Friday, May 01, 2026

SCERT Uttarakhand SKOCH AWARD ahead in SEMI FINAL ROUND : उत्तराखंड की नई पहचान: सुशासन, शिक्षा और नवाचार की सशक्त कहानी

 

उत्तराखंड ने एक बार फिर अपनी प्रगतिशील सोच और प्रभावी कार्यशैली से पूरे देश में अपनी पहचान मजबूत की है। SKOCH State of Governance Report 2025 में देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त करना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर सुधार, पारदर्शिता और परिणामोन्मुख शासन का जीवंत उदाहरण है।

स्कॉच ग्रुप ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हम राज्य के नेतृत्व—Bandana Garbyal (Director Academic) एवं Padmendra Saklani (Additional Director SCERT)—को हार्दिक बधाईयां दी हैं, जिनके दूरदर्शी मार्गदर्शन ने इस सफलता को संभव बनाया।

शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन की नई दिशा

इस उपलब्धि का सबसे सशक्त पक्ष शिक्षा क्षेत्र में हुए परिवर्तन हैं। SCERT Uttarakhand द्वारा ICT-enabled initiatives और MOOCs आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने शिक्षक क्षमता निर्माण (Teacher Capacity Building) को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे DIKSHA और PM eVIDYA ने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए सीखने के अवसरों को अधिक सुलभ, समावेशी और व्यापक बनाया है। अब शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल माध्यमों से हर कोने तक पहुँच रही है।

नवाचार और तकनीक का प्रभावी उपयोग

राज्य में blended learning, e-content development, virtual trainings और data-driven monitoring systems के उपयोग ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है।

  • शिक्षण अधिक इंटरैक्टिव और विद्यार्थी-केंद्रित हुआ है
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिक लचीले और व्यापक हुए हैं
  • डेटा आधारित निर्णयों से गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है

यह परिवर्तन दर्शाता है कि कैसे तकनीक का सही उपयोग शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है।

“हमारी विरासत एवं विभूतियां”: जड़ों से जुड़ाव: सुनिल भट्ट संकाय पाठ्यक्रम विभाग 

तकनीकी प्रगति के साथ-साथ उत्तराखंड ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से संजोया है। “हमारी विरासत एवं विभूतियां” जैसी पहल विद्यार्थियों को राज्य की समृद्ध परंपराओं, लोकजीवन, वेशभूषा, खान-पान और महान विभूतियों से जोड़ती है।

यह पहल न केवल बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करती है, बल्कि शिक्षा को स्थानीय संदर्भों से जोड़कर उसे और अधिक अर्थपूर्ण बनाती है।

भविष्य के लिए रोडमैप जरूरी :

यह उपलब्धि केवल बीते प्रयासों की सराहना नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा भी है। 2026 के आगामी मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए अब आवश्यक है कि:

  • डिजिटल एकीकरण को और गहराई दी जाए
  • नवाचारों को बड़े स्तर पर लागू किया जाए
  • अधिकाधिक शिक्षकों और संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए

“एनसीईआरटी की कक्षा 3 एवं कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय संदर्भों का समावेश (Contextualization) करते हुए, नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप एक महत्वपूर्ण एवं नवाचारी पहल की गई है, जो शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, व्यवहारिक और विद्यार्थियों के जीवन से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रही है।”

उत्तराखंड का यह सफर यह साबित करता है कि जब नेतृत्व स्पष्ट हो, रणनीति मजबूत हो और कार्यान्वयन प्रभावी हो, तो सीमित संसाधनों में भी असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।

Thursday, April 30, 2026

निदेशक प्रारम्भिक एवं संस्कृत शिक्षा "कंचन देवराड़ी" का सम्मानपूर्वक सेवा निवृत्ति समारोह

आज SCERT उत्तराखंड के सभागार में शिक्षा विभाग की एक गरिमामयी और भावनात्मक विदाई का आयोजन किया गया। प्रभारी निदेशक, प्रारंभिक  एवं संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी के अधिवर्षता आयु पूर्ण करने पर सेवा निवृत्ति के अवसर पर विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत और शिक्षा सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रामन भी रहे कार्यक्रम मे मौजूद । शिक्षा मंत्री ने कंचन देवराड़ी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हे एक कुशल अधिकारी बताया जबकि सचिव ने उन्हे एक हंसमुख और ईमानदार अधिकारी और मानवता के प्रति हमेशा सजग रहने वाली महिला के रूप मे सम्बोधन भी किया। 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात पुष्पमालाओं से उनका हार्दिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों और सहकर्मियों ने कंचन देवराड़ी के साथ बिताए गए कार्यकाल की स्मृतियों को साझा किया। निदेशक डॉ मुकुल सती  ने उन्हें एक ईमानदार, सरल, सौम्य और अपने कार्य के प्रति निडर अधिकारी के रूप में याद किया।

