Friday, July 31, 2026

विद्वान शिक्षाविद् डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी को सेवनिवृति पर भावभीनी विदाई : यादों से नम हुईं आंखें, योगदान को किया गया नमन

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड के वरिष्ठतम् प्रवक्ता एवं प्रतिष्ठित शिक्षाविद् डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी के सेवानिवृत्त होने पर संस्थान के सभागार में एक गरिमामय एवं भावनात्मक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह अवसर केवल एक अधिकारी की सेवा निवृत्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण तीन दशक से अधिक की प्रेरणादायी यात्रा को सम्मानपूर्वक स्मरण करने का अवसर था।

सभागार में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति की आँखें उस समय नम हो उठीं जब डॉ. रतूड़ी के साथ बिताए गए वर्षों की स्मृतियाँ एक-एक कर मंच से साझा की गईं। पूरा वातावरण सम्मान, आत्मीयता और भावनाओं से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

कार्यक्रम में निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी, उपनिदेशक विनोद  मतूड़ा, सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण सहित संस्थान के अनेक अधिकारी, संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन  सुनील भट्ट ने किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रिया  गुसाईं द्वारा एवं मनमोहक नृत्य प्रस्तुति से हुआ, जिसके माध्यम से डॉ. रतूड़ी एवं उनके परिवार का अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर डॉ. रतूड़ी की आदरणीय सासू माँ का पुष्पगुच्छ से स्वागत निदेशक बंदना गर्ब्याल ने किया, जिसने पूरे समारोह को पारिवारिक आत्मीयता का स्वरूप प्रदान किया।

समारोह का विशेष आकर्षण SCERT के आईटी विभाग द्वारा तैयार की गई डॉ. दिनेश रतूड़ी के जीवन, सेवाओं एवं शैक्षिक योगदान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री रही।


डॉक्यूमेंट्री में उनके प्रारम्भिक शिक्षकीय जीवन से लेकर SCERT उत्तराखण्ड में किए गए महत्वपूर्ण नवाचारों, शोध कार्यों, पाठ्यपुस्तक विकास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, मूल्यांकन सुधार, PARAKH, NAS, समग्र शिक्षा, कौशलम, स्कूल हेल्थ एवं वेलबीइंग, प्रश्न बैंक विकास, शोध अध्ययनों तथा राज्य के शैक्षिक सुधारों में निभाई गई उनकी अग्रणी भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

एक शिक्षाविद् जिनका सम्पूर्ण जीवन शिक्षा को समर्पित रहा

डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी का जन्म 4 जुलाई को हुआ। उन्होंने एम.एससी. (जूलॉजी), एम.एड. एवं डी.फिल. (शिक्षा) जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएँ प्राप्त कीं। वर्ष 1995 में उन्होंने राजकीय सेवा में जीव विज्ञान प्रवक्ता के रूप में कार्य प्रारम्भ किया तथा बाद में DIET, SIEMAT एवं अंततः SCERT उत्तराखण्ड में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।

लगभग तीन दशकों के अपने सेवाकाल में उन्होंने शिक्षा विभाग में प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या विकास, शोध, मूल्यांकन, विज्ञान शिक्षा, शिक्षक क्षमता निर्माण और शैक्षिक नवाचारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।

डॉ. रतूड़ी ने अपने कार्यकाल के दौरान अनेक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की पहलों का नेतृत्व किया। इनमें प्रमुख रूप से—

  •     क्षमता आधारित (Competency Based) प्रश्नों का विकास
  •     Learning Outcomes आधारित शिक्षक डायरी का निर्माण
  •     NMMSS एवं विभिन्न राज्य स्तरीय परीक्षाओं के प्रश्नपत्र निर्माण
  •     PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण का क्रियान्वयन
  •     NAS आधारित अध्ययन एवं डिपस्टिक रिसर्च
  •     स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम का प्रभाव अध्ययन
  •     एक्शन रिसर्च का संचालन
  •     शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल का विकास
  •     समग्र शिक्षा के अंतर्गत विज्ञान एवं कौशलम कार्यक्रमों में KRP के रूप में योगदान
  •     स्कूल हेल्थ एवं वेलबीइंग कार्यक्रम
  •     बाल वाटिका प्रशिक्षण
  •     भाषा, विज्ञान, आपदा प्रबंधन, रोड सेफ्टी एवं गतिविधि पुस्तकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका
  •     पाठ्यपुस्तकों के संपादन, प्रूफ रीडिंग एवं संशोधन
  •     राज्य भर के शिक्षकों, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षा अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण साहित्य का निर्माण

