Friday, September 05, 2025

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025: उत्तराखंड के मनीष ममगाई और डॉ. मंजूबाला को मिला सम्मान

 

म्पावत/देहरादून। शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में उत्तराखंड के दो शिक्षकों NSTI देहरादून के ट्रेनिंग ऑफिसर मनीष ममगाई और चंपावत जिले के प्राथमिक विद्यालय च्यूरानी की प्रधानाध्यापिका डॉ. मंजूबाला – को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया।

इस प्रतिष्ठित सम्मान के अंतर्गत चयनित शिक्षकों को सम्मान-पत्र, मेडल और 50,000 रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है।

राष्ट्रपति का संदेश

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा,
“हमारी परंपरा ‘आचार्य देवो भव’ शिक्षक को सर्वोच्च स्थान देती है। शिक्षा भोजन, वस्त्र और आवास की तरह ही मानव गरिमा और सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। शिक्षक का सबसे बड़ा पुरस्कार यही है कि विद्यार्थी जीवनभर उन्हें याद रखें और समाज तथा राष्ट्र के लिए योगदान दें।”

डॉ. मंजूबाला: शिक्षा में नवाचार और त्रिभाषा पद्धति


57 वर्षीय डॉ. मंजूबाला वर्ष 2005 से प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वे बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी और कुमाऊँनी तीन भाषाओं में पढ़ाती हैं। इस त्रिभाषा पद्धति ने बच्चों के लिए शिक्षा को सरल और आनंददायक बना दिया है।
  • वे केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यार्थियों को भी अंग्रेजी पढ़ाती हैं।

  • विद्यालय समय के बाद इवनिंग क्लासेस चलाकर कमजोर बच्चों को अतिरिक्त सहयोग देती हैं।

  • स्काउट एवं गाइड गतिविधियों में भी सक्रिय योगदान देती हैं।

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में जिस त्रिभाषा पद्धति को प्रोत्साहित किया जा रहा है, उसका जीवंत उदाहरण डॉ. मंजूबाला का कार्य है।

मनीष ममगाई: युवाओं को कौशल और रोजगार से जोड़ने का कार्य

NSTI देहरादून में ट्रेनिंग ऑफिसर मनीष ममगाई ने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

  • उन्होंने युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के लिए कई नवाचारी पहलें कीं।

  • कौशल प्रशिक्षण के जरिए नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उनका काम सराहनीय है।

  • वे इंडस्ट्री और शिक्षा जगत के बीच सेतु का कार्य कर रहे हैं, ताकि छात्र केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें बल्कि बेहतर रोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकें।

उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण

डॉ. मंजूबाला और मनीष ममगाई की उपलब्धि उत्तराखंड की शिक्षा और कौशल विकास व्यवस्था के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण है। यह सम्मान न केवल इन दोनों शिक्षकों के व्यक्तिगत समर्पण का परिणाम है, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रहे सकारात्मक बदलावों का भी प्रतीक है। यह सम्मान इस बात का संदेश देता है कि शिक्षा और कौशल विकास में नवाचार, समर्पण और सेवा भाव से कार्य करने वाले शिक्षक ही राष्ट्र निर्माण की सच्ची नींव हैं।

अब स्कूलों में 240 दिन चलेंगी कक्षाएं – नई रूपरेखा को मिली मंजूरी

 

उत्तराखंड के विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रदेश के सभी स्कूलों में कुल 240 दिन नियमित कक्षाएं संचालित होंगी, जबकि परीक्षा संचालन के लिए 20 कार्यदिवस अलग से निर्धारित किए गए हैं इस तरह पूरे शैक्षिक वर्ष में विद्यार्थियों को और अधिक समय अध्ययन एवं सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियों के लिए मिलेगा।

पाठ्यचर्या की रूपरेखा को मिली मंजूरी

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार की गई नई पाठ्यचर्या की रूपरेखा को टास्क फोर्स ने मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत प्रति सप्ताह 32 घंटे का शैक्षिक समय तय किया गया है। साथ ही, सहशैक्षिक गतिविधियों और परीक्षा रहित दिनों के लिए 10–10 दिन आरक्षित रखे गए हैं।

NEP-2020 की सिफारिशों पर आधारित

नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों पर आधारित है। नीति के तहत देशभर में कुल 297 टास्क फोर्स बनाए गए, जिनमें से 202 टास्क फोर्स राज्यों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर गठित किए गए। इसी क्रम में उत्तराखंड ने भी अपनी रिपोर्ट और सुझाव केंद्र सरकार को भेजे हैं।

शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान

नई पाठ्यचर्या की रूपरेखा में आधारित शिक्षा, पर्यावरणीय संरक्षण, स्वावलंबन, मूल्यपरक शिक्षा, खेलकूद, कला, और डिजिटल दक्षता जैसे विषयों को विशेष महत्व दिया गया है।
इसके अलावा –

