Thursday, July 09, 2026

यूनेस्को के वैश्विक मंच पर भारत की शैक्षिक पहल का गौरवपूर्ण प्रदर्शन SCERT उत्तराखण्ड की AI एवं ICT आधारित शिक्षक प्रशिक्षण पहल AI for Education Awards 2026 में विश्व की शीर्ष 6 परियोजनाओं में शामिल

 

 जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड), 8 जुलाई 2026

भारत के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि उत्तराखण्ड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा विकसित अभिनव परियोजना "Building Future-Ready Teachers through AI and ICT Enabled MOOCs" को AI for Education Awards 2026 के प्रतिष्ठित Teacher Training Award वर्ग में विश्व के शीर्ष छह (Top 6 Finalists) नवाचारों में स्थान प्राप्त हुआ है।

इस प्रतिष्ठित वैश्विक प्रतियोगिता के परिणाम AI for Good Global Summit 2026 के दौरान जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में घोषित किए गए। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 47 देशों तथा छह महाद्वीपों से प्राप्त उत्कृष्ट परियोजनाओं का अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की जूरी द्वारा बहु-स्तरीय मूल्यांकन किया गया। कठोर चयन प्रक्रिया के पश्चात प्रत्येक श्रेणी में विश्व की सर्वश्रेष्ठ परियोजनाओं का चयन किया गया।

विद्यालयी शिक्षा सचिव रविनाथ रामन (IAS) ने इस उपलब्धि पर निदेशक वन्दना गर्ब्याल, SCERT की तकनीकी टीम, विषय विशेषज्ञों एवं सभी सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल भारत के लिए डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बनेगी। 

भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली यह परियोजना निदेशक बन्दना गर्ब्याल, रमेश प्रसाद बडोनी एवं आईटी संकाय सदस्य, SCERT उत्तराखण्ड के नेतृत्व में विकसित की गई है। इस पहल को विद्यालयी शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उत्तरदायी, समावेशी एवं प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण माना गया है।

महानिदेशक आकांक्षा कोंडे  ने इसे SCERT परिवार एवं हजारों शिक्षकों को सामूहिकबधाई देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड का यह मॉडल अब वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बनेगा। 

निदेशक, अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण, SCERT उत्तराखण्ड, बंन्दना गर्ब्याल ने कहा—

"यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि SCERT परिवारविषय विशेषज्ञों, तकनीकी सहयोगियों तथा उत्तराखण्ड के हजारों समर्पित शिक्षकों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। हमारा उद्देश्य प्रत्येक शिक्षक को AI एवं डिजिटल तकनीकों से सशक्त बनाकर भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है। हमें प्रसन्नता है कि उत्तराखण्ड का यह मॉडल अब वैश्विक मंच पर प्रेरणा का स्रोत बनेगा।"

अपर निदेशक एस सी ई आर टी उत्तराखण्ड पदमेन्द्र सकलानी ने बधाई देते हुए इसे AI टेक्नॉलाजी का सर्वोत्तम उपयोग का माडल मानते हुए  इसे आने वाले समय मे  परियोजना  Global Empowerment Programme हिस्सा बनेगा , जहाँ इसकी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ विश्वभर के देशों के साथ साझा की जाएँगी।

उत्तराखण्ड का AI आधारित शिक्षक प्रशिक्षण बना वैश्विक मॉडल

SCERT उत्तराखण्ड द्वारा विकसित "Fundamentals of AI and ICT Tools for School Teachers" नामक विशाल ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम (MOOC) ने राज्य में शिक्षक क्षमता विकास का एक नया अध्याय स्थापित किया है।

