Wednesday, September 30, 2026

SCERTs/SIEs Directors’ Conference 2026 का समापन

 

उत्तराखण्ड–लक्षद्वीप की साझेदारी Peer Learning का उदाहरण; e-Srijan MOOCs, Hackathon 3.0, Inclusive Education और Audio Books की पहल साझा

नई दिल्ली, 30 सितम्बर 2026।

NCERT के तत्वावधान में Department of Teacher Education द्वारा आयोजित तीन दिवसीय Annual Conference of Directors of SCERTs & SIEs 2026-27 का आज CIET-NCERT सभागार, नई दिल्ली में सार्थक विचार-विमर्श, अंतर-राज्यीय सहयोग और भविष्य के क्रियान्वयन की रूपरेखा के साथ समापन हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिवस का मुख्य फोकस “Implementation” रहा, जिसमें विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को जोड़ी (Pair) के रूप में कार्य करते हुए एक-दूसरे की श्रेष्ठ शैक्षिक पहलों का अध्ययन करने तथा उनसे सीखकर State-specific Implementation Framework तैयार करने का अवसर दिया गया।

सम्मेलन के Concept Note में भी स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य केवल राज्यों की Best Practices की पहचान करना नहीं, बल्कि peer learning, interstate collaboration और State-specific Implementation Frameworks के माध्यम से साझा अनुभवों को ठोस संस्थागत कार्रवाई में बदलना है। 

अंतिम दिवस: ‘Shared Experiences’ से आगे बढ़कर ‘Implementation’ पर जोर

30 सितम्बर के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिवस की शुरुआत Check-in & Reflection से हुई। इसके बाद Developing State-specific Implementation Framework, राज्यों द्वारा जोड़ी में कार्य (Work in Pairs), प्रमुख निष्कर्षों को साझा करने तथा अंत में Valedictory Session की व्यवस्था की गई थी। इस प्रकार सम्मेलन के तीन दिनों की यात्रा Reflection → Shared Learning → Implementation की दिशा में आगे बढ़ी।

इस प्रक्रिया में राज्यों ने केवल अपनी उपलब्धियाँ प्रस्तुत नहीं कीं, बल्कि यह विचार किया कि एक राज्य की सफल पहल को दूसरे राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, भाषाई और संस्थागत परिस्थितियों के अनुरूप किस प्रकार अपनाया और अनुकूलित किया जा सकता है।

अंतिम दिवस की एक विशेष गतिविधि के अंतर्गत उत्तराखण्ड और लक्षद्वीप को Pair Group के रूप में साथ कार्य करने का अवसर मिला। दोनों की भौगोलिक एवं जनसांख्यिकीय परिस्थितियाँ अत्यंत भिन्न हैं। एक ओर उत्तराखण्ड में पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुँचाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर लक्षद्वीप की द्वीपीय भौगोलिक परिस्थितियाँ शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए अलग प्रकार की चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं।

इन्हीं भिन्नताओं ने इस साझेदारी को और अधिक उपयोगी बनाया। दोनों पक्षों ने इस बात पर विचार किया कि भूगोल अलग होने के बावजूद डिजिटल और ब्लेंडेड माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण तथा गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों की पहुँच कैसे मजबूत की जा सकती है।

उत्तराखण्ड की ओर से e-Srijan आधारित ऑनलाइन MOOCs एवं डिजिटल प्रशिक्षण मॉडल, जबकि लक्षद्वीप की ओर से उसके offline teacher-training modules और स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण अनुभवों को साझा किया गया।

लक्षद्वीप में e-Srijan MOOCs के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा

SCERT उत्तराखण्ड की ओर से निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण,  बंदना गर्ब्याल ने e-Srijan के अंतर्गत संचालित MOOCs, उनकी संरचना, प्रशिक्षण प्रक्रिया तथा शिक्षक क्षमता संवर्धन में डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग के प्रमुख पहलुओं को लक्षद्वीप के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया।

यह उल्लेखनीय है कि सम्मेलन के आधिकारिक Concept Note में भी Uttarakhand के e-Srijan MOOC को डिजिटल एवं AI-आधारित शिक्षा के संदर्भ में एक उदाहरण के रूप में रेखांकित किया गया है। इसमें e-Srijan द्वारा दूरस्थ पहाड़ी जिलों के शिक्षकों तक structured, self-paced professional learning पहुँचाने का उल्लेख किया गया है।

चर्चा के दौरान लक्षद्वीप की ओर से उत्तराखण्ड की Best Practices, विशेष रूप से e-Srijan के ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को लक्षद्वीप में भी उपयोग करने की संभावनाओं में रुचि व्यक्त की गई। इसके लिए दोनों पक्षों द्वारा आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों, प्रशिक्षण सामग्री और क्रियान्वयन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक साझा Framework/Work Plan विकसित करने पर विचार किया गया।

यह पहल भविष्य में SCERT-to-SCERT knowledge sharing का एक उपयोगी मॉडल बन सकती है, जहाँ किसी राज्य द्वारा विकसित गुणवत्तापूर्ण डिजिटल संसाधनों का दूसरे राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग किया जा सके।

SCERT उत्तराखण्ड के IT Initiatives की विस्तृत जानकारी

SCERT उत्तराखण्ड के IT विभाग से रमेश प्रसाद बडोनी द्वारा e-Srijan एवं अन्य डिजिटल पहलों के व्यावहारिक क्रियान्वयन की प्रक्रिया को विस्तार से साझा किया गया। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि ऑनलाइन कोर्स को किस प्रकार तैयार किया जाता है, प्रशिक्षण सामग्री को डिजिटल स्वरूप दिया जाता है, शिक्षकों तक पहुँचाया जाता है तथा बड़े स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण को व्यवस्थित किया जा सकता है।

उत्तराखण्ड ने अन्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे SCERT उत्तराखण्ड द्वारा विकसित IT एवं डिजिटल शिक्षा पहलों को देखें, अपने संदर्भ में उनकी उपयोगिता का अध्ययन करें और जहाँ संभव हो, सहयोग एवं सहभागिता की संभावनाएँ विकसित करें।

Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में अन्य राज्यों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को सहभागिता का आमंत्रण

इसी क्रम में सम्मेलन के मंच से Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 की जानकारी भी साझा की गई। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया कि वे अपने यहाँ के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों तक Hackathon 3.0 की जानकारी पहुँचाएँ तथा नवाचार, समस्या-समाधान और रचनात्मकता से जुड़े इस मंच के साथ सहभागिता की संभावनाओं को बढ़ाएँ।

इस पहल का उद्देश्य राज्यों के बीच केवल तैयार सामग्री का आदान-प्रदान करना नहीं, बल्कि students and teachers को innovation ecosystem से जोड़ना और राज्यों के बीच collaborative innovation culture विकसित करना भी है।

Inclusive Education और Audio Books की पहल भी साझा

सम्मेलन के दौरान SCERT उत्तराखण्ड की ओर से Inclusive Education से जुड़ी डिजिटल सामग्री एवं Audio Books के उपयोग और विकास की जानकारी भी अन्य राज्यों के साथ साझा की गई।

विशेष रूप से समावेशी शिक्षा में तकनीक के माध्यम से ऐसे संसाधनों को विकसित करने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया गया जो विभिन्न प्रकार की शैक्षिक आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ हों।

यह सम्मेलन के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप भी है, क्योंकि Concept Note SCERTs/SIEs की भूमिका को केवल प्रशिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि technology integration, multilingualism, local context, research, innovation और equitable educational opportunities को बढ़ावा देने वाली अकादमिक संस्थाओं के रूप में देखता है। 

उत्तराखण्ड–लक्षद्वीप Pair Discussion ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—भारत में शिक्षा की परिस्थितियाँ एक जैसी नहीं हैं, इसलिए समाधान भी पूरी तरह एक जैसे नहीं हो सकते।

उत्तराखण्ड के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्र और लक्षद्वीप की द्वीपीय परिस्थितियाँ अलग हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल पहुँच, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सामग्री और विद्यार्थियों तक बेहतर शिक्षण संसाधन पहुँचाने का लक्ष्य साझा है।

इसी कारण एक राज्य की Best Practice को हूबहू अपनाने के बजाय उसे दूसरे राज्य की परिस्थितियों के अनुसार contextualise, adapt और implement करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

यह दृष्टिकोण Conference Concept Note की उस मूल भावना के अनुरूप है जिसमें SCERTs/SIEs को स्थानीय भाषाई, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संदर्भों के अनुरूप राष्ट्रीय शैक्षिक नीतियों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण अकादमिक संस्था माना गया है। 

Work Plan से वास्तविक क्रियान्वयन की ओर

समापन समारोह में कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शारद सिन्हा द्वारा प्रतिभागी राज्यों से अपने-अपने Work Plans/Implementation Frameworks साझा करने तथा Feedback Forms जमा करने का आग्रह किया गया।

राज्यों से यह भी अपेक्षा व्यक्त की गई कि वे अपनी वास्तविक आवश्यकताओं—चाहे वे infrastructure, teacher training, academic support, capacity building अथवा innovative ideas को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने से संबंधित हों—को सामने रखें, ताकि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थाओं के बीच सहयोग को और प्रभावी बनाया जा सके।

