Friday, January 23, 2026

HACKATHON 2.0 Grand Finale: 2026

2888+ प्रविष्टियों में से चुने गए नवाचारों ने शिक्षा के भविष्य की दिशा दिखाई

देहरादून।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखण्ड के सभागार में हैकाथॉन 2.0 का ग्रैंड फ़िनाले अत्यंत उत्साह, नवाचार एवं प्रेरणादायी वातावरण में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह आयोजन विद्यालयी शिक्षा में नवोन्मेष, तकनीकी समाधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और समस्या-आधारित सोच को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में उभरा।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अकादमिक निदेशक, उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा बन्दना गर्ब्याल रहीं, जिन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षा का भविष्य नवाचार, तकनीक और रचनात्मक सोच से ही तय होगा, और हैकाथॉन जैसे मंच विद्यार्थियों व शिक्षकों को यह अवसर प्रदान करते हैं।”
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मुकुल कुमार सती, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखण्ड उपस्थित रहे।

मुख्य एवं अन्य अतिथियों का स्वागत इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के माध्यम से किया गया। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक कमला बड़वाल, उपनिदेशक शैलेन्द्र चौहान, पल्लवी नैन एवं डॉ. के. एन. बिजलवान को भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ अकादमिक निदेशक द्वारा किया गया, जबकि डॉ. मुकुल सती ने माध्यमिक शिक्षा में नवाचार की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवान ने सभी अतिथियों, जूरी सदस्यों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

हैकाथॉन 2.0: चयन प्रक्रिया और अंतिम प्रस्तुतियाँ

हैकाथॉन 2.0 में राज्य भर से 2888+ प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। बहु-स्तरीय मूल्यांकन के बाद 20 छात्र एवं 10 शिक्षक अंतिम चरण के लिए चयनित किए गए

अंतिम चरण में चयनित प्रतिभागियों ने जूरी के समक्ष अपने आइडिया और प्रोजेक्ट्स की लाइव प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें—

  • कक्षा शिक्षण को रोचक बनाने वाले डिजिटल लर्निंग टूल्स

  • AI आधारित मूल्यांकन एवं फीडबैक सिस्टम

  • ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लिए लो-कॉस्ट टेक्नोलॉजी समाधान

  • समावेशी शिक्षा, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए डिजिटल सपोर्ट

  • साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और STEM आधारित नवाचार जैसे विषय प्रमुख रूप से सामने आए।

विजेता परियोजनाएँ: शिक्षक वर्ग

शिक्षक वर्ग (प्रथम 4 विजेता)

  • डॉ. अशोक बडोनी हिमालयी औषधीय पौधों पर आधारित बायो-प्लास्टिक मालू (Bauhinia vahlii), नीम एवं एलोवीरा का संयुक्त प्रयोग (AI Future Enabled) 

  • प्रभात रावत – AUTOMATIC FIRE CONTROL AND ALERT SYSTEM

  • डॉ. मुकेश कुमार नौटियाल – Kahoot for Embedded AI and Adaptive Learning! Ecosystem

  • दीवान सिंह नेगी – वियर अलर्ट एण्ड प्रोटेकसन  सिस्टोम 

इन सभी प्रोजेक्ट्स में व्यावहारिक उपयोग, नवाचार और स्केलेबिलिटी को विशेष रूप से सराहा गया।

विजेता परियोजनाएँ: छात्र वर्ग

छात्र वर्ग (प्रथम 4 विजेता)

  • मयंक बिष्ट – Ai based ruler area emerging system

  • आंचल गाजर घास , लैंटाना एवं पाइन नीडल ( पिरुल ) आधारित बहु - स्तरीय पर्यावरण - अनुकूल कूलर पैड का विकास ( भविष्य में A.I. आधारित स्मार्ट कूलिंग प्रणाली के साथ )

  • सपना पाइनस नीडल (pinus needle) एवं सूखी पत्तियों से अग्निरोधी इको टाइल्स निर्माण: अग्नि रोधी रोकथाम हेतु एक समाधान |

  • कोमल विश्वकर्मा  स्मार्ट ग्राम एवं आजीविका सशक्तिकरण मंच 

छात्रों की प्रस्तुतियों में आत्मविश्वास, समस्या की स्पष्ट समझ और तकनीकी सोच स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

