Saturday, September 26, 2026

SCERT उत्तराखण्ड को प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award 2026

 

e-Srijan के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण में डिजिटल बदलाव को राष्ट्रीय सम्मान

109वें SKOCH Summit में अकादमिक निदेशक बंदना गर्ब्याल ने ग्रहण किया Gold Award; IT विभाग के Course Coordinator रमेश प्रसाद बडोनी रहे साथ

नई दिल्ली/देहरादून, 26 सितम्बर 2026। उत्तराखण्ड की विद्यालयी शिक्षा के लिए आज का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि लेकर आया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड की अभिनव शिक्षक-प्रशिक्षण पहल “Revolutionizing Teacher Training at Scale: The Success Story of ICT MOOCs via e-Srijan” को 109th SKOCH Summit में प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया।

नई दिल्ली के India Habitat Centre में आयोजित समारोह में SCERT उत्तराखण्ड की ओर से निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल ने Gold Award का प्रमाणपत्र एवं सम्मान-चिह्न ग्रहण किया। इस अवसर पर परियोजना से जुड़े IT Faculty एवं Course Coordinator रमेश प्रसाद बडोनी भी उनके साथ उपस्थित रहे।


109वाँ SKOCH Summit 26 सितम्बर 2026 को “India Economic Forum – Foundations of Inclusive Growth” विषय के साथ आयोजित हुआ। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार Summit सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक India Habitat Centre, New Delhi में आयोजित किया गया और Awards Session 11:30 बजे से 1:00 बजे तक निर्धारित था। summit.skoch.in

109th SKOCH Summit – Official Programme

109वें SKOCH Summit में Inclusive Growth पर राष्ट्रीय विमर्श

109वें SKOCH Summit का केंद्रीय विषय “Foundations of Inclusive Growth” रहा। SKOCH के अनुसार विकसित भारत की यात्रा में केवल अधिक आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा विकास आवश्यक है जो रोजगार सृजित करे, असमानता कम करे, देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचे और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ हो। सम्मेलन में पर्यावरण, जनसंख्या, शिक्षा, कानून, शासन और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। summit.skoch.in

कार्यक्रम की शुरुआत Dr Gursharan Dhanjal, Vice Chairman, SKOCH Group के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद Rohan Kochhar, Founder, SKOCH Law Offices और Sameer Kochhar, Chairman, SKOCH Group ने “Growth First, Foundations Priced Right: A Fiscal Architecture for Inclusive Growth” विषय पर अपने विचार रखे। आधिकारिक कार्यक्रम में इस सत्र के लिए 9:35 से 10:00 बजे का समय निर्धारित था। summit.skoch.in

Sameer Kochhar SKOCH Group के Chairman हैं और governance, social, digital तथा financial inclusion और inclusive growth से जुड़े विषयों पर लंबे समय से कार्य करते रहे हैं। Rohan Kochhar SKOCH Law Offices के Founder हैं और उनका कार्य economics, law, public policy, emerging technologies और ESG के अंतर्संबंध पर केंद्रित है। summit.skoch.in

इसके बाद Sunita Narain, Director General, Centre for Science and Environment (CSE) को SKOCH Challenger Lifetime Achievement Award प्रदान करने का सत्र आयोजित हुआ। summit.skoch.in

Sustainability से Education तक—विशेषज्ञों के विचार

सम्मेलन में Sunita Narain, Director General, Centre for Science and Environment (CSE) ने “Inclusive Growth & Sustainability” पर संबोधित किया। आधिकारिक SKOCH विवरण में उनके कार्य को पर्यावरण और विकास को एक-दूसरे से जोड़ने तथा sustainable और equitable growth पर केंद्रित बताया गया है। summit.skoch.in

इसके बाद Dr Poonam Mutreja, Executive Director, Population Foundation of India, Sanjay Kumar, Former Secretary, Government of India, Dr Pinky Anand, Senior Advocate, Supreme Court of India, तथा Bharat Lal, Former Secretary General & CEO, National Human Rights Commission सहित विभिन्न विशेषज्ञों की सहभागिता रही। summit.skoch.in

