Thursday, November 05, 2026

समावेशी शिक्षा की दिशा में सार्थक पहल: एससीईआरटी उत्तराखंड की टीम ने किया मायरा केयर सेंटर का शैक्षिक भ्रमण

 

देहरादून | 2 नवंबर 2026

समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को अधिक प्रभावी, संवेदनशील एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में एससीईआरटी उत्तराखंड की टीम द्वारा देहरादून स्थित मायरा केयर सेंटर (Myra Care Centre) का शैक्षिक भ्रमण किया गया। इस भ्रमण में एससीईआरटी से  रमेश बडोनी, राखी पांडे एवं डॉ. साधना सम्मिलित रहे।

मायरा केयर सेंटर ऑटिज़्म (Autism) एवं विविध अधिगम आवश्यकताओं वाले बच्चों (Diverse Learners) की शिक्षा, व्यवहारिक विकास और पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। भ्रमण के दौरान संस्थान की प्रमुख एवं अनुभवी ऑटिज़्म एजुकेटर अनीता थपलियाल शर्मा तथा डॉ. राकेश नवानी ने टीम के साथ विशेष शिक्षा, समावेशी शिक्षण पद्धतियों एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।

अनीता शर्मा ने संस्थान का भ्रमण करवाते हुए विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ संचालित शिक्षण गतिविधियों, स्पीच थेरेपी, व्यवहारिक सहयोग (Behavioural Support), सामाजिक कौशल (Social Skills) तथा प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention) की प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। विशेष रूप से उनके द्वारा विकसित विजुअल लर्निंग टूल्स (Visual Learning Tools) एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धतियां बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को सरल, रोचक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

संस्थान में 15 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए संचालित जीवन कौशल (Life Skills) एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) की गतिविधियां भी अत्यंत प्रेरणादायक रहीं। इन प्रयासों का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले युवाओं को दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बनाना तथा सामाजिक सहभागिता के अवसर उपलब्ध कराना है।

उल्लेखनीय है कि एससीईआरटी उत्तराखंड द्वारा शिक्षकों के लिए समावेशी शिक्षा विषय पर एक ऑनलाइन कोर्स विकसित किया जा रहा है। इस कोर्स को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए वास्तविक कक्षा-कक्ष परिस्थितियों, बच्चों की विविध आवश्यकताओं, व्यावहारिक गतिविधियों एवं प्रभावी शिक्षण रणनीतियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से मायरा केयर सेंटर का भ्रमण किया गया।

कोर्स विकास में अनीता थपलियाल शर्मा की विशेषज्ञता, डॉ. राकेश नवानी के अनुभव तथा एससीईआरटी एवं अन्य विषय विशेषज्ञों के सहयोग से समावेशी शिक्षण की प्रभावी पद्धतियों, केस स्टडी, विजुअल लर्निंग संसाधनों और गतिविधि-आधारित प्रशिक्षण सामग्री को सम्मिलित करने की योजना है।

निश्चित रूप से मायरा केयर सेंटर द्वारा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों एवं युवाओं के आत्मविश्वास, कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन के लिए किया जा रहा कार्य अत्यंत सराहनीय एवं अनुकरणीय है। यह भ्रमण एससीईआरटी के प्रस्तावित ऑनलाइन कोर्स को अधिक उपयोगी, अनुभव-आधारित और शिक्षक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

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Wednesday, November 04, 2026

हिमालयी आपदाओं से सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल: नैनीताल में हिमनद झीलों के फटने के जोखिम एवं प्रबंधन रणनीतियों पर कार्यशाला

 

डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासनिक अकादमी में GLOF के वैज्ञानिक अध्ययन, पूर्व चेतावनी प्रणाली और आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

नैनीताल, उत्तराखण्ड। हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासनिक अकादमी, नैनीताल में महानिदेशक वी.पी. पाण्डे के दिशा-निर्देशों के क्रम में ‘हिमनद झीलों के फटने का जोखिम एवं रणनीति’ (Glacial Lake Outburst Flood – GLOF) विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य हिमनद झीलों के फटने से उत्पन्न संभावित आपदाओं का वैज्ञानिक आकलन, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, पूर्व चेतावनी प्रणाली का विकास तथा प्रभावी आपदा प्रबंधन रणनीतियों पर विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करना रहा।

