Wednesday, October 28, 2026

उत्तराखण्ड में आपदा प्रबंधन को लेकर शिक्षा विभाग और एससीईआरटी की उच्चस्तरीय बैठक सम्पन्न


विद्यालयों में आपदा सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर जोर, प्रत्येक विद्यालय में गठित होगी आपदा प्रबंधन समिति; जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर तय की गई जिम्मेदारियाँ

देहरादून, 28 अक्टूबर 2026। उत्तराखण्ड में विद्यालयों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित, सतर्क और सक्षम बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विद्यालय स्तर पर आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा स्कूल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान (SDMP) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के विद्यालयों को संभावित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति तैयार करना, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यालय समुदाय की सुरक्षा के लिए एक प्रभावी प्रशासनिक एवं संस्थागत तंत्र विकसित करना रहा।

विद्यालयों में आपदा प्रबंधन के लिए संयुक्त कार्ययोजना होगी तैयार

बैठक में निर्णय लिया गया कि महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा, प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशालय तथा एससीईआरटी उत्तराखण्ड के समन्वय से एक व्यापक विभागीय संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस कार्ययोजना में विद्यालयों की सुरक्षा, आपदा पूर्व तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, आपातकालीन प्रतिक्रिया तथा विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा।

जनपद स्तर पर जिला शिक्षा अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) को 'डिस्ट्रिक्ट स्कूल डिजास्टर कोऑर्डिनेटर' नामित करने का निर्णय लिया गया। ये अधिकारी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के साथ समन्वय स्थापित कर विद्यालयों में आपदा सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों की निगरानी करेंगे।

विकासखण्ड स्तर पर खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) अपने क्षेत्र के विद्यालयों से आपदा संबंधी सूचनाओं का वास्तविक समय में संकलन करेंगे तथा आवश्यकतानुसार इन सूचनाओं को जनपद एवं राज्य स्तर तक पहुँचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

प्रत्येक विद्यालय में गठित होगी आपदा प्रबंधन समिति

बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्णय प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक अथवा प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में 'विद्यालय आपदा प्रबंधन समिति' का गठन करना रहा। यह समिति विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विद्यालय की आपदा सुरक्षा संबंधी गतिविधियों का संचालन करेगी।

इस पहल से विद्यालय स्तर पर सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण होने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बढ़ेगी।

विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

बैठक में यह भी तय किया गया कि जिला, ब्लॉक एवं विद्यालय स्तर पर राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, पेयजल, अग्निशमन, एसडीआरएफ (SDRF), वन, परिवहन तथा सूचना विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वित रूप से आपदा सुरक्षा कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस अंतरविभागीय समन्वय का उद्देश्य किसी भी आपातकालीन स्थिति में विद्यालयों को समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सुरक्षित विद्यालय, सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों एवं प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए विद्यालयों में प्रभावी आपदा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा विभाग एवं एससीईआरटी की यह पहल विद्यालयों में आपदा के प्रति जागरूकता, संस्थागत तैयारी तथा प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बैठक के अंत में सभी अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए इस महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक का समापन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग एवं एससीईआरटी उत्तराखण्ड के अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

समर्थ शिक्षक–सशक्त भारत: आगरा में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा सम्मेलन -2026

 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल; राष्ट्रीय शिक्षक व्यावसायिक मानक (NPST) और राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (NMM) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन

आगरा, उत्तर प्रदेश | 27–28 अक्टूबर 2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के दूरदर्शी संकल्पों को धरातल पर उतारने तथा देश में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता, व्यावसायिक दक्षता और सतत व्यावसायिक विकास को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से ताजनगरी आगरा में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "समर्थ शिक्षक–सशक्त भारत" का भव्य शुभारंभ हुआ।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के जयप्रकाश सभागार में 27 एवं 28 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में शिक्षक शिक्षा के भविष्य, डिजिटल नवाचार, व्यावसायिक मानकों और प्रभावी मेंटरिंग व्यवस्था पर विशेष मंथन किया जा रहा है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया सम्मेलन का उद्घाटन

सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी तथा संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान के निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा सहित अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री  जयंत चौधरी का विशेष वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया। उन्होंने शिक्षक शिक्षा में सुधार, व्यावसायिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

NPST और NMM के माध्यम से शिक्षक शिक्षा को मिलेगी नई दिशा

आगामी शैक्षणिक सत्र 2026–27 के दृष्टिगत आयोजित इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षक व्यावसायिक मानक (National Professional Standards for Teachers – NPST) तथा राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (National Mission for Mentoring – NMM) के चरणबद्ध क्रियान्वयन को प्रभावी बनाना है।

