अकादमिक संस्थानों को स्थायी विशेषज्ञता, शोध और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत
देहरादून। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में शिक्षकों एवं अकादमिक पदों के लिए अलग-अलग कैडर बनाने की दिशा में प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव की ओर संकेत करता है। समाचार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार SCERT निदेशालय द्वारा इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और संबंधित नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
यह विषय केवल शिक्षकों की तैनाती या प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। मूल प्रश्न यह है कि SCERT और DIET जैसे अकादमिक संस्थानों को भविष्य में किस स्वरूप में विकसित किया जाना चाहिए? यदि इन संस्थानों को शिक्षक-प्रशिक्षण, शैक्षिक अनुसंधान, पाठ्यचर्या विकास, डिजिटल शिक्षा, मूल्यांकन और नवाचार के उत्कृष्टता केंद्र बनाना है, तो इनके लिए विशेषज्ञ एवं स्थायी अकादमिक मानव संसाधन की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
वर्तमान व्यवस्था और बदलाव की आवश्यकता
प्रकाशित समाचार के अनुसार वर्तमान में SCERT और DIET में माध्यमिक शिक्षा विभाग से शिक्षकों की तैनाती की जाती रही है। अलग कैडर बनने पर SCERT और DIET के लिए स्वतंत्र रूप से पदों और नियुक्ति/तैनाती की व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।
विद्यालय में अध्यापन और SCERT/DIET में अकादमिक कार्य, दोनों शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं, लेकिन उनकी भूमिकाएँ और अपेक्षित दक्षताएँ अलग हैं।
एक विद्यालय शिक्षक का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों के शिक्षण-अधिगम से जुड़ा है, जबकि SCERT और DIET में कार्यरत अकादमिक कार्मिकों से शिक्षक-प्रशिक्षण, शोध, पाठ्यचर्या एवं शिक्षण सामग्री विकास, मूल्यांकन, नवाचार, फील्ड सपोर्ट और शैक्षिक योजनाओं के अकादमिक क्रियान्वयन जैसे कार्यों की अपेक्षा की जाती है।
इस दृष्टि से अलग अकादमिक कैडर की अवधारणा पर गंभीरता से विचार किया जाना समय की आवश्यकता कही जा सकती है।
SCERT और DIET की भूमिका अब पहले जैसी नहीं रही
आज शिक्षा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। NEP 2020, NCF-SE 2023, competency-based learning, डिजिटल शिक्षा, DIKSHA, MOOCs, AI-enabled education, blended learning, e-content development और data-based assessment जैसी व्यवस्थाओं ने SCERT और DIET की जिम्मेदारियों का विस्तार किया है।
अब इन संस्थानों को केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने वाले संस्थान के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इन्हें राज्य की Academic Think Tank और Professional Support System के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
इसके लिए ऐसे अकादमिक कार्मिक चाहिए जिन्हें शिक्षा के साथ-साथ—
Research, Teacher Education, Curriculum Development, Assessment, Educational Technology, ICT & AI, Inclusive Education, Vocational Education, Content Development तथा Data Analysis जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त हो।
अलग कैडर से क्या बदलाव संभव हैं?
अलग कैडर केवल प्रशासनिक विभाजन बनकर न रह जाए, बल्कि इसे Academic Professional Cadre के रूप में विकसित किया जाना अधिक उपयोगी होगा।
इससे किसी अधिकारी या शिक्षक को SCERT/DIET में नियुक्त करने से पहले उसकी शैक्षिक योग्यता, अनुभव, शोध क्षमता, प्रशिक्षण कौशल और विषयगत विशेषज्ञता को भूमिका के अनुरूप देखा जा सकेगा।
इस व्यवस्था से संस्थानों में लंबे समय तक काम करने वाले विशेषज्ञ विकसित हो सकते हैं। बार-बार तैनाती बदलने के कारण बनने वाली संस्थागत स्मृति की कमी भी कम हो सकती है।