विशेष रूप से पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव Sanjay Kumar का शिक्षा क्षेत्र से गहरा संबंध रहा है। SKOCH के आधिकारिक परिचय के अनुसार Department of School Education & Literacy, Ministry of Education में Secretary रहते हुए उनका कार्य NEP 2020, foundational learning, early childhood education, teacher capacity, digital education और school-system strengthening जैसे क्षेत्रों से जुड़ा रहा। summit.skoch.in

इस प्रकार SCERT उत्तराखण्ड को मिला Gold Award ऐसे मंच पर प्रदान किया गया, जहाँ inclusive growth, education, sustainability, governance और institutional transformation पर राष्ट्रीय स्तर का विमर्श हो रहा था।

कई चरणों की मूल्यांकन यात्रा के बाद मिला SKOCH Gold Award

SCERT उत्तराखण्ड के लिए Gold Award तक पहुँचना एक चरण की प्रक्रिया नहीं थी। परियोजना को विभिन्न स्तरों पर प्रस्तुतीकरण, मूल्यांकन, public/online voting, jury assessment और interaction की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

प्रारंभिक चरण में SCERT उत्तराखण्ड द्वारा अपने ICT MOOCs/e-Srijan विद्या समीक्षा केंद्र पर संचालित , को jury के सामने प्रस्तुत किया गया। इसके बाद online voting और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर परियोजना अगले चरण के लिए shortlisted हुई।

परियोजना ने आगे बढ़ते हुए Semi-Final Round में Top-3 में स्थान बनाया। इसके बाद SKOCH Group द्वारा निर्धारित दस्तावेजी एवं अन्य औपचारिकताओं को पूरा किया गया तथा jury के साथ one-to-one interaction के माध्यम से परियोजना के implementation, innovation, scalability और impact से जुड़े पहलुओं को प्रस्तुत किया गया।

इन विभिन्न चरणों से गुजरने और Final Award Round के लिए चयनित होने के बाद 26 सितम्बर 2026 को 109th SKOCH Summit में SCERT Uttarakhand की इस पहल को SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया।


आखिर क्या है SCERT उत्तराखण्ड का पुरस्कार विजेता e-Srijan मॉडल?

उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में हजारों शिक्षकों को एक साथ गुणवत्तापूर्ण Continuous Professional Development उपलब्ध कराना आसान नहीं है। भौगोलिक दूरी, सीमित ICT infrastructure, प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को कार्यस्थल से बाहर भेजने की आवश्यकता तथा पारंपरिक face-to-face training की सीमित scalability प्रमुख चुनौतियाँ थीं। SCERT की SKOCH प्रस्तुति में इन्हीं समस्याओं को low ICT competency, limited reach of traditional training, scalable/flexible CPD की आवश्यकता और remote regions में digital divide के रूप में चिह्नित किया गया। 

इन चुनौतियों के समाधान के लिए SCERT के IT विभाग ने विद्या समीक्षा केंद्र चैट बॉट e-Srijan आधारित ICT MOOCs मॉडल विकसित किया।

इसकी विशेषता थी कि प्रशिक्षण को महंगे और जटिल technological infrastructure पर निर्भर रखने के बजाय mobile-friendly, low-cost और scalable बनाया गया। इसमें e-Srijan chatbot, AI-enabled interaction और real-time dashboard monitoring जैसी सुविधाओं का प्रयोग किया गया। 

कार्यान्वयन में विशेषज्ञों द्वारा content development, district-level coordination और VSK dashboard के माध्यम से real-time tracking को जोड़ा गया। 

लगभग 49 हजार शिक्षक—47 हजार से अधिक प्रमाणित

इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता केवल technology नहीं, बल्कि technology at scale रही।

SCERT की SKOCH प्रस्तुति के अनुसार MOOC 2.0 में 49,200 से अधिक शिक्षकों का registration, 99.65% course start, 95% से अधिक completion और लगभग 97% school coverage दर्ज की गई। 

