Saturday, October 10, 2026

RIE अजमेर में भारतीय ज्ञान परंपरा पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न: उत्तराखंड के छह शिक्षकों ने किया प्रतिभाग

 

अजमेर, 10 अक्टूबर 2026। क्षेत्रीय शिक्षण संस्थान (RIE), NCERT अजमेर में 5 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में मिडिल स्टेज के सामाजिक विज्ञान शिक्षण में भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems–IKS) के प्रभावी समावेशन पर विशेष मंथन किया गया। इस ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण में उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल अवधारणाओं, प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं प्रमाणों के साथ कक्षा-कक्ष शिक्षण से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने अपने क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक श्रेष्ठ परंपराओं को साझा कर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार किया।

उत्तराखंड से छह शिक्षकों ने किया प्रतिभाग

प्रशिक्षण में उत्तराखंड से छह प्रतिभागी शामिल हुए—

  • रविदर्शन तोपाल 
  • डॉ. ताजबर पड़िहार – देहरादून
  • दीपिका श्रीवास्तव – टिहरी गढ़वाल
  • सुरेंद्र कंडवाल – चमोली
  • शीशपाल पंवार – रुद्रप्रयाग
  • चंद्रा अधिकारी – चंपावत

प्रशिक्षण के अतिरिक्त प्रतिभागियों ने अजमेर एवं पुष्कर के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों, जिनमें ब्रह्मा मंदिर, सावित्री मंदिर, जैन मंदिर तथा ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह शामिल हैं, का शैक्षिक भ्रमण किया। इस दौरान भारतीय स्थापत्य कला, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक जीवन का प्रत्यक्ष अवलोकन भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।

विशेष आभार एवं शैक्षिक उपलब्धि

प्रतिभागियों ने RIE अजमेर के विद्वान संकाय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से डॉ. गणेश जोशी, असिस्टेंट प्रोफेसर, RIE अजमेर एवं उत्तराखंड के नोडल मार्गदर्शक, के योगदान की सराहना की गई। उत्तराखंड की धरती से जुड़े डॉ. जोशी भारतीय ज्ञान परंपरा एवं शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवाएँ दे रहे हैं।

यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप भारतीय ज्ञान, वैज्ञानिक चिंतन और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ। प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव उत्तराखंड के विद्यालयों में सामाजिक विज्ञान शिक्षण को अधिक संदर्भपरक, अनुभवात्मक और समृद्ध बनाने में सहायक होंगे।

Thursday, October 08, 2026

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रतियोगिता 2026 में उत्तराखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल का शानदार प्रदर्शन: दो विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर रचा इतिहास

 

पौड़ी गढ़वाल के पाबौ विकासखंड स्थित छोटे से राजकीय प्राथमिक विद्यालय के पांच नन्हे विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा गीत और नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर उत्तराखंड की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को गौरवान्वित किया।

देहरादून/पौड़ी गढ़वाल | 08 अक्टूबर 2026 | विशेष शैक्षिक उपलब्धि

पहाड़ के नन्हे सितारों की राष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि

उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में नवाचार, रचनात्मक शिक्षण और डिजिटल साक्षरता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पाबौ स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल से सामने आया है।

विद्यालय के पांच प्रतिभाशाली विद्यार्थियों दक्षित, अनमोल, आराध्या, यशवंत एवं शीतल ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रतियोगिता 2026 (National Cyber Security Awareness Competition 2026) की दो अलग-अलग विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय, जनपद एवं उत्तराखंड राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि प्राथमिक कक्षाओं में अध्ययनरत इन बच्चों ने साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण और तकनीकी विषय को गीत-संगीत तथा नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सरल, रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दोहरी सफलता

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (Information Security Education and Awareness – ISEA) पहल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं नागरिकों में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, साइबर स्वच्छता और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूकता विकसित करना है।

जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान आयोजित इस राष्ट्रीय पहल में देशभर के विद्यार्थियों को रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संबंधी संदेश प्रसारित करने का अवसर प्रदान किया गया।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल के विद्यार्थियों ने दो प्रमुख श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।

प्रथम उपलब्धि: साइबर स्वच्छता गीत (Cyber Hygiene Song) में प्रथम स्थान

विद्यालय के बच्चों ने साइबर सुरक्षा पर आधारित एक आकर्षक, लयबद्ध और संदेशपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।