Conference Concept Note के अनुसार भी इस तीन दिवसीय आयोजन के प्रमुख अपेक्षित परिणामों में SCERTs/SIEs को मजबूत करने हेतु साझा राष्ट्रीय framework, राज्यों की Best Practices का documented compendium, State-specific Implementation Frameworks तथा National NCERT-SCERT/SIE Excellence Network (NSEN) को सुदृढ़ करना शामिल है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

NEP 2020 के अनुरूप SCERTs/SIEs को Centres of Excellence बनाने की दिशा

तीन दिवसीय सम्मेलन ने NEP 2020 के आलोक में SCERTs एवं SIEs की बदलती भूमिका पर भी विशेष जोर दिया। Concept Note में SCERTs/SIEs को भविष्य में ऐसे Centres of Excellence के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है जहाँ research, reflection, innovation, collaboration और continuous professional development शैक्षिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनें। 

इस दृष्टि से सम्मेलन ने राष्ट्रीय नीतियों को केवल दस्तावेजों तक सीमित न रखते हुए उन्हें पाठ्यचर्या, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, मूल्यांकन, अनुसंधान और विद्यालयी स्तर के वास्तविक क्रियान्वयन से जोड़ने की आवश्यकता को सामने रखा।

तीन दिनों का संदेश—‘Sharing Best Practices to Building Shared Solutions’

28 से 30 सितम्बर तक आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने, सफल मॉडलों को साझा करने और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की दिशा में साथ लाना रही।

पहले दिन राज्यों की Best Practices और Shared Priorities पर विमर्श हुआ, दूसरे दिन NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ संवाद और Shared Experiences पर चर्चा हुई, जबकि अंतिम दिन इस सीख को State-specific Implementation Framework में परिवर्तित करने की दिशा में कार्य किया गया। आधिकारिक कार्यक्रम में भी तीसरे दिन को स्पष्ट रूप से “Implementation” के रूप में निर्धारित किया गया था। 

उत्तराखण्ड और लक्षद्वीप के बीच विकसित संवाद ने इस उद्देश्य को व्यावहारिक रूप दिया—पहाड़ और द्वीप भले ही भौगोलिक रूप से अलग हों, लेकिन शिक्षा में नवाचार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण सीख पहुँचाने का लक्ष्य उन्हें एक साझा मंच पर जोड़ता है।

Annual Conference of Directors of SCERTs & SIEs 2026-27 का समापन इसी संकल्प के साथ हुआ कि राज्यों की श्रेष्ठ प्रथाएँ केवल प्रस्तुतियों तक सीमित न रहें, बल्कि आपसी सहयोग, साझा संसाधनों और स्पष्ट Work Plans के माध्यम से विद्यालयों और शिक्षकों तक पहुँचें—और NEP 2020 की परिकल्पना को धरातल पर वास्तविक शैक्षिक परिवर्तन में बदलें।

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Tuesday, September 29, 2026

NCERT Director’s Conference का द्वितीय दिवस: अकादमिक संवाद, डिजिटल शिक्षा और प्रधानमंत्री संग्रहालय की यात्रा

 

NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ पैनल डिस्कशन में राज्यों ने साझा किए अनुभव एवं सुझाव; PME Vidya, DIKSHA और NISHTHA के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर

नई दिल्ली, 29 सितम्बर 2026।

NCERT परिसर, नई दिल्ली में आयोजित Director’s Conference के द्वितीय दिवस की शुरुआत अकादमिक विमर्श, राज्यों के अनुभवों और राष्ट्रीय स्तर पर संचालित शैक्षिक पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित महत्वपूर्ण Panel Discussion with Heads of Departments of NCERT के साथ हुई।

देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से आए निदेशकों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इस सत्र को राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षिक विचार-विमर्श और अनुभव-साझाकरण का महत्वपूर्ण मंच बनाया।

NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ सार्थक पैनल डिस्कशन

द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में NCERT के Curriculum, Teacher Education तथा Research सहित विभिन्न अकादमिक विभागों के विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों, योजनाओं, अनुसंधान कार्यों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आगामी पहलों के संबंध में जानकारी साझा की।

पैनल डिस्कशन की विशेषता यह रही कि यह केवल प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं था। विभिन्न राज्यों से आए निदेशकों एवं प्रतिभागियों को अपने अनुभव, चुनौतियाँ और सुझाव रखने का अवसर दिया गया। Question–Answer Session के माध्यम से राज्यों की जमीनी आवश्यकताओं, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या, शोध, डिजिटल शिक्षा तथा राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर खुलकर चर्चा हुई।

इस संवाद ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर विकसित शैक्षिक नीतियों, संसाधनों और कार्यक्रमों की वास्तविक सफलता तभी संभव है, जब NCERT और राज्यों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग बना रहे।

शैक्षिक शोध को राज्यों से जोड़ने पर विशेष चर्चा

Research से संबंधित सत्र में प्रोफेसर भारद्वाज द्वारा NCERT के शोध कार्यों, Research Documents तथा शोध से संबंधित प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।

राज्यों को NCERT के शोध-आधारित कार्यक्रमों एवं प्रशिक्षण अवसरों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विशेष रूप से यह रेखांकित किया गया कि शिक्षा के क्षेत्र में लिए जाने वाले निर्णय केवल अनुभव या परंपरागत धारणाओं पर आधारित न होकर Evidence-Based Research और वास्तविक शैक्षिक आंकड़ों से समर्थित होने चाहिए। NCERT स्वयं भी अनुसंधान, शिक्षक-शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा राज्यों को अकादमिक सहयोग प्रदान करने जैसे क्षेत्रों में कार्य करता है।

नए पाठ्यक्रम में Learning Outcomes और Competencies पर जोर

प्रो रंजना रंजना अरोड़ा  Curriculum Department की ओर से वर्तमान में विकसित किए जा रहे पाठ्यक्रम एवं संबंधित दस्तावेजों के विषय में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। विशेष रूप से Learning Outcomes (LOs) और Competencies को नए पाठ्यक्रम एवं शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से प्रभावी रूप से जोड़ने पर चर्चा हुई। संबंधित दस्तावेजों को तैयार होने के बाद NCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

यह पहल महत्वपूर्ण है क्योंकि Competency-Based Education का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि विद्यार्थी ने पाठ्यपुस्तक का कितना भाग पढ़ा, बल्कि यह समझना है कि विद्यार्थी अर्जित ज्ञान और कौशल का वास्तविक परिस्थितियों में किस प्रकार उपयोग कर सकता है।

इस दृष्टिकोण से Learning Outcomes, Competencies, Teaching-Learning Process और Assessment के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना विद्यालयी शिक्षा में गुणात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Teacher Education: शिक्षक को परिवर्तन का प्रमुख माध्यम मानने पर बल

Teacher Education से जुड़े विचार-विमर्श में शिक्षक-प्रशिक्षण को बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक, परिणामोन्मुखी और सतत बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। कान्फ्रन्स समन्वयक प्रो शरद सिन्हा ने कहा कि आज शिक्षक की भूमिका केवल विषय-वस्तु को कक्षा तक पहुँचाने की नहीं है। शिक्षक को डिजिटल संसाधनों, competency-based learning, नवीन आकलन पद्धतियों, ICT और बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं से निरंतर अपडेट रहना आवश्यक है।

इसीलिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर की संस्थाओं के बीच शिक्षक-प्रशिक्षण, प्रशिक्षण सामग्री, शोध तथा डिजिटल संसाधनों को लेकर मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया गया।

PM eVIDYA, DIKSHA और NISHTHA: राष्ट्रीय कार्यक्रमों को अंतिम विद्यालय तक पहुँचाने पर जोर

पैनल डिस्कशन के दौरान Joint Director, CIET-NCERT, प्रो. अमरेंद्र बेहरा द्वारा डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में संचालित महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों—विशेष रूप से PM eVIDYA, DIKSHA तथा NISHTHA—को रेखांकित किया गया।

उन्होंने राज्यों में इन कार्यक्रमों की प्रगति, उपयोग और विस्तार के संदर्भ में चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म और शैक्षिक संसाधनों का लाभ अधिक से अधिक शिक्षकों और विद्यार्थियों तक पहुँचना चाहिए।

DIKSHA के माध्यम से डिजिटल सामग्री और शिक्षक-शिक्षा से संबंधित e-content उपलब्ध कराने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया गया है। NCERT के आधिकारिक दस्तावेजों में DIKSHA के लिए school तथा teacher education e-content के विकास हेतु दिशा-निर्देश भी उपलब्ध हैं।

इसी प्रकार NISHTHA को शिक्षक एवं विद्यालय प्रमुखों के व्यापक क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के रूप में विकसित किया गया है और इसके विभिन्न चरण elementary, secondary, foundational तथा vocational education जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित किए गए हैं।

चर्चा का महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता केवल उस पर सामग्री उपलब्ध करा देने से सुनिश्चित नहीं होती। आवश्यक है कि राज्य स्तर से लेकर SCERT–DIET–District–Block–School और Teacher तक उसका प्रभावी dissemination, orientation, utilisation और monitoring सुनिश्चित किया जाए।


राज्यों के अनुभव और सुझाव बने सम्मेलन की महत्वपूर्ण कड़ी

इस Director’s Conference की एक प्रमुख विशेषता विभिन्न राज्यों के बीच cross-learning रही।

