
उत्तराखंड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण (SCERT) के अपर निदेशक प्रदीप कुमार रावत की सेवानिवृत्ति समारोह को बड़े धूमधाम से SCERT के ऑडिटोरियम में महानिदेशक झरना कमठान की गरिमामई उपस्थिति मे भव्य समारोह के रूप में मनाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत और स्वागत
समारोह की शुरुआत में प्रदीप कुमार रावत के व्यक्तित्व और उनके कार्यकाल की झलक को एक फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसका निर्माण SCERT के आईटी विभाग द्वारा किया गया था। इसके पश्चात विभिन्न क्षेत्रों से आए उनके शिष्य, अधिकारी, कर्मचारी और SCERT के संकाय सदस्यों ने प्रदीप रावत का फूल-मालाओं और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
महानिदेशक झरना कमठान ने अपने संबोधन में प्रदीप कुमार रावत के व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रदीप रावत न केवल एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी थे, बल्कि उनके निर्णय लेने की क्षमता भी अद्वितीय थी।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा:
"मैंने जब मुख्य विकास अधिकारी, देहरादून के रूप में कार्य किया, तब मुख्य शिक्षा अधिकारी के रूप में प्रदीप रावत के साथ कार्य करने का अवसर मिला। उस दौरान, मैंने देखा कि वे अपने कार्य के प्रति अत्यंत समर्पित हैं। उनके निर्णय त्वरित, प्रभावी और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाले रहे हैं। कई ऐसे महत्वपूर्ण फैसले, जो उन्होंने लिए, आज भी राज्य की शिक्षा प्रणाली में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।"
महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा, झरना कमठान ने आगे कहा कि प्रदीप रावत ने अपने दायित्वों को पूर्ण निष्ठा और निष्पक्षता के साथ निभाया। वे उन अधिकारियों में से हैं, जो किसी भी प्रकार के दबाव में बिना आए, केवल जनहित और शैक्षिक सुधार के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने कहा:
"शिक्षा विभाग में कार्य करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। खासकर उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां कई दुर्गम क्षेत्र हैं, वहाँ शिक्षा का स्तर सुधारना आसान नहीं था। लेकिन प्रदीप रावत ने अपने नेतृत्व में कई प्रभावशाली योजनाएँ लागू कीं, जिनके सकारात्मक परिणाम आज भी देखने को मिल रहे हैं। उनके जाने से विभाग को निश्चित रूप से एक बड़ी क्षति होगी, लेकिन उनकी कार्यशैली और निर्णय लेने की नीति नए अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक रहेगी।"
महानिदेशक ने यह भी कहा कि प्रदीप रावत ने जिन मानकों को स्थापित किया है, उनके अनुरूप कार्य करना आने वाली पीढ़ी के लिए चुनौती होगी। उन्होंने कहा:
"श्री प्रदीप रावत ने शिक्षा क्षेत्र में जो मिसाल कायम की है, उसका अनुकरण करना आसान नहीं होगा। उनकी कार्यशैली, समर्पण और अनुशासन आज के अधिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। मैं आशा करती हूँ कि वे भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभवों से योगदान देते रहेंगे।"
प्रदीप कुमार रावत ने अपने अभिभाषण में अपनी अब तक की यात्रा, अपने संघर्षों और अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने हमेशा शिक्षा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा:
"जब मैंने शिक्षा विभाग में अपनी सेवा शुरू की, तब मेरे सामने कई चुनौतियाँ थीं। लेकिन मैंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि जो भी निर्णय लिए जाएँ, वे शिक्षकों और छात्रों के हित में हों। मुझे कभी किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत लाभ या दबाव में आकर निर्णय लेने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई।"
उन्होंने महानिदेशक झरना कमठान और अन्य अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा:
"मैं अत्यंत आभारी हूँ कि मुझे ऐसे सहयोगी अधिकारी मिले, जिन्होंने हमेशा शिक्षा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता को समझा और समर्थन दिया। जब मैंने किसी भी योजना या नीति को लागू किया, तो मेरा केवल एक ही उद्देश्य था—शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और इसे सभी तक पहुँचाना।"
