Sunday, February 22, 2026

गोवा शैक्षिक भ्रमण -उत्तराखंड SCERT टीम सीखने–सिखाने की ओर प्रयास

साउथ गोवा। शिक्षा में नवाचार और अनुभवों के आदान–प्रदान की कड़ी में SCERT उत्तराखंड की 9 सदस्यीय टीम ने SCERT गोवा के डॉ. गोविंदराज देसाई के साथ अमोन (साउथ गोवा) स्थित श्री बलराम रेजिडेंशियल हाई स्कूल का शैक्षणिक भ्रमण किया। उद्देश्य स्पष्ट था—विद्यालय की शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी पहल और छात्रों के सर्वांगीण विकास के मॉडल को नज़दीक से समझना।

विद्यालय के संस्थापक एवं चेयरमैन, साथ ही गोवा सरकार के खेल, आदिवासी मामले, कला एवं संस्कृति मंत्री रमेश तवाडकर ने टीम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए; उसमें जीवन कौशल, अनुशासन और सृजनात्मकता का संतुलन ज़रूरी है।

भ्रमण के दौरान टीम ने हेडमिस्ट्रेस, शिक्षकों और विद्यार्थियों से खुलकर बातचीत की। कुछ प्रमुख बिंदु उल्लेखनीय रहे—

  • इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स: छात्रों द्वारा तैयार ऑटोमोटिव कार मॉडल्स और प्रायोगिक गतिविधियों ने टीम को प्रभावित किया। कक्षा सत्रों में बच्चों की तकनीकी समझ और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया।

  • अनुशासन व अधोसंरचना: सुव्यवस्थित परिसर, स्पष्ट कार्यप्रणाली और सकारात्मक स्कूल संस्कृति ने अच्छा प्रभाव छोड़ा।

  • सामुदायिक पहल: ‘तिथि भोजन’, ‘डाइट कोचिंग’ जैसी गतिविधियाँ विद्यालय और समुदाय के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण हैं। 

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी एवं सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानंद ने किया। टीम में डॉ. अजय कुमार चौरसिया (कार्यक्रम समन्वयक), डॉ. राकेश चंद्र गैरोला,  मनोज किशोर बहुगुणा, रवि दर्शन गोपाल, डॉ. रंजन कुमार भट्ट, डॉ. हरेंद्र सिंह अधिकारी और शुबरा सिंघल शामिल रहे। सभी ने विद्यालय की कार्यशैली का बारीकी से अध्ययन कर अपने सुझाव साझा किए।

मंत्री रमेश तवाडकर ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक संवाद संस्थानों को अपनी ताकत और चुनौतियों—दोनों को पहचानने में मदद करते हैं। उत्तराखंड की टीम ने भी विद्यालय के सीखने–सिखाने की प्रक्रिया को प्रेरक बताया और भविष्य में शैक्षिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक सहमति जताई।   यह भ्रमण सिर्फ औपचारिकता नहीं था; यह शिक्षा को बेहतर बनाने की साझा प्रतिबद्धता का संकेत था—जहाँ अनुभव सीमाएँ नहीं मानते और सीखने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ती रहती है।  

Saturday, February 21, 2026

देहरादून में शिक्षा निदेशक पर हमला: शिक्षक संघ की कड़ी चेतावनी, उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं पर भी पड़ सकता है असर

देहरादून – राजधानी स्थित शिक्षा निदेशालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अशासकीय विद्यालयों से जुड़े एक विवाद के दौरान प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर कुछ लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना ने पूरे शिक्षा महकमे को झकझोर कर रख दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमेश शर्मा काउ के साथ अशासकीय विद्यालय प्रबंधन से जुड़े कुछ प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे। बातचीत के दौरान निदेशालय के कार्मिकों और प्रबंधन प्रतिनिधियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते तीखे विवाद में बदल गई।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ लोगों ने कथित रूप से निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हमला कर दिया। इस हमले में उनके चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए ले जाया गया।

शिक्षकों में आक्रोश, सड़क जाम

निदेशक पर हमले की खबर फैलते ही शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में शिक्षक और स्टाफ सड़क पर उतर आए और हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए जाम लगा दिया।

राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं पर भी संकट?

शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि आवश्यकता पड़ने पर उत्तराखंड बोर्ड की आगामी परीक्षाओं को भी बाधित किया जा सकता है। यह बयान राज्य के हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था बल्कि शिक्षा विभाग में संवाद और विवाद निस्तारण की प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सरकारी कार्यालय में इस प्रकार की हिंसक घटना लोकतांत्रिक संवाद की भावना के विपरीत है।

अब सबकी नजर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। यदि समय रहते दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है। 

देहरादून की यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक गरिमा पर भी हमला मानी जा रही है। आवश्यकता है कि कानून अपना काम करे, दोषियों को कड़ी सजा मिले और शिक्षा जगत में किसी भी प्रकार की अराजकता को जगह ने मिलने पाए । 

गुजरात राज्य शैक्षिक अभिदर्शन एवं भ्रमण – अंतिम दिवस

 

स्थान: Gujarat | जनपद: Gir Somnath | तहसील: Una | दिनांक: 21 फरवरी 2026

निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल के निर्देशन में दिनांक 16 फरवरी 2026 से प्रारंभ शैक्षिक अभिदर्शन एवं भ्रमण कार्यक्रम का आज अंतिम दिवस रहा। इस शैक्षिक यात्रा का उद्देश्य केवल संस्थानों का भ्रमण करना नहीं था, बल्कि राज्य की शैक्षिक, प्रशासनिक, पारिस्थितिकी एवं आध्यात्मिक व्यवस्थाओं को समग्र दृष्टि से समझना था। सात दिनों तक विभिन्न संस्थानों, विद्यालयों और नवाचार केंद्रों का अवलोकन करते हुए दल ने शिक्षा प्रबंधन की व्यवहारिक प्रक्रियाओं को निकट से देखा और अनुभव किया।

अंतिम दिवस पर जनपद गिर सोमनाथ की ऊना तहसील के अंतर्गत शामतेर आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 1 एवं 2 का विस्तृत अवलोकन किया गया। आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 1 में कुल 24 पंजीकृत बच्चे थे, जहाँ सहायिका लक्ष्मी देवी बच्चों को पोषण योजना के अंतर्गत सुस्वादु एवं पौष्टिक भोजन प्रदान कर रही थीं। केंद्र में शैक्षिक सामग्री, खेल सामग्री, आकर्षक दीवार चित्र और आधारभूत सुविधाएँ सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध थीं। बच्चों की उपस्थिति, पोषण वितरण और अभिलेख संधारण की प्रक्रिया व्यवस्थित एवं पारदर्शी पाई गई।

आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 2 में कुल 33 बच्चे पंजीकृत थे। यहाँ आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री हर्षा बेन एवं सहायिका  स्मिता बच्चों के साथ खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित अधिगम करा रही थीं। छोटे-छोटे शैक्षिक कोनों में भाषा, संख्या एवं रंग-पहचान जैसी प्रारंभिक अधिगम दक्षताओं का विकास कराया जा रहा था। दोनों केन्द्रों में राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री एवं पोषण व्यवस्था संतोषजनक रही। भ्रमण दल ने संचालन व्यवस्था, स्वास्थ्य परीक्षण, ग्रोथ मॉनिटरिंग, अभिलेख प्रबंधन एवं समुदाय की सहभागिता पर गहन चर्चा की और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के इस सुदृढ़ आधार को सराहा।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल पवित्र ज्योतिर्लिंग Somnath Temple के दर्शन से हुई। सोमनाथ मंदिर भारतीय आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की गौरवगाथा का प्रतीक है। मंदिर के इतिहास, उसके पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी प्राप्त करते हुए दल ने आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सांस्कृतिक चेतना का अनुभव किया। यह अनुभव इस शैक्षिक यात्रा को एक आध्यात्मिक आयाम भी प्रदान करता है। इस समग्र भ्रमण के दौरान Vidya Samiksha Kendra का अवलोकन विशेष रूप से प्रेरणा रहा। यहाँ शिक्षा व्यवस्था की रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली, डिजिटल डैशबोर्ड और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली को निकट से समझा गया। विद्यालय स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक उपस्थिति, अधिगम स्तर और परीक्षा परिणामों का विश्लेषण एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और त्वरित निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया सुदृढ़ होती है।

इसी क्रम में Gir National Park का अवलोकन भी किया गया, जहाँ एशियाई सिंह संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन के प्रयासों की जानकारी प्राप्त हुई। यह अनुभव शिक्षा के साथ-साथ पारिस्थितिकी और सतत विकास की समझ को भी व्यापक बनाता है। इसके अतिरिक्त जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) तथा विभिन्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का अवलोकन करते हुए शिक्षक प्रशिक्षण, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों, ICT प्रयोग एवं विद्यालय प्रबंधन की प्रभावी संरचना को समझा गया।

