Friday, July 10, 2026

राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (NPEP) के अंतर्गत राज्य संसाधन व्यक्तियों के क्षमता निर्माण हेतु पाँच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ


देहरादून | 10 जुलाई, 2026

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (NPEP) के अंतर्गत राज्य संसाधन व्यक्तियों के क्षमता निर्माण हेतु पाँच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ देवभूमि देहरादून में हुआ। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति कार्यक्रम के समन्वयक तथा राज्य संसाधन व्यक्ति सहभागिता कर रहे हैं।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (NPEP) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शोध क्षमता को सुदृढ़ करना तथा राज्यों के बीच ज्ञान, अनुभव एवं सर्वोत्तम शैक्षिक प्रथाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।

जमीनी स्तर के शोध से शिक्षा में आएगा सकारात्मक परिवर्तन

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. डी. पी. सकलानी, निदेशक, एनसीईआरटी ने की। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए ग्रासरूट रिसर्च (Grassroot Research) के महत्व पर विशेष बल दिया।

उन्होंने कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं, चुनौतियों एवं वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित शोध ही शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी और परिणामोन्मुख बना सकता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे शोध को विद्यालयी शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाएं।

शोध निष्कर्षों का हो प्रभावी उपयोग

इस अवसर पर बन्दना गर्ब्याल, निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, एससीईआरटी उत्तराखण्ड ने अपने संबोधन में कहा कि शोध अध्ययनों से प्राप्त निष्कर्षों का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शोध निष्कर्षों के आधार पर नीतिगत निर्णयों, शैक्षिक नवाचारों तथा विद्यालयी शिक्षा में गुणात्मक सुधार को गति प्रदान की जा सकती है।

कार्यशाला की रूपरेखा एवं अपेक्षित परिणाम

कार्यक्रम की प्रमुख प्रो. गौरी श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कार्यशाला की रूपरेखा, उद्देश्यों एवं अपेक्षित परिणामों की जानकारी प्रतिभागियों को दी।

उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में शोध संस्कृति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है।

41 शोध प्रस्तावों का होगा अकादमिक परीक्षण

कार्यशाला के समन्वयक प्रो. बिजॉय के. मलिक तथा प्रो. हरीश कुमार मीणा ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने बताया कि पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों के शोध प्रस्तावों का गहन अकादमिक परीक्षण, समीक्षा, परिष्करण एवं अंतिम रूप प्रदान किया जाएगा।

कार्यशाला में 41 शोध प्रस्तावों का गहन अकादमिक परीक्षण, परिष्करण एवं अंतिम रूप से अनुमोदन किया जाएगा।

एससीईआरटी उत्तराखण्ड के अधिकारियों की सहभागिता

इस अवसर पर एससीईआरटी उत्तराखण्ड के पद्मेन्द्र सकलानी, अपर निदेशक, डॉ. के. एन. बिजल्वाण, सहायक निदेशक तथा एनपीईपी प्रकोष्ठ, एससीईआरटी उत्तराखण्ड के संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

सभी अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों ने कार्यशाला के सफल संचालन तथा प्रतिभागियों को आवश्यक अकादमिक सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान का राष्ट्रीय मंच

पाँच दिवसीय यह राष्ट्रीय कार्यशाला राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के शोधकर्ताओं, समन्वयकों एवं संसाधन व्यक्तियों को एक साझा मंच प्रदान करेगी, जहाँ वे अपने अनुभवों, शोध निष्कर्षों एवं सर्वोत्तम शैक्षिक प्रथाओं का आदान-प्रदान करेंगे।

यह कार्यशाला राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (NPEP) के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और प्रमाण-आधारित शैक्षिक सुधारों को नई दिशा प्रदान करेगी।

यह राष्ट्रीय कार्यशाला शिक्षा में स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित शोध को प्रोत्साहित करते हुए नीतिगत एवं शैक्षिक सुधारों के लिए एक सशक्त आधार तैयार करेगी।

Thursday, July 09, 2026

वैश्विक मंच पर SCERT उत्तराखण्ड की AI एवं ICT आधारित शिक्षक प्रशिक्षण पहल AI for Education Awards 2026 में विश्व की शीर्ष 6 परियोजनाओं में शामिल

 

 जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड), 8 जुलाई 2026

भारत के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि उत्तराखण्ड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा विकसित अभिनव परियोजना "Building Future-Ready Teachers through AI and ICT Enabled MOOCs" को AI for Education Awards 2026 के प्रतिष्ठित Teacher Training Award वर्ग में विश्व के शीर्ष छह (Top 6 Finalists) नवाचारों में स्थान प्राप्त हुआ है।

इस प्रतिष्ठित वैश्विक प्रतियोगिता के परिणाम AI for Good Global Summit 2026 के दौरान जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में घोषित किए गए। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 47 देशों तथा छह महाद्वीपों से प्राप्त उत्कृष्ट परियोजनाओं का अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की जूरी द्वारा बहु-स्तरीय मूल्यांकन किया गया। कठोर चयन प्रक्रिया के पश्चात प्रत्येक श्रेणी में विश्व की सर्वश्रेष्ठ परियोजनाओं का चयन किया गया।

विद्यालयी शिक्षा सचिव रविनाथ रामन (IAS) ने इस उपलब्धि पर निदेशक वन्दना गर्ब्याल, SCERT की तकनीकी टीम, विषय विशेषज्ञों एवं सभी सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल भारत के लिए डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बनेगी। 

भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली यह परियोजना निदेशक बन्दना गर्ब्याल, रमेश प्रसाद बडोनी एवं आईटी संकाय सदस्य, SCERT उत्तराखण्ड के नेतृत्व में विकसित की गई है। इस पहल को विद्यालयी शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उत्तरदायी, समावेशी एवं प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण माना गया है।

महानिदेशक आकांक्षा कोंडे  ने इसे SCERT परिवार एवं हजारों शिक्षकों को सामूहिकबधाई देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड का यह मॉडल अब वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बनेगा। 

निदेशक, अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण, SCERT उत्तराखण्ड, बंन्दना गर्ब्याल ने कहा—

"यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि SCERT परिवारविषय विशेषज्ञों, तकनीकी सहयोगियों तथा उत्तराखण्ड के हजारों समर्पित शिक्षकों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। हमारा उद्देश्य प्रत्येक शिक्षक को AI एवं डिजिटल तकनीकों से सशक्त बनाकर भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है। हमें प्रसन्नता है कि उत्तराखण्ड का यह मॉडल अब वैश्विक मंच पर प्रेरणा का स्रोत बनेगा।"

अपर निदेशक एस सी ई आर टी उत्तराखण्ड पदमेन्द्र सकलानी ने बधाई देते हुए इसे AI टेक्नॉलाजी का सर्वोत्तम उपयोग का माडल मानते हुए  इसे आने वाले समय मे  परियोजना  Global Empowerment Programme हिस्सा बनेगा , जहाँ इसकी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ विश्वभर के देशों के साथ साझा की जाएँगी।

उत्तराखण्ड का AI आधारित शिक्षक प्रशिक्षण बना वैश्विक मॉडल

SCERT उत्तराखण्ड द्वारा विकसित "Fundamentals of AI and ICT Tools for School Teachers" नामक विशाल ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम (MOOC) ने राज्य में शिक्षक क्षमता विकास का एक नया अध्याय स्थापित किया है।

इस परियोजना की प्रमुख उपलब्धियाँ अत्यंत प्रेरणादायक हैं—

  • राज्य के 49,000 से अधिक शिक्षकों का पंजीकरण।
  • 47,000 से अधिक शिक्षकों का सफल प्रमाणन।
  • उत्तराखण्ड के 15,000 से अधिक विद्यालयों में लगभग 97 प्रतिशत तक पहुँच।
  • देश में बड़े स्तर पर संचालित ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सर्वाधिक सफल पूर्णता दरों में से एक।
  • e-SRIJAN AI Chatbot एवं विद्या समीक्षा केन्द्र (Vidya Samiksha Kendra) के माध्यम से वास्तविक समय (Real-time) निगरानी एवं प्रगति विश्लेषण।
  • दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक समान गुणवत्ता का डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में उल्लेखनीय सफलता।

इस अभिनव कार्यक्रम ने पारंपरिक प्रशिक्षण प्रणाली की सीमाओं को समाप्त करते हुए शिक्षकों को कभी भी, कहीं भी डिजिटल माध्यम से सीखने का अवसर प्रदान किया तथा उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शिक्षण के लिए सक्षम बनाया।

