Tuesday, July 28, 2026

विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव, IAS ने SCERT उत्तराखण्ड की गतिविधियों की समीक्षा कर गुणवत्ता शिक्षा पर दिया विशेष बल

 

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग की सचिव  ज्योति यादव, IAS ने आज समग्र शिक्षा सभागार में SCERT उत्तराखण्ड के विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों, वार्षिक कार्य योजना एवं बजट (AWP&B) तथा विभिन्न विभागों में संचालित गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में निदेशक अकादमिक वंदना गर्ब्याल सहित SCERT के वरिष्ठ अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के प्रारम्भ में निदेशक अकादमिक वंदना गर्ब्याल ने शिक्षा सचिव का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में SCERT उत्तराखण्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल नवाचार तथा स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित शैक्षिक सुधारों को प्राथमिकता देते हुए अनेक महत्वपूर्ण पहलें की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा सचिव के मार्गदर्शन में इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

इसके उपरांत शिक्षा सचिव  ज्योति यादव ने SCERT की समग्र गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देने के लिए  सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण से कहा। डॉ. बिजलवाण ने SCERT की वर्तमान प्रशासनिक संरचना, रिक्त पदों की स्थिति, विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षक शिक्षा, शोध, नवाचार, गुणवत्ता संवर्धन तथा राज्य में शिक्षा सुधारों के लिए चल रही पहलों पर प्रकाश डाला।

बैठक के दौरान SCERT के छहों विभागों द्वारा क्रमवार अपनी उपलब्धियाँ एवं आगामी कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत की गईं। पाठ्यक्रम विभाग ने NCERT पाठ्यपुस्तकों में 30 प्रतिशत स्थानीय संदर्भ (Local Context) को समाहित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी, जिससे विद्यार्थियों को अपने स्थानीय परिवेश, संस्कृति और ज्ञान परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

आईटी विभाग की ओर से आईटी प्रवक्ता रमेश प्रसाद बडोनी ने राज्य में विकसित एवं संचालित ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों (MOOCs) तथा डिजिटल शिक्षण पहलों की उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हजारों शिक्षकों तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सामग्री पहुँचाई जा रही है तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग से शिक्षक क्षमता निर्माण को नई दिशा मिली है।

इसी क्रम में कौशलम कार्यक्रम पर सुनील भट्ट ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों, उपलब्धियों तथा भविष्य की कार्ययोजना से शिक्षा सचिव को अवगत कराया। इसके अतिरिक्त शिक्षक शिक्षा, अनुसंधान, मूल्यांकन, छात्रवृत्ति, कार्यक्रम अनुश्रवण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न विभागों ने भी अपने-अपने कार्यों की प्रगति प्रस्तुत की।

समीक्षा बैठक में डॉ. हरीश बडोनी, राकेश रावत, डॉ. दीपक प्रताप, प्रिया गोसाईं, डॉ. राकेश गैरोला, रवि दर्शन तोपाल, मनोज बहुगुणा सहित SCERT के अनेक अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के समापन पर विद्यालय शिक्षा सचिव ज्योति यादव, ने सभी विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, समयबद्धता, नवाचार और परिणाम आधारित कार्य संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए SCERT की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और भविष्य में ऐसे प्रयास दिखाई देने चाहिए जो राज्य के प्रत्येक विद्यार्थी और शिक्षक तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ पहुँचाएँ।

उन्होंने सभी अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों का आह्वान किया कि वे नवाचार, डिजिटल तकनीक, शोध एवं स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित शैक्षिक सुधारों को और अधिक गति दें, ताकि उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सके।

Monday, July 27, 2026

कौशलम् कार्यक्रम: उत्तराखंड के विद्यालयों में उद्यमशील सोच और 21वीं सदी के कौशल

 

शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को परीक्षाओं के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना भी है। इसी सोच को साकार करने की दिशा में कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखंड के विद्यालयों में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य विद्यार्थियों में उद्यमशील मानसिकता (Entrepreneurial Mindset) विकसित करना तथा उन्हें 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से सशक्त बनाना है।

राज्य स्तर पर विशेष रिसोर्स ग्रुप (State Resource Group) की तीन दिवसीय कार्यशाला के सफल आयोजन के बाद अब कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण चरण प्रारंभ हो चुका है। इसी क्रम में एससीईआरटी, उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के 50 से अधिक शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण आगे चलकर प्रदेश के विद्यालयों में कौशलम् कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की मजबूत आधारशिला बनेगा।

शिक्षक बनेंगे परिवर्तन के वाहक

किसी भी शैक्षिक परिवर्तन की सफलता उसके शिक्षकों पर निर्भर करती है। यही कारण है कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को केवल कार्यक्रम की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे संदर्भदाता (Master Trainer) के रूप में तैयार करना है जो अपने-अपने जनपदों और विद्यालयों में अन्य शिक्षकों का मार्गदर्शन कर सकें।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कौशलम् कार्यक्रम की अवधारणा, उद्देश्य, शिक्षण-पद्धति, गतिविधि-आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम तथा विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण की पूरी रूपरेखा सहभागितापूर्ण और व्यवहारिक अनुभवों पर आधारित है, जिससे शिक्षक स्वयं सीखते हुए दूसरों को सीखाने के लिए सक्षम बन सकें।