परियोजना के प्रमुख outcomes में 47,000 से अधिक certified teachers, शिक्षकों के ICT एवं AI skills में सुधार, technology-enabled lesson planning एवं assessment, interactive classrooms, Hackathon में बढ़ती भागीदारी और DIKSHA तथा PM e-Vidya के लिए digital content creation शामिल रहे। 

यह उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह केवल online course उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही—registration से certification और training से classroom application तक पूरी प्रक्रिया को monitoring और support से जोड़ने का प्रयास किया गया।

AI और ICT से तैयार हो रहे Future-Ready Teachers

इस परियोजना की मूल सोच यह रही कि भविष्य के विद्यार्थियों को तैयार करने के लिए सबसे पहले भविष्य के लिए तैयार शिक्षक आवश्यक हैं।

नई शिक्षा नीति NEP 2020 के अनुरूप technology integration, digital pedagogy, competency development, innovative teaching-learning और continuous professional development को व्यवहार में उतारने के लिए MOOCs को एक बड़े माध्यम के रूप में विकसित किया गया।

इस मॉडल ने यह दिखाने का प्रयास किया कि तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि teacher empowerment का माध्यम बन सकती है।

जब AI, ICT, digital content, online assessment और real-time analytics को शिक्षक की pedagogical understanding से जोड़ा जाता है, तब technology केवल एक device या application नहीं रहती—वह educational transformation का enabler बन जाती है।

SKOCH से पहले Geneva में भी Global Top-6 Recognition

इस उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संदर्भ भी है।

SCERT Uttarakhand की संबंधित AI एवं ICT-enabled teacher-training initiative “Building Future-Ready Teachers through AI and ICT Enabled MOOCs” को जुलाई 2026 में Geneva में आयोजित AI for Education Awards 2026 की Teacher Training Award category में Global Top-6 Finalist के रूप में मान्यता मिली थी। SCERT की प्रकाशित जानकारी में 47 देशों, छह महाद्वीपों और 38,000 projects का उल्लेख किया गया है। scertuk.blogspot.com

स्वतंत्र रूप से, AI for Education Awards के आधिकारिक परिणाम यह पुष्टि करते हैं कि Global Competition में 47 देशों और छह महाद्वीपों से eligible projects आए और international jury ने तीन categories में 3 Laureates और 15 Finalists चुने। LinkedIn

यह प्रतियोगिता d-teach online school द्वारा आयोजित थी और Geneva में AI for Good Global Summit के दौरान इसका Global Competition सम्पन्न हुआ। UNESCO IITE ने भी AI4EDU26 के लिए आधिकारिक call प्रकाशित किया था और इसे K-12 education में responsible, human-centred AI practices को पहचान देने वाली global initiative बताया था। UNESCO IITE

इस प्रकार Global Top-6 Finalist recognition और अब SKOCH Gold Award—दोनों उपलब्धियाँ SCERT उत्तराखण्ड के technology-enabled teacher professional development के प्रयासों को अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर मिली पहचान को दर्शाती हैं।

