Friday, September 25, 2026

Hackathon 2.0 से Global AI Hackathon तक: विवेकानंद इंटर कॉलेज के मयंक की नवाचार यात्रा

दक्षिण अफ्रीका में आयोजित Global AI Hackathon में 23वीं Global Rank, SCERT Uttarakhand के Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 से मिली थी नवाचार को नई दिशा

अल्मोड़ा/देहरादून। उत्तराखण्ड के एक स्कूली विद्यार्थी की नवाचार यात्रा अब वैश्विक मंच तक पहुँच चुकी है। विवेकानंद इंटर कॉलेज, रानीधारा, अल्मोड़ा के कक्षा 12 के छात्र मयंक बिष्ट ने दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित प्रतिष्ठित UPSUMMIT Global AI Hackathon 2026 के High School Track में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व स्तर पर 23वीं रैंक हासिल की।

समाचार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 19 से 22 जून के बीच आयोजित इस प्रतियोगिता में 85 से अधिक देशों की 25,000 से ज्यादा टीमों ने भाग लिया। मयंक ने प्रतियोगिता में 100 में से 98 अंक प्राप्त करते हुए Global Rank 23 हासिल की। उन्होंने Applied Solutions के साथ Systems Engineering Interview भी सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे उन्हें Practical Tech Experience प्राप्त हुआ।

इस वैश्विक उपलब्धि की मजबूत नींव बना Hackathon 2.0

मयंक की इस उपलब्धि को केवल एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की सफलता के रूप में नहीं, बल्कि विद्यालय स्तर पर नवाचार को पहचानने, प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ाने की एक सतत यात्रा के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

इस यात्रा में SCERT Uttarakhand द्वारा आयोजित Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मयंक इससे पहले Hackathon 2.0 में प्रतिभाग करते हुए 2,800 से अधिक प्रतिभागियों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं। इस मंच ने उनके विचारों और तकनीकी प्रतिभा को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने के साथ उन्हें अपने innovation को आगे विकसित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया।

यही कारण है कि Hackathon 2.0 को मयंक की आगे की उपलब्धियों के लिए एक महत्वपूर्ण launchpad के रूप में देखा जा सकता है—जहाँ विद्यालय के एक विद्यार्थी के innovative idea को पहचान, मंच और आगे बढ़ने का अवसर मिला।

AI, IoT और Robotics में आगे बढ़ता नवाचार

मयंक का लक्ष्य Microelectronics, Artificial Intelligence (AI), Internet of Things (IoT) और Robotics जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए सामाजिक एवं ग्रामीण समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।

विद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता दीपक सिंह मेहता के मार्गदर्शन में वे विज्ञान, AI और Robotics के क्षेत्र में लगातार प्रयोग एवं नवाचार कर रहे हैं।

उनकी यात्रा राज्य स्तर तक सीमित नहीं रही। समाचार के अनुसार मयंक ने Indian Institute of Science (IISc), Bengaluru में आयोजित ArtPark Robotics–AI Edition के National Round में भी उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया है।

स्थानीय समस्या से Global Platform तक

मयंक की उपलब्धि Innovate Uttarakhand जैसी पहल के मूल उद्देश्य को भी रेखांकित करती है—विद्यालयों के विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रखते हुए उनमें problem solving, innovation, design thinking, AI, coding और entrepreneurship की सोच विकसित करना।

एक विद्यार्थी का स्कूल से अपने विचार पर काम शुरू करना, Hackathon 2.0 में राज्य स्तर पर विजेता बनना, राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रोजेक्ट को प्रस्तुत करना और फिर Global AI Hackathon में विश्व की हजारों टीमों के बीच स्थान बनाना यह दर्शाता है कि सही mentoring, institutional support और innovation ecosystem मिलने पर उत्तराखण्ड के विद्यार्थी वैश्विक मंच तक पहुँच सकते हैं।

Hackathon से Startup और Global Innovation की ओर

मयंक की यात्रा अब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि Hackathon 2.0 में मिली शुरुआती पहचान के बाद वे अपने विचारों को लगातार नए मंचों पर ले जा रहे हैं। यह उपलब्धि दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी संदेश है कि Hackathon केवल पुरस्कार जीतने की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि किसी विचार को prototype, project और आगे चलकर संभावित startup अथवा वास्तविक समाधान में बदलने की शुरुआत हो सकता है।

SCERT Uttarakhand की Innovate Uttarakhand Hackathon पहल इसी सोच को मजबूत करती है—विद्यालयों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें विशेषज्ञों एवं mentors से जोड़ना और उनके innovative ideas को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना।

मयंक की Global Rank 23 की उपलब्धि इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि उत्तराखण्ड के विद्यालय से शुरू हुआ एक innovation, सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास के साथ राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक अपनी पहचान बना सकता है।

SCERT Uttarakhand एवं Innovate Uttarakhand परिवार की ओर से मयंक बिष्ट, उनके मार्गदर्शक शिक्षक, विद्यालय एवं परिवार को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।

पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफल समापन

कौशल बोध के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा में ‘जानने से करने’ की ओर बढ़ते कदम

देहरादून। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), NCERT, भोपाल के सहयोग से “Capacity Building of Teachers for Implementation of Vocational Education at the Middle Stage as per NEP 2020 and NCF-SE 2023” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 35 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 की भावना के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को अनुभवात्मक, गतिविधि एवं कार्य-आधारित अधिगम से जोड़ते हुए शिक्षकों को ‘कौशल बोध’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयार करना था।

‘Knowing’ से ‘Doing’ की ओर

पाँच दिवसीय प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा केवल जानने (Knowing) तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को करने (Doing), अनुभव करने (Experiencing), समस्या पहचानने (Problem Identification), समाधान खोजने (Problem Solving) और सृजन करने (Creating) के अवसर भी मिले।

प्रतिभागियों ने Learning by Doing, Project-Based Learning, स्थानीय संसाधनों एवं समुदाय के उपयोग तथा कार्य-आधारित गतिविधियों को हैंड्स-ऑन अनुभवों के माध्यम से समझा। विद्यार्थियों के मूल्यांकन में केवल लिखित परीक्षा के बजाय उनके कार्य, सहभागिता, प्रक्रिया, कौशल और तैयार उत्पाद को भी महत्व देने पर चर्चा की गई।

उद्यमशील मानसिकता और 21वीं सदी के कौशल

कार्यशाला में Entrepreneurial Mindset पर विशेष गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इनमें समस्या एवं आवश्यकता की पहचान, नवाचार, उत्पाद अथवा सेवा की उपयोगिता, USP (Unique Selling Proposition), ग्राहक की आवश्यकता, Seller–Buyer संवाद, Communication, Presentation और Branding जैसी अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझाया गया।

प्रतिभागियों ने स्वयं Seller और Customer की भूमिका निभाकर अनुभव किया कि किसी विचार को उपयोगी उत्पाद या सेवा में बदलने के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ Communication, Collaboration, Critical Thinking, Creativity और Problem Solving जैसे कौशल भी आवश्यक हैं।

Bagless Days और Hub & Spoke Model पर विशेष चर्चा

अंतिम दिवस पर प्रो. डॉ. आशीष सोनी ने कौशल बोध के अंतर्गत व्यावसायिक विषयों को Core Curriculum से जोड़ने के साथ Bagless Days तथा Hub & Spoke Model के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।

विशेष रूप से 10 Bagless Days को केवल विद्यालय से बाहर भ्रमण तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों को स्थानीय व्यवसायों, कारीगरों, कृषि, सेवा क्षेत्र और समुदाय के वास्तविक कार्य-जगत से परिचित कराने के अवसर के रूप में विकसित करने पर बल दिया गया।

