Friday, February 20, 2026

गोवा -शिक्षा की गुणवत्ता और नवाचार के नए क्षितिज तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की अनुशंसाओं को धरातल पर उतारने और राज्य की शैक्षिक प्रगति को नई गति देने के उद्देश्य से आज SCERT उत्तराखंड की विशेषज्ञ फैकल्टी टीम ने गोवा राज्य की शिक्षा व्यवस्था के मॉडल का विस्तृत Exposure Visit किया। इस अध्ययन यात्रा का नेतृत्व अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी एवं सहायक निदेशक डॉ के. एन. विजलवान ने किया।

इस भ्रमण कार्यक्रम में डायट प्राचार्य देहरादून एवं डायट प्राचार्य हरिद्वार अपनी टीम सहित उपस्थित रहे।

इस अध्ययन यात्रा का मुख्य ध्येय था:

  • गोवा की शिक्षा प्रणाली में अपनाई गई Best Practices को समझना।

  • वहां के आधुनिक शिक्षण तौर-तरीकों का अवलोकन करना।

  • उत्तराखंड के शैक्षिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ एवं भविष्योन्मुख बनाने के लिए उपयोगी नवाचारों को अपनाना।

अध्ययन दल ने गोवा के विद्यालयों में लागू विभिन्न नवाचारों का गहन अवलोकन किया:

  • अनुभव आधारित शिक्षण (Experiential Learning): छात्रों को वास्तविक जीवन से जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है।
  • मूवी स्कूल कॉन्सेप्ट: सीखने-सिखाने का एक अभिनव तरीका, जो शिक्षा को रोचक और आकर्षक बनाता है।
  • व्यावसायिक शिक्षा में स्थानीय पुट: PPT प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और व्यवसायिक शिक्षा का सुंदर समन्वय देखा गया।
  • शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल एवं छात्र मूल्यांकन पद्धति: गोवा में शिक्षकों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण और छात्रों के लिए आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली लागू है।
  • बालबाटिकाओं और पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं का संचालन: विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ प्रारंभिक शिक्षा को भी सुदृढ़ किया गया है।

  • बस्तारहित दिवस (Bagless Days): कक्षा तीन से दसवीं तक व्यावसायिक शिक्षा को मज़बूत करने के लिए लागू।
  • राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (SSSA): SQAF मॉडल को अपनाकर शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम।
  • सुपर स्कूल मॉडल: क्लस्टर स्कूल और कॉम्प्लेक्स स्कूल की अवधारणा को योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया गया है।
  • मॉनिटरिंग यूनिटें: जोनल और राज्य स्तर पर निगरानी एवं समन्वय की व्यवस्था, जिससे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सहयोग बढ़ता है।

इस Exposure Visit में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अजय कुमार चौरसिया, डॉ. राकेश गैरोला, शुभ्रा सिंघल, हरेन्द्र अधिकारी, रंजन भट्ट, मनोज बहुगुणा और रविदर्शन तोपाल सहित डायट के संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे।

गोवा की शिक्षा प्रणाली से मिले अनुभव और नवाचार उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देंगे। यह Exposure Visit न केवल NEP 2020 के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि राज्य की शैक्षिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगा।

गुजरात शैक्षिक अभिदर्शन एवं भ्रमण कार्यक्रम – पंचम दिवस

 

दिनांक: 20 फरवरी 2026 | जनपद: गिर सोमनाथ, गुजरात

प्रकृति दर्शन से -दिवस की शुरुआत


निदेशक अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण, बन्दना गर्ब्याल के मार्गदर्शन में पंचम दिवस का आरंभ प्रातःकालीन प्रकृति-अध्ययन से हुआ। Gir National Park में पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता एवं संरक्षण प्रयासों का अवलोकन किया गया। लायन सफारी के दौरान एशियाई सिंहों के प्राकृतिक आवास, खाद्य शृंखला और वन प्रबंधन की व्यवस्थाओं को निकट से समझने का अवसर मिला।

इस अनुभव ने स्पष्ट किया कि सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन शिक्षा के माध्यम से ही समाज में सुदृढ़ हो सकते हैं।

