Monday, October 12, 2026

एससीईआरटी, उत्तराखंड में आयोजित हुआ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस-2026

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड में 10 अक्टूबर 2026 को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को मानसिक रूप से स्वस्थ, सकारात्मक और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निदेशक एससीईआरटी  बंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक  पदमेंद्र सकलानी, उप निदेशक विनोद मथुरा, सहायक निदेशक डॉ के.एन. बिजल्वाण तथा कैलाश चंद्र, पूर्व शिक्षा अधिकारी,राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र ,नई दिल्ली मुख्य अतिथि की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम में , राकेश जुगराण,सेवानिवृत प्राचार्य डायट और डॉ. दिनेश रतूड़ी,सेवानिवृत्ति प्रवक्ता, एससीईआरटी भी शामिल रहे। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए दैनिक जीवन में अपनाई जा सकने वाली सरल, व्यावहारिक एवं प्रभावी गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्व को रेखांकित किया गया। 

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना था कि मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक समस्याओं की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं को समझने, अपनी भावनाओं को पहचानने, परिस्थितियों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने तथा जीवन को सहजता और प्रसन्नता के साथ जीने की क्षमता से भी जुड़ा है। 

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसी परिस्थिति को देखने का हमारा दृष्टिकोण हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करता है। कई बार परिस्थितियाँ उतनी कठिन नहीं होतीं, जितनी कठिन हम अपनी सोच के कारण उन्हें बना लेते हैं। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि एक ही परिस्थिति को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है और सकारात्मक एवं संतुलित सोच तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है। 

यह भी रेखांकित किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्वयं के विचारों और व्यवहार के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। अपने भावनात्मक पैटर्न, प्रतिक्रियाओं और तनाव उत्पन्न करने वाले कारकों को पहचानकर व्यक्ति अपने व्यवहार में आवश्यक बदलाव ला सकता है। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के परस्पर संबंध पर चर्चा की गई। प्रिया गुसाईं , प्रवक्ता SCERT उत्तराखंड द्वारा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या को मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्वपूर्ण आधारों के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ रहने के लिए केवल मानसिक स्तर पर प्रयास करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर की आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। 

साथ ही, आत्म-जागरूकता को मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया गया। अपनी भावनाओं, आदतों, प्रतिक्रियाओं और विचारों को बिना किसी पूर्वाग्रह के समझना हमें स्वयं के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने में सहायता करता है।कार्यक्रम में हँसी को तनाव कम करने और जीवन में सहजता बनाए रखने के एक उपयोगी माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। स्वयं पर हँस सकना, छोटी-छोटी बातों को बहुत गंभीरता से न लेना और जीवन की सामान्य परिस्थितियों में हास्य खोज पाना मानसिक लचीलेपन को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।  

कार्यक्रम का समापन कृतज्ञता के महत्त्वपूर्ण संदेश के साथ हुआ। जीवन में जो कुछ हमारे पास है, उसे पहचानना, छोटी-छोटी खुशियों का अनुभव करना और अपने जीवन में योगदान देने वाले लोगों एवं परिस्थितियों के प्रति आभार व्यक्त करना सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक है। कृतज्ञता का अभ्यास हमें केवल उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करने से रोकता है, जो हमारे पास नहीं हैं, और उन अनुभवों एवं संबंधों को पहचानने में मदद करता है, जो हमारे जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए बड़े बदलावों की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, आत्म-जागरूकता, सकारात्मक दृष्टिकोण, हास्यबोध, जीवन में ठहराव और कृतज्ञता जैसे छोटे-छोटे अभ्यास हमारे जीवन को अधिक संतुलित, आनंदपूर्ण और सार्थक बना सकते हैं। 

