Thursday, September 03, 2026

कौशलम कार्यक्रम के प्रभाव एवं शोध अध्ययन के आंकड़े साझा किए गए-2026

सुनील भट्ट : देहरादून, 3 सितम्बर 2026

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड, सहयोगी संस्था उद्यम लर्निंग फाउंडेशन तथा McGill University, Canada के संयुक्त सहयोग से संचालित कौशलम कार्यक्रम के अंतर्गत चल रही शोध-अध्ययन के निष्कर्ष एवं आंकड़े आज साझा किए गए। इस अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड, सहायक निदेशक, SCERT, उपदेशक, SCERT, McGill University, Canada से Dr. Joseph Levitan, उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के डायरेक्टर श्री हरीश मनवानी, कौशलम टीम के सदस्य, विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ कौशलम कोऑर्डिनेटर सुनील दत्त भट्ट द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों को कौशलम कार्यक्रम का परिचय देते हुए इसकी आवश्यकता, उद्देश्य तथा उत्तराखण्ड में कार्यक्रम के संचालन एवं विस्तार की जानकारी साझा की।

इसके पश्चात विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने कौशलम कार्यक्रम के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें किस प्रकार नए कौशल सीखने, अपनी सोच विकसित करने, समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखने तथा अपने विचारों को व्यवहार में लाने के अवसर मिले। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा साझा किए गए अनुभवों की उपस्थित सभी सदस्यों ने सराहना की तथा उन्हें इसी प्रकार निरंतर सीखने और नवाचार के लिए प्रेरित किया।

McGill University द्वारा शोध अध्ययन के निष्कर्ष साझा

कार्यक्रम के अगले चरण में McGill University, Canada की ओर से कौशलम कार्यक्रम के अंतर्गत किए जा रहे शोध-अध्ययन के आंकड़े एवं प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए। शोध के निष्कर्षों पर उपस्थित प्रतिभागियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तुत आंकड़ों से यह संकेत मिला कि कौशलम कार्यक्रम जिन उद्देश्यों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया था, उनकी दिशा में कार्यक्रम सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम का लाभ विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी प्राप्त हो रहा है। शोध के माध्यम से कार्यक्रम के प्रभाव और उसके विभिन्न पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है।

साथ ही, शोध निष्कर्षों के आधार पर यह भी चर्चा की गई कि कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाने के लिए अभी किन क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। इससे भविष्य में कार्यक्रम की गुणवत्ता एवं प्रभाव को और बेहतर बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने में सहायता मिलेगी।

पैनल डिस्कशन में भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा

कार्यक्रम के अंत में पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया, जिसका संचालन हरीश मनवानी द्वारा किया गया। पैनल में Dr. Joseph Levitan, श्री विनोद कुमार मटूड़ा एवं डॉ. कृष्णानंद विजल्वाण ने प्रतिभाग किया।

पैनल चर्चा के दौरान कौशलम कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति, शोध से प्राप्त निष्कर्षों, कार्यक्रम के प्रभाव तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शोध से प्राप्त सीख और सुझावों का उपयोग करते हुए कार्यक्रम को विद्यालय स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों एवं शिक्षकों तक इसका सकारात्मक प्रभाव पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा में नवाचार, उद्यमिता एवं 21वीं सदी के कौशलों को बढ़ावा देने की दिशा में कौशलम कार्यक्रम के प्रयासों को और मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

 बंदना गर्ब्याल, निदेशक अकादमिक , ने कहा कि किसी भी कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु यह जानना आवश्यक है कि उसका क्रियान्वयन कितना प्रभावित हो रहा है और मैकगिल यूनिवर्सिटी द्वारा की गई  रिसर्च से हमें यह पता चलता है कि कौशलम् कार्यक्रम के अंतर्गत हम सही दिशा में कार्य कर रहे हैं कार्यक्रम के अंतर्गत हमें बच्चों में उद्यम शील मानसिकताएं एवं 21वीं सदी के कौशल विकसित होते हुए दिखाई दे रहे हैं। और आगे भी हम सभी का यही प्रयास होगा कि इस रिसर्च में आई अनुशंसाओं को शामिल करते हुए हम कौशलम् कार्यक्रम को और बेहतर क्रियान्वित करें जिससे कि बच्चों में हमें इसके और बेहतर सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकेंगे।

पद्मेंद्र सकलानी, अपर निदेशक,राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद देहरादून उत्तराखंड ने कहा कि कौशलम कार्यक्रम के अंतर्गत की गई रिसर्च में बहुत सारे सकारात्मक बिंदु निकल के आए हैं इसके साथ ही साथ कई ऐसे पहलू भी हैं जिन पर हमें और बेहतर कार्य करने की आवश्यकता है और निश्चित तौर पर भविष्य में हम रिसर्च में की गई अनुसंशाओ को पाठ्यक्रम में एवं शिक्षक प्रशिक्षणों में लागू किया जाएगा। कार्यक्रम में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से विपिन भट्ट, गिरीश थपलियाल, रितु कुकरेती, एससीईआरटी से डॉ मनोज शुक्ला, गोपाल घुघत्याल, सुशील गैरोला, अखिलेश डोभाल, शुभ्रा सिंघल,शिक्षक शिवानी पेटवाल,रेखा पटवाल एवं अन्य विद्यालयों से शिक्षकों एवं बच्चों ने प्रतिभाग किया, इसके साथ ही उद्यम लर्निंग फाउंडेशन से रोहित गुप्ता अरविंद,दिनेश, ममता, पिया, यामिनी, लक्ष्य, कुणाल, आशिया आदि शामिल रहे।

Wednesday, September 02, 2026

सचिव विद्यालयी शिक्षा ज्योति यादव, IAS ने किया “Hackathon 3.0 – Innovate Uttarakhand” का शुभारंभ

 

उत्तराखण्ड के विद्यार्थियों और शिक्षकों को AI एवं डिजिटल इनोवेशन से जोड़ने की राज्य स्तरीय पहल

देहरादून | 02 सितम्बर 2026

उत्तराखण्ड में विद्यालयी शिक्षा को नवाचार, Artificial Intelligence (AI), डिजिटल टेक्नोलॉजी, समस्या-समाधान और रचनात्मक सोच से जोड़ने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। सचिव, विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड, ज्योति यादव, IAS द्वारा SCERT Uttarakhand के State-Level Teacher–Student Innovation Hackathon 3.0 – Innovate Uttarakhand का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

Hackathon 3.0 का शुभारंभ आगामी दक्षता आधारित आकलन (Competency-Based Assessment) की तैयारियों को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय ऑनलाइन बैठक के दौरान किया गया। बैठक में राज्य के मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEOs), खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEOs), DIET प्राचार्य एवं अन्य शिक्षा अधिकारी ऑनलाइन जुड़े थे।

सचिव विद्यालयी शिक्षा ज्योति यादव, IAS ने अधिकारियों को Hackathon 3.0 के उद्देश्यों और इसकी उपयोगिता से अवगत कराते हुए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों तक इस पहल को प्रभावी रूप से पहुँचाने तथा विद्यालय स्तर पर innovation, creativity, problem-solving और technology-enabled learning को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर निदेशक अकादमिक, SCERT उत्तराखण्ड वंदना गरब्याल, पदमेन्द्र सकलानी अपर निदेशक SCERT, उप निदेशक विनोद मठूड़ा, सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण सहित SCERT के संकाय सदस्य उपस्थित रहे। अधिकारियों ने राज्य के विद्यालयों में नवाचार की संस्कृति विकसित करने तथा विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

Hackathon 3.0 क्या है?