विद्यालयों के लिए तैयार किए Action Plans

पाँच दिनों के अधिगम को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने के लिए प्रतिभागियों ने अपने-अपने विद्यालयों में कौशल बोध एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्रियान्वयन हेतु Action Plans प्रस्तुत किए। साथ ही Post-test एवं Feedback के माध्यम से प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन किया गया।

प्रतिभागियों ने Hands-on Activities, Exposure Visit, Learning by Doing तथा उद्यमशील मानसिकता से जुड़ी गतिविधियों को विशेष रूप से उपयोगी बताया।

प्रशिक्षण का लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचे — पद्मेंद्र सकलानी

समापन सत्र में अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड  पद्मेंद्र सकलानी ने प्रतिभागियों से कहा कि पाँच दिनों में प्राप्त अनुभवों को प्रशिक्षण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें विद्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुँचाया जाए। बच्चों को अपने हाथों से कार्य करने, स्थानीय कौशलों को समझने, वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने तथा नवाचार करने के अधिकाधिक अवसर दिए जाएँ।

इस अवसर पर डॉ. के. एन. बिजल्वान सहित SCERT के अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वयन के लिए कार्यक्रम समन्वयक  सुनील भट्ट के प्रयासों की सराहना की गई। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

ज्ञान और कौशल का समन्वय ही भविष्य की शिक्षा

पाँच दिवसीय कार्यशाला ने इस विचार को और मजबूत किया कि भविष्य की शिक्षा में ज्ञान और कौशल अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। विद्यार्थी गणित, विज्ञान और भाषा का ज्ञान प्राप्त करे, लेकिन साथ ही उस ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने, समाधान खोजने, टीम के साथ कार्य करने और कुछ नया सृजित करने में भी कर सके।

Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 विजेता Mayank की Team “Champians” UptoSkills Startupthon के National Top-12 में

ल से स्टार्टअप की ओर

Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 विजेता Mayank की Team “Champians” UptoSkills Startupthon के National Top-12 में

उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा से निकला नवाचार अब राष्ट्रीय Startup मंच पर

देहरादून, 25 सितम्बर 2026। उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा में नवाचार, रचनात्मकता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक उत्साहजनक उपलब्धि सामने आई है। SCERT Uttarakhand द्वारा आयोजित Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 के विद्यार्थी वर्ग के विजेता Mayank की Team “Champians” का चयन UptoSkills Startupthon Grand Finale की National Top-12 Teams में हुआ है।

UptoSkills द्वारा 25 सितम्बर 2026 को जारी आधिकारिक ई-मेल में Mayank और उनकी टीम को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए Top-12 में चयन तथा Startupthon Grand Finale में प्रतिभाग करने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।

यह उपलब्धि Mayank की व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ School Education Uttarakhand और Innovate Uttarakhand Hackathon की एक महत्वपूर्ण Success Story है।

🏆 Hackathon 2.0 से National Startup Grand Finale तक

Mayank की innovation journey Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 में विशेष रूप से सामने आई थी। अपने innovative project, working model और problem-solving approach के आधार पर उन्होंने विद्यार्थी वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

Hackathon ने उन्हें अपने विचार को केवल एक school project तक सीमित रखने के बजाय उसे विकसित करने, prototype तैयार करने और उसकी practical applicability को समझने का अवसर प्रदान किया। अब Team Champians का राष्ट्रीय स्तर के Startupthon Grand Finale तक पहुँचना इस बात का उदाहरण है कि विद्यालयी स्तर का एक innovative idea सही दिशा, mentorship और निरंतर प्रयास से आगे चलकर एक संभावित Startup का स्वरूप ले सकता है।

School Student → Innovative Idea → Hackathon Winner
→ Working Prototype → National Top-12 → Startup Opportunity → Young Entrepreneur

Mayank द्वारा SCERT Uttarakhand के साथ साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 3,000 university-level teams ने प्रतिभाग किया और विभिन्न screening stages के बाद केवल Top-12 Teams को Grand Finale के लिए चुना गया।

Mayank अभी अपनी माध्यमिक स्तर की स्कूली शिक्षा पूर्ण कर रहे हैं। उनके द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, मात्र 17 वर्ष की आयु में high-school track से इस स्तर तक पहुँचना उनकी उपलब्धि को और भी विशेष बनाता है।

🚀 Investors और Industry Professionals के सामने प्रस्तुत होगा Innovation

Startupthon Grand Finale का आयोजन Nawalgarh, Rajasthan में Offline Mode में किया जा रहा है और चयनित प्रतिभागियों को 1 October 2026 तक Nawalgarh पहुँचने के लिए आमंत्रित किया गया है।

Grand Finale में Team Champians को अपने innovative business idea को investors तथा industry professionals के सामने in-person pitch करने का अवसर मिलेगा। यह अनुभव उन्हें अपने prototype की market feasibility समझने, professional feedback प्राप्त करने, networking विकसित करने तथा भविष्य में incubation और investment possibilities तलाशने का अवसर प्रदान कर सकता है।

💡 Startup और Funding की संभावनाएँ

Startupthon से संबंधित साझा जानकारी में चयनित innovations के लिए ₹1 करोड़ तक की valuation पर funding opportunities, expert mentorship, industry interaction तथा startup ecosystem से जुड़ने जैसी संभावनाएँ बताई गई हैं। यह guaranteed funding नहीं, बल्कि चयनित ideas के लिए उपलब्ध संभावित funding/investment opportunity है।

🎓 विद्यालय में पढ़ते हुए Entrepreneurship की ओर कदम

Mayank की उपलब्धि का सबसे प्रेरक पक्ष यह है कि वे अभी भी School Education System के अंतर्गत अपनी माध्यमिक शिक्षा पूर्ण कर रहे हैं।

जिस उम्र में अधिकांश विद्यार्थी अपने भविष्य के career options को समझने की शुरुआत करते हैं, उसी अवस्था में Mayank ने problem identification, innovation, prototype development और national-level startup pitching तक की यात्रा शुरू कर दी है।

विद्यालयी अवस्था में प्राप्त Design Thinking, Teamwork, Prototype Development, Communication, Business Pitching और Entrepreneurship का यह वास्तविक अनुभव Mayank के भावी शैक्षिक एवं व्यावसायिक जीवन के निर्माण में एक महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकता है।

💡 Innovate Uttarakhand के उद्देश्य का वास्तविक परिणाम

SCERT Uttarakhand द्वारा Innovate Uttarakhand Hackathon की परिकल्पना विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में innovation mindset, creativity, critical thinking, problem-solving तथा technology-based solutions विकसित करने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।

Mayank की उपलब्धि इस पहल के प्रभाव का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है। Hackathon में प्रस्तुत project पुरस्कार के साथ समाप्त नहीं हुआ, बल्कि विद्यार्थी ने उसे आगे विकसित किया और आज वही innovation राष्ट्रीय Startup Ecosystem तक पहुँच रहा है।

IDEA TO STARTUP

Idea → Prototype → Mentorship → Incubation → Startup → Entrepreneurship

🌱 Hackathon 3.0 के प्रतिभागियों के लिए प्रेरक उदाहरण

Mayank की सफलता वर्तमान Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में भाग लेने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों, mentors और supervisors के लिए भी एक जीवंत प्रेरक उदाहरण है।

उनकी journey यह संदेश देती है कि Hackathon में project प्रस्तुत करना अथवा पुरस्कार प्राप्त करना यात्रा का अंतिम पड़ाव नहीं है। विद्यार्थी अपने idea को लगातार refine करके, feedback लेकर और उसकी real-world applicability को समझकर उसे आगे product, scalable solution अथवा startup में बदलने की दिशा में बढ़ सकते हैं।

