Friday, October 16, 2026

एससीईआरटी में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

 

Priya Gusain SCERT Uttarakhand

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखंड द्वारा ब्लॉक रिसोर्स पर्सन्स (बीआरपी) के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण  विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान एवं समाधान के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना तथा विद्यालयों में विद्यार्थियों के भावनात्मक और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप निदेशक, विनोद मटूरा ने मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। विद्यालयों में सकारात्मक, सहयोगात्मक एवं संवेदनशील वातावरण का निर्माण करने में शिक्षकों और शैक्षिक संसाधन व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण के प्रथम दिवस का प्रारंभ माइंडफुलनेस (सचेतनता) अभ्यास से हुआ। इस गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों को वर्तमान क्षण के प्रति सजग रहने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने तथा स्वयं की भावनाओं और विचारों को समझने का अनुभव कराया गया।

प्रथम सत्र में व्यसन (Addiction) एवं उससे उबरने के उपायों पर चर्चा की गई। सत्र में व्यसन के विभिन्न स्वरूपों, इसके मनोवैज्ञानिक एवं व्यवहारगत पहलुओं तथा इससे प्रभावित व्यक्तियों की सहायता करने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को व्यसन की समस्या के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

द्वितीय सत्र में मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता (Psychological First Aid) विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। इसमें संकट की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को भावनात्मक सहयोग प्रदान करने, उसकी बात ध्यानपूर्वक सुनने, उसे सुरक्षित महसूस कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता एवं विशेषज्ञ परामर्श से जोड़ने के महत्व को समझाया गया।

अपर निदेशक, पद्मेंद्र सकलानी ने अपने संबोधन में विद्यालयों के सुचारु एवं प्रभावी संचालन में ब्लॉक रिसोर्स पर्सन्स (बीआरपी) की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीआरपी विद्यालयों और शिक्षा विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं तथा शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार और शिक्षकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बीआरपी के कार्यक्षेत्र में आने वाली विभिन्न चुनौतियों एवं समस्याओं पर चर्चा करते हुए उनके निराकरण के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए केवल अकादमिक पक्ष ही नहीं, बल्कि शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं स्वयं शैक्षिक कार्मिकों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा विद्यालयों में सकारात्मक, संवेदनशील एवं सहयोगपूर्ण वातावरण विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इसके पश्चात विद्यालयों में संचालित आनंदम कार्यक्रम एवं सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षा (SEEL—Social, Emotional and Ethical Learning) पर सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक संबंधों तथा नैतिक मूल्यों के विकास में इन कार्यक्रमों की भूमिका पर चर्चा की गई। साथ ही, विद्यालयी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास और मानसिक कल्याण को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।

प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में डॉ. बडोनी ने हैकाथॉन कार्यक्रम के संबंध में प्रतिभागियों को जागरूक किया। उन्होंने नवाचार के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि जीवन में नई सोच, रचनात्मकता और समस्याओं के समाधान की क्षमता व्यक्ति के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इस सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को दैनिक जीवन एवं शैक्षिक कार्यों में नवाचारी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं की समझ विकसित करने, संकट की परिस्थितियों में उचित प्रतिक्रिया देने तथा विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए अधिक संवेदनशील, सुरक्षित एवं सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

Thursday, October 15, 2026

उधम सिंह नगर में पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय SEEL कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न

 

सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम के माध्यम से विद्यालयों में संवेदनशील, आनंदमय और सकारात्मक शैक्षिक वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर

उधम सिंह नगर, 15 अक्टूबर 2026। समग्र शिक्षा उत्तराखंड के अंतर्गत जनपद उधम सिंह नगर के पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम (Social, Emotional and Ethical Learning – SEEL) कार्यशाला उत्साहपूर्ण सहभागिता और सकारात्मक अनुभवों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के समग्र विकास के लिए सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक मूल्यों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना तथा शिक्षकों एवं विद्यालय नेतृत्व को संवेदनशील और आनंदमय शैक्षिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रेरित करना था।

समग्र शिक्षा उत्तराखंड के कार्यक्रम प्रभारी डॉ. बी. पी. मैंदोली ने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता अत्यंत उत्साहजनक रही। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों, समूह चर्चाओं एवं अनुभवात्मक अधिगम प्रक्रियाओं में रुचिपूर्वक भाग लिया तथा विद्यार्थियों के सामाजिक-भावनात्मक विकास के महत्त्व को गहराई से समझा।

उन्होंने कहा कि SEEL केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यालयी शिक्षा को अधिक मानवीय, संवेदनशील और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य बच्चों में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, सहानुभूति, सकारात्मक संबंध, जिम्मेदार निर्णय लेने की क्षमता तथा नैतिक मूल्यों का विकास करना है।

आनंदम पाठ्यचर्या और समग्र शिक्षा से जुड़ाव

उत्तराखंड की आनंदम पाठ्यचर्या (Anandam Curriculum) की भावना के अनुरूप सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम बच्चों को तनावमुक्त, सुरक्षित और आनंदपूर्ण वातावरण में सीखने के अवसर प्रदान करता है। SEEL जैसी पहल विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सहयोग, करुणा, पारस्परिक सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने में सहायक हो सकती है।

कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों को भावनात्मक रूप से सशक्त, नैतिक रूप से जिम्मेदार तथा सामाजिक रूप से संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। इस दिशा में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों एवं सहयोगी संस्थाओं का सराहनीय योगदान

कार्यशाला की सफलता में विषय विशेषज्ञों एवं विभिन्न सहयोगी संस्थाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. विजय रावत,  पांडे जी एवं रतूड़ी जी ने संदर्भदाता के रूप में अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करते हुए प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

Dream a Dream एवं Labhya की टीमों ने कार्यक्रम के दौरान निरंतर सहयोग एवं तकनीकी-अकादमिक समर्थन प्रदान किया। वहीं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन ने प्रशिक्षण स्थल एवं आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराकर आयोजन में महत्त्वपूर्ण सहयोग दिया।

समग्र शिक्षा, उधम सिंह नगर की टीम ने कार्यक्रम के सफल संचालन, समन्वय एवं व्यवस्थाओं में सराहनीय भूमिका निभाई।

डॉ. बी. पी. मैंदोली ने सभी संदर्भदाताओं, सहयोगी संस्थाओं, आयोजनकर्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही विद्यालयों में सकारात्मक और स्थायी शैक्षिक परिवर्तन संभव है।

खुशहाल, संवेदनशील और भावनात्मक रूप से सशक्त विद्यालयों की ओर

तीन दिवसीय कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों और प्रतिभागियों के उत्साह ने यह विश्वास मजबूत किया कि SEEL के सिद्धांतों को विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों और शिक्षण प्रक्रियाओं में प्रभावी रूप से अपनाया जा सकता है।

यह पहल पीएम श्री विद्यालयों को ऐसे शिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित, स्वीकार्य और सीखने के लिए प्रेरित महसूस करे।

सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों के हृदय में संवेदनशीलता, व्यवहार में नैतिकता और जीवन में सकारात्मकता विकसित करना है।

