गढ़वाल मंडल के कक्षा 12 के मास्टर ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण देहरादून में सफलतापूर्वक सम्पन्न
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड के महत्वाकांक्षी कौशलम् कार्यक्रम के अंतर्गत गढ़वाल मंडल के कक्षा 12 हेतु मास्टर ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हुआ। यह प्रशिक्षण केवल पाठ्यवस्तु सौंपने तक सीमित नहीं था। इसका लक्ष्य विद्यार्थियों में उद्यमशील मानसिकता (Entrepreneurial Mindset), 21वीं सदी के कौशल, नवाचार, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना था।
शिक्षा का उद्देश्य: जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयारी
समापन सत्र में उपनिदेशक विनोद सिंह मटूडा ने कहा कि आज शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन या परीक्षा में सफलता नहीं है। विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने 21वीं सदी की बदलती आवश्यकताओं के संदर्भ में इन कौशलों के विकास पर बल दिया:
- आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking)
- रचनात्मकता (Creativity)
- सहयोग (Collaboration)
- संप्रेषण (Communication)
- नेतृत्व क्षमता
- समस्या समाधान
उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के अनुभवों को जनपद स्तर पर शिक्षकों तक, और शिक्षकों के माध्यम से प्रत्येक कक्षा व विद्यार्थी तक पहुँचाएँ।
शुभारंभ सत्र में कार्यक्रम समन्वयक सुनील दत्त भट्ट, प्रवक्ता, SCERT उत्तराखण्ड ने कौशलम् की पृष्ठभूमि, आवश्यकता, उद्देश्य और संचालन प्रक्रिया पर विस्तृत सत्र लिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल रोजगार के लिए तैयार करना नहीं है। लक्ष्य है ऐसा दृष्टिकोण विकसित करना, जिससे विद्यार्थी:
- अवसरों की पहचान कर सकें
- समस्याओं के समाधान खोज सकें
- स्वतंत्र निर्णय ले सकें
- अपने विचारों को व्यवहार में बदल सकें
प्रभावी फैसिलिटेशन पर विशेष सत्र
समापन दिवस पर भट्ट ने प्रभावी फैसिलिटेशन (Effective Facilitation) पर सत्र लिया। इसमें सकारात्मक वातावरण निर्माण, सक्रिय सहभागिता, अनुभवात्मक गतिविधियों का संचालन, सार्थक प्रश्न पूछने की कला, चिंतन एवं प्रतिबिंबन (Reflection) और रचनात्मक फीडबैक पर चर्चा हुई।
एक प्रभावी मास्टर ट्रेनर केवल विषयवस्तु का प्रस्तुतकर्ता नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का सुगमकर्ता, प्रेरक और परिवर्तन का वाहक होता है। — सुनील दत्त भट्ट
रुचि आधारित और अनुभवात्मक अधिगम
तीन दिनों में कक्षा 12 की विषयवस्तु, रुचि आधारित अधिगम और विद्यार्थियों की अभिरुचियों के अनुरूप गतिविधियों के संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया।
मुख्य संदर्भदाताओं ने समूह कार्य, संवाद, प्रस्तुतियों और अनुभवात्मक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया:
- गोपाल सिंह घुघत्याल
- सुशील गैरोला
- दिनेश सिंह, उद्यम लर्निंग फाउंडेशन
- अरविंद बिष्ट, उद्यम लर्निंग फाउंडेशन
संदर्भदाताओं ने व्यावहारिक प्रदर्शन से दिखाया कि विद्यार्थियों को उनकी रुचियों, क्षमताओं और आकांक्षाओं से जोड़कर कैसे सक्रिय सहभागी बनाया जाए। संदेश स्पष्ट था: शिक्षक केवल विषयवस्तु पूरी न करें, बल्कि विद्यार्थियों को सोचने, प्रश्न करने, निर्णय लेने और अनुभव से सीखने के अवसर दें।
स्वैच्छिक सहभागिता: प्रशिक्षण की सबसे बड़ी उपलब्धि
इस प्रशिक्षण की सबसे उत्साहजनक बात यह रही कि मास्टर ट्रेनर्स ने स्वेच्छा और रुचि के साथ (Participation by Choice) भाग लिया। समूह गतिविधियों में उनकी सक्रियता और नए विचारों को अपनाने की तत्परता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
समापन पर सभी मास्टर ट्रेनर्स ने दो संकल्प लिए:
- अपने जनपदों में DIETs के माध्यम से होने वाले शिक्षक प्रशिक्षणों को प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से सम्पन्न कराना।
- कौशलम् की मूल अवधारणा और गतिविधियों को विद्यालयों की कक्षाओं तक पहुँचाना, ताकि विद्यार्थियों को इसका वास्तविक लाभ मिले।
प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता तभी होगी, जब इसके अनुभव शिक्षकों के व्यवहार में और उनके माध्यम से विद्यार्थियों की सोच व कार्यशैली में दिखाई देंगे।
हैकथॉन: नवाचार और समस्या समाधान की संस्कृति
अंतिम सत्र में SCERT के आईटी विभाग से रमेश बडोनी ने आगामी हैकथॉन (Hackathon) की जानकारी दी। उन्होंने हैकथॉन की अवधारणा, उद्देश्य और नवाचार में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स से आह्वान किया कि वे:
- अधिक से अधिक विद्यार्थियों को हैकथॉन से जोड़ें
- स्वयं भी नए विचारों के साथ पंजीकरण करें
- विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें
बडोनी के अनुसार ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में रचनात्मक चिंतन, टीमवर्क, तकनीकी समझ और वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता विकसित करते हैं।
प्रशिक्षण से कक्षा-कक्ष तक
विविध गतिविधियों, अनुभवात्मक अभ्यासों और समूह प्रस्तुतियों के साथ यह प्रशिक्षण अपने उद्देश्यों के अनुरूप सम्पन्न हुआ। इसने मास्टर ट्रेनर्स की विषयगत समझ और फैसिलिटेशन क्षमता को सुदृढ़ किया, और उनकी भूमिका व उत्तरदायित्व भी स्पष्ट किए।
कौशलम् के माध्यम से उत्तराखण्ड की विद्यालयी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, जीवनोपयोगी और कौशल आधारित बनाने का प्रयास जारी है।
विद्यार्थी केवल अवसरों की प्रतीक्षा करने वाले न बनें, बल्कि अपनी रचनात्मकता, आत्मविश्वास और उद्यमशील सोच से नए अवसरों का सृजन करें।
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