केवल नौकरी नहीं, अवसरों का निर्माण करने की सोच

कौशलम् कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह विद्यार्थियों को केवल Job Seeker बनने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें Job Giver बनने की दिशा में प्रेरित करता है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में समस्या-समाधान, नवाचार, नेतृत्व, सहयोग, संचार कौशल, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित करने पर विशेष बल दिया जाता है।

आज के बदलते वैश्विक परिवेश में ये कौशल न केवल रोजगार के लिए आवश्यक हैं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की आधारशिला भी हैं।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल ने कौशलम् कार्यक्रम की आवश्यकता और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना भी है।

सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण ने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभवों और नवीन शिक्षण पद्धतियों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करें, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी अपने भीतर छिपी क्षमताओं को पहचान सके और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सके।

"करके सीखना" ही सफलता की कुंजी

कार्यक्रम में अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने गतिविधि-आधारित शिक्षण और Learning by Doing (करके सीखना) की अवधारणा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी स्वयं गतिविधियों में भाग लेते हैं, समस्याओं का समाधान खोजते हैं और अपने अनुभवों से सीखते हैं, तभी वास्तविक अधिगम संभव होता है।

कौशलम् कार्यक्रम इसी अनुभवात्मक शिक्षण दृष्टिकोण को विद्यालयों तक पहुँचाने का प्रयास है।

गढ़वाल मंडल के इस प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद अगले चरण में कुमाऊँ मंडल के मास्टर ट्रेनरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, दिनेशपुर में आयोजित किया जाएगा। इस प्रकार कौशलम् कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तराखंड में विस्तारित किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक विद्यालय तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम का समन्वयन राज्य कौशलम समन्वयक सुनील भट्ट द्वारा किया गया। प्रथम सत्र में उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यक्रम की पृष्ठभूमि, उद्देश्यों, प्रशिक्षण की रूपरेखा तथा आगामी कार्ययोजना से विस्तारपूर्वक परिचित कराया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण केवल तीन दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कौशल आधारित, अनुभवात्मक और नवाचार-प्रधान शिक्षण की दिशा में कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ऐसी शैक्षिक संस्कृति विकसित करने का प्रयास है जहाँ विद्यार्थी जिज्ञासु हों, समस्याओं का समाधान खोजने वाले हों, नवाचार करें और आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य का निर्माण करें।

इस प्रशिक्षण में सन्दर्भदाता के रूप में मैकगिल विश्वविद्यालय कनाडा से आसिया और उद्यम लर्निंग फाउंडेशन से अरविन्द बिष्ट, प्रियंका, ममता खत्री, यामिनी, दिवाकर, कुणाल, लक्ष्य और  एस. सी. ई. आर. टी उत्तराखंड से डॉ. दिनेश रतूड़ी, शुभ्रा सिंघल, डॉ. मनोज कुमार शुक्ला और गोपाल घुघत्याल सन्दर्भदाता के रूप में सेवा दे रहे हैं।

Saturday, July 25, 2026

मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम | SCERT उत्तराखण्ड

 


एस.सी.ई.आर.टी., उत्तराखण्ड

मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता

स्वस्थ मन – सशक्त कार्यस्थल की ओर एक सार्थक पहल

मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि का स्वागत एवं सम्मान।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि का स्वागत एवं सम्मान।
“मानसिक रूप से स्वस्थ कर्मचारी ही किसी संस्था की वास्तविक शक्ति होते हैं।”

एस.सी.ई.आर.टी., उत्तराखण्ड द्वारा कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने, तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों से परिचित कराने तथा सकारात्मक एवं सहयोगात्मक कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को केवल मानसिक रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि संतुलित, स्वस्थ, सम्मानपूर्ण और उत्पादक जीवन का आधार बताया गया।

मानसिक स्वास्थ्य: आज की अनिवार्य आवश्यकता

निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखण्ड विनोद सेमल्टी तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मनोज रांगड़ का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कार्य-परिवेश में बढ़ता कार्यभार, समय-सीमाएँ, बदलती अपेक्षाएँ तथा व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियाँ कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए।
निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए।

कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक रोगों का अभाव नहीं, बल्कि संतुलित, स्वस्थ और उत्पादक जीवन का आधार है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समय पर पहचान, संवेदनशीलता तथा कार्यस्थल पर सहायक और सहयोगात्मक वातावरण विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों एवं अधिकारियों द्वारा जागरूकता सामग्री का अवलोकन।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों एवं अधिकारियों द्वारा जागरूकता सामग्री का अवलोकन।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार के संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया गया। इसी दिशा में कर्मचारियों को तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों से परिचित कराने और सहयोगात्मक कार्यस्थल विकसित करने हेतु इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

