Wednesday, April 15, 2026

एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड की छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया हुई ऑनलाइन: एक डिजिटल पहल



दिनांक: 15 अप्रैल 2026

शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एस.सी.ई.आर.टी.), उत्तराखंड ने छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन कर दिया है। इस नई पहल का शुभारंभ आज माननीय शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा किया गया।

डिजिटल पोर्टल का शुभारंभ

इस अवसर पर माननीय मंत्री जी ने कहा कि यह छात्रवृत्ति पोर्टल राज्य के लाखों विद्यार्थियों के लिए एक सशक्त माध्यम सिद्ध होगा। इसके माध्यम से:

  • आवेदन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनेगी
  • छात्र, अभिभावक और शिक्षक एक ही प्लेटफॉर्म पर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे
  • विद्यालय से लेकर राज्य स्तर तक मॉनिटरिंग और समीक्षा आसान होगी

👉 पोर्टल लिंक: scholarshipscert.uk.gov.in

छात्रों के लिए एकीकृत सुविधा

अब छात्रों को अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। इस पोर्टल के माध्यम से वे आसानी से निम्न जानकारी प्राप्त कर सकेंगे:

  • आवेदन की स्थिति
  • परीक्षा केंद्र
  • परीक्षा तिथियाँ
  • अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएँ

यह कदम न केवल समय की बचत करेगा बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा।

प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाएँ

एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड के छात्रवृत्ति प्रकोष्ठ द्वारा प्रतिवर्ष विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं:

कक्षा 6 एवं 9 के लिए:

  • मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति परीक्षा

कक्षा 8 के लिए:

  • राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति योजना (NMMSS)
  • डॉ. शिवानंद नौटियाल छात्रवृत्ति योजना (SNSS)
  • श्रीदेव सुमन छात्रवृत्ति योजना (SSSS)

इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।

आई.टी.डी.ए. उत्तराखंड के सहयोग से विकसित यह पोर्टल राज्य में शिक्षा के डिजिटलीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी, बल्कि छात्रों के लिए अवसरों को भी अधिक सुलभ बनाएगी।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • बंदना गर्ब्याल (निदेशक)
  • पदमेन्द्र सकलानी (अपर निदेशक)
  • डॉ. कृष्णानन्द विजल्वाण
  • डॉ. हरीश बड़ोनी
  • राकेश सिंह रावत
  • डॉ. अनुज्ञा पैन्यूली
  • आशीष कुकरेती

एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड का यह ऑनलाइन छात्रवृत्ति पोर्टल शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल समावेशन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। यह न केवल छात्रों को सशक्त बनाएगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाएगा।

आज वर्चुअल लैब के माध्यम से एससीईआरटी उत्तराखंड छात्रवृत्ति पोर्टल का ओरियंटेशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के समस्त उच्च प्राथमिक विद्यालयों, उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तथा इंटर कॉलेजों के संस्थाध्यक्षों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही। ओरियंटेशन के दौरान पोर्टल के विभिन्न फीचर्स, आवेदन प्रक्रिया, सत्यापन प्रणाली तथा परीक्षा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं।अब समय है कि सभी शिक्षक, अभिभावक और अधिकारी मिलकर सुनिश्चित करें कि अधिक से अधिक छात्र इस सुविधा का लाभ उठाएं और अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर एक कदम आगे बढ़ाएं। 

उत्तराखण्ड में मोबाइल उपयोग दिशानिर्देशों पर वर्चुअल ओरिएंटेशन कार्यक्रम

 

देहरादून, 15 अप्रैल 2026 – राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT), उत्तराखण्ड ने आज मोबाइल फोन के जिम्मेदार उपयोग संबंधी दिशानिर्देशों के प्रसार हेतु एक वर्चुअल अभिमुखीकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम राजीव गाँधी नवोदय विद्यालय, देहरादून स्थित वर्चुअल लैब के माध्यम से राज्यभर के शिक्षकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं विद्यालय प्रमुखों की सहभागिता के साथ संपन्न हुआ।

यह पहल माननीय शिक्षा मंत्री, निदेशक बन्दना गर्ब्याल एवं अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी के निर्देशन में, SCERT और स्वास्थ्य विभाग उत्तराखण्ड के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इसका उद्देश्य शैक्षिक परिवेश में संतुलित एवं सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देना है।

  • संदर्भदाता प्रिया गुसाईं ने मोबाइल फोन को केवल भटकाव का साधन मानने के बजाय, उचित उपयोग के साथ इसे सीखने का प्रभावी उपकरण बताया।

  • प्रमुख दिशानिर्देशों में शामिल थे:

    • स्क्रीन समय सीमित करना

    • सोने से पहले मोबाइल उपयोग से बचना

    • निगरानी में उद्देश्यपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना

    • डिजिटल वेलनेस की आदतों को अपनाना

  • अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका पर विशेष बल दिया गया कि वे स्वयं जिम्मेदार व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत करें और बच्चों के लिए संतुलित डिजिटल दिनचर्या सुनिश्चित करें।

साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान

सहायक निदेशक के. एन. बिजल्वान ने साइबर सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ऑनलाइन बुलिंग, गोपनीयता जोखिम और अनुपयुक्त सामग्री के संपर्क जैसी चुनौतियों पर चर्चा की। शिक्षकों को तकनीक का सार्थक उपयोग करते हुए शिक्षण प्रक्रिया में समाहित करने और ऑनलाइन व ऑफलाइन शिक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर SCERT ने स्पष्ट किया कि उद्देश्य मोबाइल उपयोग को समाप्त करना नहीं, बल्कि इसे एक रचनात्मक और विकासोन्मुख साधन में परिवर्तित करना है। यह अभिमुखीकरण कार्यक्रम उत्तराखण्ड में जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

Click here : SOP

Sunday, April 12, 2026

उत्तराखंड में फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी 2026- सर्वेक्षण संपन्न

प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता के आकलन हेतु व्यापक सर्वेक्षण

उत्तराखंड राज्य में प्राथमिक शिक्षा के फाउंडेशनल स्टेज की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से “फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी 2026” के अंतर्गत 272 विद्यालयों में एक व्यापक सर्वेक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह अध्ययन एनसीईआरटी, नई दिल्ली द्वारा संचालित “परख” (PARAKH) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित किया गया।

इस सर्वेक्षण में कक्षा 3 उत्तीर्ण लगभग 2705 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसमें विभिन्न प्रकार के विद्यालयों—राजकीय, निजी, केंद्रीय विद्यालय तथा मदरसा श्रेणी—के विद्यार्थियों को सम्मिलित किया गया, ताकि शिक्षा की वास्तविक स्थिति का समग्र और संतुलित आकलन किया जा सके।

अध्ययन का उद्देश्य

इस अध्ययन का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy) का परीक्षण करना था। इसके अंतर्गत बच्चों की पढ़ने, लिखने, समझने और गणना करने की क्षमता का मूल्यांकन किया गया।

विशेषज्ञों की राय

  • बंदना गर्ब्याल, निदेशक (अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण), ने कहा कि यह सर्वेक्षण राज्य में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर शिक्षण पद्धति में सुधार, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग हेतु रणनीतियाँ तैयार की जाएंगी।

  • पदमेंद्र सकलानी, अपर निदेशक, SCERT, ने इस अध्ययन को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण राज्य में इस प्रकार के सर्वेक्षण शिक्षा के स्तर को संतुलित और सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।

Tuesday, April 07, 2026

प्रवेश उत्सव 2026-27: उत्तराखंड के विद्यालयों में नई शुरुआत का उत्सव

 तारीख: 7 अप्रैल 2026 स्थान: उत्तराखंड के सभी जनपद मुख्यालयों के विद्यालय

उत्तराखंड में 7 अप्रैल 2026 का दिन विद्यालयी शिक्षा के लिए एक विशेष उत्सव का प्रतीक बन गया, जब पूरे राज्य में “प्रवेश उत्सव” बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा की नई दुनिया में स्वागत का एक प्रेरणादायक अभियान था।

प्रवेश उत्सव का उद्देश्य

इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य था:

  • नए छात्र-छात्राओं का गर्मजोशी से स्वागत करना
  • उन्हें विद्यालयी वातावरण से परिचित कराना
  • अभिभावकों को सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देना
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति विश्वास और आकर्षण बढ़ाना

पूर्व शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने भी इस उत्सव मे अपनी उपस्थिति से सभी मे जोश भरने का काम किया । 

पूरे राज्य में एक साथ आयोजन

राज्य के सभी जनपद मुख्यालयों, खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों और उनके अंतर्गत आने वाले विद्यालयों में इस उत्सव का आयोजन किया गया।
इसमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

  • निदेशक अकादमिक, बन्दना गर्ब्याल 
  • निदेशक माध्यमिक शिक्षा, डॉ  मुकुल सती 
  • निदेशक प्राथमिक शिक्षा, कंचन देवराड़ी 
  • अन्य मुख्य अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी , प्रधानाचार्य एवं शिक्षकगण

अधिकारियों ने अलग-अलग समूहों में विद्यालयों का भ्रमण कर नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत किया और उनके अभिभावकों से संवाद स्थापित किया।

विद्यार्थियों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम के दौरान बच्चों और अभिभावकों को राज्य के विद्यालयों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं से अवगत कराया गया, जैसे:

  • 🖥️ आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासेस
  • 📚 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) से प्रशिक्षित शिक्षक
  • 🎮 हैकथॉन और नवाचार आधारित गतिविधियाँ
  • 🌐 ऑनलाइन कोर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म
  • 📺 PM eVIDYA चैनल्स
  • 📲 दीक्षा (DIKSHA) प्लेटफॉर्म के माध्यम से ई-लर्निंग
  • 🎓 छात्रवृत्ति योजनाएँ और अन्य सरकारी सुविधाएँ

इन सभी पहलों का उद्देश्य कक्षा-कक्ष शिक्षण को अधिक रोचक, इंटरैक्टिव और प्रभावी बनाना है।

निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल  एवं एस सी ई आर टी के से अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी एवं संकाय समूह ने इस अवसर पर सभी अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील की कि वे:

