कक्षा 6 ‘कृति’ पुस्तिका पर राज्य स्तरीय ऑनलाइन अभिमुखीकरण कार्यशाला में 600 शिक्षकों की सहभागिता
देहरादून, 22 अगस्त 2026 | SCERT उत्तराखण्ड
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा दिनांक 22 अगस्त 2026 को कक्षा 6 की कला शिक्षा ‘कृति’ पुस्तिका के संदर्भ में कला, संगीत, नृत्य एवं रंगमंच विषयों पर राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का संचालन वर्चुअल लैब, विद्या समीक्षा केंद्र (VSK), उत्तराखण्ड के माध्यम से किया गया, जिसमें प्रदेश के समस्त जनपदों एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) से लगभग 600 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों में कला शिक्षा की अवधारणा को स्पष्ट करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में कला शिक्षा में आकलन एवं मूल्यांकन की भूमिका को समझना तथा सामूहिक कलाओं के प्रति व्यापक समझ विकसित करना था। इसके साथ ही कला शिक्षा को स्थानीय संस्कृति, रचनात्मकता, कौशल और विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।
कला शिक्षा विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. कृष्णानंद बिजल्वान, सहायक निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड द्वारा किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में कला शिक्षा की आवश्यकता और अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि कला शिक्षा विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ स्थानीय लोक संस्कृति, परम्पराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ उषा कटियार समन्वयक ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा में कला को केवल एक अतिरिक्त गतिविधि के रूप में न देखकर सीखने और व्यक्तित्व निर्माण के एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
बच्चों की भावनाओं और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है कला
कार्यशाला में विशेषज्ञ के रूप में डॉ. शरबरी बनर्जी, संगीत विशेषज्ञ, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली ने उत्तराखण्ड के संदर्भ में कला शिक्षा की ‘कृति’ पुस्तिका की मूल भावना और उसके शैक्षिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि कला शिक्षा विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं, विचारों और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है। कलात्मक प्रतिभाएं बच्चों में स्वाभाविक रूप से विद्यमान होती हैं और विभिन्न गतिविधियों एवं कला विधाओं के माध्यम से सामने आती हैं। शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका इन प्रतिभाओं को पहचानने, उभारने और प्रोत्साहित करने की है।
उन्होंने कला शिक्षा के मूल्यांकन में केवल अंतिम प्रस्तुति या प्रदर्शन के बजाय विद्यार्थी की सहभागिता, सहयोग, सृजनात्मकता, अभिव्यक्ति और सीखने की प्रक्रिया को भी महत्व देने पर बल दिया। इस दौरान पुस्तिका की विषयवस्तु एवं प्रस्तावित गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा-परिचर्चा की गई।
रचनात्मकता के अनुरूप हो कला शिक्षा का मूल्यांकन
मनोज बहुगुणा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में कला शिक्षा में नवाचार, रचनात्मकता और मूल्यांकन की नवीन पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कला आधारित गतिविधियों के आकलन में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की उपयोगिता पर विशेष ध्यान आकर्षित किया और बताया कि विद्यार्थियों की प्रगति को केवल अंकों तक सीमित न रखकर उनकी रचनात्मक यात्रा और कौशल विकास को भी देखा जाना आवश्यक है।
रूब्रिक आधारित मूल्यांकन और नए आकलन तरीकों पर चर्चा
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ऊषा कटियार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 (NCF 2023) के आलोक में कला शिक्षा के आकलन एवं मूल्यांकन की समझ विकसित करने पर चर्चा की।
उन्होंने विशेष रूप से रूब्रिक आधारित मूल्यांकन के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि कला, संगीत, नृत्य एवं रंगमंच जैसी विधाओं में विद्यार्थियों की सहभागिता, मौलिकता, रचनात्मकता, प्रस्तुतीकरण, सहयोग एवं कौशल विकास को किस प्रकार व्यवस्थित रूप से आंका जा सकता है।
डिजिटल वीडियो एवं स्क्रिप्ट निर्माण भी बना कार्यशाला का हिस्सा
कार्यशाला में शिक्षकों को डिजिटल वीडियो निर्माण एवं स्क्रिप्ट की समझ विकसित करने के उद्देश्य से SCERT देहरादून द्वारा निर्मित संगीत आधारित डिजिटल कंटेंट का प्रस्तुतीकरण भी किया गया।
डिजिटल संसाधनों के माध्यम से कला एवं संगीत शिक्षण को अधिक रोचक, रचनात्मक, गतिविधि आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। शिक्षकों को अपनी शिक्षण विधियों में नवीनता एवं डिजिटल संसाधनों का सार्थक समावेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
लोक संगीत और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जरूरी — वंदना गर्ब्याल
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड वंदना गर्ब्याल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए उत्तराखण्ड के लोक संगीत एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने संगीत के विविध स्वरूपों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मंशा एवं अनुशंसाओं के अनुरूप कला शिक्षा को विद्यालयी व्यवस्था में सार्थक रूप से शामिल करने पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने समर्पण और साधना को संगीत का प्राण बताते हुए कहा कि संगीत शिक्षा बच्चों में संवेदनशीलता एवं नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही संगीत एवं कला शिक्षा विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगारपरक कौशल, बहुमुखी प्रतिभा और विभिन्न व्यावसायिक अवसरों से परिचित कराने में भी सहायक हो सकती है।
‘कृति’ बच्चों को अपनी संस्कृति पर गौरव करना सिखाएगी
अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड ने कहा कि कला शिक्षा की ‘कृति’ पुस्तिका बच्चों को अपनी संस्कृति, परम्पराओं एवं स्थानीय विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे विद्यार्थी अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति सम्मान और गौरव की भावना विकसित कर सकेंगे।
उन्होंने कार्यशाला में प्रस्तुत संगीत आधारित डिजिटल वीडियो की सराहना करते हुए इसे संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक नवीन, रचनात्मक और उपयोगी पहल बताया।
कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों एवं DIETs से जुड़े लगभग 600 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने ‘कृति’ पुस्तिका और कला शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इनमें कला शिक्षा हेतु प्रशिक्षण साहित्य उपलब्ध कराने और नियमित प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन, कला, संगीत, नृत्य एवं रंगमंच के लिए अलग-अलग ओरिएंटेशन, विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड में कला शिक्षा को उचित स्थान देने, आवश्यक कला एवं संगीत शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यालयों में वाद्ययंत्र उपलब्ध कराने तथा कला-संगीत-नृत्य-रंगमंच की सामूहिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त कक्ष एवं संसाधन उपलब्ध कराने जैसे सुझाव प्रमुख रहे।
कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि कला शिक्षा केवल चित्रकला, संगीत, नृत्य या रंगमंच तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चे की रचनात्मकता, संवेदनशीलता, आत्म-अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक चेतना, सहयोग, आत्मविश्वास और कौशल विकास का सशक्त माध्यम है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और NCF 2023 की भावना के अनुरूप कला को शिक्षा के साथ जोड़ना तथा स्थानीय कला एवं संस्कृति को विद्यालयी सीखने का हिस्सा बनाना बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य के लिए आवश्यक रचनात्मक क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
लगभग 600 प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, डिजिटल कंटेंट के प्रदर्शन तथा व्यापक चर्चा-परिचर्चा के साथ कार्यशाला का समापन अपराह्न 2:00 बजे हुआ।