Thursday, May 07, 2026

स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड की बड़ी उपलब्धि: देशभर में दर्ज हुई उल्लेखनीय प्रगति

उत्तराखंड ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) रिपोर्ट में राज्य ने शानदार सुधार दर्ज करते हुए अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय छलांग लगाई है। यह उपलब्धि राज्य सरकार, शिक्षा विभाग, SCERT, DIETs, शिक्षकों, विद्यालय प्रशासन और छात्रों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड ने पिछले वर्ष के मुकाबले अपने कुल स्कोर में बड़ा सुधार किया है। राज्य का स्कोर 526.3 अंकों से बढ़कर 584.5 अंक तक पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार और नवाचार पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। इसी सुधार के आधार पर उत्तराखंड देश के शीर्ष राज्यों की सूची में ऊपर पहुंचा है और “आकांक्षी-1” ग्रेड प्राप्त करने में सफल रहा है।

कैसे तय होती है PGI ग्रेडिंग?

परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) के माध्यम से राज्यों की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से सीखने के परिणाम (Learning Outcomes), गुणवत्ता एवं पहुंच (Access), समान अवसर, बुनियादी ढांचा, डिजिटल शिक्षा, प्रशासनिक दक्षता और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है।

राज्यों को विभिन्न श्रेणियों—उत्कृष्ट, प्रचेतस, आकांक्षी आदि—में विभाजित किया जाता है। उत्तराखंड का “आकांक्षी-1” श्रेणी में पहुंचना यह दर्शाता है कि राज्य लगातार बेहतर शिक्षा प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

शिक्षा सुधारों का दिखा प्रभाव

पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा अनेक नवाचार और सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। इनमें डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना, ICT आधारित शिक्षण, PM e-VIDYA, DIKSHA प्लेटफॉर्म पर ई-कंटेंट निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्मार्ट क्लास, साइबर सुरक्षा एवं AI आधारित शिक्षण पहल जैसी गतिविधियां प्रमुख रही हैं।

SCERT उत्तराखंड द्वारा NCERT पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय संदर्भों (Local Contextualization) को शामिल करने का प्रयास भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कक्षा 3 और कक्षा 6 की पुस्तकों में स्थानीय संस्कृति, भूगोल और सामाजिक परिवेश को जोड़ने से विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और समझ दोनों बढ़ी हैं।

डिजिटल शिक्षा में उत्तराखंड की प्रगति

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी के अनुसार राज्य में डिजिटल तकनीकों के उपयोग को लगातार बढ़ावा दिया गया है। शिक्षकों के लिए बड़े स्तर पर ICT प्रशिक्षण आयोजित किए गए, जिनमें हजारों शिक्षकों को Google Tools, Canva, AI Tools, साइबर सुरक्षा, डिजिटल कंटेंट निर्माण और इंटरैक्टिव शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

PM e-VIDYA और DIKSHA पोर्टल के माध्यम से डिजिटल कंटेंट निर्माण और प्रसारण की दिशा में भी उत्तराखंड ने उल्लेखनीय कार्य किया है। इससे दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री पहुंचाने में सहायता मिली है।

अभी भी मौजूद हैं चुनौतियाँ

डॉ मुकुल सती निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने कहा कि हालांकि यह उपलब्धि अत्यंत प्रेरणादायक है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि “Learning Outcomes” यानी विद्यार्थियों के वास्तविक सीखने के स्तर में अभी और सुधार की आवश्यकता है। उत्कृष्ट श्रेणी तक पहुंचने के लिए प्रशासनिक, शैक्षणिक और संरचनात्मक स्तर पर निरंतर प्रयास करने होंगे।

विशेष रूप से विद्यालयों में रिक्त पदों की पूर्ति, शिक्षकों का सतत प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पद्धतियों को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई है।

निदेशक बन्दना गर्ब्याल  कहा  यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि उत्तराखंड के शिक्षा क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का प्रमाण है। राज्य के शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों, SCERT, DIETs, विद्यालय प्रमुखों और नीति निर्माताओं के संयुक्त प्रयासों ने यह संभव बनाया है।

यदि इसी प्रकार नवाचार, तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित रखा गया, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड निश्चित रूप से देश के अग्रणी शिक्षा राज्यों में अपनी स्थायी पहचान बनाएगा।

सार : भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी PGI (Performance Grading Index) Report 2024-25 में उत्तराखण्ड ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