इस परियोजना की प्रमुख उपलब्धियाँ अत्यंत प्रेरणादायक हैं—

  • राज्य के 49,000 से अधिक शिक्षकों का पंजीकरण।
  • 47,000 से अधिक शिक्षकों का सफल प्रमाणन।
  • उत्तराखण्ड के 15,000 से अधिक विद्यालयों में लगभग 97 प्रतिशत तक पहुँच।
  • देश में बड़े स्तर पर संचालित ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सर्वाधिक सफल पूर्णता दरों में से एक।
  • e-SRIJAN AI Chatbot एवं विद्या समीक्षा केन्द्र (Vidya Samiksha Kendra) के माध्यम से वास्तविक समय (Real-time) निगरानी एवं प्रगति विश्लेषण।
  • दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक समान गुणवत्ता का डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में उल्लेखनीय सफलता।

इस अभिनव कार्यक्रम ने पारंपरिक प्रशिक्षण प्रणाली की सीमाओं को समाप्त करते हुए शिक्षकों को कभी भी, कहीं भी डिजिटल माध्यम से सीखने का अवसर प्रदान किया तथा उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शिक्षण के लिए सक्षम बनाया।

शिक्षक प्रशिक्षण से नवाचार की नई संस्कृति

इस परियोजना का प्रभाव केवल शिक्षक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा।

प्रशिक्षित शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में AI आधारित शिक्षण, डिजिटल टूल्स, इंटरैक्टिव कक्षाएँ एवं तकनीक-सम्मिलित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया। इसके परिणामस्वरूप विद्यार्थियों की सहभागिता, सीखने की गुणवत्ता तथा नवाचार आधारित शिक्षण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

इसी प्रशिक्षण के आधार पर SCERT उत्तराखण्ड ने Innovate Uttarakhand Hackathon जैसी राज्य स्तरीय पहल प्रारम्भ की, जिसमें हजारों विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान विकसित किए। इन नवाचारों में वनाग्नि नियंत्रण, भूस्खलन प्रबंधन, आपदा न्यूनीकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़े अनेक अभिनव समाधान प्रस्तुत किए गए।

सीमित संसाधनों में विश्वस्तरीय उपलब्धि

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे अत्यंत सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ विकसित किया गया।

महंगे Learning Management System (LMS) के स्थान पर SCERT ने e-SRIJAN AI Chatbot आधारित प्रशिक्षण प्रणाली विकसित की, जिसने—

  • मोबाइल आधारित सहज पहुँच
  • कम लागत में व्यापक विस्तार
  • AI आधारित मार्गदर्शन
  • स्वचालित सहायता
  • वास्तविक समय प्रगति विश्लेषण
  • डेटा आधारित निर्णय प्रणाली

जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराकर इसे विश्वस्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल के रूप में स्थापित किया।

कठोर अंतरराष्ट्रीय मूल्यांकन में भारत की सफलता

AI for Education Awards 2026 के अंतर्गत प्रत्येक परियोजना का बहु-स्तरीय मूल्यांकन किया गया, जिसमें—

  • पात्रता परीक्षण
  • अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन
  • निर्धारित मानकों पर अंकन
  • अंतिम जूरी विचार-विमर्श 

के आधार पर चयन किया गया। SCERT उत्तराखण्ड की परियोजना को विश्व की छह सर्वश्रेष्ठ शिक्षक प्रशिक्षण परियोजनाओं में स्थान मिलना भारतीय शिक्षा व्यवस्था तथा डिजिटल नवाचार की वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण है।

वैश्विक मंच पर आगे भी जारी रहेगा भारत का सफर

यद्यपि इस वर्ष Teacher Training Award दक्षिण अफ्रीका की परियोजना "Kitso Learning Chatbot" को प्रदान किया गया, फिर भी भारत का शीर्ष छह वैश्विक फाइनलिस्टों में चयन अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस चयन के साथ SCERT उत्तराखण्ड की परियोजना अब 1 सितम्बर 2026 से प्रारम्भ होने वाले Global Empowerment Programme का हिस्सा बनेगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व के चयनित नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय Masterclasses, वैश्विक e-Book, तथा विभिन्न ज्ञान-साझाकरण मंचों पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे विश्वभर के शिक्षक एवं शिक्षा संस्थान इन सर्वोत्तम प्रथाओं से प्रेरणा प्राप्त करेंगे।

