Thursday, April 03, 2025

उत्तराखंड सरकार ने ‘हमारी विरासत एवं विभूतियां’ पुस्तक को लागू करने का शासनादेश जारी किया


देहरादून, 03 अप्रैल 2025 – उत्तराखंड सरकार ने राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में ‘हमारी विरासत एवं विभूतियां’ पुस्तक को आधिकारिक रूप से लागू करने का शासनादेश जारी कर दिया है। सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रामन ने बताया कि यह पुस्तक कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए होगी और इसका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक घटनाओं और महापुरुषों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।

शासनादेश की मुख्य बातें:

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा तैयार की गई यह पुस्तक अब उत्तराखंड के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में अनिवार्य रूप से इसी सत्र से पढ़ाई जाएगी। सचिव शिक्षा विभाग ने शासनादेश जारी करते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि यह पुस्तक इस  शैक्षणिक सत्र से विद्यालयों में लागू हो।

शासनादेश के अनुसार:

1. अनिवार्य पाठ्यक्रम – ‘हमारी विरासत एवं विभूतियां’ पुस्तक को कक्षा 6, 7 और 8 के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

2. राज्यभर में क्रियान्वयन – उत्तराखंड के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में इसे लागू किया जाएगा।

3. शिक्षकों का प्रशिक्षण – शिक्षकों को इस पुस्तक की विषयवस्तु को प्रभावी ढंग से पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

4. सांस्कृतिक जागरूकता – इस पुस्तक का उद्देश्य छात्रों में अपने राज्य की संस्कृति, परंपराओं और इतिहास के प्रति गर्व और जागरूकता विकसित करना है।

पुस्तक का संक्षिप्त विवरण

‘हमारी विरासत एवं विभूतियां’ पुस्तक उत्तराखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करती है। इसमें राज्य के विभिन्न लोकनायक, स्वतंत्रता सेनानी, वीरांगनाएं, कारगिल के शहीदों के अलावा उत्तराखंड आंदोलन और धार्मिक स्थलों की जानकारी दी गई है। पुस्तक में उत्तराखंड की लोक कथाएँ, पारंपरिक वेशभूषा, व्यंजन, मेले और त्योहारों का भी वर्णन किया गया है।

निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने एस सी ई आर टी को दिया बधाई संदेश और कहा , “हमारी सांस्कृतिक धरोहर हमारी पहचान है। यह पुस्तक नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और परंपराओं से परिचित कराएगी। उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत का प्रचार-प्रसार करना हम सबकी जिम्मेदारी है।”

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने कहा कि शासनादेश जारी होने के साथ ही यह पुस्तक उत्तराखंड के विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे राज्य के युवा अपने इतिहास और परंपराओं से अधिक जुड़ाव महसूस करेंगे और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने की दिशा में कार्य करेंगे। इस पुस्तक लेखन के समन्वयक और सम्पूर्ण टीम को भी उन्होंने बधाई दी । 

Tuesday, April 01, 2025

पदमेन्द्र सकलानी बने उत्तराखण्ड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के नए अपर निदेशक

उत्तराखण्ड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के नए अपर निदेशक के रूप में पदमेन्द्र सकलानी ने आज कार्यभार ग्रहण किया। उनके स्वागत के लिए परिषद के सहायक निदेशक डॉ. के.एन. बिजलवान ने SCERT के अपर निदेशक कॉन्फ्रेंस कक्ष में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर परिषद के संकाय सदस्य, अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं कार्यालय कर्मचारी भी उपस्थित रहे। निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने अपर निदेशक पद ग्रहण के लिए सकलानी को बधाई संदेश दिया और कार्यों मे गति के साथ साथ नवाचार के लिए भी प्रेरित किया । 


कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात, अपर निदेशक सकलानी ने सभी विभागों से परिचय प्राप्त किया और विभागवार बैठक आयोजित की। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर मंथन किया और कहा कि आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण को अधिक उपयोगी बनाने के लिए सभी को समर्पित भाव से कार्य करना होगा।

