Friday, September 25, 2026

पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफल समापन

कौशल बोध के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा में ‘जानने से करने’ की ओर बढ़ते कदम

देहरादून। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), NCERT, भोपाल के सहयोग से “Capacity Building of Teachers for Implementation of Vocational Education at the Middle Stage as per NEP 2020 and NCF-SE 2023” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 35 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 की भावना के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को अनुभवात्मक, गतिविधि एवं कार्य-आधारित अधिगम से जोड़ते हुए शिक्षकों को ‘कौशल बोध’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयार करना था।

‘Knowing’ से ‘Doing’ की ओर

पाँच दिवसीय प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा केवल जानने (Knowing) तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को करने (Doing), अनुभव करने (Experiencing), समस्या पहचानने (Problem Identification), समाधान खोजने (Problem Solving) और सृजन करने (Creating) के अवसर भी मिले।

प्रतिभागियों ने Learning by Doing, Project-Based Learning, स्थानीय संसाधनों एवं समुदाय के उपयोग तथा कार्य-आधारित गतिविधियों को हैंड्स-ऑन अनुभवों के माध्यम से समझा। विद्यार्थियों के मूल्यांकन में केवल लिखित परीक्षा के बजाय उनके कार्य, सहभागिता, प्रक्रिया, कौशल और तैयार उत्पाद को भी महत्व देने पर चर्चा की गई।

उद्यमशील मानसिकता और 21वीं सदी के कौशल

कार्यशाला में Entrepreneurial Mindset पर विशेष गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इनमें समस्या एवं आवश्यकता की पहचान, नवाचार, उत्पाद अथवा सेवा की उपयोगिता, USP (Unique Selling Proposition), ग्राहक की आवश्यकता, Seller–Buyer संवाद, Communication, Presentation और Branding जैसी अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझाया गया।

प्रतिभागियों ने स्वयं Seller और Customer की भूमिका निभाकर अनुभव किया कि किसी विचार को उपयोगी उत्पाद या सेवा में बदलने के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ Communication, Collaboration, Critical Thinking, Creativity और Problem Solving जैसे कौशल भी आवश्यक हैं।

Bagless Days और Hub & Spoke Model पर विशेष चर्चा

अंतिम दिवस पर प्रो. डॉ. आशीष सोनी ने कौशल बोध के अंतर्गत व्यावसायिक विषयों को Core Curriculum से जोड़ने के साथ Bagless Days तथा Hub & Spoke Model के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।

विशेष रूप से 10 Bagless Days को केवल विद्यालय से बाहर भ्रमण तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों को स्थानीय व्यवसायों, कारीगरों, कृषि, सेवा क्षेत्र और समुदाय के वास्तविक कार्य-जगत से परिचित कराने के अवसर के रूप में विकसित करने पर बल दिया गया।

विद्यालयों के लिए तैयार किए Action Plans

पाँच दिनों के अधिगम को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने के लिए प्रतिभागियों ने अपने-अपने विद्यालयों में कौशल बोध एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्रियान्वयन हेतु Action Plans प्रस्तुत किए। साथ ही Post-test एवं Feedback के माध्यम से प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन किया गया।

प्रतिभागियों ने Hands-on Activities, Exposure Visit, Learning by Doing तथा उद्यमशील मानसिकता से जुड़ी गतिविधियों को विशेष रूप से उपयोगी बताया।

प्रशिक्षण का लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचे — पद्मेंद्र सकलानी

समापन सत्र में अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड  पद्मेंद्र सकलानी ने प्रतिभागियों से कहा कि पाँच दिनों में प्राप्त अनुभवों को प्रशिक्षण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें विद्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुँचाया जाए। बच्चों को अपने हाथों से कार्य करने, स्थानीय कौशलों को समझने, वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने तथा नवाचार करने के अधिकाधिक अवसर दिए जाएँ।

इस अवसर पर डॉ. के. एन. बिजल्वान सहित SCERT के अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वयन के लिए कार्यक्रम समन्वयक  सुनील भट्ट के प्रयासों की सराहना की गई। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