विद्यालय भ्रमण एवं अभिदर्शन

प्रकृति-अध्ययन के उपरांत टीम ने जनपद के विद्यालयों—PM Shri रामलेची प्राथमिकशाला  एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय तथा श्री जंबुर प्राथमिकशाला —का शैक्षिक भ्रमण किया। अंत मे श्री मधुपुर पे सेंट्रल स्कूल का भ्रमण किया और सभी सदस्युओ के अनुदान की सराहना की गई । भ्रमण कार्यक्रम के दौरान स्कूल मे उप जिला शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारियों से भी मुलाकत हुई और निदेशक ने मोनिट्रिंग सिस्टम पर विस्तार से चर्चा की । 

जनपद मे अधिकारियों के रोल पर की बिन्दु सामने आए जैसे -

प्रशासनिक एवं व्यवस्थागत संरचना

  • प्रशासनिक ढांचा: DEO, BEO और प्रधानाध्यापक की भूमिकाएँ एवं जवाबदेही।
  • शिक्षक नियुक्ति: विषयानुसार तैनाती, रिक्त पदों की पहचान और पारदर्शी स्थानांतरण।
  • सूचना प्रवाह: डिजिटल संप्रेषण, समीक्षा बैठकें और डेटा-आधारित निर्णय।
  • संरचनात्मक सुविधाएँ: भवन, शौचालय, पेयजल, वर्दी, मध्यान्ह भोजन और छात्रवृत्ति योजनाएँ एवं किचन गार्डन ।
  • निरीक्षण एवं अनुश्रवण: नियमित निरीक्षण, कक्षा अवलोकन और सुधारात्मक कार्ययोजना।

अकादमिक पक्ष एवं नवाचार

  • शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया: छात्र-केंद्रित एवं गतिविधि-आधारित पद्धतियाँ।

  • नवाचार एवं श्रेष्ठ प्रथाएँ: ICT का उपयोग, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय नवाचार।

  • अकादमिक समर्थन: प्रशिक्षण, सहकर्मी अधिगम और नवाचारों का दस्तावेजीकरण।

Key Learnings-

  • प्रशासनिक दक्षता और अकादमिक गुणवत्ता परस्पर पूरक हैं।
  • डेटा-आधारित अनुश्रवण से पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ती है।
  • स्थानीय नवाचारों का साझा करना व्यापक सुधार का मार्ग है।
  • शिक्षक सशक्तिकरण से अधिगम परिणामों में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
  • पारिस्थितिकी और शिक्षा का समन्वय संवेदनशील नागरिकता का विकास करता है।

जनपद गिर सोमनाथ में शिक्षा व्यवस्था केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय चेतना, सामुदायिक सहभागिता और उत्तरदायित्वपूर्ण प्रशासन के माध्यम से समग्र विकास की दिशा में अग्रसर है।
यह भ्रमण “पारिस्थितिकी से प्रशासन और प्रशासन से अकादमिक गुणवत्ता” की समन्वित दृष्टि को साकार करता है।

इस कार्यक्रम में समन्वयक सुनील भट्ट, डॉ. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, विनय थपलियाल, डॉ. साधना डिमरी, गंगा घुगघत्याल, हिमानी रौतेला, आईटी विभाग से रमेश बडोनी, तथा DIET चंपावत से दिनेश खेतवाल एवं बालक राम मिश्रा ने सक्रिय सहभागिता की।

Thursday, February 19, 2026

शिक्षा की गुणवत्ता और नवाचार - SCERT उत्तराखंड का गोवा एक्सपोज़र विज़िट -2026

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और राज्य की शैक्षिक गुणवत्ता को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत SCERT Uttarakhand की विशेषज्ञ फैकल्टी टीम ने गोवा राज्य की शिक्षा व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन भ्रमण (Exposure Visit) किया।

यह अध्ययन भ्रमण अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी एवं सहायक निदेशक डॉ के.एन. विजलवान के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। इस यात्रा का उद्देश्य गोवा की शिक्षा प्रणाली में अपनाई गई श्रेष्ठ पद्धतियों (Best Practices) और आधुनिक शिक्षण नवाचारों को समझना था, ताकि उत्तराखंड की शैक्षिक संरचना को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी और भविष्योन्मुख बनाया जा सके।