एससीईआरटी उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण प्रकोष्ठ के राज्य सह-समन्वयक विनय थपलियाल एवं भुवनेश पंत ने बताया कि हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते आपदा जोखिमों को देखते हुए वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासनिक एजेंसियों तथा शैक्षिक संस्थानों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की कार्यशालाएं आपदा पूर्व तैयारी, जागरूकता और जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रकाश चन्द्र, अपर सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग, देहरादून तथा विशिष्ट अतिथि मेजर जनरल सुधीर बहल, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), नई दिल्ली, पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक, पद्मश्री अनूप साह एवं अकादमी के संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।

संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा तथा नेपाल में आई बाढ़ जैसी घटनाएं हमें भविष्य की चुनौतियों के प्रति सचेत करती हैं। उन्होंने आपदा प्रबंधन में वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी नवाचार, संस्थागत समन्वय और प्रभावी रणनीतियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।

मुख्य अतिथि प्रकाश चन्द्र ने हिमनद झीलों के फटने से उत्पन्न जोखिमों के संबंध में शासन स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न हिमनद झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन और जोखिम आकलन किया जा रहा है। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

विशिष्ट अतिथि मेजर जनरल सुधीर बहल ने सिक्किम में हिमनद झील फटने से उत्पन्न आपदा के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए समय पर चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया, स्थानीय समुदायों की तैयारी तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक एवं पद्मश्री अनूप साह ने भी हिमालयी पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के संदर्भ में अपने विचार रखे।

कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में GLOF के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून के डॉ. डी.पी. डोभाल, डॉ. जयराम, डॉ. फारूख आजम, सेवानिवृत्त एडीजीएम डॉ. आनंद शर्मा, डॉ. आर.के. श्रीवास्तव, कुमाऊं विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव उपाध्याय, यूएसडीएमए के जीआईएस विशेषज्ञ रोहित कुमार, आईआईआरएस देहरादून के डॉ. हरीश कर्नाटक, सीबीआरआई रुड़की के डॉ. राजेश दास तथा डॉ. एन.एल. ठकुराल सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।

विशेषज्ञों ने हिमनद झीलों की पहचान, उपग्रह आधारित निगरानी, भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, संवेदनशील क्षेत्रों के वैज्ञानिक आकलन तथा संभावित आपदाओं की पूर्व पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।

चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली और सामुदायिक जागरूकता के समन्वय से हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम को कम किया जा सकता है।

हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक एवं वैज्ञानिक संस्थानों तक सीमित नहीं रह सकता। विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों को भी आपदा सुरक्षा, पूर्व तैयारी तथा सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक बनाना आवश्यक है।

इस दिशा में एससीईआरटी उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की सहभागिता विद्यालयी शिक्षा में आपदा जागरूकता, सुरक्षा संस्कृति और सामुदायिक तैयारी को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला का संचालन कार्यक्रम निदेशक डॉ. मंजू पाण्डे ने किया। इस अवसर पर अकादमी के वी.के. सिंह, रिचांशु शर्मा, पूनम पाठक, पूनम पंत, डॉ. अनिल मिश्रा, नायक एवं समन्वयक डॉ. ओमप्रकाश सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

यह कार्यशाला हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते प्राकृतिक आपदा जोखिमों के प्रति वैज्ञानिक समझ विकसित करने, विभिन्न संस्थानों के अनुभव साझा करने तथा भविष्य के लिए प्रभावी आपदा प्रबंधन रणनीतियों को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

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Monday, November 02, 2026

पीएम ई-विद्या के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण ई-कॉन्टेंट निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ, डिजिटल शिक्षा को प्रभावी बनाने पर जोर

 

देहरादून, 2 नवंबर 2026।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड के आईटी विभाग द्वारा पीएम ई-विद्या (PM e-VIDYA) कार्यक्रम के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शैक्षिक सामग्री (ई-कॉन्टेंट) निर्माण हेतु कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन उपनिदेशक विनोद कुमार सिंह मठुरा द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों से आए विषय विशेषज्ञों (SMEs), कंटेंट राइटर्स तथा आईटी विभाग की तकनीकी टीम ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा को अधिक रोचक, प्रभावी, समावेशी एवं तकनीक-सक्षम बनाते हुए विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करना है।

