Tuesday, September 09, 2025

हैकाथॉन 2.0 आगामी आयोजन: नवाचार उत्तराखंड

 ृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल समाधानों के माध्यम से उत्तराखंड में पर्यावरणीय लचीलापन को सशक्त बनाना

 परिचय

"नवाचार उत्तराखंड हैकाथॉन 2.0" राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखंड द्वारा आयोजित एक अभिनव पहल है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों में रचनात्मकता, डिजिटल साक्षरता और आलोचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए यह हैकाथॉन शिक्षा, समाज और पर्यावरण से जुड़ी ज्वलंत चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित है। प्रतिभागी प्राकृतिक आपदाओं, जंगल की आग, भूस्खलन और सतत विकास जैसी समस्याओं के लिए नवीन समाधान प्रस्तुत करेंगे, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में योगदान देंगे।

दृष्टिकोण

उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में नवाचार और डिजिटल दक्षता की संस्कृति को विकसित करना, जिससे विद्यार्थी और शिक्षक मिलकर AI-आधारित समाधान तैयार करें जो सामुदायिक लचीलापन और सतत विकास को बढ़ावा दें।

उद्देश्य

 प्रतिभागी

• विद्यार्थी: कक्षा 6 से 12 तक

• शिक्षक: कक्षा 1 से 12 तक


मुख्य विषय

1. पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए AI

• जंगल की आग की रोकथाम और प्रबंधन

• भूस्खलन की पहचान और रोकथाम हेतु AI अनुप्रयोग

• आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया को प्रौद्योगिकी से सशक्त बनाना

2. सतत विकास

• पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देना

• स्थानीय जैव विविधता और संसाधनों का संरक्षण

3. शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन

• व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव हेतु उपकरण

• समावेशिता और सुलभता बढ़ाने वाले प्लेटफॉर्म

4 . सतत विकास 
• उत्तराखंड में पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देना 
• स्थानीय जैव विविधता और संसाधनों के संरक्षण हेतु प्रौद्योगिकी आधारित पहल

5. शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन 
• व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव हेतु उपकरण और अनुप्रयोग 
• शिक्षा में समावेशिता और सुलभता बढ़ाने वाले प्लेटफॉर्म

उद्देश्य

. कौशल विकास: 
• ICT टूल्स, रोबोटिक्स और STEM रणनीतियों से डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना। 
• AI क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं और मार्गदर्शन सत्र आयोजित करना।

सहयोग: 
• शिक्षकों, विद्यार्थियों और हितधारकों का नेटवर्क तैयार करना। 
• परियोजना प्रस्तुतियों को बेहतर बनाने हेतु समीक्षा और प्रतिक्रिया सत्र आयोजित करना।

कार्यक्रम संरचना

• प्रारंभिक Idea / प्रस्तुतियों का मूल्यांकन online होगा।

• शीर्ष 1000 परियोजनाएं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए दूसरे चरण के लिए चयनित की जाएंगी।

·       राज्य स्तरीय प्रतियोगिता:

• सर्वश्रेष्ठ 150 परियोजनाओं का अंतिम प्रदर्शन हेतु चयन होगा।

·       अंतिम प्रदर्शन एवं पुरस्कार:

• 20 उत्कृष्ट छात्र परियोजनाओं और 10 शिक्षक परियोजनाओं को सम्मान।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिता 
• सर्वश्रेष्ठ 150 परियोजनाओं का अंतिम प्रदर्शन हेतु चयन होगा।

अंतिम प्रदर्शन एवं पुरस्कार 
• 20 उत्कृष्ट छात्र परियोजनाओं और 10 प्रभावशाली शिक्षक परियोजनाओं को सम्मानित किया जाएगा। 
• नवाचार और लचीलेपन का उत्सव मनाने हेतु पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

अपेक्षित परिणाम 
• प्रतिभागियों में डिजिटल और AI साक्षरता में वृद्धि। 
• उत्तराखंड की पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों के लिए ठोस समाधान। 
• शिक्षकों की नवाचारी शिक्षण विधियों को लागू करने की क्षमता में वृद्धि। 
• जमीनी स्तर पर SDGs की प्राप्ति हेतु जागरूकता और कार्रवाई।

