Thursday, June 11, 2026

डी.एल.एड. प्रथम सेमेस्टर मॉडल प्रश्नपत्र निर्माण हेतु राज्यस्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ

Arun Thapliyal DElEd Dept , टिहरी गढ़वाल, 11 जून 2026

उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर (नैनीताल) के तत्वावधान में आयोजित डी.एल.एड. प्रथम सेमेस्टर मॉडल प्रश्नपत्र निर्माण हेतु दो दिवसीय  (11 व 12 जून 2026) राज्यस्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ आज जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), टिहरी गढ़वाल में संपन्न हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं परख (PARAKH) की अनुशंसाओं के अनुरूप सेवापूर्व शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में मूल्यांकन एवं प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, दक्षतामूलक तथा भविष्य उन्मुख बनाना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ डी.एल.एड. प्रशिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात डायट टिहरी के प्राचार्य द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम समन्वयक/शोध अधिकारी नमिता पांडेय ने सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला के प्रमुख बिंदुओं से परिचित कराया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सी.पी. रतूड़ी, संयुक्त सचिव, उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद ,नैनीतालने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में मूल्यांकन संबंधी दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षकों को केवल ज्ञान आधारित नहीं, बल्कि दक्षता आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं के लिए तैयार करने हेतु प्रश्नपत्र निर्माण में आवश्यक सुधार समय की मांग है। उन्होंने परख (PARAKH) द्वारा सुझाए गए मानकों के अनुरूप मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।


इस अवसर पर परिषद की उप सचिव सुषमा गौरव ने कार्यशाला की रूपरेखा, उद्देश्यों, अपेक्षित प्रतिफलों तथा आगामी कार्ययोजना से प्रतिभागियों को विस्तारपूर्वक अवगत कराया।

एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड से प्रतिभाग कर रहे अरुण थपलियाल, प्रवक्ता, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मूल्यांकन को केवल परीक्षा तक सीमित न मानकर अधिगम सुधार के व्यापक उपकरण के रूप में देखने की आवश्यकता है। उन्होंने मूल्यांकन साक्षरता (Assessment Literacy) को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि बदलते सामाजिक परिदृश्य एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति की संस्तुतियों के अनुरूप सक्षम, संवेदनशील एवं नवाचारी शिक्षकों का निर्माण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र निर्माण में किए जा रहे नवाचारों एवं परिवर्तनों को प्रशिक्षण प्रक्रिया के माध्यम से प्रशिक्षुओं के व्यवहारगत परिवर्तन में रूपांतरित करना डायट संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

कार्यशाला में प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) से सेवापूर्व शिक्षक शिक्षा विभाग के प्रवक्ताओं द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। आगामी सत्रों में प्रतिभागियों द्वारा डी.एल.एड. प्रथम सेमेस्टर के विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, एन.सी.एफ.टी.ई. तथा परख के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मॉडल प्रश्नपत्रों का निर्माण एवं समीक्षा कार्य किया जाएगा। कार्यक्रम में परिषद, एस.सी.ई.आर.टी., डायट टिहरी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

Wednesday, June 10, 2026

सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम (Social Emotional Learning - SEL) की दिशा में उत्तराखंड

 

आज की शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं रह गई है। बदलते सामाजिक परिवेश, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों और जीवन कौशलों की आवश्यकता को देखते हुए विद्यालयों में सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम (Social Emotional Learning - SEL) का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए 9 जून 2026 को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), देहरादून के सभागार में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में उत्तराखंड के सभी जनपदों से मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO), जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) तथा उप शिक्षा अधिकारी (Dy. EO) सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम की अवधारणा को प्रभावी रूप से लागू करने हेतु जिला स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कुंडे द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और आत्मविश्वासी नागरिक तैयार करना है जो जीवन की चुनौतियों का सकारात्मक ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने विद्यालयों में सामाजिक एवं भावनात्मक कौशलों के विकास को वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए निदेशक, अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण (ART),  वंदना गर्ब्याल ने सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, सहयोग, संवाद कौशल तथा सकारात्मक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला है। उन्होंने विशेष रूप से पीएम श्री विद्यालयों में SEL आधारित गतिविधियों को प्रभावी रूप से लागू करने पर बल दिया।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने SEL के विभिन्न आयामों, विद्यालयी वातावरण में इसके एकीकरण, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक व्यवहार निर्माण तथा समावेशी शिक्षा से इसके संबंधों पर विस्तृत चर्चा की। विभिन्न प्रस्तुतियों और संवाद सत्रों के माध्यम से यह साझा किया गया कि किस प्रकार सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सहयोगात्मक सोच और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रोत्साहित कर सकता है।

यह कार्यशाला उत्तराखंड में एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई, जहाँ विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को भी समान महत्व दिया जाए। भविष्य में SEL के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से राज्य के विद्यालयों में अधिक सकारात्मक, समावेशी, सुरक्षित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण वातावरण विकसित होने की अपेक्षा है।

