विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड में 10 अक्टूबर 2026 को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को मानसिक रूप से स्वस्थ, सकारात्मक और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निदेशक एससीईआरटी बंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी, उप निदेशक विनोद मथुरा, सहायक निदेशक डॉ के.एन. बिजल्वाण तथा कैलाश चंद्र, पूर्व शिक्षा अधिकारी,राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र ,नई दिल्ली मुख्य अतिथि की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम में , राकेश जुगराण,सेवानिवृत प्राचार्य डायट और डॉ. दिनेश रतूड़ी,सेवानिवृत्ति प्रवक्ता, एससीईआरटी भी शामिल रहे। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए दैनिक जीवन में अपनाई जा सकने वाली सरल, व्यावहारिक एवं प्रभावी गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्व को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना था कि मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक समस्याओं की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं को समझने, अपनी भावनाओं को पहचानने, परिस्थितियों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने तथा जीवन को सहजता और प्रसन्नता के साथ जीने की क्षमता से भी जुड़ा है।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसी परिस्थिति को देखने का हमारा दृष्टिकोण हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करता है। कई बार परिस्थितियाँ उतनी कठिन नहीं होतीं, जितनी कठिन हम अपनी सोच के कारण उन्हें बना लेते हैं। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि एक ही परिस्थिति को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है और सकारात्मक एवं संतुलित सोच तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है।
यह भी रेखांकित किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्वयं के विचारों और व्यवहार के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। अपने भावनात्मक पैटर्न, प्रतिक्रियाओं और तनाव उत्पन्न करने वाले कारकों को पहचानकर व्यक्ति अपने व्यवहार में आवश्यक बदलाव ला सकता है। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के परस्पर संबंध पर चर्चा की गई। प्रिया गुसाईं , प्रवक्ता SCERT उत्तराखंड द्वारा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या को मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्वपूर्ण आधारों के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ रहने के लिए केवल मानसिक स्तर पर प्रयास करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर की आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।
साथ ही, आत्म-जागरूकता को मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया गया। अपनी भावनाओं, आदतों, प्रतिक्रियाओं और विचारों को बिना किसी पूर्वाग्रह के समझना हमें स्वयं के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने में सहायता करता है।कार्यक्रम में हँसी को तनाव कम करने और जीवन में सहजता बनाए रखने के एक उपयोगी माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। स्वयं पर हँस सकना, छोटी-छोटी बातों को बहुत गंभीरता से न लेना और जीवन की सामान्य परिस्थितियों में हास्य खोज पाना मानसिक लचीलेपन को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम का समापन कृतज्ञता के महत्त्वपूर्ण संदेश के साथ हुआ। जीवन में जो कुछ हमारे पास है, उसे पहचानना, छोटी-छोटी खुशियों का अनुभव करना और अपने जीवन में योगदान देने वाले लोगों एवं परिस्थितियों के प्रति आभार व्यक्त करना सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक है। कृतज्ञता का अभ्यास हमें केवल उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करने से रोकता है, जो हमारे पास नहीं हैं, और उन अनुभवों एवं संबंधों को पहचानने में मदद करता है, जो हमारे जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए बड़े बदलावों की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, आत्म-जागरूकता, सकारात्मक दृष्टिकोण, हास्यबोध, जीवन में ठहराव और कृतज्ञता जैसे छोटे-छोटे अभ्यास हमारे जीवन को अधिक संतुलित, आनंदपूर्ण और सार्थक बना सकते हैं।
एस.सी.ई.आर.टी.
की निदेशक ने अपने संदेश में कहा कि एससीईआरटी, उत्तराखंड में
आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति
संवेदनशीलता विकसित करने तथा स्वस्थ मन और स्वस्थ जीवन की संस्कृति को प्रोत्साहित
करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहेगा। बदलते सामाजिक परिवेश, जीवनशैली, बढ़ती
अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धा के कारण मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में वृद्धि
हो रही है। ऐसी परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा
विद्यार्थियों, शिक्षकों
और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मानसिक रूप से सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में पूरे माह
विद्यालयों में विभिन्न जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम
से विद्यार्थियों और शिक्षकों सहित सभी संबंधित व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य के
प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि
प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है और उसकी अपनी विशिष्ट क्षमताएँ, संभावनाएँ एवं
खूबियाँ हैं। अतः हमें स्वयं की तुलना दूसरों से करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए
तथा अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए स्वयं को स्वीकार करना चाहिए। प्रत्येक
व्यक्ति को यह विश्वास होना चाहिए कि वह विशेष है, अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकता है और अपने प्रयासों
से अनेक उपलब्धियाँ हासिल कर सकता है। उन्होंने संदेश दिया कि दूसरों से तुलना
करने के बजाय हमें अपनी रुचियों,
क्षमताओं और आत्मविकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ
मानसिकता, आत्मविश्वास
और स्वयं की विशिष्टता को स्वीकार करना ही मानसिक स्वास्थ्य एवं जीवन में संतुलन
की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।
प्रिया गुसाईं , प्रवक्ता SCERT उत्तराखंड










