Saturday, July 18, 2026

शैक्षणिक गुणवत्ता एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर: निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल ने DIET प्राचार्यों के साथ की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक

 

राज्य में शिक्षक शिक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं विभिन्न अकादमिक कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निदेशक अकादमिक, उत्तराखण्ड  बंदना गर्ब्याल की अध्यक्षता में प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) के प्राचार्यों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा एवं समन्वय बैठक आयोजित की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक वर्ष 2026–27 के लिए निर्धारित कार्यक्रमों की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीति पर विस्तृत विचार-विमर्श करना था।

बैठक में अपर निदेशक, एससीईआरटी पदमेन्द्र सकलानी एवं सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण भी उपस्थित रहे। दोनों अधिकारियों ने विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने, संस्थागत समन्वय बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

वर्ष 2026–27 की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा

सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण ने बैठक में आगामी शैक्षणिक वर्ष के दौरान संचालित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों, शिक्षक प्रशिक्षण गतिविधियों तथा संस्थागत दायित्वों की विस्तार से समीक्षा की । विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई—

  • वर्ष 2026–27 के अकादमिक कार्यक्रमों का समयबद्ध संचालन।

  • विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावी योजना एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करना।

  • State Level Achievement Survey (SLAS) की तैयारियों की समीक्षा एवं आवश्यक दिशा-निर्देश।

  • PARAKH (Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development) के अनुरूप मूल्यांकन प्रणाली एवं तैयारियों को मजबूत करना।

  • विद्यालयों के नियमित अकादमिक अनुश्रवण (Academic Monitoring) को प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाना।

  • शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुधार के लिए सतत मार्गदर्शन एवं फीडबैक प्रणाली विकसित करना।

कार्यस्थल पर नैतिक मूल्यों को बनाए रखने पर विशेष बल

बैठक के दौरान  बंदना गर्ब्याल ने सभी DIET प्राचार्यों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने संस्थानों में कार्य संस्कृति, पारदर्शिता, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि एक सकारात्मक एवं उत्तरदायी कार्य वातावरण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा और प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आधारशिला है।

उन्होंने सभी प्राचार्यों को निर्देशित किया कि प्रत्येक गतिविधि को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए तथा प्रशिक्षण, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन संबंधी सभी कार्य योजनाबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से संचालित हों।

नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षक 

बैठक में यह भी बल दिया गया कि SCERT एवं DIETs राज्य की शिक्षक शिक्षा व्यवस्था के प्रमुख स्तंभ हैं। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नवाचार, डिजिटल तकनीकों का उपयोग, अनुसंधान आधारित दृष्टिकोण तथा विद्यालयों से निरंतर संवाद को बढ़ावा दिया जाए, जिससे शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता में निरंतर वृद्धि हो और विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी  ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता, अकादमिक अनुश्रवण, मूल्यांकन प्रणाली तथा संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उनके सुझावों पर सभी प्रतिभागियों ने सकारात्मक चर्चा करते हुए उन्हें आगामी कार्ययोजना में शामिल करने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक के समापन पर सभी DIET प्राचार्यों ने यह विश्वास दिलाया कि वे राज्य सरकार एवं एससीईआरटी द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सभी कार्यक्रमों, प्रशिक्षणों, सर्वेक्षणों एवं अकादमिक गतिविधियों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण संचालन सुनिश्चित करेंगे।

उत्तराखण्ड SCERT एवं सभी DIETs के शिक्षक-शिक्षा को नई दिशा पर व्यापक समीक्षा बैठक

उत्तराखण्ड की विद्यालयी शिक्षा एवं शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण तथा भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय स्थित समग्र शिक्षा सभागार में किया गया। बैठक की अध्यक्षता उत्तराखण्ड के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने की।

बैठक में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों, नवाचारों तथा प्रदेश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोंडे (IAS), निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा विनोद सेमल्टी, निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा कुँवर सिंह, अपर निदेशक, SCERT पदमेन्द्र सकलानी, विभागीय वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रदेश के सभी DIETs के प्राचार्य उपस्थित रहे।

शिक्षक प्रशिक्षण को बनाया जाए अधिक प्रभावी

बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने SCERT द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें व्यावहारिक, नवाचार आधारित, तकनीक समर्थित तथा गुणवत्तापूर्ण बनाया जाए, जिससे प्रशिक्षण का सीधा लाभ कक्षा-कक्ष तक पहुँचे और विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में सकारात्मक सुधार दिखाई दे।

डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि आज के समय में शिक्षकों को बदलती तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम, समावेशी शिक्षा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नवीन शिक्षण पद्धतियों से निरंतर अद्यतन करना अत्यंत आवश्यक है।

DIET की क्रमवार समीक्षा

बैठक का एक महत्वपूर्ण भाग प्रदेश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) की क्रमवार समीक्षा रहा। प्रत्येक DIET के कार्यों, उपलब्धियों, प्रशिक्षण गतिविधियों, आधारभूत संरचना, संसाधनों तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी DIETs को चरणबद्ध रूप से सुदृढ़ किया जाए तथा राज्य में मॉडल DIET की शीघ्र स्थापना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक अवसंरचना, डिजिटल संसाधन, स्मार्ट प्रशिक्षण सुविधाएँ, अनुसंधान एवं नवाचार आधारित वातावरण विकसित कर DIETs को उत्कृष्ट शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्रों के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए।

