Saturday, February 28, 2026

डाइट नैनीताल में आकर्षक विज्ञान मेले के साथ मनाया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस-2025-26

भीमताल। कबाड़ समझी जाने वाली अनुपयोगी वस्तुओं से तैयार विज्ञान मॉडलों की प्रदर्शनी के साथ राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महरागाँव के बच्चों ने इस वर्ष आकर्षक राष्ट्रीय विज्ञान दिवस आयोजित कर दर्शकों का दिल जीत लिया। विद्यालय की 6ठी, 7वीं और 8वीं कक्षा के 60 बच्चे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) भीमताल के विज्ञान गतिविधि केंद्र द्वारा आयोजित चार दिवसीय अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे थे। 25-28 फरवरी को आयोजित इस कार्यशाला में बच्चों ने अपने विज्ञान पाठ्यक्रम से संबंधित विभिन्न अवधारणाओं पर निष्प्रयोज्य वस्तुओं से 30 से अधिक वर्किंग मॉडल बनाए। कार्यशाला के अंतिम दिन 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर बच्चों ने अपने हाथों से बने इन मॉडलों का एक भव्य विज्ञान मेले के रूप में प्रदर्शन किया। ये मॉडल न्यूटन के नियम, संतुलन, हवा के दाब, प्रकाश, चुम्बकत्व, खगोलविज्ञान तथा शरीर की कार्यप्रणाली से संबंधित अवधारणाओं पर आधारित थे। कार्यशाला के पहले दो दिनों में प्रतिभागियों ने मॉडलों को तैयार किया, तीसरे दिन उन के पीछे छुपे सिद्धांतों पर चर्चा की और चौथे व अंतिम दिन विज्ञान मेले के रूप में अपने-अपने मॉडलों का प्रदर्शन किया। 



विज्ञान मेले का उद्घाटन करते हुए एन.सी.टी.ई. दिल्ली की कोऑर्डिनटर डॉ. शुभा मिश्रा ने बच्चों के प्रदर्शन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके अलावा एन.सी.टी.ई. दिल्ली की टीम के अन्य सदस्यों- डॉ. जगमोहन साहू, डॉ. टी. पांडेय,  हिना जोशी,  गोपाल,  राहुल रॉय, ब्लॉक संसाधन केंद्र के अधिकारियों, विद्यालय के प्रधानाध्यापक  प्रकाश सिंह नगदली, शिक्षक- डॉ. मधू साह, डॉ. ज्योत्सना चंदोला, एसएमसी अध्यक्ष माला देवी, डीएलएड प्रशिक्षु व अनेक अभिभावकों तथा निकटवर्ती विद्यालयों के बच्चों व शिक्षकों ने भी विज्ञान मेले का अवलोकन किया। 

इस अवसर पर विज्ञान गतिविधि केंद्र के समन्वयक डॉ. शलेन्द्र धपोला ने बताया कि डायट विगत वर्ष स्थापित विज्ञान गतिविधि केंद्र के माध्यम से जिले के विभिन्न विद्यालयों में सीधे बच्चों के साथ विज्ञान शिक्षण संबंधी नवाचारी प्रयोग संचालित कर रहा है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर इस चार दिवसीय बाल विज्ञान कार्यशाला के संयोजक डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी ने बताया अनुभव आधारित विज्ञान कार्यशालाएं बच्चों को ‘लर्निंग बाय डूइंग’ का मौका देती हैं। कक्षा में विज्ञान से भय खाने वाले बच्चे भी बड़े आत्मविश्वास से खुद को अभिव्यक्त कर पाते हैं। कार्यशाला  में बाल विज्ञान खोजशाला समिति, बेरीनाग के संदर्भदाता विनोद उप्रेती, आशीष कांडपाल और आशुतोष उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।

गरिमामय समारोह - शिक्षा विभाग के दो कर्मयोगियों को भावभीनी विदाई स्वरूप सम्मान

आज उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा विभाग के लिए एक भावनात्मक और यादगार क्षण रहा, जब निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा उत्तराखण्ड अजय कुमार नौडियाल तथा अपर निदेशक विद्यालयी शिक्षा बृजमोहन सिंह रावत सेवा निवृत्त हुए।

इस अवसर पर तीनों निदेशालयों, State Council of Educational Research and Training Uttarakhand (SCERT) एवं SIEMAT Uttarakhand के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरा सभागार भावनाओं, सम्मान और कृतज्ञता से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

