उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 6 जनवरी 2026 को उत्तराखंड एवं पंजाब के शिक्षक शिक्षा संस्थानों के अकादमिक सदस्यों का एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम सी०एन०सी०एल०, एन०सी०ई०आर०टी०, नई दिल्ली द्वारा एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड के सभागार में, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (NCTE), नई दिल्ली एवं एस०सी०एल०, एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड के सहयोग से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में उत्तराखंड और पंजाब से इस कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने सहभागिता की।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन सभी व्यक्तियों को पढ़ने–लिखने के अवसर उपलब्ध कराने पर बल देती है, जो अब तक आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान प्राप्त नहीं कर सके हैं। इसी अनुशंसा के अनुरूप 01 अप्रैल 2022 से राष्ट्रीय स्तर पर नव भारत साक्षरता कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। इस कार्यक्रम के पाँच प्रमुख घटक हैं—
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आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान
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महत्वपूर्ण जीवन कौशल
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व्यावसायिक कौशल विकास
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बुनियादी शिक्षा
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सतत शिक्षा
शिक्षण कार्य का संचालन सामाजिक चेतना केन्द्रों के माध्यम से स्वयंसेवी शिक्षकों द्वारा किया जाता है।
एन०आई०ओ०एस० (राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान) द्वारा वयस्क शिक्षार्थियों के लिए वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जाती है तथा सफल साक्षरों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाते हैं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० प्रकाश सिंह ने ऑनलाइन उद्बोधन में कहा कि शिक्षा प्रणाली में शिक्षक की भूमिका केंद्रीय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक का स्वयं प्रसन्न रहना और विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में एस०सी०एल०, एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड द्वारा विकसित उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लास के विशिष्ट संस्करण का विमोचन किया गया। इसके पश्चात एन०सी०ई०आर०टी० से प्रोफेसर उषा शर्मा ने उल्लास कार्यक्रम के उद्देश्यों, संरचना एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में प्रस्तावित गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इसके बाद पंजाब राज्य के कार्यक्रम नोडल अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करना चुनौतीपूर्ण कार्य है, किंतु पंजाब में विभिन्न नवाचारों के माध्यम से इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया जा रहा है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर एस०सी०एल०, एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड की ओर से कार्यक्रम समन्वयक डॉ हरेंद्र सिंह अधिकारी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।