🌟 School Education Uttarakhand एवं SCERT की ओर से शुभकामना संदेश

बंदना गर्गयाल
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड

“Mayank और Team Champians का National Top-12 में चयन उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा के लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। विद्यालय स्तर पर विकसित innovation का national startup platform तक पहुँचना हमारे विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता और संभावनाओं को दर्शाता है। Mayank अभी अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर रहे हैं और इतनी कम उम्र में innovation एवं entrepreneurship की दिशा में प्राप्त यह अनुभव उनके भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्हें Startupthon Grand Finale एवं भावी entrepreneurial journey के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।”

पदमेंद्र सकलानी
अपर निदेशक, SCERT Uttarakhand

“Innovate Uttarakhand का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अपने ideas प्रस्तुत करने का मंच देना नहीं, बल्कि उनमें समस्या-समाधान, नवाचार और भविष्य के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना भी है। Hackathon 2.0 के विजेता Mayank का अपने prototype के साथ राष्ट्रीय स्तर के Startupthon Grand Finale तक पहुँचना इस पहल का उत्साहजनक परिणाम है। SCERT Uttarakhand उनकी इस उपलब्धि पर बधाई देता है तथा भविष्य में उनके innovation को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक अकादमिक मार्गदर्शन एवं यथासंभव सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर रहेगा।”

रमेश प्रसाद बडोनी
Hackathon Coordinator एवं प्रवक्ता, IT विभाग, SCERT Uttarakhand

“Mayank की यात्रा हमारे लिए विशेष है क्योंकि हमने एक विद्यार्थी के idea को Hackathon में आते, विकसित होते, विजेता बनते और अब Startup की दिशा में आगे बढ़ते देखा है। यही Innovate Uttarakhand की मूल परिकल्पना है—स्कूल के विद्यार्थियों को innovators, problem-solvers और future entrepreneurs बनने का अवसर देना। Mayank की उपलब्धि Hackathon 3.0 के प्रतिभागियों के लिए भी प्रेरक उदाहरण बनेगी। हमारी शुभकामना है कि वे अपने prototype को आगे एक सफल एवं उपयोगी startup में परिवर्तित करें तथा उत्तराखण्ड का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय innovation platforms पर आगे बढ़ाएँ।”

🤝 School Education Uttarakhand का सहयोग रहेगा जारी

School Education Uttarakhand एवं SCERT Uttarakhand परिवार Mayank और Team Champians को UptoSkills Startupthon Grand Finale के National Top-12 में चयनित होने पर हार्दिक बधाई देता है।

SCERT Uttarakhand उनके innovation और Hackathon 2.0 से आगे बढ़ी entrepreneurial journey की सराहना करते हुए भविष्य में उनके innovation को आगे विकसित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, academic mentoring एवं यथासंभव संस्थागत सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर रहेगा।

“स्कूल में जन्मा एक विचार,
सही अवसर और निरंतर प्रयास से Startup में बदल सकता है।”
Hackathon से Startup तक,
Student से Innovator तक,
और Innovator से Entrepreneur तक—

Mayank की यह यात्रा उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा में Innovation एवं Entrepreneurship के लिए एक नई राह प्रशस्त करे।

🎉 Congratulations Mayank & Team Champians! 🎉

From Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 to the National Startup Stage
A Proud Success Story of School Education Uttarakhand
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Thursday, September 24, 2026

कक्षा से खेत तक, जानने से करने तक — अनुभवात्मक अधिगम का एक सार्थक दिवस

 

Capacity Building | Exposure Visit | Hands-on Session | Learning by Doing

देहरादून, 24 सितम्बर 2026।

व्यावसायिक शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किसी कौशल के बारे में जानना नहीं, बल्कि उसे देखना, समझना, स्वयं करके अनुभव करना और जीवन एवं आजीविका से जोड़ना है। इसी भावना को साकार करते हुए कार्यशाला का चतुर्थ दिवस पूर्णतः अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning), Exposure Visit, Hands-on Learning तथा Learning by Doing को समर्पित रहा।

कृषि विज्ञान केंद्र में व्यावहारिक अधिगम

कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागी शिक्षकों के दल ने पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), भोपाल के प्रोफेसर डॉ. आशीष सोनी के नेतृत्व में कृषि विज्ञान केंद्र, हर्बर्टपुर-विकासनगर, देहरादून का शैक्षिक भ्रमण किया।

यह भ्रमण विशेष रूप से ‘कौशल बोध’ में निहित Life Forms/जीवन रूप से संबंधित गतिविधियों को वास्तविक कार्य-परिस्थितियों में समझने का अवसर बना। प्रतिभागियों ने किचन गार्डन, बागवानी, पशुपालन, मुर्गी पालन तथा मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को केवल सैद्धांतिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल एवं आजीविका के अवसरों के रूप में समझा।

कृषि विज्ञान केंद्र के विषय विशेषज्ञों डॉ. शर्मा, डॉ. सिंह एवं डॉ. राठी ने संबंधित क्षेत्रों के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पक्षों की विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद प्रतिभागियों ने फार्म का भ्रमण कर विभिन्न गतिविधियों और प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखा तथा विशेषज्ञों से संवाद किया।

इस अनुभव ने “जानने से करने तक” की अवधारणा को वास्तविक अर्थों में जीवंत कर दिया।

खेत से उद्यमिता तक — सीखने का दूसरा पड़ाव

कृषि विज्ञान केंद्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के बाद शिक्षकों का दल काया लर्निंग सेंटर, तिलबाड़ी पहुँचा। यहां सीखने का दायरा कृषि एवं उत्पादन से आगे बढ़कर उद्यमिता, स्थानीय संसाधनों, आतिथ्य और स्वरोजगार से जुड़ गया।

यहां दो उद्यमशील महिलाओं मंजू कुमाईं एवं सुरेशी पवार द्वारा उत्तराखंड के ग्रामीण परिवेश और स्थानीय संस्कृति की थीम पर आधारित एक सुंदर होम-स्टे एवं आतिथ्य केंद्र संचालित किया जा रहा है।

इन दोनों महिलाओं की उद्यमशील यात्रा प्रतिभागियों के लिए प्रेरणादायक रही। स्थानीय परिवेश, उपलब्ध संसाधनों और अपनी क्षमताओं को पहचानकर उन्होंने जिस प्रकार इस केंद्र को विकसित किया है, वह इस बात का सशक्त उदाहरण है कि उद्यमिता केवल बड़े निवेश से नहीं, बल्कि पहल, आत्मविश्वास, नवाचार, स्थानीय अवसरों की पहचान और निरंतर प्रयास से विकसित होती है।

यह केंद्र Hospitality एवं Human Services के क्षेत्र में कौशल और उद्यमिता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। प्रतिभागियों ने यहां समझा कि स्थानीय संस्कृति, खान-पान, प्राकृतिक परिवेश और पारंपरिक जीवनशैली को भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों में परिवर्तित किया जा सकता है।

स्थानीय संसाधनों को शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता

इस Exposure Visit का एक महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा को केवल विभिन्न व्यवसायों की जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

विद्यार्थियों को अपने आसपास उपलब्ध स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय व्यवसायों और समुदाय में उपस्थित सफल उद्यमियों से जोड़ना आवश्यक है। इससे उनमें अवसरों को पहचानने, समस्या का समाधान खोजने, स्वयं पहल करने, सहयोग से कार्य करने तथा कुछ नया सृजित करने की सोच विकसित की जा सकती है।