अन्य चयनित 22 प्रतिभागी: नवाचार की मजबूत श्रृंखला

विजेताओं के अतिरिक्त 22 अन्य प्रतिभागियों को भी उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित किया गया।
इन प्रोजेक्ट्स ने यह सिद्ध किया कि उत्तराखण्ड के शिक्षक और विद्यार्थी शिक्षा की चुनौतियों के लिए समाधान-उन्मुख सोच रखते हैं। सभी चयनित प्रतिभागियों को निदेशकगण एवं जूरी द्वारा सम्मान प्रदान किया गया




  • विगत वर्ष की विजेता छात्रा अनिषा शाही एवं शिक्षक संदीप कुमार को ₹11,000/- का नकद पुरस्कार अगस्त्य नवम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन के सलाहकार द्वारा प्रदान किया गया।

  • CoGrad संस्थान ने इस वर्ष के चयनित विजेताओं को सम्मानित करने की घोषणा की।

  • अगस्त्य नवम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन ने चयनित प्रोजेक्ट्स को प्रोटोटाइप में विकसित करने हेतु निरंतर सहयोग देने का आश्वासन दिया।

जूरी, की-नोट और आयोजन सहयोग

कार्यक्रम में मोहित नागपाल, CEO, Incubation Unit, UPES देहरादून तथा डॉ. सुषमा गैरोला, वैज्ञानिक, USAC देहरादून ने जूरी सदस्य के रूप में निर्णायक भूमिका निभाई।
की-नोट स्पीकर प्रो. सुगंधा शर्मा UPES देहरादूनने AI और शिक्षा पर प्रेरक संबोधन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के समन्वयक रमेश बडोनी ने आयोजन की संपूर्ण रूपरेखा एवं प्रबंधन का सफल संचालन किया।
एंकर/प्रवक्ता अनुज्ञा पैन्यूली एवं सौरभ जोशी के प्रभावी संवाद ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। तकनीकी समन्वय में विनय उनियाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
साथ ही प्रदयुमन रावत उप परियोजना निदेशकशिव प्रकाश वर्मा, गोपाल घुगत्याल , अरुण थपलीयाल, आशीष कुकरेती, मनीष भट्ट , सुनिल भट्ट रजत छिब्बर, अचल थपाली, अतुल कथैत, हिमानी भट्ट, विनोद चौहान, श्रेयस एवं अन्य संकाय सदस्यों के सहयोग से कार्यक्रम पूर्ण रूप से सफल रहा।

हैकाथॉन 2.0 ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखण्ड में नवाचार की मजबूत नींव तैयार हो चुकी है। शिक्षक और छात्र मिलकर शिक्षा को तकनीक-समर्थ, समावेशी और भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

ईवेंट लाइव व्यू - क्लिक हियर 

 कई स्टार्टअप्स और एन जी ओ ने भी ईवेंट मे स्टॉल के माध्यम से शिरकत की जिनमे अगस्त्य इंटरनेशनल की मोबाईल लैब , क्लैप वैन जिसमे 120 क्रोम बुक , आई टी डी ए से ड्रोन , उत्तरांचल यूनिवर्सिटी से चार नवाचारी उदयम शील प्रोजेक्ट्स , आसरा ट्रस्ट और अमेरिकन फाउंडेशन इंडिया ने भी प्रदर्शन किया । 

Tuesday, January 20, 2026

SCERT उत्तराखंड के ICT Initiatives: शिक्षा में डिजिटल तकनीकी से परिवर्तन

 

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ने शिक्षा के स्वरूप को तेजी से बदल दिया है, और इस दिशा में SCERT उत्तराखंड का ICT इनिशिएटिव एक सराहनीय कदम है। यह पहल शिक्षकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में नवाचार को बढ़ावा देती है।

इस कार्यक्रम को SCERT उत्तराखंड द्वारा  सी पी डी एवं  स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम के अंतर्गत  से शुरू किया गया। इसके तहत शिक्षकों के लिए बड़े पैमाने पर MOOCs (ओपन ऑनलाइन पाठ्यक्रम) संचालित किए गए, जिनमें ICT टूल्स का व्यावहारिक उपयोग सिखाया जाता है। अब तक 46,000 से अधिक शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और 47,000 से अधिक शिक्षकों को प्रमाणन दिया जा चुका है।

डिजिटल शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए, SCERT की वेबसाइट एक ओपन एजुकेशन रिसोर्स के रूप में उभरी है, जिसे लाखों लोग उपयोग कर रहे हैं। शिक्षकों और छात्रों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने हेतु राज्य-स्तरीय हैकाथॉन का आयोजन भी किया जाता है, जहाँ वे अपने डिजिटल विचार और समाधान प्रस्तुत करते हैं।