इस प्रकार समग्र शिक्षा उत्तराखंड के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला राज्य में आनंदम पाठ्यचर्या, विद्यार्थी कल्याण और समग्र शिक्षा के उद्देश्यों को सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सामने आई है।

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सड़क सुरक्षा शिक्षा में उत्तराखंड की बड़ी पहल: SCERT और Honda India Foundation मिलकर विकसित करेंगे ऑनलाइन पाठ्यक्रम

 

शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए तैयार होगा सड़क सुरक्षा एवं जीवन कौशल आधारित डिजिटल कोर्स; ₹5.18 लाख के CSR सहयोग से DIKSHA, LMS, Mission Karmayogi और PM eVidya जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से व्यापक प्रसार की योजना

देहरादून, 15 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा को केवल यातायात नियमों तक सीमित न रखते हुए इसे विद्यालयी शिक्षा, नैतिक व्यवहार, जीवन कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में SCERT उत्तराखंड और Honda India Foundation (HIF) के बीच 14 अक्टूबर 2026 को गुरुग्राम में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding–MoU) हस्ताक्षरित किया गया।

इस समझौते के अंतर्गत उत्तराखंड के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए सड़क सुरक्षा और जीवन कौशल पर आधारित एक व्यापक ऑनलाइन पाठ्यक्रम विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित सड़क व्यवहार, यातायात नियमों, वाहन संबंधी सावधानियों, दुर्घटनाओं से बचाव और जिम्मेदार नागरिक आचरण के प्रति जागरूक बनाना है।

इस महत्वपूर्ण समझौते में SCERT उत्तराखंड की ओर से अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी की प्रमुख भूमिका रही। पाठ्यक्रम विकास एवं तकनीकी समन्वय की प्रक्रिया में SCERT के आईटी विभाग की तकनीकी टीम तथा प्रवक्ता रमेश प्रसाद बडोनी सहित संबंधित विशेषज्ञों की सहभागिता रही। Honda India Foundation की ओर से संस्था के प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने सहयोग प्रदान किया।

सड़क सुरक्षा: शिक्षा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण विषय

सड़क दुर्घटनाएँ केवल यातायात व्यवस्था से संबंधित समस्या नहीं हैं, बल्कि ये मानव जीवन, परिवार, समाज और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ी एक गंभीर चुनौती हैं। विशेष रूप से विद्यालयी विद्यार्थियों एवं युवाओं में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा, दुर्घटना रोकथाम, सुरक्षित यातायात व्यवहार तथा जनजागरूकता को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में विद्यालयी शिक्षा के माध्यम से सड़क सुरक्षा को विद्यार्थियों के व्यवहार और जीवन कौशल से जोड़ना एक प्रभावी प्रयास हो सकता है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में संकरी सड़कें, घुमावदार मार्ग, ढलान, मौसम संबंधी चुनौतियाँ और यातायात के विविध जोखिम सड़क सुरक्षा शिक्षा की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाते हैं।

इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए SCERT उत्तराखंड ने Honda India Foundation के साथ मिलकर एक ऐसे डिजिटल पाठ्यक्रम के विकास की पहल की है, जिसके माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों में सुरक्षित एवं जिम्मेदार सड़क व्यवहार की समझ विकसित की जा सके।

पहले चरण में शिक्षकों के लिए ऑनलाइन कोर्स, दूसरे चरण में विद्यार्थियों के लिए पायलटिंग

इस पहल के अंतर्गत प्रथम चरण में उत्तराखंड के शिक्षकों के लिए सड़क सुरक्षा एवं जीवन कौशल पर आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने की योजना है।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को सड़क सुरक्षा से संबंधित विषयों की व्यापक जानकारी देना तथा उन्हें विद्यालयों में विद्यार्थियों को सुरक्षित यातायात व्यवहार सिखाने के लिए सक्षम बनाना है।

इसके पश्चात विद्यार्थियों के लिए आयु एवं कक्षा स्तर के अनुरूप डिजिटल शिक्षण मॉड्यूल विकसित कर उनकी पायलटिंग की जाएगी। पायलटिंग के दौरान शिक्षण सामग्री की प्रभावशीलता, विद्यार्थियों की समझ, अधिगम परिणामों और व्यवहारगत परिवर्तन का अध्ययन किया जाएगा।

प्राप्त सुझावों एवं अनुभवों के आधार पर पाठ्यक्रम को और अधिक उपयोगी बनाकर राज्य के विद्यालयों में व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की योजना है।

ऑनलाइन पाठ्यक्रम में शामिल होंगे सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण विषय

प्रस्तावित पाठ्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा विषय विशेषज्ञों एवं तकनीकी टीम के सहयोग से विकसित की जाएगी। इसमें निम्नलिखित प्रमुख विषयों को शामिल करने की योजना है:

  1. सड़क सुरक्षा का परिचय: सड़क सुरक्षा का महत्व, दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण और जीवन रक्षा के उपाय।
  2. यातायात नियम एवं संकेत: ट्रैफिक सिग्नल, सड़क चिह्न, यातायात संकेतक और आवश्यक कानूनी प्रावधानों की जानकारी।
  3. सुरक्षित पैदल यातायात: सड़क पार करने के नियम, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित व्यवहार।
  4. वाहन सुरक्षा: दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों में सुरक्षा उपाय, हेलमेट, सीट बेल्ट और सुरक्षित यात्रा संबंधी सावधानियाँ।
  5. रैश ड्राइविंग और जोखिमपूर्ण व्यवहार से बचाव: तेज गति, लापरवाही, मोबाइल फोन के उपयोग और असुरक्षित वाहन संचालन के दुष्परिणाम।
  6. नैतिक एवं जिम्मेदार सड़क व्यवहार: अन्य वाहन चालकों, पैदल यात्रियों, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक व्यवहार।
  7. आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित प्रतिक्रिया: दुर्घटना की स्थिति में सहायता प्राप्त करना, आपातकालीन सेवाओं की जानकारी और व्यक्तिगत सुरक्षा।
  8. विद्यालय आधारित सड़क सुरक्षा गतिविधियाँ: क्विज, केस स्टडी, वीडियो, गतिविधियाँ और जागरूकता अभियान।

इस प्रकार पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सुरक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, आत्म-अनुशासन, निर्णय क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना भी होगा।

CSR सहयोग से विकसित होंगे डिजिटल शिक्षण संसाधन

समझौता ज्ञापन के अनुसार Honda India Foundation द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत वित्तीय सहयोग निर्धारित किया जा सकता है। इस सहयोग का उपयोग डिजिटल रोड सेफ्टी लर्निंग मॉड्यूल के विकास, वीडियो सामग्री के शैक्षिक रूपांतरण, तकनीकी सेवाओं तथा ऑनलाइन पाठ्यक्रम के निर्माण एवं प्रसार से संबंधित निर्धारित कार्यों में किया जाएगा।

