Sunday, February 08, 2026

मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का सफल समापन

ओरोवैली आश्रमरायवाला में हुआ वैलिडिक्टरी सत्र

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली द्वारा मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम विषय पर आयोजित दो-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आज सफल समापन ओरोवैली आश्रमरायवाला (देहरादून) में संपन्न हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी तथा एनसीईआरटी के प्रो. विनोद शनवाल (मनोदर्पण कार्यक्रम प्रभारी) द्वारा संयुक्त रूप से की गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन मानसिक स्वास्थ्य को नीतिगतशैक्षिकसामाजिक और तकनीकी दृष्टिकोण से समझने हेतु विभिन्न विषयगत समूहों (Groups) में गहन सत्र आयोजित किए गए।

डिजिटल टेक्नोलॉजीमीडिया एवं डिजिटल सपोर्ट सिस्टम का मानसिक स्वास्थ्य में उपयोग
इस सत्र में विद्यालयी परिप्रेक्ष्य में डिजिटल माध्यमोंटेली-हेल्पलाइनई-सपोर्ट सिस्टम तथा ऑनलाइन काउंसलिंग की भूमिका पर चर्चा की गई। 

मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम पर सरकारी नीतियाँ एवं सुधारात्मक पहल
प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, मनोदर्पणपी.एम. ई-विद्या तथा अन्य सरकारी पहलों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर विचार साझा किए। 

जीवन कौशल आधारित दृष्टिकोण द्वारा मानसिक कुशल क्षेम का समर्थन
इस सत्र में बच्चों में भावनात्मक साक्षरताआत्म-नियंत्रणसकारात्मक सोच और सामाजिक-भावनात्मक अधिगम (SEL) को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।

ओपन हाउस एवं अनुभव साझा सत्र

लंच के पश्चात Open House & Experience Sharing Session आयोजित किया गयाजिसमें सभी समूहों के प्रतिभागियों ने अपने अनुभवसीख और विद्यालयों में व्यवहारिक क्रियान्वयन से जुड़े सुझाव साझा किए। यह सत्र अत्यंत संवादात्मक और समाधान-उन्मुख रहा।

समापन सत्र में प्रो. विनोद शनवाल ने मनोदर्पण प्रकोष्ठ के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल शिक्षकोंविद्यार्थियों एवं परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य और कुशल क्षेम के लिए एक सशक्त मंच है। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन हेतु एससीईआरटी उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की और कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की पहचान यदि बाल्यकाल में हो जाएतो समस्याओं का समाधान समय रहते संभव है।

एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने अपने संबोधन में कहा कि सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति से हम प्रकृति और समाज के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं। अध्यात्मिकता मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का एक प्रभावी माध्यम हैजिसे विद्यार्थियों के जीवन में भी उतारा जाना चाहिए।

कार्यक्रम में उप परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) अजीत भण्डारी एवं अंजुम फातिमा की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरे कार्यक्रम का प्रभावी प्रबंधन एवं संचालन एससीईआरटी उत्तराखंड की टीम द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित रूप से किया गया। यह दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर विमर्श का सशक्त मंच बनाबल्कि विद्यालयों में हैप्पीनेसजीवन कौशल और मानसिक कुशल क्षेम को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक ठोस पहल सिद्ध हुआ।

Saturday, February 07, 2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर प्रदेश स्तरीय दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला 2.0 का आयोजन

मनोज बहुगुणा एन ई पी सेल 
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अनुशंसाओं तथा उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश भर से समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों एवं खंड शिक्षा अधिकारियों के लिए दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला के द्वितीय चरण का आयोजन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सभागार में किया गया।

कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारंभ अपर निदेशक गढ़वाल मंडल कंचन देवराड़ी, अपर निदेशक SCERT पद्मेन्द्र कुमार सकलानी तथा सहायक निदेशक डॉ. के.एन. बिजल्वाण द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

शुभारंभ अवसर पर अपर निदेशक महोदया ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं का वास्तविक और सार्थक क्रियान्वयन तभी संभव है, जब शिक्षा अधिकारी एवं शिक्षक इसे जमीनी स्तर पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता और सार्थक संवाद का आह्वान किया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में NEP के राज्य समन्वयक मनोज बहुगुणा द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख अनुशंसाओं, उत्तराखंड में उनके क्रियान्वयन तथा भावी कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

इसके पश्चात सहायक निदेशक डॉ. के.एन. बिजल्वाण एवं राज्य समन्वयक रविदर्शन तोपाल द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर विस्तार से व्याख्यान दिया गया।

