डॉ उषा कटियार , कार्यक्रम समन्वयक
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम (National Population Education Programme) के अंतर्गत दिनांक 5 नवम्बर 2026 को परिषद के ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय लोकनृत्य एवं रोल-प्ले प्रतियोगिता 2026-27 का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए विद्यार्थियों ने लोककला, नृत्य एवं अभिनय के माध्यम से महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ देकर अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता एवं सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि एवं महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड आकांक्षा कौंडे (भा.प्र.से.) द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध संगीत रचनाकार अमित वी. कपूर एवं उत्तराखण्ड की सुप्रसिद्ध लोकगायिका संगीता ढ़ौंढ़ियाल उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम के स्वागत सत्र में निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड वन्दना गर्ब्याल तथा अपर निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड पद्मेन्द्र सकलानी ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड आकांक्षा कौंडे (भा.प्र.से.) ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम विद्यार्थियों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों, सामाजिक जिम्मेदारियों एवं समसामयिक विषयों के प्रति जागरूक बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जनसंख्या शिक्षा का उद्देश्य केवल जनसंख्या से जुड़े तथ्यों की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य के प्रति सजगता, पर्यावरण संरक्षण तथा जिम्मेदार व्यवहार विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि लोकनृत्य एवं रोल-प्ले जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को अपनी स्थानीय संस्कृति और लोकपरंपराओं से जोड़ते हुए सामाजिक संदेशों को रचनात्मक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करती हैं। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता एवं जीवन कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड बन्दना गर्ब्याल ने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम विद्यार्थियों में जीवनोपयोगी कौशल, सामाजिक संवेदनशीलता एवं जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। लोकनृत्य एवं रोल-प्ले जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी सामाजिक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझते हैं तथा अपने विचारों को प्रभावी तरीके से अभिव्यक्त करना सीखते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उसे जीवन और समाज से जोड़ना आवश्यक है।
अपर निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड पद्मेन्द्र सकलानी ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल एवं सामूहिक सहभागिता को प्रोत्साहित करती हैं। लोककला और अभिनय के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, पारस्परिक संबंधों तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर जागरूकता का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को विद्यालयी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम समन्वयक उषा कटियार ने राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम की पृष्ठभूमि, उद्देश्यों एवं प्रतियोगिता की रूपरेखा का परिचय देते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल जनसंख्या संबंधी जानकारी प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की विभिन्न परिस्थितियों एवं सामाजिक चुनौतियों के प्रति जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या शिक्षा के अंतर्गत स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता, प्रजनन स्वास्थ्य, पारस्परिक संबंध एवं जीवन कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विद्यार्थियों की समझ विकसित करना आवश्यक है। लोकनृत्य एवं रोल-प्ले जैसी गतिविधियाँ इन विषयों को विद्यार्थियों तक रोचक, सहज एवं प्रभावशाली ढंग से पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा एवं रचनात्मकता प्रदर्शित करने के साथ-साथ स्थानीय लोकसंस्कृति एवं परंपराओं के माध्यम से सामाजिक जागरूकता का संदेश देने का अवसर मिलता है। उन्होंने आयोजन में प्रतिभाग करने वाले सभी जनपदों, विद्यार्थियों एवं मार्गदर्शक शिक्षकों को धन्यवाद दिया।
लोकनृत्य प्रतियोगिता में पर्यावरण संरक्षण, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, प्रजनन स्वास्थ्य एवं HIV की रोकथाम, पारस्परिक संबंध, मूल्य एवं जिम्मेदार नागरिकता तथा भावनात्मक कल्याण एवं मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय निर्धारित किए गए थे। वहीं, रोल-प्ले प्रतियोगिता में लैंगिक समानता, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, पारस्परिक संबंध, हिंसा एवं चोटों के विरुद्ध सुरक्षा तथा भावनात्मक कल्याण एवं मानसिक स्वास्थ्य जैसे समसामयिक विषयों को शामिल किया गया।
प्रतियोगिता में जनपदवार प्रतिभागी टीमों ने लोकनृत्य एवं रोल-प्ले के माध्यम से निर्धारित विषयों पर अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों में लोकसंस्कृति, पारंपरिक कला, संगीत, अभिनय एवं रचनात्मक संवादों का सुंदर समन्वय करते हुए सामाजिक जागरूकता के संदेश दिए। प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह दर्शाया कि लोककला एवं रंगमंच केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन एवं जनजागरूकता के सशक्त माध्यम भी हैं।
कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट अतिथि अमित वी. कपूर एवं लोक गायिका संगीता ढ़ौंढ़ियाल ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकसंस्कृति एवं पारंपरिक कलाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को सामाजिक सरोकारों से जोड़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में मंच संचालन गोपाल घुघत्याल ने किया।
इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रदर्शित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम ने शिक्षा को कला, संस्कृति एवं सामाजिक जागरूकता से जोड़ने तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदार नागरिकता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता के निष्पक्ष एवं प्रभावी मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मंडल में डॉ. अजीत पंवार, दून विश्वविद्यालय, डॉ. विवेक सिंह, मेडिकल विशेषज्ञ, साईं बाबा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून तथा सोनिया गैरौला, रंगमंच एवं लोककला कलाकार, देहरादून शामिल रहे। निर्णायकों द्वारा प्रतियोगिता के विभिन्न मानकों के आधार पर प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया।
निर्णायक मंडल द्वारा रोल प्ले प्रतियोगिता की विभिन्न कसौटियों पर प्रतिभागी टीमों का मूल्यांकन किया गया। रोल प्ले में हरिद्वार जनपद के क.पा.इ. कॉलेज, गणेशपुर की टीम ने प्रथम स्थान हासिल किया। देहरादून जनपद के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, लक्खीबाग की टीम ने द्वितीय तथा नैनीताल जनपद के अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, धानाचूली की टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
राज्य स्तरीय लोकनृत्य प्रतियोगिता में जनपद पिथौरागढ़ के क०गा०बा०वि० दशाईथल, गंगोलीहाट ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जनपद ऊधमसिंह नगर के रा०गाँ०न०वि०, खटीमा ने द्वितीय तथा जनपद बागेश्वर के रा०उ०प्रा०वि०, पनुरागूँठ ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिता में प्रतिभागी विद्यार्थियों ने लोकनृत्य की प्रस्तुति, वेशभूषा, लय एवं ताल, नृत्य संरचना तथा लोकनृत्य के माध्यम से जीवन कौशल के प्रदर्शन के आधार पर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की विषयवस्तु की समझ, जीवन कौशल का प्रदर्शन, अभिनय एवं प्रस्तुतीकरण तथा निर्धारित विषय के प्रभावी समावेशन को मूल्यांकन का आधार बनाया गया। निर्णायक मंडल द्वारा सभी प्रतिभागी टीमों को उनकी प्रस्तुतियों पर महत्वपूर्ण सुझाव एवं फीडबैक प्रदान किया गया। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा के उपरांत विजेता जनपदों की टीमों को सम्मान-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रदर्शित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण सामाजिक, स्वास्थ्य एवं जीवन कौशल संबंधी विषयों को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम ने लोककला एवं रंगमंच को जनजागरूकता तथा सामाजिक परिवर्तन के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में निदेशक माध्यमिक शिक्षा विनोद सिमल्टी तथा उपनिदेशक विनोद सिंह ने भी विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। रोल प्ले और लोक नृत्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर एन.सी.ई.आर.टी. के द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभाग करेंगी।











