Monday, November 02, 2026

पीएम ई-विद्या के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण ई-कॉन्टेंट निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ, डिजिटल शिक्षा को प्रभावी बनाने पर जोर

 

देहरादून, 2 नवंबर 2026।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड के आईटी विभाग द्वारा पीएम ई-विद्या (PM e-VIDYA) कार्यक्रम के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शैक्षिक सामग्री (ई-कॉन्टेंट) निर्माण हेतु कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन उपनिदेशक विनोद कुमार सिंह मठुरा द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों से आए विषय विशेषज्ञों (SMEs), कंटेंट राइटर्स तथा आईटी विभाग की तकनीकी टीम ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा को अधिक रोचक, प्रभावी, समावेशी एवं तकनीक-सक्षम बनाते हुए विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करना है।

ई-कॉन्टेंट निर्माण में गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर

कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में आईटी विभाग के प्रवक्ता  आर. पी. बडोनी,  एस. पी. वर्मा एवं  पुष्पा अस्वाल ने प्रतिभागी विषय विशेषज्ञों और कंटेंट राइटर्स का उन्मुखीकरण किया।

इस दौरान डिजिटल कंटेंट निर्माण की प्रक्रिया, वीडियो फॉर्मेशन, शैक्षिक वीडियो स्क्रिप्ट लेखन, विषयवस्तु का प्रभावी प्रस्तुतीकरण तथा डिजिटल संसाधनों के शैक्षणिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने विभिन्न उत्कृष्ट ई-कॉन्टेंट के उदाहरण (Exemplars) साझा करते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में केवल पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि कठिन अवधारणाओं को सरल, दृश्यात्मक एवं अनुभवात्मक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए डिजिटल शिक्षण सामग्री की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वीडियो स्क्रिप्ट राइटिंग और कॉन्सेप्ट डिलीवरी पर चर्चा

सत्र के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि एक प्रभावी शैक्षिक वीडियो केवल आकर्षक चित्रों, एनिमेशन या तकनीकी प्रभावों से नहीं बनता, बल्कि उसके पीछे एक सुविचारित शैक्षणिक उद्देश्य, वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक शुद्धता, व्यवस्थित स्क्रिप्ट और विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप प्रस्तुतीकरण आवश्यक है।

प्रतिभागियों को वीडियो निर्माण के विभिन्न चरणों, जैसे विषय चयन, लर्निंग आउटकम निर्धारण, स्क्रिप्ट लेखन, दृश्य योजना, वॉयसओवर, उदाहरणों का चयन तथा अंतिम वीडियो की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

एथिकल AI और डिजिटल कंटेंट के जिम्मेदार उपयोग पर जोर

कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के संदर्भ में शैक्षिक सामग्री निर्माण के नैतिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने बताया कि AI आधारित उपकरण कंटेंट लेखन, ग्राफिक्स, स्क्रिप्ट निर्माण और मल्टीमीडिया प्रस्तुतीकरण में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इनके उपयोग में तथ्यात्मक सत्यापन, कॉपीराइट, मौलिकता, डेटा गोपनीयता तथा विद्यार्थियों की आयु एवं शैक्षिक आवश्यकताओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

AI को शिक्षक की रचनात्मकता और विषयगत विशेषज्ञता का विकल्प नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी बनाने वाले सहयोगी उपकरण के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया।

Canva Pro for Education से तैयार होगा आकर्षक डिजिटल कंटेंट

कार्यशाला के दौरान Canva Pro for Education के शैक्षणिक उपयोग पर भी प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण किया गया। सभी विषय विशेषज्ञों एवं कंटेंट राइटर्स को Canva पोर्टल पर लॉगिन करने के लिए आवश्यक लॉगिन विवरण और एक्सेस संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि Canva जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की सहायता से शैक्षिक प्रस्तुतियां, इन्फोग्राफिक्स, एनिमेटेड वीडियो, डिजिटल ग्राफिक्स, दृश्यात्मक शिक्षण सामग्री तथा आकर्षक पाठ्यक्रम आधारित कंटेंट तैयार किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल डिजाइन उपकरणों से परिचित कराते हुए उनकी रचनात्मक एवं तकनीकी दक्षताओं को सुदृढ़ करना है।

कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों से आए विषय विशेषज्ञों ने अपने शिक्षण अनुभवों और डिजिटल सामग्री निर्माण से संबंधित विचारों को साझा किया। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि गुणवत्तापूर्ण ई-कॉन्टेंट निर्माण के लिए विषयगत विशेषज्ञता, शैक्षणिक दृष्टिकोण और तकनीकी दक्षता का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के संचालन एवं तकनीकी व्यवस्थाओं में एससीईआरटी के आईटी विभाग की तकनीकी टीम ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

पीएम ई-विद्या के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला उत्तराखण्ड में डिजिटल शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से तैयार की जाने वाली शैक्षिक सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों को जटिल अवधारणाओं को सरलता से समझने, स्व-अध्ययन को प्रोत्साहित करने तथा कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने में सहायता प्रदान करना है।

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एससीईआरटी उत्तराखण्ड में गतिविधि पुस्तिका संरेखण कार्यशाला का शुभारंभ, कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए तैयार होंगी रोचक गतिविधियाँ

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विज्ञान, गणित और अंग्रेजी विषयों के शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं गतिविधि आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

देहरादून | 2 नवम्बर 2026

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखण्ड के सभागार में आज कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान, गणित एवं अंग्रेजी विषयों की गतिविधि पुस्तिकाओं के संरेखण हेतु पाँच दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला 2 से 6 नवम्बर 2026 तक आयोजित की जा रही है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं एवं नवीन पाठ्यक्रम के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा को अधिक अनुभवात्मक, क्रियात्मक, गतिविधि आधारित एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। इसके अंतर्गत ऐसी रोचक एवं उपयोगी गतिविधियाँ विकसित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थी विषयगत अवधारणाओं को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन के अनुभवों से जोड़ सकें।

कार्यशाला का समन्वयन डॉ. अवनीश उनियाल द्वारा किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम में हुए परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए गतिविधि पुस्तिकाओं का निर्माण किया जा रहा है। इन पुस्तिकाओं के माध्यम से विज्ञान, गणित एवं अंग्रेजी विषयों के शिक्षण को अधिक सरल, प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गतिविधि आधारित शिक्षण से विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान एवं स्वयं करके सीखने की प्रवृत्ति विकसित होती है।

कार्यशाला में एससीईआरटी के पूर्व सहायक निदेशक एवं वर्तमान में राजकीय इंटर कॉलेज, आईडीपीएल ऋषिकेश के प्रधानाचार्य डॉ. के. एन. बिजलवाण ने गतिविधि आधारित शिक्षण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए तैयार की जाने वाली गतिविधियों का संबंध उनके दैनिक जीवन, परिवेश एवं वास्तविक अनुभवों से होना चाहिए। न्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब बच्चे अपने आसपास की घटनाओं का अवलोकन करते हुए सीखते हैं, तो उनकी वैचारिक समझ अधिक स्थायी और सार्थक बनती है।

विषय विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता

गतिविधि पुस्तिकाओं के निर्माण एवं संरेखण कार्य में डॉ. उमेश चमोला, नरेन्द्र सागर, श्वेता जोशी, ऋचा जुयाल, नीलम जोशी, चंचल बब्बर, नितिका, ममता बड़ोनी, अमित रोहिला, नविता भंडारी, डॉ. राकेश गैरोला, डॉ. रंजन भट्ट सहित अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के विषय विशेषज्ञ सक्रिय सहभागिता कर रहे हैं।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ नवीन पाठ्यक्रम, कक्षावार अधिगम स्तर, विषयगत दक्षताओं एवं गतिविधियों की प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए पुस्तिकाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करेंगे।

एससीईआरटी उत्तराखण्ड की यह पहल विद्यालयी शिक्षा में रटने की प्रवृत्ति के स्थान पर करके सीखने (Learning by Doing), अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) और दक्षता आधारित शिक्षा (Competency-Based Education) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

इन गतिविधि पुस्तिकाओं के माध्यम से शिक्षकों को कक्षा-कक्ष शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने में सहायता मिलेगी, वहीं विद्यार्थियों को खोज, प्रयोग, अवलोकन और सहभागिता के माध्यम से सीखने के नए अवसर प्राप्त होंगे।

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