Friday, March 20, 2026

SRG Workshop SCERT: अनुभव आधारित गणित शिक्षण—डर से रुचि तक का सफर

गणित को अक्सर एक कठिन और डरावने विषय के रूप में देखा जाता है, लेकिन यदि इसे जीवन से जोड़ा जाए तो यही विषय सबसे रोचक और उपयोगी बन सकता है। इसी विचार को केंद्र में रखते हुए एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड द्वारा आयोजित गणित विषय की राज्य संसाधन समूह प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल समापन हुआ।

कार्यशाला के समापन सत्र में निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल  ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि गणित शिक्षण को बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। जब बच्चे अपने आसपास की चीजों—जैसे बाजार, समय, दूरी, खेल—में गणित को पहचानते हैं, तो उनकी रुचि स्वाभाविक रूप से बढ़ती है और गणित का भय धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।

अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गणित शिक्षण में 21वीं सदी के कौशल—जैसे समस्या समाधान, तार्किक चिंतन और विश्लेषणात्मक क्षमता—का समावेश अनिवार्य है।

सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानंद बिजलवाण ने इस बात पर जोर दिया कि जब बच्चों की गणितीय अवधारणाएं स्पष्ट होती हैं, तब वे वास्तविक जीवन में गणित का प्रभावी उपयोग कर पाते हैं। यह समझ ही उन्हें आत्मविश्वासी बनाती है।

कार्यशाला के समन्वयक डॉ. मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि इस प्रशिक्षण में कुल 40 शिक्षकों ने भाग लिया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रत्येक डायट (DIET) में जिला संसाधन समूह गठित किए गए हैं, जो स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार गणित शिक्षण में नवाचार और सुधार के लिए कार्य कर रहे हैं। कार्यशाला के दौरान सभी डायट्स द्वारा किए गए नवाचारी प्रयासों को साझा किया गया, जिससे शिक्षकों को एक-दूसरे से सीखने का अवसर मिला।

विशेषज्ञ सत्रों में डॉ. अंजुलि सुहाने (स्कूल ऑफ एजुकेशन, इग्नू, नई दिल्ली) ने गणित शिक्षण में ICT के उपयोग पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. अश्विनी गर्ग (आर.आई.ई. भोपाल) ने विभिन्न शिक्षण विधियों और खेल आधारित शिक्षण को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।

चंदन सिंह घुघत्याल (दून स्कूल) ने गणित में नवाचारी आकलन की गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को नई दिशा दी। इसके अतिरिक्त, डॉ. सुनील बजाज (एस.सी.ई.आर.टी. हरियाणा) ने शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में गणित में 21वीं सदी के कौशलों के समावेश पर विस्तृत चर्चा की।

यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि गणित शिक्षण को नया दृष्टिकोण देने का एक सशक्त प्रयास थी। अनुभव आधारित, गतिविधि आधारित और तकनीकी समावेशन के माध्यम से गणित को सरल, रोचक और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है।