राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अनुशंसाओं तथा उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (State Curriculum Framework – SCF) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश भर से समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) एवं समस्त खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) हेतु दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के सभागार में किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ
कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारंभ निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्व्याल एवं अपर निदेशक सकलानी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर निदेशक महोदया एवं अपर निदेशक ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि—
“राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा तभी जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हो सकती है जब जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारी इसे गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ अपनाएँ। आप सभी इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।”
उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता, गहन चर्चा एवं अनुभव साझा करने का आह्वान किया।
आनंदम गतिविधियों से सत्र की शुरुआत
कार्यशाला का प्रथम सत्र ‘आनंदम’ की गतिविधियों के साथ प्रारंभ हुआ, जिसे डॉ. बी. पी. मैंदोली (राज्य नोडल अधिकारी) एवं सहयोगी एनजीओ सदस्यों द्वारा प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। इस सत्र के माध्यम से बच्चों के भावनात्मक, मानसिक और आनंदमय विकास की अवधारणा को गतिविधि आधारित अनुभवों के माध्यम से समझाया गया।
NEP 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर विस्तृत व्याख्यान
उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा: एक संकल्पना
1. बुनियादी स्तर (Foundational Stage) हेतु SCF
उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा का बुनियादी स्तर (3–8 वर्ष) राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की विशिष्ट भाषाई, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों को समाहित किया गया है।
यह रूपरेखा मुख्यतः 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के सीखने और समग्र विकास पर केंद्रित है।
मुख्य विशेषताएँ एवं उद्देश्य
🔹 पंचकोश विकास का सिद्धांत
भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पंचकोश विकास पर विशेष बल दिया गया है—
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अन्नमय कोष – शारीरिक विकास
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प्राणमय कोष – स्वास्थ्य एवं जीवन ऊर्जा
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मनोमय कोष – भावनात्मक एवं मानसिक विकास
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विज्ञानमय कोष – बौद्धिक विकास
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आनंदमय कोष – खुशी एवं आध्यात्मिक विकास
खेल-आधारित शिक्षा (Play-based Learning)
रटने के स्थान पर खेल, कहानियाँ, पहेलियाँ, संगीत, नृत्य और कला के माध्यम से सीखने पर जोर।
मातृभाषा को प्राथमिकता
प्रारंभिक वर्षों में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय भाषा रखा गया है, जिससे बच्चों में बेहतर समझ और आत्मविश्वास विकसित हो।
बहुआयामी (Holistic) विकास
संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक, शारीरिक एवं नैतिक मूल्यों के विकास को समान महत्व।
शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया
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गतिविधि आधारित
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संवादात्मक
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तनाव-मुक्त वातावरण
शिक्षण सामग्री
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स्थानीय रूप से उपलब्ध खिलौने
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जादुई पिटारा
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चित्र कथाएँ एवं स्थानीय लोकगीत
मूल्यांकन व्यवस्था
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कोई लिखित परीक्षा नहीं
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अवलोकन (Observation) एवं पोर्टफोलियो आधारित सतत मूल्यांकन
इस स्तर का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चा स्कूल आने में खुशी महसूस करे और उसकी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) की नींव मजबूत हो।
उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF–SE)
SCF–SE को NEP 2020 एवं NCF की प्रमुख अनुशंसाओं के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसे राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं, संस्कृति एवं संदर्भों के अनुसार ढाला गया है।
प्रमुख उद्देश्य एवं विशेषताएँ
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स्थानीय प्रासंगिकता – राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं का समावेशन
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सर्वांगीण विकास – शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास पर बल
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लचीलापन – विषय चयन एवं सीखने की गति में विकल्प
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FLN पर विशेष जोर – प्राथमिक स्तर पर सुदृढ़ नींव
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मातृभाषा में शिक्षा – प्रारंभिक वर्षों में स्थानीय भाषा का प्रयोग
5+3+3+4 संरचनात्मक ढांचा
पारंपरिक 10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 मॉडल को अपनाया गया है, जिसके अंतर्गत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को पहली बार औपचारिक शिक्षा संरचना में शामिल किया गया है।
यह पाठ्यचर्या दस्तावेज कक्षा 3 से 12 तक के छात्रों के—
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विषय
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शिक्षण दिवस एवं घंटे
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पाठ्यक्रम के लक्ष्य
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आकलन की विधियाँ
स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।
पाठ्यपुस्तकों एवं शैक्षणिक सत्र की व्यवस्था
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पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय संदर्भित विषयवस्तु का समावेशन
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छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विषयवस्तु के साथ राज्य-विशिष्ट अध्ययन का अवसर
शैक्षणिक सत्र (कुल 240 दिवस):
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200 दिवस – शिक्षण-अधिगम
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20 दिवस – परीक्षा/आकलन
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10 दिवस – बस्तारहित दिवस
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10 दिवस – विद्यालयीय कार्यक्रम एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियाँ
यह अभिमुखीकरण कार्यशाला न केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना को समझने का माध्यम बनी, बल्कि राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को दिशा देने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। यह कार्यशाला उत्तराखंड में समावेशी, आनंदमय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम है।