उदाहरण के लिए यदि कोई संकाय सदस्य पाँच-दस वर्षों तक Assessment and Evaluation पर कार्य करता है, तो वह राज्य के लिए उस क्षेत्र का विशेषज्ञ बन सकता है। इसी प्रकार ICT, AI, Inclusive Education, Vocational Education, Curriculum Development और Research में विशेषज्ञ समूह तैयार किए जा सकते हैं।
केवल अलग कैडर बनाना पर्याप्त नहीं
यह सुधार तभी सार्थक होगा जब नई नियमावली केवल “कौन कहाँ तैनात होगा” तक सीमित न रहे।
कैडर के साथ स्पष्ट Job Profile और Competency Framework भी होना चाहिए। SCERT और DIET में प्रत्येक पद के लिए यह निर्धारित होना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति से कौन-से अकादमिक परिणाम अपेक्षित हैं।
उदाहरण के लिए अकादमिक संकाय के कार्यों में शोध-पत्र एवं एक्शन रिसर्च, प्रशिक्षण मॉड्यूल, डिजिटल कोर्स, शिक्षण सामग्री, फील्ड रिसर्च, विद्यालयों को अकादमिक सहयोग, नवाचारों का दस्तावेजीकरण तथा विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों का विश्लेषण शामिल किया जा सकता है।
साथ ही नियमित क्षमता संवर्धन और Performance Review की व्यवस्था भी आवश्यक होगी।
विद्यालय और अकादमिक संस्थानों के बीच दूरी न बढ़े
अलग कैडर बनाते समय एक महत्वपूर्ण सावधानी भी जरूरी है। SCERT और DIET का वास्तविक आधार विद्यालय और कक्षा ही हैं। यदि अकादमिक कैडर पूरी तरह प्रशासनिक ढाँचे में सीमित हो गया और उसका विद्यालयों से संपर्क कम हो गया, तो सुधार का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।
इसलिए व्यवस्था में School Attachment, Field Visits, Classroom Research और Teacher Interaction अनिवार्य घटक होने चाहिए।
SCERT और DIET के विशेषज्ञों को नियमित रूप से विद्यालयों में जाकर वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए, जबकि उत्कृष्ट विद्यालयी शिक्षकों को भी निश्चित अवधि के लिए अकादमिक परियोजनाओं, शोध और प्रशिक्षण में योगदान देने के अवसर मिलने चाहिए।
भर्ती और पदोन्नति में विशेषज्ञता को मिले महत्व
यदि स्वतंत्र कैडर विकसित किया जाता है, तो भर्ती एवं पदोन्नति में केवल वरिष्ठता के बजाय योग्यता और अकादमिक योगदान को भी महत्व देना उपयोगी होगा।
शोध, नवाचार, प्रशिक्षण अनुभव, डिजिटल दक्षता, विषय विशेषज्ञता, प्रकाशित कार्य, फील्ड अनुभव और शिक्षा में किए गए प्रभावी कार्य जैसे संकेतकों को पारदर्शी रूप से शामिल किया जा सकता है।
साथ ही विद्यालयी अनुभव को भी उचित महत्व मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षक-शिक्षा और पाठ्यचर्या निर्माण का वास्तविक आधार कक्षा का अनुभव है।
प्रशासनिक बदलाव से आगे बढ़कर अकादमिक सुधार
SCERT और DIET में अलग कैडर की पहल को केवल पद, पदोन्नति अथवा तैनाती के नजरिए से देखने के बजाय इसे राज्य की शैक्षिक अकादमिक व्यवस्था के पुनर्गठन के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
भविष्य का SCERT ऐसा संस्थान होना चाहिए जो राज्य के लिए शिक्षा संबंधी शोध करे, नई तकनीकों का परीक्षण करे, गुणवत्तापूर्ण पाठ्यचर्या और डिजिटल सामग्री विकसित करे तथा नीतिगत निर्णयों के लिए प्रमाण-आधारित अकादमिक सहयोग उपलब्ध कराए।
इसी प्रकार DIET को जिले में केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि District Academic Resource & Innovation Hub के रूप में विकसित किया जा सकता है।
सुधार का मूल मंत्र
इस प्रस्ताव को प्रभावी बनाने के लिए चार बातें केंद्रीय हो सकती हैं—
सही व्यक्ति + सही विशेषज्ञता + सही पद + निरंतर अकादमिक विकास।
यदि अलग कैडर के साथ पारदर्शी चयन, स्पष्ट सेवा नियम, विशेषज्ञता आधारित पदस्थापन, नियमित प्रशिक्षण, शोध एवं नवाचार के अवसर और विद्यालयों से सतत जुड़ाव सुनिश्चित किया जाता है, तो यह बदलाव उत्तराखण्ड की शिक्षक-शिक्षा व्यवस्था को अधिक पेशेवर और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अंततः प्रश्न केवल अलग कैडर बनाने का नहीं है; प्रश्न यह है कि SCERT और DIET को आने वाले दशक की शिक्षा की चुनौतियों के लिए कितना सक्षम, शोधपरक, तकनीक-सक्षम और अकादमिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।
