विद्यालय के संस्थापक एवं चेयरमैन, साथ ही गोवा सरकार के खेल, आदिवासी मामले, कला एवं संस्कृति मंत्री रमेश तवाडकर ने टीम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए; उसमें जीवन कौशल, अनुशासन और सृजनात्मकता का संतुलन ज़रूरी है।
भ्रमण के दौरान टीम ने हेडमिस्ट्रेस, शिक्षकों और विद्यार्थियों से खुलकर बातचीत की। कुछ प्रमुख बिंदु उल्लेखनीय रहे—
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इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स: छात्रों द्वारा तैयार ऑटोमोटिव कार मॉडल्स और प्रायोगिक गतिविधियों ने टीम को प्रभावित किया। कक्षा सत्रों में बच्चों की तकनीकी समझ और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया।
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अनुशासन व अधोसंरचना: सुव्यवस्थित परिसर, स्पष्ट कार्यप्रणाली और सकारात्मक स्कूल संस्कृति ने अच्छा प्रभाव छोड़ा।
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सामुदायिक पहल: ‘तिथि भोजन’, ‘डाइट कोचिंग’ जैसी गतिविधियाँ विद्यालय और समुदाय के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण हैं।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी एवं सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानंद ने किया। टीम में डॉ. अजय कुमार चौरसिया (कार्यक्रम समन्वयक), डॉ. राकेश चंद्र गैरोला, मनोज किशोर बहुगुणा, रवि दर्शन गोपाल, डॉ. रंजन कुमार भट्ट, डॉ. हरेंद्र सिंह अधिकारी और शुबरा सिंघल शामिल रहे। सभी ने विद्यालय की कार्यशैली का बारीकी से अध्ययन कर अपने सुझाव साझा किए।
मंत्री रमेश तवाडकर ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक संवाद संस्थानों को अपनी ताकत और चुनौतियों—दोनों को पहचानने में मदद करते हैं। उत्तराखंड की टीम ने भी विद्यालय के सीखने–सिखाने की प्रक्रिया को प्रेरक बताया और भविष्य में शैक्षिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक सहमति जताई। यह भ्रमण सिर्फ औपचारिकता नहीं था; यह शिक्षा को बेहतर बनाने की साझा प्रतिबद्धता का संकेत था—जहाँ अनुभव सीमाएँ नहीं मानते और सीखने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ती रहती है।