कैसे भाग लें

• पंजीकरण: प्रवेश फॉर्म कार्यक्रम पोर्टल पर उपलब्ध हैं। innovateuttarakhand.com
• प्रस्तुति दिशा-निर्देश: परियोजना प्रस्तुतियों हेतु विस्तृत निर्देशों का पालन करें।
• चयन प्रक्रिया: राज्य स्तर और अंतिम प्रदर्शन में भाग लेंने और जूरी के निर्णय से
 संपर्क विवरण
• ईमेल: scertuk09@gmail.com
• पोर्टल: innovateuttarakhand.com

• Social media: Stay updated via SCERT’s official channels on YouTube 

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  1. संरक्षक: दीप्ति सिंह, IAS, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा
  2. संस्थान प्रमुख: बंदना गर्ब्याल, निदेशक, अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण
  3. मेजबान: पद्मेन्द्र सकलानी, अपर निदेशक, SCERT उत्तराखंड
  4. कार्यक्रम अधिकारी: अजीत भंडारी, उपनिदेशक, SCERT उत्तराखंड
  5. कार्यक्रम संयोजक: रमेश बडोनी, आईटी संकाय, SCERT उत्तराखंड

innovateuttarakhand.com

Saturday, September 06, 2025

हैकाथॉन 2.0 : विशेषज्ञों और मेंटर्स के लिए ऑनलाइन बैठक सफलतापूर्वक सम्पन्न

 

देहरादून। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखंड द्वारा हैकाथॉन 2.0 : इनोवेट उत्तराखंड की तैयारियों के क्रम में एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखण्ड, बंदना गर्ब्याल ने की। बैठक का संचालन और समन्वयन आर.पी. बडोनी (आईटी संकाय, SCERT उत्तराखंड) द्वारा किया गया।

बैठक का उद्देश्य आगामी शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए कंटेंट एक्सपर्ट्स और मेंटर्स को आमंत्रित करना और हैकाथॉन से संबंधित कंटेंट निर्माण, वीडियो ट्यूटोरियल्स एवं प्रोजेक्ट गाइड्स की रूपरेखा साझा करना था।

विशेष अतिथि और वक्ता

बैठक में शिक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार से जुड़े देशभर के प्रमुख शिक्षाविद्, प्रोफेसर और शिक्षक-नेता शामिल हुए। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं:

  • डॉ. अजय सेमल्टी – प्रोफेसर, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर

  • डॉ. अतुल बमराड़ा – जीपीएस चौरणखाल, पाबौ, पौड़ी गढ़वाल

  • इमरान खान , एप गुरु fulbright स्कालर  अलवर राजस्थान 

  • अमित मेहता, fulbright स्कालर , कंप्युटर फैकल्टी जे एन वी चण्डीगड़ 

  • हुओंग वू , रिसर्च स्कालर , वियतनाम 

  • अल्पा निगम , fulbright स्कालर उत्तरप्रदेश 

  • प्रकाश चंद्र उपाध्याय – जीएचएसएस खूणाबोरा, असिस्टेंट टीचर

  • बर्जिन जी – एस सी ई आर टी तमिलनाडु- पीजीटी फिजिक्स

  • अंजू गांधी – जीजीएचएस बिघार, फतेहाबाद, हरियाणा, पीजीटी गणित

  • डॉ. इश्तियाक अहमद – असिस्टेंट प्रोफेसर (सलेक्शन ग्रेड), यूपीईएस, देहरादून

  • जगदंबा प्रसाद डोभाल – जीआईसी उप्पू, टिहरी गढ़वाल, गणित शिक्षक

  • नीता मिश्रा – सुरेंद्रनाथ सेन्टेनरी स्कूल, रांची, टीजीटी

  • लोकेश कुमार , रोबो इंजीनियर , मध्य प्रदेश 

  • डॉ. किरण लता डंगवाल – एसोसिएट प्रोफेसर, शिक्षा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय

  • नीरू मित्तल – एसआरडीएवी पब्लिक स्कूल, दिल्ली, पीजीटी कम्प्यूटर साइंस

  • डॉ. जितेंद्र कुमार जाजोरिया – राजस्थान स्टेट टेक्स्टबुक बोर्ड, अलवर

  • सुगंधा शर्मा – असिस्टेंट प्रोफेसर (सीनियर स्केल), यूपीईएस, देहरादून

  • एनी कुमार – विकस भारती पब्लिक स्कूल, हेड ऑफ कम्प्यूटर साइंस

  • डॉ. मुकेश कुमार नौटियाल – जीआईसी ठाटी धनारी, उत्तरकाशी, गणित एलटी

  • दौलत सिंह गुसाईं – जीआईसी सैली (कौड़िया), प्रवक्ता

  • अंकित जोशी – जीआईसी नई, सहायक शिक्षक (एलटी)

