Wednesday, February 18, 2026

शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम (तीसरा दिवस): नवाचार, अनुशासन एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण द्वारका की प्रेरक यात्रा

 

बन्दना गर्ब्याल निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के मार्गदर्शन में संचालित शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत आज तीसरे दिवस पर हमारी टीम ने गुजरात राज्य के पावन जनपद द्वारका में स्थित विद्यालयों का भ्रमण किया। यह दिवस शैक्षिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी एवं अनुभवसमृद्ध रहा। विद्यालयों में संचालित नवाचारों, प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था, अनुशासित शैक्षिक वातावरण तथा सांस्कृतिक मूल्यों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

भ्रमण का उद्देश्य: श्रेष्ठ शैक्षिक प्रथाओं का अवलोकन

इस अध्ययन भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों में लागू की जा रही Best Practices का प्रत्यक्ष अवलोकन करना तथा उन अनुभवों को अपने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में लागू करने हेतु साझा करना था।


यह देखकर अत्यंत संतोष हुआ कि गुजरात में शिक्षा केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य स्तर पर बनाई गई नीतियों का विद्यालय स्तर पर प्रभावी और परिणाममुखी क्रियान्वयन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

विशेष रूप से विद्या समीक्षा केंद्र का प्रभाव विद्यालयों की कार्यप्रणाली में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। यह केंद्र केवल मॉनिटरिंग तंत्र नहीं, बल्कि एक सशक्त गवर्नेंस मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है। शिक्षण व्यवस्था, छात्र उपस्थिति, अधिगम स्तर, मूल्यांकन प्रक्रिया तथा शैक्षिक गतिविधियों में इसकी सकारात्मक भूमिका स्पष्ट दिखाई दी।

शिक्षक प्रतिबद्धता एवं विद्यार्थियों का आत्मविश्वास

भ्रमण के दौरान विद्यालयों में विद्यार्थियों का आत्मविश्वास अत्यंत उच्च स्तर का देखने को मिला। बच्चों ने उत्साह, अनुशासन और ऊर्जा के साथ अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।

विद्यालयों के शिक्षक अपने दायित्वों के प्रति अत्यंत समर्पित एवं प्रेरित दिखाई दिए।

  • शिक्षण को रोचक बनाने की क्षमता
  • बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण
  • समयबद्ध कार्य निष्पादन
  • अनुशासित एवं सकारात्मक कार्य संस्कृति

इन सभी गुणों ने विद्यालयी वातावरण को अत्यंत सशक्त बनाया।

विद्यालयी वातावरण एवं अभिलेखीकरण व्यवस्था

विद्यालयों में कक्षा-कक्ष का वातावरण बाल-अनुकूल, स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित था। शिक्षण-अधिगम सामग्री का प्रभावी उपयोग किया जा रहा था।

अभिलेखीकरण (Documentation) एवं रिकॉर्ड प्रबंधन अत्यंत उत्कृष्ट रहा। यह स्पष्ट संकेत है कि विद्यालय प्रशासन गुणवत्ता सुधार हेतु सतत प्रयासरत है। योजनाओं का कार्यान्वयन दस्तावेज़ों तक सीमित न रहकर व्यवहार में दिखाई दिया।

सुदृढ़ समन्वय व्यवस्था: त्वरित सहयोग और सकारात्मक सहभागिता

गुजरात राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत Gujarat Council of Educational Research and Training (GCERT), डाइट फैकल्टी तथा संकुल समन्वयकों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।

चर्चा के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया, स्पष्ट प्रस्तुतीकरण एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की तत्परता उनके सक्रिय सहयोग एवं प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह समन्वय शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाता है।

भ्रमण किए गए विद्यालय

आज हमने द्वारका जनपद के निम्नलिखित विद्यालयों का अवलोकन किया—

  1. पी एम श्री प्राथमिकशाला नंबर-1, द्वारका

  2. देवभूमि राजकीय प्राथमिकशाला नंबर-2, द्वारका

दोनों विद्यालयों में टीम का आत्मीय स्वागत एवं उत्कृष्ट आतिथ्य अत्यंत भावपूर्ण रहा। 

विद्यार्थियों की प्रस्तुति

  • योग प्रदर्शन
  • संगीत प्रस्तुति
  • कक्षा-कक्षीय गतिविधियाँ



प्राथमिक स्कूल 1 के सी आर सी हिरदेयश भटट ने द्वारका के महत्व पर वाचन एवं गायन के साथ प्रेरक प्रस्तुति दी। बच्चों की प्रस्तुतियों में अनुशासन, अभ्यास, आत्मविश्वास एवं सामूहिकता का अद्भुत संगम दिखाई दिया। यह गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति की सफलता का जीवंत उदाहरण था।

आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभूति

शैक्षिक भ्रमण के साथ-साथ हमें द्वारका की पावन धरा पर स्थित द्वारकाधीश मंदिर तथा नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह अनुभव केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला ही नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और जीवन मूल्यों को समझने का भी अवसर था। इस यात्रा ने पुनः यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति, अध्यात्म और जीवन मूल्यों से जुड़कर ही पूर्णता प्राप्त करती है।

प्रेरणा, प्रतिबद्धता और नवाचार का संगम

शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम का तीसरा दिवस अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

गुजरात राज्य की—

  • सुदृढ़ मॉनिटरिंग प्रणाली

  • प्रभावी गवर्नेंस मॉडल

  • योजनाओं का व्यवहारिक क्रियान्वयन

  • शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उच्च प्रतिबद्धता

इन सभी ने हमारी टीम को गहराई से प्रभावित किया।

निश्चित रूप से यह भ्रमण हमारे राज्य में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार हेतु नई सीख, नवाचारों के मॉडल एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करने वाला सिद्ध होगा।

द्वारका की यह यात्रा शिक्षा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बनकर हमारे अनुभवों में सदैव स्मरणीय रहेगी। 

Tuesday, February 17, 2026

उत्तराखंड एस.सी.ई.आर.टी. का दूसरे दिन का शैक्षिक अध्ययन भ्रमण: डाइट राजकोट से विद्या समीक्षा केंद्र से एक प्राथमिक माडल स्कूल तक

 

गुजरात प्रवास के दूसरे दिन उत्तराखंड अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल के संरक्षण मे एस.सी.ई.आर.टी. के अध्ययन दल ने शैक्षिक नवाचारों और प्रबंधन प्रणालियों को निकट से समझने के उद्देश्य से डाइट राजकोट  का भ्रमण किया। यह दिन अकादमिक संवाद, मॉनिटरिंग तंत्र की समझ, विद्यालयी नवाचारों के अवलोकन तथा सामुदायिक सहभागिता के उत्कृष्ट उदाहरणों से परिपूर्ण रहा।

डाइट राजकोट में प्रस्तुतीकरण एवं नवाचारों का अवलोकन

कार्यक्रम की शुरुआत डाइट के प्राचार्य निलेश भाई के स्वागत भाषण और विस्तृत प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने डाइट राजकोट की नवीन पहलों, प्रशिक्षण मॉडल, वीडियो–फोटो एल्बम आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली तथा शैक्षिक गतिविधियों के डिजिटल दस्तावेजीकरण की प्रक्रियाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया।

विशेष रूप से यह दर्शाया गया कि किस प्रकार डाइट स्तर से विद्यालयों तक सतत मॉनिटरिंग, फील्ड विज़िट रिपोर्टिंग और प्रमाण आधारित कार्य संस्कृति विकसित की गई है।

विद्या समीक्षा केंद्र पर अभिमुखीकरण: डेटा आधारित निगरानी मॉडल

इसके उपरांत दल ने Vidya Samiksha Kendra में मॉनिटरिंग सिस्टम पर अभिमुखीकरण प्राप्त किया। यहाँ यह समझाया गया कि किस प्रकार राज्य स्तर से लेकर स्कूल, BRC/CRC तथा ज़ोन स्तर तक की गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी की जाती है।

मुख्य बिंदु निम्न रहे:

  • ऑनलाइन डेटा प्रबंधन एवं डैशबोर्ड आधारित समीक्षा
  • स्कूल प्रदर्शन, उपस्थिति एवं अधिगम स्तर की ट्रैकिंग
  • फील्ड वर्क निगरानी और त्वरित फीडबैक तंत्र
  • साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रणाली

इस मॉडल ने उत्तराखंड दल को डेटा-आधारित प्रशासन की व्यवहारिक संभावनाओं पर गंभीर चिंतन का अवसर दिया।

प्रेरक प्रसंग: बीजल दामिनी का उद्यमी शिक्षा मॉडल

अभिमुखीकरण सत्र के दौरान राजकोट से GTP एवं राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक-उद्यमी बीजल दामिनी ने शिक्षा में व्यावसायिक मॉडल और उसके कक्षा-कक्षीय रूपांतरण पर अपने अनुभव साझा किए।