PGI रिपोर्ट राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की स्कूल शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन सीखने के परिणाम, समावेशी शिक्षा, आधारभूत सुविधाएँ, शिक्षक प्रशिक्षण, शासन व्यवस्था, डिजिटल शिक्षा एवं नवाचार जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर करती है।

इस वर्ष उत्तराखण्ड ने 584.5 अंक प्राप्त कर “प्रचेष्टा-3” श्रेणी में स्थान बनाया तथा पिछले वर्ष की तुलना में 58.2 अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। राज्य की राष्ट्रीय रैंकिंग 24वें स्थान से सुधरकर 15वें स्थान पर पहुँच गई है।

समावेशी शिक्षा (Equity), शासन व्यवस्था (Governance), विद्यालयों तक पहुँच (Access) तथा शैक्षिक प्रबंधन में किए गए सुधार इस उपलब्धि के प्रमुख आधार रहे। NEP-2020 के अनुरूप सुधारात्मक पहलों, सुदृढ़ मॉनिटरिंग व्यवस्था, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा समग्र शिक्षा, UDISE+ एवं PRABANDH के बेहतर समन्वय ने इस सफलता को नई दिशा प्रदान की है।

उत्तराखण्ड अब गोवा, गुजरात, तमिलनाडु एवं हरियाणा जैसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि राज्य की गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं नवाचारी शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

SCERT Uttarakhand and Canva Education Join Hands to Transform Digital Learning Across Uttarakhand

 

A landmark step towards strengthening digital education, creativity, and responsible AI integration in school education was achieved today as the State Council of Educational Research and Training (SCERT), Uttarakhand formally entered into a Memorandum of Understanding (MoU) with Canva Pty Ltd, Australia and India, one of the world’s leading educational design and visual communication platforms.

The MoU signing ceremony marked the beginning of a collaborative initiative aimed at empowering teachers, students, DIET faculties, and educational institutions across Uttarakhand with modern digital creativity tools, AI-enabled learning resources, and innovative classroom practices aligned with the vision of the National Education Policy (NEP) 2020.

The agreement was officially signed on behalf of SCERT Uttarakhand by Additional Director Padmendra Saklani in the physical presence of officials and technical representatives from SCERT. Representing Canva globally through online participation were Jason Wilmot, Global Head of Public Sector, Canva, and Sagari Chatterji, Education Lead, Canva India. Also present during the signing ceremony were Mehek Malhotra, Country Content Lead, Canva, and R. P. Badoni from the IT Department of SCERT Uttarakhand.

The collaboration reflects SCERT Uttarakhand’s commitment to integrating technology-driven pedagogy, digital content creation, virtual classrooms, and innovative learning ecosystems in government schools and teacher education institutions across the state.

Under this partnership, Canva Education will provide 100% free access to the premium Canva for Education platform for all K–12 government teachers and students in Uttarakhand. The initiative also includes domain integration support, low-bandwidth and offline-friendly educational resources, structured access for remote and hilly regions, and teacher-friendly digital design tools for classroom innovation.

One of the major highlights of the MoU is the phased statewide implementation model through SCERT and DIETs. The collaboration will begin with state readiness and technical setup, followed by Training of Trainers (ToT) programs for DIET faculties and master trainers. Subsequently, school-level onboarding, classroom integration, webinars, digital showcases, and continuous engagement activities will be conducted throughout the state.

The partnership will further support:

  • Development of localized educational templates in Hindi, English, and regional languages.
  • Creation of visually engaging e-learning repositories aligned with the Uttarakhand curriculum.
  • Design challenges, innovation competitions, FLN-focused activities, and student creativity campaigns.
  • AI-enabled differentiated worksheets and bilingual learning support for teachers.
  • Support for SCERT-led Hackathons, Tech Melas, digital competitions, PM eVidya, and DIKSHA content development initiatives.

SCERT Uttarakhand will play a central role in governance, coordination, training implementation, academic alignment, and district-level monitoring through DIETs, BRCs, CRCs, and educational institutions across the state.

Speaking on the occasion, officials emphasized that this collaboration is not merely a technology partnership but a strategic educational transformation initiative aimed at promoting creativity, innovation, digital literacy, and equitable access to modern educational tools, especially for learners and teachers in remote and hilly areas of Uttarakhand.

The MoU also reinforces the state’s ongoing initiatives under Mission Koshish, Foundational Literacy and Numeracy (FLN), and NEP 2020 by enabling teachers to design high-quality educational materials, classroom presentations, assessments, worksheets, and digital learning experiences with ease and accessibility.