बुनियादी स्तर (Foundational Stage) हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा

प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए तैयार की गई उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा, NEP 2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के मार्गदर्शन में विकसित की गई है, जिसमें राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं को समाहित किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ—

  • पंचकोश विकास की अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय कोष)
  • खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षा
  • मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षण
  • बहुआयामी एवं सर्वांगीण विकास
  • तनाव-मुक्त शिक्षण वातावरण
  • अवलोकन एवं पोर्टफोलियो आधारित मूल्यांकन
  • FLN (Foundational Literacy & Numeracy) पर विशेष जोर

विद्यालयी शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF-SE)

विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार SCF-SE को NEP 2020 एवं NCF की अनुशंसाओं के अनुरूप स्थानीय संदर्भों में ढाला गया है। इसका उद्देश्य छात्रों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को सुनिश्चित करना है।

इसमें 5+3+3+4 की नई संरचना, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, FLN पर फोकस, विषय चयन में लचीलापन, तथा स्थानीय संदर्भित विषयवस्तु को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की व्यवस्था की गई है।

कक्षा 11 से विषय चयन की नई व्यवस्था, चार विषय समूहों की संरचना, कक्षा 9–10 में गणित का द्विस्तरीय मूल्यांकन, तथा अतिरिक्त विषय चयन की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।

राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST)

द्वितीय दिवस की कार्यशाला में डॉ. अंकित जोशी द्वारा राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST) पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें शिक्षकों की दक्षता, करियर प्रगति, पदोन्नति एवं व्यावसायिक विकास को योग्यता आधारित बनाने की अवधारणा पर प्रकाश डाला गया।

NPST के अंतर्गत शिक्षक प्रोफाइल के तीन स्तर— प्रवीण शिक्षक ,उन्नत शिक्षक ,कुशल शिक्षक

तथा तीन प्रमुख मानक— मूल मूल्य एवं नैतिकता, ज्ञान एवं शिक्षण अभ्यास, व्यावसायिक विकास को विस्तार से समझाया गया।

विद्यालयी समय-सारणी एवं समय प्रबंधन

राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के अंतर्गत विद्यालयों की दैनिक समय-सारणी एवं समय आवंटन पर डॉ. मोहन बिष्ट द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें लचीली समय-सारणी, बस्ते का बोझ कम करना, प्राथमिक स्तर पर गृहकार्य से मुक्ति, कला, खेल एवं पुस्तकालय के लिए समर्पित समय जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल रहीं।

ICT एवं उभरती तकनीकों का एकीकरण

NEP 2020 में ICT एवं IT की भूमिका पर रमेश बडोनी एवं पुष्पा असवाल द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें NETF की स्थापना, DIKSHA, SWAYAM, वर्चुअल लैब्स, ब्लेंडेड लर्निंग, AI आधारित व्यक्तिगत सीखने, कक्षा 6 से कोडिंग, तथा शिक्षक क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।

राज्य में पीएम ई-विद्या के अंतर्गत संचालित शैक्षिक टीवी चैनलों की जानकारी भी साझा की गई तथा AI जनरेटिव वीडियो के माध्यम से संसाधन सामग्री प्रस्तुत की गई।

परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) पर विमर्श

उप राज्य परियोजना निदेशक अजीत भंडारी द्वारा वर्ष 2018–19 से 2023–24 तक की PGI रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति पर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यशाला का समापन निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्व्याल द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि NEP 2020 की अनुशंसाओं को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षा अधिकारियों, संस्थाध्यक्षों एवं शिक्षकों की है। उन्होंने विद्यालयों में सतत अवलोकन, अच्छे कार्यों के लिए प्रोत्साहन और सकारात्मक कार्यसंस्कृति विकसित करने का आह्वान किया।

अंत में अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में प्रदेश भर से शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, DIET प्राचार्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं संस्थाध्यक्ष उपस्थित रहे।

इस दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यशाला में कुल 93 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यशाला में अपर निदेशक गढ़वाल मंडल कंचन देवराड़ी, मुख्य शिक्षा अधिकारी उधमसिंह नगर  कुंवर सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी बागेश्वर  विनय कुमार आर्य, प्राचार्य DIET पौड़ी गढ़वाल स्वराज सिंह तोमर, प्राचार्य DIET रुड़की सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से खंड शिक्षा अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी, प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में सक्रिय सहभागिता करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने अनुभव, सुझाव एवं विचार साझा किए।

मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम पर दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ- फरवरी 2026