विद्यालय शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दी बधाई

SCERT उत्तराखण्ड को प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award मिलने परउत्तराखंड के  शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह , सचिव, विद्यालयी शिक्षा, ज्योति यादव तथा महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, आकांक्षा कोंडे ने SCERT की पूरी टीम, IT विभाग , विद्या समीक्षा केंद्र तथा प्रदेश के शिक्षक समुदाय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को शिक्षक क्षमता संवर्धन में तकनीक के प्रभावी एवं नवाचारी उपयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि e-Srijan के माध्यम से विकसित ICT एवं AI आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉडल जैसी Best Practices को सतत एवं sustainable स्वरूप में आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि शिक्षकों का Continuous Professional Development नियमित रूप से जारी रहे। इस प्रकार के ऑनलाइन पाठ्यक्रम शिक्षकों को केवल डिजिटल एवं AI तकनीकों से परिचित नहीं करा रहे हैं, बल्कि उन्हें इनका कक्षा शिक्षण, lesson planning, assessment, digital content creation और विद्यार्थियों की learning को बेहतर बनाने में व्यावहारिक उपयोग करने के लिए भी सक्षम बना रहे हैं। SCERT की परियोजना में भी ICT एवं AI skills, technology-enabled lesson planning एवं assessment तथा interactive classrooms को प्रमुख outcomes के रूप में दर्ज किया गया है। SCERT Uttarakhand Presentation-… इस मॉडल को संस्थागत रूप से निरंतर आगे बढ़ाने का उद्देश्य NEP 2020 की भावना के अनुरूप Future-Ready Teachers के माध्यम से Future-Ready Students तैयार करना तथा राज्य में technology-enabled education को स्थायी रूप से मजबूत करना है।

बंदना गर्ब्याल ने शिक्षकों और विद्यार्थियों को समर्पित किया सम्मान

Gold Award ग्रहण करते हुए निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल ने इसे SCERT के IT विभाग, VSK, DIETs, जनपदीय टीमों, तकनीकी सहयोगियों तथा प्रदेश के शिक्षक समुदाय के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।

इस अवसर पर संदेश दिया गया कि आज शिक्षा जगत को तकनीक को केवल एक उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा में परिवर्तन के सहयोगी के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।

विशेष रूप से शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े professionals से आह्वान किया गया कि वे Technology, Innovation और Human Creativity के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करें, ताकि वर्तमान चुनौतियों का समाधान करने के साथ विद्यार्थियों को उस भविष्य के लिए भी तैयार किया जा सके जिसमें AI और digital technologies की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

आगे की राह: MOOC 3.0 से DIKSHA और Mission Karmayogi तक

SKOCH Gold Award इस यात्रा का अंतिम पड़ाव नहीं है। SCERT की future roadmap में MOOC 3.0, AI-based learning, DIKSHA integration, Mission Karmayogi-iGOT integration तथा इस मॉडल को nationally replicable बनाने की दिशा शामिल है। 

https://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-scert-uttarakhand-wins-skoch-gold-award-for-teacher-training-40386133.html

109th SKOCH Summit एवं पूरा आधिकारिक कार्यक्रम देखें

Friday, September 25, 2026

Hackathon 2.0 से Global AI Hackathon तक: विवेकानंद इंटर कॉलेज के मयंक की नवाचार यात्रा

दक्षिण अफ्रीका में आयोजित Global AI Hackathon में 23वीं Global Rank, SCERT Uttarakhand के Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 से मिली थी नवाचार को नई दिशा

अल्मोड़ा/देहरादून। उत्तराखण्ड के एक स्कूली विद्यार्थी की नवाचार यात्रा अब वैश्विक मंच तक पहुँच चुकी है। विवेकानंद इंटर कॉलेज, रानीधारा, अल्मोड़ा के कक्षा 12 के छात्र मयंक बिष्ट ने दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित प्रतिष्ठित UPSUMMIT Global AI Hackathon 2026 के High School Track में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व स्तर पर 23वीं रैंक हासिल की।

समाचार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 19 से 22 जून के बीच आयोजित इस प्रतियोगिता में 85 से अधिक देशों की 25,000 से ज्यादा टीमों ने भाग लिया। मयंक ने प्रतियोगिता में 100 में से 98 अंक प्राप्त करते हुए Global Rank 23 हासिल की। उन्होंने Applied Solutions के साथ Systems Engineering Interview भी सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे उन्हें Practical Tech Experience प्राप्त हुआ।

इस वैश्विक उपलब्धि की मजबूत नींव बना Hackathon 2.0

मयंक की इस उपलब्धि को केवल एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की सफलता के रूप में नहीं, बल्कि विद्यालय स्तर पर नवाचार को पहचानने, प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ाने की एक सतत यात्रा के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

