Friday, January 09, 2026

Hackathon 2.0 Final Round at SCERT Uttarakhand:2026

 

Final List of Selected Students and Teachers to Be Released | Live Jury Presentations on 23 January 2026

SCERT Uttarakhand is proud to announce that the final list of selected students and teachers for the Hackathon 2.0 – Final Round will be released on 23 January 2026 on its innovation portal Innovate Uttarakhand

Hackathon 2.0: Driving Digital Innovation in School Education

Hackathon 2.0 is a state-level initiative designed to promote innovation, creativity, and problem-solving skills among students and teachers through the effective use of digital tools and emerging technologies. Participants from across Uttarakhand have worked collaboratively to develop digitally innovative ideas and solutions addressing real-life challenges in school education and society.

The themes of Hackathon 2.0 focused on:

  • Innovative teaching-learning solutions

  • Use of ICT, AI, and digital tools in education

  • Inclusive and accessible learning models

  • School-level problem-solving through technology

  • NEP 2020-aligned innovation and experiential learning

Final Jury Presentation Round

Shortlisted teams will present their digital ideas, prototypes, and solutions before an expert jury panel at SCERT Uttarakhand. The evaluation will be based on:

  • Innovation and originality

  • Practical implementation and scalability

  • Effective use of digital technology

  • Social and educational impact

  • Clarity of presentation

This final round marks a significant milestone where ideas move closer to real-world implementation.

Live Telecast of Hackathon 2.0 Grand Finale

To ensure wider participation and transparency, the Hackathon 2.0 Final Round will be live telecast on YouTube. Educators, students, school leaders, and innovation enthusiasts are encouraged to join and witness the presentations live.

📡 Watch Live:

Building an Innovation Ecosystem in Uttarakhand

Through platforms like Innovate Uttarakhand, SCERT Uttarakhand continues to nurture a strong innovation ecosystem in school education, aligned with the vision of NEP 2020. Hackathon 2.0 not only celebrates innovative ideas but also motivates teachers and students to become solution creators rather than solution seekers.

Event Details at a Glance

📅 Date: 23 January 2026
📍 Venue: SCERT Uttarakhand
📡 Mode: Live Telecast on YouTube

Stay connected with Innovate Uttarakhand as young innovators and dedicated educators showcase their digitally innovative solutions to address today’s challenges and shape the future of education in Uttarakhand.

द्वितीय दिवस : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित प्रमुख सत्र

 

दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला के द्वितीय दिवस में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की उन महत्वपूर्ण अनुशंसाओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जो सीधे तौर पर शिक्षकों की पेशेवर गुणवत्ता, विद्यालयी व्यवस्था, समय प्रबंधन, तकनीकी एकीकरण तथा शैक्षिक गुणवत्ता के आकलन से जुड़ी हैं। इस दिवस के सभी सत्रों का उद्देश्य नीति के प्रावधानों को व्यवहारिक दृष्टि से समझाते हुए अधिकारियों को उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु तैयार करना रहा।

राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (NPST)

द्वितीय दिवस के प्रमुख सत्रों में डॉ. अंकित जोशी द्वारा राष्ट्रीय अध्यापक व्यावसायिक मानक (National Professional Standards for Teachers – NPST) पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि NPST, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दूरदर्शी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहल है, जिसका उद्देश्य अध्यापन को एक सुदृढ़, उत्तरदायी और गरिमामय पेशे के रूप में स्थापित करना है।

डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि NPST के अंतर्गत शिक्षकों की भूमिकाओं, अपेक्षित दक्षताओं तथा उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक साझा और पारदर्शी ढांचा विकसित किया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य शिक्षक के करियर की प्रगति को केवल सेवा अवधि (सीनियरिटी) तक सीमित न रखते हुए योग्यता, दक्षता और सतत व्यावसायिक विकास से जोड़ना है।

NPST के तीन स्तर

NPST ढांचे के अंतर्गत शिक्षकों को उनकी दक्षताओं एवं अनुभव के आधार पर तीन स्तरों में वर्गीकृत किया गया है-

  1. प्रवीण शिक्षक (Proficient Teacher) – बुनियादी स्तर की आवश्यक दक्षताओं से युक्त शिक्षक।

  2. उन्नत शिक्षक (Advanced Teacher) – विषयवस्तु एवं शिक्षण कौशल में गहराई रखने वाले शिक्षक।

  3. कुशल शिक्षक (Expert Teacher) – उच्चतम स्तर की विशेषज्ञता रखने वाले शिक्षक, जो अन्य शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक (Mentor) की भूमिका निभा सकें।