ज्ञान और कौशल का समन्वय ही भविष्य की शिक्षा

पाँच दिवसीय कार्यशाला ने इस विचार को और मजबूत किया कि भविष्य की शिक्षा में ज्ञान और कौशल अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। विद्यार्थी गणित, विज्ञान और भाषा का ज्ञान प्राप्त करे, लेकिन साथ ही उस ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने, समाधान खोजने, टीम के साथ कार्य करने और कुछ नया सृजित करने में भी कर सके।

Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 विजेता Mayank की Team “Champians” UptoSkills Startupthon के National Top-12 में

ल से स्टार्टअप की ओर

Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 विजेता Mayank की Team “Champians” UptoSkills Startupthon के National Top-12 में

उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा से निकला नवाचार अब राष्ट्रीय Startup मंच पर

देहरादून, 25 सितम्बर 2026। उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा में नवाचार, रचनात्मकता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक उत्साहजनक उपलब्धि सामने आई है। SCERT Uttarakhand द्वारा आयोजित Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 के विद्यार्थी वर्ग के विजेता Mayank की Team “Champians” का चयन UptoSkills Startupthon Grand Finale की National Top-12 Teams में हुआ है।

UptoSkills द्वारा 25 सितम्बर 2026 को जारी आधिकारिक ई-मेल में Mayank और उनकी टीम को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए Top-12 में चयन तथा Startupthon Grand Finale में प्रतिभाग करने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।

यह उपलब्धि Mayank की व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ School Education Uttarakhand और Innovate Uttarakhand Hackathon की एक महत्वपूर्ण Success Story है।

🏆 Hackathon 2.0 से National Startup Grand Finale तक

Mayank की innovation journey Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 में विशेष रूप से सामने आई थी। अपने innovative project, working model और problem-solving approach के आधार पर उन्होंने विद्यार्थी वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

Hackathon ने उन्हें अपने विचार को केवल एक school project तक सीमित रखने के बजाय उसे विकसित करने, prototype तैयार करने और उसकी practical applicability को समझने का अवसर प्रदान किया। अब Team Champians का राष्ट्रीय स्तर के Startupthon Grand Finale तक पहुँचना इस बात का उदाहरण है कि विद्यालयी स्तर का एक innovative idea सही दिशा, mentorship और निरंतर प्रयास से आगे चलकर एक संभावित Startup का स्वरूप ले सकता है।

School Student → Innovative Idea → Hackathon Winner
→ Working Prototype → National Top-12 → Startup Opportunity → Young Entrepreneur

Mayank द्वारा SCERT Uttarakhand के साथ साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 3,000 university-level teams ने प्रतिभाग किया और विभिन्न screening stages के बाद केवल Top-12 Teams को Grand Finale के लिए चुना गया।

Mayank अभी अपनी माध्यमिक स्तर की स्कूली शिक्षा पूर्ण कर रहे हैं। उनके द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, मात्र 17 वर्ष की आयु में high-school track से इस स्तर तक पहुँचना उनकी उपलब्धि को और भी विशेष बनाता है।

🚀 Investors और Industry Professionals के सामने प्रस्तुत होगा Innovation

Startupthon Grand Finale का आयोजन Nawalgarh, Rajasthan में Offline Mode में किया जा रहा है और चयनित प्रतिभागियों को 1 October 2026 तक Nawalgarh पहुँचने के लिए आमंत्रित किया गया है।

Grand Finale में Team Champians को अपने innovative business idea को investors तथा industry professionals के सामने in-person pitch करने का अवसर मिलेगा। यह अनुभव उन्हें अपने prototype की market feasibility समझने, professional feedback प्राप्त करने, networking विकसित करने तथा भविष्य में incubation और investment possibilities तलाशने का अवसर प्रदान कर सकता है।

