Monday, October 05, 2026

उत्तराखण्ड में सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान: 780 शिक्षक बनेंगे जागरूकता के संवाहक

 

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SCERT उत्तराखण्ड की पहल—विद्यालयों से घर और समाज तक पहुँचेगा “सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा” का संदेश

देहरादून। उत्तराखण्ड में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता की आवश्यकता को देखते हुए विद्यालयी शिक्षा के माध्यम से एक व्यापक “सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा जनजागरूकता अभियान 2026-27” शुरू किया जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड की इस पहल के अंतर्गत प्रदेश के 780 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जो आगे विद्यार्थियों, विद्यालय समुदाय और अभिभावकों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुँचाएंगे।

इस अभियान की विशेषता यह है कि सड़क सुरक्षा को केवल यातायात नियमों की जानकारी तक सीमित न रखते हुए इसे जीवन कौशल, जिम्मेदार नागरिकता और व्यवहार परिवर्तन से जोड़ा जाएगा।


अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पहले 60 मुख्य प्रशिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें 13 डायट से 26 प्रवक्ता, 13 जनपदों से 26 शिक्षक तथा SCERT के आठ संकाय सदस्य शामिल होंगे।

इसके बाद ये मुख्य प्रशिक्षक प्रदेश के सभी जनपदों में कुल 780 शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इस प्रकार प्रशिक्षण का प्रभाव विद्यालय स्तर तक पहुँचाने के लिए एक चरणबद्ध मॉडल अपनाया गया है।

प्रशिक्षित शिक्षक अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यालय समुदाय और अभिभावकों तक भी सड़क सुरक्षा का संदेश पहुँचाएंगे।

गतिविधि आधारित होगी सड़क सुरक्षा शिक्षा

अभियान के लिए विशेष सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा शिक्षण सामग्री तैयार की गई है। इसमें सड़क सुरक्षा को केवल व्याख्यान के माध्यम से नहीं, बल्कि गतिविधि आधारित तरीके से समझाने पर जोर दिया गया है।

विद्यार्थियों को यातायात संकेत, हेलमेट, सीट बेल्ट, सुरक्षित सड़क पार करना, जिम्मेदार वाहन व्यवहार और यातायात नियमों के पालन जैसे विषयों से परिचित कराया जाएगा। विद्यालयों में सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान वाद-विवाद, भाषण, निबंध, प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।

माह के अंतिम शनिवार को बिना बस्ते का दिन (Bagless Day) और खाली समय भी सड़क सुरक्षा जागरूकता गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाने की योजना है।

विद्यालयों में बनेंगे “सड़क सुरक्षा कॉर्नर” और समूह

अभियान को एक नियमित विद्यालयी गतिविधि बनाने की दिशा में प्रत्येक विद्यालय में Road Safety Corner तथा Road Safety Group विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के अनुसार वर्ष 2027 तक प्रत्येक विद्यालय में इन समूहों और कॉर्नर को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। इससे सड़क सुरक्षा का संदेश किसी एक कार्यक्रम या दिवस तक सीमित न रहकर विद्यालय की नियमित गतिविधियों का हिस्सा बन सकेगा।

सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंता का विषय

अखबार में प्रकाशित दूसरी रिपोर्ट उत्तराखण्ड में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर स्थिति की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2026 तक आठ महीनों में राज्य में 1,480 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 884 लोगों की मृत्यु तथा 1,626 लोग घायल हुए।

सबसे अधिक 229 मौतें ऊधमसिंह नगर, 213 हरिद्वार, 131 देहरादून और 104 नैनीताल में दर्ज होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि सड़क सुरक्षा केवल परिवहन विभाग या पुलिस का विषय नहीं है, बल्कि इसे शिक्षा, परिवार और समाज की साझा जिम्मेदारी के रूप में देखने की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने भी दिए कड़े निर्देश

इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

समाचार रिपोर्ट के अनुसार बिना हेलमेट और इंश्योरेंस के बाइक चलाने वालों को पेट्रोल न देने, दफ्तरों एवं स्कूलों में बिना हेलमेट अथवा आवश्यक दस्तावेजों के वाहनों के प्रवेश को रोकने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले सरकारी कर्मचारियों की गैरहाजिरी लगाने जैसे कदमों पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, एनपीआर कैमरों की संख्या बढ़ाने, वाहन पंजीकरण एवं संबंधित दस्तावेजों की जांच को मजबूत करने तथा सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का विस्तृत विश्लेषण करने के निर्देश भी दिए गए।

गड्ढों और सड़क संरचना की जिम्मेदारी भी तय करने पर जोर

सड़क सुरक्षा केवल चालक के व्यवहार का प्रश्न नहीं है। बैठक में सड़क पर गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने, समयबद्ध रूप से गड्ढे भरने और दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कर रोकथाम के उपाय विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

यह दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षित सड़क व्यवस्था के लिए Safe Driver, Safe Vehicle और Safe Road Infrastructure—तीनों का मजबूत होना आवश्यक है।

शिक्षा से सड़क सुरक्षा की संस्कृति बनाने की पहल

SCERT उत्तराखण्ड का विद्यालय आधारित अभियान इस व्यापक सड़क सुरक्षा प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बच्चे जब छोटी उम्र से हेलमेट, सीट बेल्ट, यातायात संकेत, सुरक्षित सड़क पार करने और जिम्मेदार सड़क व्यवहार का महत्व समझेंगे, तो इसका प्रभाव केवल उन तक सीमित नहीं रहेगा।

विद्यार्थी अपने परिवार, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय तक भी इन संदेशों को पहुँचा सकते हैं। इस दृष्टि से 780 प्रशिक्षित शिक्षक हजारों विद्यार्थियों के माध्यम से सड़क सुरक्षा के संदेश को समाज के बड़े हिस्से तक ले जाने वाले संवाहक बन सकते हैं।

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Report: CLAP Digital Program: डिजिटल साक्षरता से सशक्त हो रहे उत्तराखण्ड के विद्यार्थी-2026

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SARD एवं SCERT Uttarakhand की संयुक्त पहल से विद्यालयों में तकनीक आधारित सीखने को मिल रही नई दिशा

देहरादून, सितम्बर 2026। बदलते तकनीकी युग में विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उन्हें डिजिटल दुनिया से जोड़ना समय की आवश्यकता बन गया है। इसी दिशा में Continued Learning Access Project (CLAP) के अंतर्गत संचालित CLAP Digital Program उत्तराखण्ड के विद्यालयी विद्यार्थियों में डिजिटल साक्षरता विकसित करने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ रहा है।

यह कार्यक्रम SARD और SCERT Uttarakhand की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल उपकरणों, डिजिटल संसाधनों तथा इंटरैक्टिव शैक्षिक सामग्री के माध्यम से सीखने के नए अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम विद्यार्थियों के शैक्षिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक डिजिटल कौशल, आत्मविश्वास और तकनीक के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर केंद्रित है। 

तकनीक के माध्यम से सीखने का नया अनुभव

CLAP Digital Program केवल विद्यार्थियों को कंप्यूटर अथवा डिजिटल डिवाइस से परिचित कराने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य तकनीक को Teaching-Learning Process का प्रभावी हिस्सा बनाना है। डिजिटल संसाधनों के उपयोग से विद्यार्थियों में Creativity, Critical Thinking, Problem Solving और Self-Directed Learning जैसी क्षमताओं को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विद्यार्थी कक्षा और पाठ्यपुस्तक से आगे बढ़कर स्वयं खोजने, समझने और सीखने के लिए प्रेरित होते हैं। 

सितम्बर 2026 के दौरान CLAP गतिविधियां प्राथमिक से हाईस्कूल स्तर तक विभिन्न विद्यालयों में संचालित की गईं। इनमें Primary Nehrugram, Primary Vani Vihar, Primary Garhwali Colony, Primary Kandoli, Primary Nanoorkheda, Primary/Junior Sundarwala, Junior Kandoli, GIC Nalapani तथा High School Vani Vihar जैसे विद्यालय शामिल रहे। महीने भर की निर्धारित समय-सारणी के अनुसार कक्षा 3 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल शिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 