 प्रिया  गुसाईं प्रवक्ता एस सी ई आर टी उत्तराखंड 

ओरोवैली आश्रम, रायवाला में हुआ महत्वपूर्ण आयोजन

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली द्वारा मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ ओरोवैली आश्रम, रायवाला में गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल, एनसीईआरटी के प्रो. विनोद शनवाल तथा स्वामी वहृमदेव द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

मनोदर्पण कार्यक्रम : 

अपने संबोधन में मनोदर्पण कार्यक्रम प्रभारी प्रो. विनोद सनवाल ने बताया कि मनोदर्पण प्रकोष्ठ की स्थापना शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा की गई है। इसका प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं उनके परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य और कुशल क्षेम पर कार्य करना तथा समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 काल में मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता को गंभीरता से महसूस किया गया, जिसके परिणामस्वरूप मनोदर्पण कार्यक्रम का आरंभ टेली-हेल्पलाइन सुविधा के माध्यम से किया गया। इस सेवा के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को काउंसलिंग प्रदान की जाती है।
एनसीईआरटी द्वारा संचालित मनोदर्पण श्रृंखला के अंतर्गत “सहयोग” एवं “परिचर्चा” जैसे कार्यक्रम पीएम ई-विद्या चैनल पर प्रसारित किए जाते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि मानसिक स्वास्थ्य स्तर की पहचान यदि बाल्यावस्था में ही हो जाए, तो समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सकता है।

कार्यक्रम में स्वामी वहृमदेव ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मानव बुद्धि का निरंतर विकास हो रहा है। सकारात्मक सोच के माध्यम से हम प्रकृति के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि अध्यात्म के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा सकता है और यह मूल्य विद्यार्थियों को भी सिखाए जाने चाहिए, जिससे उनका सर्वांगीण विकास संभव हो सके।

निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने अपने संबोधन में कहा कि परिषद विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सतत रूप से कार्य कर रही है। इस विषय पर परिषद द्वारा एक प्रकाश पत्रिका का प्रकाशन भी किया गया है।

उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का सीधा प्रभाव व्यक्ति की कार्यक्षमता पर पड़ता है। कार्यशाला में प्राप्त प्रशिक्षण को शिक्षक एवं प्रशासनिक स्तर के मेंटर विद्यालयों तक ले जाएंगे, जिससे छात्र-छात्राएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में मानसिक स्वास्थ्य और हैप्पीनेस पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य में संचालित “आनन्दम कार्यक्रम” से भी विद्यार्थियों को सकारात्मक लाभ प्राप्त हो रहा है।

कार्यक्रम में अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी, उप निदेशक अजीत भंडारी, उप समग्र शिक्षा निदेशक अंजुम फातिमा सहित अनेक अधिकारी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का कुशल संचालन भगवती प्रसाद मेंदोली द्वारा किया गया तथा एससीईआरटी उत्तराखंड की टीम ने आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

Thursday, February 05, 2026

SCERT उत्तराखंड सभागार में PPC 2026 का प्रसारण

 

NEP 2020 उन्मुखीकरण एवं प्रधानमंत्री–छात्र संवाद कार्यक्रम का आयोजन

SCERT उत्तराखंड के सभागार में आज शैक्षिक वातावरण उस समय विशेष रूप से जीवंत हो उठा, जब परीक्षा पे चर्चा (PPC) 2026 का सजीव प्रसारण SCERT के संकाय सदस्यों एवं राज्य भर से आए शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के उद्देश्यों और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शैक्षिक दृष्टिकोण से सभी को जोड़ने के उद्देश्य से संपन्न हुआ।

इस अवसर पर उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से आए 200 से अधिक विद्यालय प्रधानाचार्यों ने NEP 2020 उन्मुखीकरण एवं समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक के साथ-साथ सभी प्रतिभागियों ने सभागार में PPC 2026 का सजीव प्रसारण देखा और उसमें प्रस्तुत विचारों पर गहन चिंतन किया।

PPC 2026: संवाद, आत्मविश्वास और परीक्षा सुधार

परीक्षा पे चर्चा 2026 में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत “अनुभव और संवाद” आधारित दृष्टिकोण को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस संवाद के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को यह संदेश दिया गया कि परीक्षाओं को भय के रूप में नहीं, बल्कि सीखने, आत्ममूल्यांकन और आत्मविश्वास निर्माण के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य, समय प्रबंधन, जिज्ञासा, सकारात्मक सोच एवं समग्र विकास जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया, जो NEP 2020 के मूल स्तंभ हैं। इस सजीव प्रसारण ने विद्यालय नेतृत्व को इन विचारों को कक्षा शिक्षण, विद्यालयी वातावरण एवं छात्र मार्गदर्शन में लागू करने के लिए प्रेरित किया।