उन्होंने SCERT में शोध, सर्वेक्षण, मूल्यांकन, पाठ्यचर्या विकास तथा प्रशिक्षण की अनेक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक दिशा प्रदान की।

    


कार्यक्रम में साधना डिमरी, भुवनेश पंत, रमेश बडोनी, विनय थपलियाल, मनोज बहुगुणा, डॉ. मनोज शुक्ला, डॉ. आलोक प्रभा सहित अनेक प्रवक्ताओं एवं अधिकारियों ने डॉ. रतूड़ी के साथ कार्य करने के अनुभव साझा किए। कई वक्ता अपने संस्मरण सुनाते हुए भावुक भी हो उठे।
सभी वक्ताओं ने कहा कि—

"डॉ. रतूड़ी केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक रहे जिन्होंने सदैव शांत स्वभाव, विनम्र व्यवहार, गहन अध्ययन और सकारात्मक सोच से पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया।"

निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल ने कहा कि डॉ. दिनेश रतूड़ी ने SCERT की शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका अनुशासन, शोधपरक दृष्टिकोण और संस्थान के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेगा। उन्होंने उनके स्वस्थ, सक्रिय एवं सुखद जीवन की कामना करते हुए कहा कि संस्थान सदैव उनके अनुभवों से मार्गदर्शन प्राप्त करता रहेगा और मुझे आशा है आप हमसे जुड़े रहेंगे । इस  अवसर पर निदेशक ने उन्हे एक विशेष पुस्तक भी उपहार स्वरूप भेंट की । 

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी उन्होंने कहा कि डॉ. रतूड़ी ने प्रत्येक कार्य को अत्यंत गंभीरता, ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ पूरा किया। शिक्षा के प्रति उनका समर्पण, सरल व्यक्तित्व और सहयोगी स्वभाव उन्हें सदैव विशिष्ट संस्थान बनाता है। पूर्व अपर निदेशक प्रदीप रावत ने दोनों भाइयों की तारीफ करते हुए उन्हे जीवन के इस क्षण को बेहतर बतया ।

उपनिदेशक विनोद मतूड़ा कहा कि डॉ. रतूड़ी का प्रशासनिक अनुभव, शैक्षणिक दृष्टि तथा संस्थागत विकास में योगदान आने वाले अधिकारियों के लिए अनुकरणीय रहेगा। उनकी कार्यशैली सदैव प्रेरणा देती रहेगी और इस अवसर पर उन्हे एक पुस्तक भी भेंट की। सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण ने अपने पुराने साथी को याद करते हुए डॉ. बिजलवाण ने कहा कि उनके साथ बिताया गया समय जीवन की अमूल्य धरोहर है। अनेक परियोजनाओं में साथ कार्य करते हुए उन्होंने डॉ. रतूड़ी की कार्यनिष्ठा, सकारात्मक सोच एवं टीम भावना को निकट से देखा है। उन्होंने कहा कि उनके जैसे सहयोगी विरले ही मिलते हैं।

समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया जब डॉ. रतूड़ी के छोटे भाई प्रवक्ता दीपक रतूड़ी ने अपने बचपन की स्मृतियाँ साझा करते हुए कहा—

"मेरे लिए बड़े भाई नहीं, बल्कि पिता समान रहे हैं। उन्होंने सदैव पूरे परिवार का मार्गदर्शन किया और अपने जीवन से आदर्श स्थापित किए।"


डॉ. रतूड़ी की धर्मपत्नी, पुत्री एवं बहु ने भी उनके संघर्ष, समर्पण और संस्थान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए गर्व व्यक्त किया।

विदेश एवं अन्य स्थानों पर रह रहे परिवारजनों के वीडियो संदेश भी सभागार में प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखकर पूरा वातावरण भावुक हो उठा।

