Monday, September 21, 2026

मध्य स्तर (middle stage)पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला

 

SCERT उत्तराखण्ड | शिक्षक क्षमता संवर्धन | व्यावसायिक शिक्षा

मध्य स्तर (Middle Stage) पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ

NEP-2020 और NCF-SE 2023 के अनुरूप कौशल, कार्यानुभव, स्थानीय व्यवसाय और करियर मार्गदर्शन को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

देहरादून, 21 सितम्बर 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 (NCF-SE 2023) के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु “Capacity Building of Teachers for Implementation of Vocational Education at the Middle Stage as per NEP-2020 and NCF-SE 2023” विषयक पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।

कार्यशाला की अध्यक्षता निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल द्वारा की गई। राज्य के विभिन्न जनपदों से चयनित 35 शिक्षक इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे हैं।

पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर चर्चा।

कार्यशाला की रूपरेखा और विशेषज्ञ मार्गदर्शन

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम समन्वयक सुनील भट्ट ने कार्यशाला की रूपरेखा एवं उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

उन्होंने मुख्य संदर्भदाता विशेषज्ञों पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), NCERT, भोपाल के प्रोफेसर डॉ. आशीष सोनी तथा प्रोफेसर डॉ. रवि आहूजा का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए व्यावसायिक शिक्षा एवं शिक्षक क्षमता संवर्धन के क्षेत्र में उनके अनुभव और योगदान से प्रतिभागियों को परिचित कराया।

ज्ञान के साथ कौशल और कार्यानुभव पर विशेष बल

अपने अध्यक्षीय संबोधन में निदेशक  बंदना गर्ब्याल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने विद्यालयी शिक्षा में ज्ञान के साथ-साथ कौशल, कार्यानुभव तथा व्यावसायिक दक्षताओं को विशेष महत्व दिया है। इस मौके पर उद्यम लर्निंग फाउंडेशन से रोहित गुप्ता एवं अरविंद बिष्ट भी अपना विशेष योगदान दे रहे हैं

उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों से पाँच दिवसीय कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता करते हुए प्राप्त अनुभवों और सीख को विद्यालय स्तर तक प्रभावी रूप से पहुँचाने का आह्वान किया तथा कार्यशाला के सफल संचालन के लिए सभी को शुभकामनाएँ दीं।


प्रोफेसर आशीष सोनी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उनमें  उद्यमिता और रोजगारपरक शिक्षा , निहित कौशल को पहचानने, विकसित करने तथा उसे जीवन और कार्य-जगत से जोड़ने के अवसर उपलब्ध कराना भी है।

उद्घाटन सत्र में उपनिदेशक  विनोद सिंह मटूड़ा तथा सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।

वक्ताओं ने व्यावसायिक शिक्षा को विद्यार्थियों के जीवन, स्थानीय परिवेश, कार्य-जगत तथा भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।




विशेषज्ञों, अधिकारियों एवं प्रतिभागी शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता के साथ कार्यशाला का उद्घाटन सत्र।

“एक ऐसा कौशल, जिस पर मुझे गर्व है” — परिचय का अभिनव तरीका

उद्घाटन सत्र का एक विशेष आकर्षण प्रतिभागियों का परिचय रहा। शिक्षकों ने पारंपरिक परिचय के स्थान पर अपने परिचय के साथ “एक ऐसा कौशल, जिस पर मुझे गर्व है” साझा किया।

किसी ने संवाद कौशल, किसी ने रचनात्मकता, कला, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व, समस्या-समाधान अथवा अन्य जीवनोपयोगी कौशल को अपनी विशेषता के रूप में प्रस्तुत किया।

इस गतिविधि ने कार्यशाला के प्रारंभ से ही एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई विशिष्ट कौशल निहित होता है और शिक्षा का दायित्व उस कौशल को पहचानने, विकसित करने तथा उसके लिए सार्थक अवसर प्रदान करने का है।


पाँच दिनों में किन विषयों पर होगा कार्य?