अजय कुमार नौडियाल ने अपने कार्यकाल में शिक्षा विभाग के विभिन्न निदेशालयों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कुशल कार्यप्रणाली, प्रशासनिक दक्षता और समन्वयकारी दृष्टिकोण ने विभाग को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने सदैव पारदर्शिता, अनुशासन और परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति को बढ़ावा दिया।

वहीं बृजमोहन सिंह रावत ने बोर्ड परीक्षाओं के सफल संचालन के साथ-साथ अनेक जनपदों में अधिकारी के रूप में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया। उनकी कार्यशैली में दृढ़ता, संवेदनशीलता और टीम भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला। उनके मार्गदर्शन में कई प्रशासनिक एवं शैक्षिक व्यवस्थाएँ सुदृढ़ हुईं।

निदेशक माध्यमिक डॉ मुकुल सती एवं निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल ने दोनों अधिकारियों के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की कामना की। अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी उनके साथ बिताए कार्यकाल को स्मरण करते हुए अनुभव साझा किए। कई क्षण ऐसे आए जब वर्षों की साझी यात्राओं और संघर्षों की यादों ने वातावरण को भावुक कर दिया।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने कहा कि यह विदाई केवल दो अधिकारियों की सेवा समाप्ति नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायी अध्याय का सम्मानपूर्ण समापन है। उनके द्वारा स्थापित कार्य संस्कृति, प्रशासनिक अनुशासन और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता आने वाले वर्षों में विभाग के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।

शिक्षा विभाग परिवार की ओर से दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को स्वस्थ, सुखद और सार्थक जीवन की हार्दिक शुभकामनाएँ। उनका अनुभव और मार्गदर्शन समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

Sunday, February 22, 2026

गोवा शैक्षिक भ्रमण -उत्तराखंड SCERT टीम सीखने–सिखाने की ओर प्रयास

साउथ गोवा। शिक्षा में नवाचार और अनुभवों के आदान–प्रदान की कड़ी में SCERT उत्तराखंड की 9 सदस्यीय टीम ने SCERT गोवा के डॉ. गोविंदराज देसाई के साथ अमोन (साउथ गोवा) स्थित श्री बलराम रेजिडेंशियल हाई स्कूल का शैक्षणिक भ्रमण किया। उद्देश्य स्पष्ट था—विद्यालय की शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी पहल और छात्रों के सर्वांगीण विकास के मॉडल को नज़दीक से समझना।

विद्यालय के संस्थापक एवं चेयरमैन, साथ ही गोवा सरकार के खेल, आदिवासी मामले, कला एवं संस्कृति मंत्री रमेश तवाडकर ने टीम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए; उसमें जीवन कौशल, अनुशासन और सृजनात्मकता का संतुलन ज़रूरी है।

भ्रमण के दौरान टीम ने हेडमिस्ट्रेस, शिक्षकों और विद्यार्थियों से खुलकर बातचीत की। कुछ प्रमुख बिंदु उल्लेखनीय रहे—

  • इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स: छात्रों द्वारा तैयार ऑटोमोटिव कार मॉडल्स और प्रायोगिक गतिविधियों ने टीम को प्रभावित किया। कक्षा सत्रों में बच्चों की तकनीकी समझ और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया।

  • अनुशासन व अधोसंरचना: सुव्यवस्थित परिसर, स्पष्ट कार्यप्रणाली और सकारात्मक स्कूल संस्कृति ने अच्छा प्रभाव छोड़ा।

  • सामुदायिक पहल: ‘तिथि भोजन’, ‘डाइट कोचिंग’ जैसी गतिविधियाँ विद्यालय और समुदाय के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण हैं। 

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी एवं सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानंद ने किया। टीम में डॉ. अजय कुमार चौरसिया (कार्यक्रम समन्वयक), डॉ. राकेश चंद्र गैरोला,  मनोज किशोर बहुगुणा, रवि दर्शन गोपाल, डॉ. रंजन कुमार भट्ट, डॉ. हरेंद्र सिंह अधिकारी और शुबरा सिंघल शामिल रहे। सभी ने विद्यालय की कार्यशैली का बारीकी से अध्ययन कर अपने सुझाव साझा किए।