उन्होंने बताया कि किस प्रकार मात्र 8000 रुपये की प्रारंभिक राशि को 1.5 करोड़ रुपये के सामाजिक उपयोगी संसाधन में परिवर्तित कर सामुदायिक विकास हेतु समर्पित किया गया। यह “आर्थिक सक्षमता मॉडल” साक्ष्य-आधारित कार्ययोजना पर आधारित था।

निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल  ने बीजल दामिनी के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें एक सफल उद्यमी शिक्षक बताया। पाठ्यक्रम विभाग के समन्वयक सुनील भट्ट ने उत्तराखंड के “कौशलम” कार्यक्रम में सहयोग हेतु उन्हें आमंत्रित भी किया। आईटी विभाग से रमेश बडोनी ने उनके उल्लेखनीय कार्यों का परिचय प्रस्तुत कर संवाद को और समृद्ध किया। 

श्री पृथ्वीराज चौहान प्राथमिकशाला  का भ्रमण: गुणवत्ता का जीवंत उदाहरण

दोपहर उपरांत डाइट टीम द्वारा सभी सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई और इसके पश्चात राजकोट के Prithvi Raj Chauhan Primary School (48  नंबर) का भ्रमण किया गया।



विद्यालय में निम्न प्रमुख गतिविधियों का अवलोकन किया गया:

  • गुणवत्तापरक शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रियाएँ
  • कौशल शिक्षा का एकीकृत संचालन
  • किचन गार्डन मॉडल का विकास
  • गार्डनिंग में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता
  • स्कूल हेड के नवाचारी प्रयास
  • व्यवस्थित रिकॉर्ड कीपिंग एवं प्रबंधन प्रणाली

विद्यालय में CPD (Continuous Professional Development) गतिविधियों पर भी चर्चा हुई।  SCERT गुजरात द्वारा निर्मित  राज्य का ट्रैनिंग कार्यक्रम के दिवस सभी केंद्रों पर एक समान होते हैं जो अपने आप मे एक यूनीक पहल है ।  निदेशक अकादमिक ने शिक्षकों के वर्कलोड, प्रबंधन और कार्य-वितरण प्रणाली पर गहन संवाद किया। विशेष रूप से किचन गार्डन मॉडल को आत्मनिर्भरता और अनुभवात्मक अधिगम का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।

सांस्कृतिक एवं स्थानीय अध्ययन की ओर अगला कदम

शाम के समय अध्ययन दल ने गुजरात की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय मिलेट आधारित कृषि मॉडल और सांस्कृतिक धरोहरों के अध्ययन हेतु अगले गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। यह शैक्षिक भ्रमण केवल अकादमिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एवं सामुदायिक अधिगम का भी अवसर बनता जा रहा है।

इस अध्ययन दल में पाठ्यक्रम विभाग के  डॉ. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, विनय थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी, गंगा घुगघत्याल, हिमानी रौतेला तथा DIET चंपावत से दिनेश खेतवाल एवं राम बालक  मिश्रा ने सहभागिता की।


दूसरे दिन का यह अध्ययन भ्रमण स्पष्ट करता है कि जब डेटा-आधारित मॉनिटरिंग, शिक्षक-उद्यमिता, कौशल शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता एक साथ कार्य करती है, तब शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती—वह सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाती है। राजकोट मॉडल से प्राप्त अनुभव उत्तराखंड में कौशलम, ICT एकीकरण तथा साक्ष्य-आधारित शैक्षिक प्रबंधन को और सुदृढ़ करने में निश्चित रूप एक आदर्श परिकल्पना हो सकता है । 

Monday, February 16, 2026

उत्तराखंड द्वारा गुजरात -शिक्षा मॉडल का साझा शैक्षिक नवाचार कार्यक्रम पर चर्चा परिचर्चा एवं शैक्षिक संस्थानों का भ्रमण कार्यक्रम

 

अकादमिक निदेशक, उत्तराखंड बन्दना गर्ब्याल के नेतृत्व में एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड के पाठ्यक्रम विभाग की एक शैक्षिक टीम ने गुजरात के गांधीनगर स्थित विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) में एक महत्वपूर्ण परिचर्चा एवं अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम में सहभागिता की। यह कार्यक्रम न केवल अंतर-राज्यीय शैक्षिक सहयोग का उदाहरण था, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के आलोक में डेटा-आधारित, मूल्यपरक और प्रत्यायन-उन्मुख (accreditation-aligned) शिक्षा की दिशा में एक सार्थक पहल पर विचारों का आदन प्रदान हुआ ।