राज्यों से आए निदेशकों एवं प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की परिस्थितियों, उपलब्धियों तथा चुनौतियों से जुड़े प्रश्न और सुझाव साझा किए। इससे चर्चा केवल राष्ट्रीय नीतियों के प्रस्तुतीकरण तक सीमित न रहकर वास्तविक राज्य स्तरीय क्रियान्वयन से जुड़ सकी।

प्रोफेसर शरद सिन्हा द्वारा भी सम्मेलन के उद्देश्यों, अकादमिक विषयों तथा विभिन्न सत्रों से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उनके समन्वयन में आयोजित संवाद ने प्रतिभागियों को NCERT की विभिन्न पहलों को व्यापक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान किया।

दोपहर बाद प्रधानमंत्री संग्रहालय का शैक्षिक भ्रमण


द्वितीय दिवस के अकादमिक सत्रों के पश्चात प्रतिभागियों के लिए प्रधानमंत्री संग्रहालय, तीन मूर्ति परिसर, नई दिल्ली का भ्रमण आयोजित किया गया।

यह भ्रमण सम्मेलन के औपचारिक अकादमिक वातावरण से आगे बढ़कर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास, नेतृत्व और स्वतंत्रता के बाद की विकास यात्रा को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर बना।

भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को समर्पित संग्रहालय

नई दिल्ली के ऐतिहासिक Teen Murti Estate में स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन 14 अप्रैल 2022 को किया गया था। इसका उद्देश्य स्वतंत्र भारत की यात्रा को देश के प्रधानमंत्रियों के जीवन, नेतृत्व, निर्णयों और योगदान के माध्यम से प्रस्तुत करना है। सरकारी जानकारी के अनुसार संग्रहालय में 43 galleries विकसित की गई थीं और इसमें स्वतंत्रता संघर्ष तथा संविधान निर्माण से लेकर स्वतंत्र भारत की विभिन्न विकास यात्राओं को समाहित किया गया है।

संग्रहालय मुख्यतः दो भवनों में विस्तारित है। Building-I में ऐतिहासिक Teen Murti भवन, पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित दीर्घा, संविधान से संबंधित galleries, Toshakhana तथा उनके निजी जीवन से जुड़े हिस्से शामिल हैं। Building-II में बाद के प्रधानमंत्रियों के व्यक्तिगत जीवन तथा उनके कार्यकाल के दौरान हुए सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों से संबंधित प्रस्तुतियाँ विकसित की गई हैं।

बाद में संग्रहालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित gallery भी विकसित की गई, जिसमें शासन, पर्यावरण, विकास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, विज्ञान, सांस्कृतिक विरासत, सुरक्षा और जनभागीदारी जैसे विषयों को interactive displays के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

इतिहास को केवल पढ़ना नहीं—अनुभव करना

प्रधानमंत्री संग्रहालय की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में इसकी digital और immersive technology है। यहाँ इतिहास को केवल तस्वीरों और लिखित विवरणों के माध्यम से प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि Holograms, Virtual Reality, Augmented Reality, multimedia interactive kiosks और experiential installations जैसी तकनीकों का उपयोग भी किया गया है।

इस कारण संग्रहालय विशेष रूप से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए यह समझने का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है कि इतिहास, संग्रहालय शिक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी को मिलाकर experiential learning किस प्रकार विकसित की जा सकती है।

उत्तराखंड अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने इस संग्राहलय के बारे मे कहा कि Building-I में संविधान निर्माण से संबंधित galleries भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे के विकास को समझने का अवसर देती हैं। इसके साथ ही Toshakhana Gallery में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण उपहार एवं artifacts प्रदर्शित किए गए हैं।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री संग्रहालय में 100 से अधिक वैश्विक artefacts और memorabilia प्रदर्शित हैं।

ऐसी वस्तुएँ केवल संग्रहणीय सामग्री नहीं हैं; वे भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों, कूटनीतिक संपर्कों और विभिन्न कालखंडों की ऐतिहासिक स्मृतियों से भी परिचित कराती हैं।

Anubhuti Zone: इतिहास के साथ तकनीक का अनूठा संगम

संग्रहालय का Anubhuti Zone विशेष रूप से आकर्षक है। इसमें Augmented Reality और अन्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से visitor engagement के कई अनुभव विकसित किए गए हैं।

इनमें Selfie with Prime Minister, Letter from Prime Minister, Unity Chain, Stroll/Walk with Prime Minister और AI आधारित interactive experiences जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर virtual/interactive experiences और संग्रहालय का 360-degree virtual tour भी उपलब्ध है।

इस प्रकार प्रधानमंत्री संग्रहालय पारंपरिक संग्रहालय की अवधारणा से आगे बढ़कर एक ऐसा Digital Learning Space बनता है जहाँ इतिहास, नेतृत्व, लोकतंत्र और तकनीक एक साथ दिखाई देते हैं।


शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एक Living Learning Laboratory

शैक्षिक दृष्टि से प्रधानमंत्री संग्रहालय का भ्रमण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा।

विद्यालयों में इतिहास, नागरिक शास्त्र, राजनीति विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, ICT और experiential learning को प्रायः अलग-अलग विषयों के रूप में देखा जाता है। प्रधानमंत्री संग्रहालय यह दिखाता है कि इन सभी को एक ही learning experience में एकीकृत किया जा सकता है।

विद्यार्थियों के लिए ऐसी यात्राएँ पाठ्यपुस्तक में पढ़े गए संविधान, लोकतंत्र, नेतृत्व, स्वतंत्र भारत के विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरराष्ट्रीय संबंध तथा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन जैसे विषयों को वास्तविक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान कर सकती हैं।

NCERT परिसर में  रात्रिभोज

प्रधानमंत्री संग्रहालय के ज्ञानवर्धक भ्रमण के पश्चात सभी प्रतिभागी पुनः NCERT परिसर लौटे। दिनभर की अकादमिक गतिविधियों और भ्रमण के बाद NCERT के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी की ओर से प्रतिभागियों के लिए रात्रिभोज की व्यवस्था की गई।

रात्रिभोज केवल औपचारिक आतिथ्य का अवसर नहीं रहा, बल्कि विभिन्न राज्यों से आए शिक्षा अधिकारियों, निदेशकों और प्रतिभागियों के बीच अनौपचारिक संवाद एवं अनुभव साझा करने का भी अवसर बना।

दिन के औपचारिक सत्रों में जिन विषयों पर चर्चा हुई थी, उन पर अनौपचारिक रूप से विचार साझा किए गए और विभिन्न राज्यों की शैक्षिक पहलों, चुनौतियों तथा नवाचारों पर भी बातचीत हुई।

अकादमिक संवाद से सहयोग की ओर बढ़ता सम्मेलन

Director’s Conference के द्वितीय दिवस ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—राष्ट्रीय स्तर पर विकसित नीतियों और कार्यक्रमों की वास्तविक शक्ति उनके राज्य, जिला और विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

एक ओर NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ Curriculum, Learning Outcomes, Competencies, Teacher Education और Research पर गंभीर अकादमिक चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर PM eVIDYA, DIKSHA और NISHTHA जैसे कार्यक्रमों के अधिक प्रभावी dissemination एवं utilisation पर राज्यों की भूमिका को रेखांकित किया गया।

प्रधानमंत्री संग्रहालय के भ्रमण ने इस पूरे दिन में एक और आयाम जोड़ा—शिक्षा केवल conference room, curriculum document या textbook तक सीमित नहीं है; संग्रहालय, ऐतिहासिक स्थल और डिजिटल अनुभव भी प्रभावशाली learning spaces बन सकते हैं। दिन का समापन NCERT परिसर में आत्मीय रात्रिभोज, परस्पर संवाद और अनुभव-साझाकरण के साथ हुआ। इस प्रकार Director’s Conference का द्वितीय दिवस “Dialogue, Research, Digital Education, Experiential Learning और National–State Collaboration” का सार्थक संगम बनकर सामने आया—जो आने वाले समय में राष्ट्रीय शैक्षिक पहलों को राज्यों के अंतिम विद्यालय और विद्यार्थी तक पहुँचाने की साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

प्रथम दिवस -कान्फ्रन्स -स्रोत - facebook एनसीईआरटी पेज 

Monday, September 28, 2026

SCERTs/SIEs Directors’ Annual Conference 2026-27 का NCERT में शुभारंभ

 

राज्यों की श्रेष्ठ शैक्षिक पहलों से साझा सीख की ओर—उत्तराखण्ड के e-Srijan MOOCs और डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल की राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति

नई दिल्ली, 28 सितम्बर 2026।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के तत्वावधान में Department of Teacher Education द्वारा 28 से 30 सितम्बर 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय “Annual Conference of Directors of SCERTs & SIEs 2026-27” का शुभारंभ NCERT परिसर, नई दिल्ली में हुआ। देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के SCERTs और SIEs के निदेशकों एवं प्रतिनिधियों की सहभागिता वाला यह राष्ट्रीय सम्मेलन राज्यों के अनुभवों, नवाचारों और श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करने के साथ-साथ भविष्य में SCERT/SIE की भूमिका को अधिक सशक्त, शोध-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