पदमेन्द्र सकलानी इससे पूर्व प्रदेश और विभिन्न परियोजनाओं में कई उच्च पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे उत्तराखण्ड के महानिदेशालय में संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। वे भौतिकी में निष्णात हैं और आयोग से कमीशन प्राप्त एक निपुण अधिकारी हैं। सरल स्वभाव और निर्णायक क्षमता के लिए प्रसिद्ध सकलानी ने अपने संबोधन में पूर्व अपर निदेशक प्रदीप कुमार रावत का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें उत्तराखण्ड SCERT को एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाना है। इसके लिए हमारे पास सभी आवश्यक संसाधन एवं निपुण मानव संसाधन उपलब्ध हैं।

सकलानी ने अपने संबोधन में कहा, "आप प्रयास कीजिए, काम कीजिए, मैं आपका पूरा साथ दूंगा।" उन्होंने टीम भावना के साथ कार्य करने का आग्रह किया और सफलता के लिए समयपालन को एक महत्वपूर्ण मंत्र बताया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव में आकर कार्य न करें और निष्पक्ष निर्णय लें।

उनके नेतृत्व में SCERT उत्तराखण्ड शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तत्पर रहेगा।

Empowering Children Through Digital Literacy: The Continued Learning Access Project (CLAP): Annual Report 2024-25

In the fast-evolving digital age, ensuring access to technology-driven education for every child has become a priority. The Continued Learning Access Project (CLAP) is a significant initiative aimed at bridging the digital divide in Uttarakhand. Designed to provide digital literacy and accessibility to students, especially in remote and underserved areas, CLAP is transforming learning experiences and empowering young minds for a brighter future.

The Need for Digital Literacy

The digital landscape is rapidly changing the way education is delivered. However, in many parts of Uttarakhand, access to digital learning tools remains limited due to infrastructural constraints, financial limitations, and a lack of awareness. Recognizing this challenge, CLAP was initiated to ensure that children, irrespective of their socio-economic backgrounds, have the opportunity to learn and grow in a digitally connected world.

Objectives of CLAP

CLAP is designed with the following key objectives:

  • Enhancing Digital Skills: Providing fundamental digital literacy training to students, making them proficient in using computers, tablets, and online educational resources.

  • Bridging the Digital Divide: Ensuring equitable access to technology in government schools and underserved communities.

  • Capacity Building for Teachers: Equipping educators with the necessary skills to integrate digital tools into their teaching methodologies effectively.

  • Promoting Safe Digital Practices: Raising awareness about cyber safety and responsible internet usage among students and teachers.

  • Encouraging Innovation in Learning: Implementing interactive learning approaches such as online quizzes, gamified education, and digital storytelling to make learning more engaging.

Implementation and Impact

CLAP has successfully reached several districts across Uttarakhand, with a focus on providing essential digital infrastructure and training programs. The project has facilitated:

  • The establishment of digital learning hubs in schools.

  • Training workshops for teachers and students on using ICT tools effectively.

  • Partnerships with local government bodies and educational institutions to ensure sustainability.

  • Distribution of tablets, laptops, and digital learning materials to schools in remote locations.

The impact has been profound, with students displaying increased confidence in using digital tools for learning. Teachers have also reported a noticeable improvement in student engagement and comprehension, thanks to the integration of multimedia and interactive learning methods.

Challenges and the Way Forward

Despite its successes, CLAP faces challenges such as inadequate infrastructure, internet connectivity issues in remote areas, and the need for continuous training of educators. Moving forward, the project aims to:

  • Expand digital access to more schools and communities.

  • Develop a statewide digital curriculum tailored to local needs.

  • Strengthen partnerships with government and private stakeholders to ensure sustainable growth.

  • Foster student-led digital innovation projects to encourage problem-solving and creativity.

The Continued Learning Access Project (CLAP) is a step toward a digitally empowered future for Uttarakhand’s students. By fostering digital literacy, enhancing educational access, and equipping teachers with ICT skills, CLAP is not just a project—it’s a movement towards transforming education in the state. With continued support and collaboration, this initiative can pave the way for a more inclusive, innovative, and technologically advanced learning ecosystem for all.