  • नवप्रवेशी बच्चों का आत्मीयता से स्वागत करें
  • उन्हें विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करें
  • अभिभावकों के साथ संवाद कर विश्वास का वातावरण बनाएँ

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक

विद्यालयों के प्रांगण में:

  • रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • स्वागत समारोह
  • छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियाँ

इन सबने उत्सव को और भी जीवंत और यादगार बना दिया।

एक नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

“प्रवेश उत्सव 2026” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सकारात्मक पहल है जो:

  • बच्चों के मन में विद्यालय के प्रति अपनापन पैदा करती है
  • शिक्षा के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाती है
  • नई पीढ़ी को रचनात्मक और नवाचारी बनने के लिए प्रेरित करती है

उत्तराखंड का यह सामूहिक प्रयास यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक अनुभव है—जो स्वागत, संवाद और प्रेरणा से शुरू होता है।

Monday, April 06, 2026

मिशन कर्मयोगी साधना सप्ताह वेबिनार संगोष्ठी

 

2–8 अप्रैल 2026 |  ऑनलाइन (Zoom एवं YouTube लाइव)


शिक्षा के बदलते परिदृश्य में डिजिटल दक्षता और निरंतर सीखने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसी दिशा में मिशन कर्मयोगी साधना सप्ताह के अंतर्गत एक भव्य वेबिनार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसने उत्तराखण्ड के शिक्षा जगत को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।

यह आयोजन केवल एक वेबिनार नहीं था, बल्कि शिक्षकों और अधिकारियों के लिए आत्म-विकास, तकनीकी सशक्तिकरण और नवाचार की ओर एक संगठित कदम था।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखण्ड एवं विद्यालयी शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में—

  • प्रदेश के 13 जनपदों से 500+ अधिकारी एवं शिक्षक Zoom के माध्यम से जुड़े
  • YouTube लाइव पर 7,000+ प्रतिभागियों ने सहभागिता की
  • कार्यक्रम ने राज्यव्यापी डिजिटल सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया

यह सहभागिता दर्शाती है कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों के प्रति जागरूकता और रुचि तेजी से बढ़ रही है।

कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल द्वारा किया गया।

उन्होंने अपने संबोधन में—

  • सभी प्रतिभागियों को साधना सप्ताह (2–8 अप्रैल) के दौरान 4 घंटे का ऑनलाइन कोर्स पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया
  • मिशन कर्मयोगी को आत्म-विकास का अभियान बताते हुए इसे शिक्षकों और अधिकारियों के लिए एक सुनहरा अवसर बताया

उनका संदेश स्पष्ट था—
👉 “डिजिटल युग में शिक्षक का निरंतर सीखना ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।”

प्रगति समीक्षा और डेटा आधारित दृष्टिकोण

माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक पंकज शर्मा ने—

  • मिशन कर्मयोगी पोर्टल पर अब तक की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की
  • चार्ट और डेटा के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया

यह सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा क्योंकि—

  • इससे प्रतिभागियों को अपनी स्थिति का मूल्यांकन करने का अवसर मिला
  • डेटा आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को बढ़ावा मिला

iGOT कर्मयोगी पोर्टल का अभिमुखीकरण

अकादमिक नोडल रमेश बडोनी द्वारा iGOT कर्मयोगी पोर्टल का विस्तृत परिचय दिया गया।

इस सत्र में शामिल मुख्य बिंदु—

  • REM लॉगिन प्रक्रिया का चरणबद्ध प्रदर्शन
  • पोर्टल की उपयोगिता और नेविगेशन
  • कोर्स चयन और पूर्णता की प्रक्रिया
  • डिजिटल लर्निंग के व्यावहारिक पहलू

इस प्रस्तुतीकरण ने प्रतिभागियों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक दक्षता भी प्रदान की।

सहभागिता: संवाद और सुझाव

इस संगोष्ठी की एक विशेषता रही इसकी इंटरएक्टिव प्रकृति

  • प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से अपने विचार साझा किए
  • अधिकारियों ने सुझावों को गंभीरता से सुना और चर्चा में शामिल किया
  • इससे कार्यक्रम अधिक सहभागी और प्रभावी बना


कार्यक्रम के अंत में निदेशक द्वारा सभी प्रतिभागियों से—

  • मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों को आत्मसात करने
  • साधना सप्ताह में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने
  • निरंतर सीखने की संस्कृति अपनाने

का आह्वान किया गया। उनका संदेश था— 

“सच्चा कर्मयोगी वही है जो सीखने को अपनी दिनचर्या बना ले।”

यह वेबिनार संगोष्ठी केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि—

  • डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत कदम
  • शिक्षकों और अधिकारियों के लिए आत्म-विकास का मंच
  • शिक्षा प्रणाली में सतत सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने वाला प्रयास

मिशन कर्मयोगी के माध्यम से उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि—

भविष्य की शिक्षा प्रणाली तकनीक, नवाचार और सहयोग पर आधारित होगी- यह संगोष्ठी केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत थी— जहाँ शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि निरंतर सीखने वाले कर्मयोगी बनते हैं।