  • लता आर्या – डीआईईटी, चंपावत, प्रवक्ता

  • डॉ. कौशिक घोष – एसोसिएट प्रोफेसर एवं क्लस्टर हेड, यूपीईएस

इनके अतिरिक्त  डॉ. अजय सेमल्टी , डॉ. किरण डंगवाल, डॉ. इश्तियाक अहमद, इमरान खान , बर्जिन , डॉ. अशुतोष वर्मा, सुगंधा शर्मा, एनी कुमार, अल्पा निगम आदि ने अपने अनुभव साझा किए और हैकाथॉन 2.0 का हिस्सा बनने पर संतोष और गर्व व्यक्त किया।

हैकाथॉन 2.0 – कंटेंट क्रिएटर्स के लिए आमंत्रण

SCERT उत्तराखंड ने शिक्षकों, प्रोफेशनल्स और रिसर्चर्स को आमंत्रित किया है कि वे मौलिक वीडियो ट्यूटोरियल्स (30 मिनट तक) और प्रोजेक्ट गाइड्स (5 पृष्ठ तक) तैयार करें।

आवश्यक दिशानिर्देश:

  • वीडियो ट्यूटोरियल – हिंदी भाषा (तकनीकी शब्द अंग्रेजी में), स्पष्ट ऑडियो-वीडियो, अधिकतम 30 मिनट

  • प्रोजेक्ट गाइड (PDF) – समस्या कथन, समाधान, प्रयुक्त टूल्स, चरणबद्ध योजना, सीखने के परिणाम और एसडीजी से संबद्धता

  • मौलिकता – सामग्री 100% मौलिक हो, एआई का सीमित प्रयोग (20% तक)

  • मान्यता – चयनित सामग्री आधिकारिक पोर्टल innovateuttarakhand.com पर प्रकाशित होगी और कंटेंट क्रिएटर को श्रेय दिया जाएगा।

विषयों की सूची

हैकाथॉन के लिए 50 विषय जारी किए गए हैं, जिनमें एआई आधारित फॉरेस्ट फायर प्रेडिक्शन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, डिजिटल लेसन प्लानिंग, समावेशी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आपदा प्रबंधन, वर्चुअल रियलिटी आधारित शिक्षा, स्मार्ट विलेज मॉडल आदि शामिल हैं।

सभी प्रतिभागियों को अपने प्रोजेक्ट 30 सेप्टेम्बर 2025 तक निर्धारित प्रारूप में गूगल ड्राइव लिंक के माध्यम से जमा करने होंगे।

बैठक का समापन करते हुए निदेशक  बंदना गर्ब्याल ने कहा कि हैकाथॉन 2.0 न केवल छात्रों और शिक्षकों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि उत्तराखंड सहित पूरे देश में शिक्षा, तकनीकी नवाचार और सतत विकास की दिशा में ठोस कदम साबित होगा।

अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए देखें: https://innovateuttarakhand.com/

Friday, September 05, 2025

शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार 2024: 16 शिक्षकों को मिला सम्मान: राजभवन मे राज्यपाल द्वारा सम्मानित

 

देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा सुधार और गुणवत्ता आधारित शिक्षण व्यवस्था की दिशा में लगातार कार्य हो रहा है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया।

शुक्रवार को आयोजित सम्मान समारोह में ले0ज0 राज्यपाल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 16 शिक्षकों को यह पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में कबीलाई शिक्षा व्यवस्था नहीं चलेगी, बल्कि यहां आधुनिक और राष्ट्र को आगे बढ़ाने वाली शिक्षा प्रणाली लागू होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में निरंतर सुधार और नवाचार राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

शिक्षा सचिव रविनाथ रामन  ने सभी सम्मानित शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। गुणवत्तापरक और आधुनिक शिक्षा ही बच्चों को बेहतर भविष्य की ओर ले जाएगी।

पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों में विभिन्न स्तरों — प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और प्रशिक्षण संस्थानों के शिक्षक शामिल हैं। समारोह में सभी शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार हर वर्ष उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, अनुकरणीय कार्य और समाज में सकारात्मक प्रभाव स्थापित किया है। इस बार सम्मानित हुए 16 शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में न केवल बच्चों को शिक्षा दी बल्कि उनमें जीवन मूल्यों, अनुशासन और रचनात्मक सोच को भी विकसित किया।