Saturday, March 29, 2025

उत्तराखंड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के अपर निदेशक प्रदीप कुमार रावत का भव्य सेवानिवृत्ति समारोह

 

उत्तराखंड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण (SCERT) के अपर निदेशक प्रदीप कुमार रावत की सेवानिवृत्ति समारोह  को बड़े धूमधाम से SCERT के ऑडिटोरियम में महानिदेशक झरना कमठान की  गरिमामई उपस्थिति मे भव्य समारोह के रूप में मनाया गया। 

कार्यक्रम की शुरुआत और स्वागत

समारोह की शुरुआत में  प्रदीप कुमार रावत के व्यक्तित्व और उनके कार्यकाल की झलक को एक फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसका निर्माण SCERT के आईटी विभाग द्वारा किया गया था। इसके पश्चात विभिन्न क्षेत्रों से आए उनके शिष्य, अधिकारी, कर्मचारी और SCERT के संकाय सदस्यों ने प्रदीप रावत का फूल-मालाओं और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।

महानिदेशक झरना कमठान ने अपने संबोधन में प्रदीप कुमार रावत के व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रदीप रावत न केवल एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी थे, बल्कि उनके निर्णय लेने की क्षमता भी अद्वितीय थी।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा:

"मैंने जब मुख्य विकास अधिकारी, देहरादून के रूप में कार्य किया, तब मुख्य शिक्षा अधिकारी के रूप में प्रदीप रावत के साथ कार्य करने का अवसर मिला। उस दौरान, मैंने देखा कि वे अपने कार्य के प्रति अत्यंत समर्पित हैं। उनके निर्णय त्वरित, प्रभावी और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाले रहे हैं। कई ऐसे महत्वपूर्ण फैसले, जो उन्होंने लिए, आज भी राज्य की शिक्षा प्रणाली में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।"

महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा, झरना कमठान ने आगे कहा कि प्रदीप रावत ने अपने दायित्वों को पूर्ण निष्ठा और निष्पक्षता के साथ निभाया। वे उन अधिकारियों में से हैं, जो किसी भी प्रकार के दबाव में बिना आए, केवल जनहित और शैक्षिक सुधार के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने कहा:

"शिक्षा विभाग में कार्य करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। खासकर उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां कई दुर्गम क्षेत्र हैं, वहाँ शिक्षा का स्तर सुधारना आसान नहीं था। लेकिन प्रदीप रावत ने अपने नेतृत्व में कई प्रभावशाली योजनाएँ लागू कीं, जिनके सकारात्मक परिणाम आज भी देखने को मिल रहे हैं। उनके जाने से विभाग को निश्चित रूप से एक बड़ी क्षति होगी, लेकिन उनकी कार्यशैली और निर्णय लेने की नीति नए अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक रहेगी।"

महानिदेशक ने यह भी कहा कि  प्रदीप रावत ने जिन मानकों को स्थापित किया है, उनके अनुरूप कार्य करना आने वाली पीढ़ी के लिए चुनौती होगी। उन्होंने कहा:

"श्री प्रदीप रावत ने शिक्षा क्षेत्र में जो मिसाल कायम की है, उसका अनुकरण करना आसान नहीं होगा। उनकी कार्यशैली, समर्पण और अनुशासन आज के अधिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। मैं आशा करती हूँ कि वे भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभवों से योगदान देते रहेंगे।"

प्रदीप कुमार रावत ने अपने अभिभाषण में अपनी अब तक की यात्रा, अपने संघर्षों और अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने हमेशा शिक्षा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा:

"जब मैंने शिक्षा विभाग में अपनी सेवा शुरू की, तब मेरे सामने कई चुनौतियाँ थीं। लेकिन मैंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि जो भी निर्णय लिए जाएँ, वे शिक्षकों और छात्रों के हित में हों। मुझे कभी किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत लाभ या दबाव में आकर निर्णय लेने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई।"

उन्होंने महानिदेशक झरना कमठान और अन्य अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा:

"मैं अत्यंत आभारी हूँ कि मुझे ऐसे सहयोगी अधिकारी मिले, जिन्होंने हमेशा शिक्षा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता को समझा और समर्थन दिया। जब मैंने किसी भी योजना या नीति को लागू किया, तो मेरा केवल एक ही उद्देश्य था—शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और इसे सभी तक पहुँचाना।"


अपने परिवार और सहयोगियों का आभार
प्रदीप रावत ने अपने परिवार का विशेष रूप से धन्यवाद किया और अपनी पत्नी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा:

"मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया। मेरी पत्नी ने न केवल मेरे निर्णयों को समझा बल्कि जब भी मुझे किसी प्रकार की व्यक्तिगत या पेशेवर चुनौती आई, उन्होंने मुझे सही मार्गदर्शन दिया। मेरे बच्चों ने भी मेरे व्यस्त जीवन को समझा और कभी कोई शिकायत नहीं की। यह मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत थी।"

प्रदीप रावत के  छोटे भाई कोटद्वार  विधायक महंत दिलीप सिंह रावत ने कहा कि वे हमेशा उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उन्होंने बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि कैसे मेहनत और अनुशासन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया। महंत दिलीप रावत ने E=MC^2 को अलग तरह से परिभाषित कर सभी को एक नया पैगाम भी दिया। 

अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों के संदेश

उत्तराखण्ड अकादमिक  शोध एवं प्रशिक्षण निदेशक बंदना गर्ब्याल  ने वीडियो संदेश में प्रदीप रावत की सेवाओं की सराहना की और उन्हें निर्णय लेने में प्रेरक अधिकारी बताया।समारोह में संयुक्त निदेशक पद्मेंद्र सकलानी, अपर राज्य परियोजना निदेशक कुलदीप गैरोला, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल, और कई अन्य अधिकारियों ने प्रदीप रावत को पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएँ दीं। SCERT के संकाय सदस्यों ने भी ऑनलाइन संदेशों के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएँ दीं। 


कार्यक्रम का संचालन और तकनीकी सहयोग

समारोह का मंच संचालन प्रवक्ता सुनील भट्ट ने किया, साथ ही सहायक निदेशक डॉ के एन बिजलवाण ने  प्रदीप रावत के साथ बिताए कई संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम में आईटी विभाग के विनय उनियाल और सौरभ जोशी ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

समारोह के अंत में प्रदीप रावत ने कहा कि भले ही वे राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन आगे भी अपने अनुभवों का लाभ समाज और शिक्षा क्षेत्र को देते रहेंगे। उन्होंने सभी से SCERT को देश का एक "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" बनाने का संकल्प लेने की अपील की।

समारोह में पूर्व अपर निदेशक आशा रानी पैन्यूली , पूर्व संयुक्त निदेशक डंडरियाल,और राकेश जुगरान  पूर्व प्राचार्य डाइट देहरादून  सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने प्रदीप रावत को एक सशक्त और निर्णायक अधिकारी के रूप में याद किया। समारोह के दौरान सभी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

SCERT को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की अपील

अपने संबोधन के अंतिम चरण में, प्रदीप रावत ने SCERT को देश का "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा:

"SCERT केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक चिंतनशाला  है, जो शिक्षकों को सशक्त बनाने और शिक्षा के स्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए कार्य करता है। यह संस्थान तभी और अधिक प्रभावी बनेगा, जब शिक्षक, शोधकर्ता और अधिकारी एकजुट होकर काम करेंगे। मैं चाहता हूँ कि यह संस्थान भारत का नंबर वन संस्थान बने और पूरे देश के लिए एक मिसाल स्थापित करे।"


"अब जब मैं सेवानिवृत्त हो रहा हूँ, तो मुझे और अधिक स्वतंत्रता मिलेगी कि मैं शिक्षा के क्षेत्र में किस प्रकार से योगदान दे सकता हूँ। मैं अपने अनुभवों और ज्ञान का उपयोग करके शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए काम करूँगा। यदि कहीं भी मेरी जरूरत होगी, तो मैं हमेशा सहयोग के लिए तैयार रहूँगा।"


उनके इन विचारों ने समारोह में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया, और हर किसी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनके योगदान को सम्मानित किया। 🎉

Friday, March 28, 2025

डाइट टिहरी गढ़वाल में नव नियुक्त शिक्षकों के लिए इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक प्रदीप कुमार रावत ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई

डाइट,  टिहरी गढ़वाल में  नव नियुक्त शिक्षकों के लिए एक व्यापक इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को प्रभावी कक्षा शिक्षण के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करना था। कार्यक्रम में ससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक श्री प्रदीप कुमार रावत ने विशेष रूप से भाग लिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीक-सक्षम शिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है, जो शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की वकालत करती है।