💡 Startup और Funding की संभावनाएँ

Startupthon से संबंधित साझा जानकारी में चयनित innovations के लिए ₹1 करोड़ तक की valuation पर funding opportunities, expert mentorship, industry interaction तथा startup ecosystem से जुड़ने जैसी संभावनाएँ बताई गई हैं। यह guaranteed funding नहीं, बल्कि चयनित ideas के लिए उपलब्ध संभावित funding/investment opportunity है।

🎓 विद्यालय में पढ़ते हुए Entrepreneurship की ओर कदम

Mayank की उपलब्धि का सबसे प्रेरक पक्ष यह है कि वे अभी भी School Education System के अंतर्गत अपनी माध्यमिक शिक्षा पूर्ण कर रहे हैं।

जिस उम्र में अधिकांश विद्यार्थी अपने भविष्य के career options को समझने की शुरुआत करते हैं, उसी अवस्था में Mayank ने problem identification, innovation, prototype development और national-level startup pitching तक की यात्रा शुरू कर दी है।

विद्यालयी अवस्था में प्राप्त Design Thinking, Teamwork, Prototype Development, Communication, Business Pitching और Entrepreneurship का यह वास्तविक अनुभव Mayank के भावी शैक्षिक एवं व्यावसायिक जीवन के निर्माण में एक महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकता है।

💡 Innovate Uttarakhand के उद्देश्य का वास्तविक परिणाम

SCERT Uttarakhand द्वारा Innovate Uttarakhand Hackathon की परिकल्पना विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में innovation mindset, creativity, critical thinking, problem-solving तथा technology-based solutions विकसित करने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।

Mayank की उपलब्धि इस पहल के प्रभाव का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है। Hackathon में प्रस्तुत project पुरस्कार के साथ समाप्त नहीं हुआ, बल्कि विद्यार्थी ने उसे आगे विकसित किया और आज वही innovation राष्ट्रीय Startup Ecosystem तक पहुँच रहा है।

IDEA TO STARTUP

Idea → Prototype → Mentorship → Incubation → Startup → Entrepreneurship

🌱 Hackathon 3.0 के प्रतिभागियों के लिए प्रेरक उदाहरण

Mayank की सफलता वर्तमान Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में भाग लेने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों, mentors और supervisors के लिए भी एक जीवंत प्रेरक उदाहरण है।

उनकी journey यह संदेश देती है कि Hackathon में project प्रस्तुत करना अथवा पुरस्कार प्राप्त करना यात्रा का अंतिम पड़ाव नहीं है। विद्यार्थी अपने idea को लगातार refine करके, feedback लेकर और उसकी real-world applicability को समझकर उसे आगे product, scalable solution अथवा startup में बदलने की दिशा में बढ़ सकते हैं।

🌟 School Education Uttarakhand एवं SCERT की ओर से शुभकामना संदेश

बंदना गर्गयाल
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड

“Mayank और Team Champians का National Top-12 में चयन उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा के लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। विद्यालय स्तर पर विकसित innovation का national startup platform तक पहुँचना हमारे विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता और संभावनाओं को दर्शाता है। Mayank अभी अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर रहे हैं और इतनी कम उम्र में innovation एवं entrepreneurship की दिशा में प्राप्त यह अनुभव उनके भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्हें Startupthon Grand Finale एवं भावी entrepreneurial journey के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।”

पदमेंद्र सकलानी
अपर निदेशक, SCERT Uttarakhand

“Innovate Uttarakhand का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अपने ideas प्रस्तुत करने का मंच देना नहीं, बल्कि उनमें समस्या-समाधान, नवाचार और भविष्य के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना भी है। Hackathon 2.0 के विजेता Mayank का अपने prototype के साथ राष्ट्रीय स्तर के Startupthon Grand Finale तक पहुँचना इस पहल का उत्साहजनक परिणाम है। SCERT Uttarakhand उनकी इस उपलब्धि पर बधाई देता है तथा भविष्य में उनके innovation को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक अकादमिक मार्गदर्शन एवं यथासंभव सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर रहेगा।”

रमेश प्रसाद बडोनी
Hackathon Coordinator एवं प्रवक्ता, IT विभाग, SCERT Uttarakhand