सम्मेलन के Concept Note में SCERTs/SIEs को राज्यों की शिक्षा व्यवस्था की academic and research arms के रूप में रेखांकित किया गया है। इनके दायित्वों में राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय नीतियों का क्रियान्वयन, पाठ्यचर्या निर्माण, शैक्षिक अनुसंधान तथा DIETs, BRCs और CRCs जैसी संस्थाओं को अकादमिक मार्गदर्शन देना शामिल है। NEP 2020 के संदर्भ में SCERTs/SIEs को Centres of Excellence तथा तकनीक-सक्षम, शोध-आधारित शैक्षिक संस्थानों के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

उद्घाटन सत्र: राज्यों तक राष्ट्रीय पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

सम्मेलन का शुभारंभ NCERT के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी तथा NCERT-CIETके जॉइन्ट डायरेक्टर अमरेन्द्र बेहरा और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र में प्रो. शारदा सिन्हा ने नोडल एवं समन्वयक के रूप में सम्मेलन की रूपरेखा, उद्देश्य, प्रमुख एजेंडा तथा आगामी तीन दिनों में किए जाने वाले विचार-विमर्श की विस्तृत जानकारी साझा की।

इस दौरान विशेष रूप से Teacher Education, Continuous Professional Development (CPD), institutional capacity building, digital transformation, curriculum, assessment, research और State-specific Implementation Framework जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

अपने संबोधन में NCERT निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने राज्यों के प्रतिनिधियों से राष्ट्रीय स्तर पर विकसित शैक्षिक कार्यक्रमों एवं पहलों को केवल राज्य स्तर तक सीमित न रखकर जिलों, ब्लॉकों और विद्यालयों तक प्रभावी रूप से पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थाओं के बीच सहयोग तथा योजनाओं के वास्तविक धरातल पर क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।


कार्यक्रम की आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार पहले दिन का विषय “Welcome, Reflection & Shared Priorities” रखा गया। उद्घाटन एवं Agenda Setting के बाद दोपहर 2:00 से 5:00 बजे तक राज्यों के अनुभवों पर आधारित Interactive Panel Discussion निर्धारित किया गया, जबकि दिन का समापन Reflection एवं Wrap-up के साथ होना है। DocScanner 28 Sept 2026 21-09

राज्यों की Best Practices बनीं सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण

सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसे केवल व्याख्यान या औपचारिक प्रस्तुतियों तक सीमित न रखकर peer learning और State-to-State learning का मंच बनाया गया।

विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों को समूहों में विभाजित किया गया और प्रत्येक समूह में लगभग पाँच-छह राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सम्मिलित करते हुए Interactive Panel Discussion आयोजित किया गया। इसमें प्रत्येक राज्य ने अपने यहाँ लागू की गई ऐसी प्रमुख शैक्षिक पहल प्रस्तुत की, जिसने किसी चुनौती के समाधान, शिक्षक क्षमता संवर्धन, डिजिटल शिक्षा, पाठ्यचर्या, मूल्यांकन अथवा विद्यार्थी अधिगम में उल्लेखनीय योगदान दिया है। पंजाब के बरनाला जनपद के डाइट प्राचार्य डॉ मु नीष शर्मा ने बताया कि कैसे पंजाब  परख एवं पी जी आई इंडेक्स मे सर्वश्रेष्ठ रहा जो एक टीम और निरंतर मेंटोरींग के कारण हुआ है । 

संलग्न समूह सूची में West Bengal, Meghalaya, Jharkhand, Punjab, Tripura, Arunachal Pradesh; Chandigarh, Uttarakhand, Manipur, Kerala, Andaman & Nicobar Islands, Delhi; Jammu & Kashmir, Sikkim, Haryana, Assam, Telangana, Maharashtra; Chhattisgarh, Madhya Pradesh, Goa, Odisha, Mizoram, Uttar Pradesh; तथा Rajasthan, Karnataka, Gujarat, Lakshadweep और Andhra Pradesh सहित विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को अलग-अलग समूहों में रखा गया।

इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी एक मॉडल को सभी राज्यों पर लागू करने के बजाय “What works, where and why?” के आधार पर राज्यों को एक-दूसरे के वास्तविक अनुभवों से सीखने का अवसर देना रहा।

देशभर से सामने आईं विविध और अभिनव पहलें

Conference Concept Note में राज्यों से प्राप्त पहलों के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण भी दर्ज किए गए हैं। इनमें Kerala में AI-responsive science curriculum redesign, Rajasthan का Khushi Shala teacher and student wellbeing programme, Jammu & Kashmir का SCERT on Wheels, Chhattisgarh का multilingual education programme, Karnataka का Learning Outcome-based Assessment तथा Arunachal Pradesh में स्थानीय इतिहास एवं संस्कृति पर आधारित पाठ्यपुस्तकें शामिल हैं। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

Concept Note में राज्यों की पहलों के विश्लेषण से कुछ साझा चुनौतियाँ भी सामने आई हैं—विशेषकर teacher capacity/readiness, support at scale, local language/context, data integrity, documentation, stakeholder buy-in, coordination, time/workload, funding/resources, technology/infrastructure/connectivity तथा scaling-up। इस प्रकार सम्मेलन केवल सफलताओं के प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि उन वास्तविक चुनौतियों पर सामूहिक समाधान खोजने का प्रयास भी है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

राष्ट्रीय मंच पर उत्तराखण्ड की विशेष प्रस्तुति: e-Srijan MOOCs बना आकर्षण

Interactive Panel Discussion में SCERT उत्तराखण्ड की ओर से राज्य की प्रमुख डिजिटल एवं शिक्षक क्षमता संवर्धन पहलों की प्रस्तुति निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल द्वारा दी गई।

प्रस्तुति में विशेष रूप से Massive Open Online Courses (MOOCs), e-Srijan आधारित डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था तथा ऑनलाइन माध्यम से बड़े पैमाने पर शिक्षकों के Continuous Professional Development की जानकारी साझा की गई।


उत्तराखण्ड की पहल का महत्व इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय रहा कि राज्य ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण को केवल सीमित संख्या में शिक्षकों तक पहुँचाने के बजाय उसे large-scale, structured and self-paced professional learning model के रूप में विकसित करने का प्रयास किया है।

महत्वपूर्ण रूप से, सम्मेलन के आधिकारिक Concept Note में भी Uttarakhand के e-Srijan MOOC को उदाहरण के रूप में विशेष स्थान दिया गया है। दस्तावेज में डिजिटल और AI-आधारित दुनिया के अनुरूप pedagogy को पुनर्विचार करने के संदर्भ में उल्लेख है कि Uttarakhand का e-Srijan MOOC दूरस्थ पहाड़ी जिलों के शिक्षकों तक structured, self-paced professional learning पहुँचाता है, जहाँ अन्यथा ऐसे अवसरों की उपलब्धता सीमित हो सकती है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

यह उल्लेख उत्तराखण्ड के डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर साझा की जा रही उल्लेखनीय प्रथाओं में स्थान देता है।

e-Srijan के Outcomes और Global Recognition पर भी चर्चा

निदेशक अकादमिक द्वारा प्रस्तुति में केवल कार्यक्रम की संरचना ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े outcomes, बड़े स्तर पर शिक्षक सहभागिता, डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण की पहुँच और मॉडल को मिली व्यापक पहचान पर भी प्रकाश डाला गया।

इसी क्रम में उत्तराखण्ड की इस पहल को हाल में प्राप्त SKOCH Gold Award 2026 का भी सम्मेलन में उल्लेख हुआ। प्रो. शारदा सिन्हा द्वारा उत्तराखण्ड की उपलब्धि का उल्लेख किए जाने पर उपस्थित प्रतिनिधियों ने राज्य के प्रयासों की सराहना करते हुए SCERT उत्तराखण्ड को शुभकामनाएँ दीं।

इस उपलब्धि ने इस तथ्य को और रेखांकित किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य केवल ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि शिक्षक प्रशिक्षण को scalable, accessible, measurable और sustainable CPD ecosystem में बदलना होना चाहिए।

NEP 2020 और SARTHAQ 2.0 के अनुरूप SCERTs/SIEs की बदलती भूमिका

Conference Concept Note के अनुसार NEP 2020 SCERTs/SIEs को राज्य स्तर पर curriculum leadership, teacher education एवं CPD, competency-based assessment, technology integration, multilingualism, local culture तथा educational research में नेतृत्वकारी भूमिका प्रदान करती है।

इसी दिशा में SARTHAQ 2.0 के अंतर्गत SCERTs/SIEs के लिए Foundational Literacy and Numeracy, State Curriculum Frameworks, Quality Assessment and Assurance, systematic teacher capacity building तथा monitoring एवं benchmarking जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट जिम्मेदारियाँ निर्धारित करने की बात सामने आती है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

इसलिए सम्मेलन का मूल प्रश्न केवल यह नहीं है कि राज्यों ने अब तक क्या किया, बल्कि यह भी है कि—

“अब SCERTs/SIEs भविष्य में राज्य की शैक्षिक व्यवस्था के परिवर्तनकारी academic leadership institutions कैसे बनें?”