Honda India Foundation द्वारा सड़क सुरक्षा से संबंधित वीडियो, स्क्रिप्ट और आयु-वर्ग आधारित शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। SCERT उत्तराखंड इन संसाधनों की शैक्षिक समीक्षा, पाठ्यचर्या के अनुरूप अनुकूलन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भूमिका निभाएगा। इस साझेदारी में शैक्षिक गुणवत्ता, सामग्री की उपयुक्तता, डिजिटल सुरक्षा और विद्यार्थियों की गोपनीयता का भी ध्यान रखा जाएगा।

DIKSHA, LMS, Mission Karmayogi और PM eVidya के माध्यम से प्रसार की योजना

इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता डिजिटल माध्यमों के जरिए पाठ्यक्रम को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है।

समझौते में SCERT के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, DIKSHA और PM eVidya के माध्यम से डिजिटल सड़क सुरक्षा सामग्री के प्रसार का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य की कार्ययोजना में उत्तराखंड के LMS पोर्टल तथा भारत सरकार के Mission Karmayogi जैसे उपयुक्त प्रशिक्षण प्लेटफॉर्मों पर भी पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की संभावनाएँ शामिल हैं।

प्रस्तावित डिजिटल प्रसार व्यवस्था के अंतर्गत:

  • SCERT उत्तराखंड LMS पोर्टल: शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण, स्व-अध्ययन एवं पाठ्यक्रम पूर्णता की सुविधा।
  • DIKSHA पोर्टल: डिजिटल शैक्षिक सामग्री, गतिविधियाँ एवं इंटरैक्टिव मॉड्यूल उपलब्ध कराना।
  • Mission Karmayogi: आवश्यक अनुमोदन एवं तकनीकी अनुकूलता के आधार पर संबंधित कार्मिकों के प्रशिक्षण हेतु पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की संभावना।
  • PM eVidya चैनल: सड़क सुरक्षा पर आधारित वीडियो शृंखला एवं जागरूकता कार्यक्रमों का प्रसारण।
  • अन्य डिजिटल माध्यम: विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और समुदाय तक सड़क सुरक्षा संदेश पहुँचाना।

इस प्रकार सड़क सुरक्षा शिक्षा को केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित रखने के बजाय डिजिटल तकनीक के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान का रूप देने की परिकल्पना की गई है।

विद्यालयी पाठ्यचर्या और जीवन कौशल शिक्षा से जोड़ने की पहल

समझौते में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCF-SE 2023) तथा राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) के अनुरूप सड़क सुरक्षा शिक्षा को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सड़क सुरक्षा केवल एक विषयगत जानकारी नहीं, बल्कि जीवन रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कौशल है। इसलिए इसे विद्यालयी पाठ्यचर्या, सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों, जीवन कौशल शिक्षा और व्यवहारगत प्रशिक्षण से जोड़ने की आवश्यकता है।

समझौते में पाठ्यक्रम पूर्णता प्रमाणपत्र को भविष्य में क्रेडिट आधारित जीवन कौशल मॉड्यूल के रूप में मान्यता देने की संभावनाओं का अध्ययन करने का भी प्रावधान है।

इससे विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनके सीखने को औपचारिक पहचान देने की दिशा में भी अवसर विकसित हो सकते हैं। SCERT उत्तराखंड द्वारा पूर्व में संचालित UK e-Srijan MOOCs, आईसीटी आधारित शिक्षक प्रशिक्षण, AI सक्षम शिक्षण-अधिगम, डिजिटल ई-कंटेंट विकास और ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्राप्त अनुभव इस नई पहल के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

आईटी विभाग द्वारा विकसित डिजिटल प्रशिक्षण एवं ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्थाओं के अनुभव का उपयोग सड़क सुरक्षा पाठ्यक्रम के तकनीकी विकास, सामग्री के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन मूल्यांकन और प्रमाणन की योजना में किया जा सकेगा।

इस पहल के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण को सीधे विद्यार्थियों की जीवन सुरक्षा और सामाजिक व्यवहार से जोड़ने का अवसर मिलेगा। 

SCERT उत्तराखंड और Honda India Foundation के मध्य हुए इस समझौते में SCERT के अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी तथा Honda India Foundation के ट्रस्टी विनय धींगरा (Vinay Dhingra) हस्ताक्षरकर्ता रहे। Honda India Foundation की ओर से कॉर्पोरेट अफेयर्स से जुड़े अधिकारी  प्रभु नागराज एवं धुर्व गोस्वामी भी साक्षी के रूप में उपस्थित रहे। इस पहल के तकनीकी एवं शैक्षिक समन्वय में SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग की टीम से प्रवक्ता  पुष्पा असवाल तथा प्रवक्ता रमेश प्रसाद बडोनी सहित संबंधित अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों की सहभागिता रही।

समझौता ज्ञापन 14 अक्टूबर 2026 से 22 सितंबर 2029 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में निर्धारित दायित्वों एवं परस्पर सहयोग के आधार पर डिजिटल पाठ्यक्रम विकास तथा संबंधित शैक्षिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।

सुरक्षित समाज की दिशा में कदम

सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक विद्यार्थी भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। यदि विद्यालय स्तर से ही बच्चों को यातायात नियमों, सुरक्षित व्यवहार, जोखिमों की पहचान और दूसरों के जीवन के प्रति संवेदनशीलता की शिक्षा दी जाए, तो सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के प्रयासों को सामाजिक स्तर पर मजबूती मिल सकती है।

SCERT उत्तराखंड और Honda India Foundation की यह साझेदारी शिक्षा, तकनीक और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

इस पहल का दीर्घकालिक उद्देश्य ऐसे शिक्षकों और विद्यार्थियों को तैयार करना है, जो स्वयं सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें और अपने परिवार, विद्यालय तथा समुदाय में भी सुरक्षित यातायात व्यवहार को प्रोत्साहित करें।

सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि स्वयं के जीवन और दूसरों की सुरक्षा के प्रति नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है।

SCERT उत्तराखंड की यह पहल इसी विचार को शिक्षा के माध्यम से व्यवहार में उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

Wednesday, October 14, 2026

Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में आज ही आवेदन करें!

अपनी सोच को दें नई उड़ान – Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में आज ही आवेदन करें!

उत्तराखंड के सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं नवाचार में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों से विशेष अपील!

क्या आपके पास कोई ऐसा अभिनव विचार है, जो शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, तकनीक या समाज की किसी वास्तविक समस्या का समाधान कर सकता है?

तो यह अवसर आपके लिए है!

SCERT उत्तराखंड की पहल Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता, प्रतिभा और नवाचार को नई पहचान दिलाएँ।

📅 आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026 (विस्तारित)

🌐 ऑनलाइन आवेदन करें: https://innovateuttarakhand.com

आइए, हम सब मिलकर उत्तराखंड को नवाचार और रचनात्मकता का केंद्र बनाएँ।

आपका विचार – आपका नवाचार – उत्तराखंड का उज्ज्वल भविष्य!