अपने परिवार और सहयोगियों का आभार
प्रदीप रावत ने अपने परिवार का विशेष रूप से धन्यवाद किया और अपनी पत्नी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा:
"मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया। मेरी पत्नी ने न केवल मेरे निर्णयों को समझा बल्कि जब भी मुझे किसी प्रकार की व्यक्तिगत या पेशेवर चुनौती आई, उन्होंने मुझे सही मार्गदर्शन दिया। मेरे बच्चों ने भी मेरे व्यस्त जीवन को समझा और कभी कोई शिकायत नहीं की। यह मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत थी।"प्रदीप रावत के छोटे भाई कोटद्वार विधायक महंत दिलीप सिंह रावत ने कहा कि वे हमेशा उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उन्होंने बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि कैसे मेहनत और अनुशासन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया। महंत दिलीप रावत ने E=MC^2 को अलग तरह से परिभाषित कर सभी को एक नया पैगाम भी दिया।
अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों के संदेश
उत्तराखण्ड अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण निदेशक बंदना गर्ब्याल ने वीडियो संदेश में प्रदीप रावत की सेवाओं की सराहना की और उन्हें निर्णय लेने में प्रेरक अधिकारी बताया।समारोह में संयुक्त निदेशक पद्मेंद्र सकलानी, अपर राज्य परियोजना निदेशक कुलदीप गैरोला, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल, और कई अन्य अधिकारियों ने प्रदीप रावत को पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएँ दीं। SCERT के संकाय सदस्यों ने भी ऑनलाइन संदेशों के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम का संचालन और तकनीकी सहयोग
समारोह का मंच संचालन प्रवक्ता सुनील भट्ट ने किया, साथ ही सहायक निदेशक डॉ के एन बिजलवाण ने प्रदीप रावत के साथ बिताए कई संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम में आईटी विभाग के विनय उनियाल और सौरभ जोशी ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
समारोह के अंत में प्रदीप रावत ने कहा कि भले ही वे राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन आगे भी अपने अनुभवों का लाभ समाज और शिक्षा क्षेत्र को देते रहेंगे। उन्होंने सभी से SCERT को देश का एक "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" बनाने का संकल्प लेने की अपील की।
समारोह में पूर्व अपर निदेशक आशा रानी पैन्यूली , पूर्व संयुक्त निदेशक डंडरियाल,और राकेश जुगरान पूर्व प्राचार्य डाइट देहरादून सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने प्रदीप रावत को एक सशक्त और निर्णायक अधिकारी के रूप में याद किया। समारोह के दौरान सभी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
SCERT को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की अपील
अपने संबोधन के अंतिम चरण में, प्रदीप रावत ने SCERT को देश का "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा:
"SCERT केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक चिंतनशाला है, जो शिक्षकों को सशक्त बनाने और शिक्षा के स्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए कार्य करता है। यह संस्थान तभी और अधिक प्रभावी बनेगा, जब शिक्षक, शोधकर्ता और अधिकारी एकजुट होकर काम करेंगे। मैं चाहता हूँ कि यह संस्थान भारत का नंबर वन संस्थान बने और पूरे देश के लिए एक मिसाल स्थापित करे।"
"अब जब मैं सेवानिवृत्त हो रहा हूँ, तो मुझे और अधिक स्वतंत्रता मिलेगी कि मैं शिक्षा के क्षेत्र में किस प्रकार से योगदान दे सकता हूँ। मैं अपने अनुभवों और ज्ञान का उपयोग करके शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए काम करूँगा। यदि कहीं भी मेरी जरूरत होगी, तो मैं हमेशा सहयोग के लिए तैयार रहूँगा।"
उनके इन विचारों ने समारोह में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया, और हर किसी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनके योगदान को सम्मानित किया। 🎉