शिक्षक प्रशिक्षण से नवाचार की नई संस्कृति

इस परियोजना का प्रभाव केवल शिक्षक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा।

प्रशिक्षित शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में AI आधारित शिक्षण, डिजिटल टूल्स, इंटरैक्टिव कक्षाएँ एवं तकनीक-सम्मिलित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया। इसके परिणामस्वरूप विद्यार्थियों की सहभागिता, सीखने की गुणवत्ता तथा नवाचार आधारित शिक्षण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

इसी प्रशिक्षण के आधार पर SCERT उत्तराखण्ड ने Innovate Uttarakhand Hackathon जैसी राज्य स्तरीय पहल प्रारम्भ की, जिसमें हजारों विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान विकसित किए। इन नवाचारों में वनाग्नि नियंत्रण, भूस्खलन प्रबंधन, आपदा न्यूनीकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़े अनेक अभिनव समाधान प्रस्तुत किए गए।

सीमित संसाधनों में विश्वस्तरीय उपलब्धि

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे अत्यंत सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ विकसित किया गया।

महंगे Learning Management System (LMS) के स्थान पर SCERT ने e-SRIJAN AI Chatbot आधारित प्रशिक्षण प्रणाली विकसित की, जिसने—

  • मोबाइल आधारित सहज पहुँच
  • कम लागत में व्यापक विस्तार
  • AI आधारित मार्गदर्शन
  • स्वचालित सहायता
  • वास्तविक समय प्रगति विश्लेषण
  • डेटा आधारित निर्णय प्रणाली

जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराकर इसे विश्वस्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल के रूप में स्थापित किया।

कठोर अंतरराष्ट्रीय मूल्यांकन में भारत की सफलता

AI for Education Awards 2026 के अंतर्गत प्रत्येक परियोजना का बहु-स्तरीय मूल्यांकन किया गया, जिसमें—

  • पात्रता परीक्षण
  • अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन
  • निर्धारित मानकों पर अंकन
  • अंतिम जूरी विचार-विमर्श 

के आधार पर चयन किया गया। SCERT उत्तराखण्ड की परियोजना को विश्व की छह सर्वश्रेष्ठ शिक्षक प्रशिक्षण परियोजनाओं में स्थान मिलना भारतीय शिक्षा व्यवस्था तथा डिजिटल नवाचार की वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण है।

वैश्विक मंच पर आगे भी जारी रहेगा भारत का सफर

यद्यपि इस वर्ष Teacher Training Award दक्षिण अफ्रीका की परियोजना "Kitso Learning Chatbot" को प्रदान किया गया, फिर भी भारत का शीर्ष छह वैश्विक फाइनलिस्टों में चयन अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस चयन के साथ SCERT उत्तराखण्ड की परियोजना अब 1 सितम्बर 2026 से प्रारम्भ होने वाले Global Empowerment Programme का हिस्सा बनेगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व के चयनित नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय Masterclasses, वैश्विक e-Book, तथा विभिन्न ज्ञान-साझाकरण मंचों पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे विश्वभर के शिक्षक एवं शिक्षा संस्थान इन सर्वोत्तम प्रथाओं से प्रेरणा प्राप्त करेंगे।

UNESCO द्वारा पूर्व में भी मिल चुकी है वैश्विक पहचान

यह उपलब्धि SCERT उत्तराखण्ड की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान को और सशक्त करती है। इससे पूर्व उत्तराखण्ड की बालिकाओं के सशक्तिकरण हेतु AI एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी आधारित पहल को UNESCO IITE द्वारा प्रकाशित वैश्विक केस स्टडी में भी स्थान दिया जा चुका है। अब AI for Education Awards 2026 में प्राप्त यह सम्मान उत्तराखण्ड को डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षा नवाचारों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में स्थापित करता है।

भारत के लिए गौरव का विषय

SCERT उत्तराखण्ड की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि दूरदर्शी नेतृत्व, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा डिजिटल तकनीकों का प्रभावी उपयोग सीमित संसाधनों में भी विश्वस्तरीय परिणाम दे सकता है।