समन्वयक, Innovate Uttarakhand Hackathon
SCERT उत्तराखंड, देहरादून

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सरकारी विद्यालयों में भी पढ़ाई जाएंगी विदेशी भाषाएं, उत्तराखंड सरकार की नई पहल

देहरादून। उत्तराखंड में विद्यालयी शिक्षा को अधिक आधुनिक, रोजगारपरक और वैश्विक अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य के सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को अब विदेशी भाषाएं सीखने का अवसर मिलेगा। इस योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों के साथ-साथ अटल उत्कृष्ट विद्यालयों और राजीव नवोदय विद्यालयों में भी अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण पर विशेष जोर

प्राप्त समाचार के अनुसार, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में आयोजित बैठक के दौरान शिक्षा विभाग को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा कौशल से सशक्त बनाना और उन्हें उच्च शिक्षा, रोजगार तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों के लिए तैयार करना है।

इस पहल के अंतर्गत सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत लगभग 600 विद्यार्थियों को भी विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिए जाने की योजना है। इससे स्वास्थ्य एवं नर्सिंग क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।

आईटीआई विद्यार्थियों और युवाओं को भी मिलेगा लाभ

योजना में आईटीआई के विद्यार्थियों तथा अन्य युवाओं को भी शामिल करने पर जोर दिया गया है। विदेशी भाषाओं का ज्ञान तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इससे उन्हें विभिन्न देशों में रोजगार और व्यावसायिक प्रशिक्षण के अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।

इसके लिए दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की सेवाएं लेने की योजना भी बनाई जा रही है। प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन तथा मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

शिक्षा को रोजगार और वैश्विक अवसरों से जोड़ने की पहल

आज के वैश्विक परिवेश में विदेशी भाषाओं का ज्ञान केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, उच्च शिक्षा, पर्यटन, तकनीकी सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसरों का आधार भी है। ऐसे में सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों तक विदेशी भाषा प्रशिक्षण की पहुंच बनाना शैक्षिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

यदि इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो विशेषकर ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को भी वे अवसर मिल सकेंगे, जो सामान्यतः महंगे निजी प्रशिक्षण संस्थानों तक सीमित रहते हैं।

Monday, October 12, 2026

एससीईआरटी, उत्तराखंड में आयोजित हुआ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस-2026

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड में 10 अक्टूबर 2026 को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को मानसिक रूप से स्वस्थ, सकारात्मक और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निदेशक एससीईआरटी  बंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक  पदमेंद्र सकलानी, उप निदेशक विनोद मथुरा, सहायक निदेशक डॉ के.एन. बिजल्वाण तथा कैलाश चंद्र, पूर्व शिक्षा अधिकारी,राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र ,नई दिल्ली मुख्य अतिथि की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम में , राकेश जुगराण,सेवानिवृत प्राचार्य डायट और डॉ. दिनेश रतूड़ी,सेवानिवृत्ति प्रवक्ता, एससीईआरटी भी शामिल रहे। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए दैनिक जीवन में अपनाई जा सकने वाली सरल, व्यावहारिक एवं प्रभावी गतिविधियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्व को रेखांकित किया गया। 

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना था कि मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक समस्याओं की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं को समझने, अपनी भावनाओं को पहचानने, परिस्थितियों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने तथा जीवन को सहजता और प्रसन्नता के साथ जीने की क्षमता से भी जुड़ा है। 

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसी परिस्थिति को देखने का हमारा दृष्टिकोण हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करता है। कई बार परिस्थितियाँ उतनी कठिन नहीं होतीं, जितनी कठिन हम अपनी सोच के कारण उन्हें बना लेते हैं। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि एक ही परिस्थिति को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है और सकारात्मक एवं संतुलित सोच तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है। 

यह भी रेखांकित किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्वयं के विचारों और व्यवहार के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। अपने भावनात्मक पैटर्न, प्रतिक्रियाओं और तनाव उत्पन्न करने वाले कारकों को पहचानकर व्यक्ति अपने व्यवहार में आवश्यक बदलाव ला सकता है। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के परस्पर संबंध पर चर्चा की गई। प्रिया गुसाईं , प्रवक्ता SCERT उत्तराखंड द्वारा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या को मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्वपूर्ण आधारों के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ रहने के लिए केवल मानसिक स्तर पर प्रयास करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर की आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। 

साथ ही, आत्म-जागरूकता को मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया गया। अपनी भावनाओं, आदतों, प्रतिक्रियाओं और विचारों को बिना किसी पूर्वाग्रह के समझना हमें स्वयं के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने में सहायता करता है।कार्यक्रम में हँसी को तनाव कम करने और जीवन में सहजता बनाए रखने के एक उपयोगी माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। स्वयं पर हँस सकना, छोटी-छोटी बातों को बहुत गंभीरता से न लेना और जीवन की सामान्य परिस्थितियों में हास्य खोज पाना मानसिक लचीलेपन को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।  

कार्यक्रम का समापन कृतज्ञता के महत्त्वपूर्ण संदेश के साथ हुआ। जीवन में जो कुछ हमारे पास है, उसे पहचानना, छोटी-छोटी खुशियों का अनुभव करना और अपने जीवन में योगदान देने वाले लोगों एवं परिस्थितियों के प्रति आभार व्यक्त करना सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक है। कृतज्ञता का अभ्यास हमें केवल उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करने से रोकता है, जो हमारे पास नहीं हैं, और उन अनुभवों एवं संबंधों को पहचानने में मदद करता है, जो हमारे जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए बड़े बदलावों की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, आत्म-जागरूकता, सकारात्मक दृष्टिकोण, हास्यबोध, जीवन में ठहराव और कृतज्ञता जैसे छोटे-छोटे अभ्यास हमारे जीवन को अधिक संतुलित, आनंदपूर्ण और सार्थक बना सकते हैं। 

एस.सी.ई.आर.टी. की निदेशक ने अपने संदेश में कहा कि एससीईआरटी, उत्तराखंड में आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने तथा स्वस्थ मन और स्वस्थ जीवन की संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहेगा। बदलते सामाजिक परिवेश, जीवनशैली, बढ़ती अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धा के कारण मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में वृद्धि हो रही है। ऐसी परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मानसिक रूप से सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में पूरे माह विद्यालयों में विभिन्न जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों सहित सभी संबंधित व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है और उसकी अपनी विशिष्ट क्षमताएँ, संभावनाएँ एवं खूबियाँ हैं। अतः हमें स्वयं की तुलना दूसरों से करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए तथा अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए स्वयं को स्वीकार करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को यह विश्वास होना चाहिए कि वह विशेष है, अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकता है और अपने प्रयासों से अनेक उपलब्धियाँ हासिल कर सकता है। उन्होंने संदेश दिया कि दूसरों से तुलना करने के बजाय हमें अपनी रुचियों, क्षमताओं और आत्मविकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ मानसिकता, आत्मविश्वास और स्वयं की विशिष्टता को स्वीकार करना ही मानसिक स्वास्थ्य एवं जीवन में संतुलन की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।

प्रिया गुसाईं , प्रवक्ता SCERT उत्तराखंड 

Saturday, October 10, 2026

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर देहरादून में कार्यशाला: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण को सशक्त बनाने की पहल

 

पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने किया प्रतिभाग, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल ने की मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता

देहरादून, 10 अक्टूबर 2026। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर उत्तराखंड में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण एवं सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देहरादून स्थित ट्रांजिट हॉस्टल, रेसकोर्स सेंटर में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जनपद नैनीताल के पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण विकसित करना तथा सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षण (Social, Emotional and Ethical Learning–SEEL) को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने के लिए शिक्षकों को प्रेरित करना था।