NPST के मुख्य मानक

NPST को तीन प्रमुख मानकों में विभाजित किया गया है—

  • मूल मूल्य एवं नैतिकता (Core Values & Ethics) – संवैधानिक मूल्यों का पालन, छात्रों की गरिमा की रक्षा और पेशेवर आचरण।

  • ज्ञान एवं अभ्यास (Knowledge & Practice) – बाल विकास, समावेशी शिक्षा, पाठ्यक्रम की समझ, प्रभावी शिक्षण विधियाँ, तकनीक का उपयोग तथा मूल्यांकन रणनीतियाँ।

  • व्यावसायिक विकास (Professional Growth & Development) – शिक्षक की स्वयं की सीखने की क्षमता तथा सतत सुधार की प्रतिबद्धता।

यह सत्र शिक्षकों की गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।

समय आवंटन एवं विद्यालयी दिनचर्या



इसके पश्चात डॉ. मोहन बिष्ट द्वारा राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF) के अंतर्गत विद्यालयों की दैनिक समय-सारणी एवं समय प्रबंधन पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि समय आवंटन का मूल उद्देश्य विद्यालयी समय का ऐसा प्रबंधन करना है, जिससे विद्यार्थियों को रटने के बजाय सृजनात्मकता, संवाद और व्यावहारिक अनुभव के पर्याप्त अवसर मिल सकें।





प्रस्तुति में लचीली समय-सारणी, बस्ते का बोझ कम करने, प्राथमिक स्तर पर गृहकार्य न देने तथा 240 दिवस के शैक्षणिक सत्र की अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि विद्यालयी समय-सारणी स्थानीय परिस्थितियों और बच्चों की आवश्यकताओं के अनुसार लचीली होनी चाहिए, जिससे सह-शैक्षिक गतिविधियों को भी पर्याप्त स्थान मिल सके।

ICT एवं IT आधारित पहलें

द्वितीय दिवस में रमेश बडोनी ने परिषद के आई सी टी पहल और नवाचारी कार्यक्रमों पर विस्तार से तकनीकी से तंत्र मे गुणवत्ता एवं पारदर्शिता पर सम्बोधन देते हुए एआई और डिजिटल तकनकी से ग्लोबल रीच तक पहुंचने को एक बड़ा जरिया बताया जिसका उद्धरण यूनेस्को मे प्रकाशित केस स्टडी को भी साझा किया गया । पुष्पा असवाल द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गतपी एम ई विद्या पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि NEP 2020 में तकनीक को शिक्षा का एक अनिवार्य स्तंभ माना गया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाना है।


द्वितीय दिवस के अन्य सत्रों में—

  • अजीत भंडारी (उप राज्य परियोजना निदेशक) द्वारा परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें उत्तराखंड की स्थिति की अन्य राज्यों से तुलनात्मक समीक्षा की गई।

  • SCERT प्रवक्ता सुनील भट्ट ने संकुल स्तरीय अकादमिक बैठकों के प्रभावी संचालन, अधिगम प्रतिफल प्राप्त करने हेतु सर्वोत्तम अभ्यासों तथा कक्षा-कक्ष नवाचारों के साझा करण पर अपने विचार रखे।

  • विनय थपलियाल ने विद्यालयों में सड़क सुरक्षा क्लब के गठन एवं सड़क सुरक्षा को नियमित विद्यालयी गतिविधियों में सम्मिलित करने पर बल दिया।

कार्यशाला का समापन

द्वितीय दिवस एवं संपूर्ण कार्यशाला का समापन निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण  बंदना गर्व्याल द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि NEP 2020 की अनुशंसाओं को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी फील्ड में कार्यरत शिक्षा अधिकारियों की है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे विद्यालयों में जाकर सतत अवलोकन करें, अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों को प्रोत्साहित करें तथा समुदाय एवं अभिभावकों के सहयोग से एक सशक्त शैक्षिक वातावरण का निर्माण करें।



अंत में अपर निदेशक  पद्मेन्द्र सकलानी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहन बिष्ट एवं रविदर्शन तोपाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस दिवस की कार्यशाला में प्रदेश भर से मुख्य शिक्षा अधिकारी, संयुक्त निदेशक, उप राज्य परियोजना निदेशक, खंड शिक्षा अधिकारी एवं उप खंड शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।