  • पाठ्यपुस्तकों का चयन,

  • शिक्षा शास्त्र और मूल्यांकन,

  • विषयवार दिशा-निर्देश भी शामिल किए गए हैं।

स्कूलों के लिए चौथा और पाँचवाँ आयाम

रूपरेखा में विद्यालयी शिक्षा के लिए चौथे और पाँचवें आयाम भी जोड़े गए हैं। इनमें विद्यालयी शिक्षा तंत्र की क्षमता वृद्धि, सेवा-शर्तें, शिक्षकों की भूमिका, परिवार और समुदाय की सहभागिता को विशेष रूप से शामिल किया गया है।

उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक

इस रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव शिक्षा रविनाथ रमन, सचिव संस्कृति युगल किशोर पंत, अपर सचिव उच्च शिक्षा ममगाईं, निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौली, निदेशक प्राथमिक शिक्षा रमेश सिंह बोरा, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बन्‍दना गार्ब्याल, अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी, आप्त परियोजना निदेशक डॉ. के.एन. बिजलवाण सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

शिक्षा में सुधार की दिशा में नया कदम

नई व्यवस्था को शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। कक्षाओं की संख्या बढ़ने और शिक्षण समय में वृद्धि से विद्यार्थियों को न केवल पाठ्यक्रम की गहराई से समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा, बल्कि खेल, कला और अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। यह बदलाव प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला साबित हो सकता है और अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करेगा।

Thursday, September 04, 2025

उत्तराखंड में शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षा की नई राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा को मिली मंज़ूरी

 
उत्तराखंड राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में आज ऐतिहासिक कदम उठाया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)–2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा गुणवत्तापरक शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से माननीय शिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत जी की अध्यक्षता में गठित ‘टास्क फोर्स’ की बैठक में ‘विद्यालयी शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा (SCF-SE)’ को औपचारिक अनुमोदन प्रदान किया गया।


सचिवालय स्थित सभाकक्ष में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, उच्च शिक्षा सचिव, तकनीकी शिक्षा सचिव, उद्यान सचिव, संस्कृत शिक्षा सचिव, वित्त विभाग के अधिकारीगण तथा अन्य उच्च पदाधिकारी उपस्थित रहे।


निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक पद्मेन्द्र सकलानी, सहायक निदेशक डॉ  के. एन. विजलवान और रविदर्शन तोपाल सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

नई पाठ्यचर्या की मुख्य विशेषताएँ

निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल ने बहुत ही सहजता के साथ बैठक में राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (SCF–SE, 2025) को विस्तार से समझाया। यह रूपरेखा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है और विद्यालयी शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, व्यवहारिक और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य विशेषताएँ –

  • समान अवसर आधारित शिक्षा : प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराना।

  • व्यावसायिक शिक्षा : बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ व्यावसायिक कौशल सीखने का अवसर।

  • शारीरिक व कला शिक्षा : खेल, स्वास्थ्य और कला को अन्य विषयों के समान महत्व।

  • भारतीय जड़ों से जुड़ाव : पाठ्यचर्या में भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान का समावेश।

  • विषय चयन का विकल्प : कक्षा 11 से छात्रों को अपनी पसंद के विषय संयोजन चुनने की स्वतंत्रता।

  • स्थानीय संदर्भों पर जोर : कृषि, उद्यान, लोककला, हस्तशिल्प, पर्यटन, पर्यावरण और संगीत जैसे विषयों को भी पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना।

  • मूल्य आधारित शिक्षा : पर्यावरणीय चेतना, सामाजिक समरसता, नैतिकता और जीवन-कौशल पर विशेष बल।

  • बहुभाषी शिक्षा : प्रारंभिक कक्षाओं में तीन भाषाओं के साथ स्थानीय भाषाओं और बोलियों का संरक्षण।

राज्य की शिक्षा में नए आयाम

इस नई रूपरेखा के लागू होने के बाद –

  • विद्यालयी शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित होगी।

  • बच्चों को स्थानीय संसाधनों व सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए रोजगारपरक शिक्षा दी जाएगी।

  • हर विद्यालय में साप्ताहिक/वार्षिक गतिविधि दिवस तय होंगे, ताकि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित न रहकर जीवन से जुड़ सके।

  • मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रोजेक्ट आधारित, प्रायोगिक और सतत् बनाया जाएगा।

यह अनुमोदन न केवल उत्तराखंड राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय पहल है। इससे शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, समानता और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार का यह संकल्प है कि आने वाले समय में प्रत्येक बच्चा न केवल ज्ञान प्राप्त करे बल्कि अपनी संस्कृति, कौशल और जीवन मूल्यों से भी गहराई से जुड़ा रहे। निस्संदेह, यह दिन उत्तराखंड की शिक्षा यात्रा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।