Thursday, July 16, 2026

हरेला पर्व : विद्यालयी शिक्षा परिसर उत्तराखण्ड में हरियाली, संरक्षण और सतत विकास का संदेश

उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपरा एवं प्रकृति संरक्षण के प्रतीक हरेला पर्व के अवसर पर विद्यालयी शिक्षा परिसर उत्तराखण्ड  में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। इस अवसर पर परिषद परिवार ने केवल पौधारोपण ही नहीं किया, बल्कि परिसर में पूर्व से लगे वृक्षों का सर्वेक्षण कर उनके संरक्षण, संवर्धन एवं दीर्घकालिक देखभाल के लिए भी सामूहिक रूप से विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड  आकांक्षा कोंडे तथा निदेशक अकादमिक एवं शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल, माध्यमिक निदेशक विनोद सेमल्टी , संयुक्त निदेशक जे पी काला, सीमेट, प्रारम्भिक शिक्षा के अधिकारी एवं अन्य की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके मार्गदर्शन में पर्यावरण संरक्षण को शिक्षा एवं अनुसंधान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।

हरेला पर्व पर  सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण सहित SCERT के अनेक संकाय सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से  सुनील भट्ट, डॉ. मनोज शुक्ला, मनोज बहुगुणा,  गंगा घुगत्याल  ,  गोपाल घुगत्याल, अरुण  थपलियाल,  विनय थपलियाल,  हरीश बडोनी, राकेश रावत,  सुशील गैरोला, डॉ. आलोक प्रभा, पुष्पा अस्वाल,   अनुज्ञा पैन्यूली , प्रशासनिक अधिकारी रावत , राणा , सेमवाल , आखिलेश डोभाल , रविदर्शन तोपाल  तथा अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए परिसर में वृक्षारोपण किया।

कार्यक्रम के दौरान सभी अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों ने परिसर में लगे वृक्षों का निरीक्षण करते हुए इस बात पर  चर्चा की कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण, नियमित देखभाल एवं वैज्ञानिक प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है। इस अवसर पर यह विचार सामने आया कि भविष्य में SCERT परिसर को और अधिक हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए ऐसी वृक्षारोपण नीति तैयार की जाए जिसमें स्थानीय जलवायु, मिट्टी, जैव विविधता तथा परिसर की आवश्यकता के अनुरूप पौधों का चयन किया जाए।

महानिदेशक के अनुसार सभी संकल्प लें कि  हरेला पर्व को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न मानकर उसे हर "गाँव का यही पैगाम एक पेड़ माँं के नाम " को हरित परिसर अभियान के रूप में विकसित किया जाए, जिसके अंतर्गत पौधारोपण, वृक्ष संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, वर्षा जल संरक्षण तथा पर्यावरण जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ।

महानिदेशक आकांक्षा कोंडे एवं उनकी पुत्री ने पेड़ माँं के नाम  इस पर्व पर अपनी माँं के साथ परिसर मे वृक्षारोपण से शुरू किया जो माँं और पुत्री का शिक्षा सदन मे हमेशा एक संकल्प के रूप मे रहेगा। महानिदेशक आकांक्षा कोंडे एवं बन्दना गर्ब्याल ने सभी अधिकारियों, संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा विभाग, SCERT एवं सभी शैक्षणिक संस्थानों से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन जागरूकता, वृक्षारोपण एवं सतत विकास से जुड़े नवाचारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

हरेला पर्व के इस अवसर पर सभी उपस्थित सदस्यों ने प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया तथा यह संदेश दिया कि "एक पौधा केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ भविष्य की नींव है।"



अंत मे अरुण थपलियाल के द्वारा मिठाई देकर कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण बतया अरुण हर वर्ष अनेकों पर्व पर मिठाई देकर शुभ संदेश देते  हैं । 

Wednesday, July 15, 2026

ईसीसीई रिसोर्स ग्रुप की दो दिवसीय बैठक का सफल आयोजन

 राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण पद उत्तराखण्ड में दिनांक 14-15 जुलाई, 2026 को ईसीसीई रिसोर्स ग्रुप की दो दिवसीय बैठक का सफल आयोजन किया गया। बैठक का शुभारम्भ श्रीमती बंदना गर्याल निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखण्ड द्वारा किया गया। अपने द्घाटन संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा एससीएफ-एफएस 2023 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों के समग्र विकास के लिए खेल आधारित गतिविधि-आधारित एवं बाल-केंद्रित शिक्षण को प्रभावी रूप से बुनियादी स्तर पर लागू करने पर बल दिया। डॉ के०एन० बिजल्वाण , सहायक निदेशक द्वारा ईसीसीई रिसोर्स ग्रुप के सदस्यों की जनपद स्तर पर भूमिका, डायट के साथ समन्वयन तथा  जनपद स्तर पर होने वाली ईसीसीई रिसोर्स ग्रुप की  कार्ययोजना पर प्रकाश डाला।