गुजरात राज्य में आंगनवाड़ी से लेकर 10+2 स्तर तक शिक्षा प्रबंधन की प्रणाली बहु-स्तरीय और डिजिटल निगरानी पर आधारित है। पूर्व-प्राथमिक स्तर पर पोषण ट्रैकिंग और ग्रोथ मॉनिटरिंग की व्यवस्था है, जबकि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर छात्र उपस्थिति, अधिगम मूल्यांकन और विद्यालय विकास योजनाएँ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होती हैं। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर पर बोर्ड परीक्षा परिणामों का विश्लेषण, विषय-वार मॉनिटरिंग, करियर मार्गदर्शन और कौशल विकास कार्यक्रमों का समन्वय सुव्यवस्थित ढंग से किया जाता है। राज्य स्तरीय डैशबोर्ड के माध्यम से ब्लॉक और क्लस्टर स्तर तक निरंतर समीक्षा एवं अनुश्रवण किया जाता है, जिससे गुणवत्ता उन्नयन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।

इस कार्यक्रम में समन्वयक सुनील भट्ट, डॉ. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, विनय थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी, गंगा घुगघत्याल, हिमानी रौतेला, आईटी विभाग से रमेश बडोनी, तथा DIET चंपावत से दिनेश खेतवाल एवं बालक राम मिश्रा ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न स्थलों पर संवाद, अवलोकन और शैक्षिक आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी सदस्यों की सहभागिता ने इस शैक्षिक भ्रमण को अधिक प्रभावी, संवादात्मक एवं परिणामोन्मुख बनाया।

दिनांक 16 फरवरी से प्रारंभ यह शैक्षिक अभिदर्शन यात्रा अकादमिक, प्रशासनिक, सामाजिक, पारिस्थितिकी एवं आध्यात्मिक आयामों की समग्र समझ विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। आंगनवाड़ी केन्द्रों से लेकर विद्या समीक्षा केंद्र तक प्रत्येक स्तर पर सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी एकीकरण और गुणवत्ता सुधार के स्पष्ट प्रयास परिलक्षित हुए। यह भ्रमण नवीन दृष्टिकोण, अनुभव एवं प्रेरणा के साथ आज  संपन्न हो रहा है, जो भविष्य में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं प्रभावी प्रबंधन की दिशा में मार्गदर्शक होगा।

Friday, February 20, 2026

गोवा -शिक्षा की गुणवत्ता और नवाचार के नए क्षितिज तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की अनुशंसाओं को धरातल पर उतारने और राज्य की शैक्षिक प्रगति को नई गति देने के उद्देश्य से आज SCERT उत्तराखंड की विशेषज्ञ फैकल्टी टीम ने गोवा राज्य की शिक्षा व्यवस्था के मॉडल का विस्तृत Exposure Visit किया। इस अध्ययन यात्रा का नेतृत्व अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी एवं सहायक निदेशक डॉ के. एन. विजलवान ने किया।

इस भ्रमण कार्यक्रम में डायट प्राचार्य देहरादून एवं डायट प्राचार्य हरिद्वार अपनी टीम सहित उपस्थित रहे।

इस अध्ययन यात्रा का मुख्य ध्येय था:

  • गोवा की शिक्षा प्रणाली में अपनाई गई Best Practices को समझना।

  • वहां के आधुनिक शिक्षण तौर-तरीकों का अवलोकन करना।

  • उत्तराखंड के शैक्षिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ एवं भविष्योन्मुख बनाने के लिए उपयोगी नवाचारों को अपनाना।

अध्ययन दल ने गोवा के विद्यालयों में लागू विभिन्न नवाचारों का गहन अवलोकन किया:

  • अनुभव आधारित शिक्षण (Experiential Learning): छात्रों को वास्तविक जीवन से जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है।
  • मूवी स्कूल कॉन्सेप्ट: सीखने-सिखाने का एक अभिनव तरीका, जो शिक्षा को रोचक और आकर्षक बनाता है।
  • व्यावसायिक शिक्षा में स्थानीय पुट: PPT प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और व्यवसायिक शिक्षा का सुंदर समन्वय देखा गया।
  • शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल एवं छात्र मूल्यांकन पद्धति: गोवा में शिक्षकों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण और छात्रों के लिए आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली लागू है।
  • बालबाटिकाओं और पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं का संचालन: विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ प्रारंभिक शिक्षा को भी सुदृढ़ किया गया है।

  • बस्तारहित दिवस (Bagless Days): कक्षा तीन से दसवीं तक व्यावसायिक शिक्षा को मज़बूत करने के लिए लागू।
  • राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (SSSA): SQAF मॉडल को अपनाकर शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम।
  • सुपर स्कूल मॉडल: क्लस्टर स्कूल और कॉम्प्लेक्स स्कूल की अवधारणा को योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया गया है।
  • मॉनिटरिंग यूनिटें: जोनल और राज्य स्तर पर निगरानी एवं समन्वय की व्यवस्था, जिससे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सहयोग बढ़ता है।

