Tuesday, February 10, 2026

PARAKH–NCERT द्वारा “उद्यम संसार : वर्ल्ड ऑफ वर्क” पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के अंतर्गत PARAKH द्वारा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT) उत्तराखंड के सहयोग से “उद्यम संसार : वर्ल्ड ऑफ वर्क (WoW)” पहल के अंतर्गत दो दिवसीय कार्यशाला का पी.एम.श्री राजकीय इंटर कालेज आई.डी.पी.एल. ऋषिकेश में दिनांक 09 एवं 10 फरवरी 2026 को सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों को कार्य-जगत की समझ प्रदान करना, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना तथा उन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना था।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में PARAKH की सीईओ प्रो. इंद्राणी भादुड़ी ने वीडियो सन्देश के माध्यम से मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल, नवाचार और उद्यमशीलता से भी जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला के प्रथम दिन PARAKH टीम द्वारा “उद्यम संसार : वर्ल्ड ऑफ वर्क” पहल का परिचय दिया गया। विद्यार्थियों को सॉफ्ट स्किल्स और हार्ड स्किल्स, 4Cs (क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी, कोलैबोरेशन और कम्युनिकेशन) तथा 36 कौशल क्षेत्रों की जानकारी गतिविधियों के माध्यम से दी गई। छात्रों ने चार्ट्स के माध्यम से विभिन्न कौशल क्षेत्रों का अन्वेषण किया और सक्रिय सहभागिता दिखाई।

द्वितीय दिन विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मूल अवधारणाओं से परिचित कराया गया तथा उनसे जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की गई। इसके पश्चात छात्रों ने समूहों में कार्य करते हुए 36 कौशल क्षेत्रों पर चार्ट तैयार किए और व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लिया। कार्यशाला के अंतिम सत्र में विद्यार्थियों ने अपने-अपने चार्ट्स प्रस्तुत किए, जिससे उनकी समझ, आत्मविश्वास और प्रस्तुति कौशल में वृद्धि देखने को मिली।

यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई, क्योंकि इससे उन्हें कार्य-जगत, कौशल आधारित करियर विकल्पों तथा भविष्य की संभावनाओं की स्पष्ट समझ प्राप्त हुई। “उद्यम संसार : वर्ल्ड ऑफ वर्क” पहल के माध्यम से PARAKH–NCERT देश में कौशल उन्मुख एवं अनुभवात्मक शिक्षा को एक नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में परख, एन.सी.ई.आर.टी. नई दिल्ली के दो संदर्भदाताओं द्वारा सत्रों का सुव्यवस्थित संचालन किया गया । उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक सत्रों के माध्यम से करियर योजना, उद्योगों की बदलती प्रवृत्तियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं। कार्यक्रम का राज्य स्तर पर समन्वयन डॉ. दीपक प्रताप सिंह एवं डॉ, रंजन कुमार भट्ट द्वारा किया गया । एस.सी.ई.आर.टी. से प्रिया गुसाई भी कार्यशाला में उपस्थित रही । पी.एम.श्री राजकीय इंटर कालेज आई.डी.पी.एल. ऋषिकेश से राजीव लोचन सिंह, प्रधानाचार्य, श्री डी.पी,नैथानी, हरेंद्र राणा ने कार्यशाला में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की।

राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता का सफल आयोजन-2026

 डॉ अवनीश उनियाल 

एससीईआरटी उत्तराखण्ड में गणनात्मक कौशल और एकाग्रता का उत्सव

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा दिनांक 10 फरवरी 2026 को एससीईआरटी सभागार में राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता का सफल एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता प्रदेश के विद्यार्थियों में गणितीय दक्षता, तार्किक चिंतन एवं मानसिक गणना कौशल को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारम्भ 

कार्यक्रम का शुभारम्भ बंदना गर्ब्याल , निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड, पदमेन्द्र सकलानी, अपर निदेशक, एससीईआरटी तथा डॉ. के. एन. बिजल्वाण, सहायक निदेशक, एससीईआरटी द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।

