Friday, August 07, 2026

किशोर-किशोरियों को जागरूक और जीवन कौशल से सशक्त बनाने की पहल

SCERT उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना के अंतर्गत पोस्टर एवं कैलेंडर विकास कार्यशाला आयोजित

देहरादून, 7 अगस्त 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड, देहरादून में राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (NPEP) के अंतर्गत किशोर-किशोरियों को विभिन्न सामाजिक, स्वास्थ्य एवं जीवन-कौशल से जुड़े संवेदनशील विषयों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पोस्टर एवं कैलेंडर विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह पांच दिवसीय कार्यशाला 3 अगस्त से 7 अगस्त 2026 तक SCERT की संगीत लैब में आयोजित हुई।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किशोर-किशोरी क्लबों की गतिविधियों तथा जन-जागरूकता अभियानों के लिए सरल, तथ्यपरक, आयु-अनुकूल और प्रभावशाली सामग्री विकसित करना था, ताकि विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों तक महत्वपूर्ण विषयों की सही जानकारी रोचक और सहज रूप में पहुँचाई जा सके।

संवेदनशील विषयों पर तैयार हुई जागरूकता सामग्री

कार्यशाला के दौरान किशोरावस्था से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा, लेखन एवं सामग्री विकास किया गया। इनमें लैंगिक समानता, रैगिंग की रोकथाम, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, योग एवं स्वस्थ जीवनशैली, नशा उन्मूलन, सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता, एनीमिया तथा आपदा प्रबंधन जैसे विषय प्रमुख रहे।

विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने इन विषयों को विद्यार्थियों की आयु, उनकी समझ और विद्यालयी परिवेश को ध्यान में रखते हुए सरल एवं सटीक रूप में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया। विकसित सामग्री को कैलेंडर, पोस्टर और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुँचाने की रूपरेखा भी तैयार की गई।

इसके साथ ही किशोर-किशोरी क्लबों के संचालन एवं उनके अंतर्गत आयोजित की जाने वाली गतिविधियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए, जिससे विद्यालयों में इन क्लबों को अधिक सक्रिय, उद्देश्यपूर्ण और प्रभावी बनाया जा सके।

विद्यार्थियों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करना आवश्यक

SCERT उत्तराखण्ड की निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं एवं उनके सामने आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपने आसपास की सामाजिक एवं व्यक्तिगत समस्याओं को समझने, उनके प्रति जागरूक होने और सही तरीके से उनका सामना करने के लिए तैयार करते हैं। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में जीवन कौशल, जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सकारात्मक व्यवहार का विकास भी होता है।

नैतिक मूल्यों और नवाचार को मिले विशेष स्थान

SCERT उत्तराखण्ड के अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी  ने किशोर-किशोरियों को भावी राष्ट्र की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए उनके समग्र विकास में नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और सही निर्णय लेने की क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने विकसित की जा रही सामग्री को बहुआयामी बनाने तथा उसमें शिक्षा के नवीन दृष्टिकोणों और नवाचारों को शामिल करने पर बल दिया, ताकि संदेश केवल जानकारी देने तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों के व्यवहार और सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी सहायक बने।

विकसित सामग्री का प्रस्तुतीकरण और विशेषज्ञ सुझाव

सहायक निदेशक डॉ. बिजलवान ने कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई सामग्री एवं अभिलेखों का प्रस्तुतीकरण देखा। उन्होंने सामग्री को अधिक प्रभावी, उपयोगी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

समस्या आने से पहले जागरूकता जरूरी

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ऊषा कटियार ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर-किशोरियों को समस्याओं के उत्पन्न होने के बाद केवल समाधान बताना नहीं, बल्कि उन्हें पहले से ही सजग, जागरूक और संवेदनशील बनाना है।

उन्होंने बताया कि ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में समस्या समाधान, सही निर्णय लेने की क्षमता, आत्मसम्मान, स्वस्थ आदतों, सकारात्मक सोच और जिम्मेदार व्यवहार जैसे आवश्यक जीवन कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सामूहिक प्रयास से तैयार हुई उपयोगी सामग्री

