2–8 अप्रैल 2026 | ऑनलाइन (Zoom एवं YouTube लाइव)
शिक्षा के बदलते परिदृश्य में डिजिटल दक्षता और निरंतर सीखने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसी दिशा में मिशन कर्मयोगी साधना सप्ताह के अंतर्गत एक भव्य वेबिनार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसने उत्तराखण्ड के शिक्षा जगत को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।
यह आयोजन केवल एक वेबिनार नहीं था, बल्कि शिक्षकों और अधिकारियों के लिए आत्म-विकास, तकनीकी सशक्तिकरण और नवाचार की ओर एक संगठित कदम था।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखण्ड एवं विद्यालयी शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में—
- प्रदेश के 13 जनपदों से 500+ अधिकारी एवं शिक्षक Zoom के माध्यम से जुड़े
- YouTube लाइव पर 7,000+ प्रतिभागियों ने सहभागिता की
- कार्यक्रम ने राज्यव्यापी डिजिटल सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया
यह सहभागिता दर्शाती है कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों के प्रति जागरूकता और रुचि तेजी से बढ़ रही है।
कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल द्वारा किया गया।
उन्होंने अपने संबोधन में—
- सभी प्रतिभागियों को साधना सप्ताह (2–8 अप्रैल) के दौरान 4 घंटे का ऑनलाइन कोर्स पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया
- मिशन कर्मयोगी को आत्म-विकास का अभियान बताते हुए इसे शिक्षकों और अधिकारियों के लिए एक सुनहरा अवसर बताया
उनका संदेश स्पष्ट था—
👉 “डिजिटल युग में शिक्षक का निरंतर सीखना ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।”
प्रगति समीक्षा और डेटा आधारित दृष्टिकोण
माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक पंकज शर्मा ने—
- मिशन कर्मयोगी पोर्टल पर अब तक की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की
- चार्ट और डेटा के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया
यह सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा क्योंकि—
- इससे प्रतिभागियों को अपनी स्थिति का मूल्यांकन करने का अवसर मिला
- डेटा आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को बढ़ावा मिला
iGOT कर्मयोगी पोर्टल का अभिमुखीकरण
अकादमिक नोडल रमेश बडोनी द्वारा iGOT कर्मयोगी पोर्टल का विस्तृत परिचय दिया गया।
इस सत्र में शामिल मुख्य बिंदु—
- REM लॉगिन प्रक्रिया का चरणबद्ध प्रदर्शन
- पोर्टल की उपयोगिता और नेविगेशन
- कोर्स चयन और पूर्णता की प्रक्रिया
- डिजिटल लर्निंग के व्यावहारिक पहलू
इस प्रस्तुतीकरण ने प्रतिभागियों को केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक दक्षता भी प्रदान की।
सहभागिता: संवाद और सुझाव
इस संगोष्ठी की एक विशेषता रही इसकी इंटरएक्टिव प्रकृति।
- प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से अपने विचार साझा किए
- अधिकारियों ने सुझावों को गंभीरता से सुना और चर्चा में शामिल किया
- इससे कार्यक्रम अधिक सहभागी और प्रभावी बना
कार्यक्रम के अंत में निदेशक द्वारा सभी प्रतिभागियों से—
- मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों को आत्मसात करने
- साधना सप्ताह में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने
- निरंतर सीखने की संस्कृति अपनाने
का आह्वान किया गया। उनका संदेश था—
“सच्चा कर्मयोगी वही है जो सीखने को अपनी दिनचर्या बना ले।”
यह वेबिनार संगोष्ठी केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि—
- डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत कदम
- शिक्षकों और अधिकारियों के लिए आत्म-विकास का मंच
- शिक्षा प्रणाली में सतत सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने वाला प्रयास
मिशन कर्मयोगी के माध्यम से उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि—
भविष्य की शिक्षा प्रणाली तकनीक, नवाचार और सहयोग पर आधारित होगी- यह संगोष्ठी केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत थी— जहाँ शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि निरंतर सीखने वाले कर्मयोगी बनते हैं।