Hackathon 3.0 उत्तराखण्ड का राज्य स्तरीय Teacher–Student Innovation Programme है, जिसमें विद्यार्थी और शिक्षक अपने आसपास दिखाई देने वाली वास्तविक समस्याओं को पहचानकर उनके लिए अभिनव, व्यावहारिक तथा तकनीक आधारित समाधान विकसित करेंगे।

इस पूरी innovation journey को एक सरल प्रक्रिया के रूप में विकसित किया गया है:

Problem → Idea → Guidance → Prototype → Presentation → Innovation

अर्थात प्रतिभागी पहले समस्या की पहचान करेंगे, फिर उसका समाधान सोचेंगे, विशेषज्ञों एवं mentors से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे और अपने विचार को prototype, model, application, device अथवा digital solution के रूप में विकसित करने का प्रयास करेंगे।

चयनित श्रेष्ठ नवाचारों को State-Level Finale में प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा तथा promising innovations को आगे development, collaboration और incubation से जोड़ने की संभावनाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

कौन कर सकता है प्रतिभाग?

Hackathon 3.0 में कक्षा VI से XII तक के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। इसमें राजकीय विद्यालयों के साथ PM SHRI Schools, Atal Utkrisht Schools, Ashram Schools, Jawahar Navodaya Vidyalayas (JNV), Kendriya Vidyalayas (KV), recognised private schools तथा NGO-supported एवं अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों के विद्यार्थी भी प्रतिभाग कर सकते हैं।

शिक्षक श्रेणी में कक्षा I से XII तक के शिक्षक प्रतिभाग कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त DIET, SCERT, SIEMAT, National एवं State Awardee Teachers तथा आमंत्रित experts और mentors को भी innovation ecosystem से जोड़ा जाएगा।

Hackathon 3.0 की विशेषता यह है कि प्रतिभागियों को केवल पूर्व निर्धारित project बनाने के बजाय अपने आसपास की वास्तविक समस्या को पहचानकर उसका समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

Innovation के प्रमुख क्षेत्रों में Education, Artificial Intelligence, Agriculture, Tourism, Disaster Management, Health, Environment, Governance, Robotics & IoT, Coding & Digital Innovation, STEM तथा Inclusive Education शामिल हैं।

उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए विद्यार्थी भूस्खलन, बाढ़, जंगल की आग, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, कृषि, ग्रामीण विकास, पर्यटन, स्वास्थ्य, विद्यालय प्रबंधन, accessibility तथा स्थानीय समुदायों से जुड़ी चुनौतियों पर भी समाधान विकसित कर सकते हैं।

इन themes को सीमित नहीं रखा गया है। कोई भी ऐसा विचार जो वास्तविक समस्या का अभिनव और उपयोगी समाधान प्रस्तुत करता हो, Hackathon 3.0 का हिस्सा बन सकता है।

Idea से Prototype तक मिलेगा मार्गदर्शन

Hackathon 3.0 को केवल ideas जमा करने वाली प्रतियोगिता न बनाकर एक learning and innovation journey के रूप में तैयार किया गया है।

प्रतिभागियों की यात्रा निम्न चरणों से आगे बढ़ेगी:

Registration → Idea Submission → Screening → Mentorship → Bootcamp → Prototype Development → State-Level Finale → Incubation & Further Support

प्रारंभिक idea पूर्ण या तकनीकी रूप से विकसित होना आवश्यक नहीं है। प्रतिभागियों को mentors और experts के माध्यम से अपने विचार को बेहतर बनाने, उपयुक्त technology चुनने तथा उसे prototype में बदलने का अवसर दिया जाएगा।

Prototype किसी working model, mobile application, website, AI-enabled solution, robotic device, IoT system, software, digital platform अथवा अन्य practical solution के रूप में हो सकता है।

AI और Emerging Technologies पर विशेष जोर

Hackathon 3.0 के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को केवल technology के users के रूप में नहीं, बल्कि creators and innovators के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

जहाँ उपयुक्त होगा, प्रतिभागियों को Artificial Intelligence, Generative AI, Coding, App/Web Development, Robotics, IoT, STEM, No-Code/Low-Code Tools, Data Analytics तथा अन्य emerging digital technologies का उपयोग करके अपने समाधान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

इससे विद्यार्थियों में critical thinking, computational thinking, creativity, collaboration, communication और problem-solving skills विकसित करने का अवसर मिलेगा।

प्राप्त innovations का मूल्यांकन केवल तकनीक के आधार पर नहीं, बल्कि समस्या और समाधान की वास्तविक उपयोगिता को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

प्रमुख मूल्यांकन मानकों में Innovation, Real-World Impact, Feasibility, meaningful use of AI & Technology, Prototype Development, Presentation तथा Scalability शामिल होंगे।

इसका उद्देश्य ऐसे solutions की पहचान करना है जिन्हें आगे विद्यालय, समुदाय, जनपद अथवा आवश्यकता पड़ने पर पूरे उत्तराखण्ड में उपयोग की दिशा में विकसित किया जा सके।

लगभग 50 उत्कृष्ट Innovations को मिलेगा सम्मान

Hackathon 3.0 के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में कुल 50 उत्कृष्ट innovations को सम्मानित किए जाने का प्रावधान है।

कार्यक्रम की आधिकारिक guidelines एवं संबंधित award category के अनुसार चयनित विजेताओं को AI-enabled laptops/tablets, Robotics Kits, IoT Kits, 3D Printing Support, Software Licences, Innovation Grants तथा आगे development और incubation के अवसर जैसे सहयोग प्रदान किए जा सकते हैं।

प्रतियोगिता से आगे—Innovation Culture बनाने की पहल

Hackathon 3.0 का उद्देश्य केवल विजेताओं का चयन करना नहीं है। SCERT Uttarakhand की परिकल्पना इसे राज्य के विद्यालयों में एक स्थायी Innovation Ecosystem के रूप में विकसित करने की है।

अर्थात प्रत्येक विद्यालय नवाचार की प्रयोगशाला बने, प्रत्येक शिक्षक विद्यार्थियों का innovation mentor बने और प्रत्येक विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं को देखकर उनके समाधान खोजने की क्षमता विकसित करे।

Learn. Create. Innovate. Solve.

Hackathon 3.0 विद्यार्थियों को यह संदेश देता है कि किसी समस्या का समाधान खोजने के लिए इंजीनियर, वैज्ञानिक या entrepreneur बनने की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है।

समस्या को पहचानिए। समाधान के बारे में सोचिए। तकनीक का उपयोग कीजिए। अपना prototype बनाइए और अपने innovation को दुनिया के सामने प्रस्तुत कीजिए।

उत्तराखण्ड के किसी छोटे से विद्यालय या दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र के विद्यार्थी का एक छोटा-सा विचार भी भविष्य में किसी विद्यालय, गाँव, समुदाय या पूरे राज्य की बड़ी समस्या का समाधान बन सकता है।

Hackathon 3.0 – Innovate Uttarakhand इसी सोच को अवसर, मार्गदर्शन और मंच प्रदान करने की दिशा में SCERT Uttarakhand की एक महत्वपूर्ण पहल है।

Hackathon 3.0 के लिए आवेदन

विद्यार्थी एवं शिक्षक Innovate Uttarakhand Portal के माध्यम से अपना registration एवं innovation idea प्रस्तुत कर सकते हैं।

Apply Now:
https://innovateuttarakhand.com/event

Government of Uttarakhand | School Education Department | SCERT Uttarakhand

एक समस्या पहचानिए — एक विचार सोचिए — एक समाधान बनाइए।

Hackathon 3.0 | Learn • Create • Innovate • Solve

सचिव विद्यालयी शिक्षा ज्योति यादव ने किया मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति परीक्षा 2026-27 का परिणाम घोषित


मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना वर्ष 2026-27 के अंतर्गत राज्य के 370 परीक्षा केंद्रों पर दिनांक 07 जुलाई 2026 को दो स्तरों—जूनियर स्तर (कक्षा 6) एवं माध्यमिक स्तर (कक्षा 9)—के लिए आयोजित छात्रवृत्ति परीक्षा के परिणाम आज दिनांक 02 सितम्बर 2026 को सचिव, विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड ज्योति यादव आई.ए.एस. द्वारा घोषित किए गए। 

जूनियर स्तर (कक्षा 6) जूनियर स्तर की परीक्षा में कुल 34,634 छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए, जिनमें से 3,468 छात्र-छात्राओं का छात्रवृत्ति हेतु चयन किया गया। बागेश्वर जनपद के विकासखण्ड कपकोट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज, रतिघेती के छात्र हार्दिक कोरंगा ने 93 प्रतिशत अंक प्राप्त कर वरीयता सूची में प्रथम स्थान प्राप्त किया। चम्पावत जनपद के चम्पावत विकासखण्ड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज, मंच की छात्रा करिश्मा ने 92.5 प्रतिशत अंक प्राप्त कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। ऊधमसिंह नगर जनपद के विकासखण्ड सितारगंज स्थित गुरुनानक कन्या इंटर कॉलेज की छात्रा अमृता राणा ने 90 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया।
माध्यमिक स्तर (कक्षा 9) माध्यमिक स्तर की छात्रवृत्ति परीक्षा में कुल 40,679 छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए, जिनमें से 4,072 छात्र-छात्राओं का छात्रवृत्ति हेतु चयन किया गया। ऊधमसिंह नगर जनपद के विकासखण्ड सितारगंज स्थित गुरुनानक कन्या इंटर कॉलेज की छात्रा ज्योति राणा ने 88 प्रतिशत अंक प्राप्त कर वरीयता सूची में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी विद्यालय की दो अन्य छात्राओं वैष्णवी एवं गुंजन ने क्रमशः 87.5 प्रतिशत एवं 87 प्रतिशत अंक प्राप्त कर वरीयता सूची में क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। 

निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड,  बंदना गर्ब्याल ने बताया कि उक्त परीक्षा में विकासखण्ड स्तर पर सम्मिलित परीक्षार्थियों में से 10 प्रतिशत छात्र-छात्राओं का चयन छात्रवृत्ति हेतु किया गया है। चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 6 में ₹600, कक्षा 7 में ₹700, कक्षा 8 में ₹800 तथा कक्षा 9 एवं 10 में ₹900 प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। 

छात्रवृत्ति परीक्षा में मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन प्रासांकों की वरीयता के आधार पर किया गया है। अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्र-छात्राओं को चयन में 5 प्रतिशत अंकों का अधिमान प्रदान किया गया है।

परीक्षा परिणाम एवं चयन सूची- समस्त छात्र-छात्राओं का परीक्षा परिणाम एवं चयन सूची एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड के छात्रवृत्ति पोर्टल https://scholarshipscert.uk.gov.in/ पर उपलब्ध है। छात्र-छात्राएं अपना परीक्षा परिणाम एवं चयन की स्थिति पोर्टल पर रोल नंबर तथा जन्म तिथि अंकित कर देख सकते हैं।


https://scholarshipscert.uk.gov.in/#/view-result

ऑनलाइन देखें अपना परिणाम

विद्यार्थी SCERT Uttarakhand Scholarship Portal पर अपना रोल नम्बर और जन्मतिथि दर्ज कर परीक्षा परिणाम तथा चयन की स्थिति देख सकते हैं।

मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति परीक्षा परिणाम देखें

मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान करने, उनकी शैक्षिक उपलब्धियों को सम्मान देने तथा आगे की शिक्षा के लिए उन्हें प्रोत्साहित करने की महत्वपूर्ण पहल है। SCERT उत्तराखण्ड की ओर से सभी चयनित छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यालयों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।

https://scholarshipscert.uk.gov.in/#/view-result

Tuesday, September 01, 2026

उत्तराखंड में दक्षता-आधारित आकलन को लेकर बड़ी पहल

SCERT UTTARAKHAND | SCHOOL EDUCATION

उत्तराखंड में दक्षता-आधारित आकलन को लेकर बड़ी पहल

7 सितम्बर से कक्षा 2, 5 एवं 8 का प्रथम दक्षता-आधारित आकलन

देहरादून, 31 अगस्त 2026। विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों की वास्तविक अधिगम उपलब्धियों की पहचान तथा दक्षता-आधारित शिक्षण को विद्यालय स्तर तक प्रभावी बनाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। सचिव, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखंड की अध्यक्षता में 31 अगस्त 2026 को प्रदेश के समस्त DIET प्राचार्यों एवं प्रतिनिधियों की ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में आगामी 7 सितम्बर 2026 से कक्षा 2, 5 एवं 8 के प्रथम दक्षता-आधारित आकलन की तैयारी, प्रश्नपत्र निर्माण, वितरण, डेटा-संकलन, परिणाम विश्लेषण तथा उसके आधार पर उपचारात्मक शिक्षण की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

🎯 प्रमुख उद्देश्य
आकलन को केवल परीक्षा तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों की वास्तविक दक्षताओं की पहचान करना, कमजोर क्षेत्रों पर उपचारात्मक शिक्षण देना और अगले आकलन में सुधार को मापना।

📘 रटने के बजाय दक्षता और अनुप्रयोग पर केंद्रित होगा आकलन

बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रश्नपत्र केवल पाठ्यवस्तु की स्मृति जाँचने तक सीमित न रहें, बल्कि दक्षता-आधारित एवं अनुप्रयोग-आधारित हों और प्रचलित पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार किए जाएँ।

कक्षा 2
10 प्रश्न
अधिकतम 1 पृष्ठ
कक्षा 5
15 प्रश्न
अधिकतम 3 पृष्ठ
कक्षा 8
20 प्रश्न
अधिकतम 4 पृष्ठ

📅 आकलन की प्रमुख समय-सारणी

प्रथम आकलन: 7 सितम्बर 2026

अगला आकलन: 28 सितम्बर 2026

प्रथम चरण: 15 अक्टूबर से 10 नवम्बर

द्वितीय चरण: 10 नवम्बर से 25 दिसम्बर

📝 DIET से विद्यालय तक प्रश्नपत्र वितरण की व्यवस्था

प्रश्नपत्रों की छपाई एवं फोटोकॉपी DIET, ब्लॉक कार्यालयों तथा उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के माध्यम से कराई जाएगी। प्रत्येक जनपद को मुख्य शिक्षा अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर ब्लॉकवार छपाई, लागत, वितरण मार्ग और जिम्मेदारियाँ तय करनी होंगी।

विद्यालयों तक प्रश्नपत्र पहुँचाने में BRP/CRP एवं DIET कार्मिकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। दूरस्थ एवं मार्ग-अवरुद्ध क्षेत्रों के लिए WhatsApp अथवा अन्य लिखित माध्यमों से वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

📊 केंद्रीकृत डेटा-संग्रह और दक्षता-वार विश्लेषण

सभी जनपदों के लिए एक समान केंद्रीकृत डेटा-संग्रह टेम्पलेट विकसित किया जाएगा। DIET द्वारा वर्तमान में उपयोग किए जा रहे Google Form, Jotform अथवा Excel Template की समीक्षा कर एक अंतिम समान प्रारूप सभी जनपदों को उपलब्ध कराया जाएगा।