अपने स्वागत एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में  बंदना गर्ब्याल  ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि एबेकस जैसी गतिविधियाँ बच्चों में तार्किक सोच, एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा गणनात्मक कौशल को सुदृढ़ करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने और अपने श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उत्तराखण्ड के प्रत्येक जनपद से दो-दो चयनित प्रतिभागियों सहित कुल 25 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों के मार्गदर्शन हेतु 16 मार्गदर्शक शिक्षक, 6 डायट संकाय सदस्य तथा 5 अभिभावक भी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने अनुशासन, उत्साह एवं उत्कृष्ट गणनात्मक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

तीन चरणों में सम्पन्न हुई प्रतियोगिता

राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता को तीन चरणों में सम्पन्न कराया गया—

  • प्रथम चरण में सभी 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

  • द्वितीय चरण के लिए 13 प्रतिभागियों का चयन किया गया।

  • द्वितीय चरण में 08 प्रतिभागियों के समान अंक होने के कारण तृतीय चरण आयोजित किया गया।



तृतीय चरण में सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 05 प्रतिभागियों का चयन किया गया, जिनमें 02 प्रतिभागी – जनपद बागेश्वर01 – पौड़ी गढ़वाल01 – चमोली01 – उधमसिंह नगर से रहे।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. अवनीश उनियाल, प्रवक्ता एवं राज्य समन्वयक (अबेकस), एससीईआरटी द्वारा किया गया।
प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका डॉ. देवराज सिंह राणा, हिमानी थापा,  रंजना जगवाण एवं आशा नकोटी द्वारा अत्यंत निष्पक्षता एवं समर्पण के साथ निभायी गयी। इसके साथ ही आई टी तकनीकी सपोर्ट मे सौरभ जोशी ने योगदान दिया । 

कार्यक्रम के समापन अवसर पर पदमेन्द्र सकलानी, अपर निदेशक, एससीईआरटी तथा डॉ. के. एन. बिजल्वाण, सहायक निदेशक, एससीईआरटी द्वारा सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

Monday, February 09, 2026

SCERT के सभागार में “परीक्षा पे चर्चा 2026” का दूसरा एपिसोड लाइव प्रसारण

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के सभागार में “परीक्षा पे चर्चा 2026” के दूसरे एपिसोड का सीधा प्रसारण अत्यंत उत्साह और सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा विद्यार्थियों से संवाद करते हुए परीक्षा से जुड़े तनाव, आत्मविश्वास, समय प्रबंधन और जीवन मूल्यों पर दिए गए विचारों को SCERT परिवार ने एक साथ देखा और सुना।

कार्यक्रम में निदेशक (अकादमिक) बन्दना  गर्ब्याल की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ SCERT के सभी अधिकारीगण एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। सभागार में उपस्थित सभी शिक्षकों और अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के प्रेरक संदेशों को गहरी एकाग्रता के साथ सुना और उन्हें शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में उपयोगी बताया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने संवाद में यह स्पष्ट किया कि परीक्षा जीवन का एक पड़ाव मात्र है, लक्ष्य नहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्ममंथन, सकारात्मक सोच और निरंतर अभ्यास के महत्व पर बल दिया। शिक्षकों के लिए यह संदेश विशेष रूप से प्रेरक रहा कि वे विद्यार्थियों को केवल परीक्षा-केंद्रित नहीं, बल्कि जीवन-केंद्रित शिक्षा दें।

इस पूरे कार्यक्रम के समन्वयक  सुनील भट्ट, जो परीक्षा पे चर्चा 2026 से संबंधित सभी गतिविधियों का समन्वय देख रहे हैं, ने कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित अधिकारियों, संकाय सदस्यों और सहयोगियों का हार्दिक अभिनंदन एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों—दोनों के लिए दिशा-निर्देशक का कार्य करते हैं और SCERT निरंतर ऐसे आयोजनों के माध्यम से शैक्षिक संवाद को सशक्त बनाता रहेगा। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक ऊर्जा और इस संकल्प के साथ हुआ कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संदेशों को विद्यालयों तक पहुँचाया जाएगा, ताकि विद्यार्थी परीक्षा को भय नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ स्वीकार कर सकें।

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Sunday, February 08, 2026

मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का सफल समापन

ओरोवैली आश्रमरायवाला में हुआ वैलिडिक्टरी सत्र

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली द्वारा मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम विषय पर आयोजित दो-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आज सफल समापन ओरोवैली आश्रमरायवाला (देहरादून) में संपन्न हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी तथा एनसीईआरटी के प्रो. विनोद शनवाल (मनोदर्पण कार्यक्रम प्रभारी) द्वारा संयुक्त रूप से की गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन मानसिक स्वास्थ्य को नीतिगतशैक्षिकसामाजिक और तकनीकी दृष्टिकोण से समझने हेतु विभिन्न विषयगत समूहों (Groups) में गहन सत्र आयोजित किए गए।