इस यात्रा में SCERT Uttarakhand द्वारा आयोजित Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मयंक इससे पहले Hackathon 2.0 में प्रतिभाग करते हुए 2,800 से अधिक प्रतिभागियों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं। इस मंच ने उनके विचारों और तकनीकी प्रतिभा को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने के साथ उन्हें अपने innovation को आगे विकसित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया।

यही कारण है कि Hackathon 2.0 को मयंक की आगे की उपलब्धियों के लिए एक महत्वपूर्ण launchpad के रूप में देखा जा सकता है—जहाँ विद्यालय के एक विद्यार्थी के innovative idea को पहचान, मंच और आगे बढ़ने का अवसर मिला।

AI, IoT और Robotics में आगे बढ़ता नवाचार

मयंक का लक्ष्य Microelectronics, Artificial Intelligence (AI), Internet of Things (IoT) और Robotics जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए सामाजिक एवं ग्रामीण समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।

विद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता दीपक सिंह मेहता के मार्गदर्शन में वे विज्ञान, AI और Robotics के क्षेत्र में लगातार प्रयोग एवं नवाचार कर रहे हैं।

उनकी यात्रा राज्य स्तर तक सीमित नहीं रही। समाचार के अनुसार मयंक ने Indian Institute of Science (IISc), Bengaluru में आयोजित ArtPark Robotics–AI Edition के National Round में भी उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया है।

स्थानीय समस्या से Global Platform तक

मयंक की उपलब्धि Innovate Uttarakhand जैसी पहल के मूल उद्देश्य को भी रेखांकित करती है—विद्यालयों के विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रखते हुए उनमें problem solving, innovation, design thinking, AI, coding और entrepreneurship की सोच विकसित करना।

एक विद्यार्थी का स्कूल से अपने विचार पर काम शुरू करना, Hackathon 2.0 में राज्य स्तर पर विजेता बनना, राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रोजेक्ट को प्रस्तुत करना और फिर Global AI Hackathon में विश्व की हजारों टीमों के बीच स्थान बनाना यह दर्शाता है कि सही mentoring, institutional support और innovation ecosystem मिलने पर उत्तराखण्ड के विद्यार्थी वैश्विक मंच तक पहुँच सकते हैं।

Hackathon से Startup और Global Innovation की ओर

मयंक की यात्रा अब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि Hackathon 2.0 में मिली शुरुआती पहचान के बाद वे अपने विचारों को लगातार नए मंचों पर ले जा रहे हैं। यह उपलब्धि दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी संदेश है कि Hackathon केवल पुरस्कार जीतने की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि किसी विचार को prototype, project और आगे चलकर संभावित startup अथवा वास्तविक समाधान में बदलने की शुरुआत हो सकता है।

SCERT Uttarakhand की Innovate Uttarakhand Hackathon पहल इसी सोच को मजबूत करती है—विद्यालयों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें विशेषज्ञों एवं mentors से जोड़ना और उनके innovative ideas को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना।

मयंक की Global Rank 23 की उपलब्धि इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि उत्तराखण्ड के विद्यालय से शुरू हुआ एक innovation, सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास के साथ राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक अपनी पहचान बना सकता है।

SCERT Uttarakhand एवं Innovate Uttarakhand परिवार की ओर से मयंक बिष्ट, उनके मार्गदर्शक शिक्षक, विद्यालय एवं परिवार को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।

पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफल समापन

कौशल बोध के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा में ‘जानने से करने’ की ओर बढ़ते कदम

देहरादून। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), NCERT, भोपाल के सहयोग से “Capacity Building of Teachers for Implementation of Vocational Education at the Middle Stage as per NEP 2020 and NCF-SE 2023” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 35 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 की भावना के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को अनुभवात्मक, गतिविधि एवं कार्य-आधारित अधिगम से जोड़ते हुए शिक्षकों को ‘कौशल बोध’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयार करना था।

