Thursday, March 14, 2024

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का हेलसिंकी विश्वविद्यालय का भ्रमण उत्तराखंड के शिक्षा क्षेत्र में नई उम्मीदें

 

देहरादून, उत्तराखंड - उत्तराखंड प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का हेलसिंकी विश्वविद्यालय का भ्रमण उत्तराखंड के शिक्षा क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

डॉ. रावत ने अपने भ्रमण के दौरान हेलसिंकी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों का विस्तृत अध्ययन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्लेफुल लर्निंग सेंटर व पुस्तकालय का भी अवलोकन किया, जहां उन्हें बच्चों के शिक्षा में खेल गतिविधियों के महत्व का अनुभव मिला।

डॉ. रावत ने अपने भ्रमण के दौरान हेलसिंकी विश्वविद्यालय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में MOU किए जाने की आवश्यकता को जताया। उन्होंने विचार किया कि उत्तराखंड और फिनलैंड के बीच छात्रों के एक्सचेंज प्रोग्राम का संचालन किया जा सकता है, जो दोनों देशों के छात्रों को एक-दूसरे के शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण का अनुभव करने का मौका देगा।

इसी दौरान उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था के विकास को लेकर विभागीय सचिव रविनाथ रामन ने भी हेलसिंकी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के साथ मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने फिनलैंड की तर्ज पर प्लेफुल लर्निंग सेंटर की स्थापना के लिए भी बातचीत की। यहाँ निदेशक, अकादमिक शोध एवम प्रशिक्षण वंदना गर्बयाल, अपर निदेशक एससीईआरटी अजय नौडियाल, संयुक्त निदेशक कंचन देवराडी, बी पी मैंदोली, एम एम जोशी, प्रद्युम्न रावत, डॉ दीपक प्रताप व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

इस महत्वपूर्ण कदम के तहत उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में नए उत्साह और ऊर्जा का संचार किया जा सकता है, जो अगले कुछ वर्षों में प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

Wednesday, March 13, 2024

पी एम ई विद्या चैनल हेतु ई कंटेन्ट निर्माण : शिक्षकों के कंटेन्ट चयन प्रक्रिया

 

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संस्कृत विनोदिनी भाग-1 (कक्षा 9-10) पुस्तक विकास कार्यशाला

 

उत्तराखंड एस सी ई आर टी द्वारा संस्कृत विनोदिनी भाग-1 (कक्षा 9-10) पुस्तक विकास कार्यशाला- एन ई पी 2020

उत्तराखंड एस सी ई आर टी ने संस्कृत शिक्षा को समृद्ध करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्कृत विनोदिनी भाग-1 पुस्तक के विकास के लिए एन ई पी 2020 कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला मुफ्त पाठ्यपुस्तक के रूप में नई पाठ्यक्रम के तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:

  1. निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के निर्देश: यह कार्यशाला अध्ययन सामग्री, शिक्षण पद्धति और शैक्षिक उपकरणों के निर्माण और संदर्भित शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए निर्देशों को प्रदान करेगी।
  2. समय पर पूर्ण करें पुस्तक का निर्माण और सम्पादन: इस कार्यशाला में समयबद्धता को महत्वपूर्ण मानते हुए, पुस्तक के निर्माण और सम्पादन के लिए समय सीमा तय की जाएगी।
  3. सभी लेखकों से लिए गए परामर्श: इस प्रक्रिया में संग्रहित होने वाले सभी लेखकों के सुझावों और परामर्शों का महत्वपूर्ण रूप से मूल्यांकन किया जाएगा।
  4. हिन्दी पुस्तक के साथ संस्कृत सहपुस्तिका: अध्यापकों और छात्रों को दोनों भाषाओं में समृद्ध साहित्य का लाभ उठाने के लिए, हिंदी पुस्तक के साथ संस्कृत सहपुस्तिका भी डिजाइन की जाएगी।

यह कार्यशाला संस्कृत शिक्षा को मजबूती प्रदान करने के लिए एक प्रभावी कदम है और उत्तराखंड के शैक्षिक क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करेगा।