Monday, January 19, 2026

SCF Implemented : स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता, तकनीक और मूल्यांकन का नया दौर

 

एससीईआरटी उत्तराखंड की पहल से राज्य पाठ्यचर्या में बड़े सुधार

उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्ता, तकनीक और समग्र मूल्यांकन से जोड़ने की दिशा में राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप तैयार की गई नई राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (State Curriculum Framework – SCF) के माध्यम से शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, छात्र-केंद्रित और भविष्योपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम से जुड़ेगी स्कूल शिक्षा

नई पाठ्यचर्या में राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (NETF) को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। इसका उद्देश्य स्कूल शिक्षा को आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार और शोध आधारित नीति-निर्माण से जोड़ना है। यह फोरम केंद्र व राज्य सरकार को शिक्षा में तकनीक के प्रभावी उपयोग हेतु परामर्श देगा तथा ग्रामीण, दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक डिजिटल संसाधनों की पहुँच सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
इसके माध्यम से शिक्षकों को नवीन शैक्षिक तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण और उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

पाठ्यचर्या में बदलाव के लिए एससीईआरटी का नया मॉडल

एससीईआरटी द्वारा राज्य पाठ्यचर्या में आवश्यक बदलावों के लिए एक नया मॉडल तैयार किया गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से कक्षा 1 से 8 तक लागू किया जाएगा। इस मॉडल का मुख्य आधार समग्र मूल्यांकन प्रणाली (Holistic Assessment) है।
इसके अंतर्गत अब केवल लिखित परीक्षाओं पर निर्भरता नहीं रहेगी, बल्कि परियोजना कार्य, समूह गतिविधियाँ, भूमिका-निर्वहन, पोर्टफोलियो और निरंतर आकलन को महत्व दिया जाएगा।

मूल्यांकन प्रक्रिया में छात्र और अभिभावक भी होंगे सहभागी

नई व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि छात्र, शिक्षक और अभिभावक—तीनों मूल्यांकन प्रक्रिया में सहभागी होंगे।
इसके लिए होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) लागू किया जाएगा, जिसमें छात्र के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक विकास का 360-डिग्री मूल्यांकन होगा।
तीन विकासात्मक लक्ष्य तय किए गए हैं—

  1. दक्षताएँ और कौशल
  2. अभिभावकों की प्रतिक्रिया
  3. छात्र का पोर्टफोलियो

छात्रों की प्रगति को शुरुआती, प्रगतिशील और प्रवीण—तीन स्तरों पर आंका जाएगा।

न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस अनिवार्य

नई शिक्षा व्यवस्था के तहत राज्य के सरकारी विद्यालयों में अब कम से कम 220 शिक्षण दिवस अनिवार्य किए गए हैं। प्रतिदिन न्यूनतम साढ़े छह घंटे की पढ़ाई सुनिश्चित होगी।
इसके चलते शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन दीर्घ अवकाशों में कटौती का भी निर्णय लिया गया है। वर्तमान में जहाँ औसतन 200 दिन भी पढ़ाई नहीं हो पा रही थी, वहीं अब एनईपी-2020 के अनुरूप 220 कार्यदिवस सुनिश्चित किए जाएंगे।

गणित शिक्षा पर विशेष फोकस

नई पाठ्यचर्या में गणित को विशेष महत्व दिया गया है—

  • कक्षा 3 से 5 तक: वर्ष भर में 185 घंटे गणित पढ़ाना अनिवार्य
  • कक्षा 6 से 9: गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के लिए निर्धारित समय
  • कक्षा 9 और 10: सभी विद्यार्थियों के लिए गणित अनिवार्य

हालाँकि, विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार गणित के दो स्तर तय किए गए हैं—

  • सामान्य स्तर
  • उच्च स्तर (उन छात्रों के लिए जो आगे गणित पढ़ना चाहते हैं)

इसका उद्देश्य छात्रों की तार्किक क्षमता, बुनियादी गणितीय समझ और समस्या-समाधान कौशल को मजबूत करना है।

संतुलित और बहुविषयक पाठ्यक्रम

नई व्यवस्था में भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान के साथ-साथ कला, शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा को भी समान महत्व दिया गया है।
प्राथमिक स्तर पर कुल छह विषय पढ़ाए जाएंगे, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

भविष्य की शिक्षा की नींव

एससीईआरटी उत्तराखंड द्वारा तैयार की गई यह नई पाठ्यचर्या रूपरेखा न केवल परीक्षा-केंद्रित सोच से आगे बढ़कर सीखने की गुणवत्ता, तकनीकी सशक्तिकरण और समग्र विकास पर केंद्रित है।
इस रणनीतिक बदलाव से राज्य की स्कूली शिक्षा अधिक व्यावहारिक, समावेशी और जीवनोपयोगी बनेगी तथा छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार किया जा सकेगा।