‘Knowing’ से ‘Doing’ की ओर

पाँच दिवसीय प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा केवल जानने (Knowing) तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को करने (Doing), अनुभव करने (Experiencing), समस्या पहचानने (Problem Identification), समाधान खोजने (Problem Solving) और सृजन करने (Creating) के अवसर भी मिले।

प्रतिभागियों ने Learning by Doing, Project-Based Learning, स्थानीय संसाधनों एवं समुदाय के उपयोग तथा कार्य-आधारित गतिविधियों को हैंड्स-ऑन अनुभवों के माध्यम से समझा। विद्यार्थियों के मूल्यांकन में केवल लिखित परीक्षा के बजाय उनके कार्य, सहभागिता, प्रक्रिया, कौशल और तैयार उत्पाद को भी महत्व देने पर चर्चा की गई।

उद्यमशील मानसिकता और 21वीं सदी के कौशल

कार्यशाला में Entrepreneurial Mindset पर विशेष गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इनमें समस्या एवं आवश्यकता की पहचान, नवाचार, उत्पाद अथवा सेवा की उपयोगिता, USP (Unique Selling Proposition), ग्राहक की आवश्यकता, Seller–Buyer संवाद, Communication, Presentation और Branding जैसी अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझाया गया।

प्रतिभागियों ने स्वयं Seller और Customer की भूमिका निभाकर अनुभव किया कि किसी विचार को उपयोगी उत्पाद या सेवा में बदलने के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ Communication, Collaboration, Critical Thinking, Creativity और Problem Solving जैसे कौशल भी आवश्यक हैं।

Bagless Days और Hub & Spoke Model पर विशेष चर्चा

अंतिम दिवस पर प्रो. डॉ. आशीष सोनी ने कौशल बोध के अंतर्गत व्यावसायिक विषयों को Core Curriculum से जोड़ने के साथ Bagless Days तथा Hub & Spoke Model के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।

विशेष रूप से 10 Bagless Days को केवल विद्यालय से बाहर भ्रमण तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों को स्थानीय व्यवसायों, कारीगरों, कृषि, सेवा क्षेत्र और समुदाय के वास्तविक कार्य-जगत से परिचित कराने के अवसर के रूप में विकसित करने पर बल दिया गया।

विद्यालयों के लिए तैयार किए Action Plans

पाँच दिनों के अधिगम को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने के लिए प्रतिभागियों ने अपने-अपने विद्यालयों में कौशल बोध एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्रियान्वयन हेतु Action Plans प्रस्तुत किए। साथ ही Post-test एवं Feedback के माध्यम से प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन किया गया।

प्रतिभागियों ने Hands-on Activities, Exposure Visit, Learning by Doing तथा उद्यमशील मानसिकता से जुड़ी गतिविधियों को विशेष रूप से उपयोगी बताया।

प्रशिक्षण का लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचे — पद्मेंद्र सकलानी

समापन सत्र में अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड  पद्मेंद्र सकलानी ने प्रतिभागियों से कहा कि पाँच दिनों में प्राप्त अनुभवों को प्रशिक्षण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें विद्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुँचाया जाए। बच्चों को अपने हाथों से कार्य करने, स्थानीय कौशलों को समझने, वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने तथा नवाचार करने के अधिकाधिक अवसर दिए जाएँ।

इस अवसर पर डॉ. के. एन. बिजल्वान सहित SCERT के अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वयन के लिए कार्यक्रम समन्वयक  सुनील भट्ट के प्रयासों की सराहना की गई। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

ज्ञान और कौशल का समन्वय ही भविष्य की शिक्षा

पाँच दिवसीय कार्यशाला ने इस विचार को और मजबूत किया कि भविष्य की शिक्षा में ज्ञान और कौशल अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। विद्यार्थी गणित, विज्ञान और भाषा का ज्ञान प्राप्त करे, लेकिन साथ ही उस ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने, समाधान खोजने, टीम के साथ कार्य करने और कुछ नया सृजित करने में भी कर सके।