पांच दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागियों ने विषयों पर विचार-विमर्श, लेखन, प्रस्तुतीकरण और संशोधन की प्रक्रिया के माध्यम से उपयोगी जागरूकता सामग्री विकसित की। कार्यक्रम में हिमानी थापा रौतेला, संजय भट्ट, मोहित पुरोहित, कवीन्द्र, पुष्पा पठोई, जगमोहन एवं नमिता भंडारी ने सक्रिय योगदान दिया।

यह कार्यशाला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रही कि इसमें किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य एवं सामाजिक सरोकारों को केवल जानकारी के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उन्हें जीवन कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया।

रतब्याणी E-Magazine Vol. 4.0 launch: डिजिटल युग में ज्ञान, शोध और नवाचार

 "ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब वह सीमित पन्नों से निकलकर समाज तक पहुँचे।"

इसी विचार को साकार करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड के सम्मेलन कक्ष में रतब्याणी E-Magazine (चतुर्थ संस्करण) का गरिमामय लोकार्पण निदेशक अकादमिक  वन्दना गर्ब्याल द्वारा एक क्लिक के साथ किया गया। यह अवसर केवल एक पत्रिका के विमोचन का नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की शैक्षिक, शोधपरक और डिजिटल यात्रा के एक नए अध्याय के शुभारम्भ का प्रतीक बना।

इस अवसर पर अपर निदेशक  पद्मेन्द्र सकलानी, उपनिदेशक विनोद मतूड़ा, सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवान, SCERT के विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रवक्ता एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने इस डिजिटल पत्रिका को शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए इसकी सराहना की।

ज्ञान, नवाचार और संवेदना का संगम

जुलाई 2026 में प्रकाशित रतब्याणी Vol. 4.0 का मूल संदेश है—

"ज्ञान, नवाचार और संवेदना का संगम"

पत्रिका के प्रारम्भिक पृष्ठों में विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा, निदेशक अकादमिक, अपर निदेशक SCERT तथा सम्पादकीय संदेश के माध्यम से उत्तराखण्ड में हो रहे सकारात्मक शैक्षिक परिवर्तन, डिजिटल नवाचार, शिक्षक क्षमता निर्माण तथा भविष्य की शिक्षा की दिशा पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए हैं।

एक क्लिक में खुलती ज्ञान की नई दुनिया

रतब्याणी Vol. 4.0 की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्णतः डिजिटल एवं इंटरएक्टिव स्वरूप है।

यह केवल PDF नहीं बल्कि Flip Book आधारित Digital Magazine है, जिसमें—

  • प्रत्येक पृष्ठ वास्तविक पुस्तक की तरह पलटता है।
  • सभी Hyperlinks Clickable हैं।
  • शोध पत्रों एवं लेखों से संबंधित मूल स्रोतों, जर्नल, वेबसाइट और संदर्भ सामग्री तक सीधे पहुँचा जा सकता है।
  • वीडियो लिंक भी क्लिक करके देखे जा सकते हैं।
  • पाठक एक ही मंच पर पढ़ सकते हैं, सीख सकते हैं और आगे शोध भी कर सकते हैं।

इस प्रकार यह पत्रिका पारम्परिक पत्रिका से आगे बढ़कर एक डिजिटल नॉलेज प्लेटफ़ॉर्म का रूप ले चुकी है।

29 विविध विषयों पर आधारित ज्ञान का विशाल संकलन

इस संस्करण में 29 से अधिक लेख, शोध आलेख, केस स्टडी, नवाचार, कविताएँ, अनुभव, नीति आधारित विश्लेषण तथा प्रेरक आलेख प्रकाशित किए गए हैं। इनमें प्रमुख विषय शामिल हैं—

