Sunday, February 08, 2026

मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का सफल समापन

ओरोवैली आश्रमरायवाला में हुआ वैलिडिक्टरी सत्र

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली द्वारा मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम विषय पर आयोजित दो-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आज सफल समापन ओरोवैली आश्रमरायवाला (देहरादून) में संपन्न हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी तथा एनसीईआरटी के प्रो. विनोद शनवाल (मनोदर्पण कार्यक्रम प्रभारी) द्वारा संयुक्त रूप से की गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन मानसिक स्वास्थ्य को नीतिगतशैक्षिकसामाजिक और तकनीकी दृष्टिकोण से समझने हेतु विभिन्न विषयगत समूहों (Groups) में गहन सत्र आयोजित किए गए।

डिजिटल टेक्नोलॉजीमीडिया एवं डिजिटल सपोर्ट सिस्टम का मानसिक स्वास्थ्य में उपयोग
इस सत्र में विद्यालयी परिप्रेक्ष्य में डिजिटल माध्यमोंटेली-हेल्पलाइनई-सपोर्ट सिस्टम तथा ऑनलाइन काउंसलिंग की भूमिका पर चर्चा की गई। 

मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल क्षेम पर सरकारी नीतियाँ एवं सुधारात्मक पहल
प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, मनोदर्पणपी.एम. ई-विद्या तथा अन्य सरकारी पहलों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर विचार साझा किए। 

जीवन कौशल आधारित दृष्टिकोण द्वारा मानसिक कुशल क्षेम का समर्थन
इस सत्र में बच्चों में भावनात्मक साक्षरताआत्म-नियंत्रणसकारात्मक सोच और सामाजिक-भावनात्मक अधिगम (SEL) को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।

ओपन हाउस एवं अनुभव साझा सत्र

लंच के पश्चात Open House & Experience Sharing Session आयोजित किया गयाजिसमें सभी समूहों के प्रतिभागियों ने अपने अनुभवसीख और विद्यालयों में व्यवहारिक क्रियान्वयन से जुड़े सुझाव साझा किए। यह सत्र अत्यंत संवादात्मक और समाधान-उन्मुख रहा।

समापन सत्र में प्रो. विनोद शनवाल ने मनोदर्पण प्रकोष्ठ के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पहल शिक्षकोंविद्यार्थियों एवं परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य और कुशल क्षेम के लिए एक सशक्त मंच है। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन हेतु एससीईआरटी उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की और कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की पहचान यदि बाल्यकाल में हो जाएतो समस्याओं का समाधान समय रहते संभव है।

एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने अपने संबोधन में कहा कि सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति से हम प्रकृति और समाज के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं। अध्यात्मिकता मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने का एक प्रभावी माध्यम हैजिसे विद्यार्थियों के जीवन में भी उतारा जाना चाहिए।

कार्यक्रम में उप परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) अजीत भण्डारी एवं अंजुम फातिमा की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरे कार्यक्रम का प्रभावी प्रबंधन एवं संचालन एससीईआरटी उत्तराखंड की टीम द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित रूप से किया गया। यह दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर विमर्श का सशक्त मंच बनाबल्कि विद्यालयों में हैप्पीनेसजीवन कौशल और मानसिक कुशल क्षेम को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक ठोस पहल सिद्ध हुआ।