DIKSHA 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ई-सामग्री विकास, LMS आधारित पाठ्यक्रम निर्माण, तथा राज्य-स्तरीय कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का तीसरा एवं अंतिम दिन अत्यंत महत्वपूर्ण एवं निष्कर्षात्मक रहा। इस दिन का मुख्य फोकस राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपने अनुभव, प्रगति, चुनौतियों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना तथा भविष्य की दिशा (Way Forward) तय करना रहा।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रतिभागियों के साथ दूसरे दिन की प्रमुख गतिविधियों की संक्षिप्त समीक्षा की गई। DIKSHA 2.0 की विशेषताओं, LMS आधारित कोर्स निर्माण, कंटेंट माइग्रेशन एवं राज्यों की तैयारी स्तर (Readiness) पर हुई चर्चाओं का पुनरावलोकन किया गया। प्रतिभागियों ने अपने सीखने के अनुभव साझा किए तथा तीसरे दिन की कार्ययोजना से अवगत हुए। बाद मे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, चंडीगढ़ , उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश , राजस्थान, गुजरात ने प्रस्तुतियों में राज्यों द्वारा DIKSHA प्लेटफॉर्म पर ई-सामग्री विकास, पाठ्यक्रम निर्माण, उपयोगकर्ता नामांकन, भाषाई विविधता, तकनीकी चुनौतियाँ तथा भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने अपने राज्यों में DIKSHA अपनाने से जुड़े नवाचार एवं सफल प्रयोग भी साझा किए। दूसरे सत्र मे असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड ने प्रस्तुतियों में दूरदराज़ एवं भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में DIKSHA के उपयोग, बहुभाषी सामग्री विकास, क्षमता निर्माण तथा सामुदायिक पहुँच (Community Outreach) पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने संसाधनों की सीमाओं के बावजूद अपनाई गई व्यावहारिक रणनीतियों को साझा किया। अंतिम सत्र मे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, पुदुच्चेरी ,बिहार, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम महाराष्ट्र, CBSE एवं NIOS ने प्रस्तुतियों में बड़े पैमाने पर नामांकन, शिक्षक प्रशिक्षण, LMS आधारित पाठ्यक्रमों का प्रभाव, तथा राष्ट्रीय स्तर पर DIKSHA के एकरूप एवं समावेशी उपयोग पर चर्चा की गई। CBSE एवं NIOS द्वारा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से DIKSHA के उपयोग और भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया गया।
अंतिम सत्र में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत सुझावों और चर्चाओं के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना (Way Forward) पर सहमति बनाई गई। इसमें शामिल प्रमुख बिंदु रहे:
- DIKSHA 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य-स्तरीय समयबद्ध कार्ययोजनाएँ
- ई-सामग्री निर्माण, माइग्रेशन एवं LMS आधारित शिक्षण में सुधार
- बहुभाषी सामग्री विस्तार एवं उपयोगकर्ता नामांकन बढ़ाने की रणनीतियाँ
- CIET-NCERT और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश DIKSHA टीमों के बीच समन्वय सुदृढ़ करना
समापन सत्र के प्रारम्भ में अपर निदेशक एस.सी.ई.आर.टी.उत्तराखण्ड पदमेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। सकलानी ने डिजिटल सामग्री में मानवीय भावनाओं को सम्मिलित करने पर जोर दिया।
प्रतिभागियों ने कार्यशाला के दौरान प्राप्त सीख, अनुभव एवं सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा कीं।
डॉ. रिजुअल करीम राष्ट्रीय तकनीकी समन्वयक दीक्षा नें कार्यक्रम की सम्पूर्ण रूपरेखा एवं भावी योजना को सबके सम्मुख रखा। दीक्षा की राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. इन्दु कुमार ने सभी राज्य समन्वयकों से गुणवत्तापरक पाठ्य सामग्री निर्माण का आवहान किया।
इस अवसर पर निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखण्ड बन्दना गर्ब्याल ने सभी प्रतिभागियों से निरन्तर बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा सुधार की सम्भावनाओं पर कार्य करने का संदेश दिया। इसके पश्चात
सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए
अन्त में सहायक निदेशक आई टी विभाग एस.सी.ई.आर.टी.उत्तराखण्ड कैलाश डंगवाल के आयोजकों एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।
समापन सत्र का संचालन मनोज किशोर बहुगुणा समन्वयक एन.ई.पी. प्रकोष्ठ एस.सी.ई.आर.टी.उत्तराखण्ड द्वारा किया गया। इस अवसर पर आई टी विभाग SCERT उत्तराखंड से सहायक निदेशक कैलाश डंगवाल, रमेश बडोनी, पुष्पा असवाल, शिवप्रकाश वर्मा, रमेश पंत, अतुल, रजत, हिमानी भट्ट, विनय उनियाल, सौरव जोशी आदि उपस्थित रहे।