कंचन देवराड़ी ने SCERT उत्तराखंड में पूर्व में भी कई वर्षों तक संयुक्त निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं दीं और संस्थान को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नेतृत्व, कार्यनिष्ठा और निर्णय क्षमता की सराहना हर वक्ता के शब्दों में झलकती रही।

वर्तमान अपर निदेशक SCERT,  पद्मेंद्र सकलानी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके साथ जुड़े कई यादगार प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि कंचन देवराड़ी का योगदान विभाग के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। डॉ. के. एन. बिजल्वाण सहित SCERT के अनेक अधिकारियों ने भी अपने शुभकामना संदेश प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में प्रारंभिक, समग्र शिक्षा तथा माध्यमिक शिक्षा के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अवसर को और अधिक गरिमामय बनाया। मंच पर उनके पति ने भी उनका साथ दिया, जिससे यह क्षण और भी भावुक बन गया। कई अवसरों पर सहकर्मियों ने उन पलों को याद किया जब कंचन देवराड़ी ने सभी का मार्गदर्शन और सहयोग किया।

इस अवसर पर अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने दूरभाष के माध्यम से उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं, जो उनके प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक रहा।

समारोह के अंत में सभी ने कंचन देवराड़ी के स्वस्थ, सुखद और सफल भविष्य की कामना की। यह विदाई केवल एक अधिकारी की सेवा निवृत्ति नहीं, बल्कि उनके समर्पण, सादगी और उत्कृष्ट कार्यशैली को सम्मानित करने का एक भावनात्मक अवसर था।

इस मौके पर पूर्व डाइट देहरादून प्राचार्य रवींद्र जुगरान एवं अपर निदेशक SCERT प्रदीप कुमार भी उपस्थित थे . 




Monday, April 27, 2026

एससीईआरटी उत्तराखंड में नए नेतृत्व की शुरुआत: पद्मेन्द्र सकलानी ने संभाला अपर निदेशक का दायित्व

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, जब अनुभवी एवं दूरदर्शी शिक्षा अधिकारी  पद्मेन्द्र सकलानी ने अपर निदेशक के पद का कार्यभार ग्रहण किया है। उनके साथ ही तीन अन्य अधिकारियों ने भी प्रदेश के विभिन्न पदों पर अपनी नई जिम्मेदारियाँ संभाली हैं, जिससे संस्थान की कार्यक्षमता और सुदृढ़ होने की अपेक्षा है।

इस अवसर पर परिषद के समस्त अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों ने श्री सकलानी का हार्दिक स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ एवं बधाई दी। यह पूर्णकालिक दायित्व (Full Placement) उनके नेतृत्व में SCERT के लिए एक नई दिशा और ऊर्जा लेकर आएगा।

इससे पूर्व पद्मेन्द्र सकलानी शिक्षा महानिदेशालय में संयुक्त निदेशक के साथ-साथ अपर निदेशक प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे थे, जहाँ उन्होंने शैक्षिक प्रशासन, नीति क्रियान्वयन तथा गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अनुभव और नेतृत्व कौशल से SCERT के कार्यों में नई गति आने की पूर्ण संभावना है।

पद्मेन्द्र सकलानी का दृष्टिकोण (Vision for SCERT)

सकलानी का स्पष्ट मानना है कि SCERT केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था का बौद्धिक और नवाचार केंद्र है। उनका विज़न निम्न प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है—

  • गुणवत्तापूर्ण एवं साक्ष्य-आधारित शिक्षा (Evidence-Based Education):
    शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को शोध और आंकड़ों के आधार पर मजबूत करना।
  • राज्य पाठ्यचर्या का सुदृढ़ीकरण:
    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप स्थानीय संदर्भों को समाहित करते हुए लचीली और प्रासंगिक पाठ्यचर्या विकसित करना।
  • शिक्षक प्रशिक्षण में नवाचार:
    प्रशिक्षण कार्यक्रमों को केवल औपचारिकता न बनाकर उन्हें व्यावहारिक, गतिविधि-आधारित और कक्षा-केंद्रित बनाना।