विनम्रता ही रही सबसे बड़ी पहचान

डॉ. रतूड़ी का व्यक्तित्व सदैव सादगी, विनम्रता और कर्मप्रधान सोच का प्रतीक रहा। वे स्वयं अपने कार्यों का प्रचार करने के बजाय उन्हें अपनी जिम्मेदारी मानते रहे। यही कारण है कि सहकर्मी उन्हें एक श्रेष्ठ शिक्षक, शोधकर्ता, प्रशिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं।

प्रेरणा

डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी की सेवा यात्रा यह संदेश देती है कि शिक्षा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और व्यवहार से हजारों शिक्षकों, अधिकारियों और विद्यार्थियों के जीवन को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से प्रभावित किया।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी एवं निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल  एवं SCERT उत्तराखण्ड परिवार उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कृतज्ञ है तथा उनके स्वस्थ, सुखद एवं सक्रिय जीवन की मंगलकामना करता है।

डॉ दिनेश रतूडी के शब्दों के संयोजन मे भी करुणा ऐसा कहते है सौरभ जोशी आई टी विभाग - 

Thursday, July 30, 2026

Education Minister of Uttarakhand Honored Director Academic Bandana Garbyal on the Global Achievement at Geneva Event AI for Education Awards-2026

 

A proud moment for Uttarakhand as the state's pioneering work in AI-enabled teacher training received international recognition at the AI for Education Awards 2026.
During a special ceremony, Hon'ble Education Minister Dr Dhan Singh Rawat felicitated the team for achieving Global Finalist status in the prestigious Teacher Training Award category at the AI for Education Awards 2026, organised at Geneva.
The recognition celebrates the innovative project "Building Future-Ready Teachers through AI and ICT-Enabled MOOCs", developed under the guidance of SCERT Uttarakhand, which has empowered thousands of teachers through AI-driven professional development and digital capacity building.
The honour was received by:
Bandana Garbyal, Director of Academic, SCERT Uttarakhand
Speaking on the occasion, the Hon'ble Education Minister appreciated the efforts of the SCERT team in bringing global recognition to the state and emphasised the importance of integrating Artificial Intelligence and digital innovation into teacher education to prepare educators for the future.
This international achievement reflects Uttarakhand's commitment to quality education, technological innovation, and the vision of creating future-ready teachers aligned with the goals of NEP 2020.
Congratulations to the entire SCERT Uttarakhand family and all the teachers whose dedication made this global recognition possible.
IREX, UNESCO, United Nations, UNICEF, AI for Good, National Council of Educational Research and Training NCTE_Official, Ministry of Education, Government of India, New Delhi
#AIForEducation #AIAwards2026 #SCERTUttarakhand #TeacherTraining #FutureReadyTeachers #ArtificialIntelligence #EducationInnovation #DigitalEducation #NEP2020 #GlobalFinalist #Uttarakhand #TeacherProfessionalDevelopment #AIinEducation

Wednesday, July 29, 2026

उत्तराखंड SCERT में शिक्षक नेतृत्व शपथ समारोह , NEP वर्षगांठ और यूनेस्को वैश्विक उपलब्धियों का ऐतिहासिक संगम

 

राज्य शिक्षक संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न

NEP-2020 की छठी वर्षगांठ, शिक्षक हितों पर मंथन और AI for Education Global Finalist SCERT का हुआ भव्य सम्मान

"शिक्षक केवल शिक्षा का आधार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं।"

देहरादून स्थित उत्तराखंड राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के भव्य ऑडिटोरियम में आज शिक्षा, नेतृत्व और नवाचार का एक ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। अवसर था उत्तराखंड राज्य शिक्षक संघ की नवनिर्वाचित प्रांतीय कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह का, जिसमें प्रदेशभर से आए शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अध्यक्ष, महामंत्री, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष सहित सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाते हुए शिक्षक समाज को नई ऊर्जा एवं नई दिशा प्रदान करने का आह्वान किया।

शिक्षक हितों की बुलंद आवाज

शपथ ग्रहण के पश्चात नवनिर्वाचित अध्यक्ष  रविन्द्र सिंह राणा एवं महामंत्री डॉ. अंकित जोशी ने शिक्षक समुदाय की ओर से अनेक महत्वपूर्ण विषय शिक्षा मंत्री के समक्ष रखे।

मुख्य मांगों में शामिल रहे—

  • समयबद्ध पदोन्नति
  • पारदर्शी स्थानांतरण नीति
  • चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान
  • सेवा संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान
  • शिक्षकों के कार्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन

अपने संबोधन में अध्यक्ष ने कहा कि—

"यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है तो शिक्षकों का मनोबल भी उतना ही मजबूत होना चाहिए। नवाचार के साथ-साथ समय पर पदोन्नति भी आवश्यक है।"

उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में अनेक शिक्षक 30 से 35 वर्षों से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत हैं, जो चिंता का विषय है।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का आश्वासन

शिक्षा मंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षक समाज की समस्याओं से सरकार पूर्णतः परिचित है।

उन्होंने बताया कि—

  • कई विषय न्यायालयों एवं वैधानिक प्रक्रियाओं के कारण वर्षों तक लंबित रहे।
  • अब परिस्थितियाँ अनुकूल हो रही हैं।
  • सरकार शिक्षकों के हित में ठोस निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।

सबसे महत्वपूर्ण घोषणा- तीन हजार से अधिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शीघ्र प्रारम्भ की जाएगी।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार संतुष्ट एवं प्रेरित शिक्षक हैं और सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है।

NEP-2020 की छठी वर्षगांठ पर विशेष प्रस्तुति

गुरु पूर्णिमा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की छठी वर्षगांठ के अवसर पर शिक्षा मंत्री ने सभी गुरुजनों को नमन करते हुए राज्य में NEP के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की।

अकादमिक निदेशक बंदना गर्ब्याल के निर्देशन में एन ई पी के समन्वयक 

  • मनोज बहुगुणा
  • रवि दर्शन तोपवाल

द्वारा उत्तराखंड में NEP के अंतर्गत प्राप्त उपलब्धियों, नौ प्रमुख परिवर्तनों तथा राज्य में पूर्ण किए गए विभिन्न कार्यों पर प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण दिया गया।

लगभग 200 से अधिक शिक्षक, शिक्षिकाएँ, प्रशिक्षक एवं SCERT प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़े प्रतिभागियों ने इस प्रस्तुति की सराहना की।

विश्व मंच पर SCERT उत्तराखंड की शानदार उपलब्धि


कार्यक्रम का सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब आया जब हाल ही में UNESCO एवं AI for Education Global Competition (Geneva) में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए SCERT उत्तराखंड को सम्मानित किया गया।

विश्वभर से प्राप्त लगभग 38,000 परियोजनाओं के बीच SCERT उत्तराखंड की परियोजना

"Building Future-Ready Teachers through AI and ICT Enabled MOOCs"

Top-6 Global Finalists में चयनित हुई।

यह उपलब्धि केवल SCERT की नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड एवं भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए गर्व का विषय है।

अकादमिक निदेशक एवं कोर्स समन्वयक का सम्मान

इस अवसर पर अकादमिक निदेशक वंदना गर्ब्याल एवं  कोर्स समन्वयक रमेश बडोनी को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।  पूरा सभागार तालियों की गूंज से गूँज उठा तथा सभी ने SCERT उत्तराखंड एवं विद्यालयी शिक्षा परिवार को इस वैश्विक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई दी।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान

अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार शिक्षा में ऐतिहासिक परिवर्तन ला रही है।

उन्होंने निर्देश दिए कि—

  •  शिक्षा विज़न डॉक्यूमेंट
  • विद्यालय क्लस्टर
  • सोशल मीडिया
  •  पोस्टर एवं होर्डिंग

के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों एवं सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता को प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाया जाए।

उन्होंने कहा—

"सरकारी विद्यालयों में अब लगभग सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। हमारा लक्ष्य है कि अधिक से अधिक अभिभावक सरकारी विद्यालयों पर विश्वास करें और अपने बच्चों को वहीं शिक्षा दिलाएँ।"

उन्होंने यह भी बताया कि  उत्तराखंड अब देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन चुका है।

बंदना गर्ब्याल का संदेश

अकादमिक निदेशक बंदना गर्ब्याल ने सभी शिक्षकों एवं प्रशिक्षकों से आग्रह किया कि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक एवं मानवीय मूल्यों को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करें।

उन्होंने कहा— 

"आज का विद्यार्थी केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की दुनिया के लिए तैयार किया जाना चाहिए।"