अनुभव आधारित शिक्षण: सीखने का जीवंत मॉडल

गोवा के विद्यालयों में लागू अनुभव आधारित शिक्षण (Experiential Learning) की अवधारणा को निकटता से समझा गया। शिक्षण को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रखकर गतिविधियों, प्रोजेक्ट्स और स्थानीय संदर्भों से जोड़ने की प्रक्रिया वास्तव में प्रेरणादायक रही।

तकनीक और स्थानीय संस्कृति का समन्वय गोवा की शिक्षा प्रणाली की विशेष पहचान है। “मूवी स्कूल” का नवाचारी कॉन्सेप्ट सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को रोचक और प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसी प्रकार व्यवसायिक शिक्षा में स्थानीय कौशल और आजीविका आधारित प्रशिक्षण का समावेश छात्रों को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करता है।

शिक्षक प्रशिक्षण, मूल्यांकन एवं जन-जागरूकता

अध्ययन दल ने गोवा के शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल, छात्र मूल्यांकन प्रणाली और पब्लिक अवेयरनेस कार्यक्रमों का भी अवलोकन किया। विशेष रूप से यह देखा गया कि बाल वाटिकाओं एवं कक्षा एक से पूर्व की कक्षाओं का संचालन विद्यालयी शिक्षा के अंतर्गत ही किया जा रहा है, जहाँ विद्यालयी शिक्षक ही अध्यापन का कार्य कर रहे हैं — यह एकीकृत मॉडल शिक्षा के सुगम संक्रमण को सुनिश्चित करता है।


बस्तारहित दिवस और व्यवसायिक शिक्षा

गोवा में कक्षा 3 से 10 तक “बस्तारहित दिवस” का आयोजन व्यवसायिक शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए किया जा रहा है। यह पहल छात्रों में व्यावहारिक कौशल, रचनात्मकता और जीवनोपयोगी दक्षताओं को विकसित करने की दिशा में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (SSSA) एवं गुणवत्ता आश्वासन

गोवा राज्य द्वारा राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (SSSA) का गठन किया जा चुका है, जिसमें NCERT द्वारा जारी SQAF (School Quality Assessment and Assurance Framework) मॉडल को अपनाया गया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में सचिव (शिक्षा) को नामित किया गया है तथा सभी सदस्य विभागीय स्तर के हैं।

सुपर स्कूल मॉडल और क्लस्टर व्यवस्था

गोवा में “सुपर स्कूल मॉडल” के माध्यम से क्लस्टर/कॉम्प्लेक्स स्कूल अवधारणा को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया गया है।

  • तालुका स्तर पर इंटर कॉलेजों को “सुपर स्कूल” बनाया गया है।

  • उनके अंतर्गत हाईस्कूल “स्कूल कॉम्प्लेक्स” के रूप में कार्य करते हैं।

  • प्रत्येक हाईस्कूल के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय “कॉम्प्लेक्स स्कूल” कहलाते हैं।

यह संरचना नवाचारों के क्रियान्वयन, रिपोर्टिंग और समन्वय को सुव्यवस्थित बनाती है। साथ ही जोनल एवं स्टेट मॉनिटरिंग यूनिटें इन सभी स्तरों पर सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करती हैं, जिससे समग्र शैक्षिक समन्वय स्थापित होता है।इस अध्ययन दल में डॉ. चौरसिया, डॉ. राकेश गैरोला, शुभ्रा सिंघल, हरेन्द्र अधिकारी, रंजन भट्ट, मनोज बहुगुणा एवं रविदर्शन तोपाल सम्मिलित रहे।

यह एक्सपोज़र विज़िट केवल एक औपचारिक अध्ययन नहीं, बल्कि शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार और प्रशासनिक समन्वय के नए क्षितिज तलाशने की दिशा में एक सार्थक पहल है। गोवा के अनुभव आधारित शिक्षण मॉडल, तकनीकी समावेशन, व्यवसायिक शिक्षा और स्कूल कॉम्प्लेक्स संरचना से प्राप्त सीख उत्तराखंड में शिक्षा सुधार की प्रक्रिया को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