एस.सी.ई.आर.टी. की निदेशक ने अपने संदेश में कहा कि एससीईआरटी, उत्तराखंड में आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने तथा स्वस्थ मन और स्वस्थ जीवन की संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहेगा। बदलते सामाजिक परिवेश, जीवनशैली, बढ़ती अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धा के कारण मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में वृद्धि हो रही है। ऐसी परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मानसिक रूप से सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में पूरे माह विद्यालयों में विभिन्न जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों सहित सभी संबंधित व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है और उसकी अपनी विशिष्ट क्षमताएँ, संभावनाएँ एवं खूबियाँ हैं। अतः हमें स्वयं की तुलना दूसरों से करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए तथा अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए स्वयं को स्वीकार करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को यह विश्वास होना चाहिए कि वह विशेष है, अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकता है और अपने प्रयासों से अनेक उपलब्धियाँ हासिल कर सकता है। उन्होंने संदेश दिया कि दूसरों से तुलना करने के बजाय हमें अपनी रुचियों, क्षमताओं और आत्मविकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ मानसिकता, आत्मविश्वास और स्वयं की विशिष्टता को स्वीकार करना ही मानसिक स्वास्थ्य एवं जीवन में संतुलन की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।

प्रिया गुसाईं , प्रवक्ता SCERT उत्तराखंड 

Saturday, October 10, 2026

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर देहरादून में कार्यशाला: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण को सशक्त बनाने की पहल

 

पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने किया प्रतिभाग, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल ने की मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता

देहरादून, 10 अक्टूबर 2026। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर उत्तराखंड में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण एवं सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देहरादून स्थित ट्रांजिट हॉस्टल, रेसकोर्स सेंटर में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जनपद नैनीताल के पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण विकसित करना तथा सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षण (Social, Emotional and Ethical Learning–SEEL) को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने के लिए शिक्षकों को प्रेरित करना था।

निदेशक बंदना गर्ब्याल ने की मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता

कार्यशाला में  बंदना गर्ब्याल, निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं डॉ. बी. पी. मैंदोली, स्टाफ ऑफिसर, समग्र शिक्षा उत्तराखंड ने विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल शैक्षिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता, सहयोग और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है।

मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण पर विशेष चर्चा

कार्यशाला में मनोदर्पण सेल के माध्यम से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों, तनाव, सामाजिक अलगाव और भावनात्मक कठिनाइयों को समझने तथा समय पर आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए संवेदनशील बनाने पर जोर दिया गया।

सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण के अंतर्गत विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, भावनात्मक संतुलन, संवाद कौशल, जिम्मेदार निर्णय लेने और सहयोगात्मक व्यवहार विकसित करने की आवश्यकता रेखांकित की गई।

डॉ. बी. पी. मैंदोली ने विद्यार्थियों के समग्र विकास में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को स्पष्ट करते हुए शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शैक्षिक उपलब्धियों के साथ बच्चों की भावनात्मक और सामाजिक क्षमताओं को भी समान प्राथमिकता देने पर बल दिया।

सहयोगी संस्थाओं ने साझा किए नवाचारी अनुभव

कार्यशाला में Dream a Dream एवं Labhya Foundation जैसी सहयोगी संस्थाओं ने विद्यालयों में सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण, जीवन कौशल और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने से संबंधित अपने अनुभव एवं कार्यप्रणालियां साझा कीं।

इन संस्थाओं ने अनुभव-आधारित गतिविधियों, समूह शिक्षण, सकारात्मक संवाद तथा सहयोगात्मक कक्षा-कक्ष वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों के भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित करने के विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

प्रतिभागी प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों को विद्यालयों की नियमित गतिविधियों में शामिल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसके अंतर्गत प्रार्थना सभा, समूह चर्चा, रचनात्मक गतिविधियों, सहपाठी सहयोग और विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद के माध्यम से सकारात्मक विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर सहमति बनी।

विद्यालयों में बच्चों को बिना भय और संकोच अपनी भावनाएं व्यक्त करने, समस्याएं साझा करने तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराना इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।

समावेशी एवं बाल-केंद्रित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित यह कार्यशाला उत्तराखंड में बाल-केंद्रित, समावेशी एवं संवेदनशील विद्यालयी शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की समग्र एवं अनुभवात्मक शिक्षा की भावना के अनुरूप ऐसी पहलें विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को भी मजबूत बनाने में सहायक हो सकती हैं।

कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि एक अच्छा विद्यालय केवल वह नहीं है जहां बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें, बल्कि वह भी है जहां प्रत्येक बच्चा स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित, प्रसन्न और आत्मविश्वास से परिपूर्ण महसूस करे।