Thursday, January 08, 2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अनुशंसाओं तथा उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (State Curriculum Framework – SCF) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश भर से समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) एवं समस्त खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) हेतु दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के सभागार में किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ

कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारंभ निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्व्याल एवं अपर निदेशक  सकलानी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर निदेशक महोदया एवं अपर निदेशक ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि—

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा तभी जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हो सकती है जब जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारी इसे गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ अपनाएँ। आप सभी इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।”

उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता, गहन चर्चा एवं अनुभव साझा करने का आह्वान किया।


आनंदम गतिविधियों से सत्र की शुरुआत

कार्यशाला का प्रथम सत्र ‘आनंदम’ की गतिविधियों के साथ प्रारंभ हुआ, जिसे डॉ. बी. पी. मैंदोली (राज्य नोडल अधिकारी) एवं सहयोगी एनजीओ सदस्यों द्वारा प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। इस सत्र के माध्यम से बच्चों के भावनात्मक, मानसिक और आनंदमय विकास की अवधारणा को गतिविधि आधारित अनुभवों के माध्यम से समझाया गया।

NEP 2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर विस्तृत व्याख्यान

इसके उपरांत NEP प्रकोष्ठ के राज्य समन्वयक रविदर्शन तोपाल, मनोज किशोर बहुगुणा एवं डॉ. कामाक्षा मिश्रा द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एवं राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर विस्तृत व्याख्यान प्रदान किया गया।
विद्यालयों में नीति के अनुसमर्थन (Implementation) विषय पर सहायक निदेशक डॉ. के. एन. विजलवान द्वारा एक महत्वपूर्ण सत्र लिया गया, जिसमें जमीनी स्तर पर नीति के क्रियान्वयन की रणनीतियों पर चर्चा की गई।

उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा: एक संकल्पना

1. बुनियादी स्तर (Foundational Stage) हेतु SCF

उत्तराखंड राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा का बुनियादी स्तर (3–8 वर्ष) राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की विशिष्ट भाषाई, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों को समाहित किया गया है।

यह रूपरेखा मुख्यतः 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के सीखने और समग्र विकास पर केंद्रित है।

मुख्य विशेषताएँ एवं उद्देश्य

🔹 पंचकोश विकास का सिद्धांत

भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पंचकोश विकास पर विशेष बल दिया गया है—

  1. अन्नमय कोष – शारीरिक विकास

  2. प्राणमय कोष – स्वास्थ्य एवं जीवन ऊर्जा

  3. मनोमय कोष – भावनात्मक एवं मानसिक विकास

  4. विज्ञानमय कोष – बौद्धिक विकास

  5. आनंदमय कोष – खुशी एवं आध्यात्मिक विकास

खेल-आधारित शिक्षा (Play-based Learning)

रटने के स्थान पर खेल, कहानियाँ, पहेलियाँ, संगीत, नृत्य और कला के माध्यम से सीखने पर जोर।

 मातृभाषा को प्राथमिकता

प्रारंभिक वर्षों में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय भाषा रखा गया है, जिससे बच्चों में बेहतर समझ और आत्मविश्वास विकसित हो।

 बहुआयामी (Holistic) विकास

संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक, शारीरिक एवं नैतिक मूल्यों के विकास को समान महत्व।

शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया

  • गतिविधि आधारित

  • संवादात्मक

  • तनाव-मुक्त वातावरण

 शिक्षण सामग्री

  • स्थानीय रूप से उपलब्ध खिलौने

  • जादुई पिटारा

  • चित्र कथाएँ एवं स्थानीय लोकगीत

 मूल्यांकन व्यवस्था

  • कोई लिखित परीक्षा नहीं

  • अवलोकन (Observation) एवं पोर्टफोलियो आधारित सतत मूल्यांकन

इस स्तर का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चा स्कूल आने में खुशी महसूस करे और उसकी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) की नींव मजबूत हो।

उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF–SE)

SCF–SE को NEP 2020 एवं NCF की प्रमुख अनुशंसाओं के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसे राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं, संस्कृति एवं संदर्भों के अनुसार ढाला गया है।

प्रमुख उद्देश्य एवं विशेषताएँ

  • स्थानीय प्रासंगिकता – राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं का समावेशन

  • सर्वांगीण विकास – शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास पर बल