डिजिटल टेक्नोलॉजीमीडिया एवं डिजिटल सपोर्ट सिस्टम का मानसिक स्वास्थ्य में उपयोग
इस सत्र में विद्यालयी परिप्रेक्ष्य में डिजिटल माध्यमोंटेली-हेल्पलाइनई-सपोर्ट सिस्टम तथा ऑनलाइन काउंसलिंग की भूमिका पर चर्चा की गई। 

मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम पर सरकारी नीतियाँ एवं सुधारात्मक पहल
प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, मनोदर्पणपी.एम. ई-विद्या तथा अन्य सरकारी पहलों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर विचार साझा किए। 

जीवन कौशल आधारित दृष्टिकोण द्वारा मानसिक कुशल क्षेम का समर्थन
इस सत्र में बच्चों में भावनात्मक साक्षरताआत्म-नियंत्रणसकारात्मक सोच और सामाजिक-भावनात्मक अधिगम (SEL) को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।

ओपन हाउस एवं अनुभव साझा सत्र

लंच के पश्चात Open House & Experience Sharing Session आयोजित किया गयाजिसमें सभी समूहों के प्रतिभागियों ने अपने अनुभवसीख और विद्यालयों में व्यवहारिक क्रियान्वयन से जुड़े सुझाव साझा किए। यह सत्र अत्यंत संवादात्मक और समाधान-उन्मुख रहा।

समापन सत्र में प्रो. विनोद शनवाल ने मनोदर्पण प्रकोष्ठ के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल शिक्षकोंविद्यार्थियों एवं परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य और कुशल क्षेम के लिए एक सशक्त मंच है। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन हेतु एससीईआरटी उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की और कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की पहचान यदि बाल्यकाल में हो जाएतो समस्याओं का समाधान समय रहते संभव है।

एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने अपने संबोधन में कहा कि सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति से हम प्रकृति और समाज के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं। अध्यात्मिकता मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का एक प्रभावी माध्यम हैजिसे विद्यार्थियों के जीवन में भी उतारा जाना चाहिए।

कार्यक्रम में उप परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) अजीत भण्डारी एवं अंजुम फातिमा की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरे कार्यक्रम का प्रभावी प्रबंधन एवं संचालन एससीईआरटी उत्तराखंड की टीम द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित रूप से किया गया। यह दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर विमर्श का सशक्त मंच बनाबल्कि विद्यालयों में हैप्पीनेसजीवन कौशल और मानसिक कुशल क्षेम को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक ठोस पहल सिद्ध हुआ।

Saturday, February 07, 2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर प्रदेश स्तरीय दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला 2.0 का आयोजन

मनोज बहुगुणा एन ई पी सेल 
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अनुशंसाओं तथा उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश भर से समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों एवं खंड शिक्षा अधिकारियों के लिए दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला के द्वितीय चरण का आयोजन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सभागार में किया गया।

कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारंभ अपर निदेशक गढ़वाल मंडल कंचन देवराड़ी, अपर निदेशक SCERT पद्मेन्द्र कुमार सकलानी तथा सहायक निदेशक डॉ. के.एन. बिजल्वाण द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

शुभारंभ अवसर पर अपर निदेशक महोदया ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं का वास्तविक और सार्थक क्रियान्वयन तभी संभव है, जब शिक्षा अधिकारी एवं शिक्षक इसे जमीनी स्तर पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता और सार्थक संवाद का आह्वान किया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में NEP के राज्य समन्वयक मनोज बहुगुणा द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख अनुशंसाओं, उत्तराखंड में उनके क्रियान्वयन तथा भावी कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

इसके पश्चात सहायक निदेशक डॉ. के.एन. बिजल्वाण एवं राज्य समन्वयक रविदर्शन तोपाल द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर विस्तार से व्याख्यान दिया गया।

बुनियादी स्तर (Foundational Stage) हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा

प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए तैयार की गई उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा, NEP 2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के मार्गदर्शन में विकसित की गई है, जिसमें राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं को समाहित किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ—