एस सी ई आर टी का चतुर्थ दिवस शैक्षिक भ्रमण – डाइट पोर्बंदर, गुजरात

 

निदेशक बन्दना गर्ब्याल के संरक्षण मे  एससीईआरटी उत्तराखंड की टीम ने अपने समूह के साथ यात्रा का शुभारंभ किया और सबसे पहले प्रस्थान किया पोरबंदर के लिए, जहाँ पर स्थित पारंपरिक और हैरिटेज डाइट (District Institute of Education & Training) का भ्रमण किया गया।

यह डाइट राजवाड़ों के समय स्थापित की गई थी और इसे रमादेवी द्वारा शिक्षा के प्रयोग तथा शिक्षा-प्रबंधन की कार्यशालाओं के लिए दान स्वरूप प्रदान किया गया था। यह भवन पारंपरिक स्थापत्य, विशाल प्रांगण और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है, जिसका संरक्षण आज भी स्थानीय समुदाय और प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।

डाइट पोर्बंदर महात्मा गांधी के जन्मस्थान के निकट स्थित है और इसलिए इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक विशेष महत्व दिया गया है। इसी कारण वर्ष 2005 में इसे श्री रंबा जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान के रूप में अधिष्ठापित किया गया।

आज इस संस्थान के प्रधानाचार्य हैं डॉ ए वाय राठोड, जिनका नेतृत्व इस डाइट के सुचारु संचालन एवं संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। डॉ ए वाय राठोड ने पिछले 15 वर्षों से इस विरासत को संरक्षित रखने, शैक्षणिक नवाचारों को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों तथा प्रशिक्षुओं के लिए उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण तैयार करने हेतु अथक प्रयास किए हैं।

उनके प्रयासों में विभागों को सशक्त बनाना, शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार और स्थानीय–राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा-सम्पर्कों को सुदृढ़ करना मुख्य रूप से शामिल रहा है। डाइट पोर्बंदर विभिन्न विभागों के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षिक विकास, और अनुसंधान आधारित गतिविधियाँ संचालित करता है। इनमें मुख्य विभाग एवं उनका कार्यक्षेत्र इस प्रकार है:

एस सी ई आर टी टीम ने किया अवलोकन -

1. Curriculum, Material Development & Evaluation (CMDE)

  • शिक्षण-पाठ्यक्रम को विकसित करना

  • मूल्यांकन सामग्री, प्रशिक्षण माड्यूल और शैक्षिक संसाधनों का निर्माण


2. Educational Technology (ET)

  • तकनीकी शिक्षण उपकरणों पर प्रशिक्षण

  • शिक्षण मीडिया एवं शैक्षणिक तकनीकों का विकास

  • ICT आधारित शिक्षण सामग्री का उत्पादन


3. Planning & Management (P & M)

  • योजनाओं का समन्वय

  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों की योजना तथा क्रियान्वयन

  • सामुदायिक सतर्कता तथा शिक्षण संतुलन के लिए रणनीतियाँ


इन विभागों के अलावा डाइट में कार्यक्रम संचालित होते हैं जैसे

  • प्राथमिक शिक्षण प्रशिक्षण (D.El.Ed.),

  • इन-सर्विस प्रशिक्षण (B.Ed./M.Ed.)

  • शिक्षा में नवाचार और अनुसंधान आधारित कार्यशालाएँ।

अकादमिक निदेशक बंदना गर्ब्याल   डाइट का औपचारिक भ्रमण पर डाइट  प्रधानाचार्य डॉ ए वाय राठोड ने उन्हें स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट किया। इसी क्रम में एससीईआरटी टीम, डाइट के सह-सदस्यों और अतिथियों को भी सम्मानित किया गया। यह सौहार्दपूर्ण कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय रहा।

डाइट इन्फ्रास्ट्रक्चर का संक्षिप्त अवलोकन

डाइट पोर्बंदर के परिसर में शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण सुविधाएँ निम्न प्रकार उपलब्ध हैं:

  • विद्या समीक्षा केंद्र 
  • कई कक्षाएँ और व्याख्यान कक्ष
  • पुस्तकालय (प्रायः 8,500+ पुस्तकें)
  • कम्प्यूटर कक्ष और साइंस/मनोवैज्ञानिक प्रयोगशालाएँ
  • Conference हॉल और English केंद्र
  • ICT सुविधाएँ (कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर, Broadband आदि)

यूनिक प्रार्थना सभा और प्राचार्य का गायन 

डाइट की विशेष परंपरा में सर्वधर्म प्रार्थना सभा शामिल है, जहाँ सभी धर्मों के मंत्रोच्चारण और गीतों के साथ समावेशी प्रार्थना आयोजित की जाती है।

इस सभा के दौरान प्रधानाचार्य डॉ ए राठोड ने सभी सदस्यों का स्वागत किया और मोहम्मद रफ़ी का एक प्रेरक भजन प्रस्तुत किया, जिससे सभी को सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त हुई। यह पहल शिक्षा के साथ सांस्कृतिक समन्वय का भी प्रतीक बनती है। प्राचार्य एक प्रोफेसनल सिंगर के रूप मे भी जाना माना नाम हैं । 

पोरबंदर के चारों ओर भ्रमण

भ्रमण के दूसरे हिस्से में टीम को निम्न स्थलों का भी दर्शन कराये गए:

  • पोरबंदर चौपाटी

  • कीर्ति मंदिर (गांधी जन्मस्थल) और उसका संग्रहालय

  • सांध्या सत्र में सुदामा मंदिर

यह भ्रमण टीम सभी सदस्यों के लिए शिक्षा, संस्कृति और इतिहास का एक समृद्ध अनुभव रहा।

यह अध्ययन भ्रमण न केवल शैक्षिक दिशानिर्देशन प्रदान करने वाला था, बल्कि संस्कृति, विरासत संरक्षण और साझेदारी के मूल्यों को भी गहराई से समझने और अनुभव करने का अवसर प्रदान करने वाला रहा। डाइट पोर्बंदर की यह यात्रा शैक्षिक नवाचार और सांस्कृतिक चेतना के संगम का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

Wednesday, February 18, 2026

शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम (तीसरा दिवस): नवाचार, अनुशासन एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण द्वारका की प्रेरक यात्रा

 

बन्दना गर्ब्याल निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के मार्गदर्शन में संचालित शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत आज तीसरे दिवस पर हमारी टीम ने गुजरात राज्य के पावन जनपद द्वारका में स्थित विद्यालयों का भ्रमण किया। यह दिवस शैक्षिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी एवं अनुभवसमृद्ध रहा। विद्यालयों में संचालित नवाचारों, प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था, अनुशासित शैक्षिक वातावरण तथा सांस्कृतिक मूल्यों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

भ्रमण का उद्देश्य: श्रेष्ठ शैक्षिक प्रथाओं का अवलोकन

इस अध्ययन भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों में लागू की जा रही Best Practices का प्रत्यक्ष अवलोकन करना तथा उन अनुभवों को अपने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में लागू करने हेतु साझा करना था।


यह देखकर अत्यंत संतोष हुआ कि गुजरात में शिक्षा केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य स्तर पर बनाई गई नीतियों का विद्यालय स्तर पर प्रभावी और परिणाममुखी क्रियान्वयन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

विशेष रूप से विद्या समीक्षा केंद्र का प्रभाव विद्यालयों की कार्यप्रणाली में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। यह केंद्र केवल मॉनिटरिंग तंत्र नहीं, बल्कि एक सशक्त गवर्नेंस मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है। शिक्षण व्यवस्था, छात्र उपस्थिति, अधिगम स्तर, मूल्यांकन प्रक्रिया तथा शैक्षिक गतिविधियों में इसकी सकारात्मक भूमिका स्पष्ट दिखाई दी।