संस्थान प्रमुख के रूप में अपर निदेशक रावत, जो इस माह के अंत में अपनी सेवा पूर्ण कर रहे हैं, ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा:

  • शिक्षा में कोई समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि शिक्षक समाज के भविष्य निर्माता बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं।

  • एनईपी 2020 के अनुसार शिक्षा प्रणाली में कौशल आधारित शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और बहुविषयक दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता है।

  • पाठ्यक्रम और सामग्री को तकनीक-सक्षम बनाना अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गई है, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ा जा सके।

प्राचार्य हेमलता भट्ट ने अपर निदेशक प्रदीप रावत का डाइट  परिसर में गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने एससीईआरटी उत्तराखंड के नेतृत्व में निदेशक रावत के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपर निदेशक रावत के मार्गदर्शन में एससीईआरटी ने शैक्षिक सुधारों, शिक्षकों के क्षमता निर्माण और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर डाइट के सभी संकाय सदस्य उपस्थित थे, जिन्होंने  अपर निदेशक रावत के योगदान की सराहना की और उनके शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया। निदेशक रावत के साथ एससीईआरटी के उप निदेशक  ए.के. श्रीवास्तव भी मौजूद थे। 

कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव सत्र के साथ हुआ, जिसमें अपर निदेशक रावत ने नव नियुक्त शिक्षकों के प्रश्नों का उत्तर दिया। उन्होंने शिक्षकों को नवाचार, रचनात्मकता और तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे अपने शिक्षण को अधिक प्रभावी और रुचिकर बना सकें।

यह कार्यक्रम अपर निदेशक रावत के प्रेरणादायक सेवा कार्यों को समर्पित रहा, जिसने सभी प्रतिभागियों को प्रभावित किया और एससीईआरटी की गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षकों के सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता को मजबूत किया।

Wednesday, March 26, 2025

Hackathon "Innovate Uttarakhand" – Empowering Government School Teachers and Students with Digital Solutions

Ramesh Badoni: Coordinator Hackathon 2025
The Hackathon "Innovate Uttarakhand", organized by SCERT Uttarakhand, was a groundbreaking initiative aimed at fostering innovation and technological creativity among government school teachers and students. This dynamic event provided a platform for participants to ideate and present digital solutions addressing real-world challenges in education and beyond.

💡 Record-Breaking Participation and Impact

The hackathon witnessed an overwhelming response, with 2,300+ innovative ideas submitted within just one month. This remarkable participation demonstrated the creative potential and problem-solving mindset of educators and students across the state.

🚀 Ideation and Presentation of Digital Solutions

Teachers and students showcased their digital solutions through compelling presentations, offering innovative ideas aimed at enhancing learning experiences, streamlining educational processes, and solving community issues. These solutions ranged from tech-integrated teaching aids to e-learning platforms, and even mobile applications designed to bridge learning gaps.

🏆 Top 20 Ideas Advancing to the Next Level

Out of the massive pool of submissions, the top 20 most promising ideas were selected. The winners earned the opportunity to advance to the next stage of prototyping, where their concepts will be transformed into functional prototypes. This next phase aims to bring their creative solutions closer to real-world implementation, making a tangible impact on the education system.

SCERT's Vision for Innovation

SCERT Uttarakhand’s initiative reflects its commitment to promoting digital literacy and innovation in government schools. By encouraging teachers and students to think creatively and leverage technology, the hackathon is nurturing a culture of innovation and problem-solving—essential skills for the 21st century.

**"Innovate Uttarakhand" is more than just a competition—it is a movement empowering educators and students to become creators of digital solutions, paving the way for a more tech-savvy and innovative educational landscape in the state. 

Tuesday, March 25, 2025

Successful Completion of Five-Day Executive Education Program on Strategic Planning and Action Plan for SCERT & DIETs Officers and Faculty Members at IIM Udaipur

 

SCERT & DIETs Officers and Faculty Members at IIM Udaipur

SCERT Uttarakhand, March 23, 2025 – SCERT Uttarakhand, in collaboration with the Indian Institute of Management (IIM) Udaipur, successfully concluded a five-day Executive Education Program on Strategic Planning and Action Plan from March 19 to 23, 2025. The customized program was meticulously designed by IIM Udaipur at the special request of SCERT Uttarakhand, aiming to enhance the strategic competencies of its officers and faculty members.