पाँच दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 के आलोक में व्यावसायिक शिक्षा की अवधारणा, कौशल बोध, मध्य स्तर पर विद्यालयी क्रियान्वयन, गतिविधि एवं अनुभव आधारित शिक्षण, बैगलेस दिवस, स्थानीय कौशल एवं व्यवसायों से विद्यार्थियों के जुड़ाव तथा करियर मार्गदर्शन जैसे विषयों पर विस्तार से कार्य किया जाएगा।

स्थानीयता से सीखने की दिशा:

कार्यशाला में व्यावसायिक शिक्षा को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को स्थानीय व्यवसायों, पारंपरिक कौशलों और वास्तविक कार्य-अनुभव से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।

राज्य के विभिन्न जनपदों से चयनित शिक्षक पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे हैं।

स्थानीय कौशल, उद्यमिता और रोजगारपरक शिक्षा

कार्यशाला की विशेषता यह है कि व्यावसायिक शिक्षा को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को स्थानीय व्यवसायों एवं कौशलों से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

इसके अंतर्गत स्थानीय व्यावसायिक संदर्भ व्यक्तियों एवं कारीगरों के माध्यम से स्थानीय व्यवसायों और पारंपरिक कौशलों की जानकारी एवं प्रदर्शन कराया जाएगा।

रिंगाल/बाँस आधारित हस्तशिल्प जैसे स्थानीय कौशलों के माध्यम से शिक्षक यह समझेंगे कि विद्यालयी शिक्षा को स्थानीय ज्ञान, कार्य-अनुभव, उद्यमिता और रोजगारपरक कौशलों से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है।

संदर्भ शिक्षक एवं संसाधन व्यक्ति के रूप में तैयार होंगे प्रतिभागी

कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को केवल व्यावसायिक शिक्षा की अवधारणा से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे संदर्भ शिक्षक/संसाधन व्यक्ति के रूप में तैयार करना है जो अपने विद्यालयों एवं जनपदों में व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा सकें।


उद्घाटन सत्र में उत्साहपूर्ण सहभागिता, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रतिभागी शिक्षकों की सक्रियता के साथ पाँच दिवसीय कार्यशाला का सार्थक एवं उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ।

यह प्रशिक्षण मध्य स्तर के विद्यार्थियों को कौशल, स्थानीय ज्ञान, कार्यानुभव, उद्यमिता और भविष्य की करियर संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में शिक्षकों की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

Friday, September 18, 2026

मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन–2026: 200k+ विद्यार्थियों की आवाज़ से निकला ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का विजन, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 140 चयनित विद्यार्थियों को किया सम्मानित

 

देहरादून, 18 सितम्बर 2026। उत्तराखण्ड के युवाओं की कल्पनाशीलता, नवाचार और राज्य के भविष्य को लेकर उनकी सोच को शासन एवं नीति-निर्माण से जोड़ने की दिशा में ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम का राज्य स्तरीय समारोह मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयनित 140 छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया, उनके विचार सुने और उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम की आधिकारिक रूपरेखा के अनुसार यह राज्यव्यापी पहल “मेरे सपनों का उत्तराखण्ड : एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण” विषय पर केंद्रित रही।

इस अभियान को प्रदेश के विद्यार्थियों से अभूतपूर्व सहभागिता मिली। कुल 200k+ विद्यार्थियों ने उत्तराखण्ड के भविष्य को लेकर अपने निबंध, विचार और सुझाव प्रस्तुत किए। इनमें से अंतिम चरण के लिए 140 छात्र-छात्राओं का चयन किया गया। विद्यार्थियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, पर्यावरण, पलायन, रोजगार, सड़क एवं आधारभूत संरचना, तकनीक, सुशासन, स्वरोजगार, स्टार्टअप तथा गांवों में रोजगार सृजन जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि उत्तराखण्ड की युवा पीढ़ी अपने राज्य के भविष्य को लेकर सजग है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से प्राप्त उपयोगी और व्यावहारिक सुझावों को सरकारी योजनाओं तथा नीति-निर्धारण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विद्यालयी शिक्षा विभाग की पूरी टीम को भी अभियान और निबंध प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को AI, रोबोटिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी तथा आधुनिक मांग-आधारित कौशलों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, निरंतर मेहनत करने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित किया तथा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का स्मरण करते हुए युवाओं को उत्तराखण्ड की बड़ी शक्ति बताया।

कक्षा 10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को टैब उपलब्ध कराने के लिए उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में कदम बताया।

‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ के अलग-अलग उप-विषयों में उत्कृष्ट विचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सम्मानित किया। इनमें शिक्षा एवं युवा अवसर में मयूह भंडारी और रवीना, पर्यावरण, वन एवं आपदा प्रतिरोधक क्षमता में शेरोन कपूर, स्वास्थ्य एवं जन सेवाएं में सतीश कुमार, पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन एवं रोजगार में माही बलाई, सड़क, संपर्क एवं आधारभूत संरचना में श्रितिका रावत, प्रौद्योगिकी एवं सुशासन में प्रियांशु सजवाण, पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था में दृष्टि चौहान तथा महिला एवं बाल कल्याण में अनुष्का नेगी को सम्मान मिला।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष अनेक व्यावहारिक सुझाव रखे। उत्तरकाशी के अनमोल परमार ने स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी ग्राम स्तर तक पहुंचाने और विद्यालयों में करियर काउंसलिंग के साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का सुझाव दिया। अन्य विद्यार्थियों ने वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों को संरक्षित करने के लिए ‘नॉलेज बैंक’, औषधीय वनस्पतियों के माध्यम से राज्य की वैश्विक पहचान तथा पर्यटन की अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ प्रथाओं को उत्तराखण्ड की परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने जैसे विचार रखे।

शिक्षकों, चयनकर्ताओं, मूल्यांकनकर्ताओं और आयोजन से जुड़े कार्मिकों का भी सम्मान

कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धि के पीछे कार्य करने वाले शिक्षकों, चयनकर्ताओं, मूल्यांकनकर्ताओं, जिला स्तरीय समन्वयकों और आयोजन से जुड़े कार्मिकों के योगदान को भी मान्यता दी गई। संलग्न आधिकारिक सूची में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से एस्कॉर्ट शिक्षकों, SCERT/DIET प्रतिनिधियों, शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना कार्यालय के कार्मिकों और तकनीकी सदस्यों को समारोह में प्रतिभाग हेतु सूचीबद्ध किया गया है।इस प्रकार यह समारोह केवल चयनित विद्यार्थियों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को प्रेरित और मार्गदर्शित करने वाली पूरी शैक्षिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के सामूहिक प्रयास को सामने लाने का अवसर भी बना।

सूची के अनुसार कार्यक्रम के लिए शासन एवं शिक्षा विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारियों को सूचीबद्ध किया गया था। इनमें आर.के. सुधांशु, प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण; धीराज गर्ब्याल, सचिव, पर्यटन/ग्राम्य विकास; डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव, लोक निर्माण/सूचना प्रौद्योगिकी; विनय शंकर पाण्डेय, सचिव, स्वास्थ्य; चन्द्रेश कुमार यादव, सचिव, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास; ज्योति यादव, सचिव, विद्यालयी शिक्षा; नमामि बंसल, अपर सचिव, विद्यालयी शिक्षा; आकांक्षा कोण्डे, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा; वन्दना गर्ब्याल, निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण; विनोद प्रसाद सिमल्टी, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा; तथा कुंवर सिंह रावत, निदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।

आज के कार्यक्रम की प्रकाशित रिपोर्ट में भी सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, चन्द्रेश कुमार, ज्योति यादव, धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव नमामि बंसल तथा महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोण्डे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति दर्ज की गई है।

140 छात्र-छात्राओं की सूची

संलग्न आधिकारिक सूची में 140 चयनित विद्यार्थियों के नाम जनपदवार दिए गए हैं।

अल्मोड़ा: Shivansh Arya, Aman, Mayuh Bhandari, Sakshi Gururuani, Golu Tamta, Lakshit Kandpal, Manish Singh Rawat, Bharat Singh, Pihu Bora, Uma, Aman Kholiya और Neetu।

बागेश्वर: Priyanshi Khetwal, Nikita Gariya, Jaya Nagarkoti और Anushka Negi।

चमोली: Rakhi, Yamuna, Aryan Farswan, Sakshi, Riya और Anushka Bhandari।

चम्पावत: Mayank Singh Samant, Hema Bhatt, Golu Kumar और Mohit Verma।

देहरादून: Divija Rawat, Sharon Kapoor, Akshita Bhatt, Mahi Balai, Aditya, Kashish, Nitesh, Aaryendra Singh, Sonam, Vidya, Ishu Verma, Ilma Parveen, Dhaani Vashisht, Annu Sharma, Prachi Rana, Khushi Patel, Prachi, Chungila Bhutia, Shorya Aswal और Pushti Pathak।

हरिद्वार: Sakshi Kumari, Ritika, Kritika Saini, Priya, Gurdev Gurjar, Anuradha Bisht, Naina Dhiman, Lalit Panwar, Iltisha, Shagun Chauhan, Lovepreet Kaur, Bhavya Agarwal, Aatika Hussain, Mahi Thakur, Aayan, Nidhika Rawat, Ayush Tripathi, Prneet Khodnal, Sagul, Priyanshi, Aamna और Anshika Kumari।

