मनोज बहुगुणा एन ई पी सेल
राष्ट्रीय शिक्षा
नीति (NEP) 2020 की अनुशंसाओं तथा उत्तराखंड राज्य
पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश
भर से समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों एवं खंड शिक्षा अधिकारियों के लिए दो दिवसीय
अभिमुखीकरण कार्यशाला के द्वितीय चरण का आयोजन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं
प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सभागार में किया गया।
कार्यशाला के
प्रथम दिवस का शुभारंभ अपर निदेशक गढ़वाल मंडल कंचन देवराड़ी, अपर निदेशक SCERT पद्मेन्द्र कुमार सकलानी तथा सहायक निदेशक डॉ. के.एन. बिजल्वाण द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
शुभारंभ अवसर पर
अपर निदेशक महोदया ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं का वास्तविक और सार्थक क्रियान्वयन तभी संभव
है, जब शिक्षा अधिकारी एवं शिक्षक इसे जमीनी
स्तर पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से
कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता और सार्थक संवाद का आह्वान किया। कार्यशाला के
प्रथम सत्र में NEP के राज्य समन्वयक मनोज बहुगुणा द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख अनुशंसाओं, उत्तराखंड में उनके क्रियान्वयन तथा भावी
कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
इसके पश्चात सहायक
निदेशक डॉ. के.एन. बिजल्वाण एवं राज्य समन्वयक रविदर्शन तोपाल द्वारा राष्ट्रीय
शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर
विस्तार से व्याख्यान दिया गया।
बुनियादी स्तर (Foundational Stage) हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा
प्रतिभागियों को
अवगत कराया गया कि 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए तैयार की गई उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की
रूपरेखा, NEP 2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के मार्गदर्शन में विकसित की गई है, जिसमें राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं को समाहित किया गया है।
मुख्य विशेषताएँ—
- पंचकोश विकास की अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय कोष)
- खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित
शिक्षा
- मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षण
- बहुआयामी एवं सर्वांगीण विकास
- तनाव-मुक्त शिक्षण वातावरण
- अवलोकन एवं पोर्टफोलियो आधारित
मूल्यांकन
- FLN (Foundational Literacy &
Numeracy) पर विशेष जोर
विद्यालयी शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF-SE)
विद्यालयी शिक्षा
के लिए तैयार SCF-SE को NEP 2020 एवं NCF की अनुशंसाओं के अनुरूप स्थानीय संदर्भों
में ढाला गया है। इसका उद्देश्य छात्रों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को सुनिश्चित
करना है।
इसमें 5+3+3+4 की नई संरचना, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, FLN पर फोकस, विषय चयन में लचीलापन, तथा स्थानीय संदर्भित विषयवस्तु को पाठ्यपुस्तकों में शामिल
करने की व्यवस्था की गई है।
कक्षा 11 से विषय चयन की नई व्यवस्था, चार विषय समूहों की संरचना, कक्षा 9–10 में गणित का द्विस्तरीय मूल्यांकन, तथा अतिरिक्त विषय चयन की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण
प्रावधानों की जानकारी दी गई।
राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST)
द्वितीय दिवस की
कार्यशाला में डॉ. अंकित जोशी द्वारा राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST) पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें शिक्षकों की दक्षता, करियर प्रगति, पदोन्नति एवं व्यावसायिक विकास को योग्यता आधारित बनाने की अवधारणा पर प्रकाश
डाला गया।
NPST के अंतर्गत शिक्षक प्रोफाइल के तीन स्तर— प्रवीण शिक्षक ,उन्नत शिक्षक ,कुशल शिक्षक
तथा तीन प्रमुख
मानक— मूल मूल्य एवं नैतिकता, ज्ञान एवं शिक्षण अभ्यास, व्यावसायिक विकास को विस्तार से
समझाया गया।
विद्यालयी समय-सारणी एवं समय प्रबंधन
राज्य पाठ्यचर्या
की रूपरेखा के अंतर्गत विद्यालयों की दैनिक समय-सारणी एवं समय आवंटन पर डॉ. मोहन बिष्ट द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें लचीली समय-सारणी, बस्ते का बोझ कम करना, प्राथमिक स्तर पर गृहकार्य से मुक्ति, कला, खेल एवं पुस्तकालय के लिए समर्पित समय
जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल रहीं।
ICT एवं उभरती तकनीकों का एकीकरण
NEP 2020 में ICT एवं IT की भूमिका पर रमेश बडोनी एवं पुष्पा असवाल द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें NETF की स्थापना, DIKSHA, SWAYAM, वर्चुअल लैब्स, ब्लेंडेड लर्निंग, AI आधारित व्यक्तिगत सीखने, कक्षा 6 से कोडिंग, तथा शिक्षक क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।
राज्य में पीएम
ई-विद्या के अंतर्गत संचालित शैक्षिक टीवी चैनलों की जानकारी भी साझा की गई तथा AI जनरेटिव वीडियो के माध्यम से संसाधन सामग्री प्रस्तुत की
गई।
परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) पर विमर्श
उप राज्य परियोजना
निदेशक अजीत भंडारी द्वारा वर्ष 2018–19 से 2023–24 तक की PGI रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें अन्य
राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति पर व्यापक चर्चा की गई।
कार्यशाला का
समापन निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्व्याल द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि NEP 2020 की अनुशंसाओं को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षा
अधिकारियों, संस्थाध्यक्षों एवं शिक्षकों की है।
उन्होंने विद्यालयों में सतत अवलोकन, अच्छे कार्यों के लिए प्रोत्साहन और सकारात्मक कार्यसंस्कृति विकसित करने का
आह्वान किया।
अंत में अपर
निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में
प्रदेश भर से शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, DIET प्राचार्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं संस्थाध्यक्ष उपस्थित रहे।
इस दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यशाला में कुल 93 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यशाला में अपर निदेशक गढ़वाल मंडल कंचन देवराड़ी, मुख्य शिक्षा अधिकारी उधमसिंह नगर कुंवर सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी बागेश्वर विनय कुमार आर्य, प्राचार्य DIET पौड़ी गढ़वाल स्वराज सिंह तोमर, प्राचार्य DIET रुड़की सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से खंड शिक्षा अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी, प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में सक्रिय सहभागिता करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने अनुभव, सुझाव एवं विचार साझा किए।