व्यावसायिक शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब विद्यार्थी यह अनुभव कर सकें कि उनके आसपास उपलब्ध संसाधन, ज्ञान और कौशल भी उनके भविष्य की शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता का आधार बन सकते हैं।

सीख — See → Understand → Do → Reflect → Create

आज का पूरा दिन अनुभवात्मक अधिगम की इस प्रक्रिया को चरितार्थ करता रहा—

देखो → समझो → स्वयं करो → अनुभव पर चिंतन करो → नया सृजन करो

“कौशल केवल पढ़ाया नहीं जाता,
उसे करके सीखा जाता है;
और उद्यमिता केवल समझाई नहीं जाती,
उसे अवसरों को पहचानकर जीया जाता है।”

कुल मिलाकर कार्यशाला का चतुर्थ दिवस Capacity Building, Exposure Visit, Hands-on Experience और Learning by Doing का उत्कृष्ट समन्वय रहा। खेत, फार्म, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन से लेकर स्थानीय उद्यमिता एवं हॉस्पिटैलिटी तक की यह यात्रा प्रतिभागी शिक्षकों के लिए एक समृद्ध अनुभवात्मक अधिगम यात्रा सिद्ध हुई।

इस दिवस ने कार्यशाला के उद्देश्यों को व्यावहारिक धरातल पर उतारते हुए इस मूल विचार को और मजबूत किया कि—

“बच्चों को कौशल से जोड़ना है तो कक्षा को जीवन से,
सीखने को करने से और शिक्षा को स्थानीय परिवेश एवं आजीविका से जोड़ना होगा।”

इस प्रकार कार्यशाला का चतुर्थ दिवस ‘कक्षा से खेत तक और जानने से करने तक’ की यात्रा के रूप में व्यावसायिक शिक्षा की वास्तविक भावना को प्रतिबिंबित करता रहा।

Wednesday, September 23, 2026

SCERT Uttarakhand and Kotak Education Foundation Sign MoU to Strengthen Digital and AI-Enabled Education

 

Collaboration to focus on online course development, technical support, teacher capacity building, student innovation and future-ready learning

Dehradun, 24 September 2026:
In a significant step towards strengthening digital education and technology-enabled learning in Uttarakhand, the State Council of Educational Research and Training (SCERT), Uttarakhand, and the Kotak Education Foundation (KEF) signed a Memorandum of Understanding (MoU) today.

The collaboration aims to bring together the academic expertise of SCERT Uttarakhand and the technical and educational support of Kotak Education Foundation for the development, implementation and dissemination of online courses for teachers and students across the state.

The MoU ceremony was attended by Jayasree Ramesh, COO, Kotak Education Foundation; Bandana Garbyal, Director, Academic Research & Training; Vinod Mathura, Deputy Director, SCERT Uttarakhand; Dr. K. N. Bijalwan, Assistant Director, SCERT; Ramesh Prasad Badoni from the IT Department, SCERT; and Milan Pandey and Deepak Pathak from Kotak Education Foundation.

Collaboration for Online Courses and Digital Learning

The primary focus of the MoU is to establish a collaborative framework between SCERT Uttarakhand, particularly its IT Department, and Kotak Education Foundation for developing high-quality online learning opportunities.

Under the collaboration, both organisations will work together in areas such as content development, online course design and development, technical support, course implementation and dissemination.

As Additional Director Padmendra Saklani officially approved the collaboration and forwarded his message as the courses developed through this partnership are expected to be disseminated through appropriate digital learning platforms such as DIKSHA, UK e-Srijan and Mission Karmayogi, enabling teachers and learners to access structured digital learning opportunities.

The initiative will also explore the integration of Artificial Intelligence, emerging technologies and modern digital pedagogies into future courses. The larger objective is to support teachers in effectively integrating technology into classroom practices while creating engaging and meaningful learning opportunities for students.

Rather than focusing only on technology as a tool, the collaboration seeks to use technology to strengthen the teaching-learning process, teacher professional development and quality education across Uttarakhand.

Support for Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0

During the interaction, Jaishree Ramesh, COO of Kotak Education Foundation, also discussed opportunities for extending support to the ongoing Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0.

She announced KEF's intention to support the initiative, including providing awards to the winners of Hackathon 3.0. The Foundation also expressed its willingness to contribute expertise during different stages of the hackathon through reviewers and jury members and to provide further support to promising student innovators.

A particularly important area discussed was supporting selected students in taking their ideas beyond the ideation stage. KEF proposed helping students develop their innovative ideas towards prototype design and further refinement, wherever feasible. Such support could help bridge the gap between an innovative idea and its transformation into a practical solution.

Opportunities in Girls' Education, FLN and English Communication

The meeting also provided an opportunity to discuss several other potential areas of future collaboration.

Kotak Education Foundation presented proposals relating to scholarships for girls' education, Foundational Literacy and Numeracy (FLN), English communication and English language courses that could potentially be implemented in Uttarakhand in collaboration with the state education system. These areas were discussed with the officials and academic members of SCERT and Secondary Education as possible avenues for further cooperation.

The initial MoU, however, primarily establishes cooperation in the area of online course development and associated technical support, while these additional areas may provide opportunities for expanding the partnership in the future.

Preparing Teachers and Students for the AI Era

The partnership assumes particular significance at a time when digital learning is rapidly moving beyond conventional e-content.

With artificial intelligence increasingly influencing education, teachers and students need opportunities to develop the skills required to use new technologies effectively, responsibly and meaningfully.

Through collaborative online course development, the initiative is expected to explore future-ready learning models in which AI and digital technologies complement teachers rather than merely automate educational processes.

The partnership therefore has the potential to contribute not only to digital course development but also to broader efforts aimed at teacher capacity building, student learning, innovation and quality improvement in education.

Director Academic Welcomes the Partnership

On the occasion, Bandana Garbyal, Director, congratulated Jayasree Ramesh and the Kotak Education Foundation team and welcomed their support for strengthening educational initiatives in Uttarakhand. She expressed the expectation that the partnership would lead to meaningful collaboration in areas where the Foundation's expertise and resources could complement SCERT's academic and digital education initiatives. The interaction reflected a shared interest in developing a sustainable partnership that can respond to emerging educational needs while creating greater opportunities for teachers and students.

The signing of the MoU marks the beginning of a structured partnership between SCERT Uttarakhand and Kotak Education Foundation, with online courses and technical collaboration forming its immediate focus. At the same time, discussions around Hackathon 3.0, student innovation, girls' education, FLN, English communication and emerging technologies have opened possibilities for wider collaboration in the future. The partnership represents an important effort to bring together academic expertise, technology, innovation and institutional collaboration to develop accessible and future-ready learning opportunities.

With a growing emphasis on AI-enabled education and digital professional development, the initiative is expected to support Uttarakhand's efforts towards creating a more innovative, inclusive and quality-oriented education ecosystem for teachers and students.