UNESCO द्वारा पूर्व में भी मिल चुकी है वैश्विक पहचान

यह उपलब्धि SCERT उत्तराखण्ड की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को और सशक्त करती है। इससे पूर्व उत्तराखण्ड की बालिकाओं के सशक्तिकरण हेतु AI एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी आधारित पहल को UNESCO IITE द्वारा प्रकाशित वैश्विक केस स्टडी में भी स्थान दिया जा चुका है। अब AI for Education Awards 2026 में प्राप्त यह सम्मान उत्तराखण्ड को डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षा नवाचारों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में स्थापित करता है।

भारत के लिए गौरव का विषय

SCERT उत्तराखण्ड की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि दूरदर्शी नेतृत्व, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा डिजिटल तकनीकों का प्रभावी उपयोग सीमित संसाधनों में भी विश्वस्तरीय परिणाम दे सकता है।

यह सम्मान केवल उत्तराखण्ड या SCERT की सफलता नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा प्रणाली, डिजिटल परिवर्तन, शिक्षक क्षमता निर्माण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भविष्य की शिक्षा के वैश्विक स्वीकार का प्रतीक है।

यह परियोजना आज विश्व के समक्ष भारत की उस सोच का प्रतिनिधित्व कर रही है, जिसमें प्रत्येक शिक्षक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाकर प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और भविष्य उन्मुख शिक्षा पहुँचाने का संकल्प निहित है।

कोर्स टीम सदस्य : डॉ. अजय सेमल्टी, डॉ. इश्तियाक अहमद, मनोज बहुगुणा, रमेश बड़ोनी, डॉ. किरण लता डंगवाल, डॉ. चांदनी अग्रवाल, बर्गिन, डॉ. आशीष रतूड़ी, सुप्रिया बहुखंडी, अर्चना गर्ब्याल, पंकज बिजल्वाण, भास्कर जोशी, अजय पाल सिंह नेगी, प्रदीप नेगी, अंकित जोशी, प्रकाश चंद्र उपाध्याय, दौलत गुसाईं, अशोक भट्ट, राजमोहन रावत, अल्पा निगम, डॉ. अतुल बमराड़ा, मनोधर नैणवाल, विनोद बसेड़ा, प्रभाकर जोशी, रविंद्र रौतेला, सौरभ जोशी, विनय उनियाल, रजत छिब्बर, अचल थपलियाल, एस. पी. वर्मा, पुष्पा असवाल तथा अन्य सहयोगी स्टाफ ने इस महत्वपूर्ण कार्य के सफल संचालन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। सभी के सामूहिक प्रयास, समर्पण और टीम भावना के कारण कार्यक्रम का प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन संभव हो सका।

https://apnuuttarakhand.com/good-news-for-uttarakhand-education-departments-model-discussed-abroad-scert-institute-to-be-honored-with-unescos-teacher-training-award/

Wednesday, July 08, 2026

उत्तराखंड बना भारत का पूर्ण साक्षर राज्य

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को मिली ऐतिहासिक सफलता

देहरादून | 08 जुलाई, 2026

उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज करते हुए भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। उत्तराखंड शासन के माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-03 द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 तथा उल्लास (ULLAS) – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रयासों के आधार पर भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय ने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।

यह ऐतिहासिक अधिसूचना 08 जुलाई, 2026 को उत्तराखंड शासन के सचिव रविनाथ रमन द्वारा जारी की गई, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए गर्व और उपलब्धि का महत्वपूर्ण क्षण है।

साक्षर उत्तराखंड की दिशा में ऐतिहासिक कदम

निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल ने बताया कि बीते वर्षों में विद्यालयी शिक्षा, वयस्क शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता तथा नवाचार आधारित शिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। विशेष रूप से ULLAS – Understanding of Lifelong Learning for All in Society (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के अंतर्गत निरक्षर वयस्कों तक शिक्षा पहुँचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया, जिसमें शिक्षकों, स्वयंसेवकों, विद्यालयों, पंचायतों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी रही।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि लाखों शिक्षकों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, स्वयंसेवकों तथा समाज के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतिफल है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की ओर बड़ी सफलता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना है। उत्तराखंड ने इस दिशा में निरंतर कार्य करते हुए साक्षरता, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और जीवनपर्यंत सीखने की अवधारणा को प्रभावी रूप से लागू किया है। राज्य की यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