  • SCERT Uttarakhand की राष्ट्रीय उपलब्धियाँ एवं SKOCH Award
  • Inspire Award एवं बाल वैज्ञानिक
  • Artificial Intelligence in Education
  • Cyber Security
  • Digital Transformation
  • Scholarship Portal
  • MOOCs 3.0
  • DIKSHA 2.0
  • PM eVIDYA
  • Mission Karmayogi
  • PGI Report
  • Capacity Building
  • CLAP Project
  • Inclusive Pedagogy
  • Mental Well Being
  • मातृभाषा
  • SCF
  • NEP 2020
  • कला शिक्षा
  • योग
  • शोध आधारित केस स्टडी
  • नवाचारी शिक्षक
  • डिजिटल शिक्षा
  • विद्यालयी परिवर्तन
  • शिक्षा में AI के नए आयाम

पत्रिका शिक्षा, तकनीक, नीति, शोध और नवाचार के लगभग प्रत्येक महत्वपूर्ण क्षेत्र को समाहित करती है।

AI युग की शिक्षा का दस्तावेज़

रतब्याणी Vol. 4.0 केवल गतिविधियों का संकलन नहीं है। यह भविष्य की शिक्षा की दिशा प्रस्तुत करती है। पत्रिका में विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार—

  • Artificial Intelligence
  • Digital Learning
  • MOOCs
  • Cyber Security
  • Digital Citizenship
  • Data Driven Education
  • Capacity Building
  • Virtual Learning
  • Blended Learning

शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। यह संस्करण स्पष्ट करता है कि आने वाला समय केवल डिजिटल नहीं बल्कि AI Enabled Education Ecosystem का होगा।

शोध, केस स्टडी और नवाचार का समृद्ध मंच

इस संस्करण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें केवल समाचार प्रकाशित नहीं किए गए हैं।

बल्कि—

  • शोध आलेख
  • केस स्टडी
  • शैक्षिक नवाचार
  • विद्यालयों के श्रेष्ठ अभ्यास
  • डिजिटल परिवर्तन की सफल कहानियाँ
  • शिक्षक अनुभव
  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गतिविधियाँ
  • शिक्षा नीति आधारित विश्लेषण
  • प्रेरक कविताएँ
  • सामाजिक सरोकार को समान महत्व दिया गया है।

यह पत्रिका शिक्षकों, शोधार्थियों, शिक्षक प्रशिक्षकों तथा शिक्षा प्रशासकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ सामग्री बनती है।

लोकार्पण अवसर पर निदेशक अकादमिक वन्दना गर्ब्याल ने सभी विभागों के संकाय सदस्यों से आग्रह किया कि आगामी संस्करणों में प्रत्येक विभाग अपने—

  • शोध कार्य
  • नवाचार
  • केस स्टडी
  • अनुभव
  • शैक्षिक मॉडल
  • अनुसंधान
  • प्रयोग
  • सफलता की कहानियाँ पत्रिका में अवश्य प्रकाशित कराएँ।

उन्होंने कहा कि SCERT में अनेक उत्कृष्ट कार्य हो रहे हैं, जिन्हें केवल फाइलों तक सीमित न रखकर पूरे राज्य और देश तक पहुँचाया जाना चाहिए।

उन्होंने इस संस्करण में योगदान देने वाले सभी लेखकों, समीक्षकों एवं संपादकीय सहयोगियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे प्रयास शिक्षा जगत में संवाद और नवाचार की संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। इस संस्करण के सफल प्रकाशन में SCERT के अनेक अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

संपादकीय एवं समीक्षा सहयोग में विशेष रूप से— अरुण थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी ,डॉ. मनोज किशोर बहुगुणा , राकेश रावत विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

इनके सामूहिक प्रयासों ने पत्रिका को गुणवत्ता, प्रामाणिकता और विविधता प्रदान की। 

इस संस्करण में केवल SCERT उत्तराखण्ड के लेख ही नहीं हैं। इसमें देश के अनेक— राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक,  शिक्षा विशेषज्ञ, शोधकर्ता, नवाचारी शिक्षक, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी , शिक्षा नेतृत्वकर्ता , अकादमिक संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ, ने भी अपने अनुभव, शोध और विचार साझा किए हैं।