व्यावसायिक शिक्षा एवं ‘कौशल बोध’ पर पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला

 

उद्यमशील सोच, आकलन, करियर जागरूकता और स्थानीय कौशल पर केंद्रित रहे सत्र

देहरादून, 23 सितम्बर 2026।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड में पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), भोपाल के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ‘कौशल बोध’ के संचालन हेतु आयोजित पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला के अंतर्गत मंगलवार को विभिन्न अकादमिक, व्यावहारिक एवं गतिविधि-आधारित सत्र आयोजित किए गए।

कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों एवं संदर्भदाताओं को इस प्रकार तैयार करना है कि वे व्यावसायिक शिक्षा को केवल व्यवसायों की जानकारी तक सीमित न रखते हुए उसे करके सीखने (Learning by Doing), परियोजना-आधारित अधिगम, स्थानीय संसाधनों, कार्य-जगत, उद्यमशीलता तथा भविष्य के कौशलों से जोड़ सकें।

विद्यार्थियों के आकलन एवं मूल्यांकन पर विशेष सत्र

कार्यशाला के प्रथम सत्र में PSSCIVE, भोपाल के प्रो. (डॉ.) रवि आहूजा द्वारा ‘कौशल बोध’ के अंतर्गत विद्यार्थियों के आकलन एवं मूल्यांकन पर विस्तार से चर्चा की गई।

उन्होंने बताया कि व्यावसायिक शिक्षा में मूल्यांकन केवल विद्यार्थियों के सैद्धांतिक ज्ञान पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके व्यावहारिक कौशल, सहभागिता, कार्य-प्रक्रिया, समस्या समाधान क्षमता तथा सीखने के प्रतिफलों को भी समुचित महत्व दिया जाना चाहिए।

विभिन्न गतिविधियों एवं प्रदर्शनों के माध्यम से प्रतिभागियों को कौशल-आधारित आकलन की तकनीकों और व्यावहारिक मूल्यांकन की विधियों से परिचित कराया गया।

उद्यमशील मानसिकता और बाजार की समझ

द्वितीय सत्र में SCERT उत्तराखंड के सुनील भट्ट द्वारा ‘उद्यमशील मानसिकता एवं उद्यमशील सोच’ विषय पर गतिविधि-आधारित सत्र संचालित किया गया।

इस दौरान प्रतिभागियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किसी उत्पाद अथवा सेवा की विशेषताओं और उपयोगिता को प्रभावी ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जाए तथा बाजार में उसकी पहचान एवं ब्रांडिंग किस प्रकार विकसित की जा सकती है।


प्रतिभागियों ने विक्रेता और ग्राहक की भूमिकाएँ निभाते हुए व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लिया। इसके माध्यम से उन्हें उत्पाद प्रस्तुतीकरण, ग्राहक की आवश्यकता को समझने, प्रभावी संवाद, सही प्रश्न पूछने तथा अपने विचार को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का अनुभव प्राप्त हुआ।

सत्र में उद्यमशील मानसिकता के विकास में 21वीं सदी के कौशलों—संचार, सहयोग, सृजनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान एवं निर्णय क्षमता की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

विद्यार्थियों के विचार से उद्यम तक

विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच विकसित करने की दिशा में बिजनेस सपोर्ट फंड की अवधारणा तथा विद्यार्थियों के अनुभवों एवं उपलब्धियों को भी साझा किया गया।

इस क्रम में विद्यार्थी ध्रुव वर्मा की सफलता की कहानी के माध्यम से बताया गया कि उचित अवसर, मार्गदर्शन और उद्यमशील सोच विद्यार्थियों को अपने विचारों को वास्तविक कार्य एवं संभावनाओं में बदलने के लिए किस प्रकार प्रेरित कर सकती है।

प्रतिभागियों को उत्तराखंड सरकार द्वारा विद्यार्थियों के कौशल, नवाचार एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी भी दी गई। इनमें हैकथॉन, MOOCs तथा कौशल एवं नवाचार आधारित अन्य कार्यक्रमों पर विशेष चर्चा हुई।

करियर जागरूकता और My Career Advisor App

कार्यशाला के तृतीय सत्र में प्रो. (डॉ.) आशीष सोनी द्वारा करियर जागरूकता पर सत्र आयोजित किया गया।

उन्होंने My Career Advisor App के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न करियर विकल्पों से परिचित कराने तथा उनकी रुचियों, क्षमताओं एवं भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप करियर संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की।


इस क्रम में ऑनलाइन माध्यम से भी सत्र आयोजित किए गए तथा प्रतिभागियों को बताया गया कि विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों में समय रहते करियर जागरूकता विकसित करना उनके भविष्य के शैक्षिक एवं व्यावसायिक निर्णयों में सहायक हो सकता है।


स्थानीय कौशल को विद्यालय से जोड़ने की पहल

‘कौशल बोध’ के अंतर्गत जीवन रूप (Life Forms), मशीन एवं सामग्री (Machines and Materials) तथा मानव सेवाएँ (Human Services) जैसे कार्य-क्षेत्रों को स्थानीय परिवेश एवं परियोजना-आधारित अधिगम से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।

स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को विद्यालयी व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से रिंगाल (Small Bamboo) से विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण में दक्ष कुलदीप कुमार को विशेष संदर्भदाता के रूप में आमंत्रित किया गया।

रिंगाल शिल्प का Hands-on अनुभव

कुलदीप कुमार द्वारा रिंगाल से विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं अपने हाथों से रिंगाल पर कार्य करते हुए इस पारंपरिक कौशल की बारीकियों को समझा।

इस गतिविधि का उद्देश्य केवल एक स्थानीय शिल्प को जानना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि स्थानीय कारीगरों, स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और समुदाय को विद्यालयी शिक्षा से जोड़कर विद्यार्थियों के लिए सार्थक एवं जीवनोपयोगी परियोजनाएँ किस प्रकार विकसित की जा सकती हैं।

इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों को स्थानीय आजीविका, उद्यमशीलता, पर्यावरण, संसाधनों के उपयोग और कार्य-जगत को नजदीक से समझने का अवसर प्रदान कर सकती हैं।

24 सितम्बर को क्षेत्रीय भ्रमण एवं एक्सपोज़र विजिट

पाँच दिवसीय कार्यशाला के अगले चरण में 24 सितम्बर 2026 को प्रतिभागियों के लिए क्षेत्रीय भ्रमण एवं Exposure Visit आयोजित की जाएगी।

इसके अंतर्गत प्रतिभागियों को कृषि विज्ञान केंद्र/हर्बल क्षेत्र, विकासनगर में कृषि, स्थानीय संसाधनों एवं आजीविका से संबंधित व्यावहारिक अनुभव प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न लर्निंग सेंटर्स के माध्यम से इको-टूरिज्म, स्थानीय कौशल एवं आजीविका की संभावनाओं को समझने का अवसर भी मिलेगा।

मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार हो रहे प्रतिभागी

कार्यशाला में PSSCIVE भोपाल, SCERT उत्तराखंड तथा उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के विशेषज्ञ समन्वित रूप से प्रतिभागियों के क्षमता संवर्धन के लिए कार्य कर रहे हैं।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर/संदर्भदाता के रूप में तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये प्रतिभागी अपने विद्यालयों एवं विकासखंडों में अन्य शिक्षकों को सहयोग प्रदान करते हुए व्यावसायिक शिक्षा तथा ‘कौशल बोध’ के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

‘करके सीखने’ से भविष्य के कौशलों की ओर

कार्यशाला का मूल उद्देश्य व्यावसायिक शिक्षा को केवल किसी व्यवसाय अथवा रोजगार की जानकारी तक सीमित रखना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ‘करके सीखने’, स्थानीय संसाधनों एवं कार्य-जगत से जुड़ने, समस्याओं के समाधान खोजने, उद्यमशील सोच विकसित करने तथा भविष्य के लिए आवश्यक कौशल अर्जित करने के अवसर प्रदान करना है।

‘कौशल बोध’ के माध्यम से विद्यालय और स्थानीय समुदाय के बीच एक ऐसा शैक्षिक संबंध विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय ज्ञान, पारंपरिक कौशल, आधुनिक तकनीक, नवाचार, करियर जागरूकता और उद्यमशीलता एक-दूसरे के पूरक बन सकें।

