Tuesday, November 05, 2024

एस सी ई आर टी सभागार मे सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण (प्रवक्ता): मुख्य संदर्भदाता प्रशिक्षण शुरू

 


एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड में वर्ष 2024-25 में प्रदेश के हिन्दी एवं जीव विज्ञान विषयों के प्रवक्ताओं के सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण हेतु मुख्य संदर्भदाताओं का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। प्रशिक्षण में प्रदेश के डायट्स के सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण के समन्वयक और विद्यालयों के हिन्दी तथा जीव विज्ञान विषयों के अनुभवी प्रवक्ता सहित 75 सदस्य प्रतिभाग कर रहे हैं। इस वर्ष प्रदेश में हिन्दी, राजनीति विज्ञान, इतिहास तथा जीव विज्ञान के प्रवक्ताओं का सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण प्रस्तावित है। प्रथम चरण में हिन्दी एवं जीव विज्ञान विषयों के प्रवक्ताओं के प्रशिक्षण हेतु मुख्य संदर्भदाता तैयार किये जा रहे हैं।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए निदेशक श्रीमती बन्दना गर्ब्याल ने कहा कि प्रशिक्षण शिक्षकों के शिक्षण-कौशल के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता में बृद्धि करता है। यह प्रशिक्षण हिन्दी एवं जीव विज्ञान विषयों के शिक्षकों को शैक्षिक नवाचार एवं परिवर्तनों से अवगत करायेगा तथा कक्षा-शिक्षण को रोचक और गतिविधिपूर्ण बनायेगा।

अपर निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी. श्रीमती आशा पैन्यूली ने कहा कि इस वर्ष के प्रशिक्षण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा शिक्षा के क्षेत्र में नवीन विषयों को शामिल किया गया है जो शिक्षकों को कक्षा-शिक्षण में सहायक होंगे। अपर निदेशक श्री अजय कुमार नौडियाल  के अनुसार यह कार्यशाला प्रतिभागियों के क्षमता संवर्धन मे कारगर होगी । संयुक्त निदेशक कंचन देवराड़ी  ने कहा कि इस प्रशिक्षण में डायट्स की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम का राज्य स्तर से नियमित अनुश्रवण किया जायेगा।

सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानन्द बिजल्वाण ने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता प्रतिभागियों के सकारात्मक दृष्टिकोण पर निर्भर करती है, अतः प्रतिभागियों की प्रशिक्षण में अधिकतम सहभागिता और सक्रियता आवश्यक है।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रमेश पन्त ने विगत वर्ष के प्रवक्ता प्रशिक्षण का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया तथा इस वर्ष के प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल्स का विकास किया जा चुका है तथा डायट्स में यह प्रशिक्षण सम्बन्धित विषय के प्रवक्ताओं को दिया जायेगा।

डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला ने इस वर्ष के प्रशिक्षण के बिन्दुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की और कहा कि इस वर्ष का प्रशिक्षण 5 दिवसीय होगा जिसमें 3 दिन पैडागॉजी से सम्बन्धित विषय तथा 2 दिन विषयों के कठिन स्थलों पर प्रशिक्षण दिया जायेगा। यह प्रशिक्षण विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। इस प्रशिक्षण में एस.सी.ई.आर.टी. के साथ डायट्स की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

इस प्रशिक्षण में एस.सी.ई.आर.टी. से विषय विशेषज्ञ के रूप में हिन्दी में डॉ. शक्ति प्रसाद सिमल्टी, इतिहास में डा. दीपक प्रताप सिंह, जीव विज्ञान में अखिलेश डोभाल, प्रवीन चन्द्र पोखरियाल तथा डॉ. रंजन कुमार भट्ट मार्गदर्शन कर रहे हैं।

सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण 2024-25 की कार्ययोजना

       5 दिनों के प्रशिक्षण में पैडागॉजी एवं विषयगत बिन्दु।

       तीन दिन पैडागॉजी एवं दो दिन विषयगत।

       राज्य स्तर पर मुख्य संदर्भदाताओं का प्रशिक्षण।

       जनपद स्तर पर डायट्स विषयगत प्रवक्ताओं का प्रशिक्षण।

       जिला स्तर पर डायट के सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण के समन्वयक के द्वारा प्रशिक्षण का समन्वयन।

       भावी प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण आकलन

       प्रशिक्षण पूर्व आकलन- प्रशिक्षण से पूर्व

       प्रशिक्षण पश्चात आकलन- प्रशिक्षण के अन्त में

सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण 2024-25 हेतु मुख्य संदर्भदाता प्रशिक्षण की समय-सारणी

प्रथम दिवस-

       राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 का परिचय

       विद्यालयी शिक्षा विभाग के अन्तर्गत विविध छात्रवृत्ति परीक्षाएं

       निर्देशन एवं परामर्श

द्वितीय दिवस-

       स्वजागरूकता का विकास

       कक्षा-कक्ष शिक्षण में आई.सी.टी. का प्रयोग एवं साइबर सुरक्षा

       राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सन्दर्भ में विद्यार्थियों में 21वीं सदी के कौशलों का विकास

       राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सन्दर्भ में गुणवत्तायुक्त शिक्षा

तृतीय दिवस-

       कार्यस्थल में आचरण के सिद्धान्त

       जेण्डर संवेदनशीलता

       मूल्यांकन एवं प्रश्नपत्र निर्माण

       विद्यार्थियों एवं अध्यापकों का तनाव प्रबंधन

चतुर्थ दिवस एवं पंचम दिवस-

       विषयगत कठिन बिन्दुओं पर प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के सत्रों की गतिविधियाँ

  • समूह चर्चा
  • ब्रैन स्टॉर्मिंग
  • समूह में प्रस्तुतीकरण
  • ग्रुप रीडिंग
  • व्याख्यान
  • प्रतिदिन विषय के एक कठिन टॉपिक का कक्षा-शिक्षण

सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण 2024-25 के अनुश्रवण की कार्ययोजना

       डायट द्वारा नियमित रूप से

       जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारियों के द्वारा

       मण्डल स्तर पर मण्डलीय अधिकारियों के द्वारा

       राज्य स्तर पर- एस.सी.ई.आर.टी. तथा राज्य स्तरीय अधिकारियों के द्वारा

(रिपोर्ट- डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला, प्रवक्ता, एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड, देहरादून)

छात्रों की समझ की होगी परख, एनसीईआरटी ने जनपद स्तरीय समन्वयकों को दिया प्रशिक्षण


उत्तराखंड सहित देश के अन्य राज्यों में स्कूली बच्चों के अधिगम स्तर के आकलन हेतु राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली द्वारा ‘परख – राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024’ का आयोजन किया जाएगा। उत्तराखंड में इसके क्रियान्वयन के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। सर्वेक्षण के आयोजन हेतु राज्य के डी.एल.सी (जनपदीय शिक्षा अधिकारी) तथा जनपदीय मास्टर ट्रेनर्स (डायट फैकल्टी) का अभिमुखीकरण एस.सी.ई.आर.टी, उत्तराखण्ड के सभागार में संपन्न हुआ। “परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024” आगामी 4 दिसम्बर 2024 को किया जाना प्रस्तावित है।


प्रशिक्षण में डॉ. इन्द्राणी भादुड़ी, सी.ई.ओ., “परख” एन.सी.ई.आर.टी नई दिल्ली ने प्रतिभागियों को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित किया। एन.सी.ई.आर.टी से आए संदर्भदाता द्वारा भी महत्वपूर्ण बिन्दुओं की जानकारी दी गई। इस दौरान उन्होंने सर्वे संबंधी प्रमुख विशेषताएँ, राज्य, जनपद, आर.सी.सी (रिसोर्स कस्टडी सेंटर), जनपद स्तरीय समन्वयक (डी.एल.सी) तथा क्षेत्र अन्वेषक (एफ.आई) आदि के कार्य दायित्वों पर चर्चा की। सर्वे हेतु महत्वपूर्ण सैंपलिंग प्रक्रियाओं पर जानकारी प्रदान कर भ्रम दूर किए गए। सैंपल से संबंधित स्कूल लेवल सैंपलिंगसेक्सन सैंपलिंग को विस्तार से समझाया गया। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि सर्वे ग्रेड 3, 6 और 9 के छात्रों के लिए किया जाएगा, जिसमें उनकी पिछली कक्षाओं की दक्षताओं का भी आकलन होगा। सर्वेक्षण के लिए छात्र प्रश्नावली, शिक्षक प्रश्नावली और स्कूल प्रश्नावली का उपयोग किया जाएगा। यह सर्वे पेपर बेस्ड और ओ.एम.आर आधारित होगा, जिसमें ग्रेड 3 और 6 के लिए भाषा, गणित और द वर्ल्ड अराउंड अस, तथा ग्रेड 9 के लिए भाषा, गणित, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान जैसे विषयों का आकलन किया जाएगा।

परख सर्वेक्षण एन.सी.ई.आर.टी और सी.बी.एस.ई के संयुक्त प्रयासों से पूरे देश में संपन्न किया जा रहा है।

इस अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल ने कहा कि यह सर्वेक्षण राज्य के भावी शैक्षिक हस्तक्षेपों, क्रियाकलापों, कार्यक्रमों और योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी को अपने-अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए, क्योंकि यह कार्य सभी के सम्मिलित प्रयासों से ही सफल हो सकता है।

कार्यक्रम में अपर निदेशक आशा रानी पैन्यूली, संयुक्त निदेशक कंचन देवराड़ीडॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी, डॉ. दीपक प्रताप सिंह, तथा भुवनेश्वर प्रसाद पन्त सहित कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी ने अपनी-अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाओं और सुझावों के साथ सर्वेक्षण के महत्व और उसकी सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदमों पर जोर दिया।

रिपोर्ट प्रेस नोट : भुवनेश पंत 

Monday, November 04, 2024

एससीईआरटी उत्तराखंड: "शिक्षकों के लिए आईसीटी उपकरणों के आधारभूत अनुप्रयोग" पर जल्द आ रहा है पहला MOOCs


राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) उत्तराखंड जल्द ही राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए अपने पहले मूक्स  (मासिव ओपन ऑनलाइन कोर्स) की शुरुआत करने जा रहा है। इस कोर्स का नाम "शिक्षकों के लिए आईसीटी उपकरणों के आधारभूत अनुप्रयोग" है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को कक्षाओं में शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक डिजिटल कौशल प्रदान करना है।

निदेशक के अनुसार 

अकादमिक  शोध एवं प्रशिक्षण  निदेशक, श्रीमती बंदना गर्ब्याल ने कहा कि यह अपने प्रकार का पहला मूक्स  शिक्षकों के लिए सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका उद्देश्य उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले ई-सामग्री निर्माण कौशल प्रदान करना है, जो छात्रों की रुचि बढ़ाने और शिक्षण विधियों में सुधार लाने में सहायक होगा। यह कोर्स जल्द ही उत्तराखंड के सभी एससीईआरटी और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डीआईईटी) के संकाय सदस्यों के लिए उपलब्ध होगा।

कोर्स की रूपरेखा और मॉड्यूल:



यह एक सप्ताह का, 10 घंटे का कोर्स है, जिसे सात मॉड्यूल में विभाजित किया गया है। इनमें शिक्षकों को शिक्षा में आईसीटी के महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे कि उत्पादकता उपकरणों से लेकर सुरक्षित ऑनलाइन प्रथाओं तक का ज्ञान प्रदान किया जाएगा। कोर्स की संरचना इस प्रकार है:
  1. मॉड्यूल 1: शिक्षा में आईसीटी का परिचय

    • इसमें शिक्षण में आईसीटी के महत्व, मल्टीमीडिया सामग्री निर्माण, और आईसीटी एकीकरण के लाभों और चुनौतियों को शामिल किया गया है।
  2. मॉड्यूल 2: बुनियादी उत्पादकता उपकरण

    • गूगल डॉक और शीट्स जैसे उपकरणों का उपयोग करते हुए, वर्ड प्रोसेसिंग, स्प्रेडशीट की मूल बातें और सहयोगी दस्तावेज संपादन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  3. मॉड्यूल 3: प्रस्तुति उपकरण

    • गूगल स्लाइड्स और अन्य मल्टीमीडिया उपकरणों का उपयोग करके शिक्षकों को आकर्षक प्रस्तुतियाँ बनाने के तरीके सिखाए जाते हैं।
  4. मॉड्यूल 4: संचार और सहयोग उपकरण

    • ईमेल और ऑनलाइन संचार के सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में शिक्षा दी जाती है, जिसमें Microsoft Teams और Google Meet का परिचय भी शामिल है।
  5. मॉड्यूल 5: इंटरनेट सुरक्षा और डिजिटल नागरिकता

    • इसमें साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन शिष्टाचार और डिजिटल उपकरणों के जिम्मेदार उपयोग पर आवश्यक जानकारी दी जाती है।
  6. मॉड्यूल 6: पाठ योजनाओं में आईसीटी का एकीकरण

    • शिक्षकों को आईसीटी से समृद्ध पाठ योजनाओं को डिज़ाइन करने और विभिन्न शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए सर्वोत्तम आईसीटी उपकरणों का चयन करने में सहायता प्रदान की जाती है।
  7. मॉड्यूल 7: मूल्यांकन, चिंतन और निष्कर्ष

    • आईसीटी संचालित मूल्यांकन रणनीतियों, एक आईसीटी-साक्षर शिक्षक के रूप में आत्म-मूल्यांकन और कोर्स की संपूर्ण पुनरावृत्ति और मूल्यांकन को शामिल किया गया है।

प्रमुख विशेषताएँ और परिणाम

  • इंटरैक्टिव सामग्री: शिक्षकों को शिक्षण में रुचि बढ़ाने के लिए वीडियो, क्विज़, चर्चाएं और व्यावहारिक गतिविधियों का मिश्रण अनुभव कराया जाएगा।
  • प्रमाण पत्र : अंतिम मूल्यांकन के बाद सफल प्रतिभागियों को एक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जो उनके आईसीटी दक्षताओं को मान्यता देगा।
  • उन्नत शिक्षण कौशल: इस कोर्स को पूरा करने के बाद, शिक्षकों को डिजिटल उपकरणों में दक्षता प्राप्त होगी जो छात्र सहभागिता और सीखने के परिणामों को बेहतर बना सकते हैं।

नामांकन और उपलब्धता

यह कोर्स जल्द ही सभी शिक्षकों के लिए नामांकन के लिए खुलेगा और वी एस के  प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगा। यह कोर्स उत्तराखंड के सभी एससीईआरटी और डीआईईटी के संकाय सदस्यों के लिए भी इस मूल्यवान प्रशिक्षण अवसर का अधिकतम लाभ उठाने अवसर प्राप्त होगा। 

इस परिवर्तनकारी व्यावसायिक विकास कार्यक्रम के नामांकन और अन्य विवरण के लिए बने रहें!