इस Exposure Visit में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अजय कुमार चौरसिया, डॉ. राकेश गैरोला, शुभ्रा सिंघल, हरेन्द्र अधिकारी, रंजन भट्ट, मनोज बहुगुणा और रविदर्शन तोपाल सहित डायट के संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे।

गोवा की शिक्षा प्रणाली से मिले अनुभव और नवाचार उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देंगे। यह Exposure Visit न केवल NEP 2020 के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि राज्य की शैक्षिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगा।

गुजरात शैक्षिक अभिदर्शन एवं भ्रमण कार्यक्रम – पंचम दिवस

 

दिनांक: 20 फरवरी 2026 | जनपद: गिर सोमनाथ, गुजरात

प्रकृति दर्शन से -दिवस की शुरुआत


निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण, बन्दना गर्ब्याल के मार्गदर्शन में पंचम दिवस का आरंभ प्रातःकालीन प्रकृति-अध्ययन से हुआ। Gir National Park में पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता एवं संरक्षण प्रयासों का अवलोकन किया गया। लायन सफारी के दौरान एशियाई सिंहों के प्राकृतिक आवास, खाद्य शृंखला और वन प्रबंधन की व्यवस्थाओं को निकट से समझने का अवसर मिला।

इस अनुभव ने स्पष्ट किया कि सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन शिक्षा के माध्यम से ही समाज में सुदृढ़ हो सकते हैं।

विद्यालय भ्रमण एवं अभिदर्शन

प्रकृति-अध्ययन के उपरांत टीम ने जनपद के विद्यालयों—PM Shri रामलेची प्राथमिकशाला  एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय तथा श्री जंबुर प्राथमिकशाला —का शैक्षिक भ्रमण किया। अंत मे श्री मधुपुर पे सेंट्रल स्कूल का भ्रमण किया और सभी सदस्युओ के अनुदान की सराहना की गई । भ्रमण कार्यक्रम के दौरान स्कूल मे उप जिला शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारियों से भी मुलाकत हुई और निदेशक ने मोनिट्रिंग सिस्टम पर विस्तार से चर्चा की । 

जनपद मे अधिकारियों के रोल पर की बिन्दु सामने आए जैसे -

प्रशासनिक एवं व्यवस्थागत संरचना

  • प्रशासनिक ढांचा: DEO, BEO और प्रधानाध्यापक की भूमिकाएँ एवं जवाबदेही।
  • शिक्षक नियुक्ति: विषयानुसार तैनाती, रिक्त पदों की पहचान और पारदर्शी स्थानांतरण।
  • सूचना प्रवाह: डिजिटल संप्रेषण, समीक्षा बैठकें और डेटा-आधारित निर्णय।
  • संरचनात्मक सुविधाएँ: भवन, शौचालय, पेयजल, वर्दी, मध्यान्ह भोजन और छात्रवृत्ति योजनाएँ एवं किचन गार्डन ।
  • निरीक्षण एवं अनुश्रवण: नियमित निरीक्षण, कक्षा अवलोकन और सुधारात्मक कार्ययोजना।

अकादमिक पक्ष एवं नवाचार

  • शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया: छात्र-केंद्रित एवं गतिविधि-आधारित पद्धतियाँ।

  • नवाचार एवं श्रेष्ठ प्रथाएँ: ICT का उपयोग, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय नवाचार।

  • अकादमिक समर्थन: प्रशिक्षण, सहकर्मी अधिगम और नवाचारों का दस्तावेजीकरण।

Key Learnings-

  • प्रशासनिक दक्षता और अकादमिक गुणवत्ता परस्पर पूरक हैं।
  • डेटा-आधारित अनुश्रवण से पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ती है।
  • स्थानीय नवाचारों का साझा करना व्यापक सुधार का मार्ग है।
  • शिक्षक सशक्तिकरण से अधिगम परिणामों में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
  • पारिस्थितिकी और शिक्षा का समन्वय संवेदनशील नागरिकता का विकास करता है।

जनपद गिर सोमनाथ में शिक्षा व्यवस्था केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय चेतना, सामुदायिक सहभागिता और उत्तरदायित्वपूर्ण प्रशासन के माध्यम से समग्र विकास की दिशा में अग्रसर है।
यह भ्रमण “पारिस्थितिकी से प्रशासन और प्रशासन से अकादमिक गुणवत्ता” की समन्वित दृष्टि को साकार करता है।

इस कार्यक्रम में समन्वयक सुनील भट्ट, डॉ. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, विनय थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी, गंगा घुगघत्याल, हिमानी रौतेला, आईटी विभाग से रमेश बडोनी, तथा DIET चंपावत से दिनेश खेतवाल एवं बालक राम मिश्रा ने सक्रिय सहभागिता की।