निदेशक बंदना गर्ब्याल ने की मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता

कार्यशाला में  बंदना गर्ब्याल, निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं डॉ. बी. पी. मैंदोली, स्टाफ ऑफिसर, समग्र शिक्षा उत्तराखंड ने विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल शैक्षिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता, सहयोग और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है।

मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण पर विशेष चर्चा

कार्यशाला में मनोदर्पण सेल के माध्यम से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों, तनाव, सामाजिक अलगाव और भावनात्मक कठिनाइयों को समझने तथा समय पर आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए संवेदनशील बनाने पर जोर दिया गया।

सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण के अंतर्गत विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, भावनात्मक संतुलन, संवाद कौशल, जिम्मेदार निर्णय लेने और सहयोगात्मक व्यवहार विकसित करने की आवश्यकता रेखांकित की गई।

डॉ. बी. पी. मैंदोली ने विद्यार्थियों के समग्र विकास में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को स्पष्ट करते हुए शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शैक्षिक उपलब्धियों के साथ बच्चों की भावनात्मक और सामाजिक क्षमताओं को भी समान प्राथमिकता देने पर बल दिया।

सहयोगी संस्थाओं ने साझा किए नवाचारी अनुभव

कार्यशाला में Dream a Dream एवं Labhya Foundation जैसी सहयोगी संस्थाओं ने विद्यालयों में सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण, जीवन कौशल और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने से संबंधित अपने अनुभव एवं कार्यप्रणालियां साझा कीं।

इन संस्थाओं ने अनुभव-आधारित गतिविधियों, समूह शिक्षण, सकारात्मक संवाद तथा सहयोगात्मक कक्षा-कक्ष वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों के भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित करने के विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

प्रतिभागी प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों को विद्यालयों की नियमित गतिविधियों में शामिल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसके अंतर्गत प्रार्थना सभा, समूह चर्चा, रचनात्मक गतिविधियों, सहपाठी सहयोग और विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद के माध्यम से सकारात्मक विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर सहमति बनी।

विद्यालयों में बच्चों को बिना भय और संकोच अपनी भावनाएं व्यक्त करने, समस्याएं साझा करने तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराना इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।

समावेशी एवं बाल-केंद्रित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित यह कार्यशाला उत्तराखंड में बाल-केंद्रित, समावेशी एवं संवेदनशील विद्यालयी शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की समग्र एवं अनुभवात्मक शिक्षा की भावना के अनुरूप ऐसी पहलें विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को भी मजबूत बनाने में सहायक हो सकती हैं।

कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि एक अच्छा विद्यालय केवल वह नहीं है जहां बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें, बल्कि वह भी है जहां प्रत्येक बच्चा स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित, प्रसन्न और आत्मविश्वास से परिपूर्ण महसूस करे।

उत्तराखंड में इस प्रकार के प्रयास शिक्षकों, विद्यालय प्रमुखों, अभिभावकों एवं सहयोगी संस्थाओं के सामूहिक योगदान से बच्चों के लिए अधिक संवेदनशील, सकारात्मक और खुशहाल शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राज्य विज्ञान संगोष्ठी–2026: भारतीय ऊर्जा परिदृश्य 2047: संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ

   देहरादून, 10 अक्टूबर 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखंड ने ‘भारतीय ऊर्जा परिदृश्य 2047: संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ’ विषय पर राज्य स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी–2026 आयोजित की। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों में ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विकास और भारत की भावी ऊर्जा जरूरतों के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना था। राज्य के सभी 13 जनपदों से प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त कक्षा 8 से 10 तक के 25 विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गुरु वंदना से हुआ। 

निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड बंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक एससीईआरटी  पदमेन्द्र सकलानी, उपनिदेशक विनोद सिंह मटूडा, सहायक निदेशक डॉ के.एन. बिजल्वाण और निर्णायक मंडल के सदस्यों ने दीप प्रज्वलित किया। निर्णायक मंडल में कैलाश चंद्र, पूर्व शिक्षा अधिकारी,राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र ,नई दिल्ली, राकेश जुगराण,सेवानिवृत प्राचार्य डायट और डॉ. दिनेश रतूड़ी,सेवानिवृत्ति प्रवक्ता, एससीईआरटी शामिल रहे। कार्यक्रम की रूपरेखा समन्वयक डॉ. देवराज सिंह राणा ने प्रस्तुत की जबकि संचालन प्रवक्ता गोपाल घुघत्याल ने किया। 

ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर विद्यार्थियों के विचार

    विद्यार्थियों ने सौर, जलविद्युत, पवन और परमाणु ऊर्जा सहित विभिन्न ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं पर पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुतियाँ दीं। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के संदर्भ में गाड़-गदेरों के जलप्रवाह से लघु जलविद्युत परियोजनाओं के विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के सुझाव भी दिए गए।

विद्यार्थियों ने ऊर्जा से जुड़े रोजगार और आजीविका संबंधी मुद्दों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कौशल विकास, वैकल्पिक रोजगार और न्यायसंगत ऊर्जा की आवश्यकता बताई। प्रस्तुतियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, नवाचार और समस्या-समाधान की क्षमता स्पष्ट दिखाई दी।

मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर

   विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी चर्चा हुई। श्रीमती बंदना गर्ब्याल ने कहा कि बच्चों का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगिता के दबाव के बजाय अपनी क्षमताओं के अनुरूप श्रेष्ठ प्रयास करने और शिक्षकों से संवेदनशील एवं सहयोगी वातावरण बनाने का आग्रह किया।

एससीईआरटी की प्रवक्ता प्रिया गुसाईं ने मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच पर आधारित गतिविधियाँ आयोजित कीं।

उत्कृष्ट प्रस्तुतियों का चयन 

    निर्णायक मंडल ने विषयवस्तु, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और विषय की समझ के आधार पर प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। निर्णायक मंडल द्वारा प्रथम प्रतिभा रावत जे॰एस॰एन एस एन एम इंटर कॉलेज गैरसैंण चमोली, द्वितीय आरवी कंसवाल ऋषिकेश इंटरनेशनल स्कूल टिहरी गढ़वाल तथा तृतीय स्थान लक्ष्मी भट्ट सराफ़ पब्लिक स्कूल खटीमा उधम सिंह नगर एवं सभी प्रतिभागियो को प्रमाणपत्र, मेडल, पुस्तक और सहायक सामग्री देकर पुरस्कृत किया एवं अन्य को सांत्वना पुरस्कार प्रदान कर प्रमाण पत्र दिए गए। कार्यक्रम में डॉ. नमिता भंडारी, डॉ.हिमानी थापा, रमेश बडोनी, डॉ संजय भट्ट, डॉ कपिल देव सेमवाल , राजकुमार,  सिद्धार्थ कुमार मार्गदर्शक शिक्षक तथा अभिभावक सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

RIE अजमेर में भारतीय ज्ञान परंपरा पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न: उत्तराखंड के छह शिक्षकों ने किया प्रतिभाग