इस प्रकार व्यावसायिक शिक्षा विद्यार्थियों के लिए केवल एक विषय न रहकर जीवन, कौशल और भविष्य की दुनिया से जुड़ने का व्यावहारिक माध्यम बन सकती है।

Monday, September 21, 2026

मध्य स्तर (middle stage)पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला

 

SCERT उत्तराखण्ड | शिक्षक क्षमता संवर्धन | व्यावसायिक शिक्षा

मध्य स्तर (Middle Stage) पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ

NEP-2020 और NCF-SE 2023 के अनुरूप कौशल, कार्यानुभव, स्थानीय व्यवसाय और करियर मार्गदर्शन को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

देहरादून, 21 सितम्बर 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 (NCF-SE 2023) के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु “Capacity Building of Teachers for Implementation of Vocational Education at the Middle Stage as per NEP-2020 and NCF-SE 2023” विषयक पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।

कार्यशाला की अध्यक्षता निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल द्वारा की गई। राज्य के विभिन्न जनपदों से चयनित 35 शिक्षक इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे हैं।

पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर चर्चा।

कार्यशाला की रूपरेखा और विशेषज्ञ मार्गदर्शन

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम समन्वयक सुनील भट्ट ने कार्यशाला की रूपरेखा एवं उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

उन्होंने मुख्य संदर्भदाता विशेषज्ञों पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), NCERT, भोपाल के प्रोफेसर डॉ. आशीष सोनी तथा प्रोफेसर डॉ. रवि आहूजा का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए व्यावसायिक शिक्षा एवं शिक्षक क्षमता संवर्धन के क्षेत्र में उनके अनुभव और योगदान से प्रतिभागियों को परिचित कराया।

ज्ञान के साथ कौशल और कार्यानुभव पर विशेष बल

अपने अध्यक्षीय संबोधन में निदेशक  बंदना गर्ब्याल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने विद्यालयी शिक्षा में ज्ञान के साथ-साथ कौशल, कार्यानुभव तथा व्यावसायिक दक्षताओं को विशेष महत्व दिया है। इस मौके पर उद्यम लर्निंग फाउंडेशन से रोहित गुप्ता एवं अरविंद बिष्ट भी अपना विशेष योगदान दे रहे हैं

उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों से पाँच दिवसीय कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता करते हुए प्राप्त अनुभवों और सीख को विद्यालय स्तर तक प्रभावी रूप से पहुँचाने का आह्वान किया तथा कार्यशाला के सफल संचालन के लिए सभी को शुभकामनाएँ दीं।


प्रोफेसर आशीष सोनी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उनमें  उद्यमिता और रोजगारपरक शिक्षा , निहित कौशल को पहचानने, विकसित करने तथा उसे जीवन और कार्य-जगत से जोड़ने के अवसर उपलब्ध कराना भी है।

उद्घाटन सत्र में उपनिदेशक  विनोद सिंह मटूड़ा तथा सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।

वक्ताओं ने व्यावसायिक शिक्षा को विद्यार्थियों के जीवन, स्थानीय परिवेश, कार्य-जगत तथा भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।




विशेषज्ञों, अधिकारियों एवं प्रतिभागी शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता के साथ कार्यशाला का उद्घाटन सत्र।

“एक ऐसा कौशल, जिस पर मुझे गर्व है” — परिचय का अभिनव तरीका

उद्घाटन सत्र का एक विशेष आकर्षण प्रतिभागियों का परिचय रहा। शिक्षकों ने पारंपरिक परिचय के स्थान पर अपने परिचय के साथ “एक ऐसा कौशल, जिस पर मुझे गर्व है” साझा किया।

किसी ने संवाद कौशल, किसी ने रचनात्मकता, कला, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व, समस्या-समाधान अथवा अन्य जीवनोपयोगी कौशल को अपनी विशेषता के रूप में प्रस्तुत किया।

इस गतिविधि ने कार्यशाला के प्रारंभ से ही एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई विशिष्ट कौशल निहित होता है और शिक्षा का दायित्व उस कौशल को पहचानने, विकसित करने तथा उसके लिए सार्थक अवसर प्रदान करने का है।


पाँच दिनों में किन विषयों पर होगा कार्य?

पाँच दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 के आलोक में व्यावसायिक शिक्षा की अवधारणा, कौशल बोध, मध्य स्तर पर विद्यालयी क्रियान्वयन, गतिविधि एवं अनुभव आधारित शिक्षण, बैगलेस दिवस, स्थानीय कौशल एवं व्यवसायों से विद्यार्थियों के जुड़ाव तथा करियर मार्गदर्शन जैसे विषयों पर विस्तार से कार्य किया जाएगा।

स्थानीयता से सीखने की दिशा:

कार्यशाला में व्यावसायिक शिक्षा को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को स्थानीय व्यवसायों, पारंपरिक कौशलों और वास्तविक कार्य-अनुभव से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।

राज्य के विभिन्न जनपदों से चयनित शिक्षक पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे हैं।

स्थानीय कौशल, उद्यमिता और रोजगारपरक शिक्षा

कार्यशाला की विशेषता यह है कि व्यावसायिक शिक्षा को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को स्थानीय व्यवसायों एवं कौशलों से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

इसके अंतर्गत स्थानीय व्यावसायिक संदर्भ व्यक्तियों एवं कारीगरों के माध्यम से स्थानीय व्यवसायों और पारंपरिक कौशलों की जानकारी एवं प्रदर्शन कराया जाएगा।

रिंगाल/बाँस आधारित हस्तशिल्प जैसे स्थानीय कौशलों के माध्यम से शिक्षक यह समझेंगे कि विद्यालयी शिक्षा को स्थानीय ज्ञान, कार्य-अनुभव, उद्यमिता और रोजगारपरक कौशलों से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है।

संदर्भ शिक्षक एवं संसाधन व्यक्ति के रूप में तैयार होंगे प्रतिभागी

कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को केवल व्यावसायिक शिक्षा की अवधारणा से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे संदर्भ शिक्षक/संसाधन व्यक्ति के रूप में तैयार करना है जो अपने विद्यालयों एवं जनपदों में व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा सकें।


उद्घाटन सत्र में उत्साहपूर्ण सहभागिता, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रतिभागी शिक्षकों की सक्रियता के साथ पाँच दिवसीय कार्यशाला का सार्थक एवं उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ।

यह प्रशिक्षण मध्य स्तर के विद्यार्थियों को कौशल, स्थानीय ज्ञान, कार्यानुभव, उद्यमिता और भविष्य की करियर संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में शिक्षकों की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

Friday, September 18, 2026

मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन–2026: 200k+ विद्यार्थियों की आवाज़ से निकला ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का विजन, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 140 चयनित विद्यार्थियों को किया सम्मानित

 

देहरादून, 18 सितम्बर 2026। उत्तराखण्ड के युवाओं की कल्पनाशीलता, नवाचार और राज्य के भविष्य को लेकर उनकी सोच को शासन एवं नीति-निर्माण से जोड़ने की दिशा में ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम का राज्य स्तरीय समारोह मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयनित 140 छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया, उनके विचार सुने और उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम की आधिकारिक रूपरेखा के अनुसार यह राज्यव्यापी पहल “मेरे सपनों का उत्तराखण्ड : एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण” विषय पर केंद्रित रही।