“Mayank की यात्रा हमारे लिए विशेष है क्योंकि हमने एक विद्यार्थी के idea को Hackathon में आते, विकसित होते, विजेता बनते और अब Startup की दिशा में आगे बढ़ते देखा है। यही Innovate Uttarakhand की मूल परिकल्पना है—स्कूल के विद्यार्थियों को innovators, problem-solvers और future entrepreneurs बनने का अवसर देना। Mayank की उपलब्धि Hackathon 3.0 के प्रतिभागियों के लिए भी प्रेरक उदाहरण बनेगी। हमारी शुभकामना है कि वे अपने prototype को आगे एक सफल एवं उपयोगी startup में परिवर्तित करें तथा उत्तराखण्ड का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय innovation platforms पर आगे बढ़ाएँ।”

🤝 School Education Uttarakhand का सहयोग रहेगा जारी

School Education Uttarakhand एवं SCERT Uttarakhand परिवार Mayank और Team Champians को UptoSkills Startupthon Grand Finale के National Top-12 में चयनित होने पर हार्दिक बधाई देता है।

SCERT Uttarakhand उनके innovation और Hackathon 2.0 से आगे बढ़ी entrepreneurial journey की सराहना करते हुए भविष्य में उनके innovation को आगे विकसित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, academic mentoring एवं यथासंभव संस्थागत सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर रहेगा।

“स्कूल में जन्मा एक विचार,
सही अवसर और निरंतर प्रयास से Startup में बदल सकता है।”
Hackathon से Startup तक,
Student से Innovator तक,
और Innovator से Entrepreneur तक—

Mayank की यह यात्रा उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा में Innovation एवं Entrepreneurship के लिए एक नई राह प्रशस्त करे।

🎉 Congratulations Mayank & Team Champians! 🎉

From Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 to the National Startup Stage
A Proud Success Story of School Education Uttarakhand
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Thursday, September 24, 2026

कक्षा से खेत तक, जानने से करने तक — अनुभवात्मक अधिगम का एक सार्थक दिवस

 

Capacity Building | Exposure Visit | Hands-on Session | Learning by Doing

देहरादून, 24 सितम्बर 2026।

व्यावसायिक शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किसी कौशल के बारे में जानना नहीं, बल्कि उसे देखना, समझना, स्वयं करके अनुभव करना और जीवन एवं आजीविका से जोड़ना है। इसी भावना को साकार करते हुए कार्यशाला का चतुर्थ दिवस पूर्णतः अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning), Exposure Visit, Hands-on Learning तथा Learning by Doing को समर्पित रहा।

कृषि विज्ञान केंद्र में व्यावहारिक अधिगम

कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागी शिक्षकों के दल ने पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), भोपाल के प्रोफेसर डॉ. आशीष सोनी के नेतृत्व में कृषि विज्ञान केंद्र, हर्बर्टपुर-विकासनगर, देहरादून का शैक्षिक भ्रमण किया।

यह भ्रमण विशेष रूप से ‘कौशल बोध’ में निहित Life Forms/जीवन रूप से संबंधित गतिविधियों को वास्तविक कार्य-परिस्थितियों में समझने का अवसर बना। प्रतिभागियों ने किचन गार्डन, बागवानी, पशुपालन, मुर्गी पालन तथा मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को केवल सैद्धांतिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल एवं आजीविका के अवसरों के रूप में समझा।

कृषि विज्ञान केंद्र के विषय विशेषज्ञों डॉ. शर्मा, डॉ. सिंह एवं डॉ. राठी ने संबंधित क्षेत्रों के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों की विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद प्रतिभागियों ने फार्म का भ्रमण कर विभिन्न गतिविधियों और प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखा तथा विशेषज्ञों से संवाद किया।