ले0ज0 राज्यपाल गुरमीत सिंह कहा कि यह आयोजन राज्य में शिक्षा सुधार और शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करता है। ले0ज0 राज्यपाल गुरमीत सिंह  ने इस अवसर पर यह भी कहा कि सरकार शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और शिक्षकों के सहयोग से उत्तराखंड को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आदर्श राज्य बनाया जाएगा। इस अवसर पर अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल , माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ मुकुल कुमार सती,  अपर निदेशक एस सी ई आर टी पदमेन्द्र सकलानी ने सभी सम्मान पाने वाले शिक्षकों को शुभकामनाएं दी । 

प्राथमिक शिक्षा से चयनित शिक्षक

  1. डॉ. चंदन प्रसाद गोड़ – रा.प्रा.वि. शालवन, चम्पावत

  2. रश्मि राणा – रा.प्रा.वि. स्याली, बमोरी, टिहरी गढ़वाल

  3. रमेश लाल राणा – रा.प्रा.वि. काफली, उत्तरकाशी

  4. डॉ. वीरेन्द्र सिंह – रा.प्रा.वि. इन्द्रेशपुरम, हरिद्वार

  5. कल्पना भण्डारी – रा.प्रा.वि. घंडियाल, टिहरी गढ़वाल

  6. तिली बडोला – रा.प्रा.वि. नौगांव पंजरो, चम्पावत

  7. सुमन गुसाईं – रा.प्रा.वि. पनियाली, पौड़ी गढ़वाल

  8. देवदान सिंह खंडवाल – रा.प्रा.वि. चौफुला, सेरा गांव, रुद्रप्रयाग

  9. डॉ. निसार खान – रा.प्रा.वि. गाजी, अल्मोड़ा

माध्यमिक शिक्षा से चयनित शिक्षक

  1. पुष्कर सिंह मनेरी – पं. का. सु. विद्यालय, चंडीगढ़ गढ़वाल

  2. गीता बिष्ट जोशी – रा.इ.का. जखोल, उत्तरकाशी

  3. डॉ. नूतन भट्ट – रा.इ.का. देहरादून

  4. प्रकाश चन्द्र उपाध्याय – रा.इ.का. बाफना, चम्पावत

  5. दीपक चन्द्र मिंट – रा.इ.का. तारखेत, अल्मोड़ा

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025: उत्तराखंड के मनीष ममगाई और डॉ. मंजूबाला को मिला सम्मान

 

म्पावत/देहरादून। शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में उत्तराखंड के दो शिक्षकों NSTI देहरादून के ट्रेनिंग ऑफिसर मनीष ममगाई और चंपावत जिले के प्राथमिक विद्यालय च्यूरानी की प्रधानाध्यापिका डॉ. मंजूबाला – को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया।

इस प्रतिष्ठित सम्मान के अंतर्गत चयनित शिक्षकों को सम्मान-पत्र, मेडल और 50,000 रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है।

राष्ट्रपति का संदेश

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा,
“हमारी परंपरा ‘आचार्य देवो भव’ शिक्षक को सर्वोच्च स्थान देती है। शिक्षा भोजन, वस्त्र और आवास की तरह ही मानव गरिमा और सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। शिक्षक का सबसे बड़ा पुरस्कार यही है कि विद्यार्थी जीवनभर उन्हें याद रखें और समाज तथा राष्ट्र के लिए योगदान दें।”

डॉ. मंजूबाला: शिक्षा में नवाचार और त्रिभाषा पद्धति


57 वर्षीय डॉ. मंजूबाला वर्ष 2005 से प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वे बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी और कुमाऊँनी तीन भाषाओं में पढ़ाती हैं। इस त्रिभाषा पद्धति ने बच्चों के लिए शिक्षा को सरल और आनंददायक बना दिया है।
  • वे केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यार्थियों को भी अंग्रेजी पढ़ाती हैं।

  • विद्यालय समय के बाद इवनिंग क्लासेस चलाकर कमजोर बच्चों को अतिरिक्त सहयोग देती हैं।

  • स्काउट एवं गाइड गतिविधियों में भी सक्रिय योगदान देती हैं।

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में जिस त्रिभाषा पद्धति को प्रोत्साहित किया जा रहा है, उसका जीवंत उदाहरण डॉ. मंजूबाला का कार्य है।