गणित, विज्ञान और अंग्रेजी को डिजिटल माध्यम से समझने का अवसर

कार्यक्रम की विशेषता यह है कि डिजिटल तकनीक को सीधे विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम से जोड़ा गया है। प्राथमिक स्तर पर बच्चों ने Measurements, Addition, Subtraction, Parts and Wholes, Multiples and Factors, Mapping जैसे गणितीय विषयों के साथ Word Reading, Action Words, Spelling, Common Genders तथा Has/Have जैसी अंग्रेजी गतिविधियों का अभ्यास किया। 

उच्च कक्षाओं में डिजिटल माध्यम से Data Handling, Perimeter and Area, Simple Equations, Comparing Quantities, Squares and Square Roots तथा Linear Equations जैसे गणितीय विषयों को समझाया गया। विज्ञान में Separation of Substances, Plants, Electric Current, Friction, Atoms and Molecules तथा Life Processes जैसे विषयों पर विद्यार्थियों ने अध्ययन किया। 

रिपोर्ट में शामिल तस्वीरें भी इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं—कक्षाओं में विद्यार्थी व्यक्तिगत अथवा साझा लैपटॉप पर सक्रिय रूप से डिजिटल शिक्षण सामग्री के साथ कार्य करते दिखाई देते हैं। इससे पारंपरिक कक्षा को अधिक interactive और learner-centred environment में बदलने की संभावना दिखाई देती है।

विद्यालयों में उत्साहजनक सहभागिता

सितम्बर माह की रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न विद्यालयों में नामांकित CLAP विद्यार्थियों की सहभागिता उत्साहजनक रही। Primary Nanoorkheda में लगभग 69.5%, Garhwali Colony में 68%, Sundarwala में 66%, Junior Kandoli में 65.5%, Primary Kandoli में 64.3%, Nehrugram में 64%, GIC Nalapani में 62.6% तथा Primary Vani Vihar में लगभग 62% विद्यार्थियों ने सत्रों में भाग लिया। 

Government High School Vani Vihar में लगभग 48% सहभागिता दर्ज की गई, जहां कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों ने Linear Equations, Lines and Angles, Polynomials, Atoms and Molecules, Animal Tissues, Carbon and Its Compounds तथा Life Processes जैसे विषयों पर डिजिटल माध्यम से अध्ययन किया। 

चुनौतियों की पहचान भी जरूरी

कार्यक्रम के क्रियान्वयन के दौरान स्थानीय परिस्थितियों का प्रभाव भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार Primary Ladpur में विद्यालय भवन के नवीनीकरण तथा पर्याप्त बैठने की व्यवस्था उपलब्ध न होने के कारण सितम्बर माह में CLAP कक्षाएं आयोजित नहीं हो सकीं। रिपोर्ट में अगले माह भी वाहन भ्रमण प्रभावित होने की संभावना का उल्लेख किया गया है। REPORT CLAP_Uttarakhand Sep-2026

यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल शिक्षा की सफलता केवल तकनीक उपलब्ध कराने पर निर्भर नहीं करती; विद्यालयी आधारभूत संरचना, बैठने की व्यवस्था, नियमित पहुंच और विद्यार्थियों की सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक हैं।

अक्टूबर में और आगे बढ़ेगा डिजिटल अधिगम

CLAP ने अक्टूबर 2026 के लिए भी कक्षा-वार शैक्षिक योजना तैयार की है। प्राथमिक स्तर पर Multiplication, Measurements, Reading Practice, Patterns, Mapping और Tenths & Hundredths जैसे विषय शामिल हैं। Junior High School स्तर पर Whole Numbers, Integers, Motion, Plants, Lines and Angles, Fractions, Respiration, Practical Geometry तथा Metals and Non-metals पर कार्य प्रस्तावित है। 

कक्षा 9 और 10 के लिए Triangles, Quadrilaterals, Force and Laws of Motion, Fundamental Unit of Life, Quadratic Equations, Control and Coordination तथा Reproduction जैसे विषय अक्टूबर की योजना का हिस्सा हैं। 