नैनीताल: Upasana Bhatt, Vinamrata Joshi, Pankaj Palariya, Mayank Bangari, Deepak Joshi, Pratigya Dangwal, Naman Singh Martolia, Arun, Vaishnavi Mishra, Jayaditya Singh Rathore, Vivek Pandey और Simran।

पौड़ी गढ़वाल: Akansha, Anushka, Divya, Aditya Bhardwaj, Seetal, Sakshi Pokhriyal, Srishti Maindola, Yashika, Shritika Rawat, Sonakshi, Shreem Agarwal और Anushka Negi।

पिथौरागढ़: Bhawna, Manisha Joshi, Priyanka Bisht, Komal Bhatt, Muskan Devlal, Ojasvi, Aayush Prasad और Vishal Singh।

रुद्रप्रयाग: Prince Singh, Koyal, Raveena और Anamika।

टिहरी गढ़वाल: Tamanna, Himanshi Thakur, Akshita Kothari, Pratiksha Semwal, Kanika Semwal, Shashwat Bhatt, Sarika, Gunjan Mahar, Prithvi Singh Panwar, Anish Singh, Priyanshu Sajwan और Ayush Rawat।

ऊधम सिंह नगर: Pallavi Sarkar, Vishakha, Sanjana Goldar, Anushka Dangi, Harman Singh, Aditya Chauhan, Shagun Rani, Ojasvi Grover, Tanishi Arya, Aditya Sharma, Tanmay Gupta, Yamini Bhatt, Jyotsana Arya, Riya, Lokesh Mourya, Drishti Chauhan, Pratibha और Anushka।

उत्तरकाशी: Ruchi, Lakshmi, Satish Kumar, Kanchan, Ansh Chand Ramola और Anmol Parmar।

आधिकारिक सूची में सभी जनपदों से आए एस्कॉर्ट शिक्षकों का भी विवरण है। इनमें देहरादून से डॉ. ताजवर सिंह पंडियार एवं सुषमा देवी, चमोली से एकता नेगी एवं कुंवर सिंह रावत, टिहरी से डॉ. संध्या पंवार एवं आदित्य नारायण सिंह, चम्पावत से भुवन सिंह अधिकारी एवं रेखा टम्टा, पिथौरागढ़ से किरण बोरा एवं नरेश जोशी, बागेश्वर से बलवंत सिंह टाकुली एवं सुमन डिमरी, उत्तरकाशी से नितिन एवं संतोष पंवार, पौड़ी से पल्लवी शर्मा एवं गौरी कंडारी, हरिद्वार से पवन कुमार एवं जिनीका यादव, नैनीताल से के.के. फुलेरा एवं डॉ. बसंती रौतेला, ऊधम सिंह नगर से निर्मल कुमार नियोलिया एवं सुमनलता, अल्मोड़ा से प्रतिभा चौहान एवं अंकित मिश्रा तथा रुद्रप्रयाग से रमेश चन्द्र सेमवाल एवं ऐश्वर्या नवानी सूचीबद्ध हैं।

‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ ने विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर नहीं दिया, बल्कि उन्हें राज्य के विकास पर सोचने, समाधान सुझाने और सीधे शासन के सामने अपनी बात रखने का मंच प्रदान किया। कार्यक्रम की मूल प्रक्रिया में विद्यार्थियों से अधिकतम 600 शब्दों में अपने सपनों के उत्तराखण्ड की परिकल्पना प्रस्तुत करने और बहु-स्तरीय मूल्यांकन के बाद चयनित विद्यार्थियों को 18 सितम्बर के राज्य स्तरीय आयोजन में आमंत्रित करने की व्यवस्था थी।

मुख्यमंत्री द्वारा विद्यार्थियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद, उत्कृष्ट विचारों का सम्मान, शिक्षकों एवं मूल्यांकन से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना तथा शिक्षा विभाग की पूरी टीम को बधाई इस पहल को एक व्यापक शैक्षिक संवाद का स्वरूप देती है। प्रदेश के 2.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि उत्तराखण्ड की नई पीढ़ी शिक्षा के साथ-साथ अपने राज्य की सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और तकनीकी चुनौतियों पर भी विचार कर रही है।

स्रोत: संलग्न “Total List dated 18.09.2026 – मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन पुरस्कार वितरण समारोह”, कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट तथा 18 सितम्बर 2026 को प्रकाशित कार्यक्रम विवरण।

Wednesday, September 16, 2026

Director Academic Bandana Garbyal Launched-Logo Making Competition 2026–27: Give a New Identity to School Education Uttarakhand in Colloboration with Canva in Education

 
The State Council of Educational Research and Training (SCERT), Uttarakhand, is organizing the Logo Making Competition 2026–27 with Canva in Education for the creation of an innovative and meaningful logo representing “School Education Uttarakhand – विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड.” The initiative encourages the creative participation of teachers and students from across Uttarakhand, giving them an opportunity to contribute to the visual identity of school education in the state.