उत्तराखंड में इस प्रकार के प्रयास शिक्षकों, विद्यालय प्रमुखों, अभिभावकों एवं सहयोगी संस्थाओं के सामूहिक योगदान से बच्चों के लिए अधिक संवेदनशील, सकारात्मक और खुशहाल शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राज्य विज्ञान संगोष्ठी–2026: भारतीय ऊर्जा परिदृश्य 2047: संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ

   देहरादून, 10 अक्टूबर 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखंड ने ‘भारतीय ऊर्जा परिदृश्य 2047: संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ’ विषय पर राज्य स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी–2026 आयोजित की। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों में ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विकास और भारत की भावी ऊर्जा जरूरतों के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना था। राज्य के सभी 13 जनपदों से प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त कक्षा 8 से 10 तक के 25 विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गुरु वंदना से हुआ। 

निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड बंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक एससीईआरटी  पदमेन्द्र सकलानी, उपनिदेशक विनोद सिंह मटूडा, सहायक निदेशक डॉ के.एन. बिजल्वाण और निर्णायक मंडल के सदस्यों ने दीप प्रज्वलित किया। निर्णायक मंडल में कैलाश चंद्र, पूर्व शिक्षा अधिकारी,राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र ,नई दिल्ली, राकेश जुगराण,सेवानिवृत प्राचार्य डायट और डॉ. दिनेश रतूड़ी,सेवानिवृत्ति प्रवक्ता, एससीईआरटी शामिल रहे। कार्यक्रम की रूपरेखा समन्वयक डॉ. देवराज सिंह राणा ने प्रस्तुत की जबकि संचालन प्रवक्ता गोपाल घुघत्याल ने किया। 

ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर विद्यार्थियों के विचार

    विद्यार्थियों ने सौर, जलविद्युत, पवन और परमाणु ऊर्जा सहित विभिन्न ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं पर पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुतियाँ दीं। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के संदर्भ में गाड़-गदेरों के जलप्रवाह से लघु जलविद्युत परियोजनाओं के विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के सुझाव भी दिए गए।

विद्यार्थियों ने ऊर्जा से जुड़े रोजगार और आजीविका संबंधी मुद्दों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कौशल विकास, वैकल्पिक रोजगार और न्यायसंगत ऊर्जा की आवश्यकता बताई। प्रस्तुतियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, नवाचार और समस्या-समाधान की क्षमता स्पष्ट दिखाई दी।

मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर

   विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी चर्चा हुई। श्रीमती बंदना गर्ब्याल ने कहा कि बच्चों का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगिता के दबाव के बजाय अपनी क्षमताओं के अनुरूप श्रेष्ठ प्रयास करने और शिक्षकों से संवेदनशील एवं सहयोगी वातावरण बनाने का आग्रह किया।

एससीईआरटी की प्रवक्ता प्रिया गुसाईं ने मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच पर आधारित गतिविधियाँ आयोजित कीं।

उत्कृष्ट प्रस्तुतियों का चयन 

    निर्णायक मंडल ने विषयवस्तु, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और विषय की समझ के आधार पर प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। निर्णायक मंडल द्वारा प्रथम प्रतिभा रावत जे॰एस॰एन एस एन एम इंटर कॉलेज गैरसैंण चमोली, द्वितीय आरवी कंसवाल ऋषिकेश इंटरनेशनल स्कूल टिहरी गढ़वाल तथा तृतीय स्थान लक्ष्मी भट्ट सराफ़ पब्लिक स्कूल खटीमा उधम सिंह नगर एवं सभी प्रतिभागियो को प्रमाणपत्र, मेडल, पुस्तक और सहायक सामग्री देकर पुरस्कृत किया एवं अन्य को सांत्वना पुरस्कार प्रदान कर प्रमाण पत्र दिए गए। कार्यक्रम में डॉ. नमिता भंडारी, डॉ.हिमानी थापा, रमेश बडोनी, डॉ संजय भट्ट, डॉ कपिल देव सेमवाल , राजकुमार,  सिद्धार्थ कुमार मार्गदर्शक शिक्षक तथा अभिभावक सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।