डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (S.C.E.R.T.) उत्तराखण्ड में दिनाँक 10 से 12 फरवरी 2026 तक राज्य सन्दर्भ समूह (SRG)-सामाजिक विज्ञान के सदस्यों की 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सन्दर्भ में सामाजिक विज्ञान का शिक्षणशास्त्र' विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला में जनपदों के नामित सामाजिक विज्ञान विषय के राज्य सन्दर्भ समूह के सदस्यों ने प्रतिभाग किया। इस कार्यशाला में प्रत्येक जनपद से डायट के सामाजिक विज्ञान समन्वयक तथा सामाजिक विज्ञान शिक्षण में नवाचार करने वाले शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
एस.सी.ई.आर.टी. के द्वारा राज्य सन्दर्भ समूह-सामाजिक विज्ञान का गठन वर्ष 2022-23 में किया गया था। सन्दर्भ समूह के अन्तर्गत राज्य स्तर पर भी एक समिति का गठन किया गया है जिसमें सामाजिक विज्ञान से सम्बन्धित संकाय सदस्य नामित किये गये हैं। ये सदस्य समय-समय पर राज्य में सामाजिक विज्ञान से सम्बन्धित नवाचारों, प्रशिक्षण और शोध पर विमर्श करते हैं।
कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल ने कहा कि एस.सी.ई.आर.टी. राज्य की शीर्ष शैक्षणिक संस्था है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन करती है। सामाजिक विज्ञान के शिक्षण को रोचक और गतिविधिपूर्ण बनाने के लिए राज्य सन्दर्भ समूह विगत वर्षों से कार्य करता आ रहा है। इसका परिणाम इस वर्ष आयोजित सामाजिक विज्ञान महोत्सव है। उन्होंने कहा कि सामाजिक विज्ञान विषय बच्चों को आदर्श नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह विषय संवैधानिक मूल्यों के साथ बच्चों को सम्मानजनक जीवन जीने की शिक्षा देता है।
अपर निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी., पद्मेन्द्र सकलानी ने कहा कि सामाजिक विज्ञान विषय को बच्चों के लिए रूचिकर बनाना आवश्यक है। यह सन्दर्भ समूह इस दिशा में कार्य कर रहा है। सन्दर्भ समूह को सामाजिक विज्ञान विषय के अनुभवात्मक शिक्षण के लिए योजना तैयार कर रहा है। उन्होंने सामाजिक विज्ञान महोत्सव 2025-26 के सफल आयोजन के लिए राज्य सन्दर्भ समूह को बधाई दी और आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रमों की योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि सामाजिक विज्ञान शिक्षण के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम तैयार करने की आवश्यकता है जो कक्षा-शिक्षण के साथ-साथ संचालित किये जाँय।
सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानन्द बिजल्वाण ने कहा कि सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षण को रोचक और गतिविधिपूर्ण बनाया जाना आवश्यक है ताकि बच्चे इस विषय को नीरस न समझें। उन्होंने कहा कि इस वर्ष आयोजित सामाजिक विज्ञान महोत्सव इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और आगे भी इसे 6-12 तक की कक्षाओं तक विस्तारित किया जाना चाहिये। सामाजिक विज्ञान विषय बच्चों को सतत् पोषणीय विकास और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा देता है।
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला ने कार्यशाला के उद्देश्यों और रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सन्दर्भ समूह समय-समय पर सामाजिक विज्ञान शिक्षण के उन्नयन के लिए प्रयासरत है। सामाजिक विज्ञान शिक्षण को रोचक बनाने के लिए राज्य सन्दर्भ समूह प्रयासरत है।
कार्यशाला में एस.सी.ई.आर.टी. के संकाय सदस्यों ने सामाजिक विज्ञान शिक्षण से सम्बन्धित अलग-अलग विषयों पर सत्र लिये। एन.ई.पी. समन्वयक रविदर्शन तोपाल ने सामाजिक विज्ञान का शिक्षाशास्त्र और स्थानीय सन्दर्भ पर, डॉ. अजय कुमार चौरसिया ने सामाजिक विज्ञान शिक्षण में प्रोजेक्ट पद्धति पर, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला ने सामाजिक विज्ञान शिक्षण में सेमिनार पर, डॉ. दीपक प्रताप ने सामाजिक विज्ञान में आकलन और प्रश्नपत्र निर्माण पर सत्र लिये। इससे पूर्व राज्य सन्दर्भ समूह के सदस्यों का एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा विकसित सामाजिक विज्ञान विषय की नवीन पाठ्यपुस्तकों पर क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान अजमेर में भी अभिमुखीकरण किया जा चुका है। राज्य सन्दर्भ समूह के रवि कुमार जोशी ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा औ क्रॉस कटिंग थीम पर तथा जगदम्बा प्रसाद कुकरेती ने सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें और भारतीय ज्ञान परम्परा पर सत्र लिये।
कार्यशाला में समस्त जनपदों ने डी.आर.जी.के अन्तर्गत किये जा रहे कार्यक्रमों की शेयरिंग की। आगामी सत्र में सामाजिक विज्ञान महोत्सव के सफल आयोजन के लिए रूपरेखा और कार्ययोजना भी तैयार की गयी। जनपदों के द्वारा अवगत कराया गया कि सामाजिक विज्ञान महोत्सव में बच्चों ने बढ़-चढ़कर रूचि ली और प्रतिभाग किया। शिक्षकों ने भी इस आयोजन को सामाजिक विज्ञान शिक्षण के लिए एक नवाचार बताया। सन्दर्भ समूह के द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि इस वर्ष यह महोत्सव जूनियर के साथ सीनियर स्तर पर भी आयोजित किये जाने हेतु भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जायेगा। कार्यशाला में जनपदों से आये सामाजिक विज्ञान के शिक्षकों के द्वारा द्वारा कक्षा-शिक्षण में किये जा रहे नवाचारों की शेयरिंग भी की गयी।