With the spirit of “Our Mountains, Our Learning, Our Future,” the competition seeks ideas that connect Uttarakhand’s rich cultural and natural heritage with the changing face of education, technology, creativity and innovation.

Creativity Rooted in Uttarakhand

Uttarakhand is known for its majestic Himalayas, rivers, forests, biodiversity, traditions and distinctive cultural identity. Participants are encouraged to draw inspiration from these roots while imagining the future of education.

The proposed logo may creatively weave together elements of local culture, native wildlife, Himalayan identity and symbols of learning. At the same time, it can reflect important educational values such as innovation, inclusion, sustainability and digital learning.

IT Dept R P Badoni, said the aim is not simply to produce an attractive graphic. The competition provides teachers and students with an opportunity to think about a larger question: What should School Education Uttarakhand represent in the years ahead?

Sagari Chatterjee, India Education Canva Lead detiled that We want you to bring your creativity to life and design a logo that captures the rich culture, core values, and future-ready vision of the state’s education system.

Amazing prizes are up for grabs for the winning designs, including tablets, exclusive hampers, and certificates! 🏆

Who Can Participate?

The Logo Making Competition 2026 is open to teachers and students of Uttarakhand. Participants can use their imagination, artistic skills and digital creativity to develop an original logo concept for School Education Uttarakhand.

The initiative also promotes the effective use of modern digital design tools in education. Canva Education is highlighted as part of the creative campaign, encouraging participants to transform their ideas into professionally presented visual designs.

The competition reflects the message:

“Ideas • Design • Inspire a Better Tomorrow.”

Important Dates

The competition went live on 15 September 2026. Participants have approximately two months to develop and submit their creative entries.

Opening Date: 15 September 2026
Submission Deadline: 15 November 2026
Winners Announcement: 30 November 2026

Participants are therefore encouraged to register early, carefully study the competition requirements and devote sufficient time to developing an original and meaningful design.


An Opportunity to Create SCERT’s Logo

Director Academic Bandana Garbyal expressed in her view that this one of the most exciting aspects of the competition is the opportunity for participants to contribute a design that could become part of the identity associated with SCERT/School Education Uttarakhand. The promotional campaign invites participants to “Stand a Chance to Create SCERT’s Logo!”

The competition therefore goes beyond winning a prize. A successful design has the potential to represent the educational aspirations, values and identity of Uttarakhand before a much wider audience.

Tablets for Winners

To recognize and encourage outstanding creativity, winners will receive tablets. This adds a strong digital-learning dimension to the initiative, rewarding creative achievement with a tool that can further support learning, designing, innovation and technology-enabled education.

What Should the Logo Represent?

Participants should aim for a logo that is original, simple, memorable and meaningful. Rather than overcrowding the design with many elements, they should think about how a few carefully selected visual symbols can communicate the identity of Uttarakhand and its education system.

A strong entry could creatively express themes such as education and knowledge, Himalayan identity, Uttarakhand's culture and heritage, environmental sustainability, inclusion, innovation, digital learning, creativity, empowerment and aspirations for a brighter future.

The central idea can be summed up in the campaign message:

“Our Mountains, Our Learning, Our Future.”

A Platform for Students and Teachers to Imagine the Future

The Logo Making Competition 2026–27 is also an exercise in creative and design thinking. It encourages participants to observe their surroundings, understand their cultural identity, identify the values of modern education and convert abstract ideas into meaningful visual communication.

According to Additional Director Padmendra Saklani, For students, it provides an opportunity to move beyond conventional classroom activities and demonstrate their creativity on a state-level platform. For teachers, it offers a space to combine educational understanding with imagination, technology and design.

Deputy Director Vinod Matuda appraised the initiative in context of participation of student and teachers in the state .He said SCERT Uttarakhand is encouraging the education community to become not merely consumers of digital content but also creators, designers and innovators. The openning was held in the conference hall where prinicipals and teachers as key resource person had orientation about SEL in schools. 

Register and Participate

Teachers and students interested in participating can scan the registration QR code provided in the official promotional material and submit their entries according to the prescribed guidelines.

For further information and updates, participants may visit the competition information page:

Logo Making Competition – Innovate Uttarakhand

Opening: 15 September 2026
Deadline: 15 November 2026
Winners: 30 November 2026