This partnership is expected to significantly enhance teacher capacity building, digital content quality, student engagement, and technology integration in classrooms while ensuring safe and responsible AI adoption in the educational ecosystem. With this initiative, Uttarakhand takes another progressive step towards building a future-ready, digitally empowered, and innovation-driven school education system for all learners across the state.

Monday, May 04, 2026

कार्यालय आदेश: समय-सारिणी (विद्यालयों हेतु) सत्र 2026-27 के लिए लागू

 कार्यालय आदेश

समय-सारिणी (विद्यालयों हेतु)

प्रदेश के समस्त राजकीय एवं निजी विद्यालयों हेतु निम्नलिखित समय-सारिणी निर्धारित की जाती है। यह समय-सारिणी ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन सत्र के अनुसार लागू होगी।

ग्रीष्मकालीन समय (01 अप्रैल से 30 सितम्बर)

क्रम

अवधि

समय

अवधि (मिनट)

1

प्रार्थना

07:15 – 07:30

15

2

पीरियड 1

07:30 – 08:10

40

3

पीरियड 2

08:10 – 08:50

40

4

पीरियड 3

08:50 – 09:30

40

5

पीरियड 4

09:30 – 10:10

40

6

मध्यावकाश

10:10 – 10:40

30

7

पीरियड 5

10:40 – 11:15

35

8

पीरियड 6

11:15 – 11:50

35

9

पीरियड 7

11:50 – 12:25

35

10

पीरियड 8

12:25 – 01:00

35

शीतकालीन समय (01 अक्टूबर से 31 मार्च)

क्रम

अवधि

समय

अवधि (मिनट)

1

प्रार्थना

08:45 – 09:00

15

2

पीरियड 1

09:00 – 09:45

45

3

पीरियड 2

09:45 – 10:30

45

4

पीरियड 3

10:30 – 11:15

45

5

पीरियड 4

11:15 – 12:00

45

6

मध्यावकाश

12:00 – 12:30

30

7

पीरियड 5

12:30 – 01:10

40

8

पीरियड 6

01:10 – 01:50

40

9

पीरियड 7

01:50 – 02:30

40

10

पीरियड 8

02:30 – 03:10

40

नोट:

1. आवश्यकतानुसार समय-सारिणी में संशोधन समिति द्वारा किया जा सकता है।

2. किसी भी दशा में शिक्षण अवधि में कमी नहीं की जाएगी।

3. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

(रविनाथ रमन) सचिव

Friday, May 01, 2026

SCERT Uttarakhand SKOCH AWARD ahead in SEMI FINAL ROUND : उत्तराखंड की नई पहचान: सुशासन, शिक्षा और नवाचार की सशक्त कहानी

 

उत्तराखंड ने एक बार फिर अपनी प्रगतिशील सोच और प्रभावी कार्यशैली से पूरे देश में अपनी पहचान मजबूत की है। SKOCH State of Governance Report 2025 में देशभर में तीसरा स्थान प्राप्त करना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर सुधार, पारदर्शिता और परिणामोन्मुख शासन का जीवंत उदाहरण है।

स्कॉच ग्रुप ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हम राज्य के नेतृत्व—Bandana Garbyal (Director Academic) एवं Padmendra Saklani (Additional Director SCERT)—को हार्दिक बधाईयां दी हैं, जिनके दूरदर्शी मार्गदर्शन ने इस सफलता को संभव बनाया।

शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन की नई दिशा

इस उपलब्धि का सबसे सशक्त पक्ष शिक्षा क्षेत्र में हुए परिवर्तन हैं। SCERT Uttarakhand द्वारा ICT-enabled initiatives और MOOCs आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने शिक्षक क्षमता निर्माण (Teacher Capacity Building) को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे DIKSHA और PM eVIDYA ने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए सीखने के अवसरों को अधिक सुलभ, समावेशी और व्यापक बनाया है। अब शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल माध्यमों से हर कोने तक पहुँच रही है।

नवाचार और तकनीक का प्रभावी उपयोग

राज्य में blended learning, e-content development, virtual trainings और data-driven monitoring systems के उपयोग ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है।

  • शिक्षण अधिक इंटरैक्टिव और विद्यार्थी-केंद्रित हुआ है
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिक लचीले और व्यापक हुए हैं
  • डेटा आधारित निर्णयों से गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है

यह परिवर्तन दर्शाता है कि कैसे तकनीक का सही उपयोग शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है।