गीत के माध्यम से बच्चों ने मजबूत पासवर्ड बनाने, अनजान लिंक से सावधान रहने, व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखने तथा इंटरनेट का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने जैसे महत्वपूर्ण संदेश दिए।

संगीत और रचनात्मक अभिव्यक्ति का यह प्रयोग दर्शाता है कि कठिन तकनीकी विषयों को भी छोटे बच्चों तक आनंददायक शिक्षण विधियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।

द्वितीय उपलब्धि: नुक्कड़ नाटक (Street Play) में प्रथम स्थान

दूसरी श्रेणी में विद्यार्थियों ने साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल गोपनीयता तथा इंटरनेट पर सुरक्षित व्यवहार से संबंधित विषयों पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।

नाटक में बच्चों ने संवाद, अभिनय और वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से यह संदेश दिया कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रस्तुति ने यह सिद्ध किया कि प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थी भी उपयुक्त मार्गदर्शन मिलने पर साइबर सुरक्षा जैसे समकालीन विषयों को समझकर समाज तक उपयोगी संदेश पहुंचा सकते हैं।

शिक्षक डॉ. अतुल बमराड़ा का नवाचारी मार्गदर्शन 

इस उल्लेखनीय उपलब्धि के पीछे विद्यालय के सहायक अध्यापक डॉ. अतुल बमराड़ा का विशेष शैक्षिक योगदान रहा।

उन्होंने साइबर सुरक्षा जैसे जटिल विषय को प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों की समझ के अनुरूप सरल बनाया और गीत तथा नुक्कड़ नाटक जैसी कला-समेकित शिक्षण विधियों के माध्यम से बच्चों को राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयार किया।

उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने केवल प्रतियोगिता के लिए प्रस्तुतियां तैयार नहीं कीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन जिम्मेदारी और साइबर जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण जीवनोपयोगी कौशल भी सीखे।

यह सफलता दर्शाती है कि एक समर्पित और नवाचारी शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विद्यालय नेतृत्व एवं शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती नंदा रावत ने विद्यार्थियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे विद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास की सराहना की।

निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड, श्रीमती बंदना गर्ब्याल ने इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों और मार्गदर्शक शिक्षक को बधाई देते हुए इसे सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षा की दिशा में प्रेरणादायक सफलता बताया।

इसी क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी, पाबौ, श्री अमित चौहान ने भी विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार को शुभकामनाएं देते हुए इस उपलब्धि को विकासखंड के लिए गौरव का विषय बताया।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल की यह सफलता राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उस भावना को साकार करती है, जिसमें अनुभवात्मक अधिगम, कला-समेकित शिक्षण, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन तथा जीवनोपयोगी कौशलों के विकास पर विशेष बल दिया गया है।

आज डिजिटल तकनीक बच्चों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। ऐसे में प्राथमिक स्तर से ही साइबर सुरक्षा, डिजिटल नागरिकता और जिम्मेदार इंटरनेट व्यवहार के प्रति जागरूकता विकसित करना आवश्यक है।

गीत, नाटक, कहानी, गतिविधि और सामूहिक प्रस्तुति जैसी शिक्षण विधियां बच्चों को जटिल अवधारणाओं को सहज रूप से समझने तथा लंबे समय तक याद रखने में सहायता करती हैं।

यह उपलब्धि उत्तराखंड के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत है कि वे पाठ्यक्रम आधारित शिक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों को रचनात्मक, व्यावहारिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने के अवसर प्रदान करें।

SCERT उत्तराखंड से नन्हे विजेताओं को हार्दिक बधाई

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड की ओर से राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल के पांचों प्रतिभाशाली विद्यार्थियों—दक्षित, अनमोल, आराध्या, यशवंत एवं शीतल—को इस दोहरी राष्ट्रीय सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।

साथ ही मार्गदर्शक शिक्षक डॉ. अतुल बमराड़ा, प्रधानाध्यापिका  नंदा रावत तथा विद्यालय से जुड़े सभी शिक्षकों एवं शिक्षा अधिकारियों के प्रयास सराहनीय हैं।

यह उपलब्धि केवल दो राष्ट्रीय पुरस्कारों की सफलता नहीं, बल्कि इस विश्वास की जीत है कि उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा, रचनात्मकता और नवाचार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

