स्थान: Gujarat | जनपद: Gir Somnath | तहसील: Una | दिनांक: 21 फरवरी 2026
निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल के निर्देशन में दिनांक 16 फरवरी 2026 से प्रारंभ शैक्षिक अभिदर्शन एवं भ्रमण कार्यक्रम का आज अंतिम दिवस रहा। इस शैक्षिक यात्रा का उद्देश्य केवल संस्थानों का भ्रमण करना नहीं था, बल्कि राज्य की शैक्षिक, प्रशासनिक, पारिस्थितिकी एवं आध्यात्मिक व्यवस्थाओं को समग्र दृष्टि से समझना था। सात दिनों तक विभिन्न संस्थानों, विद्यालयों और नवाचार केंद्रों का अवलोकन करते हुए दल ने शिक्षा प्रबंधन की व्यवहारिक प्रक्रियाओं को निकट से देखा और अनुभव किया।
अंतिम दिवस पर जनपद गिर सोमनाथ की ऊना तहसील के अंतर्गत शामतेर आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 1 एवं 2 का विस्तृत अवलोकन किया गया। आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 1 में कुल 24 पंजीकृत बच्चे थे, जहाँ सहायिका लक्ष्मी देवी बच्चों को पोषण योजना के अंतर्गत सुस्वादु एवं पौष्टिक भोजन प्रदान कर रही थीं। केंद्र में शैक्षिक सामग्री, खेल सामग्री, आकर्षक दीवार चित्र और आधारभूत सुविधाएँ सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध थीं। बच्चों की उपस्थिति, पोषण वितरण और अभिलेख संधारण की प्रक्रिया व्यवस्थित एवं पारदर्शी पाई गई।
आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या 2 में कुल 33 बच्चे पंजीकृत थे। यहाँ आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री हर्षा बेन एवं सहायिका स्मिता बच्चों के साथ खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित अधिगम करा रही थीं। छोटे-छोटे शैक्षिक कोनों में भाषा, संख्या एवं रंग-पहचान जैसी प्रारंभिक अधिगम दक्षताओं का विकास कराया जा रहा था। दोनों केन्द्रों में राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री एवं पोषण व्यवस्था संतोषजनक रही। भ्रमण दल ने संचालन व्यवस्था, स्वास्थ्य परीक्षण, ग्रोथ मॉनिटरिंग, अभिलेख प्रबंधन एवं समुदाय की सहभागिता पर गहन चर्चा की और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के इस सुदृढ़ आधार को सराहा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल पवित्र ज्योतिर्लिंग Somnath Temple के दर्शन से हुई। सोमनाथ मंदिर भारतीय आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की गौरवगाथा का प्रतीक है। मंदिर के इतिहास, उसके पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी प्राप्त करते हुए दल ने आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सांस्कृतिक चेतना का अनुभव किया। यह अनुभव इस शैक्षिक यात्रा को एक आध्यात्मिक आयाम भी प्रदान करता है। इस समग्र भ्रमण के दौरान Vidya Samiksha Kendra का अवलोकन विशेष रूप से प्रेरणा रहा। यहाँ शिक्षा व्यवस्था की रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली, डिजिटल डैशबोर्ड और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली को निकट से समझा गया। विद्यालय स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक उपस्थिति, अधिगम स्तर और परीक्षा परिणामों का विश्लेषण एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और त्वरित निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया सुदृढ़ होती है।
इसी क्रम में Gir National Park का अवलोकन भी किया गया, जहाँ एशियाई सिंह संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन के प्रयासों की जानकारी प्राप्त हुई। यह अनुभव शिक्षा के साथ-साथ पारिस्थितिकी और सतत विकास की समझ को भी व्यापक बनाता है। इसके अतिरिक्त जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) तथा विभिन्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का अवलोकन करते हुए शिक्षक प्रशिक्षण, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों, ICT प्रयोग एवं विद्यालय प्रबंधन की प्रभावी संरचना को समझा गया।
गुजरात राज्य में आंगनवाड़ी से लेकर 10+2 स्तर तक शिक्षा प्रबंधन की प्रणाली बहु-स्तरीय और डिजिटल निगरानी पर आधारित है। पूर्व-प्राथमिक स्तर पर पोषण ट्रैकिंग और ग्रोथ मॉनिटरिंग की व्यवस्था है, जबकि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर छात्र उपस्थिति, अधिगम मूल्यांकन और विद्यालय विकास योजनाएँ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होती हैं। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर पर बोर्ड परीक्षा परिणामों का विश्लेषण, विषय-वार मॉनिटरिंग, करियर मार्गदर्शन और कौशल विकास कार्यक्रमों का समन्वय सुव्यवस्थित ढंग से किया जाता है। राज्य स्तरीय डैशबोर्ड के माध्यम से ब्लॉक और क्लस्टर स्तर तक निरंतर समीक्षा एवं अनुश्रवण किया जाता है, जिससे गुणवत्ता उन्नयन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
इस कार्यक्रम में समन्वयक सुनील भट्ट, डॉ. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, विनय थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी, गंगा घुगघत्याल, हिमानी रौतेला, आईटी विभाग से रमेश बडोनी, तथा DIET चंपावत से दिनेश खेतवाल एवं बालक राम मिश्रा ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न स्थलों पर संवाद, अवलोकन और शैक्षिक आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी सदस्यों की सहभागिता ने इस शैक्षिक भ्रमण को अधिक प्रभावी, संवादात्मक एवं परिणामोन्मुख बनाया।
दिनांक 16 फरवरी से प्रारंभ यह शैक्षिक अभिदर्शन यात्रा अकादमिक, प्रशासनिक, सामाजिक, पारिस्थितिकी एवं आध्यात्मिक आयामों की समग्र समझ विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। आंगनवाड़ी केन्द्रों से लेकर विद्या समीक्षा केंद्र तक प्रत्येक स्तर पर सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी एकीकरण और गुणवत्ता सुधार के स्पष्ट प्रयास परिलक्षित हुए। यह भ्रमण नवीन दृष्टिकोण, अनुभव एवं प्रेरणा के साथ आज संपन्न हो रहा है, जो भविष्य में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं प्रभावी प्रबंधन की दिशा में मार्गदर्शक होगा।