राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, जब अनुभवी एवं दूरदर्शी शिक्षा अधिकारी पद्मेन्द्र सकलानी ने अपर निदेशक के पद का कार्यभार ग्रहण किया है। उनके साथ ही तीन अन्य अधिकारियों ने भी प्रदेश के विभिन्न पदों पर अपनी नई जिम्मेदारियाँ संभाली हैं, जिससे संस्थान की कार्यक्षमता और सुदृढ़ होने की अपेक्षा है।
इस अवसर पर परिषद के समस्त अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों ने श्री सकलानी का हार्दिक स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ एवं बधाई दी। यह पूर्णकालिक दायित्व (Full Placement) उनके नेतृत्व में SCERT के लिए एक नई दिशा और ऊर्जा लेकर आएगा।
इससे पूर्व पद्मेन्द्र सकलानी शिक्षा महानिदेशालय में संयुक्त निदेशक के साथ-साथ अपर निदेशक प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे थे, जहाँ उन्होंने शैक्षिक प्रशासन, नीति क्रियान्वयन तथा गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अनुभव और नेतृत्व कौशल से SCERT के कार्यों में नई गति आने की पूर्ण संभावना है।
पद्मेन्द्र सकलानी का दृष्टिकोण (Vision for SCERT)
सकलानी का स्पष्ट मानना है कि SCERT केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था का बौद्धिक और नवाचार केंद्र है। उनका विज़न निम्न प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है—
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गुणवत्तापूर्ण एवं साक्ष्य-आधारित शिक्षा (Evidence-Based Education):
शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को शोध और आंकड़ों के आधार पर मजबूत करना। -
राज्य पाठ्यचर्या का सुदृढ़ीकरण:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप स्थानीय संदर्भों को समाहित करते हुए लचीली और प्रासंगिक पाठ्यचर्या विकसित करना। -
शिक्षक प्रशिक्षण में नवाचार:
प्रशिक्षण कार्यक्रमों को केवल औपचारिकता न बनाकर उन्हें व्यावहारिक, गतिविधि-आधारित और कक्षा-केंद्रित बनाना।
पाठ्यचर्या एवं प्रशिक्षण पर फोकस
सकलानी के नेतृत्व में SCERT का प्रमुख लक्ष्य होगा कि—
- शिक्षक प्रशिक्षण को निरंतर (Continuous Professional Development) प्रक्रिया बनाया जाए।
- DIETs एवं अन्य प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाया जाए।
- कक्षा-कक्ष में सीखने के परिणामों (Learning Outcomes) पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- ‘करके सीखना’ (Learning by Doing) और अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा दिया जाए।
ICT और शिक्षा का भविष्य
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) को शिक्षा का अभिन्न अंग मानते हुए उनका दृष्टिकोण अत्यंत स्पष्ट है—
- डिजिटल टूल्स का प्रभावी एकीकरण: केवल उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका सार्थक उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- हाइब्रिड लर्निंग मॉडल: पारंपरिक और ऑनलाइन शिक्षा का संतुलित मिश्रण विकसित करना।
- वर्चुअल लैब्स एवं स्मार्ट क्लासेस का विस्तार: दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण संसाधन पहुँचाना।
- डेटा-आधारित निर्णय: शिक्षण और प्रशिक्षण में ICT के माध्यम से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर नीति निर्माण करना।
सकलानी ने SCERT के लिए एक दूरगामी कार्ययोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की है—
- डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण – सभी शैक्षणिक गतिविधियों का एकीकृत प्लेटफॉर्म।
- MOOCs एवं ऑनलाइन कोर्सेज का विस्तार – शिक्षकों और छात्रों के लिए निरंतर सीखने के अवसर।
- शोध एवं नवाचार को बढ़ावा – विद्यालय स्तर तक एक शोध संस्कृति विकसित करना।
- स्थानीय से वैश्विक (Local to Global) – उत्तराखंड के शैक्षिक नवाचारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना।
- स्कूल-आधारित सपोर्ट सिस्टम – शिक्षकों को कक्षा में निरंतर सहयोग प्रदान करना।
इस अवसर पर अकादमिक निदेशक वंदना गर्ब्याल ने पद्मेन्द्र सकलानी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में SCERT नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा और राज्य की शिक्षा प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएगा।
अंत में, SCERT परिवार के सभी सदस्यों की ओर से पद्मेन्द्र सकलानी एवं अन्य नव-नियुक्त अधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।