गांधीनगर विद्या समीक्षा केंद्र: डेटा-आधारित शैक्षिक प्रशासन की आधारशिला

गुजरात सरकार द्वारा स्थापित विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) एक समेकित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो राज्य के स्कूल शिक्षा तंत्र को रियल-टाइम डेटा प्रबंधन और विश्लेषण के माध्यम से सुदृढ़ बनाता है। एस.पी.डी. समग्र शिक्षा, गुजरात की टीम ने VSK 1.0 की कार्यप्रणाली और आगामी VSK 2.0 के विज़न पर गहन प्रस्तुति दी।

प्रस्तुति के प्रमुख आयाम:

  • ऑनलाइन डेटा प्रबंधन प्रणाली: छात्र उपस्थिति, नामांकन, परिणाम, आधार-समेकन, इत्यादि का केंद्रीकृत डैशबोर्ड।

  • मॉनिटरिंग सिस्टम: राज्य से विद्यालय स्तर तक बहु-स्तरीय शैक्षिक अनुश्रवण।

  • प्रशासनिक कार्य (Admin Work Automation): शिक्षक उपस्थिति, अवकाश, स्थानांतरण, और संसाधन प्रबंधन का डिजिटलीकरण।

  • स्कूल असेसमेंट एवं प्रोग्रेस कार्ड: सीखने के परिणामों (Learning Outcomes) से संबद्ध सतत मूल्यांकन।

  • VSK 2.0 की रूपरेखा: AI-सक्षम विश्लेषण, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और लर्निंग गैप की पहचान।

यह मॉडल समग्र शिक्षा गुजरात के माध्यम से क्रियान्वित हो रहा है, जो शैक्षिक गुणवत्ता सुधार हेतु डेटा-संचालित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देता है।

GCERT: पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और नवाचार का केंद्र

उत्तराखंड टीम ने गांधीनगर स्थित GCERT (Gujarat Council of Educational Research and Training) का भी शैक्षिक भ्रमण किया। GCERT द्वारा संचालित गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें शामिल थे:

  • राज्य स्तरीय पाठ्यक्रम निर्माण की संरचना

  • DIETs के साथ समन्वित प्रशिक्षण मॉडल

  • ऑनलाइन कोर्स एवं MOOCs

  • शिक्षक दक्षता संवर्धन कार्यक्रम

  • नवाचारी शिक्षण पहलें और ICT एकीकरण

GCERT के प्रशिक्षण मॉड्यूल और राज्य-स्तरीय अकादमिक समन्वय की प्रणाली ने उत्तराखंड टीम को यह समझने का अवसर दिया कि कैसे विभागीय तालमेल के माध्यम से शिक्षा में गुणवत्ता और एकरूपता लाई जा सकती है।

इस अध्ययन दल में पाठ्यक्रम विभाग के समन्वयक सुनील भट्ट, डॉ. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, विनय थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी, गंगा घुगघत्याल, हिमानी रौतेला, आईटी विभाग से रमेश बडोनी, तथा DIET चंपावत से दिनेश खेतवाल एवं मिश्रा  ने सहभागिता की।

उत्तराखंड आईटी विभाग की ओर से एक सूक्ष्म प्रस्तुति दी गई, जिसमें राज्य में संचालित नवीन ICT एवं AI-आधारित पहलों की जानकारी साझा की गई। यह प्रस्तुति डिजिटल सशक्तिकरण और स्कूल-स्तरीय डेटा इंटीग्रेशन की दिशा में उत्तराखंड की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सांस्कृतिक आयाम: साबरमती से मूल्यपरक शिक्षा की प्रेरणा

शैक्षिक भ्रमण के अंतिम चरण में टीम ने अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम का अवलोकन किया। महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन और शिक्षा संबंधी विचारों को समर्पित यह स्थल भारतीय शिक्षा के मूल्य-आधारित स्वरूप की जीवंत व्याख्या करता है।

साबरमती के तट पर स्थित यह आश्रम त्याग, सत्य और स्वावलंबन के सिद्धांतों का प्रतीक है। संग्रहालय में गांधीजी के शैक्षिक दृष्टिकोण—‘नैतिकता, श्रम और आत्मनिर्भरता’—को आधुनिक शिक्षा नीति से जोड़कर देखने का अवसर मिला। यह अनुभव NEP 2020 के “Holistic and Value-Based Education” के सिद्धांतों को व्यवहारिक धरातल पर समझने का माध्यम बना।