शिक्षक प्रतिबद्धता एवं विद्यार्थियों का आत्मविश्वास

भ्रमण के दौरान विद्यालयों में विद्यार्थियों का आत्मविश्वास अत्यंत उच्च स्तर का देखने को मिला। बच्चों ने उत्साह, अनुशासन और ऊर्जा के साथ अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।

विद्यालयों के शिक्षक अपने दायित्वों के प्रति अत्यंत समर्पित एवं प्रेरित दिखाई दिए।

  • शिक्षण को रोचक बनाने की क्षमता
  • बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण
  • समयबद्ध कार्य निष्पादन
  • अनुशासित एवं सकारात्मक कार्य संस्कृति

इन सभी गुणों ने विद्यालयी वातावरण को अत्यंत सशक्त बनाया।

विद्यालयी वातावरण एवं अभिलेखीकरण व्यवस्था

विद्यालयों में कक्षा-कक्ष का वातावरण बाल-अनुकूल, स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित था। शिक्षण-अधिगम सामग्री का प्रभावी उपयोग किया जा रहा था।

अभिलेखीकरण (Documentation) एवं रिकॉर्ड प्रबंधन अत्यंत उत्कृष्ट रहा। यह स्पष्ट संकेत है कि विद्यालय प्रशासन गुणवत्ता सुधार हेतु सतत प्रयासरत है। योजनाओं का कार्यान्वयन दस्तावेज़ों तक सीमित न रहकर व्यवहार में दिखाई दिया।

सुदृढ़ समन्वय व्यवस्था: त्वरित सहयोग और सकारात्मक सहभागिता

गुजरात राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत Gujarat Council of Educational Research and Training (GCERT), डाइट फैकल्टी तथा संकुल समन्वयकों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।

चर्चा के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया, स्पष्ट प्रस्तुतीकरण एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की तत्परता उनके सक्रिय सहयोग एवं प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह समन्वय शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाता है।

भ्रमण किए गए विद्यालय

आज हमने द्वारका जनपद के निम्नलिखित विद्यालयों का अवलोकन किया—

  1. पी एम श्री प्राथमिकशाला नंबर-1, द्वारका

  2. देवभूमि राजकीय प्राथमिकशाला नंबर-2, द्वारका

दोनों विद्यालयों में टीम का आत्मीय स्वागत एवं उत्कृष्ट आतिथ्य अत्यंत भावपूर्ण रहा। 

विद्यार्थियों की प्रस्तुति

  • योग प्रदर्शन
  • संगीत प्रस्तुति
  • कक्षा-कक्षीय गतिविधियाँ



प्राथमिक स्कूल 1 के सी आर सी हिरदेयश भटट ने द्वारका के महत्व पर वाचन एवं गायन के साथ प्रेरक प्रस्तुति दी। बच्चों की प्रस्तुतियों में अनुशासन, अभ्यास, आत्मविश्वास एवं सामूहिकता का अद्भुत संगम दिखाई दिया। यह गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति की सफलता का जीवंत उदाहरण था।

आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभूति

शैक्षिक भ्रमण के साथ-साथ हमें द्वारका की पावन धरा पर स्थित द्वारकाधीश मंदिर तथा नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह अनुभव केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला ही नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और जीवन मूल्यों को समझने का भी अवसर था। इस यात्रा ने पुनः यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति, अध्यात्म और जीवन मूल्यों से जुड़कर ही पूर्णता प्राप्त करती है।

प्रेरणा, प्रतिबद्धता और नवाचार का संगम

शैक्षिक अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम का तीसरा दिवस अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

गुजरात राज्य की—

  • सुदृढ़ मॉनिटरिंग प्रणाली

  • प्रभावी गवर्नेंस मॉडल

  • योजनाओं का व्यवहारिक क्रियान्वयन

  • शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उच्च प्रतिबद्धता

इन सभी ने हमारी टीम को गहराई से प्रभावित किया।

निश्चित रूप से यह भ्रमण हमारे राज्य में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार हेतु नई सीख, नवाचारों के मॉडल एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करने वाला सिद्ध होगा।

द्वारका की यह यात्रा शिक्षा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बनकर हमारे अनुभवों में सदैव स्मरणीय रहेगी।