A total of 33 planning members from SCERT and DIETs across Uttarakhand, including principals and lecturers, actively participated in this transformative learning experience.

Program Highlights and Objectives

The programme was expertly led by Program directors Prof. Shaleen Gopal and Prof. Prarthan B. Desai, along with Prof. Pradeep Kumar Hota from IIM Udaipur. The sessions were designed to strengthen participants' capabilities in strategic thinking, scenario planning, and action-oriented leadership, equipping them with the tools necessary to drive impactful changes in their institutions.

Key topics covered during the five days included:

  • Strategic Thinking and Execution: Developing a clear vision and aligning actions with long-term institutional goals.

  • Scenario Planning and Stakeholder Analysis: Preparing for future uncertainties by identifying potential challenges and involving key stakeholders.

  • Balanced Scorecards and Performance Incentives: Implementing performance measurement tools to ensure accountability and effectiveness.

  • Leadership and Change Management: Strengthening leadership skills to drive meaningful reforms in educational institutions.

  • Job Design and Organizational Efficiency: Optimizing roles and responsibilities to enhance productivity and effectiveness.

Interactive and Practical Learning Experience

The program featured a blend of interactive lectures, case studies, and group activities, making the sessions highly engaging and practical. Participants worked on real-world scenarios relevant to SCERT and DIETs, ensuring the direct applicability of the concepts learnt.

The case-based learning approach enabled the participants to collaboratively analyse challenges, devise solutions, and develop actionable strategies. The practical exercises enhanced their problem-solving skills, making them more adept at addressing organisational issues.

Key Takeaways and Participant Action Plans

One of the major highlights of the program was the creation and presentation of action plans by the participants. These action plans outlined strategies to tackle both challenges and opportunities in Uttarakhand's educational landscape. The plans focused on:

  • Enhancing academic quality through structured planning and execution.

  • Integrating technology into teaching and learning processes.

  • Improving institutional governance with data-driven decision-making.

  • Fostering collaboration between SCERT, DIETs, and local schools to implement innovative practices.

Leadership Endorsement and Appreciation

Pradeep Rawat, Additional Director, SCERT Uttarakhand, expressed his deep appreciation to the participants for their active engagement and commended the faculty members and organizers for their dedication and expertise. He emphasized that strategic planning is a cornerstone for the evolution of educational institutions and urged participants to apply their newfound knowledge in their respective roles.

He further encouraged the faculty members to prepare a comprehensive roadmap that will position SCERT Uttarakhand as a leading SCERT in India through strategic interventions and continuous innovation.

Dr. Ajay K. Chaurasia, Program Coordinator, also lauded the participants for their enthusiastic involvement. He highlighted how the program fostered meaningful insights into scenario planning and milestone-driven execution, which will significantly contribute to the long-term development of SCERT and DIETs.

Impact and Future Roadmap

The Executive Education Program concluded with a renewed commitment from the participants to implement their action plans effectively. The insights gained during the five days are expected to strengthen the strategic capabilities of SCERT and DIETs, enabling them to design and execute impactful educational programs.

By applying the principles of strategic management, stakeholder collaboration, and performance measurement, SCERT Uttarakhand aims to elevate the quality of education across the state, setting a benchmark for other SCERTs in India.

Conclusion

The successful completion of this program marks a significant milestone in the journey of SCERT Uttarakhand towards becoming a more strategically agile and forward-thinking institution. The collaboration with IIM Udaipur has not only enriched the participants with valuable knowledge and skills but has also laid a strong foundation for future-focused educational reforms in Uttarakhand.

SCERT Uttarakhand looks forward to building on this momentum, ensuring that the strategies and action plans developed during the program translate into real-world improvements in educational quality and institutional effectiveness.