छात्रों के लिए CLAP प्रोजेक्ट के माध्यम से 120 क्रोमबुक का उपयोग कर रियल-टाइम, करिकुलम-आधारित गतिविधियाँ कराई जा रही हैं। साथ ही, डिज़ाइन थिंकिंग पर आधारित वीडियो सीरीज़ छात्रों को प्रोटोटाइप और समस्या-समाधान कौशल विकसित करने में मदद करती है।

इन पहलों के अंतर्गत प्रकाशित ई-मैगज़ीन “रतब्याणी” डिजिटल कंटेंट, लेख और शोध को मंच प्रदान करती है। यह वर्ष में दो बार प्रकाशित होती है और शिक्षकों व छात्रों दोनों के लिए उपयोगी संसाधन है।

कुल मिलाकर, SCERT उत्तराखंड का यह ICT इनिशिएटिव शिक्षा में तकनीकी नवाचार की मजबूत नींव रख रहा है। अब समय है कि शिक्षक और छात्र SCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाएँ और डिजिटल शिक्षा के इस परिवर्तन का हिस्सा बनें।

Monday, January 19, 2026

परीक्षा पे चर्चा 2026 में उत्तराखंड का परचम

ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र रोहन सिंह राणा का वीडियो चयनित, पहली बार दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से करेंगे संवाद

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के परीक्षा पे चर्चा 2026 कार्यक्रम ने इस वर्ष देशभर में सहभागिता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इस बार न केवल पिछले वर्ष का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटा, बल्कि पूरे देश से 4 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय पोर्टल पर अपने प्रश्न पंजीकृत कराए, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

उत्तराखंड की ऐतिहासिक सहभागिता

इस राष्ट्रीय महाअभियान में उत्तराखंड राज्य की भागीदारी अत्यंत उल्लेखनीय रही। परीक्षा पे चर्चा का यह राज्य के लिए 9वां संस्करण था, जिसमें

  • 7 लाख 38 हजार विद्यार्थी,
  • 53 हजार शिक्षक, तथा
  • 14 हजार से अधिक अभिभावकों

ने सक्रिय रूप से सहभागिता करते हुए अपने प्रश्न पोर्टल पर दर्ज कराए। यह आँकड़े उत्तराखंड के लिए अब तक की सबसे बड़ी सहभागिता को दर्शाते हैं।

नेतृत्व और समन्वय की अहम भूमिका

इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड एवं कार्यक्रम की राज्य नोडल अधिकारी बंदना गर्ब्याल का मार्गदर्शन और सतत प्रयास अत्यंत सराहनीय रहा।
कार्यक्रम के राज्य समन्वयक  सुनील भट्ट द्वारा किए गए प्रभावी समन्वय, योजनाबद्ध क्रियान्वयन और जिलास्तरीय सहभागिता ने इस पूरे अभियान को सफल बनाया। इस अवसर पर अपर निदेशक  पदमेन्द्र सकलानी ने भी इस उपलब्धि के लिए समस्त टीम को बधाई संदेश दिया।

वीडियो चयन की राष्ट्रीय प्रक्रिया

भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार, विद्यार्थियों से निर्धारित विषयों पर एक मिनट के विचारात्मक वीडियो तैयार कर परीक्षा पे चर्चा पोर्टल पर अपलोड कराए गए। राज्य के सभी जनपदों से प्राप्त वीडियो में से गुणवत्ता और विषय-वस्तु के आधार पर 10 उत्कृष्ट वीडियो भारत सरकार को भेजे गए।

मूल्यांकन के उपरांत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) एवं शिक्षा मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय जनपद रुद्रप्रयाग से एक वीडियो का चयन किया गया।

ग्रामीण उत्तराखंड से राष्ट्रीय मंच तक: रोहन सिंह राणा

  • कक्षा: 9
  • विद्यालय: राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पाला कुराली
  • विकासखंड: जखोली
  • जनपद: रुद्रप्रयाग

रोहन एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवार से आते हैं। उनके माता-पिता कृषि कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। यह रोहन का पहला दिल्ली प्रवास है, जहाँ वे 20 जनवरी से 23 जनवरी 2026 तक देशभर के चयनित विद्यार्थियों के साथ रहकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से सीधे संवाद करेंगे।