शिक्षा विभाग के लिए गौरव का क्षण

शिक्षा मंत्री के अनुसार पूर्ण साक्षर राज्य बनने की यह उपलब्धि उत्तराखंड के शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों, विद्यालयों, शिक्षकों तथा समाज के सभी सहयोगी संगठनों के समर्पण और उत्कृष्ट समन्वय का परिणाम है। यह सफलता राज्य की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी।

भविष्य की दिशा

अब उत्तराखंड का लक्ष्य केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कार्यात्मक साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, जीवन कौशल एवं आजीवन सीखने (Lifelong Learning) को प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे राज्य ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण की दिशा में और अधिक सशक्त कदम बढ़ाएगा।

उत्तराखंड के लिए यह उपलब्धि केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन, जनभागीदारी और समावेशी विकास की ऐतिहासिक यात्रा का स्वर्णिम अध्याय है।

राष्ट्रीय गौरव: रुद्रप्रयाग के राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोट तल्ला को मिला SHVR 2025–26 में राष्ट्रीय सम्मान

उत्तराखण्ड का स्वर्णिम क्षण – शिक्षक सतेन्द्र सिंह भंडारी के नेतृत्व में सरकारी विद्यालय ने रचा इतिहास

"जब एक शिक्षक अपने विद्यालय को मिशन बना ले, तब वह केवल बच्चों का भविष्य नहीं, बल्कि पूरे राज्य की पहचान बदल देता है।"

उत्तराखण्ड के लिए एक और ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड अगस्त्यमुनि स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोट तल्ला ने स्वच्छता, हरित परिसर, पर्यावरण संरक्षण और गुणवत्तापूर्ण विद्यालय प्रबंधन के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

हाल ही में केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET), NCERT, नई दिल्ली द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (दिनांक 07 जुलाई 2026) के माध्यम से विद्यालय को Swachh Evam Harit Vidyalaya Rating (SHVR) 2025–26 के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने की औपचारिक सूचना प्रदान की गई है। यह सम्मान भारत सरकार द्वारा देशभर में चयनित 191 उत्कृष्ट विद्यालयों को प्रदान किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर चयन—कठोर मूल्यांकन के बाद मिली सफलता

CIET-NCERT के संयुक्त निदेशक प्रो. अमरेन्द्र प्रसाद बेहेरा द्वारा जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि विद्यालय का चयन जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की बहु-स्तरीय (Multi-stage) मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद किया गया है।

यह सम्मान उन विद्यालयों को दिया जाता है जिन्होंने—

  • स्वच्छता एवं स्वास्थ्यकर वातावरण,
  • पर्यावरण संरक्षण,
  • सतत विकास,
  • सुरक्षित एवं समावेशी विद्यालय,
  • विद्यार्थियों में व्यवहार परिवर्तन,
  • हरित विद्यालय संस्कृति

जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय कार्य किया हो।

यह उपलब्धि स्वयं इस बात का प्रमाण है कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोट तल्ला ने राष्ट्रीय स्तर के सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

उत्तराखण्ड बना राष्ट्रीय पहचान का केन्द्र

इस वर्ष की SHVR रेटिंग में विद्यालय ने अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अपने नाम कीं—

  • राष्ट्रीय स्तर पर सभी सरकारी विद्यालयों में प्रथम स्थान
  • 95.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन
  • देशभर के सभी विद्यालयों में 22वीं राष्ट्रीय रैंक
  • उत्तराखण्ड राज्य के सभी विद्यालयों में प्रथम स्थान

यह केवल विद्यालय की उपलब्धि नहीं, बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखण्ड की शिक्षा व्यवस्था के लिए गर्व का विषय है।

एक शिक्षक जिसने बदल दी सरकारी विद्यालय की तस्वीर

इस ऐतिहासिक सफलता के केंद्र में हैं विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद्  सतेन्द्र सिंह भंडारी