शैक्षिक औचित्य: NEP 2020 के आलोक में अंतर-राज्यीय समन्वय

इस अध्ययन भ्रमण का मूल उद्देश्य केवल अवलोकन नहीं, बल्कि—

  • सांस्कृतिक संदर्भों के साथ मूल्यपरक शिक्षा का समावेशन,

  • डेटा-आधारित मॉनिटरिंग के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता उन्नयन,

  • प्रत्यायन (Accreditation) के अनुरूप पाठ्यक्रम पुनर्संरचना,

  • और विभागीय समन्वय के माध्यम से सतत सुधार (Continuous Improvement Model) स्थापित करना है।



गुजरात मॉडल यह दर्शाता है कि जब पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और प्रशासनिक डेटा एक ही डिजिटल पारिस्थितिकी में समाहित होते हैं, तो शिक्षा अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनती है।

उत्तराखंड के लिए नवाचार का रोडमैप

अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल के संरक्षण में यह टीम अब निम्न बिंदुओं पर कार्य करने हेतु प्रतिबद्ध है—

  1. उत्तराखंड में राज्य स्तरीय एकीकृत शिक्षा डैशबोर्ड की संकल्पना।

  2. DIETs और SCERT के बीच डिजिटल समन्वय प्रणाली।

  3. लर्निंग आउटकम आधारित प्रोग्रेस कार्ड मॉडल।

  4. शिक्षक प्रशिक्षण में MOOCs और AI-आधारित विश्लेषण।

  5. विद्यालय मान्यता (Accreditation) हेतु डेटा-संचालित ढांचा।

यह भ्रमण उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली को सशक्त, समावेशी और नवाचारी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। गुजरात के शिक्षा मॉडल से प्रेरणा लेते हुए, अब लक्ष्य है—“स्थानीय संदर्भों के साथ वैश्विक गुणवत्ता मानकों का समन्वय कराना है ।”

शिक्षा में नवाचार केवल तकनीक से नहीं, बल्कि दृष्टि, समन्वय और मूल्यों से आता है। गुजरात के विद्या समीक्षा केंद्र और GCERT की पहलों ने यह सिद्ध किया है कि यदि डेटा, नीति और नैतिकता का समन्वय हो, तो शिक्षा परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकती है। उत्तराखंड की यह शैक्षिक यात्रा इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है—

“सशक्त डेटा, सुदृढ़ नीति और मूल्यपरक शिक्षा—भविष्य की आधारशिला” होगी 




Friday, February 13, 2026

Bharat Bodhan AI - बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026

Day 2 — Platforms, Policy & Emerging Technologies
दिनांक: 13 फरवरी 2026

बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026 के दूसरे दिन का फोकस केवल नवाचार प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा तंत्र की संरचना, नीति-निर्माण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित रहा। यह दिन भारत में एआई आधारित शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम शुरुवात है ।

उत्तराखण्ड स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से राज्य की अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उनके साथ:

  • उपनिदेशक, समग्र शिक्षा – पल्लवी नैन
  • राज्य समन्वयक – नवीन नेगी
  • आईटी प्रवक्ता – रमेश बडोनी
  • तकनीकी सपोर्ट टीम – सौरभ जोशी

प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शनी स्टॉल, तकनीकी डेमो तथा विभिन्न पैनल चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता की और एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों का गहन अवलोकन किया।

एआई प्लेटफॉर्म्स एवं डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

दूसरे दिन चर्चाओं का केंद्र रहा — शिक्षा के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का निर्माण।

मुख्य विषय:

  • शिक्षा के लिए साझा डिजिटल आधारभूत संरचना
  • डेटा गवर्नेंस एवं प्राइवेसी सुरक्षा
  • इंटरऑपरेबिलिटी फ्रेमवर्क
  • भारत EduAI स्टैक के माध्यम से राज्यों में अपनाने के मॉडल

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि साझा एआई अवसंरचना से दोहराव कम होगा, लागत घटेगी और राज्यों में स्केलेबल कार्यान्वयन तेज़ होगा।

शिक्षक क्षमता, FLN एवं प्रणालीगत सुधार में एआई

सत्रों में EkStep Foundation सहित विभिन्न भाषा एवं शिक्षण संगठनों ने अपने अनुभव साझा किए।

मुख्य बिंदु:

  • एआई आधारित शिक्षक तत्परता ट्रैकिंग
  • FLN (Foundational Literacy & Numeracy) की प्रगति की इंटेलिजेंट मॉनिटरिंग
  • व्यक्तिगत शिक्षक व्यावसायिक विकास पथ
  • जिला एवं राज्य स्तर पर डेटा-आधारित अकादमिक योजना

स्पष्ट संदेश था — एआई को केवल नवाचार नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार के एक सशक्त साधन के रूप में अपनाना होगा।

उच्च शिक्षा, कौशल विकास एवं वैश्विक साझेदारियाँ

चर्चाएँ उच्च शिक्षा और वैश्विक सहयोग तक विस्तारित हुईं। उल्लेखनीय घोषणा रही —
Indian Institute of Technology Bombay एवं Columbia University के बीच एआई अनुसंधान एवं नवाचार विस्तार हेतु सहयोग।

मुख्य विषय:

  • एआई आधारित पाठ्यक्रम पुनर्रचना
  • उद्योग-संरेखित कौशल विकास
  • अनुसंधान में तीव्रता
  • भविष्य के कार्यबल की तैयारी

कॉन्क्लेव का समापन एक स्पष्ट संदेश के साथ हुआ —एआई केवल तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि भारत की शैक्षिक परिवर्तन यात्रा का रणनीतिक माध्यम है।

समापन के प्रमुख बिंदु:

  • नैतिक नवाचार
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी
  • साक्ष्य-आधारित कार्यान्वयन
  • मापनीय शिक्षण प्रभाव
  • राज्यों के संदर्भानुकूल मॉडल

प्रदर्शनी एवं नवाचारों की विशेष झलक

दोनों दिनों की प्रदर्शनी इस कॉन्क्लेव का अनुभवात्मक केंद्र रही। उत्तराखण्ड प्रतिनिधिमंडल ने:

  • एआई डेवलपर्स एवं शोध संस्थानों से प्रत्यक्ष संवाद
  • FLN केंद्रित एआई टूल्स का मूल्यांकन
  • एडैप्टिव लर्निंग इंजन का अवलोकन
  • बहुभाषीय एआई प्रणालियों की समीक्षा
  • शिक्षक एनालिटिक्स डैशबोर्ड का परीक्षण
  • पायलट से आगे बढ़ चुके स्केलेबल समाधानों की पहचान
  • राज्य स्तरीय एकीकरण मॉडल का अध्ययन

दो दिवसीय वैज्ञानिक लेखन कार्यशाला हुई शुरू

 

एस.सी.ई.आर.टी. सभागार में आज से दो दिवसीय वैज्ञानिक लेखन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्बयाल तथा अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी के निर्देशन में आयोजित की जा रही है। इसमें विज्ञान प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मार्गदर्शक शिक्षकों ने भाग लिया।

डॉ. कृष्णानंद बिजलवाण, सहायक निदेशक एस.सी.ई.आर.टी., ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में विज्ञान मॉडल निर्माण में तकनीकी का समावेश आवश्यक है।

कार्यशाला का संचालन डॉ. देवराज सिंह राणा ने किया। उन्होंने बताया कि विज्ञान महोत्सव के अंतर्गत विज्ञान प्रदर्शनी, विज्ञान गोष्ठी, विज्ञान नाटिका और राष्ट्रीय आविष्कार सप्ताह जैसी गतिविधियाँ सम्मिलित हैं।उन्होंने यह भी साझा किया कि उत्तराखंड के विद्यार्थी इन गतिविधियों में न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

डॉ. टी. पी. शर्मा, प्रोफेसर एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली ने राष्ट्रीय संदर्भदाता के रूप में शिक्षकों को बाल विज्ञान प्रदर्शनी के संबंध में राइटअप तैयार करने की प्रक्रिया और प्रदर्शनी की जानकारी दी। डॉ. उमेश चमोला, राज्य संदर्भदाता, ने विज्ञान नाटिका की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने नुक्कड़ और मौलिक नाटक के अंतर को स्पष्ट करते हुए प्रभावी मंचन के तरीकों पर पॉवरपॉइंट प्रस्तुति दी। उन्होंने विज्ञान नाटिका के मूल्यांकन के विभिन्न पक्षों जैसे प्रस्तुतीकरण, भाषा-शैली, समय प्रबंधन और वेशभूषा पर भी अपने विचार रखे।

इस अवसर पर नीलम पंवार, संजय भट्ट और हिमानी रौतेला, प्रवक्ता एस.सी.ई.आर.टी., प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।