गढ़वाल मंडल के मास्टर ट्रेनर्स को मिलेगा 21वीं सदी के कौशलों का उन्नत प्रशिक्षण
दिनेशपुर (ऊधम सिंह नगर), 06 अगस्त 2026।
राज्य में विद्यालयी शिक्षा को अधिक प्रभावी, कौशल-आधारित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में कौशलम् कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण (द्वितीय चक्र) का शुभारंभ आज अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, दिनेशपुर (जनपद ऊधम सिंह नगर) में हुआ। यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण 06 अगस्त से 08 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण का शुभारंभ एससीईआरटी उत्तराखंड के उप निदेशक विनोद मटूड़ा की गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन में हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल विषय ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विद्यार्थियों में जीवनोपयोगी कौशल, समस्या समाधान, रचनात्मकता, संवाद क्षमता और उद्यमशील सोच का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स से अपेक्षा की कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों और नवाचारों को अपने-अपने जनपदों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाएँ, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक और विद्यार्थी इसका लाभ प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम की शुरुआत माइंडफुलनेस सत्र के साथ हुई, जिसने प्रतिभागियों को सकारात्मक, एकाग्र एवं सीखने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान किया। इस सत्र ने प्रशिक्षण के लिए ऊर्जा, सहभागिता और आत्मचिंतन का उत्कृष्ट माहौल तैयार किया।
प्रशिक्षण में प्रोग्राम समन्वयक सुनील भट्ट, डॉ. साधना डिमरी, ऋतु कुकरेती, उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के विशेषज्ञ संदर्भदाता तथा गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों से आए मास्टर ट्रेनर्स सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं। आगामी तीन दिनों में प्रतिभागियों को कौशलम् कार्यक्रम की अवधारणा, 21वीं सदी के कौशल, उद्यमशील मानसिकता (Entrepreneurial Mindset), अनुभवात्मक अधिगम, तथा प्रभावी प्रशिक्षण तकनीकों पर व्यवहारिक एवं सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
इस प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य ऐसे दक्ष मास्टर ट्रेनर्स तैयार करना है, जो अपने-अपने जनपदों में शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करते हुए विद्यालयों में कौशल-आधारित शिक्षण संस्कृति को सुदृढ़ बना सकें। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नवाचार, नेतृत्व क्षमता और भविष्य के लिए आवश्यक दक्षताओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखंड में शिक्षा को अधिक व्यवहारिक, नवाचारी और जीवन-कौशल आधारित बनाने की एक सशक्त पहल बनकर उभर रहा है। मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से इसका प्रभाव राज्य के प्रत्येक विद्यालय तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।