पूरे जनपद में खुशी और गर्व

इस उपलब्धि से न केवल रोहन के परिवार, बल्कि पूरे गाँव और जनपद में खुशी की लहर है।
रोहन के माता-पिता ने इसे अपने जीवन का सबसे गर्वपूर्ण क्षण बताया। वहीं मुख्य शिक्षा अधिकारी, रुद्रप्रयाग परमेंद्र कुमार बिष्ट एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है और यह सिद्ध करती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती

परीक्षा पे चर्चा 2026 में उत्तराखंड की यह सफलता राज्य के मजबूत शिक्षा तंत्र, शिक्षकों के समर्पण और ग्रामीण विद्यार्थियों की असीम संभावनाओं का जीवंत प्रमाण है। यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में और अधिक विद्यार्थियों को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने के लिए प्रेरित करेगी।

SCF Implemented : स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता, तकनीक और मूल्यांकन का नया दौर

 

एससीईआरटी उत्तराखंड की पहल से राज्य पाठ्यचर्या में बड़े सुधार

उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्ता, तकनीक और समग्र मूल्यांकन से जोड़ने की दिशा में राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप तैयार की गई नई राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (State Curriculum Framework – SCF) के माध्यम से शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, छात्र-केंद्रित और भविष्योपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम से जुड़ेगी स्कूल शिक्षा

नई पाठ्यचर्या में राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (NETF) को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। इसका उद्देश्य स्कूल शिक्षा को आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार और शोध आधारित नीति-निर्माण से जोड़ना है। यह फोरम केंद्र व राज्य सरकार को शिक्षा में तकनीक के प्रभावी उपयोग हेतु परामर्श देगा तथा ग्रामीण, दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक डिजिटल संसाधनों की पहुँच सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
इसके माध्यम से शिक्षकों को नवीन शैक्षिक तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण और उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

पाठ्यचर्या में बदलाव के लिए एससीईआरटी का नया मॉडल

एससीईआरटी द्वारा राज्य पाठ्यचर्या में आवश्यक बदलावों के लिए एक नया मॉडल तैयार किया गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से कक्षा 1 से 8 तक लागू किया जाएगा। इस मॉडल का मुख्य आधार समग्र मूल्यांकन प्रणाली (Holistic Assessment) है।
इसके अंतर्गत अब केवल लिखित परीक्षाओं पर निर्भरता नहीं रहेगी, बल्कि परियोजना कार्य, समूह गतिविधियाँ, भूमिका-निर्वहन, पोर्टफोलियो और निरंतर आकलन को महत्व दिया जाएगा।

मूल्यांकन प्रक्रिया में छात्र और अभिभावक भी होंगे सहभागी

नई व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि छात्र, शिक्षक और अभिभावक—तीनों मूल्यांकन प्रक्रिया में सहभागी होंगे।
इसके लिए होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) लागू किया जाएगा, जिसमें छात्र के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक विकास का 360-डिग्री मूल्यांकन होगा।
तीन विकासात्मक लक्ष्य तय किए गए हैं—

  1. दक्षताएँ और कौशल
  2. अभिभावकों की प्रतिक्रिया
  3. छात्र का पोर्टफोलियो

छात्रों की प्रगति को शुरुआती, प्रगतिशील और प्रवीण—तीन स्तरों पर आंका जाएगा।

न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस अनिवार्य

नई शिक्षा व्यवस्था के तहत राज्य के सरकारी विद्यालयों में अब कम से कम 220 शिक्षण दिवस अनिवार्य किए गए हैं। प्रतिदिन न्यूनतम साढ़े छह घंटे की पढ़ाई सुनिश्चित होगी।
इसके चलते शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन दीर्घ अवकाशों में कटौती का भी निर्णय लिया गया है। वर्तमान में जहाँ औसतन 200 दिन भी पढ़ाई नहीं हो पा रही थी, वहीं अब एनईपी-2020 के अनुरूप 220 कार्यदिवस सुनिश्चित किए जाएंगे।

गणित शिक्षा पर विशेष फोकस

नई पाठ्यचर्या में गणित को विशेष महत्व दिया गया है—

  • कक्षा 3 से 5 तक: वर्ष भर में 185 घंटे गणित पढ़ाना अनिवार्य
  • कक्षा 6 से 9: गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के लिए निर्धारित समय
  • कक्षा 9 और 10: सभी विद्यार्थियों के लिए गणित अनिवार्य

हालाँकि, विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार गणित के दो स्तर तय किए गए हैं—

  • सामान्य स्तर
  • उच्च स्तर (उन छात्रों के लिए जो आगे गणित पढ़ना चाहते हैं)