कार्यक्रम के अंत में

माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद प्रसाद सेमल्टी ने शिक्षा मंत्री, शिक्षक संघ, विभागीय अधिकारियों एवं उपस्थित सभी शिक्षकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर

  • अपर निदेशक (प्राथमिक) के. एस. रावत , अपर निदेशक SCERT पदमेंद्र सकलानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी , SCERT के संकाय सदस्य , प्रदेशभर से आए शिक्षक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

यह कार्यक्रम केवल शपथ ग्रहण समारोह नहीं था, बल्कि—

  • शिक्षक सम्मान
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
  • डिजिटल नवाचार
  • वैश्विक पहचान और उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था के उज्ज्वल भविष्य का उत्सव भी था।

Tuesday, July 28, 2026

NEP 2020 : 5th Year Celebration at SCERT Uttarakhand

Implementation of NEP 2020 in Uttarakhand
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समावेशी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल: साइन एवीआई–मायरा केयर और एससीईआरटी उत्तराखण्ड के बीच सहयोग

 


समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को नई दिशा देने की दिशा में साइन एवीआई (Shine AV) एवं मायरा केयर की संस्थापक अनीता शर्मा ने  निदेशक अकादमिक वंदना गर्ब्याल से शिष्टाचार भेंट कर हाल ही में आयोजित "National Seminar on Inclusive Education" की विस्तृत रिपोर्ट एवं आकर्षक फोटो कोलाज प्रस्तुत किया। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी एससीईआरटी उत्तराखण्ड और Shine AV के संयुक्त सहयोग से आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेश भर से 200 से अधिक शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की।

इस अवसर पर अनीता शर्मा ने बताया कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को समावेशी शिक्षा, विशेष रूप से ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में वर्णित विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें व्यवहारिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित करना था। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता का सबसे बड़ा कारण शिक्षकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता और बच्चों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता रही।

अनीता शर्मा ने यह भी साझा किया कि संगोष्ठी के दौरान मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड पुष्कर सिंह धामी  ने Shine AV द्वारा विकसित नवाचारों, उनके कक्षाओं में संचालित विशेष पाठ्यक्रमों तथा ऑटिज्म से जुड़े बच्चों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। साथ ही उन्होंने इस प्रकार के प्रभावी मॉडल को भविष्य में प्रदेश स्तर पर लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

अनीता शर्मा लगभग तीन दशक तक अमेरिका के न्यू जर्सी में ऑटिज्म के क्षेत्र में कार्य करने के बाद अब अपनी मातृभूमि उत्तराखण्ड लौटकर समाज सेवा का संकल्प लेकर आई हैं। उनका उद्देश्य केवल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सम्मानजनक जीवन जीने के योग्य बनाना है। वर्तमान में उनके मायरा केयर एवं Shine AV सेंटर में लगभग 50 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं, जहाँ उन्हें केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि Self-Regulation, Independent Living Skills, Communication Skills तथा जीवनोपयोगी व्यवहारिक दक्षताओं का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

उनकी प्रेरणा का सबसे भावनात्मक पक्ष यह है कि उनके स्वयं के दोनों बच्चे ऑटिज्म से प्रभावित होने के बावजूद आज आत्मनिर्भर हैं, अपना व्यवसाय और कार्य सफलतापूर्वक कर रहे हैं। अपने व्यक्तिगत अनुभवों को उन्होंने हजारों परिवारों की आशा में बदल दिया है। यही अनुभव और संवेदनशीलता आज उन्हें भारत में समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरक व्यक्तित्व बनाती है।

बैठक के दौरान निदेशक अकादमिक वंदना गर्ब्याल ने अनीता शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए आश्वासन दिया कि आने वाले समय में एससीईआरटी उत्तराखण्ड और Shine AV के बीच सहयोग को और सुदृढ़ किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल, समावेशी शिक्षा आधारित पाठ्यक्रम, तथा उत्तराखण्ड की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन शैक्षणिक सामग्री विकसित करने पर संयुक्त रूप से कार्य करने की सहमति व्यक्त की।