पाठ्यचर्या एवं प्रशिक्षण पर फोकस

सकलानी के नेतृत्व में SCERT का प्रमुख लक्ष्य होगा कि—

  • शिक्षक प्रशिक्षण को निरंतर (Continuous Professional Development) प्रक्रिया बनाया जाए।
  • DIETs एवं अन्य प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाया जाए।
  • कक्षा-कक्ष में सीखने के परिणामों (Learning Outcomes) पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • ‘करके सीखना’ (Learning by Doing) और अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा दिया जाए।

ICT और शिक्षा का भविष्य

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) को शिक्षा का अभिन्न अंग मानते हुए उनका दृष्टिकोण अत्यंत स्पष्ट है—

  • डिजिटल टूल्स का प्रभावी एकीकरण: केवल उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका सार्थक उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • हाइब्रिड लर्निंग मॉडल: पारंपरिक और ऑनलाइन शिक्षा का संतुलित मिश्रण विकसित करना।
  • वर्चुअल लैब्स एवं स्मार्ट क्लासेस का विस्तार: दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण संसाधन पहुँचाना।
  • डेटा-आधारित निर्णय: शिक्षण और प्रशिक्षण में ICT के माध्यम से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर नीति निर्माण करना।

सकलानी ने SCERT के लिए एक दूरगामी कार्ययोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की है—

  1. डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण – सभी शैक्षणिक गतिविधियों का एकीकृत प्लेटफॉर्म।
  2. MOOCs एवं ऑनलाइन कोर्सेज का विस्तार – शिक्षकों और छात्रों के लिए निरंतर सीखने के अवसर।
  3. शोध एवं नवाचार को बढ़ावा – विद्यालय स्तर तक एक शोध संस्कृति विकसित करना।
  4. स्थानीय से वैश्विक (Local to Global) – उत्तराखंड के शैक्षिक नवाचारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना।
  5. स्कूल-आधारित सपोर्ट सिस्टम – शिक्षकों को कक्षा में निरंतर सहयोग प्रदान करना।

इस अवसर पर अकादमिक निदेशक वंदना गर्ब्याल ने  पद्मेन्द्र सकलानी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में SCERT नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा और राज्य की शिक्षा प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएगा। 

अंत में, SCERT परिवार के सभी सदस्यों की ओर से पद्मेन्द्र सकलानी एवं अन्य नव-नियुक्त अधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 

Thursday, April 23, 2026

मिशन योगी कार्यशाला में उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग ने प्रस्तुत किया CBP एवं ACBP 2026-27 का विज़न

 

उत्तराखण्ड में 22–23 अप्रैल 2026 को आयोजित मिशन कर्मयोगी/मिशन योगी कार्यशाला राज्य के प्रशासनिक एवं शैक्षिक तंत्र में क्षमता विकास (Capacity Building) की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई। राज्य कर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, देहरादून में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों ने अपने-अपने Capacity Building Plan (CBP) एवं Annual Capacity Building Plan (ACBP) 2026-27 प्रस्तुत किए।

सरकारी दिशा-निर्देश और कार्यशाला का उद्देश्य

उत्तराखण्ड शासन के कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-04 द्वारा जारी आदेश (संख्या: 387416/2025-07(07)/2022, दिनांक 15 अप्रैल 2026) के अनुसार, राज्य के सभी विभागों में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत कर्मचारियों की क्षमता को सुदृढ़ करने और iGOT प्लेटफॉर्म पर उनकी ऑनबोर्डिंग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

इस पहल का उद्देश्य था—

  • विभागीय स्तर पर Capacity Building Plan तैयार करना
  • CBC (Capacity Building Commission), भारत सरकार द्वारा विकसित IT Tool का उपयोग सीखना
  • विभागों की संरचना, पदों, दायित्वों एवं आवश्यक दक्षताओं का विश्लेषण करना
  • प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना

कार्यशाला में सभी विभागों से अपेक्षा की गई थी कि वे अपने-अपने पदों का विवरण, कार्य आवंटन, वेतनमान, योजनाओं, कार्यक्रमों और आवश्यक विशेषज्ञताओं के साथ सहभागी बनें।

शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की प्रभावी प्रस्तुति

इस कार्यशाला में शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग, उत्तराखण्ड ने विशेष रूप से अपने CBP एवं ACBP 2026-27 का विस्तृत और प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया। प्रस्तुति में निम्न बिंदुओं को प्रमुखता दी गई:

  • शिक्षकों की डिजिटल दक्षता (ICT Integration) का विस्तार
  • AI एवं नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा
  • ई-कंटेंट निर्माण और DIKSHA जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग
  • निरंतर व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development - CPD)
  • विद्यालयों में आधुनिक शिक्षण उपकरणों का समावेशन

प्रस्तुति में यह भी स्पष्ट किया गया कि आगामी वर्षों में शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, तकनीक-संचालित और परिणाम-केंद्रित बनाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाएंगे।

उच्चस्तरीय प्रस्तुति और सहभागिता

कार्यशाला में अपर सचिव एवं स्टेट नोडल अधिकारी, मिशन कर्मयोगी  नवनीत पाण्डे के समक्ष विभागों ने अपनी योजनाएँ प्रस्तुत कीं। शिक्षा विभाग की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली। इस दौरान कार्यशाला मे संदर्भदाता के रूप मे ATI से नायक , बिकास और गौरव पाण्डेय के समूह ने सभी विभागों का मार्गदर्शन किया । 

इस अवसर पर— शिक्षा विभाग से उपनिदेशक पंकज शर्मा संकाय सदस्य रमेश बडोनी अंशुमन विनोद पयाल  की सक्रिय सहभागिता रही, जिन्होंने प्रस्तुति को प्रभावी बनाने और विभागीय दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कार्यशाला में विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत योजनाओं से यह स्पष्ट हुआ कि उत्तराखण्ड सरकार मिशन कर्मयोगी के माध्यम से प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह पहल न केवल सरकारी कर्मचारियों की क्षमता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में बेहतर सेवा वितरण और परिणाम सुनिश्चित करेगी।

मिशन योगी कार्यशाला में प्रस्तुत CBP एवं ACBP 2026-27 राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाले दस्तावेज़ के रूप में उभरकर सामने आए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत रणनीति यह दर्शाती है कि उत्तराखण्ड शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तकनीक, नवाचार और सतत प्रशिक्षण को प्राथमिकता दे रहा है।

शिक्षा विभाग ACBP 2026-27 

Tuesday, April 21, 2026

ई-कंटेंट निर्माण में दक्षता: उत्तराखंड में सफल PM e-VIDYA कार्यशाला

उत्तराखंड के देहरादून स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड में PM e-VIDYA DTH चैनलों के लिए आयोजित पाँच दिवसीय अभिमुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को डिजिटल युग के अनुरूप ई-कंटेंट निर्माण में दक्ष बनाना था, ताकि वे छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचा सकें।

कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जनपदों, DIET संस्थानों और विद्यालयों से आए 55 शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की। उद्घाटन सत्र में CIET-NCERT से जुड़े विशेषज्ञों ने PM e-VIDYA पहल के महत्व और डिजिटल शिक्षा की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

द्वितीय दिवस पर प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी और प्रो. अमरेन्द्र प्रसाद बेहरा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट निर्माण पर विशेष मार्गदर्शन दिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्क्रिप्ट लेखन, वीडियो रिकॉर्डिंग, कैमरा फेसिंग, वॉयस मॉड्यूलेशन एवं वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे प्रभावी और छात्र-केंद्रित डिजिटल कंटेंट तैयार कर सकें।

अंतिम दिवस में प्रतिभागियों द्वारा तैयार वीडियो का मूल्यांकन किया गया तथा कॉपीराइट, लाइसेंसिंग एवं डिजिटल कंटेंट के नैतिक उपयोग पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।

समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर SCERT उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी और सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानंद बिजलवाण ने इस पहल को राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

कार्यशाला के सफल संचालन में रमेश बड़ोनी, पुष्पा असवाल, शिव प्रकाश वर्मा, विनय उनियाल, अतुल कठेत, हिमानी भट्ट, विनोद चौहान, सौरव जोशी, तथा श्रेय  का विशेष योगदान रहा।