उत्तराखंड ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) रिपोर्ट में राज्य ने शानदार सुधार दर्ज करते हुए अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय छलांग लगाई है। यह उपलब्धि राज्य सरकार, शिक्षा विभाग, SCERT, DIETs, शिक्षकों, विद्यालय प्रशासन और छात्रों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड ने पिछले वर्ष के मुकाबले अपने कुल स्कोर में बड़ा सुधार किया है। राज्य का स्कोर 526.3 अंकों से बढ़कर 584.5 अंक तक पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार और नवाचार पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। इसी सुधार के आधार पर उत्तराखंड देश के शीर्ष राज्यों की सूची में ऊपर पहुंचा है और “आकांक्षी-1” ग्रेड प्राप्त करने में सफल रहा है।
कैसे तय होती है PGI ग्रेडिंग?
परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) के माध्यम से राज्यों की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से सीखने के परिणाम (Learning Outcomes), गुणवत्ता एवं पहुंच (Access), समान अवसर, बुनियादी ढांचा, डिजिटल शिक्षा, प्रशासनिक दक्षता और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है।
राज्यों को विभिन्न श्रेणियों—उत्कृष्ट, प्रचेतस, आकांक्षी आदि—में विभाजित किया जाता है। उत्तराखंड का “आकांक्षी-1” श्रेणी में पहुंचना यह दर्शाता है कि राज्य लगातार बेहतर शिक्षा प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
शिक्षा सुधारों का दिखा प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा अनेक नवाचार और सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। इनमें डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना, ICT आधारित शिक्षण, PM e-VIDYA, DIKSHA प्लेटफॉर्म पर ई-कंटेंट निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्मार्ट क्लास, साइबर सुरक्षा एवं AI आधारित शिक्षण पहल जैसी गतिविधियां प्रमुख रही हैं।
SCERT उत्तराखंड द्वारा NCERT पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय संदर्भों (Local Contextualization) को शामिल करने का प्रयास भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कक्षा 3 और कक्षा 6 की पुस्तकों में स्थानीय संस्कृति, भूगोल और सामाजिक परिवेश को जोड़ने से विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और समझ दोनों बढ़ी हैं।
डिजिटल शिक्षा में उत्तराखंड की प्रगति
अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी के अनुसार राज्य में डिजिटल तकनीकों के उपयोग को लगातार बढ़ावा दिया गया है। शिक्षकों के लिए बड़े स्तर पर ICT प्रशिक्षण आयोजित किए गए, जिनमें हजारों शिक्षकों को Google Tools, Canva, AI Tools, साइबर सुरक्षा, डिजिटल कंटेंट निर्माण और इंटरैक्टिव शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
PM e-VIDYA और DIKSHA पोर्टल के माध्यम से डिजिटल कंटेंट निर्माण और प्रसारण की दिशा में भी उत्तराखंड ने उल्लेखनीय कार्य किया है। इससे दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री पहुंचाने में सहायता मिली है।
अभी भी मौजूद हैं चुनौतियाँ
डॉ मुकुल सती निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने कहा कि हालांकि यह उपलब्धि अत्यंत प्रेरणादायक है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि “Learning Outcomes” यानी विद्यार्थियों के वास्तविक सीखने के स्तर में अभी और सुधार की आवश्यकता है। उत्कृष्ट श्रेणी तक पहुंचने के लिए प्रशासनिक, शैक्षणिक और संरचनात्मक स्तर पर निरंतर प्रयास करने होंगे।
विशेष रूप से विद्यालयों में रिक्त पदों की पूर्ति, शिक्षकों का सतत प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पद्धतियों को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई है।
निदेशक बन्दना गर्ब्याल कहा यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि उत्तराखंड के शिक्षा क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का प्रमाण है। राज्य के शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों, SCERT, DIETs, विद्यालय प्रमुखों और नीति निर्माताओं के संयुक्त प्रयासों ने यह संभव बनाया है।
यदि इसी प्रकार नवाचार, तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित रखा गया, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड निश्चित रूप से देश के अग्रणी शिक्षा राज्यों में अपनी स्थायी पहचान बनाएगा।
सार : भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी PGI (Performance Grading Index) Report 2024-25 में उत्तराखण्ड ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
PGI रिपोर्ट राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की स्कूल शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन सीखने के परिणाम, समावेशी शिक्षा, आधारभूत सुविधाएँ, शिक्षक प्रशिक्षण, शासन व्यवस्था, डिजिटल शिक्षा एवं नवाचार जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर करती है।
इस वर्ष उत्तराखण्ड ने 584.5 अंक प्राप्त कर “प्रचेष्टा-3” श्रेणी में स्थान बनाया तथा पिछले वर्ष की तुलना में 58.2 अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। राज्य की राष्ट्रीय रैंकिंग 24वें स्थान से सुधरकर 15वें स्थान पर पहुँच गई है।
समावेशी शिक्षा (Equity), शासन व्यवस्था (Governance), विद्यालयों तक पहुँच (Access) तथा शैक्षिक प्रबंधन में किए गए सुधार इस उपलब्धि के प्रमुख आधार रहे। NEP-2020 के अनुरूप सुधारात्मक पहलों, सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा समग्र शिक्षा, UDISE+ एवं PRABANDH के बेहतर समन्वय ने इस सफलता को नई दिशा प्रदान की है।
उत्तराखण्ड अब गोवा, गुजरात, तमिलनाडु एवं हरियाणा जैसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि राज्य की गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं नवाचारी शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।