इस अभियान को प्रदेश के विद्यार्थियों से अभूतपूर्व सहभागिता मिली। कुल 200k+ विद्यार्थियों ने उत्तराखण्ड के भविष्य को लेकर अपने निबंध, विचार और सुझाव प्रस्तुत किए। इनमें से अंतिम चरण के लिए 140 छात्र-छात्राओं का चयन किया गया। विद्यार्थियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, पर्यावरण, पलायन, रोजगार, सड़क एवं आधारभूत संरचना, तकनीक, सुशासन, स्वरोजगार, स्टार्टअप तथा गांवों में रोजगार सृजन जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि उत्तराखण्ड की युवा पीढ़ी अपने राज्य के भविष्य को लेकर सजग है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से प्राप्त उपयोगी और व्यावहारिक सुझावों को सरकारी योजनाओं तथा नीति-निर्धारण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विद्यालयी शिक्षा विभाग की पूरी टीम को भी अभियान और निबंध प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को AI, रोबोटिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी तथा आधुनिक मांग-आधारित कौशलों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, निरंतर मेहनत करने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित किया तथा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का स्मरण करते हुए युवाओं को उत्तराखण्ड की बड़ी शक्ति बताया।

कक्षा 10 और 12 के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को टैब उपलब्ध कराने के लिए उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में कदम बताया।

‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ के अलग-अलग उप-विषयों में उत्कृष्ट विचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सम्मानित किया। इनमें शिक्षा एवं युवा अवसर में मयूह भंडारी और रवीना, पर्यावरण, वन एवं आपदा प्रतिरोधक क्षमता में शेरोन कपूर, स्वास्थ्य एवं जन सेवाएं में सतीश कुमार, पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन एवं रोजगार में माही बलाई, सड़क, संपर्क एवं आधारभूत संरचना में श्रितिका रावत, प्रौद्योगिकी एवं सुशासन में प्रियांशु सजवाण, पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था में दृष्टि चौहान तथा महिला एवं बाल कल्याण में अनुष्का नेगी को सम्मान मिला।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष अनेक व्यावहारिक सुझाव रखे। उत्तरकाशी के अनमोल परमार ने स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी ग्राम स्तर तक पहुंचाने और विद्यालयों में करियर काउंसलिंग के साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का सुझाव दिया। अन्य विद्यार्थियों ने वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों को संरक्षित करने के लिए ‘नॉलेज बैंक’, औषधीय वनस्पतियों के माध्यम से राज्य की वैश्विक पहचान तथा पर्यटन की अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ प्रथाओं को उत्तराखण्ड की परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने जैसे विचार रखे।

शिक्षकों, चयनकर्ताओं, मूल्यांकनकर्ताओं और आयोजन से जुड़े कार्मिकों का भी सम्मान

कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धि के पीछे कार्य करने वाले शिक्षकों, चयनकर्ताओं, मूल्यांकनकर्ताओं, जिला स्तरीय समन्वयकों और आयोजन से जुड़े कार्मिकों के योगदान को भी मान्यता दी गई। संलग्न आधिकारिक सूची में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से एस्कॉर्ट शिक्षकों, SCERT/DIET प्रतिनिधियों, शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना कार्यालय के कार्मिकों और तकनीकी सदस्यों को समारोह में प्रतिभाग हेतु सूचीबद्ध किया गया है।इस प्रकार यह समारोह केवल चयनित विद्यार्थियों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों को प्रेरित और मार्गदर्शित करने वाली पूरी शैक्षिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के सामूहिक प्रयास को सामने लाने का अवसर भी बना।

सूची के अनुसार कार्यक्रम के लिए शासन एवं शिक्षा विभाग के अनेक वरिष्ठ अधिकारियों को सूचीबद्ध किया गया था। इनमें आर.के. सुधांशु, प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण; धीराज गर्ब्याल, सचिव, पर्यटन/ग्राम्य विकास; डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव, लोक निर्माण/सूचना प्रौद्योगिकी; विनय शंकर पाण्डेय, सचिव, स्वास्थ्य; चन्द्रेश कुमार यादव, सचिव, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास; ज्योति यादव, सचिव, विद्यालयी शिक्षा; नमामि बंसल, अपर सचिव, विद्यालयी शिक्षा; आकांक्षा कोण्डे, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा; वन्दना गर्ब्याल, निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण; विनोद प्रसाद सिमल्टी, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा; तथा कुंवर सिंह रावत, निदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।

आज के कार्यक्रम की प्रकाशित रिपोर्ट में भी सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, चन्द्रेश कुमार, ज्योति यादव, धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव नमामि बंसल तथा महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोण्डे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति दर्ज की गई है।

140 छात्र-छात्राओं की सूची

संलग्न आधिकारिक सूची में 140 चयनित विद्यार्थियों के नाम जनपदवार दिए गए हैं।

अल्मोड़ा: Shivansh Arya, Aman, Mayuh Bhandari, Sakshi Gururuani, Golu Tamta, Lakshit Kandpal, Manish Singh Rawat, Bharat Singh, Pihu Bora, Uma, Aman Kholiya और Neetu।

बागेश्वर: Priyanshi Khetwal, Nikita Gariya, Jaya Nagarkoti और Anushka Negi।

चमोली: Rakhi, Yamuna, Aryan Farswan, Sakshi, Riya और Anushka Bhandari।

चम्पावत: Mayank Singh Samant, Hema Bhatt, Golu Kumar और Mohit Verma।

देहरादून: Divija Rawat, Sharon Kapoor, Akshita Bhatt, Mahi Balai, Aditya, Kashish, Nitesh, Aaryendra Singh, Sonam, Vidya, Ishu Verma, Ilma Parveen, Dhaani Vashisht, Annu Sharma, Prachi Rana, Khushi Patel, Prachi, Chungila Bhutia, Shorya Aswal और Pushti Pathak।

हरिद्वार: Sakshi Kumari, Ritika, Kritika Saini, Priya, Gurdev Gurjar, Anuradha Bisht, Naina Dhiman, Lalit Panwar, Iltisha, Shagun Chauhan, Lovepreet Kaur, Bhavya Agarwal, Aatika Hussain, Mahi Thakur, Aayan, Nidhika Rawat, Ayush Tripathi, Prneet Khodnal, Sagul, Priyanshi, Aamna और Anshika Kumari।

नैनीताल: Upasana Bhatt, Vinamrata Joshi, Pankaj Palariya, Mayank Bangari, Deepak Joshi, Pratigya Dangwal, Naman Singh Martolia, Arun, Vaishnavi Mishra, Jayaditya Singh Rathore, Vivek Pandey और Simran।

पौड़ी गढ़वाल: Akansha, Anushka, Divya, Aditya Bhardwaj, Seetal, Sakshi Pokhriyal, Srishti Maindola, Yashika, Shritika Rawat, Sonakshi, Shreem Agarwal और Anushka Negi।

पिथौरागढ़: Bhawna, Manisha Joshi, Priyanka Bisht, Komal Bhatt, Muskan Devlal, Ojasvi, Aayush Prasad और Vishal Singh।

रुद्रप्रयाग: Prince Singh, Koyal, Raveena और Anamika।

टिहरी गढ़वाल: Tamanna, Himanshi Thakur, Akshita Kothari, Pratiksha Semwal, Kanika Semwal, Shashwat Bhatt, Sarika, Gunjan Mahar, Prithvi Singh Panwar, Anish Singh, Priyanshu Sajwan और Ayush Rawat।

ऊधम सिंह नगर: Pallavi Sarkar, Vishakha, Sanjana Goldar, Anushka Dangi, Harman Singh, Aditya Chauhan, Shagun Rani, Ojasvi Grover, Tanishi Arya, Aditya Sharma, Tanmay Gupta, Yamini Bhatt, Jyotsana Arya, Riya, Lokesh Mourya, Drishti Chauhan, Pratibha और Anushka।