Monday, June 08, 2026

आईटीडीए की राज्य स्तरीय साइबर सुरक्षा कार्यशाला: डेटा सुरक्षा और डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुवात

 

उत्तराखंड राज्य में डिजिटल सेवाओं और ई-गवर्नेंस के बढ़ते विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक बन चुके हैं। इसी उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी विकास अभिकरण (ITDA), उत्तराखंड द्वारा भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से “Stage III – State Level Workshop on Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य में संचालित विभिन्न वेबसाइटों, वेब पोर्टलों, एप्लिकेशनों तथा डेटा प्रबंधन प्रणालियों की साइबर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करना, संभावित खतरों की पहचान करना तथा भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम के दौरान सभी विभागों द्वारा अपने-अपने संस्थानों में वर्तमान साइबर सुरक्षा व्यवस्था, डेटा प्रबंधन प्रक्रियाओं, सुरक्षा ऑडिट, साइबर खतरों, चुनौतियों तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए गए। प्रतिभागियों ने रैनसमवेयर, फिशिंग, डेटा चोरी, अनधिकृत पहुंच, सर्वर सुरक्षा, बैकअप प्रबंधन, नेटवर्क सुरक्षा और डिजिटल अवसंरचना से जुड़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए।

विद्यालयी शिक्षा विभाग की ओर से एससीईआरटी उत्तराखंड के आईटी विभाग से रमेश प्रसाद बड़ोनी तथा महानिदेशालय विद्यालयी शिक्षा से मुकेश  बहुगुणा ने कार्यशाला में प्रतिभाग किया। विद्यालयी शिक्षा विभाग के प्रस्तुतीकरण में विशेष रूप से उन विभिन्न अकादमिक वेबसाइटों, पोर्टलों एवं डिजिटल सेवाओं पर चर्चा की गई जो वर्तमान में आईटीडीए और एनआईसी के माध्यम से होस्ट की जा रही हैं। प्रस्तुतीकरण के दौरान वेबसाइट सुरक्षा के लिए नियमित सुरक्षा जांच (Security Checkpoints), समय-समय पर सॉफ्टवेयर एवं सुरक्षा अपडेट, उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण, डेटा बैकअप तथा सर्वर प्रबंधन से संबंधित चुनौतियों को रेखांकित किया गया।

चर्चा के दौरान साइबर हमलों और सुरक्षा खतरों से बचाव के लिए मजबूत फायरवॉल व्यवस्था, सर्वर हार्डनिंग, सुरक्षा पैच प्रबंधन, राज्य डेटा केंद्र (SDC) में सुरक्षित डेटा भंडारण तथा नियमित सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि संस्थागत स्तर पर साइबर सुरक्षा जागरूकता और क्षमता निर्माण भी उतना ही आवश्यक है।

आईटीडीए के महाप्रबंधक आशीष उपाध्याय एवं उनकी तकनीकी टीम ने विभिन्न साइबर सुरक्षा खतरों, उभरती चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने सभी विभागों को आश्वस्त किया कि राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए आईटीडीए आवश्यक तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर सुरक्षा एक निरंतर प्रक्रिया है और इसके लिए सभी विभागों को योजनाबद्ध एवं समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वर्तमान युग में डेटा सुरक्षा और डेटा प्रबंधन की नई चुनौतियों को समझना आवश्यक है। एआई आधारित प्रणालियाँ जहां कार्यकुशलता और निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बना सकती हैं, वहीं इनके सुरक्षित उपयोग, डेटा गोपनीयता और नैतिक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। भविष्य में एआई आधारित डेटा विश्लेषण, निगरानी और प्रबंधन प्रणालियाँ सरकारी कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन तथा तकनीकी दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

यह कार्यशाला राज्य के विभिन्न विभागों के बीच सहयोग, अनुभव साझा करने और साइबर सुरक्षा के प्रति एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। डिजिटल शासन के इस दौर में सुरक्षित, विश्वसनीय और सुदृढ़ साइबर सुरक्षा ढांचे का निर्माण ही राज्य की डिजिटल प्रगति का आधार बनेगा।

— रमेश प्रसाद बड़ोनी
आईटी विभाग, एससीईआरटी उत्तराखंड

आकांक्षा कोंडे ने संभाला महानिदेशक का दायित्व: उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा के लिये प्रयास

 

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग को नई नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक ऊर्जा प्राप्त हुई है। वर्ष 2018 बैच की आईएएस आकांक्षा कोंडे ने विद्यालयी शिक्षा विभाग के महानिदेशक (Director General School Education) का पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग के तीनों प्रमुख निदेशालयों—माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा तथा अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण (SCERT)—की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित कर विभागीय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

बैठक में निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती तथा प्राथमिक शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित कार्यक्रमों, उपलब्धियों एवं वर्तमान प्रगति की विस्तृत प्रस्तुति दी। विभागीय अधिकारियों ने राज्य में चल रही विभिन्न शैक्षिक योजनाओं, नवाचारों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए संचालित पहलों की जानकारी साझा की।

समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न विभागाध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों, उपलब्धियों तथा सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही इन चुनौतियों के समाधान हेतु तैयार की गई रणनीतियों और आगामी कार्ययोजनाओं को भी प्रस्तुत किया गया। बजट प्रबंधन, प्रस्तावित योजनाओं, प्रशिक्षण गतिविधियों तथा विभागीय कार्यक्रमों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर डॉ के एन बिजलवान सहायक निदेशक ने एससीईआरटी उत्तराखंड द्वारा संचालित नवाचारी कार्यक्रमों को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। आईटी विभाग की ओर से राज्यभर के शिक्षकों के लिए संचालित ऑनलाइन MOOCs पाठ्यक्रम, AI एवं ICT आधारित क्षमता विकास कार्यक्रम, इनोवेट उत्तराखंड हैकाथॉन, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विकास तथा तकनीकी नवाचारों से संबंधित पहलों की जानकारी साझा की गई। इन कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों में नवाचार, डिजिटल दक्षता और समस्या समाधान कौशल विकसित करने के प्रयासों को रेखांकित किया गया।

बैठक के दौरान महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने सभी अधिकारियों एवं विभागीय प्रतिनिधियों को अपने कार्यक्रमों का सुव्यवस्थित एवं प्रभावी संचालन जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा, समयबद्ध रिपोर्टिंग तथा परिणाम-आधारित कार्य संस्कृति को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर यदि किसी योजना या कार्यक्रम के क्रियान्वयन में बाधा आती है अथवा उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, तो उसे निर्धारित रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से तत्काल निदेशालय और महानिदेशक कार्यालय तक पहुंचाया जाए, ताकि समय रहते उसका समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि विभाग के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी समन्वित प्रयासों के माध्यम से राज्य की विद्यालयी शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नई नेतृत्व टीम के मार्गदर्शन में शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल नवाचार, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है।

आकांक्षा कोंडे का यह पहला समीक्षा संवाद केवल विभागीय कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विद्यालयी शिक्षा के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी, नवाचारी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

एससीईआरटी उत्तराखंड की पहल: विद्यालयों में विकसित होगा सड़क सुरक्षा का मॉडल

 

सड़क दुर्घटनाएँ आज देश के सामने एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रही हैं। इन दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा विद्यार्थियों के भीतर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखंड ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इस पहल के अंतर्गत विद्यालयों के लिए सड़क सुरक्षा नियमों पर आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित यातायात व्यवहार के प्रति प्रशिक्षित किया जा सके।

यह कार्यक्रम सर्वोच्च न्यायालय की मॉनिटरिंग समिति के निर्देशों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है और सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान-2017 की भावना को आगे बढ़ाता है। इसका उद्देश्य केवल नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है ताकि वे स्वयं सुरक्षित रहें और समाज में भी जागरूकता फैलाएँ।

मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से होगा  प्रशिक्षण

एससीईआरटी द्वारा पहले चरण में सड़क सुरक्षा विषयक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया जा रहा है। इसके बाद राज्य स्तर पर 40 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। ये प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स राज्य के सभी 13 जिलों में जाकर लगभग 60-60 प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे।

प्रशिक्षित शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों, सुरक्षित यातायात व्यवहार, पैदल चलने के नियम, साइकिल एवं दोपहिया वाहन सुरक्षा तथा दुर्घटना रोकथाम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करेंगे। इसके साथ ही विद्यालयों में सड़क सुरक्षा क्लबों का गठन भी किया जाएगा, जो वर्षभर विभिन्न गतिविधियों और जागरूकता अभियानों का संचालन करेंगे।

पाठ्यक्रम में स्थान

सड़क सुरक्षा को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा नियमों पर आधारित विषयवस्तु को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए छह ऑडियो-वीडियो सामग्री तथा अन्य प्रशिक्षण संसाधन भी विकसित किए जा चुके हैं। सड़क सुरक्षा सप्ताह और जागरूकता रैलियों जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भी इस अभियान को विद्यालय स्तर तक पहुँचाया जा रहा है।

विभिन्न विभागों का सहयोग

इस महत्वपूर्ण पहल में परिवहन विभाग और एससीईआरटी के विशेषज्ञों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है। मॉड्यूल निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्य में सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ के राज्य समन्वयक विनय थपलियाल सहित विभिन्न विषय विशेषज्ञों और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) के संकाय सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

एससीईआरटी की निदेशक वंदना गर्ब्याल के नेतृत्व में यह प्रयास शिक्षा और सुरक्षा को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है।

माड्यूल निर्माण में, परिवहन विभाग से डा पपने  , एससीईआरटी से , अखिलेश डोभाल,डा दिनेश रतूडी ,डा मनोज शुक्ला,रविदर्शन तोपाल,मनोज बहुगुणा,डा संजय भटट ,डा राकेश गैरोला,एंव डायटस से  प्रेरणा बहुगुणा,डा दिनेश रावत,डा शांति रतूडी,डा सुषमा महर,ऋतु कुकरेती,मनोज महर,आदि प्रतिभाग कर रहे हैं और समापन 10जून को होगा ।