वरिष्ठ शैक्षिक नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर SCERT उत्तराखंड के अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी एवं सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। दोनों अधिकारियों ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए परीक्षा पे चर्चा 2026 की अवधारणा, उद्देश्य एवं निरंतरता पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि PPC केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ किया गया एक राष्ट्रीय शैक्षिक अभियान है, जिसका उद्देश्य परीक्षा-केंद्रित तनाव को कम कर शिक्षा को अधिक मानवीय, आनंददायक और छात्र-केंद्रित बनाना है। उन्होंने प्रधानाचार्यों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे PPC 2026 की भावना को अपने विद्यालयों में व्यवहारिक रूप से लागू करें।

NEP 2020 उन्मुखीकरण: विद्यालय नेतृत्व का सशक्तिकरण

बड़ी संख्या में प्रधानाचार्यों की सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि विद्यालय नेतृत्व का क्षमता निर्माण NEP 2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए अत्यंत आवश्यक है। बैठक में योग्यता-आधारित शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम, छात्र कल्याण एवं तनाव-मुक्त मूल्यांकन जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई।

SCERT उत्तराखंड सभागार में PPC 2026 का प्रसारण केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि शिक्षकों और शैक्षिक अधिकारियों के लिए सामूहिक सीख और आत्मचिंतन का मंच सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम ने यह संदेश सशक्त रूप से स्थापित किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जिज्ञासु नागरिकों का निर्माण है।

डायट को अकादमिक उत्कृष्टता केन्द्र बनाने की दिशा में दो दिवसीय कार्यशाला

 

दिनांक : 4-5 फरवरी 2026 स्थान : एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) को अकादमिक उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड एवं स्टरलाईट एडइंडिया फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ।

कार्यशाला का उद्देश्य

इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य डायट संस्थानों का संस्थागत सुदृढ़िकरण करना है ताकि उन्हें अकादमिक उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में स्थापित किया जा सके। प्रतिभागियों के लिए यह मंच विजनिंग, क्षमता संवर्द्धन और नवीनतम शैक्षिक मानकों को अपनाने का अवसर प्रदान कर रहा है।

उद्घाटन सत्र की प्रमुख बातें

  • पदमेन्द्र सकलानी (अपर निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी.) ने प्रतिभागियों से अपेक्षा व्यक्त की कि कार्यशाला से डायट को उत्कृष्टता केन्द्र बनाने की ठोस रूपरेखा तैयार होगी।

  • सोनाक्षी अग्रवाल (निदेशक, स्टरलाईट एडइंडिया फाउण्डेशन) ने कहा कि इस साझेदारी से राज्य में बेहतर अकादमिक संस्कृति विकसित होगी, जिससे विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम में सुधार होगा।

  • एंटनी नेलिसेरी, डॉ. सुबीर शुक्ला एवं निरूपमा शर्मा ने स्पष्ट विजन निर्माण और नीतिगत इरादों को दैनिक अभ्यास में शामिल करने पर बल दिया।

  • डॉ. के.एन. बिजल्वाण (सहायक निदेशक) एवं डॉ. अजय कुमार चौरसिया (कार्यक्रम समन्वयक) ने कार्य संस्कृति को संस्थानों का अभिन्न अंग बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रतिभागियों की उपस्थिति

इस अवसर पर पौड़ी डायट प्राचार्य स्वराज सिंह तोमर, रूड़की डायट प्राचार्य मेराज अहमद, परिषद से डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला, डॉ. बी.पी. मैदोली, डॉ. रंजन भट्ट, शुभ्रा सिंहल, मनोज बहुगुणा, सुशील चन्द्र गैरोला, डॉ. मनोज शुक्ला, अखिलेश डोभाल, देवराज राणा, अरुण थपलियाल तथा डायट से डॉ. हेम जोशी, अरविन्द सिंह चौहान, रमेश बड़ोनी, डॉ. विमल थपलियाल, ललित तिवारी, टीना मोहन, प्रेरणा बहुगुणा उपस्थित रहे। स्टरलाईट एडइंडिया फाउण्डेशन से राज्य प्रमुख भारती गुप्ता एवंतनुज भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

यह कार्यशाला उत्तराखण्ड में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डायट संस्थानों को अकादमिक उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में विकसित करने की यह पहल न केवल शिक्षकों और संकाय सदस्यों की क्षमता को सुदृढ़ करेगी बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को भी बेहतर बनाएगी।