उत्तरकाशी: Ruchi, Lakshmi, Satish Kumar, Kanchan, Ansh Chand Ramola और Anmol Parmar।

आधिकारिक सूची में सभी जनपदों से आए एस्कॉर्ट शिक्षकों का भी विवरण है। इनमें देहरादून से डॉ. ताजवर सिंह पंडियार एवं सुषमा देवी, चमोली से एकता नेगी एवं कुंवर सिंह रावत, टिहरी से डॉ. संध्या पंवार एवं आदित्य नारायण सिंह, चम्पावत से भुवन सिंह अधिकारी एवं रेखा टम्टा, पिथौरागढ़ से किरण बोरा एवं नरेश जोशी, बागेश्वर से बलवंत सिंह टाकुली एवं सुमन डिमरी, उत्तरकाशी से नितिन एवं संतोष पंवार, पौड़ी से पल्लवी शर्मा एवं गौरी कंडारी, हरिद्वार से पवन कुमार एवं जिनीका यादव, नैनीताल से के.के. फुलेरा एवं डॉ. बसंती रौतेला, ऊधम सिंह नगर से निर्मल कुमार नियोलिया एवं सुमनलता, अल्मोड़ा से प्रतिभा चौहान एवं अंकित मिश्रा तथा रुद्रप्रयाग से रमेश चन्द्र सेमवाल एवं ऐश्वर्या नवानी सूचीबद्ध हैं।

‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ ने विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर नहीं दिया, बल्कि उन्हें राज्य के विकास पर सोचने, समाधान सुझाने और सीधे शासन के सामने अपनी बात रखने का मंच प्रदान किया। कार्यक्रम की मूल प्रक्रिया में विद्यार्थियों से अधिकतम 600 शब्दों में अपने सपनों के उत्तराखण्ड की परिकल्पना प्रस्तुत करने और बहु-स्तरीय मूल्यांकन के बाद चयनित विद्यार्थियों को 18 सितम्बर के राज्य स्तरीय आयोजन में आमंत्रित करने की व्यवस्था थी।

मुख्यमंत्री द्वारा विद्यार्थियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद, उत्कृष्ट विचारों का सम्मान, शिक्षकों एवं मूल्यांकन से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना तथा शिक्षा विभाग की पूरी टीम को बधाई इस पहल को एक व्यापक शैक्षिक संवाद का स्वरूप देती है। प्रदेश के 2.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि उत्तराखण्ड की नई पीढ़ी शिक्षा के साथ-साथ अपने राज्य की सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और तकनीकी चुनौतियों पर भी विचार कर रही है।

स्रोत: संलग्न “Total List dated 18.09.2026 – मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन पुरस्कार वितरण समारोह”, कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट तथा 18 सितम्बर 2026 को प्रकाशित कार्यक्रम विवरण।

Wednesday, September 16, 2026

Director Academic Bandana Garbyal Launched-Logo Making Competition 2026–27: Give a New Identity to School Education Uttarakhand in Colloboration with Canva in Education

 
The State Council of Educational Research and Training (SCERT), Uttarakhand, is organizing the Logo Making Competition 2026–27 with Canva in Education for the creation of an innovative and meaningful logo representing “School Education Uttarakhand – विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड.” The initiative encourages the creative participation of teachers and students from across Uttarakhand, giving them an opportunity to contribute to the visual identity of school education in the state.

With the spirit of “Our Mountains, Our Learning, Our Future,” the competition seeks ideas that connect Uttarakhand’s rich cultural and natural heritage with the changing face of education, technology, creativity and innovation.

Creativity Rooted in Uttarakhand

Uttarakhand is known for its majestic Himalayas, rivers, forests, biodiversity, traditions and distinctive cultural identity. Participants are encouraged to draw inspiration from these roots while imagining the future of education.

The proposed logo may creatively weave together elements of local culture, native wildlife, Himalayan identity and symbols of learning. At the same time, it can reflect important educational values such as innovation, inclusion, sustainability and digital learning.

IT Dept R P Badoni, said the aim is not simply to produce an attractive graphic. The competition provides teachers and students with an opportunity to think about a larger question: What should School Education Uttarakhand represent in the years ahead?

Sagari Chatterjee, India Education Canva Lead detiled that We want you to bring your creativity to life and design a logo that captures the rich culture, core values, and future-ready vision of the state’s education system.

Amazing prizes are up for grabs for the winning designs, including tablets, exclusive hampers, and certificates! 🏆

Who Can Participate?

The Logo Making Competition 2026 is open to teachers and students of Uttarakhand. Participants can use their imagination, artistic skills and digital creativity to develop an original logo concept for School Education Uttarakhand.

The initiative also promotes the effective use of modern digital design tools in education. Canva Education is highlighted as part of the creative campaign, encouraging participants to transform their ideas into professionally presented visual designs.

The competition reflects the message:

“Ideas • Design • Inspire a Better Tomorrow.”

Important Dates

The competition went live on 15 September 2026. Participants have approximately two months to develop and submit their creative entries.

Opening Date: 15 September 2026
Submission Deadline: 15 November 2026
Winners Announcement: 30 November 2026

Participants are therefore encouraged to register early, carefully study the competition requirements and devote sufficient time to developing an original and meaningful design.


An Opportunity to Create SCERT’s Logo

Director Academic Bandana Garbyal expressed in her view that this one of the most exciting aspects of the competition is the opportunity for participants to contribute a design that could become part of the identity associated with SCERT/School Education Uttarakhand. The promotional campaign invites participants to “Stand a Chance to Create SCERT’s Logo!”

The competition therefore goes beyond winning a prize. A successful design has the potential to represent the educational aspirations, values and identity of Uttarakhand before a much wider audience.

Tablets for Winners

To recognize and encourage outstanding creativity, winners will receive tablets. This adds a strong digital-learning dimension to the initiative, rewarding creative achievement with a tool that can further support learning, designing, innovation and technology-enabled education.

What Should the Logo Represent?

Participants should aim for a logo that is original, simple, memorable and meaningful. Rather than overcrowding the design with many elements, they should think about how a few carefully selected visual symbols can communicate the identity of Uttarakhand and its education system.

A strong entry could creatively express themes such as education and knowledge, Himalayan identity, Uttarakhand's culture and heritage, environmental sustainability, inclusion, innovation, digital learning, creativity, empowerment and aspirations for a brighter future.

The central idea can be summed up in the campaign message:

“Our Mountains, Our Learning, Our Future.”

A Platform for Students and Teachers to Imagine the Future

The Logo Making Competition 2026–27 is also an exercise in creative and design thinking. It encourages participants to observe their surroundings, understand their cultural identity, identify the values of modern education and convert abstract ideas into meaningful visual communication.

According to Additional Director Padmendra Saklani, For students, it provides an opportunity to move beyond conventional classroom activities and demonstrate their creativity on a state-level platform. For teachers, it offers a space to combine educational understanding with imagination, technology and design.

Deputy Director Vinod Matuda appraised the initiative in context of participation of student and teachers in the state .He said SCERT Uttarakhand is encouraging the education community to become not merely consumers of digital content but also creators, designers and innovators. The openning was held in the conference hall where prinicipals and teachers as key resource person had orientation about SEL in schools. 

Register and Participate

Teachers and students interested in participating can scan the registration QR code provided in the official promotional material and submit their entries according to the prescribed guidelines.

For further information and updates, participants may visit the competition information page:

Logo Making Competition – Innovate Uttarakhand

Opening: 15 September 2026
Deadline: 15 November 2026
Winners: 30 November 2026