महत्वपूर्ण समयसीमा:
7 सितम्बर के आकलन के परिणामों का संकलन एवं दक्षता-वार विश्लेषण 8 से 10 सितम्बर 2026 के मध्य पूरा किया जाएगा।

🌱 14 सितम्बर से उपचारात्मक शिक्षण

प्रत्येक जनपद को 11 सितम्बर 2026 तक DIET एवं जिला समन्वयक की संयुक्त अंतिम कार्ययोजना तैयार करनी होगी। इसके बाद 14 सितम्बर 2026 से उपचारात्मक शिक्षण प्रारंभ किया जाएगा।

TARGET FOR IMPROVEMENT
न्यूनतम 10% सुधार
दो आकलनों के मध्य विद्यार्थी उपलब्धि में

जिन जनपदों या ब्लॉकों में सुधार 10 प्रतिशत से कम रहेगा, वहाँ विशेष फोकस एवं संशोधित कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उपचारात्मक शिक्षण के दौरान नियमित पाठ्यक्रम प्रभावित न हो, इसे भी सुनिश्चित किया जाएगा।

🔍 मध्यावधि समीक्षा और फील्ड मॉनिटरिंग

मध्यावधि समीक्षा में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उपचारात्मक शिक्षण वास्तव में प्रारंभ हुआ है, शिक्षक निर्धारित अभ्यास योजना का पालन कर रहे हैं तथा एकल-शिक्षक विद्यालयों को आवश्यक सहयोग मिल रहा है।

कमजोर दक्षताओं वाले विद्यार्थियों की सहायता के लिए BRP/CRP, DIET Faculty तथा उपलब्ध NGO सहयोगियों को भी जोड़ा जा सकेगा।

सितम्बर 2026 में DIET एवं SCERT स्तर की प्रशिक्षण गतिविधियों को स्थगित अथवा पुनर्निर्धारित करते हुए संबंधित कार्मिकों को विद्यालय भ्रमण, फील्ड मॉनिटरिंग एवं उपचारात्मक शिक्षण सहयोग में लगाने के निर्देश दिए गए।

📢 आकलन को बनाया जाएगा जन-अभियान

दक्षता-आधारित आकलन को केवल विभागीय गतिविधि न रखते हुए जन-अभियान के रूप में संचालित करने पर जोर दिया गया। विद्यालयों की प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को आकलन की जानकारी देने, SMC सदस्यों को सूचित करने और आकलन दिवस पर उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

जन-जागरूकता के माध्यम
विद्यालय प्रार्थना सभा • SMC सहभागिता • डिजिटल पैम्फलेट • स्थानीय प्रचार सामग्री • विद्यालय स्तर पर सूचना प्रसार

🌧️ मौसम एवं आपदा प्रबंधन के लिए वैकल्पिक योजना

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 7 सितम्बर 2026 के मौसम पूर्वानुमान के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अग्रिम कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। वर्षा, भूस्खलन अथवा मार्ग बाधित होने की स्थिति में प्रश्नपत्र वितरण एवं आकलन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाएगी।

🗓️ 2 सितम्बर को अगली समीक्षा बैठक

पूरे अभियान की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए 2 सितम्बर 2026 की सायंकाल DIET प्राचार्यों एवं मुख्य शिक्षा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

बैठक में ब्लॉकवार छात्र संख्या, प्रश्नपत्र मुद्रण योजना, डेटा टेम्पलेट, BRP/CRP मैपिंग तथा 7 सितम्बर के आकलन की अधिकारी-स्तरीय तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।

👥 बैठक में प्रमुख सहभागिता

बैठक में सचिव, विद्यालयी शिक्षा; राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा उत्तराखंड; निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण; अपर निदेशक SCERT; सहायक निदेशक SCERT तथा SCERT के कार्यक्रम एवं अनुसंधान, एनईपी, आईटी आदि विभागों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।

आकलन से सुधार तक की सतत प्रक्रिया
Assessment Competency Analysis Remedial Teaching Re-Assessment Improvement

यह पहल आकलन को केवल अंक प्रदान करने की प्रक्रिया के बजाय साक्ष्य-आधारित शैक्षिक सुधार प्रक्रिया के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विद्यालय, शिक्षक, DIET, BRP/CRP एवं जिला अधिकारियों के समन्वित प्रयास से प्राप्त डेटा का उपयोग विद्यार्थियों की वास्तविक अधिगम आवश्यकताओं की पहचान, लक्षित उपचारात्मक शिक्षण तथा सतत सुधार के लिए किया जाएगा।

“हर बच्चे की दक्षता की पहचान — हर बच्चे के सीखने में सुधार”

SKOCH Award 2026 में SCERT उत्तराखंड की बड़ी उपलब्धि: ई-सृजन ICT Massive Open Online Course को मिला Semi-Finalist – SKOCH Order of Merit Certificate

देहरादून, 01 सितम्बर 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। SKOCH Award 2026 के अंतर्गत SCERT उत्तराखंड की शिक्षक प्रशिक्षण संबंधी अभिनव पहल “Revolutionising Teacher Training at Scale – Success Story of ICT Massive Open Online Course via e-Srijan” ने सेमीफाइनल चरण के लिए क्वालिफाई करते हुए प्रतिष्ठित “SEMI-FINALIST – SKOCH ORDER OF MERIT” Certificate प्राप्त किया। प्रमाणपत्र में SCERT उत्तराखंड, Government of Uttarakhand की इस पहल को बड़े पैमाने पर शिक्षक प्रशिक्षण में ICT एवं ऑनलाइन माध्यम के प्रभावी प्रयोग की सफलता के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।


01 सितम्बर 2026 को आयोजित SKOCH Order of Merit Investiture Ceremony में निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड बंदना गर्ब्याल ने प्रदेश एवं SCERT उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए यह प्रतिष्ठित प्रमाणपत्र ग्रहण किया। इस अवसर पर आर. पी. बडोनी, IT Faculty, SCERT Uttarakhand तथा विनय उनियाल, IT Technical Team भी उपस्थित रहे और इस उपलब्धि के साक्षी बने।

ई-सृजन के माध्यम से बड़े स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण को मिली राष्ट्रीय पहचान

SCERT उत्तराखंड द्वारा ई-सृजन (e-Srijan) के माध्यम से विगत वर्षों में प्रदेश के शिक्षकों के लिए बड़े स्तर पर ऑनलाइन व्यावसायिक विकास एवं तकनीकी क्षमता संवर्धन कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। ICT आधारित प्रशिक्षण से प्रारंभ हुई इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए Artificial Intelligence (AI)-Enabled Teaching-Learning, डिजिटल टूल्स तथा स्कूल प्रशासन में तकनीक के प्रभावी उपयोग जैसे क्षेत्रों को भी शिक्षक प्रशिक्षण से जोड़ा गया है।


इस पहल की विशेषता यह रही कि डिजिटल माध्यम से राज्य के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक साझा ऑनलाइन प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया गया। MOOCs के माध्यम से शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार सीखने, डिजिटल संसाधनों का उपयोग करने और नई तकनीकों को अपनी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में समाहित करने की दिशा में आगे बढ़े हैं।

SKOCH मंच पर उत्तराखंड की पहल की प्रस्तुति

Order of Merit Investiture के दौरान चयनित परियोजनाओं को अपनी उपलब्धियों और प्रभाव को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया। निदेशक अकादमिक  बंदना गर्ब्याल ने ज्यूरी के समक्ष SCERT उत्तराखंड की ई-सृजन आधारित ICT Massive Open Online Course पहल की यात्रा, इसकी व्यापक पहुँच तथा शिक्षक क्षमता संवर्धन में इसके योगदान को प्रस्तुत किया।

उन्होंने SCERT उत्तराखंड की परियोजना को SKOCH Award 2026 के Semi-Finalist चरण तक पहुँचने और Order of Merit Certificate प्राप्त होने पर SKOCH Group एवं ज्यूरी के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर चयनित अन्य संस्थानों एवं उनकी अभिनव परियोजनाओं को भी बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

प्रतियोगिता में 180 से अधिक परियोजनाओं/प्रतिभागियों की भागीदारी के बीच चयन प्रक्रिया से आगे बढ़कर इस स्तर तक पहुँचना SCERT उत्तराखंड की डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण पहल की प्रभावशीलता एवं व्यापकता को राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करता है।

यह सम्मान केवल एक ऑनलाइन कोर्स या तकनीकी प्लेटफॉर्म की उपलब्धि नहीं, बल्कि SCERT उत्तराखंड द्वारा शिक्षक व्यावसायिक विकास को डिजिटल, सुलभ, व्यापक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की निरंतर यात्रा की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। इसके पीछे निदेशालय एवं SCERT के अधिकारियों, IT एवं तकनीकी टीम, कार्यक्रम समन्वयकों, विषय विशेषज्ञों, कंटेंट डेवलपर्स तथा प्रदेशभर के सहभागी शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 

SKOCH Order of Merit Certificate SCERT उत्तराखंड को भविष्य में ICT, Artificial Intelligence और उभरती डिजिटल तकनीकों पर आधारित शिक्षक प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

SCERT उत्तराखंड परिवार की ओर से निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण  बंदना गर्ब्याल, ई-सृजन एवं MOOCs से जुड़ी पूरी अकादमिक एवं तकनीकी टीम तथा प्रदेश के सभी सहभागी शिक्षकों को इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 

Certificate Citation

SEMI-FINALIST – SKOCH ORDER OF MERIT
Project: “Revolutionising Teacher Training at Scale – Success Story of ICT Massive Open Online Course via e-Srijan”
Institution: State Council of Education Research and Training, Government of Uttarakhand
Achievement: Qualified the Semi-Finals of SKOCH Award 2026

Saturday, August 29, 2026

PARAKH 2026 : उत्तराखंड में कॉम्पिटेंसी आधारित मूल्यांकन की दिशा में राज्यस्तरीय ऑनलाइन समीक्षा बैठक

 

SCERT उत्तराखंड- NEP 2020- PARAKH

देहरादून | SCERT उत्तराखंड

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं PARAKH (Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development) के उद्देश्यों के अनुरूप उत्तराखंड में कॉम्पिटेंसी आधारित मूल्यांकन व्यवस्था को प्रभावी बनाने हेतु आज राज्यस्तरीय ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन SCERT उत्तराखंड के प्रोग्राम मॉनिटरिंग प्रकोष्ठ के समन्वय में हुआ, जिसमें राज्य के सभी जनपदों के DIET प्राचार्य, PARAKH हेतु नियुक्त जनपदीय समन्वयक, SCERT के विषय विशेषज्ञ एवं जिला समन्वयक फैकल्टी ने सहभागिता की।

बैठक का संचालन निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल के मार्गदर्शन तथा अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी के समन्वय में किया गया। यह बैठक राज्य में PARAKH के जनपदवार परिणामों के विश्लेषण तथा आगामी कॉम्पिटेंसी आधारित परीक्षाओं की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।

बैठक का प्रमुख फोकस PARAKH 2026 के परिणामों के आधार पर उन दक्षताओं की पहचान करना था, जिनमें विद्यार्थियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम रहा है। इस संदर्भ में निर्णय लिया गया कि राज्यभर में ग्रेड-वार कॉम्पिटेंसी बेस्ड प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे तथा प्रत्येक जनपद अपनी स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप मूल्यांकन एवं सुधारात्मक कार्ययोजना विकसित करेगा।

सचिव के निर्देशों का अनुपालन

बैठक में सचिव महोदय के निर्देशों के अनुपालन में सभी DIET प्राचार्यों, BRP, CRP, BEO, CEO तथा शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे विद्यालय स्तर पर निर्धारित अधिगम परिणामों (Learning Outcomes) को मापने के लिए PARAKH दस्तावेजों एवं NCF–NEP 2020 आधारित दक्षताओं को आधार बनाते हुए सतत मूल्यांकन सुनिश्चित करें।

यह भी स्पष्ट किया गया कि मूल्यांकन का उद्देश्य केवल परीक्षा लेना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की वास्तविक दक्षता को पहचानकर उसके लिए सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Learning) की योजना तैयार करना है।

सितंबर से होगा जनपदवार कॉम्पिटेंसी असेसमेंट

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सितंबर माह में सभी जनपद उन विषयों एवं दक्षताओं पर विशेष कॉम्पिटेंसी असेसमेंट टेस्ट आयोजित करेंगे, जहाँ प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम रहा है। इसके आधार पर प्रत्येक जनपद एक Future Ready Action Plan तैयार करेगा, जिससे विद्यार्थियों में भाषा, गणित, विज्ञान एवं अन्य विषयों की निर्धारित दक्षताओं को सुनिश्चित किया जा सके।

निदेशक अकादमिक ने सभी DIET प्राचार्यों को निर्देशित किया कि वे समयबद्ध रूप से:

  • कॉम्पिटेंसी आधारित प्रश्नपत्र तैयार करें।

  • मूल्यांकन प्रक्रिया की स्पष्ट कार्ययोजना विकसित करें।

  • जनपदवार एक्शन प्लान तैयार कर SCERT को प्रेषित करें।

  • विद्यालय स्तर पर मूल्यांकन एवं रिपोर्टिंग की समान प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी ने जनपदवार समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक DIET द्वारा विकसित कॉम्पिटेंसी आधारित प्रश्न बैंक एवं प्रश्नपत्र SCERT को उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि राज्य स्तर पर एक साझा गुणवत्ता-मानक प्रश्न बैंक विकसित किया जा सके और सभी जनपदों में समान गुणवत्ता के कॉम्पिटेंसी आधारित मूल्यांकन लागू किए जा सकें।

बैठक में डॉ. के. एन बीजल्वान  तथा प्रोग्राम मॉनिटरिंग SCERT के डॉ अजय चौरसिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी जनपदों के समन्वयकों ने अपने-अपने जिलों की तैयारी, प्रश्न बैंक निर्माण एवं आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी साझा की।

बैठक में राज्य के विभिन्न जनपदों एवं DIETs से अजय कुमार, गणेश जुयाल, दीपा जलाल, बिपिन भट्ट, विनोद सिंह, राजेश जोशी, स्वराज तोमर, आलोक मिश्रा, डॉ. शैलेन्द्र सिंह, मनोज शुक्ला, सुमेर सिंह, डॉ. वीर सिंह, डॉ. अनिल मिश्रा, सी. पी. रतूड़ी, पुष्पा असवाल, दीपक प्रताप सिंह, डॉ. कमल घटोरी, मेराज अहमद, पारुल शर्मा, कृष्णा ऐरी, हेम जोशी, हिमानी थापा, गंगा, जी. पी. सिल्सवाल, संजीव जोशी एवं रमेश बडोनी सहित विभिन्न DIET प्राचार्यों, SCERT फैकल्टी, जनपदीय समन्वयकों एवं अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

Wednesday, August 26, 2026

IIT Delhi में National PATF–CoGrad Conference-2026

 

AI, NEP 2020 और भविष्य की शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों का साझा संकल्प

नई दिल्ली | 26 अगस्त 2026

देश के विभिन्न राज्यों से आए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों के लिए 26 अगस्त 2026 का दिन संवाद, सहयोग, नई मित्रता और भविष्य की शिक्षा के लिए साझा संकल्प का अवसर बना। Presidential Teacher Awardee Forum (PATF) और CoGrad के संयुक्त सहयोग से IIT Delhi के Innovation & Research Ecosystem में आयोजित कार्यक्रम में देशभर के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त एवं ICT पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने सहभागिता की।


कार्यक्रम का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को एक साझा मंच पर लाने के साथ Medha AI – Teaching Intelligence Platform के उद्घाटन, प्रदर्शन और भविष्य में स्कूली शिक्षा में इसके संभावित उपयोग पर संवाद स्थापित करना था।


Tuesday, August 25, 2026

राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में SCERT उत्तराखंड ने प्रस्तुत किया “सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा” अभियान

 

देहरादून | 25 अगस्त 2026

उत्तराखंड शासन में दिनांक 25 अगस्त 2026 को माननीय परिवहन मंत्री, उत्तराखंड सरकार की अध्यक्षता में राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागीय कार्यों की समीक्षा तथा प्रदेश में जनजागरूकता को और प्रभावी बनाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के आधिकारिक एजेंडे में जनपदवार दुर्घटनाओं की स्थिति, क्रैश बैरियर, सड़क सुधार, चारधाम यात्रा मार्गों पर चालक विश्राम गृह, AI आधारित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट, ब्लैक स्पॉट, हिट एंड रन योजना, प्रवर्तन, इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट और जनजागरूकता कार्यक्रम सहित विभिन्न विषय सम्मिलित थे।

बैठक में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड की ओर से अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी तथा कार्यक्रम समन्वयक विनय थपलियाल ने प्रतिभाग किया। SCERT द्वारा बैठक में शिक्षा के माध्यम से सड़क सुरक्षा को विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय तक पहुँचाने के लिए संचालित “सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा: जनजागरूकता अभियान 2026-27” की प्रगति, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना को प्रस्तुत किया गया।

SCERT की पहल का मूल विचार है—“शिक्षा के माध्यम से सुरक्षित उत्तराखंड का संकल्प — एक भी दुर्घटना कम हो तो पूरा अभियान सार्थक।” अभियान का उद्देश्य केवल यातायात नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में व्यवहार परिवर्तन लाते हुए हेलमेट, सीट बेल्ट, ज़ेबरा क्रॉसिंग और गति सीमा जैसी सुरक्षित आदतों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है। इसके साथ ही शिक्षकों के माध्यम से समुदाय तक संदेश पहुँचाने तथा नेक नागरिक एवं राहवीर संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल दिया गया है।

SCERT द्वारा किए गए प्रमुख प्रयास

बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार SCERT द्वारा सड़क सुरक्षा शिक्षा को व्यवस्थित और संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में अनेक पहल की गई हैं। सड़क सुरक्षा से संबंधित 6 ऑडियो/शिक्षण सामग्री विकसित की गई हैं। शिक्षक प्रशिक्षण के लिए ‘पथ प्रदर्शिका’ तैयार की गई है तथा “सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा” प्रशिक्षण मॉड्यूल पर कार्य जारी है। कैस्केड प्रशिक्षण मॉडल के अंतर्गत 52 मास्टर ट्रेनर → 780+ शिक्षक → 78,000+ विद्यार्थी तक पहुँच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इन सामग्रियों में हेलमेट के सही उपयोग, सीट बेल्ट, ज़ेबरा क्रॉसिंग, गति सीमा, नशामुक्त वाहन तथा राहवीर/नेक नागरिक जैसे विषयों को सरल हिंदी, स्थानीय उदाहरणों और उत्तराखंड के पहाड़ी संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया गया है। सामग्री सभी 13 जनपदों के DIETs को भेजे जाने तथा प्रार्थना सभा, कक्षा-कक्ष और अभिभावक बैठकों में इसके उपयोग का प्रावधान भी प्रस्तुति में उल्लेखित है।

SCERT ने सड़क सुरक्षा को केवल एक अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया है। कक्षा 9 में आपदा प्रबंधन के अंतर्गत पाठ 6—सड़क सुरक्षा को शामिल किया गया है, जिसमें पहाड़ी सड़कें, कोहरा, भूस्खलन, सुरक्षित व्यवहार, रोल-प्ले, सड़क संकेतों की पहचान, प्राथमिक उपचार, प्रोजेक्ट और समुदाय आधारित गतिविधियों को महत्व दिया गया है। वहीं कक्षा 1 से 3 की पाठ्यपुस्तकों में ज़ेबरा क्रॉसिंग, हेलमेट, ट्रैफिक लाइट और STOP जैसे दृश्य संकेतों को शामिल करने की पहल प्रगति पर है।

हर माह गतिविधि और Bagless Day पर सड़क सुरक्षा

विद्यालयों के लिए कक्षा 3 से 12 तक सड़क सुरक्षा संबंधी SOP एवं वार्षिक गतिविधि योजना भी तैयार की गई है। इसमें निबंध, पोस्टर, वाद-विवाद, नुक्कड़ नाटक और क्विज़ जैसी गतिविधियों के साथ अभिभावक सहभागिता का प्रावधान है। विशेष रूप से हर माह के अंतिम शनिवार—Bagless Day—पर सड़क सुरक्षा संबंधी अनिवार्य जागरूकता सत्र, ट्रैफिक पुलिस/परिवहन विभाग के साथ संवाद तथा प्राथमिक उपचार एवं Good Samaritan से संबंधित जानकारी देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

प्रत्येक विद्यालय तक सड़क सुरक्षा क्लब और कॉर्नरSCERT की कार्ययोजना में ब्लॉक से विद्यालय स्तर तक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सड़क सुरक्षा क्लब तथा Road Safety Corner को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। प्रस्तुति के अनुसार DIETs द्वारा ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं तथा प्रत्येक विद्यालय में छात्र अध्यक्ष, शिक्षक प्रभारी और सक्रिय छात्र सदस्यों के साथ सड़क सुरक्षा क्लब विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। Road Safety Corner में हेलमेट, रिफ्लेक्टर, प्राथमिक उपचार सामग्री, ट्रैफिक संकेत चार्ट और Good Samaritan Guide जैसी उपयोगी सामग्री रखने की परिकल्पना की गई है।

जनजागरूकता को विद्यालय की चारदीवारी से बाहर ले जाने के लिए शिक्षक-अभिभावक-विद्यार्थी WhatsApp समूहों, SCERT एवं DIET के डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिंगल, लघु वीडियो, क्विज़, छात्र निर्मित पोस्टर तथा जनपद स्तरीय रैलियों के माध्यम से संदेश पहुँचाने की योजना प्रस्तुत की गई। स्थानीय पुलिस एवं परिवहन विभाग के सहयोग से विद्यार्थियों को स्वयं “सड़क सुरक्षा दूत” के रूप में विकसित करने की अवधारणा भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

SCERT की आगामी कार्ययोजना में सड़क सुरक्षा क्लब एवं कॉर्नर को अधिकाधिक विद्यालयों तक विस्तारित करना, कक्षा 1-3 में सड़क सुरक्षा संकेतों के एकीकरण का कार्य पूरा करना, प्रशिक्षण साहित्य को अंतिम रूप देना, 52 मास्टर ट्रेनर्स के अगले चरण का प्रशिक्षण तथा Bagless Day को प्रभावी सड़क सुरक्षा जागरूकता मंच के रूप में विकसित करना शामिल है।

राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की इस बैठक में शिक्षा विभाग की सहभागिता ने यह रेखांकित किया कि सड़क सुरक्षा केवल परिवहन अथवा पुलिस विभाग का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा, व्यवहार परिवर्तन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा साझा अभियान है। विद्यालय स्तर से सुरक्षित व्यवहार की संस्कृति विकसित कर बच्चे अपने परिवार और समुदाय तक इसका संदेश पहुँचा सकते हैं।

Saturday, August 22, 2026

SCERT Uttarakhand Organises National–International Expert Coordination Webinar for Hackathon 3.0

 

Dehradun | 22 August 2026

The State Council of Educational Research and Training (SCERT), Uttarakhand successfully organised an online Expert & Resource Contributor Coordination Webinar on 22 August 2026 from 8:00 PM to 9:00 PM as part of the preparations for the forthcoming State Level Teacher–Student Innovation Hackathon 3.0.

The webinar brought together national and international experts, educators, researchers, AI/EdTech professionals, developers, innovators, STEM and robotics experts, school leaders and industry professionals to develop a strong resource and mentoring ecosystem for students, teachers and educators participating in Hackathon 3.0. The official invitation outlined the objective of allocating responsibilities for expert resources, tutorials and mentoring support.

From Real-World Problems to AI & Digital Solutions

Hackathon 3.0 is being envisioned as an innovation platform where participants will identify real-world challenges and transform their ideas into practical AI-enabled and Digital Solutions.

The central journey of the initiative is:

PROBLEM → IDEA → DESIGN → PROTOTYPE → DIGITAL SOLUTION

Director academic Bandana Garbyal inagurated the meet and welcome the participants experts for hackathon 3.0. During the webinar, the experts were oriented towards contributing short video tutorials, practical demonstrations, presentations, resource materials, prototype-development guides, online expert sessions, mentoring and step-by-step technical support.

Coordinator of Hackathon 3.0 Ramesh Badoni presented the event details and expected work in format and real time was detailed. The proposed resource-development areas include Artificial Intelligence, Generative AI, Coding, App/Web Development, Robotics, IoT, STEM, No-Code/Low-Code Tools, Data Analytics, AR/VR, Cyber Safety, Design Thinking and other emerging digital technologies. The resources are intended to help participants develop solutions to challenges in education, environment, climate change, disaster management, health, agriculture, tourism, rural development, girls’ education, women empowerment, inclusive education, accessibility, school management, road safety and cybersecurity.

Interaction with Experts and Allocation of Responsibilities

The webinar focused on establishing a collaborative mechanism through which experts can contribute according to their specialisation, professional experience and areas of interest. Discussion also centred on the expected format, duration and quality of tutorials/resources so that participants can receive practical and accessible guidance while developing their prototypes.

The initiative is expected to connect classroom innovation with expertise from universities, schools, research organisations, industry and the international education community.


National and International Experts Associated with the Webinar

The following experts/resource contributors listed in the official SCERT invitation participated/associated with the coordination meeting:

  1. Vikash Tiwari – Manager, Programs Design Thinking, Agastya International Foundation, Delhi, India
  2. Dusya Lyubovskaya – Global Ambassador, The Thorium Network, Massachusetts/Canton, USA/Switzerland
  3.  – Lecturer, DIET Dehradun, Uttarakhand, India
  4. Chander Deep Singh Dhami – Lecturer, GIC Tiotanuala, Pithoragarh, Uttarakhand, India
  5. Dr. Nidhi Gusain – Senior Researcher & HoD, Skill Development, Bhartiya Shiksha Board, Uttar Pradesh, India
  6. Vineeta Garg – Supervisory Head, SRDAV Public School, Delhi, India
  7. Dr. Ishteyaaq Ahmad – Assistant Professor–Selection Grade, UPES, Dehradun, Uttarakhand, India
  8. Sugandha Sharma – Assistant Professor, Senior Scale, UPES, Uttarakhand, India
  9. Anni Kumar – HoD, Computer Science, Vikas Bharati Public School, Delhi, India
  10. Rakhi Pandey – Lecturer, DIET Dehradun, Uttarakhand, India
  11. Rania Lampou – STEM Instructor & Researcher, Global Academician, Ministry of Education, Religious Affairs and Sports, Greece
  12. Pinki Upadhyay – PhD, Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith, Uttar Pradesh, India
  13. Pramod Kumar Chamoli – Head Master In-charge, Govt. Primary School Kundiya, Narendra Nagar, T.G., Uttarakhand, India
  14. Sagari – India Education Lead, Canva Education, Delhi NCR, India
  15. Amit Kumar – PGT Computer Science, PM SHRI Jawahar Navodaya Vidyalaya, Una, Himachal Pradesh, India
  16. Daulat Singh Gusain – Lecturer, GIC Sauli (Kaudia), Uttarakhand, India
  17. Bhaskar Joshi – Headteacher, GPS Mateeladhura, Tarikhet, Almora, Uttarakhand, India
  18. Dr. Chandni Agarwal – PGT Computer Science, Maharaja Agrasen Model School, Delhi, India
  19. Ibiere M. Brown – Educator and Teacher Trainer, Rivers State Senior Secondary Schools Board, Rivers State, Nigeria
  20. Manodhar Kumar Nainwal – Headmaster, G.P.S. Malaun, Uttarakhand, India
  21. Mamta Narula – Headmistress, DPS Vasant Kunj, Delhi, India
  22. Alpa Nigam – Head Teacher, Primary School Tilauli, Uttar Pradesh, India
  23. Naveen Gupta – Head of ICT Department, St. Mark’s Sr. Sec. Public School, Meera Bagh, New Delhi, India
  24. Susmita Roy Chowdhury – Senior Secondary Teacher, Santamayee Girls’ High School, West Bengal, India
  25. Bergin G – PGT Physics, GBHSS Sayalgudi, Tamil Nadu, India
  26. Neeta Mishra – TGT, Surendranath Centenary School, Ranchi, Jharkhand, India
  27. J P Dobhal – TGT Mathematics NTA, Uttarakhand, India
  28. Huong Vu – Teacher, Thang Long High School for the Gifted, Vietnam
  29. Shipra Mishra – NAT Jharkhand India 
  30. Deepak Pathak – Kotak Education Foundation Mumbai 
  31. Dr Anand Kumar – Doon School, Dehradun, Uttarakhand
  32. Sushmita Chaudhary – Fulbright Scholar West Bengal and more experts joined in later sessions


The complete list of invited experts/resource contributors is provided on pages 3 and 4 of the official SCERT invitation, representing Uttarakhand as well as Delhi, Uttar Pradesh, Himachal Pradesh, Tamil Nadu, West Bengal, Jharkhand and international participation from Greece, Nigeria, Vietnam and USA/Switzerland.

Building a Global Mentoring Ecosystem for Uttarakhand’s Innovators

The participation of professionals from different educational, technological and geographical backgrounds adds a significant dimension to Hackathon 3.0. Their expertise will support participating students and teachers not merely in generating ideas but in understanding the process of designing, developing, testing and presenting workable digital prototypes.

SCERT Uttarakhand aims to create a sustainable expert-resource-mentor network through Hackathon 3.0 so that participants, including those from remote and rural areas, can gain access to contemporary knowledge, emerging technologies and practical guidance.

The official communication emphasises that the contribution of experts will help create a strong mentoring and resource-support ecosystem around the Hackathon 3.0 journey.


Towards an Innovation Culture in Uttarakhand

Hackathon 3.0 represents SCERT Uttarakhand’s continued effort to encourage problem-solving, creativity, design thinking, technological skills and responsible use of Artificial Intelligence among students, teachers and educators.

With national and international experts joining the initiative, Hackathon 3.0 is moving towards a collaborative model in which educational challenges are connected with technological possibilities and ideas are supported through structured learning resources and mentoring.

An initiative of SCERT Uttarakhand towards building future-ready learners, teachers and innovators through AI, digital technology, creativity and collaborative problem-solving.

कला शिक्षा से संस्कृति, रचनात्मकता और कौशल का विकास

 

कक्षा 6 ‘कृति’ पुस्तिका पर राज्य स्तरीय ऑनलाइन अभिमुखीकरण कार्यशाला में 600 शिक्षकों की सहभागिता

देहरादून, 22 अगस्त 2026 | SCERT उत्तराखण्ड

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा दिनांक 22 अगस्त 2026 को कक्षा 6 की कला शिक्षा ‘कृति’ पुस्तिका के संदर्भ में कला, संगीत, नृत्य एवं रंगमंच विषयों पर राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का संचालन वर्चुअल लैब, विद्या समीक्षा केंद्र (VSK), उत्तराखण्ड के माध्यम से किया गया, जिसमें प्रदेश के समस्त जनपदों एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) से लगभग 600 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों में कला शिक्षा की अवधारणा को स्पष्ट करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में कला शिक्षा में आकलन एवं मूल्यांकन की भूमिका को समझना तथा सामूहिक कलाओं के प्रति व्यापक समझ विकसित करना था। इसके साथ ही कला शिक्षा को स्थानीय संस्कृति, रचनात्मकता, कौशल और विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।

कला शिक्षा विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. कृष्णानंद बिजल्वान, सहायक निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड द्वारा किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में कला शिक्षा की आवश्यकता और अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि कला शिक्षा विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ स्थानीय लोक संस्कृति, परम्पराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ उषा कटियार समन्वयक  ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा में कला को केवल एक अतिरिक्त गतिविधि के रूप में न देखकर सीखने और व्यक्तित्व निर्माण के एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया जाना चाहिए।

बच्चों की भावनाओं और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है कला

कार्यशाला में विशेषज्ञ के रूप में डॉ. शरबरी बनर्जी, संगीत विशेषज्ञ, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली ने उत्तराखण्ड के संदर्भ में कला शिक्षा की ‘कृति’ पुस्तिका की मूल भावना और उसके शैक्षिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि कला शिक्षा विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं, विचारों और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है। कलात्मक प्रतिभाएं बच्चों में स्वाभाविक रूप से विद्यमान होती हैं और विभिन्न गतिविधियों एवं कला विधाओं के माध्यम से सामने आती हैं। शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका इन प्रतिभाओं को पहचानने, उभारने और प्रोत्साहित करने की है।

उन्होंने कला शिक्षा के मूल्यांकन में केवल अंतिम प्रस्तुति या प्रदर्शन के बजाय विद्यार्थी की सहभागिता, सहयोग, सृजनात्मकता, अभिव्यक्ति और सीखने की प्रक्रिया को भी महत्व देने पर बल दिया। इस दौरान पुस्तिका की विषयवस्तु एवं प्रस्तावित गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा-परिचर्चा की गई।

रचनात्मकता के अनुरूप हो कला शिक्षा का मूल्यांकन

मनोज बहुगुणा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में कला शिक्षा में नवाचार, रचनात्मकता और मूल्यांकन की नवीन पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कला आधारित गतिविधियों के आकलन में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की उपयोगिता पर विशेष ध्यान आकर्षित किया और बताया कि विद्यार्थियों की प्रगति को केवल अंकों तक सीमित न रखकर उनकी रचनात्मक यात्रा और कौशल विकास को भी देखा जाना आवश्यक है।

रूब्रिक आधारित मूल्यांकन और नए आकलन तरीकों पर चर्चा

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ऊषा कटियार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 (NCF 2023) के आलोक में कला शिक्षा के आकलन एवं मूल्यांकन की समझ विकसित करने पर चर्चा की।

उन्होंने विशेष रूप से रूब्रिक आधारित मूल्यांकन के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि कला, संगीत, नृत्य एवं रंगमंच जैसी विधाओं में विद्यार्थियों की सहभागिता, मौलिकता, रचनात्मकता, प्रस्तुतीकरण, सहयोग एवं कौशल विकास को किस प्रकार व्यवस्थित रूप से आंका जा सकता है।

डिजिटल वीडियो एवं स्क्रिप्ट निर्माण भी बना कार्यशाला का हिस्सा

कार्यशाला में शिक्षकों को डिजिटल वीडियो निर्माण एवं स्क्रिप्ट की समझ विकसित करने के उद्देश्य से SCERT देहरादून द्वारा निर्मित संगीत आधारित डिजिटल कंटेंट का प्रस्तुतीकरण भी किया गया।

डिजिटल संसाधनों के माध्यम से कला एवं संगीत शिक्षण को अधिक रोचक, रचनात्मक, गतिविधि आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। शिक्षकों को अपनी शिक्षण विधियों में नवीनता एवं डिजिटल संसाधनों का सार्थक समावेश करने के लिए प्रेरित किया गया।

लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जरूरी — वंदना गर्ब्याल

निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड वंदना गर्ब्याल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए उत्तराखण्ड के लोक संगीत एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने संगीत के विविध स्वरूपों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मंशा एवं अनुशंसाओं के अनुरूप कला शिक्षा को विद्यालयी व्यवस्था में सार्थक रूप से शामिल करने पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने समर्पण और साधना को संगीत का प्राण बताते हुए कहा कि संगीत शिक्षा बच्चों में संवेदनशीलता एवं नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही संगीत एवं कला शिक्षा विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगारपरक कौशल, बहुमुखी प्रतिभा और विभिन्न व्यावसायिक अवसरों से परिचित कराने में भी सहायक हो सकती है।

‘कृति’ बच्चों को अपनी संस्कृति पर गौरव करना सिखाएगी

अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड ने कहा कि कला शिक्षा की ‘कृति’ पुस्तिका बच्चों को अपनी संस्कृति, परम्पराओं एवं स्थानीय विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे विद्यार्थी अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति सम्मान और गौरव की भावना विकसित कर सकेंगे।

उन्होंने कार्यशाला में प्रस्तुत संगीत आधारित डिजिटल वीडियो की सराहना करते हुए इसे संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक नवीन, रचनात्मक और उपयोगी पहल बताया।

कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों एवं DIETs से जुड़े लगभग 600 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने ‘कृति’ पुस्तिका और कला शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इनमें कला शिक्षा हेतु प्रशिक्षण साहित्य उपलब्ध कराने और नियमित प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन, कला, संगीत, नृत्य एवं रंगमंच के लिए अलग-अलग ओरिएंटेशन, विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड में कला शिक्षा को उचित स्थान देने, आवश्यक कला एवं संगीत शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यालयों में वाद्ययंत्र उपलब्ध कराने तथा कला-संगीत-नृत्य-रंगमंच की सामूहिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त कक्ष एवं संसाधन उपलब्ध कराने जैसे सुझाव प्रमुख रहे।

कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि कला शिक्षा केवल चित्रकला, संगीत, नृत्य या रंगमंच तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चे की रचनात्मकता, संवेदनशीलता, आत्म-अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक चेतना, सहयोग, आत्मविश्वास और कौशल विकास का सशक्त माध्यम है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और NCF 2023 की भावना के अनुरूप कला को शिक्षा के साथ जोड़ना तथा स्थानीय कला एवं संस्कृति को विद्यालयी सीखने का हिस्सा बनाना बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य के लिए आवश्यक रचनात्मक क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

लगभग 600 प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, डिजिटल कंटेंट के प्रदर्शन तथा व्यापक चर्चा-परिचर्चा के साथ कार्यशाला का समापन अपराह्न 2:00 बजे हुआ।