  • पंचकोश विकास की अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय कोष)
  • खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षा
  • मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षण
  • बहुआयामी एवं सर्वांगीण विकास
  • तनाव-मुक्त शिक्षण वातावरण
  • अवलोकन एवं पोर्टफोलियो आधारित मूल्यांकन
  • FLN (Foundational Literacy & Numeracy) पर विशेष जोर

विद्यालयी शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF-SE)

विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार SCF-SE को NEP 2020 एवं NCF की अनुशंसाओं के अनुरूप स्थानीय संदर्भों में ढाला गया है। इसका उद्देश्य छात्रों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को सुनिश्चित करना है।

इसमें 5+3+3+4 की नई संरचना, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, FLN पर फोकस, विषय चयन में लचीलापन, तथा स्थानीय संदर्भित विषयवस्तु को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की व्यवस्था की गई है।

कक्षा 11 से विषय चयन की नई व्यवस्था, चार विषय समूहों की संरचना, कक्षा 9–10 में गणित का द्विस्तरीय मूल्यांकन, तथा अतिरिक्त विषय चयन की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।

राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST)

द्वितीय दिवस की कार्यशाला में डॉ. अंकित जोशी द्वारा राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST) पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें शिक्षकों की दक्षता, करियर प्रगति, पदोन्नति एवं व्यावसायिक विकास को योग्यता आधारित बनाने की अवधारणा पर प्रकाश डाला गया।

NPST के अंतर्गत शिक्षक प्रोफाइल के तीन स्तर— प्रवीण शिक्षक ,उन्नत शिक्षक ,कुशल शिक्षक

तथा तीन प्रमुख मानक— मूल मूल्य एवं नैतिकता, ज्ञान एवं शिक्षण अभ्यास, व्यावसायिक विकास को विस्तार से समझाया गया।

विद्यालयी समय-सारणी एवं समय प्रबंधन

राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के अंतर्गत विद्यालयों की दैनिक समय-सारणी एवं समय आवंटन पर डॉ. मोहन बिष्ट द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें लचीली समय-सारणी, बस्ते का बोझ कम करना, प्राथमिक स्तर पर गृहकार्य से मुक्ति, कला, खेल एवं पुस्तकालय के लिए समर्पित समय जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल रहीं।

ICT एवं उभरती तकनीकों का एकीकरण

NEP 2020 में ICT एवं IT की भूमिका पर रमेश बडोनी एवं पुष्पा असवाल द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें NETF की स्थापना, DIKSHA, SWAYAM, वर्चुअल लैब्स, ब्लेंडेड लर्निंग, AI आधारित व्यक्तिगत सीखने, कक्षा 6 से कोडिंग, तथा शिक्षक क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।

राज्य में पीएम ई-विद्या के अंतर्गत संचालित शैक्षिक टीवी चैनलों की जानकारी भी साझा की गई तथा AI जनरेटिव वीडियो के माध्यम से संसाधन सामग्री प्रस्तुत की गई।

परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) पर विमर्श

उप राज्य परियोजना निदेशक अजीत भंडारी द्वारा वर्ष 2018–19 से 2023–24 तक की PGI रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति पर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यशाला का समापन निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्व्याल द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि NEP 2020 की अनुशंसाओं को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षा अधिकारियों, संस्थाध्यक्षों एवं शिक्षकों की है। उन्होंने विद्यालयों में सतत अवलोकन, अच्छे कार्यों के लिए प्रोत्साहन और सकारात्मक कार्यसंस्कृति विकसित करने का आह्वान किया।

अंत में अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में प्रदेश भर से शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, DIET प्राचार्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं संस्थाध्यक्ष उपस्थित रहे।

इस दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यशाला में कुल 93 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यशाला में अपर निदेशक गढ़वाल मंडल कंचन देवराड़ी, मुख्य शिक्षा अधिकारी उधमसिंह नगर  कुंवर सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी बागेश्वर  विनय कुमार आर्य, प्राचार्य DIET पौड़ी गढ़वाल स्वराज सिंह तोमर, प्राचार्य DIET रुड़की सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से खंड शिक्षा अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी, प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में सक्रिय सहभागिता करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने अनुभव, सुझाव एवं विचार साझा किए।