इस अवसर पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के अमरीश बिष्ट भी उपस्थित रहे। उन्होंने अनीता शर्मा के कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास दिलाया कि फाउंडेशन भविष्य में उनके प्रयासों से जुड़ेगा तथा विभिन्न संस्थाओं के समक्ष इस प्रकार की पहलों को सहयोग एवं अनुदान (Grant Support) उपलब्ध कराने की अनुशंसा करेगा, ताकि यह मॉडल केवल उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत में समावेशी शिक्षा के लिए एक प्रभावी उदाहरण बन सके।

विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव, IAS ने SCERT उत्तराखण्ड की गतिविधियों की समीक्षा कर गुणवत्ता शिक्षा पर दिया विशेष बल

 

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग की सचिव  ज्योति यादव, IAS ने आज समग्र शिक्षा सभागार में SCERT उत्तराखण्ड के विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों, वार्षिक कार्य योजना एवं बजट (AWP&B) तथा विभिन्न विभागों में संचालित गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में निदेशक अकादमिक वंदना गर्ब्याल सहित SCERT के वरिष्ठ अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के प्रारम्भ में निदेशक अकादमिक वंदना गर्ब्याल ने शिक्षा सचिव का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में SCERT उत्तराखण्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल नवाचार तथा स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित शैक्षिक सुधारों को प्राथमिकता देते हुए अनेक महत्वपूर्ण पहलें की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा सचिव के मार्गदर्शन में इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

इसके उपरांत शिक्षा सचिव  ज्योति यादव ने SCERT की समग्र गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देने के लिए  सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण से कहा। डॉ. बिजलवाण ने SCERT की वर्तमान प्रशासनिक संरचना, रिक्त पदों की स्थिति, विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षक शिक्षा, शोध, नवाचार, गुणवत्ता संवर्धन तथा राज्य में शिक्षा सुधारों के लिए चल रही पहलों पर प्रकाश डाला।

बैठक के दौरान SCERT के छहों विभागों द्वारा क्रमवार अपनी उपलब्धियाँ एवं आगामी कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत की गईं। पाठ्यक्रम विभाग ने NCERT पाठ्यपुस्तकों में 30 प्रतिशत स्थानीय संदर्भ (Local Context) को समाहित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी, जिससे विद्यार्थियों को अपने स्थानीय परिवेश, संस्कृति और ज्ञान परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

आईटी विभाग की ओर से आईटी प्रवक्ता रमेश प्रसाद बडोनी ने राज्य में विकसित एवं संचालित ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों (MOOCs) तथा डिजिटल शिक्षण पहलों की उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हजारों शिक्षकों तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सामग्री पहुँचाई जा रही है तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग से शिक्षक क्षमता निर्माण को नई दिशा मिली है।

इसी क्रम में कौशलम कार्यक्रम पर सुनील भट्ट ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों, उपलब्धियों तथा भविष्य की कार्ययोजना से शिक्षा सचिव को अवगत कराया। इसके अतिरिक्त शिक्षक शिक्षा, अनुसंधान, मूल्यांकन, छात्रवृत्ति, कार्यक्रम अनुश्रवण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न विभागों ने भी अपने-अपने कार्यों की प्रगति प्रस्तुत की।

समीक्षा बैठक में डॉ. हरीश बडोनी, राकेश रावत, डॉ. दीपक प्रताप, प्रिया गोसाईं, डॉ. राकेश गैरोला, रवि दर्शन तोपाल, मनोज बहुगुणा सहित SCERT के अनेक अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के समापन पर विद्यालय शिक्षा सचिव ज्योति यादव, ने सभी विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, समयबद्धता, नवाचार और परिणाम आधारित कार्य संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए SCERT की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और भविष्य में ऐसे प्रयास दिखाई देने चाहिए जो राज्य के प्रत्येक विद्यार्थी और शिक्षक तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ पहुँचाएँ।

उन्होंने सभी अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों का आह्वान किया कि वे नवाचार, डिजिटल तकनीक, शोध एवं स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित शैक्षिक सुधारों को और अधिक गति दें, ताकि उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सके।

Monday, July 27, 2026

कौशलम् कार्यक्रम: उत्तराखंड के विद्यालयों में उद्यमशील सोच और 21वीं सदी के कौशल

 

शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को परीक्षाओं के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना भी है। इसी सोच को साकार करने की दिशा में कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखंड के विद्यालयों में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य विद्यार्थियों में उद्यमशील मानसिकता (Entrepreneurial Mindset) विकसित करना तथा उन्हें 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से सशक्त बनाना है।