दो दिवसीय बैठक में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए डायट समन्वयकों एवं ब्लॉक रिसोर्स पर्सन्स ने प्रतिभाग किया। बैठक के दौरान प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व एफएलएन , भाषा एवं साक्षरता, संख्या ज्ञानु खेल आधारित अधिगम आकलन विभिन्न आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान सहयोगात्मक गतिविधियाँ, अभिभावकों की भूमिका एवं जादुई पिटारा पर सत्रों का संचालन  कर चर्चा परिचर्चा हुई।

सत्रों का संचालन गंगा घुघत्याल, डॉ राकेश गैरोला, डॉ विजय रावत, डॉ सरस्वती पुण्डीर ,डॉ आरती जैन, डॉ के० एस० रावत, डॉ शान्ति रतूड़ी, डॉ अनुज्ञा पैन्यूली अखिलेश डोमाल , सुश्री नीतू सूद द्वारा किया गया तथा  बैठक के  आयोजन में  संदीप बिष्ट द्वारा सहयोग प्रदा  न किया गया।

Tuesday, July 14, 2026

SCERT उत्तराखण्ड में INSPIRE Award विजेता विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय मेंटरिंग कार्यशाला सम्पन्न

 

देहरादून, उत्तराखण्ड।
राज्य के नवाचारी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में 8 एवं 9 जुलाई 2026 को दो दिवसीय मेंटरिंग कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) के सहयोग से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के अभिनव विचारों और वैज्ञानिक प्रोटोटाइप को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में और अधिक परिष्कृत एवं प्रभावशाली बनाना था।

कार्यशाला में INSPIRE Award – MANAK कार्यक्रम के 2023–24 एवं 2024–25 बैच के उत्तराखण्ड के 28 राज्य स्तरीय विजेता विद्यार्थियों तथा हिमाचल प्रदेश के 5 चयनित विद्यार्थियों ने सहभागिता की। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने से पूर्व विद्यार्थियों को अपने नवाचारों को तकनीकी, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने के लिए विशेषज्ञों द्वारा व्यक्तिगत मार्गदर्शन, तकनीकी सुझाव तथा आवश्यक आर्थिक सहयोग की जानकारी प्रदान की गई।

दो दिनों तक चले इस गहन मेंटरिंग सत्र में विद्यार्थियों ने अपने-अपने प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए, जिन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा करते हुए उनके डिजाइन, कार्यप्रणाली, उपयोगिता, लागत, नवाचार, प्रस्तुतीकरण तथा वास्तविक जीवन में उनके संभावित प्रभाव के आधार पर सुधार के सुझाव दिए। इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार के प्रति आत्मविश्वास को और अधिक मजबूत किया।

कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इनमें दून विश्वविद्यालय से डॉ. धृति ढौंढियाल, IRDE से डॉ. आर. पी. नौटियाल, UPES से डॉ. शांतनु अग्निहोत्री एवं डॉ. पियूष, DIT University से डॉ. नितिन कुमार गुप्ता, तथा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) से सुनील भास्कर एवं  पारस प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के मानकों के अनुरूप अपने प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी एवं शोध संबंधी सुझाव दिए।

कार्यशाला का सफल समन्वयन INSPIRE Award कार्यक्रम के राज्य समन्वयक डॉ. अवनीश उनियाल द्वारा किया गया। उनके नेतृत्व में सम्पूर्ण कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया, जिससे विद्यार्थियों को प्रत्येक चरण में विशेषज्ञों से व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सका। इस अवसर पर विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं मार्गदर्शक शिक्षकों की भी सक्रिय उपस्थिति रही। उनकी सहभागिता ने यह संदेश दिया कि किसी भी नवाचार की सफलता में विद्यालय, शिक्षक, परिवार और विशेषज्ञों का सामूहिक सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

समापन सत्र में SCERT उत्तराखण्ड के अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान केवल खोज का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे प्रभावशाली साधन है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अपने ज्ञान, समय और परिश्रम को समाज के कल्याण के लिए समर्पित करते हैं तथा उनका एकमात्र उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होता है। उन्होंने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखण्ड के ये युवा नवाचारी राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और राज्य का नाम गौरवान्वित करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह दो दिवसीय मेंटरिंग कार्यशाला केवल तकनीकी मार्गदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक अनुसंधान, समस्या समाधान और उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में भविष्य के वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों और परिवर्तनकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में उत्तराखण्ड की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित करते हैं।