ई-कॉन्टेंट निर्माण में गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर

कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में आईटी विभाग के प्रवक्ता  आर. पी. बडोनी,  एस. पी. वर्मा एवं  पुष्पा अस्वाल ने प्रतिभागी विषय विशेषज्ञों और कंटेंट राइटर्स का उन्मुखीकरण किया।

इस दौरान डिजिटल कंटेंट निर्माण की प्रक्रिया, वीडियो फॉर्मेशन, शैक्षिक वीडियो स्क्रिप्ट लेखन, विषयवस्तु का प्रभावी प्रस्तुतीकरण तथा डिजिटल संसाधनों के शैक्षणिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने विभिन्न उत्कृष्ट ई-कॉन्टेंट के उदाहरण (Exemplars) साझा करते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में केवल पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि कठिन अवधारणाओं को सरल, दृश्यात्मक एवं अनुभवात्मक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए डिजिटल शिक्षण सामग्री की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वीडियो स्क्रिप्ट राइटिंग और कॉन्सेप्ट डिलीवरी पर चर्चा

सत्र के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि एक प्रभावी शैक्षिक वीडियो केवल आकर्षक चित्रों, एनिमेशन या तकनीकी प्रभावों से नहीं बनता, बल्कि उसके पीछे एक सुविचारित शैक्षणिक उद्देश्य, वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक शुद्धता, व्यवस्थित स्क्रिप्ट और विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप प्रस्तुतीकरण आवश्यक है।

प्रतिभागियों को वीडियो निर्माण के विभिन्न चरणों, जैसे विषय चयन, लर्निंग आउटकम निर्धारण, स्क्रिप्ट लेखन, दृश्य योजना, वॉयसओवर, उदाहरणों का चयन तथा अंतिम वीडियो की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

एथिकल AI और डिजिटल कंटेंट के जिम्मेदार उपयोग पर जोर

कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के संदर्भ में शैक्षिक सामग्री निर्माण के नैतिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने बताया कि AI आधारित उपकरण कंटेंट लेखन, ग्राफिक्स, स्क्रिप्ट निर्माण और मल्टीमीडिया प्रस्तुतीकरण में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इनके उपयोग में तथ्यात्मक सत्यापन, कॉपीराइट, मौलिकता, डेटा गोपनीयता तथा विद्यार्थियों की आयु एवं शैक्षिक आवश्यकताओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

AI को शिक्षक की रचनात्मकता और विषयगत विशेषज्ञता का विकल्प नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी बनाने वाले सहयोगी उपकरण के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया।

Canva Pro for Education से तैयार होगा आकर्षक डिजिटल कंटेंट

कार्यशाला के दौरान Canva Pro for Education के शैक्षणिक उपयोग पर भी प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण किया गया। सभी विषय विशेषज्ञों एवं कंटेंट राइटर्स को Canva पोर्टल पर लॉगिन करने के लिए आवश्यक लॉगिन विवरण और एक्सेस संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि Canva जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की सहायता से शैक्षिक प्रस्तुतियां, इन्फोग्राफिक्स, एनिमेटेड वीडियो, डिजिटल ग्राफिक्स, दृश्यात्मक शिक्षण सामग्री तथा आकर्षक पाठ्यक्रम आधारित कंटेंट तैयार किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल डिजाइन उपकरणों से परिचित कराते हुए उनकी रचनात्मक एवं तकनीकी दक्षताओं को सुदृढ़ करना है।

कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों से आए विषय विशेषज्ञों ने अपने शिक्षण अनुभवों और डिजिटल सामग्री निर्माण से संबंधित विचारों को साझा किया। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि गुणवत्तापूर्ण ई-कॉन्टेंट निर्माण के लिए विषयगत विशेषज्ञता, शैक्षणिक दृष्टिकोण और तकनीकी दक्षता का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के संचालन एवं तकनीकी व्यवस्थाओं में एससीईआरटी के आईटी विभाग की तकनीकी टीम ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

पीएम ई-विद्या के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला उत्तराखण्ड में डिजिटल शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से तैयार की जाने वाली शैक्षिक सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों को जटिल अवधारणाओं को सरलता से समझने, स्व-अध्ययन को प्रोत्साहित करने तथा कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने में सहायता प्रदान करना है।

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