • Stronger academic support for the effective implementation of Mission Koshish.

Attachments Mentioned

  1. Academic reference material for Mission Koshish.

  2. Cluster-level monthly academic meeting plan (April–June 2026).

The directive emphasizes collective responsibility and structured planning to ensure that every child receives the necessary academic support. By mandating orientation and resource distribution, SCERT Uttarakhand aims to make Mission Koshish a cornerstone of educational improvement in the state.

मिशन कोशिश: उत्तराखण्ड के विद्यालयों में अकादमिक सहयोग को सशक्त बनाना

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT), उत्तराखण्ड ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए मिशन कोशिश पहल के अंतर्गत महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इस मिशन का उद्देश्य शिक्षकों को संरचित अकादमिक सहयोग प्रदान करना और सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रभावी अधिगम परिणाम सुनिश्चित करना है।

निर्देश :

  • लक्षित समूह: सरकारी विद्यालयों में कक्षा 3 से कक्षा 8 तक के शिक्षक।

  • उद्देश्य: विद्यार्थियों में विद्यमान अधिगम अंतर को दूर करने में शिक्षकों की सहायता करना तथा कक्षा प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाना।

  • समयावधि: अप्रैल से जून 2026 (8 सप्ताह) – क्रियान्वयन का प्रथम चरण।

  • प्रदत्त सामग्री:

    • पाठ योजनाओं एवं शिक्षण विधियों सहित अकादमिक संदर्भ दस्तावेज।

    • कक्षा-वार एवं विषय-वार अधिगम परिणाम, जिन पर विद्यार्थियों के पिछड़ने की संभावना है।

    • मासिक संकुल स्तरीय अकादमिक बैठक की योजना।

Sunday, April 05, 2026

प्रवेशोत्सव 2026–27: “हर बच्चा, हर स्कूल – शिक्षा बने उत्सव”

🎉 प्रवेशोत्सव 2026–27 🎉

“हर बच्चा, हर स्कूल – शिक्षा बने उत्सव”

नए शैक्षणिक सत्र 2026–27 के शुभ अवसर पर
आइए मिलकर बच्चों का स्वागत करें और शिक्षा का उत्सव मनाएँ!


प्रवेशोत्सव एक विशेष सरकारी अभियान है जिसका उद्देश्य

हर बच्चे को विद्यालय से जोड़ना और शिक्षा को उत्सव के रूप में मनाना है।


  • 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों का 100% नामांकन सुनिश्चित करना
  • शिक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना
  • ड्रॉप-आउट दर को शून्य करना
  • स्कूल छोड़ चुके बच्चों (Dropout) को पुनः विद्यालय से जोड़ना


🗓 1 अप्रैल 2026 से प्रारंभ ⏳ एक माह तक चलने वाला विशेष अभियान


प्रमुख गतिविधियाँ

  • बच्चों का तिलक लगाकर एवं उपहार देकर स्वागत
  • आंगनबाड़ी से 5–6 वर्ष के बच्चों का कक्षा 1 में नामांकन
  • ड्रॉप-आउट बच्चों की पहचान और पुनः नामांकन
  • विद्यालयों में उत्सव जैसा वातावरण


विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाएँ

📚 निःशुल्क पुस्तकें
🍛 मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal)
💰 छात्रवृत्ति
🚲 साइकिल वितरण


डिजिटल पहल

📱 प्रवेश/ VSK केंद्र ऐप के माध्यम से
✔ हाउसहोल्ड सर्वे अनिवार्य
✔ नामांकन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग

आपकी भागीदारी जरूरी है!

अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन अवश्य कराएँ
 शिक्षक व समुदाय मिलकर हर बच्चे को स्कूल तक पहुँचाएँ


“कोई बच्चा छूटे नहीं – हर घर से स्कूल तक शिक्षा पहुँचे”



Strict Enforcement of Age Criteria in Uttarakhand Schools

उत्तराखण्ड विद्यालयों में प्रवेश आयु मानकों का सख्त अनुपालन

उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में प्रवेश हेतु न्यूनतम आयु मानकों के पालन पर बल देते हुए एक औपचारिक आदेश जारी किया है। यह आदेश सचिव रविनाथ रामन द्वारा 29 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित किया गया, जिसमें राज्य के कई विद्यालयों में देखी गई अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त की गई है।

निर्देश

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 तथा उत्तराखण्ड निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली, 2011 के अनुसार कक्षा–1 में प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि केवल वे बच्चे जिनका जन्म 1 जुलाई 2019 से पूर्व हुआ है, वे शैक्षणिक सत्र 2025–26 में कक्षा–1 में प्रवेश के पात्र होंगे।

पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं हेतु आयु मानक

सरकार ने पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के लिए भी स्पष्ट आयु मानक तय किए हैं:

कक्षा

आयु आवश्यकता

पूर्व-प्राथमिक–I / नर्सरी / बालवाटिका–I

3 वर्ष पूर्ण (न्यूनतम 2 वर्ष 12 माह)

पूर्व-प्राथमिक–II / नर्सरी / बालवाटिका–II

4 वर्ष पूर्ण (न्यूनतम 2 वर्ष 12 माह)

पूर्व-प्राथमिक–III / नर्सरी / बालवाटिका–III

5 वर्ष पूर्ण (न्यूनतम 2 वर्ष 12 माह)

कक्षा–1

6 वर्ष पूर्ण (न्यूनतम 2 वर्ष 12 माह)

चिंताएँ

आदेश में उल्लेख किया गया है कि कुछ विद्यालय निर्धारित आयु मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप:

  • आयु-अनुपयुक्त प्रवेश हो रहा है
  • छोटे बच्चों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव पड़ रहा है
  • बच्चों के मानसिक एवं भावनात्मक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है

कार्यवाही

शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि अधिसूचित मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। जो विद्यालय इन मानकों का उल्लंघन करेंगे, उनके विरुद्ध कठोर एवं उचित अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी करने और उल्लंघन की रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यह आदेश सरकार की बच्चों को आयु-उपयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन मानकों के पालन से उत्तराखण्ड में शिक्षा व्यवस्था को संतुलित और बच्चों के सर्वांगीण विकास के अनुरूप बनाए रखने का लक्ष्य है।