Tuesday, February 17, 2026

उत्तराखंड एस.सी.ई.आर.टी. का दूसरे दिन का शैक्षिक अध्ययन भ्रमण: डाइट राजकोट से विद्या समीक्षा केंद्र से एक प्राथमिक माडल स्कूल तक

 

गुजरात प्रवास के दूसरे दिन उत्तराखंड अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल के संरक्षण मे एस.सी.ई.आर.टी. के अध्ययन दल ने शैक्षिक नवाचारों और प्रबंधन प्रणालियों को निकट से समझने के उद्देश्य से डाइट राजकोट  का भ्रमण किया। यह दिन अकादमिक संवाद, मॉनिटरिंग तंत्र की समझ, विद्यालयी नवाचारों के अवलोकन तथा सामुदायिक सहभागिता के उत्कृष्ट उदाहरणों से परिपूर्ण रहा।

डाइट राजकोट में प्रस्तुतीकरण एवं नवाचारों का अवलोकन

कार्यक्रम की शुरुआत डाइट के प्राचार्य निलेश भाई के स्वागत भाषण और विस्तृत प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने डाइट राजकोट की नवीन पहलों, प्रशिक्षण मॉडल, वीडियो–फोटो एल्बम आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली तथा शैक्षिक गतिविधियों के डिजिटल दस्तावेजीकरण की प्रक्रियाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया।

विशेष रूप से यह दर्शाया गया कि किस प्रकार डाइट स्तर से विद्यालयों तक सतत मॉनिटरिंग, फील्ड विज़िट रिपोर्टिंग और प्रमाण आधारित कार्य संस्कृति विकसित की गई है।

विद्या समीक्षा केंद्र पर अभिमुखीकरण: डेटा आधारित निगरानी मॉडल

इसके उपरांत दल ने Vidya Samiksha Kendra में मॉनिटरिंग सिस्टम पर अभिमुखीकरण प्राप्त किया। यहाँ यह समझाया गया कि किस प्रकार राज्य स्तर से लेकर स्कूल, BRC/CRC तथा ज़ोन स्तर तक की गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी की जाती है।

मुख्य बिंदु निम्न रहे:

  • ऑनलाइन डेटा प्रबंधन एवं डैशबोर्ड आधारित समीक्षा
  • स्कूल प्रदर्शन, उपस्थिति एवं अधिगम स्तर की ट्रैकिंग
  • फील्ड वर्क निगरानी और त्वरित फीडबैक तंत्र
  • साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रणाली

इस मॉडल ने उत्तराखंड दल को डेटा-आधारित प्रशासन की व्यवहारिक संभावनाओं पर गंभीर चिंतन का अवसर दिया।

प्रेरक प्रसंग: बीजल दामिनी का उद्यमी शिक्षा मॉडल

अभिमुखीकरण सत्र के दौरान राजकोट से GTP एवं राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक-उद्यमी बीजल दामिनी ने शिक्षा में व्यावसायिक मॉडल और उसके कक्षा-कक्षीय रूपांतरण पर अपने अनुभव साझा किए।

उन्होंने बताया कि किस प्रकार मात्र 8000 रुपये की प्रारंभिक राशि को 1.5 करोड़ रुपये के सामाजिक उपयोगी संसाधन में परिवर्तित कर सामुदायिक विकास हेतु समर्पित किया गया। यह “आर्थिक सक्षमता मॉडल” साक्ष्य-आधारित कार्ययोजना पर आधारित था।

निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल  ने बीजल दामिनी के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें एक सफल उद्यमी शिक्षक बताया। पाठ्यक्रम विभाग के समन्वयक सुनील भट्ट ने उत्तराखंड के “कौशलम” कार्यक्रम में सहयोग हेतु उन्हें आमंत्रित भी किया। आईटी विभाग से रमेश बडोनी ने उनके उल्लेखनीय कार्यों का परिचय प्रस्तुत कर संवाद को और समृद्ध किया। 

श्री पृथ्वीराज चौहान प्राथमिकशाला  का भ्रमण: गुणवत्ता का जीवंत उदाहरण

दोपहर उपरांत डाइट टीम द्वारा सभी सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई और इसके पश्चात राजकोट के Prithvi Raj Chauhan Primary School (48  नंबर) का भ्रमण किया गया।



विद्यालय में निम्न प्रमुख गतिविधियों का अवलोकन किया गया:

  • गुणवत्तापरक शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रियाएँ
  • कौशल शिक्षा का एकीकृत संचालन
  • किचन गार्डन मॉडल का विकास
  • गार्डनिंग में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता
  • स्कूल हेड के नवाचारी प्रयास
  • व्यवस्थित रिकॉर्ड कीपिंग एवं प्रबंधन प्रणाली

विद्यालय में CPD (Continuous Professional Development) गतिविधियों पर भी चर्चा हुई।  SCERT गुजरात द्वारा निर्मित  राज्य का ट्रैनिंग कार्यक्रम के दिवस सभी केंद्रों पर एक समान होते हैं जो अपने आप मे एक यूनीक पहल है ।  निदेशक अकादमिक ने शिक्षकों के वर्कलोड, प्रबंधन और कार्य-वितरण प्रणाली पर गहन संवाद किया। विशेष रूप से किचन गार्डन मॉडल को आत्मनिर्भरता और अनुभवात्मक अधिगम का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।

सांस्कृतिक एवं स्थानीय अध्ययन की ओर अगला कदम

शाम के समय अध्ययन दल ने गुजरात की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय मिलेट आधारित कृषि मॉडल और सांस्कृतिक धरोहरों के अध्ययन हेतु अगले गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। यह शैक्षिक भ्रमण केवल अकादमिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एवं सामुदायिक अधिगम का भी अवसर बनता जा रहा है।

इस अध्ययन दल में पाठ्यक्रम विभाग के  डॉ. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, विनय थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी, गंगा घुगघत्याल, हिमानी रौतेला तथा DIET चंपावत से दिनेश खेतवाल एवं राम बालक  मिश्रा ने सहभागिता की।


दूसरे दिन का यह अध्ययन भ्रमण स्पष्ट करता है कि जब डेटा-आधारित मॉनिटरिंग, शिक्षक-उद्यमिता, कौशल शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता एक साथ कार्य करती है, तब शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती—वह सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाती है। राजकोट मॉडल से प्राप्त अनुभव उत्तराखंड में कौशलम, ICT एकीकरण तथा साक्ष्य-आधारित शैक्षिक प्रबंधन को और सुदृढ़ करने में निश्चित रूप एक आदर्श परिकल्पना हो सकता है ।