सम्मेलन की तीन दिवसीय संरचना भी इसी उद्देश्य को स्पष्ट करती है।

28 सितम्बर—Day 1: Welcome, Reflection & Shared Priorities
पहले दिन राज्यों की उपलब्धियों, अनुभवों, चुनौतियों एवं Best Practices को साझा करने पर केंद्रित संवाद रखा गया है। DocScanner 28 Sept 2026 21-09

29 सितम्बर—Day 2: Shared Experiences
दूसरे दिन NCERT के विभिन्न विभागाध्यक्षों के साथ Panel Discussions होंगे। इसके बाद प्रतिभागियों के लिए Pradhanmantri Sangrahalaya का Field Visit निर्धारित है और शाम को NCERT निदेशक की ओर से आयोजित रात्रिभोज के साथ संवाद आगे बढ़ेगा। DocScanner 28 Sept 2026 21-09

30 सितम्बर—Day 3: Implementation
सम्मेलन का अंतिम दिन सबसे महत्वपूर्ण रूप से “Developing State-specific Implementation Framework” पर केंद्रित रहेगा। प्रतिभागी pairs में कार्य करेंगे, प्रमुख निष्कर्ष एवं takeaways साझा करेंगे और अंत में Valedictory Session आयोजित होगा। DocScanner 28 Sept 2026 21-09

इस प्रकार सम्मेलन की संरचना स्पष्ट रूप से Reflection → Sharing → Collaboration → Implementation की दिशा में आगे बढ़ती है।

सम्मेलन के Concept Note में भविष्य की परिकल्पना SCERTs/SIEs को ऐसे Centres of Excellence में परिवर्तित करने की है जहाँ शिक्षक एवं शिक्षाविद् research, reflection, innovation और collective professional growth में सक्रिय रूप से भाग लें।

इसके लिए NISHTHA जैसी capacity-building initiatives, मजबूत पुस्तकालय एवं knowledge resources तथा DIKSHA, NDLI और SWAYAM जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को भी महत्वपूर्ण माना गया है। सम्मेलन के अपेक्षित परिणामों में SCERTs/SIEs को मजबूत करने के लिए साझा राष्ट्रीय framework, राज्यों की Best Practices का documented compendium, State-specific Implementation Frameworks तथा राज्यों के बीच सहयोग के लिए मजबूत National NCERT-SCERT/SIE Excellence Network (NSEN) विकसित करना शामिल है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

तीन दिवसीय यह राष्ट्रीय सम्मेलन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि देश के अलग-अलग भौगोलिक, भाषाई, सामाजिक और तकनीकी परिवेश वाले राज्यों को पहली बार या अलग-अलग स्तर पर सामने आने वाली समस्याएँ अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। किसी राज्य की सफल पहल दूसरे राज्य के लिए हूबहू मॉडल न भी बने, तो भी वह नई सोच, समाधान और क्रियान्वयन की दिशा अवश्य प्रदान कर सकती है।

यही कारण है कि सम्मेलन में केवल समस्याओं की सूची तैयार करने के बजाय राज्यों द्वारा वास्तव में किए गए कार्यों, उनके अनुभवों और उनके परिणामों को केंद्र में रखा गया है। Concept Note भी स्पष्ट करता है कि इस वर्ष का उद्देश्य चुनौतियों की चर्चा से आगे बढ़कर राज्यों ने वास्तव में क्या बनाया और लागू किया है, उसे साझा करना और उस साझा सीख को State-specific plans में परिवर्तित करना है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

SCERT उत्तराखण्ड के लिए यह सम्मेलन अपनी उपलब्धियों को प्रस्तुत करने के साथ-साथ अन्य राज्यों के नवाचारों से सीखने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। विशेष रूप से e-Srijan MOOCs के माध्यम से बड़े स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल CPD और दूरस्थ क्षेत्रों तक professional learning पहुँचाने के राज्य के प्रयास का Conference Concept Note में स्थान मिलना इस पहल की उपयोगिता को रेखांकित करता है।

अब सम्मेलन के अगले दो दिनों में होने वाले साझा विमर्श, NCERT विभागाध्यक्षों के साथ संवाद तथा State-specific Implementation Framework तैयार करने की प्रक्रिया से यह अपेक्षा है कि विभिन्न राज्यों की श्रेष्ठ प्रथाएँ केवल प्रस्तुतियों तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य, जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर ठोस शैक्षिक परिवर्तन का आधार बनें।

Saturday, September 26, 2026

SCERT उत्तराखण्ड को प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award 2026

 

e-Srijan के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण में डिजिटल बदलाव को राष्ट्रीय सम्मान

109वें SKOCH Summit में अकादमिक निदेशक बंदना गर्ब्याल ने ग्रहण किया Gold Award; IT विभाग के Course Coordinator रमेश प्रसाद बडोनी रहे साथ

नई दिल्ली/देहरादून, 26 सितम्बर 2026। उत्तराखण्ड की विद्यालयी शिक्षा के लिए आज का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि लेकर आया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड की अभिनव शिक्षक-प्रशिक्षण पहल “Revolutionizing Teacher Training at Scale: The Success Story of ICT MOOCs via e-Srijan” को 109th SKOCH Summit में प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया।

नई दिल्ली के India Habitat Centre में आयोजित समारोह में SCERT उत्तराखण्ड की ओर से निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल ने Gold Award का प्रमाणपत्र एवं सम्मान-चिह्न ग्रहण किया। इस अवसर पर परियोजना से जुड़े IT Faculty एवं Course Coordinator रमेश प्रसाद बडोनी भी उनके साथ उपस्थित रहे।


109वाँ SKOCH Summit 26 सितम्बर 2026 को “India Economic Forum – Foundations of Inclusive Growth” विषय के साथ आयोजित हुआ। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार Summit सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक India Habitat Centre, New Delhi में आयोजित किया गया और Awards Session 11:30 बजे से 1:00 बजे तक निर्धारित था। summit.skoch.in

109th SKOCH Summit – Official Programme

109वें SKOCH Summit में Inclusive Growth पर राष्ट्रीय विमर्श

109वें SKOCH Summit का केंद्रीय विषय “Foundations of Inclusive Growth” रहा। SKOCH के अनुसार विकसित भारत की यात्रा में केवल अधिक आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा विकास आवश्यक है जो रोजगार सृजित करे, असमानता कम करे, देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचे और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ हो। सम्मेलन में पर्यावरण, जनसंख्या, शिक्षा, कानून, शासन और सार्वजनिक नीति जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। summit.skoch.in

कार्यक्रम की शुरुआत Dr Gursharan Dhanjal, Vice Chairman, SKOCH Group के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद Rohan Kochhar, Founder, SKOCH Law Offices और Sameer Kochhar, Chairman, SKOCH Group ने “Growth First, Foundations Priced Right: A Fiscal Architecture for Inclusive Growth” विषय पर अपने विचार रखे। आधिकारिक कार्यक्रम में इस सत्र के लिए 9:35 से 10:00 बजे का समय निर्धारित था। summit.skoch.in

Sameer Kochhar SKOCH Group के Chairman हैं और governance, social, digital तथा financial inclusion और inclusive growth से जुड़े विषयों पर लंबे समय से कार्य करते रहे हैं। Rohan Kochhar SKOCH Law Offices के Founder हैं और उनका कार्य economics, law, public policy, emerging technologies और ESG के अंतर्संबंध पर केंद्रित है। summit.skoch.in

इसके बाद Sunita Narain, Director General, Centre for Science and Environment (CSE) को SKOCH Challenger Lifetime Achievement Award प्रदान करने का सत्र आयोजित हुआ। summit.skoch.in

Sustainability से Education तक—विशेषज्ञों के विचार

सम्मेलन में Sunita Narain, Director General, Centre for Science and Environment (CSE) ने “Inclusive Growth & Sustainability” पर संबोधित किया। आधिकारिक SKOCH विवरण में उनके कार्य को पर्यावरण और विकास को एक-दूसरे से जोड़ने तथा sustainable और equitable growth पर केंद्रित बताया गया है। summit.skoch.in

इसके बाद Dr Poonam Mutreja, Executive Director, Population Foundation of India, Sanjay Kumar, Former Secretary, Government of India, Dr Pinky Anand, Senior Advocate, Supreme Court of India, तथा Bharat Lal, Former Secretary General & CEO, National Human Rights Commission सहित विभिन्न विशेषज्ञों की सहभागिता रही। summit.skoch.in

विशेष रूप से पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव Sanjay Kumar का शिक्षा क्षेत्र से गहरा संबंध रहा है। SKOCH के आधिकारिक परिचय के अनुसार Department of School Education & Literacy, Ministry of Education में Secretary रहते हुए उनका कार्य NEP 2020, foundational learning, early childhood education, teacher capacity, digital education और school-system strengthening जैसे क्षेत्रों से जुड़ा रहा। summit.skoch.in

इस प्रकार SCERT उत्तराखण्ड को मिला Gold Award ऐसे मंच पर प्रदान किया गया, जहाँ inclusive growth, education, sustainability, governance और institutional transformation पर राष्ट्रीय स्तर का विमर्श हो रहा था।

कई चरणों की मूल्यांकन यात्रा के बाद मिला SKOCH Gold Award

SCERT उत्तराखण्ड के लिए Gold Award तक पहुँचना एक चरण की प्रक्रिया नहीं थी। परियोजना को विभिन्न स्तरों पर प्रस्तुतीकरण, मूल्यांकन, public/online voting, jury assessment और interaction की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

प्रारंभिक चरण में SCERT उत्तराखण्ड द्वारा अपने ICT MOOCs/e-Srijan विद्या समीक्षा केंद्र पर संचालित , को jury के सामने प्रस्तुत किया गया। इसके बाद online voting और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर परियोजना अगले चरण के लिए shortlisted हुई।

परियोजना ने आगे बढ़ते हुए Semi-Final Round में Top-3 में स्थान बनाया। इसके बाद SKOCH Group द्वारा निर्धारित दस्तावेजी एवं अन्य औपचारिकताओं को पूरा किया गया तथा jury के साथ one-to-one interaction के माध्यम से परियोजना के implementation, innovation, scalability और impact से जुड़े पहलुओं को प्रस्तुत किया गया।

इन विभिन्न चरणों से गुजरने और Final Award Round के लिए चयनित होने के बाद 26 सितम्बर 2026 को 109th SKOCH Summit में SCERT Uttarakhand की इस पहल को SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया।


आखिर क्या है SCERT उत्तराखण्ड का पुरस्कार विजेता e-Srijan मॉडल?

उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में हजारों शिक्षकों को एक साथ गुणवत्तापूर्ण Continuous Professional Development उपलब्ध कराना आसान नहीं है। भौगोलिक दूरी, सीमित ICT infrastructure, प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को कार्यस्थल से बाहर भेजने की आवश्यकता तथा पारंपरिक face-to-face training की सीमित scalability प्रमुख चुनौतियाँ थीं। SCERT की SKOCH प्रस्तुति में इन्हीं समस्याओं को low ICT competency, limited reach of traditional training, scalable/flexible CPD की आवश्यकता और remote regions में digital divide के रूप में चिह्नित किया गया। 

इन चुनौतियों के समाधान के लिए SCERT के IT विभाग ने विद्या समीक्षा केंद्र चैट बॉट e-Srijan आधारित ICT MOOCs मॉडल विकसित किया।

इसकी विशेषता थी कि प्रशिक्षण को महंगे और जटिल technological infrastructure पर निर्भर रखने के बजाय mobile-friendly, low-cost और scalable बनाया गया। इसमें e-Srijan chatbot, AI-enabled interaction और real-time dashboard monitoring जैसी सुविधाओं का प्रयोग किया गया। 

कार्यान्वयन में विशेषज्ञों द्वारा content development, district-level coordination और VSK dashboard के माध्यम से real-time tracking को जोड़ा गया। 

लगभग 49 हजार शिक्षक—47 हजार से अधिक प्रमाणित

इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता केवल technology नहीं, बल्कि technology at scale रही।

SCERT की SKOCH प्रस्तुति के अनुसार MOOC 2.0 में 49,200 से अधिक शिक्षकों का registration, 99.65% course start, 95% से अधिक completion और लगभग 97% school coverage दर्ज की गई। 

परियोजना के प्रमुख outcomes में 47,000 से अधिक certified teachers, शिक्षकों के ICT एवं AI skills में सुधार, technology-enabled lesson planning एवं assessment, interactive classrooms, Hackathon में बढ़ती भागीदारी और DIKSHA तथा PM e-Vidya के लिए digital content creation शामिल रहे। 

यह उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह केवल online course उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही—registration से certification और training से classroom application तक पूरी प्रक्रिया को monitoring और support से जोड़ने का प्रयास किया गया।

AI और ICT से तैयार हो रहे Future-Ready Teachers

इस परियोजना की मूल सोच यह रही कि भविष्य के विद्यार्थियों को तैयार करने के लिए सबसे पहले भविष्य के लिए तैयार शिक्षक आवश्यक हैं।

नई शिक्षा नीति NEP 2020 के अनुरूप technology integration, digital pedagogy, competency development, innovative teaching-learning और continuous professional development को व्यवहार में उतारने के लिए MOOCs को एक बड़े माध्यम के रूप में विकसित किया गया।

इस मॉडल ने यह दिखाने का प्रयास किया कि तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि teacher empowerment का माध्यम बन सकती है।

जब AI, ICT, digital content, online assessment और real-time analytics को शिक्षक की pedagogical understanding से जोड़ा जाता है, तब technology केवल एक device या application नहीं रहती—वह educational transformation का enabler बन जाती है।

SKOCH से पहले Geneva में भी Global Top-6 Recognition

इस उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संदर्भ भी है।

SCERT Uttarakhand की संबंधित AI एवं ICT-enabled teacher-training initiative “Building Future-Ready Teachers through AI and ICT Enabled MOOCs” को जुलाई 2026 में Geneva में आयोजित AI for Education Awards 2026 की Teacher Training Award category में Global Top-6 Finalist के रूप में मान्यता मिली थी। SCERT की प्रकाशित जानकारी में 47 देशों, छह महाद्वीपों और 38,000 projects का उल्लेख किया गया है। scertuk.blogspot.com

स्वतंत्र रूप से, AI for Education Awards के आधिकारिक परिणाम यह पुष्टि करते हैं कि Global Competition में 47 देशों और छह महाद्वीपों से eligible projects आए और international jury ने तीन categories में 3 Laureates और 15 Finalists चुने। LinkedIn

यह प्रतियोगिता d-teach online school द्वारा आयोजित थी और Geneva में AI for Good Global Summit के दौरान इसका Global Competition सम्पन्न हुआ। UNESCO IITE ने भी AI4EDU26 के लिए आधिकारिक call प्रकाशित किया था और इसे K-12 education में responsible, human-centred AI practices को पहचान देने वाली global initiative बताया था। UNESCO IITE

इस प्रकार Global Top-6 Finalist recognition और अब SKOCH Gold Award—दोनों उपलब्धियाँ SCERT उत्तराखण्ड के technology-enabled teacher professional development के प्रयासों को अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर मिली पहचान को दर्शाती हैं।

विद्यालय शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दी बधाई

SCERT उत्तराखण्ड को प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award मिलने परउत्तराखंड के  शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह , सचिव, विद्यालयी शिक्षा, ज्योति यादव तथा महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, आकांक्षा कोंडे ने SCERT की पूरी टीम, IT विभाग , विद्या समीक्षा केंद्र तथा प्रदेश के शिक्षक समुदाय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को शिक्षक क्षमता संवर्धन में तकनीक के प्रभावी एवं नवाचारी उपयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि e-Srijan के माध्यम से विकसित ICT एवं AI आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉडल जैसी Best Practices को सतत एवं sustainable स्वरूप में आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि शिक्षकों का Continuous Professional Development नियमित रूप से जारी रहे। इस प्रकार के ऑनलाइन पाठ्यक्रम शिक्षकों को केवल डिजिटल एवं AI तकनीकों से परिचित नहीं करा रहे हैं, बल्कि उन्हें इनका कक्षा शिक्षण, lesson planning, assessment, digital content creation और विद्यार्थियों की learning को बेहतर बनाने में व्यावहारिक उपयोग करने के लिए भी सक्षम बना रहे हैं। SCERT की परियोजना में भी ICT एवं AI skills, technology-enabled lesson planning एवं assessment तथा interactive classrooms को प्रमुख outcomes के रूप में दर्ज किया गया है। SCERT Uttarakhand Presentation-… इस मॉडल को संस्थागत रूप से निरंतर आगे बढ़ाने का उद्देश्य NEP 2020 की भावना के अनुरूप Future-Ready Teachers के माध्यम से Future-Ready Students तैयार करना तथा राज्य में technology-enabled education को स्थायी रूप से मजबूत करना है।

बंदना गर्ब्याल ने शिक्षकों और विद्यार्थियों को समर्पित किया सम्मान

Gold Award ग्रहण करते हुए निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल ने इसे SCERT के IT विभाग, VSK, DIETs, जनपदीय टीमों, तकनीकी सहयोगियों तथा प्रदेश के शिक्षक समुदाय के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।

इस अवसर पर संदेश दिया गया कि आज शिक्षा जगत को तकनीक को केवल एक उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा में परिवर्तन के सहयोगी के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।

विशेष रूप से शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े professionals से आह्वान किया गया कि वे Technology, Innovation और Human Creativity के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करें, ताकि वर्तमान चुनौतियों का समाधान करने के साथ विद्यार्थियों को उस भविष्य के लिए भी तैयार किया जा सके जिसमें AI और digital technologies की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

आगे की राह: MOOC 3.0 से DIKSHA और Mission Karmayogi तक

SKOCH Gold Award इस यात्रा का अंतिम पड़ाव नहीं है। SCERT की future roadmap में MOOC 3.0, AI-based learning, DIKSHA integration, Mission Karmayogi-iGOT integration तथा इस मॉडल को nationally replicable बनाने की दिशा शामिल है। 

https://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-scert-uttarakhand-wins-skoch-gold-award-for-teacher-training-40386133.html

109th SKOCH Summit एवं पूरा आधिकारिक कार्यक्रम देखें

Friday, September 25, 2026

Hackathon 2.0 से Global AI Hackathon तक: विवेकानंद इंटर कॉलेज के मयंक की नवाचार यात्रा

