SCERT उत्तराखण्ड | शिक्षक क्षमता संवर्धन | व्यावसायिक शिक्षा
मध्य स्तर (Middle Stage) पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ
NEP-2020 और NCF-SE 2023 के अनुरूप कौशल, कार्यानुभव, स्थानीय व्यवसाय और करियर मार्गदर्शन को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
देहरादून, 21 सितम्बर 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 (NCF-SE 2023) के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु “Capacity Building of Teachers for Implementation of Vocational Education at the Middle Stage as per NEP-2020 and NCF-SE 2023” विषयक पाँच दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
कार्यशाला की अध्यक्षता निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल द्वारा की गई। राज्य के विभिन्न जनपदों से चयनित 35 शिक्षक इस कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यशाला की रूपरेखा और विशेषज्ञ मार्गदर्शन
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम समन्वयक सुनील भट्ट ने कार्यशाला की रूपरेखा एवं उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
उन्होंने मुख्य संदर्भदाता विशेषज्ञों पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), NCERT, भोपाल के प्रोफेसर डॉ. आशीष सोनी तथा प्रोफेसर डॉ. रवि आहूजा का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए व्यावसायिक शिक्षा एवं शिक्षक क्षमता संवर्धन के क्षेत्र में उनके अनुभव और योगदान से प्रतिभागियों को परिचित कराया।
ज्ञान के साथ कौशल और कार्यानुभव पर विशेष बल
अपने अध्यक्षीय संबोधन में निदेशक बंदना गर्ब्याल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने विद्यालयी शिक्षा में ज्ञान के साथ-साथ कौशल, कार्यानुभव तथा व्यावसायिक दक्षताओं को विशेष महत्व दिया है। इस मौके पर उद्यम लर्निंग फाउंडेशन से रोहित गुप्ता एवं अरविंद बिष्ट भी अपना विशेष योगदान दे रहे हैं
उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों से पाँच दिवसीय कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता करते हुए प्राप्त अनुभवों और सीख को विद्यालय स्तर तक प्रभावी रूप से पहुँचाने का आह्वान किया तथा कार्यशाला के सफल संचालन के लिए सभी को शुभकामनाएँ दीं।
प्रोफेसर आशीष सोनी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उनमें उद्यमिता और रोजगारपरक शिक्षा , निहित कौशल को पहचानने, विकसित करने तथा उसे जीवन और कार्य-जगत से जोड़ने के अवसर उपलब्ध कराना भी है।
उद्घाटन सत्र में उपनिदेशक विनोद सिंह मटूड़ा तथा सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।
वक्ताओं ने व्यावसायिक शिक्षा को विद्यार्थियों के जीवन, स्थानीय परिवेश, कार्य-जगत तथा भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
“एक ऐसा कौशल, जिस पर मुझे गर्व है” — परिचय का अभिनव तरीका
उद्घाटन सत्र का एक विशेष आकर्षण प्रतिभागियों का परिचय रहा। शिक्षकों ने पारंपरिक परिचय के स्थान पर अपने परिचय के साथ “एक ऐसा कौशल, जिस पर मुझे गर्व है” साझा किया।
किसी ने संवाद कौशल, किसी ने रचनात्मकता, कला, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व, समस्या-समाधान अथवा अन्य जीवनोपयोगी कौशल को अपनी विशेषता के रूप में प्रस्तुत किया।
इस गतिविधि ने कार्यशाला के प्रारंभ से ही एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई विशिष्ट कौशल निहित होता है और शिक्षा का दायित्व उस कौशल को पहचानने, विकसित करने तथा उसके लिए सार्थक अवसर प्रदान करने का है।
पाँच दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 के आलोक में व्यावसायिक शिक्षा की अवधारणा, कौशल बोध, मध्य स्तर पर विद्यालयी क्रियान्वयन, गतिविधि एवं अनुभव आधारित शिक्षण, बैगलेस दिवस, स्थानीय कौशल एवं व्यवसायों से विद्यार्थियों के जुड़ाव तथा करियर मार्गदर्शन जैसे विषयों पर विस्तार से कार्य किया जाएगा।
कार्यशाला में व्यावसायिक शिक्षा को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को स्थानीय व्यवसायों, पारंपरिक कौशलों और वास्तविक कार्य-अनुभव से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।
स्थानीय कौशल, उद्यमिता और रोजगारपरक शिक्षा
कार्यशाला की विशेषता यह है कि व्यावसायिक शिक्षा को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को स्थानीय व्यवसायों एवं कौशलों से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अंतर्गत स्थानीय व्यावसायिक संदर्भ व्यक्तियों एवं कारीगरों के माध्यम से स्थानीय व्यवसायों और पारंपरिक कौशलों की जानकारी एवं प्रदर्शन कराया जाएगा।
रिंगाल/बाँस आधारित हस्तशिल्प जैसे स्थानीय कौशलों के माध्यम से शिक्षक यह समझेंगे कि विद्यालयी शिक्षा को स्थानीय ज्ञान, कार्य-अनुभव, उद्यमिता और रोजगारपरक कौशलों से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है।
संदर्भ शिक्षक एवं संसाधन व्यक्ति के रूप में तैयार होंगे प्रतिभागी
कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को केवल व्यावसायिक शिक्षा की अवधारणा से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे संदर्भ शिक्षक/संसाधन व्यक्ति के रूप में तैयार करना है जो अपने विद्यालयों एवं जनपदों में व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
यह प्रशिक्षण मध्य स्तर के विद्यार्थियों को कौशल, स्थानीय ज्ञान, कार्यानुभव, उद्यमिता और भविष्य की करियर संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में शिक्षकों की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