यह सम्मान केवल उत्तराखण्ड या SCERT की सफलता नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा प्रणाली, डिजिटल परिवर्तन, शिक्षक क्षमता निर्माण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भविष्य की शिक्षा के वैश्विक स्वीकार का प्रतीक है।

यह परियोजना आज विश्व के समक्ष भारत की उस सोच का प्रतिनिधित्व कर रही है, जिसमें प्रत्येक शिक्षक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाकर प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और भविष्य उन्मुख शिक्षा पहुँचाने का संकल्प निहित है।

कोर्स टीम सदस्य : डॉ. अजय सेमल्टी, डॉ. इश्तियाक अहमद, मनोज बहुगुणा, रमेश बड़ोनी, डॉ. किरण लता डंगवाल, डॉ. चांदनी अग्रवाल, बर्गिन, डॉ. आशीष रतूड़ी, सुप्रिया बहुखंडी, अर्चना गर्ब्याल, पंकज बिजल्वाण, भास्कर जोशी, अजय पाल सिंह नेगी, प्रदीप नेगी, अंकित जोशी, प्रकाश चंद्र उपाध्याय, दौलत गुसाईं, अशोक भट्ट, राजमोहन रावत, अल्पा निगम, डॉ. अतुल बमराड़ा, मनोधर नैणवाल, विनोद बसेड़ा, प्रभाकर जोशी, रविंद्र रौतेला, सौरभ जोशी, विनय उनियाल, रजत छिब्बर, अचल थपलियाल, एस. पी. वर्मा, पुष्पा असवाल तथा अन्य सहयोगी स्टाफ ने इस महत्वपूर्ण कार्य के सफल संचालन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। सभी के सामूहिक प्रयास, समर्पण और टीम भावना के कारण कार्यक्रम का प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन संभव हो सका।


https://apnuuttarakhand.com/good-news-for-uttarakhand-education-departments-model-discussed-abroad-scert-institute-to-be-honored-with-unescos-teacher-training-award/

Wednesday, July 08, 2026

उत्तराखंड बना भारत का पूर्ण साक्षर राज्य

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को मिली ऐतिहासिक सफलता

देहरादून | 08 जुलाई, 2026

उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज करते हुए भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। उत्तराखंड शासन के माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-03 द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 तथा उल्लास (ULLAS) – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रयासों के आधार पर भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय ने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।

यह ऐतिहासिक अधिसूचना 08 जुलाई, 2026 को उत्तराखंड शासन के सचिव रविनाथ रमन द्वारा जारी की गई, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए गर्व और उपलब्धि का महत्वपूर्ण क्षण है।

साक्षर उत्तराखंड की दिशा में ऐतिहासिक कदम

निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल ने बताया कि बीते वर्षों में विद्यालयी शिक्षा, वयस्क शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता तथा नवाचार आधारित शिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। विशेष रूप से ULLAS – Understanding of Lifelong Learning for All in Society (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के अंतर्गत निरक्षर वयस्कों तक शिक्षा पहुँचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया, जिसमें शिक्षकों, स्वयंसेवकों, विद्यालयों, पंचायतों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी रही।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि लाखों शिक्षकों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, स्वयंसेवकों तथा समाज के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतिफल है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की ओर बड़ी सफलता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना है। उत्तराखंड ने इस दिशा में निरंतर कार्य करते हुए साक्षरता, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और जीवनपर्यंत सीखने की अवधारणा को प्रभावी रूप से लागू किया है। राज्य की यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

शिक्षा विभाग के लिए गौरव का क्षण

शिक्षा मंत्री के अनुसार पूर्ण साक्षर राज्य बनने की यह उपलब्धि उत्तराखंड के शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों, विद्यालयों, शिक्षकों तथा समाज के सभी सहयोगी संगठनों के समर्पण और उत्कृष्ट समन्वय का परिणाम है। यह सफलता राज्य की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी।

भविष्य की दिशा

अब उत्तराखंड का लक्ष्य केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कार्यात्मक साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, जीवन कौशल एवं आजीवन सीखने (Lifelong Learning) को प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे राज्य ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण की दिशा में और अधिक सशक्त कदम बढ़ाएगा।

उत्तराखंड के लिए यह उपलब्धि केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन, जनभागीदारी और समावेशी विकास की ऐतिहासिक यात्रा का स्वर्णिम अध्याय है।