Friday, January 09, 2026

द्वितीय दिवस : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित प्रमुख सत्र

 

दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला के द्वितीय दिवस में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की उन महत्वपूर्ण अनुशंसाओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जो सीधे तौर पर शिक्षकों की पेशेवर गुणवत्ता, विद्यालयी व्यवस्था, समय प्रबंधन, तकनीकी एकीकरण तथा शैक्षिक गुणवत्ता के आकलन से जुड़ी हैं। इस दिवस के सभी सत्रों का उद्देश्य नीति के प्रावधानों को व्यवहारिक दृष्टि से समझाते हुए अधिकारियों को उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु तैयार करना रहा।

राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST)

द्वितीय दिवस के प्रमुख सत्रों में डॉ. अंकित जोशी द्वारा राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (National Professional Standards for Teachers – NPST) पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि NPST, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दूरदर्शी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहल है, जिसका उद्देश्य अध्यापन को एक सुदृढ़, उत्तरदायी और गरिमामय पेशे के रूप में स्थापित करना है।

डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि NPST के अंतर्गत शिक्षकों की भूमिकाओं, अपेक्षित दक्षताओं तथा उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक साझा और पारदर्शी ढांचा विकसित किया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य शिक्षक के करियर की प्रगति को केवल सेवा अवधि (सीनियरिटी) तक सीमित न रखते हुए योग्यता, दक्षता और सतत व्यावसायिक विकास से जोड़ना है।

NPST के तीन स्तर

NPST ढांचे के अंतर्गत शिक्षकों को उनकी दक्षताओं एवं अनुभव के आधार पर तीन स्तरों में वर्गीकृत किया गया है-

  1. प्रवीण शिक्षक (Proficient Teacher) – बुनियादी स्तर की आवश्यक दक्षताओं से युक्त शिक्षक।

  2. उन्नत शिक्षक (Advanced Teacher) – विषयवस्तु एवं शिक्षण कौशल में गहराई रखने वाले शिक्षक।

  3. कुशल शिक्षक (Expert Teacher) – उच्चतम स्तर की विशेषज्ञता रखने वाले शिक्षक, जो अन्य शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक (Mentor) की भूमिका निभा सकें।

NPST के मुख्य मानक

NPST को तीन प्रमुख मानकों में विभाजित किया गया है—

  • मूल मूल्य एवं नैतिकता (Core Values & Ethics) – संवैधानिक मूल्यों का पालन, छात्रों की गरिमा की रक्षा और पेशेवर आचरण।

  • ज्ञान एवं अभ्यास (Knowledge & Practice) – बाल विकास, समावेशी शिक्षा, पाठ्यक्रम की समझ, प्रभावी शिक्षण विधियाँ, तकनीक का उपयोग तथा मूल्यांकन रणनीतियाँ।

  • व्यावसायिक विकास (Professional Growth & Development) – शिक्षक की स्वयं की सीखने की क्षमता तथा सतत सुधार की प्रतिबद्धता।

यह सत्र शिक्षकों की गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।

समय आवंटन एवं विद्यालयी दिनचर्या



इसके पश्चात डॉ. मोहन बिष्ट द्वारा राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF) के अंतर्गत विद्यालयों की दैनिक समय-सारणी एवं समय प्रबंधन पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि समय आवंटन का मूल उद्देश्य विद्यालयी समय का ऐसा प्रबंधन करना है, जिससे विद्यार्थियों को रटने के बजाय सृजनात्मकता, संवाद और व्यावहारिक अनुभव के पर्याप्त अवसर मिल सकें।





प्रस्तुति में लचीली समय-सारणी, बस्ते का बोझ कम करने, प्राथमिक स्तर पर गृहकार्य न देने तथा 240 दिवस के शैक्षणिक सत्र की अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि विद्यालयी समय-सारणी स्थानीय परिस्थितियों और बच्चों की आवश्यकताओं के अनुसार लचीली होनी चाहिए, जिससे सह-शैक्षिक गतिविधियों को भी पर्याप्त स्थान मिल सके।

ICT एवं IT आधारित पहलें

द्वितीय दिवस में रमेश बडोनी ने परिषद के आई सी टी पहल और नवाचारी कार्यक्रमों पर विस्तार से तकनीकी से तंत्र मे गुणवत्ता एवं पारदर्शिता पर सम्बोधन देते हुए एआई और डिजिटल तकनकी से ग्लोबल रीच तक पहुंचने को एक बड़ा जरिया बताया जिसका उद्धरण यूनेस्को मे प्रकाशित केस स्टडी को भी साझा किया गया । पुष्पा असवाल द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गतपी एम ई विद्या पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि NEP 2020 में तकनीक को शिक्षा का एक अनिवार्य स्तंभ माना गया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाना है।


द्वितीय दिवस के अन्य सत्रों में—

  • अजीत भंडारी (उप राज्य परियोजना निदेशक) द्वारा परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें उत्तराखंड की स्थिति की अन्य राज्यों से तुलनात्मक समीक्षा की गई।

  • SCERT प्रवक्ता सुनील भट्ट ने संकुल स्तरीय अकादमिक बैठकों के प्रभावी संचालन, अधिगम प्रतिफल प्राप्त करने हेतु सर्वोत्तम अभ्यासों तथा कक्षा-कक्ष नवाचारों के साझा करण पर अपने विचार रखे।

  • विनय थपलियाल ने विद्यालयों में सड़क सुरक्षा क्लब के गठन एवं सड़क सुरक्षा को नियमित विद्यालयी गतिविधियों में सम्मिलित करने पर बल दिया।

कार्यशाला का समापन

द्वितीय दिवस एवं संपूर्ण कार्यशाला का समापन निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण  बंदना गर्व्याल द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि NEP 2020 की अनुशंसाओं को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी फील्ड में कार्यरत शिक्षा अधिकारियों की है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे विद्यालयों में जाकर सतत अवलोकन करें, अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों को प्रोत्साहित करें तथा समुदाय एवं अभिभावकों के सहयोग से एक सशक्त शैक्षिक वातावरण का निर्माण करें।



अंत में अपर निदेशक  पद्मेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहन बिष्ट एवं रविदर्शन तोपाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस दिवस की कार्यशाला में प्रदेश भर से मुख्य शिक्षा अधिकारी, संयुक्त निदेशक, उप राज्य परियोजना निदेशक, खंड शिक्षा अधिकारी एवं उप खंड शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।