कार्यशाला में INSPIRE Award – MANAK कार्यक्रम के 2023–24 एवं 2024–25 बैच के उत्तराखण्ड के 28 राज्य स्तरीय विजेता विद्यार्थियों तथा हिमाचल प्रदेश के 5 चयनित विद्यार्थियों ने सहभागिता की। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने से पूर्व विद्यार्थियों को अपने नवाचारों को तकनीकी, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने के लिए विशेषज्ञों द्वारा व्यक्तिगत मार्गदर्शन, तकनीकी सुझाव तथा आवश्यक आर्थिक सहयोग की जानकारी प्रदान की गई।
दो दिनों तक चले इस गहन मेंटरिंग सत्र में विद्यार्थियों ने अपने-अपने प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए, जिन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा करते हुए उनके डिजाइन, कार्यप्रणाली, उपयोगिता, लागत, नवाचार, प्रस्तुतीकरण तथा वास्तविक जीवन में उनके संभावित प्रभाव के आधार पर सुधार के सुझाव दिए। इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार के प्रति आत्मविश्वास को और अधिक मजबूत किया।
कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इनमें दून विश्वविद्यालय से डॉ. धृति ढौंढियाल, IRDE से डॉ. आर. पी. नौटियाल, UPES से डॉ. शांतनु अग्निहोत्री एवं डॉ. पियूष, DIT University से डॉ. नितिन कुमार गुप्ता, तथा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) से सुनील भास्कर एवं पारस प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के मानकों के अनुरूप अपने प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी एवं शोध संबंधी सुझाव दिए।
कार्यशाला का सफल समन्वयन INSPIRE Award कार्यक्रम के राज्य समन्वयक डॉ. अवनीश उनियाल द्वारा किया गया। उनके नेतृत्व में सम्पूर्ण कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया, जिससे विद्यार्थियों को प्रत्येक चरण में विशेषज्ञों से व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सका। इस अवसर पर विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं मार्गदर्शक शिक्षकों की भी सक्रिय उपस्थिति रही। उनकी सहभागिता ने यह संदेश दिया कि किसी भी नवाचार की सफलता में विद्यालय, शिक्षक, परिवार और विशेषज्ञों का सामूहिक सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
समापन सत्र में SCERT उत्तराखण्ड के अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान केवल खोज का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे प्रभावशाली साधन है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अपने ज्ञान, समय और परिश्रम को समाज के कल्याण के लिए समर्पित करते हैं तथा उनका एकमात्र उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होता है। उन्होंने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखण्ड के ये युवा नवाचारी राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और राज्य का नाम गौरवान्वित करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह दो दिवसीय मेंटरिंग कार्यशाला केवल तकनीकी मार्गदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक अनुसंधान, समस्या समाधान और उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में भविष्य के वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों और परिवर्तनकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में उत्तराखण्ड की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित करते हैं।