छोटे विद्यालय, बड़े सपने और राष्ट्रीय पहचान—यही है बदलते उत्तराखंड की शिक्षा की प्रेरणादायक तस्वीर।

आधिकारिक परिणामों से उपलब्धि की पुष्टि

प्रतियोगिता के आधिकारिक परिणाम पोर्टल पर उत्तराखंड की दोनों विजेता टीमों का विवरण उपलब्ध है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दोनों प्रथम पुरस्कार राज्यस्तरीय विजेता श्रेणी में दर्ज हैं, न कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय विजेता श्रेणी में।

प्रतियोगिता

विजेता टीम

पुरस्कार

        यूनिक आईडी

साइबर सुरक्षा गीत  

 Anmol & Team

            उत्तराखंड में प्रथम

                HS08240

नुक्कड़ नाटक

Dakshit & Team

            उत्तराखंड में प्रथम                     

                NN08241

इसलिए प्रकाशन में उपलब्धि को “राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रतियोगिता 2026 में उत्तराखंड की दो विधाओं में राज्यस्तरीय प्रथम पुरस्कार” लिखना अधिक तथ्यपरक होगा।

हैकथॉन 3.0 की सफलता के लिए SCERT उत्तराखंड की बड़ी पहल: 100 से अधिक मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों को ऑनलाइन अभिमुखीकरण प्रशिक्षण

 

नवाचार, तकनीकी दक्षता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग द्वारा राज्यस्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन; शिक्षकों को हैकथॉन पोर्टल पर आवेदन, पात्रता, मेंटरिंग, मूल्यांकन एवं जनपदस्तरीय समन्वय की दी गई विस्तृत जानकारी।

देहरादून | 08 अक्टूबर 2026 | SCERT उत्तराखंड

हैकथॉन 3.0: शिक्षकों और विद्यार्थियों में नवाचार की संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के R P Badoni  द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग द्वारा संचालित इनोवेट उत्तराखंड हैकथॉन 3.0 (Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0) के सफल क्रियान्वयन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से एक राज्यस्तरीय ऑनलाइन अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई।

इस कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से 100 से अधिक मेंटर शिक्षकों, सुपरवाइजर शिक्षकों, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) के आईटी विभाग के प्रतिनिधियों, कौशलम कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों, इंस्पायर अवॉर्ड से संबंधित शिक्षकों तथा ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) एवं क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (CRP) ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य हैकथॉन 3.0 की अवधारणा, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता संबंधी मानदंड, तकनीकी प्रक्रियाओं तथा मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों की जिम्मेदारियों के संबंध में सभी प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।

यह पहल प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या-समाधान कौशल, डिजिटल दक्षता और उद्यमशीलता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

आईटी विभाग द्वारा हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण: पोर्टल की प्रत्येक प्रक्रिया को उदाहरण सहित समझाया गया

ऑनलाइन कार्यशाला का संचालन एवं प्रशिक्षण SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग के प्रवक्ता श्री रमेश चौधरी द्वारा किया गया।

उन्होंने प्रतिभागियों को लाइव डेमोंस्ट्रेशन और हैंड्स-ऑन ट्यूटोरियल के माध्यम से हैकथॉन 3.0 के आधिकारिक पोर्टल की कार्यप्रणाली समझाई।

प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई—

  1. हैकथॉन पोर्टल पर लॉगिन: उम्मीदवार किस प्रकार पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर सकते हैं।

  2. अभ्यर्थियों की पात्रता: छात्र, शिक्षक, DIET एवं SCERT संकाय सदस्य तथा अन्य निर्धारित श्रेणियों में कौन आवेदन कर सकता है।

  3. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया: उम्मीदवारों की जानकारी, परियोजना का विवरण और आवश्यक सूचनाओं को पोर्टल पर दर्ज करने की प्रक्रिया।

  4. नवाचार आधारित परियोजना चयन: स्थानीय समस्याओं की पहचान करके उन्हें व्यावहारिक एवं तकनीकी समाधान में परिवर्तित करने के उदाहरण।

  5. मेंटर शिक्षकों की भूमिका: विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को परियोजना तैयार करने, समस्या पहचानने, समाधान विकसित करने और आवेदन करने में सहयोग प्रदान करना।