  • लचीलापन – विषय चयन एवं सीखने की गति में विकल्प

  • FLN पर विशेष जोर – प्राथमिक स्तर पर सुदृढ़ नींव

  • मातृभाषा में शिक्षा – प्रारंभिक वर्षों में स्थानीय भाषा का प्रयोग

5+3+3+4 संरचनात्मक ढांचा

पारंपरिक 10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 मॉडल को अपनाया गया है, जिसके अंतर्गत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को पहली बार औपचारिक शिक्षा संरचना में शामिल किया गया है।

यह पाठ्यचर्या दस्तावेज कक्षा 3 से 12 तक के छात्रों के—

  • विषय

  • शिक्षण दिवस एवं घंटे

  • पाठ्यक्रम के लक्ष्य

  • आकलन की विधियाँ

स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।

पाठ्यपुस्तकों एवं शैक्षणिक सत्र की व्यवस्था

  • पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय संदर्भित विषयवस्तु का समावेशन

  • छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विषयवस्तु के साथ राज्य-विशिष्ट अध्ययन का अवसर

शैक्षणिक सत्र (कुल 240 दिवस):

  • 200 दिवस – शिक्षण-अधिगम

  • 20 दिवस – परीक्षा/आकलन

  • 10 दिवस – बस्तारहित दिवस

  • 10 दिवस – विद्यालयीय कार्यक्रम एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियाँ

यह अभिमुखीकरण कार्यशाला न केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना को समझने का माध्यम बनी, बल्कि राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को दिशा देने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। यह कार्यशाला उत्तराखंड में समावेशी, आनंदमय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षक शिक्षा संस्थानों के अकादमिक सदस्यों का एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम

उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 6 जनवरी 2026 को उत्तराखंड एवं पंजाब के शिक्षक शिक्षा संस्थानों के अकादमिक सदस्यों का एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम सी०एन०सी०एल०, एन०सी०ई०आर०टी०, नई दिल्ली द्वारा एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड के सभागार में, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (NCTE), नई दिल्ली एवं एस०सी०एल०, एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड के सहयोग से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में उत्तराखंड और पंजाब से इस कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने सहभागिता की।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन सभी व्यक्तियों को पढ़ने–लिखने के अवसर उपलब्ध कराने पर बल देती है, जो अब तक आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान प्राप्त नहीं कर सके हैं। इसी अनुशंसा के अनुरूप 01 अप्रैल 2022 से राष्ट्रीय स्तर पर नव भारत साक्षरता कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। इस कार्यक्रम के पाँच प्रमुख घटक हैं—

  1. आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान

  2. महत्वपूर्ण जीवन कौशल

  3. व्यावसायिक कौशल विकास

  4. बुनियादी शिक्षा

  5. सतत शिक्षा

शिक्षण कार्य का संचालन सामाजिक चेतना केन्द्रों के माध्यम से स्वयंसेवी शिक्षकों द्वारा किया जाता है।

नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु राज्य साक्षरता प्रकोष्ठ, एस०सी०ई०आर०टी० उत्तराखण्ड द्वारा एन०सी०ई०आर०टी०, नई दिल्ली के सहयोग से प्रौढ़ असाक्षरों के लिए उल्लास नाम से प्रवेशिकाएँ (भाग एक से चार), एक संक्षिप्त प्रवेशिका, इन प्रवेशिकाओं के अध्यापन हेतु मार्गदर्शिकाएँ, आकलन प्रपत्र, परीक्षण पत्रक एवं कार्यपत्रक तैयार किए गए हैं।

प्रवेशिकाओं (भाग 1 से 4) में 13 विषयों— परिवार और पड़ोस, बातचीत, हमारे आस–पास, खान–पान और स्वास्थ्य, मतदान, कानूनी जानकारी, आपदा प्रबंधन, समय, यात्रा, मनोरंजन, वित्तीय साक्षरता तथा डिजिटल साक्षरता— को सम्मिलित किया गया है।
एन०सी०ई०आर०टी०, नई दिल्ली के सहयोग से राज्य के DIETs के संकाय सदस्यों का समय–समय पर अभिमुखीकरण किया जाता रहा है तथा राज्य साक्षरता प्रकोष्ठ द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से हितधारकों के लिए क्षमता संवर्धन कार्यक्रम भी निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।

एन०आई०ओ०एस० (राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान) द्वारा वयस्क शिक्षार्थियों के लिए वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जाती है तथा सफल साक्षरों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाते हैं।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो०  प्रकाश सिंह ने ऑनलाइन उद्बोधन में कहा कि शिक्षा प्रणाली में शिक्षक की भूमिका केंद्रीय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक का स्वयं प्रसन्न रहना और विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देना अत्यंत आवश्यक है।