पत्रिका के मुख्य संपादक एवं SCERT के आईटी विभाग के प्रवक्ता रमेश प्रसाद बडोनी ने सभी शिक्षकों, शोधकर्ताओं, शिक्षक प्रशिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों, नवाचारकर्ताओं एवं शिक्षा समुदाय से आग्रह किया कि—

  • रतब्याणी को पढ़ें,
  • डिजिटल माध्यम से साझा करें,
  • प्रकाशित लेखों पर चर्चा करें,
  • अपने शोध, केस स्टडी, नवाचार एवं अनुभव आगामी संस्करणों हेतु भेजें,
  • तथा इस मंच को शिक्षा जगत के सामूहिक ज्ञान-साझाकरण का माध्यम बनाएँ।

उन्होंने कहा कि शिक्षा में परिवर्तन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि शिक्षकों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के साझा प्रयासों से आता है। रतब्याणी इसी सामूहिक ज्ञान-परंपरा का डिजिटल मंच है।

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Thursday, August 06, 2026

कौशलम् कार्यक्रम के अंतर्गत मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण (द्वितीय चक्र) का शुभारंभ

गढ़वाल मंडल के मास्टर ट्रेनर्स को मिलेगा 21वीं सदी के कौशलों का उन्नत प्रशिक्षण

दिनेशपुर (ऊधम सिंह नगर), 06 अगस्त 2026।
राज्य में विद्यालयी शिक्षा को अधिक प्रभावी, कौशल-आधारित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में कौशलम् कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण (द्वितीय चक्र) का शुभारंभ आज अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, दिनेशपुर (जनपद ऊधम सिंह नगर) में हुआ। यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण 06 अगस्त से 08 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।


प्रशिक्षण का शुभारंभ एससीईआरटी उत्तराखंड के उप निदेशक  विनोद मटूड़ा की गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन में हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल विषय ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विद्यार्थियों में जीवनोपयोगी कौशल, समस्या समाधान, रचनात्मकता, संवाद क्षमता और उद्यमशील सोच का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स से अपेक्षा की कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों और नवाचारों को अपने-अपने जनपदों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाएँ, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक और विद्यार्थी इसका लाभ प्राप्त कर सकें।


कार्यक्रम की शुरुआत माइंडफुलनेस सत्र के साथ हुई, जिसने प्रतिभागियों को सकारात्मक, एकाग्र एवं सीखने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान किया। इस सत्र ने प्रशिक्षण के लिए ऊर्जा, सहभागिता और आत्मचिंतन का उत्कृष्ट माहौल तैयार किया।

प्रशिक्षण में प्रोग्राम समन्वयक सुनील भट्ट, डॉ. साधना डिमरी, ऋतु कुकरेती, उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के विशेषज्ञ संदर्भदाता तथा गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों से आए मास्टर ट्रेनर्स सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं। आगामी तीन दिनों में प्रतिभागियों को कौशलम् कार्यक्रम की अवधारणा, 21वीं सदी के कौशल, उद्यमशील मानसिकता (Entrepreneurial Mindset), अनुभवात्मक अधिगम, तथा प्रभावी प्रशिक्षण तकनीकों पर व्यवहारिक एवं सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

इस प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य ऐसे दक्ष मास्टर ट्रेनर्स तैयार करना है, जो अपने-अपने जनपदों में शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करते हुए विद्यालयों में कौशल-आधारित शिक्षण संस्कृति को सुदृढ़ बना सकें। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नवाचार, नेतृत्व क्षमता और भविष्य के लिए आवश्यक दक्षताओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखंड में शिक्षा को अधिक व्यवहारिक, नवाचारी और जीवन-कौशल आधारित बनाने की एक सशक्त पहल बनकर उभर रहा है। मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से इसका प्रभाव राज्य के प्रत्येक विद्यालय तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।