आधुनिक एवं नवाचार आधारित प्रशिक्षण पर बल

बैठक में यह भी जोर दिया गया कि शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नवीन तकनीकों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन एवं ब्लेंडेड लर्निंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ICT आधारित शिक्षण, शोध एवं नवाचार को प्राथमिकता दी जाए। इससे प्रदेश के शिक्षक नई शिक्षण विधियों को अपनाकर विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं भविष्य के अनुरूप शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

बैठक के दौरान अधिकारियों एवं DIET प्राचार्यों ने भी अपने-अपने संस्थानों की प्रगति, चुनौतियों एवं आगामी कार्ययोजनाओं से अवगत कराया। विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अनुसंधान गतिविधियों तथा संस्थागत विकास से जुड़े विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तराखण्ड में शिक्षक शिक्षा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना है। इसके लिए SCERT एवं DIETs की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इन्हें नवाचार, अनुसंधान तथा तकनीकी सशक्तिकरण के केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

यह समीक्षा बैठक राज्य की शिक्षक शिक्षा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। आधुनिक संसाधनों, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, अनुसंधान आधारित दृष्टिकोण तथा मॉडल DIET की स्थापना जैसे निर्णय आने वाले समय में उत्तराखण्ड की विद्यालयी शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

Thursday, July 16, 2026

हरेला पर्व : विद्यालयी शिक्षा परिसर उत्तराखण्ड में हरियाली, संरक्षण और सतत विकास का संदेश

उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपरा एवं प्रकृति संरक्षण के प्रतीक हरेला पर्व के अवसर पर विद्यालयी शिक्षा परिसर उत्तराखण्ड  में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। इस अवसर पर परिषद परिवार ने केवल पौधारोपण ही नहीं किया, बल्कि परिसर में पूर्व से लगे वृक्षों का सर्वेक्षण कर उनके संरक्षण, संवर्धन एवं दीर्घकालिक देखभाल के लिए भी सामूहिक रूप से विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड  आकांक्षा कोंडे तथा निदेशक अकादमिक एवं शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल, माध्यमिक निदेशक विनोद सेमल्टी , संयुक्त निदेशक जे पी काला, सीमेट, प्रारम्भिक शिक्षा के अधिकारी एवं अन्य की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके मार्गदर्शन में पर्यावरण संरक्षण को शिक्षा एवं अनुसंधान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।

हरेला पर्व पर  सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण सहित SCERT के अनेक संकाय सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से  सुनील भट्ट, डॉ. मनोज शुक्ला, मनोज बहुगुणा,  गंगा घुगत्याल  ,  गोपाल घुगत्याल, अरुण  थपलियाल,  विनय थपलियाल,  हरीश बडोनी, राकेश रावत,  सुशील गैरोला, डॉ. आलोक प्रभा, पुष्पा अस्वाल,   अनुज्ञा पैन्यूली , प्रशासनिक अधिकारी रावत , राणा , सेमवाल , आखिलेश डोभाल , रविदर्शन तोपाल  तथा अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए परिसर में वृक्षारोपण किया।

कार्यक्रम के दौरान सभी अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों ने परिसर में लगे वृक्षों का निरीक्षण करते हुए इस बात पर  चर्चा की कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण, नियमित देखभाल एवं वैज्ञानिक प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है। इस अवसर पर यह विचार सामने आया कि भविष्य में SCERT परिसर को और अधिक हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए ऐसी वृक्षारोपण नीति तैयार की जाए जिसमें स्थानीय जलवायु, मिट्टी, जैव विविधता तथा परिसर की आवश्यकता के अनुरूप पौधों का चयन किया जाए।

महानिदेशक के अनुसार सभी संकल्प लें कि  हरेला पर्व को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न मानकर उसे हर "गाँव का यही पैगाम एक पेड़ माँं के नाम " को हरित परिसर अभियान के रूप में विकसित किया जाए, जिसके अंतर्गत पौधारोपण, वृक्ष संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, वर्षा जल संरक्षण तथा पर्यावरण जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ।

महानिदेशक आकांक्षा कोंडे एवं उनकी पुत्री ने पेड़ माँं के नाम  इस पर्व पर अपनी माँं के साथ परिसर मे वृक्षारोपण से शुरू किया जो माँं और पुत्री का शिक्षा सदन मे हमेशा एक संकल्प के रूप मे रहेगा। महानिदेशक आकांक्षा कोंडे एवं बन्दना गर्ब्याल ने सभी अधिकारियों, संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा विभाग, SCERT एवं सभी शैक्षणिक संस्थानों से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन जागरूकता, वृक्षारोपण एवं सतत विकास से जुड़े नवाचारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

हरेला पर्व के इस अवसर पर सभी उपस्थित सदस्यों ने प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया तथा यह संदेश दिया कि "एक पौधा केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ भविष्य की नींव है।"



अंत मे अरुण थपलियाल के द्वारा मिठाई देकर कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण बतया अरुण हर वर्ष अनेकों पर्व पर मिठाई देकर शुभ संदेश देते  हैं ।