इसका उद्देश्य छात्रों की तार्किक क्षमता, बुनियादी गणितीय समझ और समस्या-समाधान कौशल को मजबूत करना है।

संतुलित और बहुविषयक पाठ्यक्रम

नई व्यवस्था में भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान के साथ-साथ कला, शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा को भी समान महत्व दिया गया है।
प्राथमिक स्तर पर कुल छह विषय पढ़ाए जाएंगे, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

भविष्य की शिक्षा की नींव

एससीईआरटी उत्तराखंड द्वारा तैयार की गई यह नई पाठ्यचर्या रूपरेखा न केवल परीक्षा-केंद्रित सोच से आगे बढ़कर सीखने की गुणवत्ता, तकनीकी सशक्तिकरण और समग्र विकास पर केंद्रित है।
इस रणनीतिक बदलाव से राज्य की स्कूली शिक्षा अधिक व्यावहारिक, समावेशी और जीवनोपयोगी बनेगी तथा छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार किया जा सकेगा।

Sunday, January 18, 2026

राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तराखंड : स्थापना दिवस पर उपलब्धियों का आकार

 

आज उत्तराखंड की शीर्ष अकादमिक संस्था राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद (एस.सी.ई.आर.टी.), उत्तराखंड का स्थापना दिवस है। यह दिवस केवल एक संस्था के जन्म का नहीं, बल्कि राज्य में शैक्षिक चिंतन, नवाचार और अकादमिक नेतृत्व की एक सशक्त यात्रा का प्रतीक है।

उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद वर्ष 2000 में यह स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया कि राज्य की अपनी एक ऐसी शीर्ष अकादमिक संस्था होनी चाहिए, जो शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या विकास, शैक्षिक अनुसंधान और नवनीत शैक्षिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन का दायित्व निभा सके। इसी आवश्यकता के परिणामस्वरूप 17 जनवरी 2002 को राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद (एस.सी.ई.आर.टी.) की स्थापना की गई।

सीमित संसाधनों से शुरू हुई यात्रा

स्थापना के समय एस.सी.ई.आर.टी. का संचालन तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक, टिहरी के नरेंद्र नगर स्थित कार्यालय के एक कक्ष से किया गया। यह दौर सीमित संसाधनों, न्यूनतम सुविधाओं और बड़े शैक्षिक दायित्वों का था। कुछ समय पश्चात यह संस्था नरेंद्र नगर में स्थित टिहरी नरेश के सचिवालय भवन में संचालित होने लगी, जहाँ से लंबे समय तक राज्य के शैक्षिक कार्यक्रमों का संचालन किया गया।

देहरादून स्थानांतरण और स्थायी भवन की प्रतीक्षा

वर्ष 2013 में एस.सी.ई.आर.टी. को देहरादून स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय भवन में स्थानांतरित किया गया। हालांकि स्थापना काल से ही एस.सी.ई.आर.टी. के लिए स्थायी भवन, अतिथि गृह और पूर्ण अकादमिक सेटअप की आवश्यकता महसूस की जाती रही। इस अभाव के कारण समय-समय पर इसे गैरसैंण अथवा अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने की चर्चाएँ भी होती रहीं।

यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि आज एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड के पास अपना समुचित भवन, अतिथि गृह और पर्याप्त अकादमिक आधारभूत संरचना उपलब्ध है, जो राज्य की अकादमिक गरिमा के अनुरूप है।

शिक्षक चयन प्रक्रिया और अकादमिक दृष्टि

नरेंद्र नगर काल से लेकर देहरादून स्थानांतरण तक एस.सी.ई.आर.टी. में शिक्षकों का चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के माध्यम से होता रहा। कुछ शिक्षक सीधे स्थानांतरण के माध्यम से भी यहाँ आए। इस प्रकार एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड में कार्यरत शिक्षकों के आने के मार्ग भिन्न-भिन्न रहे।

चूँकि किसी भी राज्य की एस.सी.ई.आर.टी. को अकादमिक थिंक टैंक माना जाता है, इसलिए यहाँ उच्च शैक्षणिक योग्यता, अकादमिक रुचि और नवाचार क्षमता वाले शिक्षकों का चयन अत्यंत आवश्यक है। शायद इसी कारण पूर्व में चयन प्रक्रिया को सुदृढ़ और प्रतिस्पर्धात्मक बनाया गया। चयनित शिक्षक मुख्यतः माध्यमिक शिक्षा की मूलधारा से जुड़े रहे, जिससे जमीनी अनुभव और अकादमिक दृष्टि का संतुलन बना रहा।

