26 जनवरी 2026 को SCERT उत्तराखण्ड परिसर में गणतंत्र दिवस समारोह अत्यंत गरिमामय और प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9:30 बजे राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें संकाय सदस्य, अधिकारीगण और कर्मचारीगण पूर्ण उत्साह से सम्मिलित हुए।
अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी द्वारा ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक फहराया गया। इसके पश्चात सभागार में शिक्षा मंत्री, सचिव, महानिदेशक एवं निदेशक अकादमिक के संदेशों का वाचन किया गया। इन संदेशों में गुणवत्तापरक शिक्षा, नवाचार और मिशन-ईईपी के अंतर्गत कार्य योजना को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी गई।संस्थान के प्रवक्ता सुनील भट्ट द्वारा मंच पर प्रस्तुत की गई प्रेरणादायी कविता ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया। कविता में SCERT की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचारों और समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कविता को ज़ोरदार तालियों और सराहना प्राप्त हुई, जिसने समारोह को एक भावनात्मक ऊँचाई प्रदान की।
सायना जी का विशेष वक्तव्य
समारोह में संयुक्त निदेशक अत्रएय सायना ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि SCERT उत्तराखण्ड के साथ बिताए गए दो महीनों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा:
“यहाँ की फैकल्टी जिस समर्पण, नवाचार और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है, वह वास्तव में अनुकरणीय है। SCERT केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक विचार है—जो शिक्षा को समाज के लिए सार्थक और सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।”
सायना के शब्दों ने संस्थान की कार्यशैली और मूल्यों को एक बाहरी दृष्टिकोण से उजागर किया, जिससे सभी उपस्थितों को गर्व की अनुभूति हुई।
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि SCERT उत्तराखण्ड केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी सोच, गुणवत्ता आधारित शिक्षा और मूल्यपरक प्रशिक्षण की दिशा में निरंतर अग्रसर है। यह समारोह संस्थान की सशक्त दूरदृष्टि और नवाचार की भावना को उजागर करने का एक सशक्त माध्यम बना। इस मौके पर प्रवक्ता विनय थपलियाल ने भी 70 वर्षों मे हासिल संप्राप्तियों को लेकर भी समीक्षा करने पर जोर दिया ।
अपर निदेशक सकलानी ने सभी प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय सहभागिता के लिए बधाई दी। समारोह के समापन पर संकाय सदस्यों और उपस्थित सभी कर्मचारियों ने सामूहिक जलपान कर आपसी संवाद और सौहार्द को और भी प्रगाढ़ किया।