उत्तराखंड में 7 अप्रैल 2026 का दिन विद्यालयी शिक्षा के लिए एक विशेष उत्सव का प्रतीक बन गया, जब पूरे राज्य में “प्रवेश उत्सव” बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा की नई दुनिया में स्वागत का एक प्रेरणादायक अभियान था।
प्रवेश उत्सव का उद्देश्य
इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य था:
- नए छात्र-छात्राओं का गर्मजोशी से स्वागत करना
- उन्हें विद्यालयी वातावरण से परिचित कराना
- अभिभावकों को सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देना
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति विश्वास और आकर्षण बढ़ाना
पूर्व शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने भी इस उत्सव मे अपनी उपस्थिति से सभी मे जोश भरने का काम किया ।
पूरे राज्य में एक साथ आयोजन
राज्य के सभी जनपद मुख्यालयों, खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों और उनके अंतर्गत आने वाले विद्यालयों में इस उत्सव का आयोजन किया गया।
इसमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- निदेशक अकादमिक, बन्दना गर्ब्याल
- निदेशक माध्यमिक शिक्षा, डॉ मुकुल सती
- निदेशक प्राथमिक शिक्षा, कंचन देवराड़ी
- अन्य मुख्य अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी , प्रधानाचार्य एवं शिक्षकगण
अधिकारियों ने अलग-अलग समूहों में विद्यालयों का भ्रमण कर नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत किया और उनके अभिभावकों से संवाद स्थापित किया।
विद्यार्थियों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम के दौरान बच्चों और अभिभावकों को राज्य के विद्यालयों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं से अवगत कराया गया, जैसे:
- 🖥️ आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासेस
- 📚 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) से प्रशिक्षित शिक्षक
- 🎮 हैकथॉन और नवाचार आधारित गतिविधियाँ
- 🌐 ऑनलाइन कोर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म
- 📺 PM eVIDYA चैनल्स
- 📲 दीक्षा (DIKSHA) प्लेटफॉर्म के माध्यम से ई-लर्निंग
- 🎓 छात्रवृत्ति योजनाएँ और अन्य सरकारी सुविधाएँ
इन सभी पहलों का उद्देश्य कक्षा-कक्ष शिक्षण को अधिक रोचक, इंटरैक्टिव और प्रभावी बनाना है।
निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल एवं एस सी ई आर टी के से अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी एवं संकाय समूह ने इस अवसर पर सभी अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील की कि वे:
- नवप्रवेशी बच्चों का आत्मीयता से स्वागत करें
- उन्हें विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करें
- अभिभावकों के साथ संवाद कर विश्वास का वातावरण बनाएँ
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक
विद्यालयों के प्रांगण में:
- रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
- स्वागत समारोह
- छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियाँ
इन सबने उत्सव को और भी जीवंत और यादगार बना दिया।
एक नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
“प्रवेश उत्सव 2026” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सकारात्मक पहल है जो:
- बच्चों के मन में विद्यालय के प्रति अपनापन पैदा करती है
- शिक्षा के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाती है
- नई पीढ़ी को रचनात्मक और नवाचारी बनने के लिए प्रेरित करती है