 

अजमेर, 10 अक्टूबर 2026। क्षेत्रीय शिक्षण संस्थान (RIE), NCERT अजमेर में 5 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में मिडिल स्टेज के सामाजिक विज्ञान शिक्षण में भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems–IKS) के प्रभावी समावेशन पर विशेष मंथन किया गया। इस ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण में उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल अवधारणाओं, प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं प्रमाणों के साथ कक्षा-कक्ष शिक्षण से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने अपने क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक श्रेष्ठ परंपराओं को साझा कर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार किया।

उत्तराखंड से छह शिक्षकों ने किया प्रतिभाग

प्रशिक्षण में उत्तराखंड से छह प्रतिभागी शामिल हुए—

  • रविदर्शन तोपाल 
  • डॉ. ताजबर पड़िहार – देहरादून
  • दीपिका श्रीवास्तव – टिहरी गढ़वाल
  • सुरेंद्र कंडवाल – चमोली
  • शीशपाल पंवार – रुद्रप्रयाग
  • चंद्रा अधिकारी – चंपावत

प्रशिक्षण के अतिरिक्त प्रतिभागियों ने अजमेर एवं पुष्कर के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों, जिनमें ब्रह्मा मंदिर, सावित्री मंदिर, जैन मंदिर तथा ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह शामिल हैं, का शैक्षिक भ्रमण किया। इस दौरान भारतीय स्थापत्य कला, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक जीवन का प्रत्यक्ष अवलोकन भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।

विशेष आभार एवं शैक्षिक उपलब्धि

प्रतिभागियों ने RIE अजमेर के विद्वान संकाय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से डॉ. गणेश जोशी, असिस्टेंट प्रोफेसर, RIE अजमेर एवं उत्तराखंड के नोडल मार्गदर्शक, के योगदान की सराहना की गई। उत्तराखंड की धरती से जुड़े डॉ. जोशी भारतीय ज्ञान परंपरा एवं शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवाएँ दे रहे हैं।

यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप भारतीय ज्ञान, वैज्ञानिक चिंतन और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ। प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव उत्तराखंड के विद्यालयों में सामाजिक विज्ञान शिक्षण को अधिक संदर्भपरक, अनुभवात्मक और समृद्ध बनाने में सहायक होंगे।

Thursday, October 08, 2026

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रतियोगिता 2026 में उत्तराखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल का शानदार प्रदर्शन: दो विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर रचा इतिहास

 

पौड़ी गढ़वाल के पाबौ विकासखंड स्थित छोटे से राजकीय प्राथमिक विद्यालय के पांच नन्हे विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा गीत और नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर उत्तराखंड की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को गौरवान्वित किया।

देहरादून/पौड़ी गढ़वाल | 08 अक्टूबर 2026 | विशेष शैक्षिक उपलब्धि

पहाड़ के नन्हे सितारों की राष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि

उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में नवाचार, रचनात्मक शिक्षण और डिजिटल साक्षरता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पाबौ स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल से सामने आया है।

विद्यालय के पांच प्रतिभाशाली विद्यार्थियों दक्षित, अनमोल, आराध्या, यशवंत एवं शीतल ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रतियोगिता 2026 (National Cyber Security Awareness Competition 2026) की दो अलग-अलग विधाओं में प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय, जनपद एवं उत्तराखंड राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि प्राथमिक कक्षाओं में अध्ययनरत इन बच्चों ने साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण और तकनीकी विषय को गीत-संगीत तथा नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सरल, रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

भारत सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दोहरी सफलता

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (Information Security Education and Awareness – ISEA) पहल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं नागरिकों में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, साइबर स्वच्छता और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूकता विकसित करना है।

जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान आयोजित इस राष्ट्रीय पहल में देशभर के विद्यार्थियों को रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संबंधी संदेश प्रसारित करने का अवसर प्रदान किया गया।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल के विद्यार्थियों ने दो प्रमुख श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।

प्रथम उपलब्धि: साइबर स्वच्छता गीत (Cyber Hygiene Song) में प्रथम स्थान

विद्यालय के बच्चों ने साइबर सुरक्षा पर आधारित एक आकर्षक, लयबद्ध और संदेशपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।

गीत के माध्यम से बच्चों ने मजबूत पासवर्ड बनाने, अनजान लिंक से सावधान रहने, व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखने तथा इंटरनेट का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने जैसे महत्वपूर्ण संदेश दिए।

संगीत और रचनात्मक अभिव्यक्ति का यह प्रयोग दर्शाता है कि कठिन तकनीकी विषयों को भी छोटे बच्चों तक आनंददायक शिक्षण विधियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।

द्वितीय उपलब्धि: नुक्कड़ नाटक (Street Play) में प्रथम स्थान

दूसरी श्रेणी में विद्यार्थियों ने साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल गोपनीयता तथा इंटरनेट पर सुरक्षित व्यवहार से संबंधित विषयों पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।

नाटक में बच्चों ने संवाद, अभिनय और वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से यह संदेश दिया कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रस्तुति ने यह सिद्ध किया कि प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थी भी उपयुक्त मार्गदर्शन मिलने पर साइबर सुरक्षा जैसे समकालीन विषयों को समझकर समाज तक उपयोगी संदेश पहुंचा सकते हैं।

शिक्षक डॉ. अतुल बमराड़ा का नवाचारी मार्गदर्शन 

इस उल्लेखनीय उपलब्धि के पीछे विद्यालय के सहायक अध्यापक डॉ. अतुल बमराड़ा का विशेष शैक्षिक योगदान रहा।

उन्होंने साइबर सुरक्षा जैसे जटिल विषय को प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों की समझ के अनुरूप सरल बनाया और गीत तथा नुक्कड़ नाटक जैसी कला-समेकित शिक्षण विधियों के माध्यम से बच्चों को राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयार किया।

उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने केवल प्रतियोगिता के लिए प्रस्तुतियां तैयार नहीं कीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन जिम्मेदारी और साइबर जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण जीवनोपयोगी कौशल भी सीखे।

यह सफलता दर्शाती है कि एक समर्पित और नवाचारी शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विद्यालय नेतृत्व एवं शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती नंदा रावत ने विद्यार्थियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे विद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास की सराहना की।

निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड, श्रीमती बंदना गर्ब्याल ने इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों और मार्गदर्शक शिक्षक को बधाई देते हुए इसे सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षा की दिशा में प्रेरणादायक सफलता बताया।

इसी क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी, पाबौ, श्री अमित चौहान ने भी विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार को शुभकामनाएं देते हुए इस उपलब्धि को विकासखंड के लिए गौरव का विषय बताया।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल की यह सफलता राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उस भावना को साकार करती है, जिसमें अनुभवात्मक अधिगम, कला-समेकित शिक्षण, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन तथा जीवनोपयोगी कौशलों के विकास पर विशेष बल दिया गया है।

आज डिजिटल तकनीक बच्चों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। ऐसे में प्राथमिक स्तर से ही साइबर सुरक्षा, डिजिटल नागरिकता और जिम्मेदार इंटरनेट व्यवहार के प्रति जागरूकता विकसित करना आवश्यक है।