दक्षिण अफ्रीका में आयोजित Global AI Hackathon में 23वीं Global Rank, SCERT Uttarakhand के Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 से मिली थी नवाचार को नई दिशा

अल्मोड़ा/देहरादून। उत्तराखण्ड के एक स्कूली विद्यार्थी की नवाचार यात्रा अब वैश्विक मंच तक पहुँच चुकी है। विवेकानंद इंटर कॉलेज, रानीधारा, अल्मोड़ा के कक्षा 12 के छात्र मयंक बिष्ट ने दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित प्रतिष्ठित UPSUMMIT Global AI Hackathon 2026 के High School Track में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व स्तर पर 23वीं रैंक हासिल की।

समाचार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 19 से 22 जून के बीच आयोजित इस प्रतियोगिता में 85 से अधिक देशों की 25,000 से ज्यादा टीमों ने भाग लिया। मयंक ने प्रतियोगिता में 100 में से 98 अंक प्राप्त करते हुए Global Rank 23 हासिल की। उन्होंने Applied Solutions के साथ Systems Engineering Interview भी सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे उन्हें Practical Tech Experience प्राप्त हुआ।

इस वैश्विक उपलब्धि की मजबूत नींव बना Hackathon 2.0

मयंक की इस उपलब्धि को केवल एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की सफलता के रूप में नहीं, बल्कि विद्यालय स्तर पर नवाचार को पहचानने, प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ाने की एक सतत यात्रा के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

इस यात्रा में SCERT Uttarakhand द्वारा आयोजित Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मयंक इससे पहले Hackathon 2.0 में प्रतिभाग करते हुए 2,800 से अधिक प्रतिभागियों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं। इस मंच ने उनके विचारों और तकनीकी प्रतिभा को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने के साथ उन्हें अपने innovation को आगे विकसित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया।

यही कारण है कि Hackathon 2.0 को मयंक की आगे की उपलब्धियों के लिए एक महत्वपूर्ण launchpad के रूप में देखा जा सकता है—जहाँ विद्यालय के एक विद्यार्थी के innovative idea को पहचान, मंच और आगे बढ़ने का अवसर मिला।

AI, IoT और Robotics में आगे बढ़ता नवाचार

मयंक का लक्ष्य Microelectronics, Artificial Intelligence (AI), Internet of Things (IoT) और Robotics जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए सामाजिक एवं ग्रामीण समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।

विद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता दीपक सिंह मेहता के मार्गदर्शन में वे विज्ञान, AI और Robotics के क्षेत्र में लगातार प्रयोग एवं नवाचार कर रहे हैं।

उनकी यात्रा राज्य स्तर तक सीमित नहीं रही। समाचार के अनुसार मयंक ने Indian Institute of Science (IISc), Bengaluru में आयोजित ArtPark Robotics–AI Edition के National Round में भी उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया है।

स्थानीय समस्या से Global Platform तक

मयंक की उपलब्धि Innovate Uttarakhand जैसी पहल के मूल उद्देश्य को भी रेखांकित करती है—विद्यालयों के विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रखते हुए उनमें problem solving, innovation, design thinking, AI, coding और entrepreneurship की सोच विकसित करना।

एक विद्यार्थी का स्कूल से अपने विचार पर काम शुरू करना, Hackathon 2.0 में राज्य स्तर पर विजेता बनना, राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रोजेक्ट को प्रस्तुत करना और फिर Global AI Hackathon में विश्व की हजारों टीमों के बीच स्थान बनाना यह दर्शाता है कि सही mentoring, institutional support और innovation ecosystem मिलने पर उत्तराखण्ड के विद्यार्थी वैश्विक मंच तक पहुँच सकते हैं।

Hackathon से Startup और Global Innovation की ओर

मयंक की यात्रा अब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि Hackathon 2.0 में मिली शुरुआती पहचान के बाद वे अपने विचारों को लगातार नए मंचों पर ले जा रहे हैं। यह उपलब्धि दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी संदेश है कि Hackathon केवल पुरस्कार जीतने की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि किसी विचार को prototype, project और आगे चलकर संभावित startup अथवा वास्तविक समाधान में बदलने की शुरुआत हो सकता है।

SCERT Uttarakhand की Innovate Uttarakhand Hackathon पहल इसी सोच को मजबूत करती है—विद्यालयों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें विशेषज्ञों एवं mentors से जोड़ना और उनके innovative ideas को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना।

मयंक की Global Rank 23 की उपलब्धि इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि उत्तराखण्ड के विद्यालय से शुरू हुआ एक innovation, सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास के साथ राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक अपनी पहचान बना सकता है।

SCERT Uttarakhand एवं Innovate Uttarakhand परिवार की ओर से मयंक बिष्ट, उनके मार्गदर्शक शिक्षक, विद्यालय एवं परिवार को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।

पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफल समापन

कौशल बोध के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा में ‘जानने से करने’ की ओर बढ़ते कदम

देहरादून। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), NCERT, भोपाल के सहयोग से “Capacity Building of Teachers for Implementation of Vocational Education at the Middle Stage as per NEP 2020 and NCF-SE 2023” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 35 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 की भावना के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को अनुभवात्मक, गतिविधि एवं कार्य-आधारित अधिगम से जोड़ते हुए शिक्षकों को ‘कौशल बोध’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयार करना था।

‘Knowing’ से ‘Doing’ की ओर

पाँच दिवसीय प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा केवल जानने (Knowing) तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को करने (Doing), अनुभव करने (Experiencing), समस्या पहचानने (Problem Identification), समाधान खोजने (Problem Solving) और सृजन करने (Creating) के अवसर भी मिले।

प्रतिभागियों ने Learning by Doing, Project-Based Learning, स्थानीय संसाधनों एवं समुदाय के उपयोग तथा कार्य-आधारित गतिविधियों को हैंड्स-ऑन अनुभवों के माध्यम से समझा। विद्यार्थियों के मूल्यांकन में केवल लिखित परीक्षा के बजाय उनके कार्य, सहभागिता, प्रक्रिया, कौशल और तैयार उत्पाद को भी महत्व देने पर चर्चा की गई।

उद्यमशील मानसिकता और 21वीं सदी के कौशल

कार्यशाला में Entrepreneurial Mindset पर विशेष गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इनमें समस्या एवं आवश्यकता की पहचान, नवाचार, उत्पाद अथवा सेवा की उपयोगिता, USP (Unique Selling Proposition), ग्राहक की आवश्यकता, Seller–Buyer संवाद, Communication, Presentation और Branding जैसी अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझाया गया।

प्रतिभागियों ने स्वयं Seller और Customer की भूमिका निभाकर अनुभव किया कि किसी विचार को उपयोगी उत्पाद या सेवा में बदलने के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ Communication, Collaboration, Critical Thinking, Creativity और Problem Solving जैसे कौशल भी आवश्यक हैं।

Bagless Days और Hub & Spoke Model पर विशेष चर्चा

अंतिम दिवस पर प्रो. डॉ. आशीष सोनी ने कौशल बोध के अंतर्गत व्यावसायिक विषयों को Core Curriculum से जोड़ने के साथ Bagless Days तथा Hub & Spoke Model के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।

विशेष रूप से 10 Bagless Days को केवल विद्यालय से बाहर भ्रमण तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों को स्थानीय व्यवसायों, कारीगरों, कृषि, सेवा क्षेत्र और समुदाय के वास्तविक कार्य-जगत से परिचित कराने के अवसर के रूप में विकसित करने पर बल दिया गया।

विद्यालयों के लिए तैयार किए Action Plans

पाँच दिनों के अधिगम को विद्यालय स्तर तक पहुँचाने के लिए प्रतिभागियों ने अपने-अपने विद्यालयों में कौशल बोध एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्रियान्वयन हेतु Action Plans प्रस्तुत किए। साथ ही Post-test एवं Feedback के माध्यम से प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन किया गया।

प्रतिभागियों ने Hands-on Activities, Exposure Visit, Learning by Doing तथा उद्यमशील मानसिकता से जुड़ी गतिविधियों को विशेष रूप से उपयोगी बताया।

प्रशिक्षण का लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचे — पद्मेंद्र सकलानी

समापन सत्र में अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड  पद्मेंद्र सकलानी ने प्रतिभागियों से कहा कि पाँच दिनों में प्राप्त अनुभवों को प्रशिक्षण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें विद्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुँचाया जाए। बच्चों को अपने हाथों से कार्य करने, स्थानीय कौशलों को समझने, वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने तथा नवाचार करने के अधिकाधिक अवसर दिए जाएँ।

इस अवसर पर डॉ. के. एन. बिजल्वान सहित SCERT के अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वयन के लिए कार्यक्रम समन्वयक  सुनील भट्ट के प्रयासों की सराहना की गई। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

ज्ञान और कौशल का समन्वय ही भविष्य की शिक्षा

पाँच दिवसीय कार्यशाला ने इस विचार को और मजबूत किया कि भविष्य की शिक्षा में ज्ञान और कौशल अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। विद्यार्थी गणित, विज्ञान और भाषा का ज्ञान प्राप्त करे, लेकिन साथ ही उस ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने, समाधान खोजने, टीम के साथ कार्य करने और कुछ नया सृजित करने में भी कर सके।

Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 विजेता Mayank की Team “Champians” UptoSkills Startupthon के National Top-12 में

ल से स्टार्टअप की ओर

Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 विजेता Mayank की Team “Champians” UptoSkills Startupthon के National Top-12 में

उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा से निकला नवाचार अब राष्ट्रीय Startup मंच पर

देहरादून, 25 सितम्बर 2026। उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा में नवाचार, रचनात्मकता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक उत्साहजनक उपलब्धि सामने आई है। SCERT Uttarakhand द्वारा आयोजित Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 के विद्यार्थी वर्ग के विजेता Mayank की Team “Champians” का चयन UptoSkills Startupthon Grand Finale की National Top-12 Teams में हुआ है।

UptoSkills द्वारा 25 सितम्बर 2026 को जारी आधिकारिक ई-मेल में Mayank और उनकी टीम को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए Top-12 में चयन तथा Startupthon Grand Finale में प्रतिभाग करने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।

यह उपलब्धि Mayank की व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ School Education Uttarakhand और Innovate Uttarakhand Hackathon की एक महत्वपूर्ण Success Story है।

🏆 Hackathon 2.0 से National Startup Grand Finale तक

Mayank की innovation journey Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 में विशेष रूप से सामने आई थी। अपने innovative project, working model और problem-solving approach के आधार पर उन्होंने विद्यार्थी वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

Hackathon ने उन्हें अपने विचार को केवल एक school project तक सीमित रखने के बजाय उसे विकसित करने, prototype तैयार करने और उसकी practical applicability को समझने का अवसर प्रदान किया। अब Team Champians का राष्ट्रीय स्तर के Startupthon Grand Finale तक पहुँचना इस बात का उदाहरण है कि विद्यालयी स्तर का एक innovative idea सही दिशा, mentorship और निरंतर प्रयास से आगे चलकर एक संभावित Startup का स्वरूप ले सकता है।

School Student → Innovative Idea → Hackathon Winner
→ Working Prototype → National Top-12 → Startup Opportunity → Young Entrepreneur

Mayank द्वारा SCERT Uttarakhand के साथ साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 3,000 university-level teams ने प्रतिभाग किया और विभिन्न screening stages के बाद केवल Top-12 Teams को Grand Finale के लिए चुना गया।

Mayank अभी अपनी माध्यमिक स्तर की स्कूली शिक्षा पूर्ण कर रहे हैं। उनके द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, मात्र 17 वर्ष की आयु में high-school track से इस स्तर तक पहुँचना उनकी उपलब्धि को और भी विशेष बनाता है।

🚀 Investors और Industry Professionals के सामने प्रस्तुत होगा Innovation

Startupthon Grand Finale का आयोजन Nawalgarh, Rajasthan में Offline Mode में किया जा रहा है और चयनित प्रतिभागियों को 1 October 2026 तक Nawalgarh पहुँचने के लिए आमंत्रित किया गया है।

Grand Finale में Team Champians को अपने innovative business idea को investors तथा industry professionals के सामने in-person pitch करने का अवसर मिलेगा। यह अनुभव उन्हें अपने prototype की market feasibility समझने, professional feedback प्राप्त करने, networking विकसित करने तथा भविष्य में incubation और investment possibilities तलाशने का अवसर प्रदान कर सकता है।

💡 Startup और Funding की संभावनाएँ

Startupthon से संबंधित साझा जानकारी में चयनित innovations के लिए ₹1 करोड़ तक की valuation पर funding opportunities, expert mentorship, industry interaction तथा startup ecosystem से जुड़ने जैसी संभावनाएँ बताई गई हैं। यह guaranteed funding नहीं, बल्कि चयनित ideas के लिए उपलब्ध संभावित funding/investment opportunity है।

🎓 विद्यालय में पढ़ते हुए Entrepreneurship की ओर कदम

Mayank की उपलब्धि का सबसे प्रेरक पक्ष यह है कि वे अभी भी School Education System के अंतर्गत अपनी माध्यमिक शिक्षा पूर्ण कर रहे हैं।

जिस उम्र में अधिकांश विद्यार्थी अपने भविष्य के career options को समझने की शुरुआत करते हैं, उसी अवस्था में Mayank ने problem identification, innovation, prototype development और national-level startup pitching तक की यात्रा शुरू कर दी है।

विद्यालयी अवस्था में प्राप्त Design Thinking, Teamwork, Prototype Development, Communication, Business Pitching और Entrepreneurship का यह वास्तविक अनुभव Mayank के भावी शैक्षिक एवं व्यावसायिक जीवन के निर्माण में एक महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकता है।

💡 Innovate Uttarakhand के उद्देश्य का वास्तविक परिणाम

SCERT Uttarakhand द्वारा Innovate Uttarakhand Hackathon की परिकल्पना विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में innovation mindset, creativity, critical thinking, problem-solving तथा technology-based solutions विकसित करने की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।

Mayank की उपलब्धि इस पहल के प्रभाव का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है। Hackathon में प्रस्तुत project पुरस्कार के साथ समाप्त नहीं हुआ, बल्कि विद्यार्थी ने उसे आगे विकसित किया और आज वही innovation राष्ट्रीय Startup Ecosystem तक पहुँच रहा है।

IDEA TO STARTUP

Idea → Prototype → Mentorship → Incubation → Startup → Entrepreneurship

🌱 Hackathon 3.0 के प्रतिभागियों के लिए प्रेरक उदाहरण

Mayank की सफलता वर्तमान Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में भाग लेने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों, mentors और supervisors के लिए भी एक जीवंत प्रेरक उदाहरण है।

उनकी journey यह संदेश देती है कि Hackathon में project प्रस्तुत करना अथवा पुरस्कार प्राप्त करना यात्रा का अंतिम पड़ाव नहीं है। विद्यार्थी अपने idea को लगातार refine करके, feedback लेकर और उसकी real-world applicability को समझकर उसे आगे product, scalable solution अथवा startup में बदलने की दिशा में बढ़ सकते हैं।

🌟 School Education Uttarakhand एवं SCERT की ओर से शुभकामना संदेश

बंदना गर्गयाल
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड

“Mayank और Team Champians का National Top-12 में चयन उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा के लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। विद्यालय स्तर पर विकसित innovation का national startup platform तक पहुँचना हमारे विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता और संभावनाओं को दर्शाता है। Mayank अभी अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर रहे हैं और इतनी कम उम्र में innovation एवं entrepreneurship की दिशा में प्राप्त यह अनुभव उनके भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्हें Startupthon Grand Finale एवं भावी entrepreneurial journey के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।”

पदमेंद्र सकलानी
अपर निदेशक, SCERT Uttarakhand

“Innovate Uttarakhand का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अपने ideas प्रस्तुत करने का मंच देना नहीं, बल्कि उनमें समस्या-समाधान, नवाचार और भविष्य के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना भी है। Hackathon 2.0 के विजेता Mayank का अपने prototype के साथ राष्ट्रीय स्तर के Startupthon Grand Finale तक पहुँचना इस पहल का उत्साहजनक परिणाम है। SCERT Uttarakhand उनकी इस उपलब्धि पर बधाई देता है तथा भविष्य में उनके innovation को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक अकादमिक मार्गदर्शन एवं यथासंभव सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर रहेगा।”

रमेश प्रसाद बडोनी
Hackathon Coordinator एवं प्रवक्ता, IT विभाग, SCERT Uttarakhand

“Mayank की यात्रा हमारे लिए विशेष है क्योंकि हमने एक विद्यार्थी के idea को Hackathon में आते, विकसित होते, विजेता बनते और अब Startup की दिशा में आगे बढ़ते देखा है। यही Innovate Uttarakhand की मूल परिकल्पना है—स्कूल के विद्यार्थियों को innovators, problem-solvers और future entrepreneurs बनने का अवसर देना। Mayank की उपलब्धि Hackathon 3.0 के प्रतिभागियों के लिए भी प्रेरक उदाहरण बनेगी। हमारी शुभकामना है कि वे अपने prototype को आगे एक सफल एवं उपयोगी startup में परिवर्तित करें तथा उत्तराखण्ड का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय innovation platforms पर आगे बढ़ाएँ।”

🤝 School Education Uttarakhand का सहयोग रहेगा जारी

School Education Uttarakhand एवं SCERT Uttarakhand परिवार Mayank और Team Champians को UptoSkills Startupthon Grand Finale के National Top-12 में चयनित होने पर हार्दिक बधाई देता है।

SCERT Uttarakhand उनके innovation और Hackathon 2.0 से आगे बढ़ी entrepreneurial journey की सराहना करते हुए भविष्य में उनके innovation को आगे विकसित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, academic mentoring एवं यथासंभव संस्थागत सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर रहेगा।

“स्कूल में जन्मा एक विचार,
सही अवसर और निरंतर प्रयास से Startup में बदल सकता है।”
Hackathon से Startup तक,
Student से Innovator तक,
और Innovator से Entrepreneur तक—

Mayank की यह यात्रा उत्तराखण्ड की स्कूली शिक्षा में Innovation एवं Entrepreneurship के लिए एक नई राह प्रशस्त करे।

🎉 Congratulations Mayank & Team Champians! 🎉

From Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 to the National Startup Stage
A Proud Success Story of School Education Uttarakhand
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