Monday, October 19, 2026

21 से 23 अक्टूबर ‘सम्मान समारोह एवं MOOC 4.0 रूपरेखा विकास व विशेषज्ञ परामर्श बैठक’

 

MOOCs 1.0 एवं 2.0 की अंतरराष्ट्रीय सफलता का होगा उत्सव, डिजिटल शिक्षा और AI आधारित शिक्षक प्रशिक्षण के अगले चरण की तैयारियों पर होगा मंथन

देहरादून, 19 अक्टूबर 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक तीन दिवसीय ‘सम्मान समारोह एवं MOOC 4.0 रूपरेखा विकास व विशेषज्ञ परामर्श बैठक’ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में संचालित MOOCs 1.0 एवं 2.0 की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उत्सव मनाना, इनके विकास में योगदान देने वाले विषय विशेषज्ञों एवं तकनीकी सहयोगियों को सम्मानित करना तथा आगामी MOOC 4.0 के लिए नवीन पाठ्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना है।

MOOCs 1.0 एवं 2.0 : उत्तराखण्ड की एक सफल अंतरराष्ट्रीय कहानी

उत्तराखण्ड में शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास और डिजिटल दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से SCERT द्वारा विद्या समीक्षा केन्द्र के ई-सृजन (e-Srijan) प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ किए गए।

MOOC 1.0 के अंतर्गत Fundamentals of ICT Tools तथा MOOC 2.0 के अंतर्गत AI Enabled Teaching–Learning and School Administration जैसे पाठ्यक्रमों ने शिक्षकों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षण सामग्री, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विद्यालय प्रशासन में तकनीक के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इन कार्यक्रमों के अंतर्गत MOOC 1.0 में 49,000 से अधिक तथा MOOC 2.0 में 47,000 से अधिक शिक्षकों ने प्रशिक्षण पूर्ण किया है। इस व्यापक सहभागिता ने उत्तराखण्ड को बड़े पैमाने पर डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनाया है।

वैश्विक मंच पर उत्तराखण्ड की उपलब्धियों को मिलेगा सम्मान

SCERT उत्तराखण्ड की इस अभिनव पहल को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान प्राप्त हुई है।

  • AI for Education Awards 2026: स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित वैश्विक प्रतियोगिता में SCERT की Building Future-Ready Teachers through AI and ICT Enabled MOOCs परियोजना को शीर्ष छह फाइनलिस्ट में स्थान मिला।

  • SKOCH Gold Award 2026: ई-सृजन के माध्यम से व्यापक स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण की सफलता के लिए SCERT उत्तराखण्ड को शिक्षा श्रेणी में प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award प्राप्त हुआ।

  • LIET 2026, Hong Kong: Teacher Readiness for AI and ICT Integration: Insights from a Short-Term Online Training Program शीर्षक शोध-सार को The Education University of Hong Kong में 27–29 नवम्बर 2026 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुतीकरण के लिए स्वीकार किया गया है।

कार्यक्रम में इन उपलब्धियों पर विशेष चर्चा के साथ पाठ्यक्रम विकास, तकनीकी संचालन, समीक्षा एवं प्रशिक्षण में योगदान देने वाले विषय विशेषज्ञों, समीक्षकों, तकनीकी टीम और सहयोगियों के योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

MOOC 4.0 : भविष्य की डिजिटल शिक्षा की नई रूपरेखा

तीन दिवसीय बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य MOOC 4.0 के लिए पाठ्यक्रम रूपरेखा, विषयवस्तु, प्रशिक्षण पद्धति एवं गुणवत्ता मानकों का निर्धारण करना होगा।

विशेषज्ञ परामर्श के दौरान AI आधारित शिक्षण-अधिगम, डिजिटल मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा, समावेशी शिक्षा, शैक्षिक नवाचार, डिजिटल कंटेंट निर्माण, गेम आधारित शिक्षण, शोध लेखन तथा विद्यालय प्रबंधन में तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

बैठक में विषय विशेषज्ञों के साथ पाठ्यक्रम संरचना, सीखने के अपेक्षित प्रतिफल, व्यावहारिक गतिविधियों, मूल्यांकन प्रणाली तथा प्रमाणन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और शिक्षक-अनुकूल बनाने पर भी मंथन होगा।

