Tuesday, July 14, 2026

SCERT उत्तराखण्ड में INSPIRE Award विजेता विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय मेंटरिंग कार्यशाला सम्पन्न

 

देहरादून, उत्तराखण्ड।
राज्य के नवाचारी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में 8 एवं 9 जुलाई 2026 को दो दिवसीय मेंटरिंग कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) के सहयोग से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के अभिनव विचारों और वैज्ञानिक प्रोटोटाइप को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में और अधिक परिष्कृत एवं प्रभावशाली बनाना था।

कार्यशाला में INSPIRE Award – MANAK कार्यक्रम के 2023–24 एवं 2024–25 बैच के उत्तराखण्ड के 28 राज्य स्तरीय विजेता विद्यार्थियों तथा हिमाचल प्रदेश के 5 चयनित विद्यार्थियों ने सहभागिता की। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने से पूर्व विद्यार्थियों को अपने नवाचारों को तकनीकी, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने के लिए विशेषज्ञों द्वारा व्यक्तिगत मार्गदर्शन, तकनीकी सुझाव तथा आवश्यक आर्थिक सहयोग की जानकारी प्रदान की गई।

दो दिनों तक चले इस गहन मेंटरिंग सत्र में विद्यार्थियों ने अपने-अपने प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए, जिन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा करते हुए उनके डिजाइन, कार्यप्रणाली, उपयोगिता, लागत, नवाचार, प्रस्तुतीकरण तथा वास्तविक जीवन में उनके संभावित प्रभाव के आधार पर सुधार के सुझाव दिए। इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार के प्रति आत्मविश्वास को और अधिक मजबूत किया।

कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इनमें दून विश्वविद्यालय से डॉ. धृति ढौंढियाल, IRDE से डॉ. आर. पी. नौटियाल, UPES से डॉ. शांतनु अग्निहोत्री एवं डॉ. पियूष, DIT University से डॉ. नितिन कुमार गुप्ता, तथा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) से सुनील भास्कर एवं  पारस प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के मानकों के अनुरूप अपने प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी एवं शोध संबंधी सुझाव दिए।

कार्यशाला का सफल समन्वयन INSPIRE Award कार्यक्रम के राज्य समन्वयक डॉ. अवनीश उनियाल द्वारा किया गया। उनके नेतृत्व में सम्पूर्ण कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया, जिससे विद्यार्थियों को प्रत्येक चरण में विशेषज्ञों से व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सका। इस अवसर पर विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं मार्गदर्शक शिक्षकों की भी सक्रिय उपस्थिति रही। उनकी सहभागिता ने यह संदेश दिया कि किसी भी नवाचार की सफलता में विद्यालय, शिक्षक, परिवार और विशेषज्ञों का सामूहिक सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

समापन सत्र में SCERT उत्तराखण्ड के अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान केवल खोज का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे प्रभावशाली साधन है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अपने ज्ञान, समय और परिश्रम को समाज के कल्याण के लिए समर्पित करते हैं तथा उनका एकमात्र उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होता है। उन्होंने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखण्ड के ये युवा नवाचारी राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और राज्य का नाम गौरवान्वित करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह दो दिवसीय मेंटरिंग कार्यशाला केवल तकनीकी मार्गदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक अनुसंधान, समस्या समाधान और उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में भविष्य के वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों और परिवर्तनकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में उत्तराखण्ड की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित करते हैं।

एनसीईआरटी की राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल समापन

 

देहरादून, उत्तराखण्ड।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), नई दिल्ली के राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम (NPEP) के अंतर्गत स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम (School Health & Wellness Programme) के लिए आयोजित पाँच दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन देहरादून में हुआ। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए राज्य स्तरीय संसाधन व्यक्तियों (State Resource Persons) ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा, शोध योजना निर्माण तथा अनुभवों का आदान-प्रदान किया।

इस राष्ट्रीय कार्यशाला की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि वर्ष 2026–27 के लिए विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा संचालित किए जाने वाले 41 शोध प्रस्तावों का अंतिम अनुमोदन रहा। इन शोध अध्ययनों के माध्यम से विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, विद्यार्थियों के समग्र विकास तथा नीति निर्माण के लिए साक्ष्य-आधारित निष्कर्ष प्राप्त होंगे। यह पहल देशभर में विद्यालयी शिक्षा को और अधिक वैज्ञानिक, समावेशी एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

समापन समारोह की अध्यक्षता एनसीईआरटी, नई दिल्ली के संयुक्त निदेशक डॉ. पी. सी. अग्रवाल ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाला शोध शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी नीति निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे अपने-अपने राज्यों में शोध कार्यों को गंभीरता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से सम्पन्न करें, ताकि विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

एससीईआरटी उत्तराखण्ड के सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए प्रतिभागियों को उत्कृष्ट शोध प्रस्ताव तैयार करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन शोध अध्ययनों के निष्कर्ष न केवल विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम को नई दिशा देंगे, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

कार्यक्रम में डॉ. बिजॉय मलिक (कार्यक्रम समन्वयक, राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम, एनसीईआरटी), डॉ. हरीश मीणा (एनसीईआरटी, नई दिल्ली) तथा डॉ. उषा कटियार, प्रवक्ता, एससीईआरटी उत्तराखण्ड सहित अनेक विशेषज्ञ एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने शोध पद्धति, विद्यालय स्वास्थ्य, मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण, जीवन कौशल तथा साक्ष्य-आधारित शैक्षिक हस्तक्षेपों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।

पाँच दिनों तक चली इस राष्ट्रीय कार्यशाला ने प्रतिभागियों को शोध की गुणवत्ता, सहयोगात्मक कार्य संस्कृति तथा नवाचार आधारित दृष्टिकोण को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने वर्ष 2026–27 में स्वीकृत शोध अध्ययनों को निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने तथा उनके निष्कर्षों के माध्यम से विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने का संकल्प लिया।