राज्य स्तर पर विशेष रिसोर्स ग्रुप (State Resource Group) की तीन दिवसीय कार्यशाला के सफल आयोजन के बाद अब कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण चरण प्रारंभ हो चुका है। इसी क्रम में एससीईआरटी, उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के 50 से अधिक शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण आगे चलकर प्रदेश के विद्यालयों में कौशलम् कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की मजबूत आधारशिला बनेगा।

शिक्षक बनेंगे परिवर्तन के वाहक

किसी भी शैक्षिक परिवर्तन की सफलता उसके शिक्षकों पर निर्भर करती है। यही कारण है कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को केवल कार्यक्रम की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे संदर्भदाता (Master Trainer) के रूप में तैयार करना है जो अपने-अपने जनपदों और विद्यालयों में अन्य शिक्षकों का मार्गदर्शन कर सकें।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कौशलम् कार्यक्रम की अवधारणा, उद्देश्य, शिक्षण-पद्धति, गतिविधि-आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम तथा विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण की पूरी रूपरेखा सहभागितापूर्ण और व्यवहारिक अनुभवों पर आधारित है, जिससे शिक्षक स्वयं सीखते हुए दूसरों को सीखाने के लिए सक्षम बन सकें।

केवल नौकरी नहीं, अवसरों का निर्माण करने की सोच

कौशलम् कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह विद्यार्थियों को केवल Job Seeker बनने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें Job Giver बनने की दिशा में प्रेरित करता है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में समस्या-समाधान, नवाचार, नेतृत्व, सहयोग, संचार कौशल, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित करने पर विशेष बल दिया जाता है।

आज के बदलते वैश्विक परिवेश में ये कौशल न केवल रोजगार के लिए आवश्यक हैं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की आधारशिला भी हैं।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल ने कौशलम् कार्यक्रम की आवश्यकता और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना भी है।

सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण ने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभवों और नवीन शिक्षण पद्धतियों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करें, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी अपने भीतर छिपी क्षमताओं को पहचान सके और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सके।

"करके सीखना" ही सफलता की कुंजी

कार्यक्रम में अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने गतिविधि-आधारित शिक्षण और Learning by Doing (करके सीखना) की अवधारणा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी स्वयं गतिविधियों में भाग लेते हैं, समस्याओं का समाधान खोजते हैं और अपने अनुभवों से सीखते हैं, तभी वास्तविक अधिगम संभव होता है।

कौशलम् कार्यक्रम इसी अनुभवात्मक शिक्षण दृष्टिकोण को विद्यालयों तक पहुँचाने का प्रयास है।

गढ़वाल मंडल के इस प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद अगले चरण में कुमाऊँ मंडल के मास्टर ट्रेनरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, दिनेशपुर में आयोजित किया जाएगा। इस प्रकार कौशलम् कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तराखंड में विस्तारित किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक विद्यालय तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम का समन्वयन राज्य कौशलम समन्वयक सुनील भट्ट द्वारा किया गया। प्रथम सत्र में उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यक्रम की पृष्ठभूमि, उद्देश्यों, प्रशिक्षण की रूपरेखा तथा आगामी कार्ययोजना से विस्तारपूर्वक परिचित कराया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण केवल तीन दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कौशल आधारित, अनुभवात्मक और नवाचार-प्रधान शिक्षण की दिशा में कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ऐसी शैक्षिक संस्कृति विकसित करने का प्रयास है जहाँ विद्यार्थी जिज्ञासु हों, समस्याओं का समाधान खोजने वाले हों, नवाचार करें और आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य का निर्माण करें।

इस प्रशिक्षण में सन्दर्भदाता के रूप में मैकगिल विश्वविद्यालय कनाडा से आसिया और उद्यम लर्निंग फाउंडेशन से अरविन्द बिष्ट, प्रियंका, ममता खत्री, यामिनी, दिवाकर, कुणाल, लक्ष्य और  एस. सी. ई. आर. टी उत्तराखंड से डॉ. दिनेश रतूड़ी, शुभ्रा सिंघल, डॉ. मनोज कुमार शुक्ला और गोपाल घुघत्याल सन्दर्भदाता के रूप में सेवा दे रहे हैं।