इस अनुभव ने “जानने से करने तक” की अवधारणा को वास्तविक अर्थों में जीवंत कर दिया।

खेत से उद्यमिता तक — सीखने का दूसरा पड़ाव

कृषि विज्ञान केंद्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के बाद शिक्षकों का दल काया लर्निंग सेंटर, तिलबाड़ी पहुँचा। यहां सीखने का दायरा कृषि एवं उत्पादन से आगे बढ़कर उद्यमिता, स्थानीय संसाधनों, आतिथ्य और स्वरोजगार से जुड़ गया।

यहां दो उद्यमशील महिलाओं मंजू कुमाईं एवं सुरेशी पवार द्वारा उत्तराखंड के ग्रामीण परिवेश और स्थानीय संस्कृति की थीम पर आधारित एक सुंदर होम-स्टे एवं आतिथ्य केंद्र संचालित किया जा रहा है।

इन दोनों महिलाओं की उद्यमशील यात्रा प्रतिभागियों के लिए प्रेरणादायक रही। स्थानीय परिवेश, उपलब्ध संसाधनों और अपनी क्षमताओं को पहचानकर उन्होंने जिस प्रकार इस केंद्र को विकसित किया है, वह इस बात का सशक्त उदाहरण है कि उद्यमिता केवल बड़े निवेश से नहीं, बल्कि पहल, आत्मविश्वास, नवाचार, स्थानीय अवसरों की पहचान और निरंतर प्रयास से विकसित होती है।

यह केंद्र Hospitality एवं Human Services के क्षेत्र में कौशल और उद्यमिता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। प्रतिभागियों ने यहां समझा कि स्थानीय संस्कृति, खान-पान, प्राकृतिक परिवेश और पारंपरिक जीवनशैली को भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों में परिवर्तित किया जा सकता है।

स्थानीय संसाधनों को शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता

इस Exposure Visit का एक महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा को केवल विभिन्न व्यवसायों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

विद्यार्थियों को अपने आसपास उपलब्ध स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय व्यवसायों और समुदाय में उपस्थित सफल उद्यमियों से जोड़ना आवश्यक है। इससे उनमें अवसरों को पहचानने, समस्या का समाधान खोजने, स्वयं पहल करने, सहयोग से कार्य करने तथा कुछ नया सृजित करने की सोच विकसित की जा सकती है।

व्यावसायिक शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब विद्यार्थी यह अनुभव कर सकें कि उनके आसपास उपलब्ध संसाधन, ज्ञान और कौशल भी उनके भविष्य की शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता का आधार बन सकते हैं।

सीख — See → Understand → Do → Reflect → Create

आज का पूरा दिन अनुभवात्मक अधिगम की इस प्रक्रिया को चरितार्थ करता रहा—

देखो → समझो → स्वयं करो → अनुभव पर चिंतन करो → नया सृजन करो

“कौशल केवल पढ़ाया नहीं जाता,
उसे करके सीखा जाता है;
और उद्यमिता केवल समझाई नहीं जाती,
उसे अवसरों को पहचानकर जीया जाता है।”

कुल मिलाकर कार्यशाला का चतुर्थ दिवस Capacity Building, Exposure Visit, Hands-on Experience और Learning by Doing का उत्कृष्ट समन्वय रहा। खेत, फार्म, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन से लेकर स्थानीय उद्यमिता एवं हॉस्पिटैलिटी तक की यह यात्रा प्रतिभागी शिक्षकों के लिए एक समृद्ध अनुभवात्मक अधिगम यात्रा सिद्ध हुई।

इस दिवस ने कार्यशाला के उद्देश्यों को व्यावहारिक धरातल पर उतारते हुए इस मूल विचार को और मजबूत किया कि—

“बच्चों को कौशल से जोड़ना है तो कक्षा को जीवन से,
सीखने को करने से और शिक्षा को स्थानीय परिवेश एवं आजीविका से जोड़ना होगा।”

इस प्रकार कार्यशाला का चतुर्थ दिवस ‘कक्षा से खेत तक और जानने से करने तक’ की यात्रा के रूप में व्यावसायिक शिक्षा की वास्तविक भावना को प्रतिबिंबित करता रहा।