सीखें, सहयोग करें, निर्माण करें और साझा करें

SCERT उत्तराखण्ड की इस पहल का मूल संदेश है—

सीखें (Learn) | सहयोग करें (Collaborate) | निर्माण करें (Build) | साझा करें (Share)

इस दृष्टिकोण के माध्यम से राज्य के शिक्षकों को केवल डिजिटल तकनीक का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि नवाचारी शिक्षण सामग्री के निर्माता और ज्ञान साझा करने वाले सक्रिय सहयोगी के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

SCERT उत्तराखण्ड के आईटी विभाग द्वारा समन्वित यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास को नई दिशा देने का प्रयास है।

आगामी तीन दिवसीय कार्यक्रम उत्तराखण्ड की डिजिटल शिक्षा यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होने की अपेक्षा है, जो राज्य को तकनीक-सक्षम, समावेशी और AI आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ाने में सहयोग करेगा।

आयोजक: आईटी विभाग, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड
आयोजन तिथि: 21–23 अक्टूबर 2026
स्थान: SCERT, देहरादून, उत्तराखण्ड

सशक्त शिक्षक | समृद्ध विद्यार्थी | समृद्ध उत्तराखण्ड | उज्ज्वल भारत

Friday, October 16, 2026

एससीईआरटी में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

 

Priya Gusain SCERT Uttarakhand

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखंड द्वारा ब्लॉक रिसोर्स पर्सन्स (बीआरपी) के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण  विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान एवं समाधान के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना तथा विद्यालयों में विद्यार्थियों के भावनात्मक और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप निदेशक, विनोद मटूरा ने मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। विद्यालयों में सकारात्मक, सहयोगात्मक एवं संवेदनशील वातावरण का निर्माण करने में शिक्षकों और शैक्षिक संसाधन व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण के प्रथम दिवस का प्रारंभ माइंडफुलनेस (सचेतनता) अभ्यास से हुआ। इस गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों को वर्तमान क्षण के प्रति सजग रहने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने तथा स्वयं की भावनाओं और विचारों को समझने का अनुभव कराया गया।

प्रथम सत्र में व्यसन (Addiction) एवं उससे उबरने के उपायों पर चर्चा की गई। सत्र में व्यसन के विभिन्न स्वरूपों, इसके मनोवैज्ञानिक एवं व्यवहारगत पहलुओं तथा इससे प्रभावित व्यक्तियों की सहायता करने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को व्यसन की समस्या के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

द्वितीय सत्र में मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता (Psychological First Aid) विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। इसमें संकट की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को भावनात्मक सहयोग प्रदान करने, उसकी बात ध्यानपूर्वक सुनने, उसे सुरक्षित महसूस कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता एवं विशेषज्ञ परामर्श से जोड़ने के महत्व को समझाया गया।

अपर निदेशक, पद्मेंद्र सकलानी ने अपने संबोधन में विद्यालयों के सुचारु एवं प्रभावी संचालन में ब्लॉक रिसोर्स पर्सन्स (बीआरपी) की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीआरपी विद्यालयों और शिक्षा विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं तथा शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार और शिक्षकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बीआरपी के कार्यक्षेत्र में आने वाली विभिन्न चुनौतियों एवं समस्याओं पर चर्चा करते हुए उनके निराकरण के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए केवल अकादमिक पक्ष ही नहीं, बल्कि शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं स्वयं शैक्षिक कार्मिकों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा विद्यालयों में सकारात्मक, संवेदनशील एवं सहयोगपूर्ण वातावरण विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इसके पश्चात विद्यालयों में संचालित आनंदम कार्यक्रम एवं सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षा (SEEL—Social, Emotional and Ethical Learning) पर सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक संबंधों तथा नैतिक मूल्यों के विकास में इन कार्यक्रमों की भूमिका पर चर्चा की गई। साथ ही, विद्यालयी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास और मानसिक कल्याण को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।

प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में डॉ. बडोनी ने हैकाथॉन कार्यक्रम के संबंध में प्रतिभागियों को जागरूक किया। उन्होंने नवाचार के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि जीवन में नई सोच, रचनात्मकता और समस्याओं के समाधान की क्षमता व्यक्ति के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इस सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को दैनिक जीवन एवं शैक्षिक कार्यों में नवाचारी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं की समझ विकसित करने, संकट की परिस्थितियों में उचित प्रतिक्रिया देने तथा विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए अधिक संवेदनशील, सुरक्षित एवं सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