उन्होंने विद्यालय को केवल शिक्षण का केन्द्र नहीं रहने दिया बल्कि उसे—

  • स्वच्छ विद्यालय,
  • हरित परिसर,
  • जैव विविधता संरक्षण,
  • प्रकृति आधारित शिक्षण,
  • सामुदायिक सहभागिता,
  • छात्र नेतृत्व का उत्कृष्ट मॉडल बना दिया।

आज कोट तल्ला विद्यालय पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन चुका है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट विद्यालय कैसे विकसित किए जा सकते हैं।

दो दशकों की तपस्या 

सतेन्द्र सिंह भंडारी पिछले लगभग 20 वर्षों से शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जैव विविधता संवर्धन, विद्यालय नवाचार तथा सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहे हैं।

उनकी सेवाओं के लिए उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

विशेष रूप से उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल द्वारा भी उन्हें उनके उत्कृष्ट शैक्षिक एवं पर्यावरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है। पिछले दो दशकों में प्राप्त अनेक सम्मान उनके सतत समर्पण, निष्ठा और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।

आज वे उत्तराखण्ड में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र के अग्रणी शिक्षकों में गिने जाते हैं और हजारों शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

राज्य स्तरीय सम्मान

राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोट तल्ला के प्रधानाध्यापक  सतेन्द्र सिंह भंडारी पिछले लगभग 20 वर्षों से शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, स्वच्छ विद्यालय अभियान तथा सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। उनके नवाचारों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों ने उन्हें उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई है।

उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए उन्हें पिछले दो दशकों में अनेक राज्य एवं राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उत्तराखण्ड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा भी उन्हें उनके उत्कृष्ट शैक्षिक एवं पर्यावरणीय योगदान के लिए राजभवन में सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उनके दीर्घकालीन समर्पण, नेतृत्व क्षमता और शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों की औपचारिक स्वीकृति है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर विकासखंड अगस्त्यमुनि में आयोजित समारोह में श्री सतेन्द्र सिंह भंडारी को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—

  • प्रमुख श्रीमती भुवनेश्वरी देवी
  • खंड विकास अधिकारी श्री सुरेश साह
  • प्रधान संगठन अध्यक्ष श्री वैष्णव जी
  • क्षेत्र पंचायत सदस्य
  • स्थानीय जनप्रतिनिधि
  • शिक्षाविद एवं क्षेत्रवासी

सभी ने इसे उत्तराखण्ड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।


CIET-NCERT  राष्ट्रीय मंच पर सम्मान 

CIET-NCERT द्वारा भेजे गए पत्र में विद्यालय को बधाई देते हुए कहा गया है कि विद्यालय ने स्वच्छ, सुरक्षित, समावेशी एवं पर्यावरण-अनुकूल शिक्षण वातावरण विकसित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

पत्र में यह भी उल्लेख है कि SHVR 2025–26 National Level Recognition Ceremony शीघ्र आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से चयनित विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।

यह समारोह भारत के सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों के लिए एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच होगा।

कोट तल्ला विद्यालय की यह सफलता एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—

यदि विद्यालय में दूरदर्शी नेतृत्व, सामुदायिक सहयोग, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का समन्वय हो, तो सरकारी विद्यालय भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित कर सकते हैं।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोट तल्ला की यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार नहीं है।

यह उत्तराखण्ड के सरकारी विद्यालयों की क्षमता, शिक्षकों की प्रतिबद्धता और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की शक्ति का राष्ट्रीय प्रमाण है।

सतेन्द्र सिंह भंडारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक शिक्षक अपने समर्पण, नवाचार और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से पूरे राज्य का नाम राष्ट्रीय पटल पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित कर सकता है।


इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोट तल्ला, उसके ऊर्जावान विद्यार्थियों, अभिभावकों, ग्रामवासियों तथा विशेष रूप से प्रधानाध्यापक  सतेन्द्र सिंह भंडारी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।