निदेशक माध्यमिक शिक्षा विनोद सेमल्टी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए।
Dr Dinesh Raturi प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए।

‘आनंदम पाठ्यचर्या-2019’ के माध्यम से विद्यालयों में विद्यार्थियों के सामाजिक एवं भावनात्मक कल्याण को विशेष महत्व दिया गया है। वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर सामाजिक और व्यावसायिक चुनौती के रूप में उभर रहा है, इसलिए इसके प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

🧠 जागरूकता
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों को दूर कर वैज्ञानिक समझ विकसित करना।
🌿 तनाव प्रबंधन
तनाव के संकेत पहचानकर सरल और प्रभावी उपाय अपनाना।
🤝 सहयोगात्मक संस्कृति
संवेदनशील संवाद, पारस्परिक सम्मान और सहायक कार्यस्थल का निर्माण।
✨ सकारात्मक जीवन
संतुलित दृष्टिकोण, नियमित ध्यान और आत्मचिंतन को जीवन में शामिल करना।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के अनुभवात्मक सत्र का दृश्य।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के अनुभवात्मक सत्र का दृश्य।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मानसिक स्वास्थ्य की समझ

कार्यक्रम समन्वयक प्रिया गुसाईं ने “Illuminating Minds, Spreading Awareness” विषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने वैज्ञानिक और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य की अवधारणा को सरलता से समझाया।

कार्यक्रम समन्वयक प्रिया गुसाईं मानसिक स्वास्थ्य पर वैज्ञानिक प्रस्तुति देते हुए।
कार्यक्रम समन्वयक प्रिया गुसाईं मानसिक स्वास्थ्य पर वैज्ञानिक प्रस्तुति देते हुए।

प्रस्तुति के प्रमुख बिंदु

  • मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के व्यवहारिक, भावनात्मक, संज्ञानात्मक और शारीरिक प्रभाव।
  • मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रचलित मिथकों का वैज्ञानिक आधार पर खंडन।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन, Mental Healthcare Act तथा सतत विकास लक्ष्य-3 की प्रासंगिकता।
  • ABC Model—Affect, Behaviour और Cognition के पारस्परिक संबंध की समझ।
  • ध्यान, माइंडफुलनेस तथा तनाव प्रबंधन की उपयोगी वैज्ञानिक तकनीकें।

हँसी, ध्यान और अनुभवात्मक सीख का अनूठा संगम

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मनोज रांगड़ ने “हँसिबो–खेलिबो–धरी ध्यान” विषय पर अत्यंत प्रेरणादायी एवं अनुभवात्मक सत्र संचालित किया। उन्होंने लॉफ्टर योग, माइंडफुलनेस और ध्यान की गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को तनावमुक्त रहने के सरल एवं प्रभावी उपायों से परिचित कराया।

प्रश्नोत्तर सत्र में उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि सकारात्मक सोच, संतुलित दृष्टिकोण और नियमित ध्यान मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में अत्यंत सहायक हैं।

लॉफ्टर योग माइंडफुलनेस ध्यान भावनात्मक संतुलन सकारात्मक सोच
मुख्य अतिथि मनोज रांगड़ के साथ संवाद एवं सम्मान का अवसर।
मुख्य अतिथि मनोज रांगड़ के साथ संवाद एवं सम्मान का अवसर।

प्रेरक संदेश एवं संस्थागत दृष्टिकोण

निदेशक माध्यमिक शिक्षा, विनोद सेमल्टी ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रेरणादायक और आनंददायक बताते हुए “हँसिबो–खेलिबो–धरी ध्यान” के संदेश को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया तथा इस सार्थक पहल के लिए एस.सी.ई.आर.टी. परिवार को बधाई दी।

अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी ने कहा कि ऐसे आयोजन कर्मचारियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के साथ-साथ संस्थागत कार्य-संस्कृति को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।

सम्मान एवं आभार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि मनोज रांगड़ को निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा विनोद सेमल्टी, अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी तथा सहायक निदेशक डॉ. कृष्ण नन्द बिजल्वाण द्वारा स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

आयोजन से जुड़े अधिकारियों, विशेषज्ञों तथा प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम में एस.सी.ई.आर.टी., समग्र शिक्षा अभियान तथा माध्यमिक एवं प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी, कर्मचारी एवं प्रतिभागी।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी, कर्मचारी एवं प्रतिभागी।

यह कार्यक्रम केवल मानसिक स्वास्थ्य के विषय में जानकारी प्रदान करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रतिभागियों को तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, भावनात्मक संतुलन तथा सहयोगात्मक कार्य-संस्कृति के व्यावहारिक आयामों से भी परिचित कराने में सफल रहा।

मानसिक रूप से स्वस्थ कर्मचारी ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी प्रशिक्षण और उत्कृष्ट संस्थागत कार्य-संस्कृति की सबसे मजबूत नींव हैं।

आर पी बडोनी एस.सी.ई.आर.टी., उत्तराखण्ड | मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम