Wednesday, December 20, 2023

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, उत्तराखंड (SCERT, UK) एवं भारतीय विज्ञान एवं शिक्षा अनुसंधान संस्थान पुणे (IISER Pune) द्वारा STEM के तकनीकों एवं नवीनतम शैक्षणिक उपकरणों का उपयोग

 

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, उत्तराखंड (SCERT, UK) एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, उत्तराखंड (SCERT, UK) एवं भारतीय विज्ञान एवं शिक्षा अनुसंधान संस्थान पुणे (IISER Pune) द्वारा STEM के तकनीकों एवं नवीनतम शैक्षणिक उपकरणों का उपयोग कर विद्यार्थियों में गणित एवं विज्ञान की अभिरुचि विकसित करने के उद्देश्य से राज्य के विज्ञान एवं गणित शिक्षकों को iRISE (Inspiring India In Research Innovation In STEM Education) कार्यक्रम अन्तर्गत 03 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है । यह प्रशिक्षण राज्य के सभी जिले के शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। Teacher Development Strand (TDS) जिसके अन्तर्गत शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस परियोजना को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग - भारत सरकार, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, ब्रिटिश काउंसिल, और टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से कार्यान्वित  किया जा रहा है ।

उक्त कार्यक्रम का उद्देश्य है शिक्षकों और छात्रों में नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ाना है । इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के विद्यार्थियों का इंस्पायर अवार्ड्स – मानक में भी ज्यादा से ज्यादा Nomination कराना है जो कि देश के बच्चों को नवाचार में बढ़ावा देने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की एक योजना है । प्रशिक्षण में रटने की जगह समझने की प्रवृति को प्राथमिकता दी गई है । बच्चों को आस -पास के परिवेश से जोड़कर दैनिक जीवन की घटनाओं का उदाहरण देकर विज्ञान और गणित की शिक्षा देने की बात कही गई है । पूछताछ और गतिविधि- आधारित तथा विज्ञान एवं गणित को अन्तर्विषयक (Interdisciplinary) बना कर  बच्चों तक पहुँचाया जा इसकी चर्चा की गई है । महाराष्ट्र और बिहार के बाद उत्तराखंड तीसरा राज्य है जहां इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई है ।

iRISE कार्यक्रम के विभिन्न चरण हैं जिसमें प्रथम चरण में राज्य के कुछ शिक्षकों को 3 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा । तत्पश्चात प्रथम चरण में प्रशिक्षित शिक्षकों में से कुछ शिक्षकों का चयन उनके कक्षा में की गयी गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा जो दूसरे चरण के तहत 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण भारतीय विज्ञान एवं शिक्षा अनुसंधान संस्थान पुणे में प्राप्त करेंगे । 10 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों को Innovation Champion (IC) के नाम से जाना जाएगा एवं उसके बाद तीसरा चरण शुरू होगा जिसमे सभी Innovation Champions (ICs) IISER Pune की मदद से अपने संबन्धित जिले में कैसकेड कार्यशाला का आयोजन करेंगे । इस कार्यक्रम के तहत सभी विद्यालयों को एक किट भी उपलब्ध कराया जाएगा जो विद्यालय में गतिविधि कराने हेतु शिक्षकों के लिए काफी मददगार साबित होगा ।

  इसी क्रम में पौड़ी उत्तरकाशी उधम सिंह नगर पिथौरागढ़ चमोली जनपद एवं रुद्रप्रयाग जनपद के 45 शिक्षकों का देहरादून की दून यूनिवर्सिटी में 19 से 21 दिसंबर तक प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में एनसीईआरटी के संयुक्त निदेशक आशा पैन्यूली ने कहा कि यह प्रशिक्षण गणित विज्ञान शिक्षण को एक नवीन आयाम देगा।इसके माध्यम से माध्यमिक स्तर पर गतिविधि आधारित शिक्षण को बल मिलेगा। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक श्रीमती कंचन देवरानी ने कहा कि महिलाओं को भी प्रशिक्षण में बढ़ चढ़कर भाग लेना चाहिए उनमें किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए। एस0सी0ई0आर0टी0 के सहायक निदेशक डॉ के के बिजल्वाण ने कहा कि यह कार्यक्रम नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुकूल है और इसको राज्य में विस्तार देने हेतु संपूर्ण प्रयास किए जाएंगे । उद्घाटन सत्र का संचालन करते हुए कार्यक्रम के राज्य समन्वयक डॉ अवनीश उनियाल ने कहा कि स्टेम एजुकेशन आज के वक्त की आवश्यकता है,इसके माध्यम से विद्यार्थी गणित व विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को बहुत आसानी से सीख सकते हैं । यह कार्यक्रम प्रदेश के लगभग 1लाख बच्चों को लाभान्वित करेगा। इस अवसर पर IISER पुणे के विशेषज्ञ शिवानी ,संकेत,अक्षय ,अपर्णा रोहित सहित दून यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरुण कुमार,डॉ प्राची एवं डॉ सुनीत नैथानी उपस्थित रहे। कर विद्यार्थियों में गणित एवं विज्ञान की अभिरुचि विकसित करने के उद्देश्य से राज्य के विज्ञान एवं गणित शिक्षकों को iRISE (Inspiring India In Research Innovation In STEM Education) कार्यक्रम अन्तर्गत 03 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है । यह प्रशिक्षण राज्य के सभी जिले के शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। Teacher Development Strand (TDS) जिसके अन्तर्गत शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस परियोजना को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग - भारत सरकार, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, ब्रिटिश काउंसिल, और टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से कार्यान्वित  किया जा रहा है ।

उक्त कार्यक्रम का उद्देश्य है शिक्षकों और छात्रों में नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ाना है । इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के विद्यार्थियों का इंस्पायर अवार्ड्स – मानक में भी ज्यादा से ज्यादा Nomination कराना है जो कि देश के बच्चों को नवाचार में बढ़ावा देने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की एक योजना है । प्रशिक्षण में रटने की जगह समझने की प्रवृति को प्राथमिकता दी गई है । बच्चों को आस -पास के परिवेश से जोड़कर दैनिक जीवन की घटनाओं का उदाहरण देकर विज्ञान और गणित की शिक्षा देने की बात कही गई है । पूछताछ और गतिविधि- आधारित तथा विज्ञान एवं गणित को अन्तर्विषयक (Interdisciplinary) बना कर  बच्चों तक पहुँचाया जा इसकी चर्चा की गई है । महाराष्ट्र और बिहार के बाद उत्तराखंड तीसरा राज्य है जहां इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई है ।

iRISE कार्यक्रम के विभिन्न चरण हैं जिसमें प्रथम चरण में राज्य के कुछ शिक्षकों को 3 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा । तत्पश्चात प्रथम चरण में प्रशिक्षित शिक्षकों में से कुछ शिक्षकों का चयन उनके कक्षा में की गयी गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा जो दूसरे चरण के तहत 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण भारतीय विज्ञान एवं शिक्षा अनुसंधान संस्थान पुणे में प्राप्त करेंगे । 10 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों को Innovation Champion (IC) के नाम से जाना जाएगा एवं उसके बाद तीसरा चरण शुरू होगा जिसमे सभी Innovation Champions (ICs) IISER Pune की मदद से अपने संबन्धित जिले में कैसकेड कार्यशाला का आयोजन करेंगे । इस कार्यक्रम के तहत सभी विद्यालयों को एक किट भी उपलब्ध कराया जाएगा जो विद्यालय में गतिविधि कराने हेतु शिक्षकों के लिए काफी मददगार साबित होगा ।

  इसी क्रम में पौड़ी उत्तरकाशी उधम सिंह नगर पिथौरागढ़ चमोली जनपद एवं रुद्रप्रयाग जनपद के 45 शिक्षकों का देहरादून की दून यूनिवर्सिटी में 19 से 21 दिसंबर तक प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में एनसीईआरटी के संयुक्त निदेशक आशा पैन्यूली ने कहा कि यह प्रशिक्षण गणित विज्ञान शिक्षण को एक नवीन आयाम देगा।इसके माध्यम से माध्यमिक स्तर पर गतिविधि आधारित शिक्षण को बल मिलेगा। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक श्रीमती कंचन देवरानी ने कहा कि महिलाओं को भी प्रशिक्षण में बढ़ चढ़कर भाग लेना चाहिए उनमें किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए। एस0सी0ई0आर0टी0 के सहायक निदेशक डॉ के के बिजल्वाण ने कहा कि यह कार्यक्रम नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुकूल है और इसको राज्य में विस्तार देने हेतु संपूर्ण प्रयास किए जाएंगे । उद्घाटन सत्र का संचालन करते हुए कार्यक्रम के राज्य समन्वयक डॉ अवनीश उनियाल ने कहा कि स्टेम एजुकेशन आज के वक्त की आवश्यकता है,इसके माध्यम से विद्यार्थी गणित व विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को बहुत आसानी से सीख सकते हैं । यह कार्यक्रम प्रदेश के लगभग 1लाख बच्चों को लाभान्वित करेगा। इस अवसर पर IISER पुणे के विशेषज्ञ शिवानी ,संकेत,अक्षय ,अपर्णा रोहित सहित दून यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरुण कुमार,डॉ प्राची एवं डॉ सुनीत नैथानी उपस्थित रहे।


E-Content Development Workshop for Diksha Portal from 18/12/2023 onwards

 

Progress Report on E-Content Development Workshop for Diksha Portal from 18/12/2023 onwards

Tuesday, December 19, 2023

उत्तराखण्ड की विरासत पर कार्यशाला: एस सी आर टी द्वारा आयोजित

 उत्तराखण्ड की विरासत 

उत्तराखण्ड, भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक राज्य है, जिसका नाम अपनी सुंदर प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर, और भौगोलिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध है। इसका गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ था, जब उत्तर प्रदेश से अलग कर एक अलग राज्य बना गया। यहां कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हैं जो उत्तराखण्ड की विरासत को समझने में मदद करेंगी।

भौगोलिक स्थिति: उत्तराखण्ड हिमालय की गोदी में स्थित है और इसके स्थानीय नाम में "उत्तर" और "आखंड" शब्द शामिल हैं, जिससे इसका अर्थ है "हिमालय का उच्च भू-इलाका"। यहां के पहाड़ी त्रैयारी, शानदार नदियाँ, और शीतल जलवायु के लिए प्रसिद्ध हैं।

प्राचीन इतिहास: उत्तराखण्ड का क्षेत्र प्राचीन समय से ही ऋषियों और तपस्वियों के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र रहा है। यहां के प्रमुख चारधाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, और बद्रीनाथ) हिन्दू तीर्थ स्थलों के रूप में प्रसिद्ध हैं।

सांस्कृतिक धरोहर: उत्तराखण्ड का सांस्कृतिक धरोहर बहुत ऐतिहासिक और समृद्धि से भरा हुआ है। यहां के गांवों में लोक नृत्य, संगीत, और स्थानीय कला-सांस्कृतिक परंपराएं अपने आप में एक अद्वितीय चमक हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य: उत्तराखण्ड को देवभूमि कहा जाता है और यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अद्वितीय है। यहां की ऊँचाईयों से नीचे बहती गंगा और यमुना नदियाँ, एकदिवसीय प्राकृतिक वन्यजीव, और हिमालयी फूलों से सजीव प्रदृश्य इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में लोकप्रिय बनाते हैं।

आर्थिक गतिविधियाँ: उत्तराखण्ड की आर्थिक गतिविधियों में पहाड़ी कृषि, उद्योग, और पर्यटन मुख्य रूप से शामिल हैं। यहां के लोग बुआई से लेकर उच्च गुणवत्ता वाले हिमालयी उत्पादों तक कई उद्योगों में लगे हैं।उत्तराखण्ड एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, और प्राकृतिक धरोहर से भरा हुआ राज्य है, जो अपने सुंदर वातावरण, विविध संस्कृति, और रोमांटिक दृष्टिकोण के लिए अद्वितीय है।

उत्तराखण्ड को "वीरभूमि" भी कहा जाता है, क्योंकि इस राज्य ने अपने वीर सपूतों के महान योगदान के लिए प्रसिद्धता प्राप्त की है। यहां के वीर सपूत ने अपने प्राणों की कड़ी संघर्ष के माध्यम से राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनी शौर्यगाथाएँ बनाईं हैं।

उत्तराखण्ड की वीर महिलाएं न केवल अपने स्थानीय समृद्धि के लिए जानी जाती हैं, बल्कि उनमें से कई ने अपनी बहादुरी और समर्पण के माध्यम से राष्ट्र के लिए भी अपना समर्पण दिखाया है। उनके योगदान से हमें मिलता है कि वे वीरता, साहस, और सेवाभाव से भरी हुई हैं और उनकी शौर्यगाथाएं देशवासियों को प्रेरित करती हैं।