गीत, नाटक, कहानी, गतिविधि और सामूहिक प्रस्तुति जैसी शिक्षण विधियां बच्चों को जटिल अवधारणाओं को सहज रूप से समझने तथा लंबे समय तक याद रखने में सहायता करती हैं।

यह उपलब्धि उत्तराखंड के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत है कि वे पाठ्यक्रम आधारित शिक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों को रचनात्मक, व्यावहारिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने के अवसर प्रदान करें।

SCERT उत्तराखंड से नन्हे विजेताओं को हार्दिक बधाई

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड की ओर से राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल के पांचों प्रतिभाशाली विद्यार्थियों—दक्षित, अनमोल, आराध्या, यशवंत एवं शीतल—को इस दोहरी राष्ट्रीय सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।

साथ ही मार्गदर्शक शिक्षक डॉ. अतुल बमराड़ा, प्रधानाध्यापिका  नंदा रावत तथा विद्यालय से जुड़े सभी शिक्षकों एवं शिक्षा अधिकारियों के प्रयास सराहनीय हैं।

यह उपलब्धि केवल दो राष्ट्रीय पुरस्कारों की सफलता नहीं, बल्कि इस विश्वास की जीत है कि उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा, रचनात्मकता और नवाचार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

छोटे विद्यालय, बड़े सपने और राष्ट्रीय पहचान—यही है बदलते उत्तराखंड की शिक्षा की प्रेरणादायक तस्वीर।

आधिकारिक परिणामों से उपलब्धि की पुष्टि

प्रतियोगिता के आधिकारिक परिणाम पोर्टल पर उत्तराखंड की दोनों विजेता टीमों का विवरण उपलब्ध है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दोनों प्रथम पुरस्कार राज्यस्तरीय विजेता श्रेणी में दर्ज हैं, न कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय विजेता श्रेणी में।

प्रतियोगिता

विजेता टीम

पुरस्कार

        यूनिक आईडी

साइबर सुरक्षा गीत  

 Anmol & Team

            उत्तराखंड में प्रथम

                HS08240

नुक्कड़ नाटक

Dakshit & Team

            उत्तराखंड में प्रथम                     

                NN08241

इसलिए प्रकाशन में उपलब्धि को “राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रतियोगिता 2026 में उत्तराखंड की दो विधाओं में राज्यस्तरीय प्रथम पुरस्कार” लिखना अधिक तथ्यपरक होगा।

हैकथॉन 3.0 की सफलता के लिए SCERT उत्तराखंड की बड़ी पहल: 100 से अधिक मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों को ऑनलाइन अभिमुखीकरण प्रशिक्षण

 

नवाचार, तकनीकी दक्षता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग द्वारा राज्यस्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन; शिक्षकों को हैकथॉन पोर्टल पर आवेदन, पात्रता, मेंटरिंग, मूल्यांकन एवं जनपदस्तरीय समन्वय की दी गई विस्तृत जानकारी।

देहरादून | 08 अक्टूबर 2026 | SCERT उत्तराखंड

हैकथॉन 3.0: शिक्षकों और विद्यार्थियों में नवाचार की संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के R P Badoni  द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग द्वारा संचालित इनोवेट उत्तराखंड हैकथॉन 3.0 (Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0) के सफल क्रियान्वयन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से एक राज्यस्तरीय ऑनलाइन अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई।

इस कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से 100 से अधिक मेंटर शिक्षकों, सुपरवाइजर शिक्षकों, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) के आईटी विभाग के प्रतिनिधियों, कौशलम कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों, इंस्पायर अवॉर्ड से संबंधित शिक्षकों तथा ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) एवं क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (CRP) ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य हैकथॉन 3.0 की अवधारणा, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता संबंधी मानदंड, तकनीकी प्रक्रियाओं तथा मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों की जिम्मेदारियों के संबंध में सभी प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।

यह पहल प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा को नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या-समाधान कौशल, डिजिटल दक्षता और उद्यमशीलता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

आईटी विभाग द्वारा हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण: पोर्टल की प्रत्येक प्रक्रिया को उदाहरण सहित समझाया गया

ऑनलाइन कार्यशाला का संचालन एवं प्रशिक्षण SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग के प्रवक्ता श्री रमेश चौधरी द्वारा किया गया।

उन्होंने प्रतिभागियों को लाइव डेमोंस्ट्रेशन और हैंड्स-ऑन ट्यूटोरियल के माध्यम से हैकथॉन 3.0 के आधिकारिक पोर्टल की कार्यप्रणाली समझाई।

प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई—

  1. हैकथॉन पोर्टल पर लॉगिन: उम्मीदवार किस प्रकार पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर सकते हैं।

  2. अभ्यर्थियों की पात्रता: छात्र, शिक्षक, DIET एवं SCERT संकाय सदस्य तथा अन्य निर्धारित श्रेणियों में कौन आवेदन कर सकता है।

  3. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया: उम्मीदवारों की जानकारी, परियोजना का विवरण और आवश्यक सूचनाओं को पोर्टल पर दर्ज करने की प्रक्रिया।

  4. नवाचार आधारित परियोजना चयन: स्थानीय समस्याओं की पहचान करके उन्हें व्यावहारिक एवं तकनीकी समाधान में परिवर्तित करने के उदाहरण।

  5. मेंटर शिक्षकों की भूमिका: विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को परियोजना तैयार करने, समस्या पहचानने, समाधान विकसित करने और आवेदन करने में सहयोग प्रदान करना।

  6. सुपरवाइजर शिक्षकों की जिम्मेदारियां: विद्यालय, संकुल, विकासखंड और जनपद स्तर पर आवेदन एवं प्रतिभागिता की निगरानी और समन्वय करना।

प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की संभावित परियोजनाओं के उदाहरण प्रस्तुत किए गए, जिससे प्रतिभागियों को यह समझने में सहायता मिली कि सामान्य विद्यालयी समस्याओं को भी नवाचार आधारित परियोजनाओं का रूप दिया जा सकता है।

पिछले हैकथॉन विजेताओं की सफलता से प्रेरणा लेने का आह्वान

कार्यशाला के दौरान पूर्व वर्षों में आयोजित इनोवेट उत्तराखंड हैकथॉन 1.0 एवं 2.0 की उपलब्धियों, विजेता शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की नवाचारी परियोजनाओं की जानकारी भी साझा की गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि किस प्रकार राज्य के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्थानीय समस्याओं को पहचानकर रचनात्मक एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए तथा राज्यस्तरीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

पूर्व के दोनों संस्करणों में संयुक्त रूप से 4,900 से अधिक परियोजना प्रस्ताव प्राप्त हुए तथा 430 से अधिक प्रस्ताव विभिन्न चरणों में चयनित हुए। इन उपलब्धियों ने राज्य में नवाचार आधारित गतिविधियों के प्रति शिक्षकों और विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि को रेखांकित किया है।