मनीष ममगाई: युवाओं को कौशल और रोजगार से जोड़ने का कार्य

NSTI देहरादून में ट्रेनिंग ऑफिसर मनीष ममगाई ने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

  • उन्होंने युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के लिए कई नवाचारी पहलें कीं।

  • कौशल प्रशिक्षण के जरिए नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उनका काम सराहनीय है।

  • वे इंडस्ट्री और शिक्षा जगत के बीच सेतु का कार्य कर रहे हैं, ताकि छात्र केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें बल्कि बेहतर रोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकें।

उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण

डॉ. मंजूबाला और मनीष ममगाई की उपलब्धि उत्तराखंड की शिक्षा और कौशल विकास व्यवस्था के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण है। यह सम्मान न केवल इन दोनों शिक्षकों के व्यक्तिगत समर्पण का परिणाम है, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रहे सकारात्मक बदलावों का भी प्रतीक है। यह सम्मान इस बात का संदेश देता है कि शिक्षा और कौशल विकास में नवाचार, समर्पण और सेवा भाव से कार्य करने वाले शिक्षक ही राष्ट्र निर्माण की सच्ची नींव हैं।

अब स्कूलों में 240 दिन चलेंगी कक्षाएं – नई रूपरेखा को मिली मंजूरी

 

उत्तराखंड के विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रदेश के सभी स्कूलों में कुल 240 दिन नियमित कक्षाएं संचालित होंगी, जबकि परीक्षा संचालन के लिए 20 कार्यदिवस अलग से निर्धारित किए गए हैं इस तरह पूरे शैक्षिक वर्ष में विद्यार्थियों को और अधिक समय अध्ययन एवं सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियों के लिए मिलेगा।

पाठ्यचर्या की रूपरेखा को मिली मंजूरी

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार की गई नई पाठ्यचर्या की रूपरेखा को टास्क फोर्स ने मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत प्रति सप्ताह 32 घंटे का शैक्षिक समय तय किया गया है। साथ ही, सहशैक्षिक गतिविधियों और परीक्षा रहित दिनों के लिए 10–10 दिन आरक्षित रखे गए हैं।

NEP-2020 की सिफारिशों पर आधारित

नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों पर आधारित है। नीति के तहत देशभर में कुल 297 टास्क फोर्स बनाए गए, जिनमें से 202 टास्क फोर्स राज्यों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर गठित किए गए। इसी क्रम में उत्तराखंड ने भी अपनी रिपोर्ट और सुझाव केंद्र सरकार को भेजे हैं।

शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान

नई पाठ्यचर्या की रूपरेखा में आधारित शिक्षा, पर्यावरणीय संरक्षण, स्वावलंबन, मूल्यपरक शिक्षा, खेलकूद, कला, और डिजिटल दक्षता जैसे विषयों को विशेष महत्व दिया गया है।
इसके अलावा –

  • पाठ्यपुस्तकों का चयन,

  • शिक्षा शास्त्र और मूल्यांकन,

  • विषयवार दिशा-निर्देश भी शामिल किए गए हैं।

स्कूलों के लिए चौथा और पाँचवाँ आयाम

रूपरेखा में विद्यालयी शिक्षा के लिए चौथे और पाँचवें आयाम भी जोड़े गए हैं। इनमें विद्यालयी शिक्षा तंत्र की क्षमता वृद्धि, सेवा-शर्तें, शिक्षकों की भूमिका, परिवार और समुदाय की सहभागिता को विशेष रूप से शामिल किया गया है।

उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक

इस रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव शिक्षा रविनाथ रमन, सचिव संस्कृति युगल किशोर पंत, अपर सचिव उच्च शिक्षा ममगाईं, निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौली, निदेशक प्राथमिक शिक्षा रमेश सिंह बोरा, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बन्‍दना गार्ब्याल, अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी, आप्त परियोजना निदेशक डॉ. के.एन. बिजलवाण सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

शिक्षा में सुधार की दिशा में नया कदम

नई व्यवस्था को शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। कक्षाओं की संख्या बढ़ने और शिक्षण समय में वृद्धि से विद्यार्थियों को न केवल पाठ्यक्रम की गहराई से समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा, बल्कि खेल, कला और अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। यह बदलाव प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला साबित हो सकता है और अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करेगा।