डिजिटल समानता की दिशा में एक सार्थक प्रयास

CLAP Digital Program का महत्व इस बात में है कि यह विद्यार्थियों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने के साथ technology-enabled learning का वास्तविक अनुभव प्रदान कर रहा है। विद्यालय स्तर पर नियमित डिजिटल अभ्यास बच्चों को भविष्य की शिक्षा, कौशल और डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

SARD और SCERT Uttarakhand की यह संयुक्त पहल डिजिटल साक्षरता को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ते हुए यह संदेश देती है कि तकनीक तभी सार्थक है, जब वह प्रत्येक बच्चे के सीखने, समझने, खोजने और आगे बढ़ने के अवसरों को विस्तृत करे। REPORT CLAP_Uttarakhand Sep-2026

Saturday, October 03, 2026

पोखरी (चमोली) में सामाजिक विज्ञान महोत्सव-2026 का भव्य आयोजन

 

मॉडल, क्विज और भाषण प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, तार्किक चिंतन और सामाजिक चेतना को मिला मंच

पोखरी (चमोली)। विकासखंड पोखरी में सामाजिक विज्ञान महोत्सव-2026 का उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। SCERT उत्तराखण्ड के निर्देशन एवं DIET चमोली के मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मॉडल प्रदर्शनी, सामान्य ज्ञान क्विज और भाषण प्रतियोगिता के माध्यम से अपनी प्रतिभा, ज्ञान, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम खण्ड शिक्षा अधिकारी कुमारी नेहा भट्ट के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कृषि मंडी समिति अध्यक्ष चमोली वीरेंद्र पाल भंडारी तथा विशिष्ट अतिथि सेवा इंटरनेशनल की ब्लॉक कोऑर्डिनेटर लता बड़वाल की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रीति भंडारी, शिक्षा विभाग के अधिकारी, समन्वयक, शिक्षक एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

सामाजिक विज्ञान को जीवन से जोड़ने की पहल

महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशीलता, तार्किक एवं आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति कौशल और नेतृत्व क्षमता का विकास करना रहा। भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम, लैंगिक भेदभाव, धरती एवं पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, पर्यावरण संरक्षण तथा समाज में महिलाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

सामाजिक विज्ञान की ब्लॉक समन्वयक एवं राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका कुसुमलता गड़िया ने कहा कि सामाजिक विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को समाज, इतिहास, संस्कृति, पर्यावरण तथा अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने की दृष्टि प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास हो रहे सामाजिक एवं पर्यावरणीय परिवर्तनों को समझने, प्रश्न पूछने और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया।

प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन

भाषण प्रतियोगिता में भारती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बीणा की भारती ने प्रथम, गिरिसा के कक्षा छह के अभिषेक रावत ने द्वितीय तथा राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, श्रीगढ़ की सांची बर्त्वाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

मॉडल प्रदर्शनी में अंशिका प्रथम, ईशानी द्वितीय और सार्थक तृतीय रहे। वहीं सामान्य ज्ञान क्विज में यूपीएस सिवाई की दीपिका ने प्रथम, यूपीएस सुगी के समर ने द्वितीय तथा यूपीएस पोखरी के साहिल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

मुख्य अतिथि वीरेंद्र पाल भंडारी ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास एवं प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रीति भंडारी ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देते हैं।

महोत्सव के सफल संचालन में कुसुमलता गड़िया, सह-समन्वयक प्रमोद रावत, कला समन्वयक  लता कोहली, विज्ञान समन्वयक संदीप नेगी, मंच संचालक उर्मिला नेगी, प्रेम सिंह चौधरी, पुष्पा नेगी, हेमलता बड़वाल, गायत्री मिंगवाल, रीना सहित शिक्षकों एवं सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

सीखने को कक्षा से समाज तक ले जाने का प्रयास

सामाजिक विज्ञान महोत्सव-2026 ने यह संदेश दिया कि प्रभावी शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों और कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं है। मॉडल निर्माण, क्विज, संवाद और भाषण जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को समाज एवं पर्यावरण को समझने, प्रश्न करने, समाधान खोजने और आत्मविश्वास के साथ अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देती हैं।