सम्मेलन में विशेष रूप से शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षताओं के मानकीकरण, अनुभवी शिक्षकों द्वारा नवप्रवेशी शिक्षकों के मार्गदर्शन, डिजिटल ऑनबोर्डिंग, संस्थागत क्षमता निर्माण तथा सतत व्यावसायिक विकास की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

इन पहलों का उद्देश्य शिक्षक को केवल पाठ्यक्रम संचालक के रूप में नहीं, बल्कि एक कुशल मार्गदर्शक, नवाचारी शिक्षाविद्, चिंतनशील अभ्यासकर्ता और आजीवन शिक्षार्थी के रूप में विकसित करना है।

समावेशी शिक्षा की प्रेरक पहल

सम्मेलन की एक विशेष उपलब्धि कार्यक्रम संचालन में सांकेतिक भाषा (Sign Language) का समानांतर उपयोग रहा। यह पहल समावेशी शिक्षा, समान अवसर और सभी के लिए सुगम संवाद के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है।

डिजिटल नवाचार और व्यावसायिक विकास पर विशेष बल

वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल शिक्षण संसाधन, ऑनलाइन प्रशिक्षण और तकनीक-सक्षम शिक्षण पद्धतियाँ शिक्षक शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।

ऐसे में NPST और NMM जैसी राष्ट्रीय पहलों का प्रभावी क्रियान्वयन शिक्षकों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, सहयोगात्मक अधिगम, पेशेवर मार्गदर्शन और नवाचार आधारित शैक्षिक वातावरण विकसित करने में सहायक हो सकता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षक क्षमता निर्माण की यह प्रक्रिया विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

समर्थ शिक्षक से ही बनेगा सशक्त भारत

दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "समर्थ शिक्षक–सशक्त भारत" शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता, उत्तरदायित्व, नवाचार और व्यावसायिक उत्कृष्टता को संस्थागत स्वरूप प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

यह सम्मेलन इस विचार को रेखांकित करता है कि एक सशक्त शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला समर्थ, प्रशिक्षित, संवेदनशील और नवाचारी शिक्षक ही हैं।

शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास, प्रभावी मेंटरिंग और तकनीकी सशक्तीकरण के माध्यम से ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिकल्पनाओं को विद्यालयों की वास्तविक शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में प्रभावी रूप से साकार किया जा सकता है।

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Tuesday, October 27, 2026

गोल्डन आवर में घायल की मदद करें, बनें नेक नागरिक: सड़क सुरक्षा कार्यशाला का समापन

 

सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस उपचार की सुविधा; 810 शिक्षकों के माध्यम से 20 हजार विद्यार्थियों तक पहुंचेगा सड़क सुरक्षा का संदेश।

दिनेशपुर, ऊधमसिंह नगर | 27 अक्टूबर 2026

एससीईआरटी उत्तराखंड के सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ के अंतर्गत अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, दिनेशपुर में आयोजित चार दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स कार्यशाला का सफल समापन हुआ। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के डायट प्रतिनिधियों एवं शिक्षकों ने सड़क सुरक्षा, प्राथमिक उपचार, गोल्डन आवर तथा नेक नागरिक (Good Samaritan) की भूमिका पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

810 शिक्षक करेंगे 20 हजार विद्यार्थियों को जागरूक

राज्य समन्वयक विनय थपलियाल ने बताया कि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से लगभग 810 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जो आगे 20 हजार विद्यार्थियों को यातायात नियमों, हेलमेट, सीट बेल्ट और सुरक्षित सड़क व्यवहार के प्रति जागरूक करेंगे।

गोल्डन आवर में मदद से बच सकती है जान

कार्यशाला में बताया गया कि दुर्घटना के बाद शुरुआती महत्वपूर्ण समय में त्वरित चिकित्सा सहायता जीवनरक्षक हो सकती है। भारत सरकार की PM-RAHAT योजना के अंतर्गत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को निर्धारित शर्तों के अनुसार अधिकतम सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने वाले नेक नागरिकों को कानूनी संरक्षण एवं सम्मान देने की व्यवस्था भी है।

परिवहन अधिकारियों ने प्रदान किए प्रमाणपत्र

समापन अवसर पर आरटीओ हल्द्वानी अरविंद पांडेय एवं एआरटीओ ऊधमसिंह नगर नवीन सिंह ने यातायात नियमों, सुरक्षित वाहन संचालन एवं दुर्घटना से बचाव की जानकारी दी तथा प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स को प्रमाणपत्र प्रदान किए। कार्यशाला के सफल आयोजन में एससीईआरटी के अखिलेश डोभाल एवं संजय भट्ट का विशेष योगदान रहा।


कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात नियमों का पालन नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी है।

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