एस.सी.ई.आर.टी. सभागार में आज से दो दिवसीय वैज्ञानिक लेखन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्बयाल तथा अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी के निर्देशन में आयोजित की जा रही है। इसमें विज्ञान प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मार्गदर्शक शिक्षकों ने भाग लिया।
डॉ. कृष्णानंद बिजलवाण, सहायक निदेशक एस.सी.ई.आर.टी., ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में विज्ञान मॉडल निर्माण में तकनीकी का समावेश आवश्यक है।
कार्यशाला का संचालन डॉ. देवराज सिंह राणा ने किया। उन्होंने बताया कि विज्ञान महोत्सव के अंतर्गत विज्ञान प्रदर्शनी, विज्ञान गोष्ठी, विज्ञान नाटिका और राष्ट्रीय आविष्कार सप्ताह जैसी गतिविधियाँ सम्मिलित हैं।उन्होंने यह भी साझा किया कि उत्तराखंड के विद्यार्थी इन गतिविधियों में न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।डॉ. टी. पी. शर्मा, प्रोफेसर एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली ने राष्ट्रीय संदर्भदाता के रूप में शिक्षकों को बाल विज्ञान प्रदर्शनी के संबंध में राइटअप तैयार करने की प्रक्रिया और प्रदर्शनी की जानकारी दी। डॉ. उमेश चमोला, राज्य संदर्भदाता, ने विज्ञान नाटिका की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने नुक्कड़ और मौलिक नाटक के अंतर को स्पष्ट करते हुए प्रभावी मंचन के तरीकों पर पॉवरपॉइंट प्रस्तुति दी। उन्होंने विज्ञान नाटिका के मूल्यांकन के विभिन्न पक्षों जैसे प्रस्तुतीकरण, भाषा-शैली, समय प्रबंधन और वेशभूषा पर भी अपने विचार रखे।