  6. सुपरवाइजर शिक्षकों की जिम्मेदारियां: विद्यालय, संकुल, विकासखंड और जनपद स्तर पर आवेदन एवं प्रतिभागिता की निगरानी और समन्वय करना।

प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की संभावित परियोजनाओं के उदाहरण प्रस्तुत किए गए, जिससे प्रतिभागियों को यह समझने में सहायता मिली कि सामान्य विद्यालयी समस्याओं को भी नवाचार आधारित परियोजनाओं का रूप दिया जा सकता है।

पिछले हैकथॉन विजेताओं की सफलता से प्रेरणा लेने का आह्वान

कार्यशाला के दौरान पूर्व वर्षों में आयोजित इनोवेट उत्तराखंड हैकथॉन 1.0 एवं 2.0 की उपलब्धियों, विजेता शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की नवाचारी परियोजनाओं की जानकारी भी साझा की गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि किस प्रकार राज्य के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्थानीय समस्याओं को पहचानकर रचनात्मक एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए तथा राज्यस्तरीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

पूर्व के दोनों संस्करणों में संयुक्त रूप से 4,900 से अधिक परियोजना प्रस्ताव प्राप्त हुए तथा 430 से अधिक प्रस्ताव विभिन्न चरणों में चयनित हुए। इन उपलब्धियों ने राज्य में नवाचार आधारित गतिविधियों के प्रति शिक्षकों और विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि को रेखांकित किया है।

हैकथॉन 2.0 के विजेता विद्यार्थियों द्वारा आगे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने जैसे उदाहरणों से भी यह संदेश दिया गया कि विद्यालय स्तर पर विकसित एक छोटा नवाचार भविष्य में बड़े शोध, स्टार्टअप अथवा सामाजिक समाधान का आधार बन सकता है।

मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका

अभिमुखीकरण कार्यक्रम में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि हैकथॉन 3.0 को प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों, ग्रामीण विद्यालयों एवं सीमित संसाधनों वाले संस्थानों तक पहुंचाने में मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

सभी संबंधित शिक्षकों से अनुरोध किया गया कि वे अपने जनपदों, विकासखंडों और संकुलों में हैकथॉन 3.0 के संबंध में व्यापक जागरूकता विकसित करें तथा अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को आवेदन करने के लिए प्रेरित करें।

इसके अंतर्गत मेंटर शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे नवाचार में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों की पहचान करें, उन्हें उपयुक्त विषय चुनने में मार्गदर्शन दें और उनके विचारों को परियोजना प्रस्ताव में परिवर्तित करने में सहयोग करें।

वहीं सुपरवाइजर शिक्षकों को आवेदन प्रक्रिया की निगरानी, विद्यालयों से समन्वय तथा प्रतिभागियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड संधारित करने के लिए प्रेरित किया गया।

मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों के लिए मानदेय तथा उत्तरदायित्व

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि हैकथॉन 3.0 के अंतर्गत निर्धारित कार्यों में योगदान देने वाले पात्र मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों के लिए प्रचलित नियमों, स्वीकृत व्यवस्था एवं निर्धारित मानदंडों के अनुसार मानदेय का प्रावधान रहेगा।

इसके लिए शिक्षकों को सौंपे गए दायित्वों का प्रभावी निर्वहन तथा उनके कार्यों का समुचित अभिलेखीकरण आवश्यक होगा।

विशेष रूप से निम्नलिखित कार्यों पर ध्यान देने का अनुरोध किया गया—

  • अपने जनपद, विकासखंड एवं संकुल स्तर पर हैकथॉन 3.0 का प्रचार-प्रसार करना।

  • पात्र विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रोत्साहित करना।

  • आवेदन करने वाले शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का विद्यालयवार, विकासखंडवार एवं जनपदवार रिकॉर्ड रखना।

  • आवेदकों को पोर्टल से संबंधित तकनीकी समस्याओं के समाधान में सहयोग देना।

  • नवाचार परियोजनाओं के विकास में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना।

  • निर्धारित प्रारूप में प्रगति रिपोर्ट एवं आवेदन संबंधी सूचनाएं संबंधित समन्वयकों तक पहुंचाना।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल आवेदन संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं की पहचान, निरंतर मार्गदर्शन और पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करना है।