आनंदम कार्यक्रम के संबंध में एकदिवसीय अभिमुखीकरण संपन्न

 


राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा उत्तराखंड के प्रारंभिक विद्यालयों में संचालित "आनंदम कार्यक्रम" के संबंध में एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन SCERT देहरादून के कॉन्फ्रेंस रूम में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व

इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक मानसिकता, भावनात्मक स्थिरता और आत्म-अनुभूति का विकास करना है। कार्यक्रम का दार्शनिक आधार दिल्ली में चल रहे हैप्पीनेस करिकुलम से प्रेरित है, जिसमें बच्चों को शैक्षिक ज्ञान के साथ-साथ आत्मचिंतन, सहानुभूति और सामाजिक कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है। इस प्रोग्राम के लिए प्रवक्ता सुधा पैन्यूली ने मंच संचालन किया । 


मुख्य सत्र और गतिविधियां

कार्यक्रम की शुरुआत में SCERT के अपर निदेशक प्रदीप कुमार रावत ने आनंदम कार्यक्रम के उद्देश्यों, इसके दार्शनिक पहलुओं और इसके शिक्षण प्रक्रिया में महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों में सकारात्मक दृष्टिकोण, आत्मबोध और सामाजिक मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस मौके पर विशेषज्ञ के रूप मे आनंद बी सिंह फाउंडेशन फॉर वैदिक साइंस एंड टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली के निदेशक द्वारा प्रतिभाग किया गया । यह फाउंडेशन महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय, हॉलैंड के कार्यक्रमों का संचालन करता है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर (मास्टर डिग्री) प्राप्त की है। आनंद  को सिद्धि ध्यान (ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन) के अभ्यास, शिक्षण और प्रशिक्षण में गहरा अनुभव है। इस अनुभव को प्राप्त करने के लिए उन्होंने कई वर्षों तक उत्तरकाशी, हिमालय में साधना की है। वर्तमान में वे स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अनाथालयों और सैन्य एवं अर्धसैन्य बलों के समूहों में इस ध्यान तकनीक का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

आनंदम कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियां

  1. ध्यान देने की प्रक्रिया:

    • विद्यार्थियों को ध्यान एवं आत्मचिंतन के अभ्यास कराए गए, जिससे वे अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं के प्रति सजग हो सके।

    • यह प्रक्रिया विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से स्थिर, तनावमुक्त और शैक्षिक रूप से अधिक सक्षम बनने में मदद करती है।

  2. कहानी सत्र:

    • आनंदम कार्यक्रम की कहानियां बच्चों के वास्तविक जीवन अनुभवों और मानवीय मूल्यों पर आधारित होती हैं।

    • इन कहानियों के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक, तार्किक और सृजनात्मक कौशल का विकास किया जाता है।

  3. गतिविधि सत्र:

    • विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को मनोरंजन के साथ-साथ नैतिक शिक्षा दी गई।

    • इन गतिविधियों के जरिए उन्हें समाज, परिवार और प्रकृति में अपनी भूमिका को समझने में सहायता मिली।

  4. अभिव्यक्ति सत्र:

    • विद्यार्थियों को अपने भावनाओं, विचारों और अनुभवों को साझा करने का अवसर दिया गया।

    • इस सत्र के माध्यम से वे अपने अंतर्मन के भावों को व्यक्त करने में सक्षम हुए, जिससे आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल का विकास हुआ।

कार्यक्रम का संचालन और प्रतिभागिता

कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. साधना डिमरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर सहायक निदेशक डॉ. के.एन. बिजलवाण ने कहा कि कार्यक्रम को प्रदेश के सभी जनपदों में लागू किया जाएगा, ताकि अधिकतम संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम में राज्य के सभी 13 जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, DIET प्राचार्य, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर एवं SCERT के फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे। इस प्रोग्राम मे लभ्या फाउंडेशन, ड्रीम अ ड्रीम एवं ब्लू आर्ब संस्था ने  सहयोग सतत सहयोग किया । 

निष्कर्ष

यह अभिमुखीकरण कार्यक्रम शिक्षकों और अधिकारियों को आनंदम कार्यक्रम की अवधारणा और  क्रियान्वयन के लिए तैयार करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इस पहल के माध्यम से उत्तराखंड के विद्यालयों में सकारात्मक शिक्षा और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में सार्थक प्रयास किया जा रहा है। 

Teacher Training Workshop: ‘Make Your Own Lab’

 

Organized by SCERT Dehradun and Agastya International Foundation, supported by Titan Company
March 24-26, 2025

Introduction

The State Council for Educational Research and Training (SCERT), Dehradun, in collaboration with the Agastya International Foundation and the Corporate Social Responsibility (CSR) initiative of Titan Company, inaugurated a series of 3-day Teacher Training Workshops titled ‘Make Your Own Lab’ on March 24, 2025. The objective of this workshop series is to empower and upskill government school science teachers by enabling them to create low-cost, innovative Teaching-Learning Materials (TLMs) using readily available resources.

The workshops are part of a larger initiative to promote hands-on, experiential learning in science classrooms. By the end of the workshop, each participating teacher will have prepared a science kit containing over 30 TLMs to effectively demonstrate scientific concepts to their students. This initiative is expected to significantly enhance classroom engagement and foster a scientific temperament among students.

Inaugural Session

The inaugural ceremony was held at SCERT Dehradun and Azim Premji Foundation, Dehradun, and was graced by prominent dignitaries:

  • Mr Pradeep Kumar, Additional Director, SCERT

  • Dr K.N. Bijalwan, Assistant Director, SCERT

  • Mr Akhilesh Dobhal, State Coordinator, SCERT

  • The Agastya International Foundation Team

    1. Manjunath P, Head, teacher development program
    2. Ananthnag M, manager for the teacher development program
    3. Nagaraja K, Executive
    4. Purushotam, Harish M, Venkatesh, Ayeesha, Mobeena: Resource person Agastya Int 

Mr. Akhilesh Dobhal, the workshop coordinator, extended a warm welcome to the participating teachers and provided an overview of the workshop objectives. He highlighted how the initiative aims to equip teachers with practical skills to create cost-effective science models that make science learning engaging and accessible.

Mr. Pradeep Kumar, in his address, emphasised the need to develop scientific rigour and curiosity among students. He referenced the recent scientific efforts to rescue astronaut Sunita Williams and her team from a stranded space mission, illustrating how perseverance and scientific expertise drive real-world solutions.

Dr. K.N. Bijalwan spoke about the importance of teacher development programmes and encouraged participants to make the best use of the training. He stressed that hands-on experimentation is essential for students to grasp scientific concepts effectively.

Workshop Participants and Duration

CEO Nitin Desai from Agastya International Foundation stated that the workshop series is expected to benefit 400 government school science teachers across Uttarakhand. The first phase, held from March 24-26, 2025, included:

  • 80 teachers from Dehradun district

  • 80 teachers from the Tehri Garhwal district

These teachers actively participated in the workshop, creating innovative science models and experimenting with low-cost materials to develop practical TLMs.

Training Activities and Highlights

Throughout the 3-day workshop, teachers engaged in hands-on sessions led by expert resource persons from the Agastya International Foundation. The sessions focused on:

  • Designing Low-Cost Science Experiments: Teachers learnt how to create effective models using inexpensive and locally available materials.

  • Hands-On Demonstrations: Practical demonstrations of scientific concepts using TLMs to illustrate physics, chemistry, and biology principles.

  • Collaborative Learning: Teachers collaborated in groups to brainstorm and design creative TLMs, fostering peer learning and innovation.

  • Assembling Science Kits: Each participant assembled their own science kit comprising over 30 TLMs, which they can utilise in their respective classrooms.

Technical Support and Coordination

The smooth execution of the workshop was supported by the SCERT IT team members:

  • R.P. Badoni

  • Saurabh Joshi

  • Vinay Uniyal

Their technical expertise and assistance ensured seamless coordination of the sessions, including resource sharing, troubleshooting, and facilitation.

Impact and Takeaways

The ‘Make Your Own Lab’ workshop offers teachers practical skills and resources to enhance science education through experiential learning. The initiative aims to:

  • Encourage innovation in teaching practices by promoting DIY science models.

  • Improve student engagement and conceptual understanding through interactive demonstrations.

  • Foster a culture of scientific inquiry and curiosity in government schools.

  • Enable teachers to develop and sustain low-cost science labs, making science education more accessible and impactful.

Conclusion

The SCERT Dehradun and Agastya International Foundation’s joint initiative is a significant step toward transforming science education in Uttarakhand. By equipping teachers with the skills to develop their own TLMs, the programme empowers them to make science learning more engaging, practical, and effective. The workshop is expected to inspire creativity and innovation in science teaching, ultimately benefiting students across the state.

The success of this workshop series highlights the importance of collaborative efforts between educational institutions, NGOs, and corporate partners in enhancing the quality of education through innovative practices.