कार्यक्रम में एस०सी०एल०, एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड द्वारा विकसित उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लास के विशिष्ट संस्करण का विमोचन किया गया। इसके पश्चात एन०सी०ई०आर०टी० से प्रोफेसर उषा शर्मा ने उल्लास कार्यक्रम के उद्देश्यों, संरचना एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में प्रस्तावित गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इसके बाद पंजाब राज्य के कार्यक्रम नोडल अधिकारी  सुरेंद्र कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करना चुनौतीपूर्ण कार्य है, किंतु पंजाब में विभिन्न नवाचारों के माध्यम से इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया जा रहा है।

अपर निदेशक एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड पद्मेंद्र सकलानी ने कहा कि उत्तराखंड में उल्लास कार्यक्रम को पूर्ण गंभीरता के साथ लागू किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम भविष्य में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
निदेशक अकादमिक उत्तराखंड  बंदना गर्ब्याल ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड ने न केवल अतिरिक्त शैक्षिक सामग्री का निर्माण किया है, बल्कि उसका स्थानीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद भी किया है।

शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से मुख्य परामर्शदाता डॉ कुलदीप कुमार ने अपने प्रस्तुतीकरण में उल्लास कार्यक्रम के विविध आयामों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में डॉ ऋषभ मिश्रा एवं प्रोफेसर सीमा धवन द्वारा भी उल्लास पर महत्वपूर्ण प्रस्तुतीकरण दिए गए।

इसके अतिरिक्त डॉ याचना गुप्ता (वरिष्ठ परामर्शदाता, सी०एन०सी०एल०, एन०सी०ई०आर०टी०, नई दिल्ली), सिद्धान्त सिंह (परामर्शदाता, सी०एन०सी०एल०, एन०सी०ई०आर०टी०, नई दिल्ली), उपनिदेशक  पल्लवी नयन, एस०एल०एम०ए० / राज्य परियोजना कार्यालय उत्तराखंड के उप राज्य परियोजना निदेशक श्री अजीत भंडारी सहित अनेक अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर एस०सी०एल०, एस०सी०ई०आर०टी०, उत्तराखंड की ओर से कार्यक्रम समन्वयक डॉ हरेंद्र सिंह अधिकारी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

Tuesday, January 06, 2026

Report: MOOC 2.0 Sets a New Benchmark in Teacher Professional Development in Uttarakhand

The latest data from the UK e-Srijan September 2025 Dashboard presents an inspiring success story of MOOC 2.0, an advanced online professional development course for teachers in Uttarakhand. The course, which opened in October 2025 and will remain accessible until 31 December 2025 (First Round), has already demonstrated exceptional engagement, commitment, and outcomes.

R. P. Badoni, the course coordinator, reported that the progress achieved so far is a strong reflection of teachers’ dedication to continuous professional learning, as well as the academic vision and technological leadership of SCERT Uttarakhand and its IT Department, which conceptualised and implemented this large-scale digital initiative.

Outstanding Progress at a Glance: (Dashboard Refresh Date: 17 December 2025)

The participation and completion statistics speak volumes about the success of MOOC 2.0:

  • Total Teachers Registered: 49,200

  • Teachers Who Started the Course: 49,029 (99.65%)

  • Teachers Who Completed the Course: 46,876 (95.28%)

  • Teachers Who Downloaded Certificates: 46,849 (95.22%)

Such high conversion from registration to completion is rare in large-scale online courses and highlights the relevance, accessibility, and quality of the course content.

Strong Institutional Participation

The dashboard also reflects robust institutional engagement across the state:

  • School Participation Rate: 97.22%

  • Teacher Participation Rate: 84.91%

These figures indicate widespread acceptance of the program at the school level and strong motivation among teachers to upskill through structured online learning.

A Model for Scalable Digital CPD

MOOC 2.0 has emerged as one of the most successful large-scale online teacher training initiatives in Uttarakhand, setting new standards for completion and certification rates. The course design, user-friendly digital platform, and continuous academic and technical support have played a crucial role in sustaining teacher engagement.

This accomplishment strengthens SCERT Uttarakhand's dedication to NEP2020-aligned continuous professional development (CPD) and establishes the state as a frontrunner in using digital platforms for teacher capacity enhancement.

As MOOC 2.0 continues towards its first-round completion on 31 December 2025, the current data already stands as a testament to what focused academic planning, strong leadership, and motivated teachers can achieve together.