हैकथॉन 2.0 के विजेता विद्यार्थियों द्वारा आगे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने जैसे उदाहरणों से भी यह संदेश दिया गया कि विद्यालय स्तर पर विकसित एक छोटा नवाचार भविष्य में बड़े शोध, स्टार्टअप अथवा सामाजिक समाधान का आधार बन सकता है।

मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका

अभिमुखीकरण कार्यक्रम में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि हैकथॉन 3.0 को प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों, ग्रामीण विद्यालयों एवं सीमित संसाधनों वाले संस्थानों तक पहुंचाने में मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

सभी संबंधित शिक्षकों से अनुरोध किया गया कि वे अपने जनपदों, विकासखंडों और संकुलों में हैकथॉन 3.0 के संबंध में व्यापक जागरूकता विकसित करें तथा अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को आवेदन करने के लिए प्रेरित करें।

इसके अंतर्गत मेंटर शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे नवाचार में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों की पहचान करें, उन्हें उपयुक्त विषय चुनने में मार्गदर्शन दें और उनके विचारों को परियोजना प्रस्ताव में परिवर्तित करने में सहयोग करें।

वहीं सुपरवाइजर शिक्षकों को आवेदन प्रक्रिया की निगरानी, विद्यालयों से समन्वय तथा प्रतिभागियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड संधारित करने के लिए प्रेरित किया गया।

मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों के लिए मानदेय तथा उत्तरदायित्व

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि हैकथॉन 3.0 के अंतर्गत निर्धारित कार्यों में योगदान देने वाले पात्र मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों के लिए प्रचलित नियमों, स्वीकृत व्यवस्था एवं निर्धारित मानदंडों के अनुसार मानदेय का प्रावधान रहेगा।

इसके लिए शिक्षकों को सौंपे गए दायित्वों का प्रभावी निर्वहन तथा उनके कार्यों का समुचित अभिलेखीकरण आवश्यक होगा।

विशेष रूप से निम्नलिखित कार्यों पर ध्यान देने का अनुरोध किया गया—

  • अपने जनपद, विकासखंड एवं संकुल स्तर पर हैकथॉन 3.0 का प्रचार-प्रसार करना।

  • पात्र विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रोत्साहित करना।

  • आवेदन करने वाले शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का विद्यालयवार, विकासखंडवार एवं जनपदवार रिकॉर्ड रखना।

  • आवेदकों को पोर्टल से संबंधित तकनीकी समस्याओं के समाधान में सहयोग देना।

  • नवाचार परियोजनाओं के विकास में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना।

  • निर्धारित प्रारूप में प्रगति रिपोर्ट एवं आवेदन संबंधी सूचनाएं संबंधित समन्वयकों तक पहुंचाना।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल आवेदन संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं की पहचान, निरंतर मार्गदर्शन और पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करना है।

कौशलम, इंस्पायर अवॉर्ड और DIET की सहभागिता से नवाचार को मिलेगा नया विस्तार

कार्यशाला की एक महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों एवं संस्थागत नेटवर्क से जुड़े शिक्षकों की सहभागिता रही।

कौशलम कार्यक्रम से जुड़े शिक्षक विद्यार्थियों में व्यावसायिक कौशल, उद्यमशीलता और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान संबंधी क्षमताओं को विकसित करने में सहयोग कर सकते हैं।

इसी प्रकार इंस्पायर अवॉर्ड से जुड़े शिक्षक वैज्ञानिक नवाचार, प्रयोग आधारित अधिगम तथा मौलिक विचारों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

DIET के आईटी विभाग तथा BRP एवं CRP नेटवर्क की सहभागिता से हैकथॉन की गतिविधियों को विद्यालयों तक पहुंचाने, शिक्षकों का मार्गदर्शन करने और विकासखंड स्तर पर नियमित समन्वय स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

इस प्रकार हैकथॉन 3.0 को विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों के बीच सहयोग एवं समन्वय स्थापित करने वाले मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

नवाचार के प्रमुख क्षेत्र

इनोवेट उत्तराखंड हैकथॉन 3.0 के अंतर्गत प्रतिभागियों को विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक एवं तकनीकी चुनौतियों पर आधारित परियोजनाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इनमें प्रमुख रूप से शिक्षा एवं स्मार्ट लर्निंग, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, कृषि एवं ग्रामीण विकास, पर्यटन, बालिका शिक्षा, समावेशी शिक्षा, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, कोडिंग तथा गेम आधारित अधिगम जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं, वन्यजीव सुरक्षा, जल संरक्षण, आपदा पूर्व चेतावनी और दूरस्थ विद्यालयों के लिए कम लागत वाले तकनीकी समाधानों पर आधारित परियोजनाएं विशेष रूप से उपयोगी हो सकती हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप पहल

हैकथॉन 3.0 की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उन उद्देश्यों के अनुरूप है, जिनमें अनुभवात्मक अधिगम, आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, समस्या-समाधान और कौशल आधारित शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तक आधारित ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों को समझने, उनके समाधान खोजने और अपने विचारों को व्यवहार में लागू करने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

साथ ही शिक्षक भी पारंपरिक अध्यापन की भूमिका से आगे बढ़कर नवाचार के मार्गदर्शक, परियोजना मेंटर तथा सहयोगात्मक अधिगम के प्रेरक के रूप में कार्य कर सकते हैं।

राज्यव्यापी सहभागिता और प्रभावी निगरानी की दिशा में प्रयास

SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग द्वारा आयोजित यह अभिमुखीकरण कार्यशाला हैकथॉन 3.0 के प्रभावी संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

100 से अधिक शिक्षकों एवं शैक्षिक समन्वयकों की सहभागिता यह दर्शाती है कि राज्य में नवाचार आधारित गतिविधियों को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने के लिए एक व्यापक सहयोगी नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।

आगामी चरणों में मेंटर एवं सुपरवाइजर शिक्षकों के माध्यम से अधिकाधिक विद्यालयों तक पहुंच बनाना, पात्र प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करना, गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना तथा आवेदन एवं परियोजना प्रगति का व्यवस्थित अभिलेखीकरण करना कार्यक्रम की प्रमुख प्राथमिकताएं रहेंगी।

हैकथॉन 3.0: हर विद्यालय से एक नवाचार, हर विद्यार्थी को एक अवसर

इनोवेट उत्तराखंड हैकथॉन का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में ऐसी नवाचार संस्कृति विकसित करना है, जिसमें विद्यार्थी समस्याओं को अवसर के रूप में देखें और शिक्षक उनके विचारों को वास्तविक समाधान में बदलने के लिए प्रेरित करें।

SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग द्वारा आयोजित यह ऑनलाइन अभिमुखीकरण कार्यशाला इसी व्यापक उद्देश्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

शिक्षकों, DIET संकाय सदस्यों, BRP, CRP और विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों से जुड़े मेंटरों का संयुक्त प्रयास हैकथॉन 3.0 को राज्य के दूरस्थ विद्यालयों तक पहुंचाने और उत्तराखंड को विद्यालयी नवाचार के एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायक हो सकता है।

आइए, नवाचार को प्रत्येक विद्यालय तक पहुंचाएं और उत्तराखंड के विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को नई पहचान दें।