Wednesday, February 18, 2026

शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम (तीसरा दिवस): नवाचार, अनुशासन एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण द्वारका की प्रेरक यात्रा

 

बन्दना गर्ब्याल निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के मार्गदर्शन में संचालित शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत आज तीसरे दिवस पर हमारी टीम ने गुजरात राज्य के पावन जनपद द्वारका में स्थित विद्यालयों का भ्रमण किया। यह दिवस शैक्षिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी एवं अनुभवसमृद्ध रहा। विद्यालयों में संचालित नवाचारों, प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था, अनुशासित शैक्षिक वातावरण तथा सांस्कृतिक मूल्यों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

भ्रमण का उद्देश्य: श्रेष्ठ शैक्षिक प्रथाओं का अवलोकन

इस अध्ययन भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों में लागू की जा रही Best Practices का प्रत्यक्ष अवलोकन करना तथा उन अनुभवों को अपने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में लागू करने हेतु साझा करना था।


यह देखकर अत्यंत संतोष हुआ कि गुजरात में शिक्षा केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य स्तर पर बनाई गई नीतियों का विद्यालय स्तर पर प्रभावी और परिणाममुखी क्रियान्वयन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

विशेष रूप से विद्या समीक्षा केंद्र का प्रभाव विद्यालयों की कार्यप्रणाली में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। यह केंद्र केवल मॉनिटरिंग तंत्र नहीं, बल्कि एक सशक्त गवर्नेंस मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है। शिक्षण व्यवस्था, छात्र उपस्थिति, अधिगम स्तर, मूल्यांकन प्रक्रिया तथा शैक्षिक गतिविधियों में इसकी सकारात्मक भूमिका स्पष्ट दिखाई दी।

शिक्षक प्रतिबद्धता एवं विद्यार्थियों का आत्मविश्वास

भ्रमण के दौरान विद्यालयों में विद्यार्थियों का आत्मविश्वास अत्यंत उच्च स्तर का देखने को मिला। बच्चों ने उत्साह, अनुशासन और ऊर्जा के साथ अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।

विद्यालयों के शिक्षक अपने दायित्वों के प्रति अत्यंत समर्पित एवं प्रेरित दिखाई दिए।

  • शिक्षण को रोचक बनाने की क्षमता
  • बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण
  • समयबद्ध कार्य निष्पादन
  • अनुशासित एवं सकारात्मक कार्य संस्कृति

इन सभी गुणों ने विद्यालयी वातावरण को अत्यंत सशक्त बनाया।

विद्यालयी वातावरण एवं अभिलेखीकरण व्यवस्था

विद्यालयों में कक्षा-कक्ष का वातावरण बाल-अनुकूल, स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित था। शिक्षण-अधिगम सामग्री का प्रभावी उपयोग किया जा रहा था।

अभिलेखीकरण (Documentation) एवं रिकॉर्ड प्रबंधन अत्यंत उत्कृष्ट रहा। यह स्पष्ट संकेत है कि विद्यालय प्रशासन गुणवत्ता सुधार हेतु सतत प्रयासरत है। योजनाओं का कार्यान्वयन दस्तावेज़ों तक सीमित न रहकर व्यवहार में दिखाई दिया।

सुदृढ़ समन्वय व्यवस्था: त्वरित सहयोग और सकारात्मक सहभागिता

गुजरात राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत Gujarat Council of Educational Research and Training (GCERT), डाइट फैकल्टी तथा संकुल समन्वयकों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।

चर्चा के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया, स्पष्ट प्रस्तुतीकरण एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की तत्परता उनके सक्रिय सहयोग एवं प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह समन्वय शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाता है।

भ्रमण किए गए विद्यालय

आज हमने द्वारका जनपद के निम्नलिखित विद्यालयों का अवलोकन किया—

  1. पी एम श्री प्राथमिकशाला नंबर-1, द्वारका

  2. देवभूमि राजकीय प्राथमिकशाला नंबर-2, द्वारका

दोनों विद्यालयों में टीम का आत्मीय स्वागत एवं उत्कृष्ट आतिथ्य अत्यंत भावपूर्ण रहा। 

विद्यार्थियों की प्रस्तुति

  • योग प्रदर्शन
  • संगीत प्रस्तुति
  • कक्षा-कक्षीय गतिविधियाँ



प्राथमिक स्कूल 1 के सी आर सी हिरदेयश भटट ने द्वारका के महत्व पर वाचन एवं गायन के साथ प्रेरक प्रस्तुति दी। बच्चों की प्रस्तुतियों में अनुशासन, अभ्यास, आत्मविश्वास एवं सामूहिकता का अद्भुत संगम दिखाई दिया। यह गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति की सफलता का जीवंत उदाहरण था।

आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभूति

शैक्षिक भ्रमण के साथ-साथ हमें द्वारका की पावन धरा पर स्थित द्वारकाधीश मंदिर तथा नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह अनुभव केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला ही नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और जीवन मूल्यों को समझने का भी अवसर था। इस यात्रा ने पुनः यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति, अध्यात्म और जीवन मूल्यों से जुड़कर ही पूर्णता प्राप्त करती है।

प्रेरणा, प्रतिबद्धता और नवाचार का संगम

शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम का तीसरा दिवस अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

गुजरात राज्य की—

  • सुदृढ़ मॉनिटरिंग प्रणाली

  • प्रभावी गवर्नेंस मॉडल

  • योजनाओं का व्यवहारिक क्रियान्वयन

  • शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उच्च प्रतिबद्धता

इन सभी ने हमारी टीम को गहराई से प्रभावित किया।

निश्चित रूप से यह भ्रमण हमारे राज्य में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार हेतु नई सीख, नवाचारों के मॉडल एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करने वाला सिद्ध होगा।

द्वारका की यह यात्रा शिक्षा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बनकर हमारे अनुभवों में सदैव स्मरणीय रहेगी।