Thursday, October 15, 2026

उधम सिंह नगर में पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय SEEL कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न

 

सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम के माध्यम से विद्यालयों में संवेदनशील, आनंदमय और सकारात्मक शैक्षिक वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर

उधम सिंह नगर, 15 अक्टूबर 2026। समग्र शिक्षा उत्तराखंड के अंतर्गत जनपद उधम सिंह नगर के पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम (Social, Emotional and Ethical Learning – SEEL) कार्यशाला उत्साहपूर्ण सहभागिता और सकारात्मक अनुभवों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के समग्र विकास के लिए सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक मूल्यों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना तथा शिक्षकों एवं विद्यालय नेतृत्व को संवेदनशील और आनंदमय शैक्षिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रेरित करना था।

समग्र शिक्षा उत्तराखंड के कार्यक्रम प्रभारी डॉ. बी. पी. मैंदोली ने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता अत्यंत उत्साहजनक रही। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों, समूह चर्चाओं एवं अनुभवात्मक अधिगम प्रक्रियाओं में रुचिपूर्वक भाग लिया तथा विद्यार्थियों के सामाजिक-भावनात्मक विकास के महत्त्व को गहराई से समझा।

उन्होंने कहा कि SEEL केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यालयी शिक्षा को अधिक मानवीय, संवेदनशील और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य बच्चों में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, सहानुभूति, सकारात्मक संबंध, जिम्मेदार निर्णय लेने की क्षमता तथा नैतिक मूल्यों का विकास करना है।

आनंदम पाठ्यचर्या और समग्र शिक्षा से जुड़ाव

उत्तराखंड की आनंदम पाठ्यचर्या (Anandam Curriculum) की भावना के अनुरूप सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम बच्चों को तनावमुक्त, सुरक्षित और आनंदपूर्ण वातावरण में सीखने के अवसर प्रदान करता है। SEEL जैसी पहल विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सहयोग, करुणा, पारस्परिक सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने में सहायक हो सकती है।

कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों को भावनात्मक रूप से सशक्त, नैतिक रूप से जिम्मेदार तथा सामाजिक रूप से संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। इस दिशा में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों एवं सहयोगी संस्थाओं का सराहनीय योगदान

कार्यशाला की सफलता में विषय विशेषज्ञों एवं विभिन्न सहयोगी संस्थाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. विजय रावत,  पांडे जी एवं रतूड़ी जी ने संदर्भदाता के रूप में अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करते हुए प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

Dream a Dream एवं Labhya की टीमों ने कार्यक्रम के दौरान निरंतर सहयोग एवं तकनीकी-अकादमिक समर्थन प्रदान किया। वहीं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन ने प्रशिक्षण स्थल एवं आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराकर आयोजन में महत्त्वपूर्ण सहयोग दिया।

समग्र शिक्षा, उधम सिंह नगर की टीम ने कार्यक्रम के सफल संचालन, समन्वय एवं व्यवस्थाओं में सराहनीय भूमिका निभाई।

डॉ. बी. पी. मैंदोली ने सभी संदर्भदाताओं, सहयोगी संस्थाओं, आयोजनकर्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही विद्यालयों में सकारात्मक और स्थायी शैक्षिक परिवर्तन संभव है।

खुशहाल, संवेदनशील और भावनात्मक रूप से सशक्त विद्यालयों की ओर

तीन दिवसीय कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों और प्रतिभागियों के उत्साह ने यह विश्वास मजबूत किया कि SEEL के सिद्धांतों को विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों और शिक्षण प्रक्रियाओं में प्रभावी रूप से अपनाया जा सकता है।

यह पहल पीएम श्री विद्यालयों को ऐसे शिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित, स्वीकार्य और सीखने के लिए प्रेरित महसूस करे।

सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों के हृदय में संवेदनशीलता, व्यवहार में नैतिकता और जीवन में सकारात्मकता विकसित करना है।

इस प्रकार समग्र शिक्षा उत्तराखंड के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला राज्य में आनंदम पाठ्यचर्या, विद्यार्थी कल्याण और समग्र शिक्षा के उद्देश्यों को सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सामने आई है।

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