Monday, January 12, 2026

SCERT Uttarakhand Announces D.El.Ed. 2025–27 Counseling Schedule

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The State Council of Educational Research and Training (SCERT), Uttarakhand, has officially released the notification for the state-level counselling of provisionally selected candidates for the two-year Diploma in Elementary Education (D.El.Ed.) training program (2025–27 batch).

This counselling is a crucial step for candidates who cleared the entrance examination held on November 22, 2025.

Counseling Schedule

Counselling will be conducted at the SCERT Auditorium, Nanoorkhera, Dehradun, on the following dates:

DateCategoryProvisional List Serial No.
17 January 2026Science01–100
17 January 2026Non-Science01–100
18 January 2026Science101–200
18 January 2026Non-Science101–200
19 January 2026Science201–314
19 January 2026Non-Science201–319

Candidates unable to attend on these dates due to unavoidable circumstances will be given a final chance on 20 January 2026.

Documents Required

Candidates must bring originals and self-attested copies of the following documents:

  • Academic Certificates: High School, Intermediate, and Graduation mark sheets & certificates.

  • Category Certificates: Valid SC/ST/OBC/EWS certificates issued by competent authority.

  • Special Category Certificates: For PH, Ex-Servicemen, Orphans, Uttarakhand Andolankari, or Skilled Players.

  • Residence/Employment Certificates: Permanent or domicile certificate, and employer-issued service certificate (if applicable).

  • Other Essentials: Admit card, Aadhaar/valid photo ID, and two passport-size photographs.

Eligibility Highlights

  • Age must be 19–30 years as of 01 July 2026 (born between 01 July 1996 and 01 July 2007).

  • Reserved categories (SC/ST/OBC/EWS, PH, Ex-Servicemen, etc.) are eligible for relaxation in the maximum age limit.

  • Candidates must have completed their graduation before September 6, 2025.

  • Only original residents of Uttarakhand are eligible for most reserved categories.

Counselling Process

  • Candidates will fill preference forms for seats across 13 DIETs (District Institutes of Education & Training) in Uttarakhand.

  • Seat allotment will be based on merit and preference order.

  • Absence from counselling without a valid reason will result in the cancellation of candidatures, and seats will be filled on the waiting list.

 Key Contact Numbers

For queries regarding counselling, candidates may contact:

  • 9528473633

  • 9675305662

  • 9410123584

The D.El.Ed. program is the gateway to becoming a primary school teacher in Uttarakhand. With rigorous training in pedagogy, child psychology, and classroom practices, it prepares educators to shape the future of young learners.

Sunday, January 11, 2026

परीक्षा पर चर्चा 2026 : उत्तराखंड ने बनाया नया कीर्तिमान

 

परीक्षा पर चर्चा 2026 के अंतर्गत आज पंजीकरण का अंतिम दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस वर्ष पूरे देश में 4 करोड़ 16 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने प्रश्न पंजीकरण कराकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान बनाया है। यह उपलब्धि शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक क्षण है।

उत्तराखंड की शानदार उपलब्धि

उत्तराखंड राज्य ने भी इस वर्ष अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। आंकड़े बताते हैं कि—

  • 7,37,000 से अधिक विद्यार्थी

  • 14,552 अभिभावक

  • 53,149 शिक्षक

ने प्रश्न पंजीकरण कराकर राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया।

निदेशक वंदना गर्ब्याल का संदेश

इस अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण तथा नोडल अधिकारी – परीक्षा पर चर्चा 2026, वंदना गर्ब्याल ने कहा:

“यह उपलब्धि आदरणीय महानिदेशक महोदया के निर्देशन में आप सभी अधीनस्थ अधिकारियों, मंडल, जिला/ब्लॉक स्तर के नोडल अधिकारियों, शिक्षकों तथा कार्यक्रम से जुड़े प्रत्येक कार्मिक की निष्ठा, समर्पण, सतत प्रयास एवं प्रभावी टीमवर्क का प्रतिफल है। आप सभी ने सीमित समय में जिस प्रतिबद्धता एवं सक्रियता के साथ कार्य किया, वह प्रशंसनीय ही नहीं बल्कि अनुकरणीय है। मैं इस सफल आयोजन हेतु आप सभी को हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएँ देती हूँ और आशा करती हूँ कि भविष्य में भी इसी ऊर्जा, समन्वय एवं प्रतिबद्धता के साथ हम शैक्षिक नवाचारों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे।”

इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी एकजुट होकर कार्य करते हैं तो असंभव भी संभव हो जाता है। उत्तराखंड की यह उपलब्धि न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है।

शिक्षा जगत में नवाचार और सहयोग की यह भावना भविष्य में और भी बड़े बदलावों का मार्ग प्रशस्त करेगी। परीक्षा पर चर्चा 2026 ने यह साबित कर दिया है कि सामूहिक प्रयास से शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।

Friday, January 09, 2026

Hackathon 2.0 Final Round at SCERT Uttarakhand:2026

 

Final List of Selected Students and Teachers to Be Released | Live Jury Presentations on 23 January 2026

SCERT Uttarakhand is proud to announce that the final list of selected students and teachers for the Hackathon 2.0 – Final Round will be released on 23 January 2026 on its innovation portal Innovate Uttarakhand

Hackathon 2.0: Driving Digital Innovation in School Education

Hackathon 2.0 is a state-level initiative designed to promote innovation, creativity, and problem-solving skills among students and teachers through the effective use of digital tools and emerging technologies. Participants from across Uttarakhand have worked collaboratively to develop digitally innovative ideas and solutions addressing real-life challenges in school education and society.

The themes of Hackathon 2.0 focused on:

  • Innovative teaching-learning solutions

  • Use of ICT, AI, and digital tools in education

  • Inclusive and accessible learning models

  • School-level problem-solving through technology

  • NEP 2020-aligned innovation and experiential learning

Final Jury Presentation Round

Shortlisted teams will present their digital ideas, prototypes, and solutions before an expert jury panel at SCERT Uttarakhand. The evaluation will be based on:

  • Innovation and originality

  • Practical implementation and scalability

  • Effective use of digital technology

  • Social and educational impact

  • Clarity of presentation

This final round marks a significant milestone where ideas move closer to real-world implementation.

Live Telecast of Hackathon 2.0 Grand Finale

To ensure wider participation and transparency, the Hackathon 2.0 Final Round will be live telecast on YouTube. Educators, students, school leaders, and innovation enthusiasts are encouraged to join and witness the presentations live.

📡 Watch Live:

Building an Innovation Ecosystem in Uttarakhand

Through platforms like Innovate Uttarakhand, SCERT Uttarakhand continues to nurture a strong innovation ecosystem in school education, aligned with the vision of NEP 2020. Hackathon 2.0 not only celebrates innovative ideas but also motivates teachers and students to become solution creators rather than solution seekers.

Event Details at a Glance

📅 Date: 23 January 2026
📍 Venue: SCERT Uttarakhand
📡 Mode: Live Telecast on YouTube

Stay connected with Innovate Uttarakhand as young innovators and dedicated educators showcase their digitally innovative solutions to address today’s challenges and shape the future of education in Uttarakhand.

द्वितीय दिवस : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित प्रमुख सत्र

 

दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला के द्वितीय दिवस में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की उन महत्वपूर्ण अनुशंसाओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जो सीधे तौर पर शिक्षकों की पेशेवर गुणवत्ता, विद्यालयी व्यवस्था, समय प्रबंधन, तकनीकी एकीकरण तथा शैक्षिक गुणवत्ता के आकलन से जुड़ी हैं। इस दिवस के सभी सत्रों का उद्देश्य नीति के प्रावधानों को व्यवहारिक दृष्टि से समझाते हुए अधिकारियों को उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु तैयार करना रहा।

राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST)

द्वितीय दिवस के प्रमुख सत्रों में डॉ. अंकित जोशी द्वारा राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (National Professional Standards for Teachers – NPST) पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि NPST, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दूरदर्शी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहल है, जिसका उद्देश्य अध्यापन को एक सुदृढ़, उत्तरदायी और गरिमामय पेशे के रूप में स्थापित करना है।

डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि NPST के अंतर्गत शिक्षकों की भूमिकाओं, अपेक्षित दक्षताओं तथा उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक साझा और पारदर्शी ढांचा विकसित किया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य शिक्षक के करियर की प्रगति को केवल सेवा अवधि (सीनियरिटी) तक सीमित न रखते हुए योग्यता, दक्षता और सतत व्यावसायिक विकास से जोड़ना है।

NPST के तीन स्तर

NPST ढांचे के अंतर्गत शिक्षकों को उनकी दक्षताओं एवं अनुभव के आधार पर तीन स्तरों में वर्गीकृत किया गया है-

  1. प्रवीण शिक्षक (Proficient Teacher) – बुनियादी स्तर की आवश्यक दक्षताओं से युक्त शिक्षक।

  2. उन्नत शिक्षक (Advanced Teacher) – विषयवस्तु एवं शिक्षण कौशल में गहराई रखने वाले शिक्षक।

  3. कुशल शिक्षक (Expert Teacher) – उच्चतम स्तर की विशेषज्ञता रखने वाले शिक्षक, जो अन्य शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक (Mentor) की भूमिका निभा सकें।

NPST के मुख्य मानक

NPST को तीन प्रमुख मानकों में विभाजित किया गया है—

  • मूल मूल्य एवं नैतिकता (Core Values & Ethics) – संवैधानिक मूल्यों का पालन, छात्रों की गरिमा की रक्षा और पेशेवर आचरण।

  • ज्ञान एवं अभ्यास (Knowledge & Practice) – बाल विकास, समावेशी शिक्षा, पाठ्यक्रम की समझ, प्रभावी शिक्षण विधियाँ, तकनीक का उपयोग तथा मूल्यांकन रणनीतियाँ।

  • व्यावसायिक विकास (Professional Growth & Development) – शिक्षक की स्वयं की सीखने की क्षमता तथा सतत सुधार की प्रतिबद्धता।

यह सत्र शिक्षकों की गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।

समय आवंटन एवं विद्यालयी दिनचर्या



इसके पश्चात डॉ. मोहन बिष्ट द्वारा राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF) के अंतर्गत विद्यालयों की दैनिक समय-सारणी एवं समय प्रबंधन पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि समय आवंटन का मूल उद्देश्य विद्यालयी समय का ऐसा प्रबंधन करना है, जिससे विद्यार्थियों को रटने के बजाय सृजनात्मकता, संवाद और व्यावहारिक अनुभव के पर्याप्त अवसर मिल सकें।





प्रस्तुति में लचीली समय-सारणी, बस्ते का बोझ कम करने, प्राथमिक स्तर पर गृहकार्य न देने तथा 240 दिवस के शैक्षणिक सत्र की अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि विद्यालयी समय-सारणी स्थानीय परिस्थितियों और बच्चों की आवश्यकताओं के अनुसार लचीली होनी चाहिए, जिससे सह-शैक्षिक गतिविधियों को भी पर्याप्त स्थान मिल सके।

ICT एवं IT आधारित पहलें

द्वितीय दिवस में रमेश बडोनी ने परिषद के आई सी टी पहल और नवाचारी कार्यक्रमों पर विस्तार से तकनीकी से तंत्र मे गुणवत्ता एवं पारदर्शिता पर सम्बोधन देते हुए एआई और डिजिटल तकनकी से ग्लोबल रीच तक पहुंचने को एक बड़ा जरिया बताया जिसका उद्धरण यूनेस्को मे प्रकाशित केस स्टडी को भी साझा किया गया । पुष्पा असवाल द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गतपी एम ई विद्या पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि NEP 2020 में तकनीक को शिक्षा का एक अनिवार्य स्तंभ माना गया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाना है।


द्वितीय दिवस के अन्य सत्रों में—

  • अजीत भंडारी (उप राज्य परियोजना निदेशक) द्वारा परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें उत्तराखंड की स्थिति की अन्य राज्यों से तुलनात्मक समीक्षा की गई।

  • SCERT प्रवक्ता सुनील भट्ट ने संकुल स्तरीय अकादमिक बैठकों के प्रभावी संचालन, अधिगम प्रतिफल प्राप्त करने हेतु सर्वोत्तम अभ्यासों तथा कक्षा-कक्ष नवाचारों के साझा करण पर अपने विचार रखे।

  • विनय थपलियाल ने विद्यालयों में सड़क सुरक्षा क्लब के गठन एवं सड़क सुरक्षा को नियमित विद्यालयी गतिविधियों में सम्मिलित करने पर बल दिया।

कार्यशाला का समापन

द्वितीय दिवस एवं संपूर्ण कार्यशाला का समापन निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण  बंदना गर्व्याल द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि NEP 2020 की अनुशंसाओं को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी फील्ड में कार्यरत शिक्षा अधिकारियों की है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे विद्यालयों में जाकर सतत अवलोकन करें, अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों को प्रोत्साहित करें तथा समुदाय एवं अभिभावकों के सहयोग से एक सशक्त शैक्षिक वातावरण का निर्माण करें।



अंत में अपर निदेशक  पद्मेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहन बिष्ट एवं रविदर्शन तोपाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस दिवस की कार्यशाला में प्रदेश भर से मुख्य शिक्षा अधिकारी, संयुक्त निदेशक, उप राज्य परियोजना निदेशक, खंड शिक्षा अधिकारी एवं उप खंड शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।

Thursday, January 08, 2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अनुशंसाओं तथा उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (State Curriculum Framework – SCF) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश भर से समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) एवं समस्त खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) हेतु दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के सभागार में किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ

कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारंभ निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्व्याल एवं अपर निदेशक  सकलानी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर निदेशक महोदया एवं अपर निदेशक ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि—

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा तभी जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हो सकती है जब जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारी इसे गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ अपनाएँ। आप सभी इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।”

उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता, गहन चर्चा एवं अनुभव साझा करने का आह्वान किया।


आनंदम गतिविधियों से सत्र की शुरुआत

कार्यशाला का प्रथम सत्र ‘आनंदम’ की गतिविधियों के साथ प्रारंभ हुआ, जिसे डॉ. बी. पी. मैंदोली (राज्य नोडल अधिकारी) एवं सहयोगी एनजीओ सदस्यों द्वारा प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। इस सत्र के माध्यम से बच्चों के भावनात्मक, मानसिक और आनंदमय विकास की अवधारणा को गतिविधि आधारित अनुभवों के माध्यम से समझाया गया।

NEP 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर विस्तृत व्याख्यान

इसके उपरांत NEP प्रकोष्ठ के राज्य समन्वयक रविदर्शन तोपाल, मनोज किशोर बहुगुणा एवं डॉ. कामाक्षा मिश्रा द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर विस्तृत व्याख्यान प्रदान किया गया।
विद्यालयों में नीति के अनुसमर्थन (Implementation) विषय पर सहायक निदेशक डॉ. के. एन. विजलवान द्वारा एक महत्वपूर्ण सत्र लिया गया, जिसमें जमीनी स्तर पर नीति के क्रियान्वयन की रणनीतियों पर चर्चा की गई।

उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा: एक संकल्पना

1. बुनियादी स्तर (Foundational Stage) हेतु SCF

उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा का बुनियादी स्तर (3–8 वर्ष) राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की विशिष्ट भाषाई, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों को समाहित किया गया है।

यह रूपरेखा मुख्यतः 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के सीखने और समग्र विकास पर केंद्रित है।

मुख्य विशेषताएँ एवं उद्देश्य

🔹 पंचकोश विकास का सिद्धांत

भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पंचकोश विकास पर विशेष बल दिया गया है—

  1. अन्नमय कोष – शारीरिक विकास

  2. प्राणमय कोष – स्वास्थ्य एवं जीवन ऊर्जा

  3. मनोमय कोष – भावनात्मक एवं मानसिक विकास

  4. विज्ञानमय कोष – बौद्धिक विकास

  5. आनंदमय कोष – खुशी एवं आध्यात्मिक विकास

खेल-आधारित शिक्षा (Play-based Learning)

रटने के स्थान पर खेल, कहानियाँ, पहेलियाँ, संगीत, नृत्य और कला के माध्यम से सीखने पर जोर।

 मातृभाषा को प्राथमिकता

प्रारंभिक वर्षों में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय भाषा रखा गया है, जिससे बच्चों में बेहतर समझ और आत्मविश्वास विकसित हो।

 बहुआयामी (Holistic) विकास

संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक, शारीरिक एवं नैतिक मूल्यों के विकास को समान महत्व।

शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया

  • गतिविधि आधारित

  • संवादात्मक

  • तनाव-मुक्त वातावरण

 शिक्षण सामग्री

  • स्थानीय रूप से उपलब्ध खिलौने

  • जादुई पिटारा

  • चित्र कथाएँ एवं स्थानीय लोकगीत

 मूल्यांकन व्यवस्था

  • कोई लिखित परीक्षा नहीं

  • अवलोकन (Observation) एवं पोर्टफोलियो आधारित सतत मूल्यांकन

इस स्तर का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चा स्कूल आने में खुशी महसूस करे और उसकी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) की नींव मजबूत हो।

उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF–SE)

SCF–SE को NEP 2020 एवं NCF की प्रमुख अनुशंसाओं के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसे राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं, संस्कृति एवं संदर्भों के अनुसार ढाला गया है।

प्रमुख उद्देश्य एवं विशेषताएँ

  • स्थानीय प्रासंगिकता – राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं का समावेशन

  • सर्वांगीण विकास – शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास पर बल

  • लचीलापन – विषय चयन एवं सीखने की गति में विकल्प

  • FLN पर विशेष जोर – प्राथमिक स्तर पर सुदृढ़ नींव

  • मातृभाषा में शिक्षा – प्रारंभिक वर्षों में स्थानीय भाषा का प्रयोग

5+3+3+4 संरचनात्मक ढांचा

पारंपरिक 10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 मॉडल को अपनाया गया है, जिसके अंतर्गत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को पहली बार औपचारिक शिक्षा संरचना में शामिल किया गया है।

यह पाठ्यचर्या दस्तावेज कक्षा 3 से 12 तक के छात्रों के—

  • विषय

  • शिक्षण दिवस एवं घंटे

  • पाठ्यक्रम के लक्ष्य

  • आकलन की विधियाँ

स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।

पाठ्यपुस्तकों एवं शैक्षणिक सत्र की व्यवस्था

  • पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय संदर्भित विषयवस्तु का समावेशन

  • छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विषयवस्तु के साथ राज्य-विशिष्ट अध्ययन का अवसर

शैक्षणिक सत्र (कुल 240 दिवस):

  • 200 दिवस – शिक्षण-अधिगम

  • 20 दिवस – परीक्षा/आकलन

  • 10 दिवस – बस्तारहित दिवस

  • 10 दिवस – विद्यालयीय कार्यक्रम एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियाँ

यह अभिमुखीकरण कार्यशाला न केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना को समझने का माध्यम बनी, बल्कि राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को दिशा देने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। यह कार्यशाला उत्तराखंड में समावेशी, आनंदमय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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