कौशलम, इंस्पायर अवॉर्ड और DIET की सहभागिता से नवाचार को मिलेगा नया विस्तार

कार्यशाला की एक महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों एवं संस्थागत नेटवर्क से जुड़े शिक्षकों की सहभागिता रही।

कौशलम कार्यक्रम से जुड़े शिक्षक विद्यार्थियों में व्यावसायिक कौशल, उद्यमशीलता और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान संबंधी क्षमताओं को विकसित करने में सहयोग कर सकते हैं।

इसी प्रकार इंस्पायर अवॉर्ड से जुड़े शिक्षक वैज्ञानिक नवाचार, प्रयोग आधारित अधिगम तथा मौलिक विचारों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

DIET के आईटी विभाग तथा BRP एवं CRP नेटवर्क की सहभागिता से हैकथॉन की गतिविधियों को विद्यालयों तक पहुंचाने, शिक्षकों का मार्गदर्शन करने और विकासखंड स्तर पर नियमित समन्वय स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

इस प्रकार हैकथॉन 3.0 को विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों के बीच सहयोग एवं समन्वय स्थापित करने वाले मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

नवाचार के प्रमुख क्षेत्र

इनोवेट उत्तराखंड हैकथॉन 3.0 के अंतर्गत प्रतिभागियों को विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक एवं तकनीकी चुनौतियों पर आधारित परियोजनाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इनमें प्रमुख रूप से शिक्षा एवं स्मार्ट लर्निंग, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, कृषि एवं ग्रामीण विकास, पर्यटन, बालिका शिक्षा, समावेशी शिक्षा, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, कोडिंग तथा गेम आधारित अधिगम जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं, वन्यजीव सुरक्षा, जल संरक्षण, आपदा पूर्व चेतावनी और दूरस्थ विद्यालयों के लिए कम लागत वाले तकनीकी समाधानों पर आधारित परियोजनाएं विशेष रूप से उपयोगी हो सकती हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप पहल

हैकथॉन 3.0 की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उन उद्देश्यों के अनुरूप है, जिनमें अनुभवात्मक अधिगम, आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, समस्या-समाधान और कौशल आधारित शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तक आधारित ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों को समझने, उनके समाधान खोजने और अपने विचारों को व्यवहार में लागू करने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

साथ ही शिक्षक भी पारंपरिक अध्यापन की भूमिका से आगे बढ़कर नवाचार के मार्गदर्शक, परियोजना मेंटर तथा सहयोगात्मक अधिगम के प्रेरक के रूप में कार्य कर सकते हैं।

राज्यव्यापी सहभागिता और प्रभावी निगरानी की दिशा में प्रयास

SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग द्वारा आयोजित यह अभिमुखीकरण कार्यशाला हैकथॉन 3.0 के प्रभावी संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

100 से अधिक शिक्षकों एवं शैक्षिक समन्वयकों की सहभागिता यह दर्शाती है कि राज्य में नवाचार आधारित गतिविधियों को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने के लिए एक व्यापक सहयोगी नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।

आगामी चरणों में मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों के माध्यम से अधिकाधिक विद्यालयों तक पहुंच बनाना, पात्र प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करना, गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना तथा आवेदन एवं परियोजना प्रगति का व्यवस्थित अभिलेखीकरण करना कार्यक्रम की प्रमुख प्राथमिकताएं रहेंगी।

हैकथॉन 3.0: हर विद्यालय से एक नवाचार, हर विद्यार्थी को एक अवसर

इनोवेट उत्तराखंड हैकथॉन का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में ऐसी नवाचार संस्कृति विकसित करना है, जिसमें विद्यार्थी समस्याओं को अवसर के रूप में देखें और शिक्षक उनके विचारों को वास्तविक समाधान में बदलने के लिए प्रेरित करें।

SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग द्वारा आयोजित यह ऑनलाइन अभिमुखीकरण कार्यशाला इसी व्यापक उद्देश्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

शिक्षकों, DIET संकाय सदस्यों, BRP, CRP और विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों से जुड़े मेंटरों का संयुक्त प्रयास हैकथॉन 3.0 को राज्य के दूरस्थ विद्यालयों तक पहुंचाने और उत्तराखंड को विद्यालयी नवाचार के एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायक हो सकता है।

आइए, नवाचार को प्रत्येक विद्यालय तक पहुंचाएं और उत्तराखंड के विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को नई पहचान दें।