मंत्री रमेश तवाडकर ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक संवाद संस्थानों को अपनी ताकत और चुनौतियों—दोनों को पहचानने में मदद करते हैं। उत्तराखंड की टीम ने भी विद्यालय के सीखने–सिखाने की प्रक्रिया को प्रेरक बताया और भविष्य में शैक्षिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक सहमति जताई।   यह भ्रमण सिर्फ औपचारिकता नहीं था; यह शिक्षा को बेहतर बनाने की साझा प्रतिबद्धता का संकेत था—जहाँ अनुभव सीमाएँ नहीं मानते और सीखने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ती रहती है।  

Saturday, February 21, 2026

देहरादून में शिक्षा निदेशक पर हमला: शिक्षक संघ की कड़ी चेतावनी, उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं पर भी पड़ सकता है असर

देहरादून – राजधानी स्थित शिक्षा निदेशालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अशासकीय विद्यालयों से जुड़े एक विवाद के दौरान प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर कुछ लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना ने पूरे शिक्षा महकमे को झकझोर कर रख दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमेश शर्मा काउ के साथ अशासकीय विद्यालय प्रबंधन से जुड़े कुछ प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे। बातचीत के दौरान निदेशालय के कार्मिकों और प्रबंधन प्रतिनिधियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते तीखे विवाद में बदल गई।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ लोगों ने कथित रूप से निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हमला कर दिया। इस हमले में उनके चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए ले जाया गया।

शिक्षकों में आक्रोश, सड़क जाम

निदेशक पर हमले की खबर फैलते ही शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में शिक्षक और स्टाफ सड़क पर उतर आए और हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए जाम लगा दिया।

राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं पर भी संकट?

शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि आवश्यकता पड़ने पर उत्तराखंड बोर्ड की आगामी परीक्षाओं को भी बाधित किया जा सकता है। यह बयान राज्य के हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था बल्कि शिक्षा विभाग में संवाद और विवाद निस्तारण की प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सरकारी कार्यालय में इस प्रकार की हिंसक घटना लोकतांत्रिक संवाद की भावना के विपरीत है।

अब सबकी नजर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। यदि समय रहते दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है। 

देहरादून की यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक गरिमा पर भी हमला मानी जा रही है। आवश्यकता है कि कानून अपना काम करे, दोषियों को कड़ी सजा मिले और शिक्षा जगत में किसी भी प्रकार की अराजकता को जगह ने मिलने पाए । 

गुजरात राज्य शैक्षिक अभिदर्शन एवं भ्रमण – अंतिम दिवस

 

GujaratGir Somnath | दिनांक: 21 फरवरी 2026

निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल के निर्देशन में दिनांक 16 फरवरी 2026 से प्रारंभ शैक्षिक अभिदर्शन एवं भ्रमण कार्यक्रम का आज अंतिम दिवस रहा। इस शैक्षिक यात्रा का उद्देश्य केवल संस्थानों का भ्रमण करना नहीं था, बल्कि राज्य की शैक्षिक, प्रशासनिक, पारिस्थितिकी एवं आध्यात्मिक व्यवस्थाओं को समग्र दृष्टि से समझना था। सात दिनों तक विभिन्न संस्थानों, विद्यालयों और नवाचार केंद्रों का अवलोकन करते हुए दल ने शिक्षा प्रबंधन की व्यवहारिक प्रक्रियाओं को निकट से देखा और अनुभव किया।

अंतिम दिवस पर जनपद गिर सोमनाथ की ऊना तहसील के अंतर्गत शामतेर आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 1 एवं 2 का विस्तृत अवलोकन किया गया। आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 1 में कुल 24 पंजीकृत बच्चे थे, जहाँ सहायिका लक्ष्मी देवी बच्चों को पोषण योजना के अंतर्गत सुस्वादु एवं पौष्टिक भोजन प्रदान कर रही थीं। केंद्र में शैक्षिक सामग्री, खेल सामग्री, आकर्षक दीवार चित्र और आधारभूत सुविधाएँ सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध थीं। बच्चों की उपस्थिति, पोषण वितरण और अभिलेख संधारण की प्रक्रिया व्यवस्थित एवं पारदर्शी पाई गई।

आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 2 में कुल 33 बच्चे पंजीकृत थे। यहाँ आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री हर्षा बेन एवं सहायिका  स्मिता बच्चों के साथ खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित अधिगम करा रही थीं। छोटे-छोटे शैक्षिक कोनों में भाषा, संख्या एवं रंग-पहचान जैसी प्रारंभिक अधिगम दक्षताओं का विकास कराया जा रहा था। दोनों केन्द्रों में राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री एवं पोषण व्यवस्था संतोषजनक रही। भ्रमण दल ने संचालन व्यवस्था, स्वास्थ्य परीक्षण, ग्रोथ मॉनिटरिंग, अभिलेख प्रबंधन एवं समुदाय की सहभागिता पर गहन चर्चा की और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के इस सुदृढ़ आधार को सराहा।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल पवित्र ज्योतिर्लिंग Somnath Temple के दर्शन से हुई। सोमनाथ मंदिर भारतीय आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की गौरवगाथा का प्रतीक है। मंदिर के इतिहास, उसके पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी प्राप्त करते हुए दल ने आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सांस्कृतिक चेतना का अनुभव किया। यह अनुभव इस शैक्षिक यात्रा को एक आध्यात्मिक आयाम भी प्रदान करता है। इस समग्र भ्रमण के दौरान Vidya Samiksha Kendra का अवलोकन विशेष रूप से प्रेरणा रहा। यहाँ शिक्षा व्यवस्था की रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली, डिजिटल डैशबोर्ड और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली को निकट से समझा गया। विद्यालय स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक उपस्थिति, अधिगम स्तर और परीक्षा परिणामों का विश्लेषण एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और त्वरित निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया सुदृढ़ होती है।

इसी क्रम में Gir National Park का अवलोकन भी किया गया, जहाँ एशियाई सिंह संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन के प्रयासों की जानकारी प्राप्त हुई। यह अनुभव शिक्षा के साथ-साथ पारिस्थितिकी और सतत विकास की समझ को भी व्यापक बनाता है। इसके अतिरिक्त जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) तथा विभिन्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का अवलोकन करते हुए शिक्षक प्रशिक्षण, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों, ICT प्रयोग एवं विद्यालय प्रबंधन की प्रभावी संरचना को समझा गया।

गुजरात राज्य में आंगनवाड़ी से लेकर 10+2 स्तर तक शिक्षा प्रबंधन की प्रणाली बहु-स्तरीय और डिजिटल निगरानी पर आधारित है। पूर्व-प्राथमिक स्तर पर पोषण ट्रैकिंग और ग्रोथ मॉनिटरिंग की व्यवस्था है, जबकि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर छात्र उपस्थिति, अधिगम मूल्यांकन और विद्यालय विकास योजनाएँ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होती हैं। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर पर बोर्ड परीक्षा परिणामों का विश्लेषण, विषय-वार मॉनिटरिंग, करियर मार्गदर्शन और कौशल विकास कार्यक्रमों का समन्वय सुव्यवस्थित ढंग से किया जाता है। राज्य स्तरीय डैशबोर्ड के माध्यम से ब्लॉक और क्लस्टर स्तर तक निरंतर समीक्षा एवं अनुश्रवण किया जाता है, जिससे गुणवत्ता उन्नयन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।

इस कार्यक्रम में समन्वयक सुनील भट्ट, डॉ. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, विनय थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी, गंगा घुगघत्याल, हिमानी रौतेला, आईटी विभाग से रमेश बडोनी, तथा DIET चंपावत से दिनेश खेतवाल एवं बालक राम मिश्रा ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न स्थलों पर संवाद, अवलोकन और शैक्षिक आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी सदस्यों की सहभागिता ने इस शैक्षिक भ्रमण को अधिक प्रभावी, संवादात्मक एवं परिणामोन्मुख बनाया।

दिनांक 16 फरवरी से प्रारंभ यह शैक्षिक अभिदर्शन यात्रा अकादमिक, प्रशासनिक, सामाजिक, पारिस्थितिकी एवं आध्यात्मिक आयामों की समग्र समझ विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। आंगनवाड़ी केन्द्रों से लेकर विद्या समीक्षा केंद्र तक प्रत्येक स्तर पर सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी एकीकरण और गुणवत्ता सुधार के स्पष्ट प्रयास परिलक्षित हुए। यह भ्रमण नवीन दृष्टिकोण, अनुभव एवं प्रेरणा के साथ आज  संपन्न हो रहा है, जो भविष्य में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं प्रभावी प्रबंधन की दिशा में मार्गदर्शक होगा।