क्षमता अभिवर्धन और स्थानांतरण की चुनौती

एस.सी.ई.आर.टी. के लिए चयनित शिक्षकों के क्षमता अभिवर्धन हेतु राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर पर्याप्त धनराशि व्यय की जाती रही। इसके बावजूद, प्रशिक्षण का अलग कैडर न होने के कारण स्थानांतरण अधिनियम के अंतर्गत लंबे समय तक एस.सी.ई.आर.टी. में कार्यरत शिक्षकों का पुनः विद्यालयों में स्थानांतरण होता रहा, जिससे संस्थागत निरंतरता प्रभावित हुई।

भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में वर्ष 2013 में एस.सी.ई.आर.टी. एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) में कार्यरत कर्मियों के लिए अलग कैडर बनाए जाने संबंधी एक शासनादेश भी जारी हुआ। दुर्भाग्यवश, एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड आज भी इस शासनादेश के पूर्ण क्रियान्वयन की प्रतीक्षा कर रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली भूमिका

चाहे राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 का क्रियान्वयन हो, राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप पाठ्यपुस्तकों का विकास, या फिर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की बात हो—
एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान और प्रभावशाली भूमिका निभाई है।

इसके बावजूद, एक अलग प्रशिक्षण कैडर का अभाव आज भी इस संस्था के समक्ष एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक चुनौती के रूप में बना हुआ है।

स्थापना दिवस पर चिंतन और संकल्प

स्थापना दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और भविष्य की दिशा तय करने का समय भी है। इसी भाव के साथ,  शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों, और विशेष रूप से राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तराखंड के समस्त अधिकारियों, अकादमिक सदस्यों एवं कर्मियों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड आने वाले वर्षों में राज्य की शिक्षा को नई दिशा देने वाला एक और अधिक सशक्त अकादमिक केंद्र बने—यही कामना है।

निदेशक (अकादमिक) बन्दना गर्ब्याल का संदेश

राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तराखंड के स्थापना दिवस के पावन अवसर पर परिषद से जुड़े समस्त फैकल्टी सदस्यों, अकादमिक सहयोगियों एवं कार्मिकों को मैं हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देती हूँ।

एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड ने सीमित संसाधनों से प्रारंभ होकर आज एक सुदृढ़ अकादमिक संस्था के रूप में अपनी पहचान बनाई है। शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या एवं पाठ्यपुस्तक विकास, शैक्षिक अनुसंधान तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में परिषद की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण और प्रभावशाली रही है। यह उपलब्धियाँ आप सभी के निरंतर परिश्रम, समर्पण और अकादमिक प्रतिबद्धता का परिणाम हैं।

आज आवश्यकता है कि हम बदलते शैक्षिक परिदृश्य में नवाचार, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण को और अधिक सशक्त बनाएं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड का प्रत्येक सदस्य अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में योगदान देता रहेगा।

इस स्थापना दिवस पर हम आत्ममंथन के साथ भविष्य के लिए स्पष्ट संकल्प लें और परिषद को एक सशक्त अकादमिक थिंक टैंक के रूप में और अधिक सुदृढ़ करें।

आप सभी को एक बार पुनः स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी का संदेश

राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तराखंड के स्थापना दिवस के अवसर पर परिषद के समस्त फैकल्टी सदस्यों एवं कार्मिकों को मेरी ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड की यात्रा संघर्ष, समर्पण और सतत विकास की कहानी है। वर्षों के दौरान परिषद ने शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक मार्गदर्शन, शैक्षिक नवाचार तथा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय शैक्षिक पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन उपलब्धियों के पीछे परिषद के प्रत्येक अधिकारी, फैकल्टी सदस्य एवं कार्मिक का योगदान सराहनीय है।

आज जब परिषद अपने सुदृढ़ भवन, अकादमिक संरचना और बढ़ती जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ रही है, तब हम सभी का दायित्व और भी बढ़ जाता है। हमें टीम भावना, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करते हुए परिषद के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाना है।

मुझे विश्वास है कि आप सभी अपने अनुभव, दक्षता और समर्पण से एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखंड को एक आदर्श अकादमिक संस्था के रूप में स्थापित करने में निरंतर योगदान देते रहेंगे।

स्थापना दिवस के इस शुभ अवसर पर आप सभी को पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना।