देहरादून – राजधानी स्थित शिक्षा निदेशालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अशासकीय विद्यालयों से जुड़े एक विवाद के दौरान प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर कुछ लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना ने पूरे शिक्षा महकमे को झकझोर कर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमेश शर्मा काउ के साथ अशासकीय विद्यालय प्रबंधन से जुड़े कुछ प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे। बातचीत के दौरान निदेशालय के कार्मिकों और प्रबंधन प्रतिनिधियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते तीखे विवाद में बदल गई।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ लोगों ने कथित रूप से निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हमला कर दिया। इस हमले में उनके चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए ले जाया गया।
शिक्षकों में आक्रोश, सड़क जाम
निदेशक पर हमले की खबर फैलते ही शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में शिक्षक और स्टाफ सड़क पर उतर आए और हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए जाम लगा दिया।
राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं पर भी संकट?
शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि आवश्यकता पड़ने पर उत्तराखंड बोर्ड की आगामी परीक्षाओं को भी बाधित किया जा सकता है। यह बयान राज्य के हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था बल्कि शिक्षा विभाग में संवाद और विवाद निस्तारण की प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सरकारी कार्यालय में इस प्रकार की हिंसक घटना लोकतांत्रिक संवाद की भावना के विपरीत है।
अब सबकी नजर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। यदि समय रहते दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।
देहरादून की यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक गरिमा पर भी हमला मानी जा रही है। आवश्यकता है कि कानून अपना काम करे, दोषियों को कड़ी सजा मिले और शिक्षा जगत में किसी भी प्रकार की अराजकता को जगह ने मिलने पाए ।