“हमारी विरासत एवं विभूतियां”: जड़ों से जुड़ाव: सुनिल भट्ट संकाय पाठ्यक्रम विभाग 

तकनीकी प्रगति के साथ-साथ उत्तराखंड ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से संजोया है। “हमारी विरासत एवं विभूतियां” जैसी पहल विद्यार्थियों को राज्य की समृद्ध परंपराओं, लोकजीवन, वेशभूषा, खान-पान और महान विभूतियों से जोड़ती है।

यह पहल न केवल बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करती है, बल्कि शिक्षा को स्थानीय संदर्भों से जोड़कर उसे और अधिक अर्थपूर्ण बनाती है।

भविष्य के लिए रोडमैप जरूरी :

यह उपलब्धि केवल बीते प्रयासों की सराहना नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा भी है। 2026 के आगामी मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए अब आवश्यक है कि:

  • डिजिटल एकीकरण को और गहराई दी जाए
  • नवाचारों को बड़े स्तर पर लागू किया जाए
  • अधिकाधिक शिक्षकों और संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए

“एनसीईआरटी की कक्षा 3 एवं कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय संदर्भों का समावेश (Contextualization) करते हुए, नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप एक महत्वपूर्ण एवं नवाचारी पहल की गई है, जो शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, व्यवहारिक और विद्यार्थियों के जीवन से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रही है।”

उत्तराखंड का यह सफर यह साबित करता है कि जब नेतृत्व स्पष्ट हो, रणनीति मजबूत हो और कार्यान्वयन प्रभावी हो, तो सीमित संसाधनों में भी असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।

Thursday, April 30, 2026

निदेशक प्रारम्भिक एवं संस्कृत शिक्षा "कंचन देवराड़ी" का सम्मानपूर्वक सेवा निवृत्ति समारोह

आज SCERT उत्तराखंड के सभागार में शिक्षा विभाग की एक गरिमामयी और भावनात्मक विदाई का आयोजन किया गया। प्रभारी निदेशक, प्रारंभिक  एवं संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी के अधिवर्षता आयु पूर्ण करने पर सेवा निवृत्ति के अवसर पर विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत और शिक्षा सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रामन भी रहे कार्यक्रम मे मौजूद । शिक्षा मंत्री ने कंचन देवराड़ी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हे एक कुशल अधिकारी बताया जबकि सचिव ने उन्हे एक हंसमुख और ईमानदार अधिकारी और मानवता के प्रति हमेशा सजग रहने वाली महिला के रूप मे सम्बोधन भी किया। 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात पुष्पमालाओं से उनका हार्दिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों और सहकर्मियों ने कंचन देवराड़ी के साथ बिताए गए कार्यकाल की स्मृतियों को साझा किया। निदेशक डॉ मुकुल सती  ने उन्हें एक ईमानदार, सरल, सौम्य और अपने कार्य के प्रति निडर अधिकारी के रूप में याद किया।

कंचन देवराड़ी ने SCERT उत्तराखंड में पूर्व में भी कई वर्षों तक संयुक्त निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं दीं और संस्थान को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नेतृत्व, कार्यनिष्ठा और निर्णय क्षमता की सराहना हर वक्ता के शब्दों में झलकती रही।

वर्तमान अपर निदेशक SCERT,  पद्मेंद्र सकलानी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके साथ जुड़े कई यादगार प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि कंचन देवराड़ी का योगदान विभाग के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। डॉ. के. एन. बिजल्वाण सहित SCERT के अनेक अधिकारियों ने भी अपने शुभकामना संदेश प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में प्रारंभिक, समग्र शिक्षा तथा माध्यमिक शिक्षा के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अवसर को और अधिक गरिमामय बनाया। मंच पर उनके पति ने भी उनका साथ दिया, जिससे यह क्षण और भी भावुक बन गया। कई अवसरों पर सहकर्मियों ने उन पलों को याद किया जब कंचन देवराड़ी ने सभी का मार्गदर्शन और सहयोग किया।

इस अवसर पर अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने दूरभाष के माध्यम से उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं, जो उनके प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक रहा।

समारोह के अंत में सभी ने कंचन देवराड़ी के स्वस्थ, सुखद और सफल भविष्य की कामना की। यह विदाई केवल एक अधिकारी की सेवा निवृत्ति नहीं, बल्कि उनके समर्पण, सादगी और उत्कृष्ट कार्यशैली को सम्मानित करने का एक भावनात्मक अवसर था।

इस मौके पर पूर्व डाइट देहरादून प्राचार्य रवींद्र जुगरान एवं अपर निदेशक SCERT प्रदीप कुमार भी उपस्थित थे .