Friday, January 30, 2026

राज्य स्तरीय शैक्षिक सेमिनार: सामूहिक सीख के माध्यम से शिक्षण गुणवत्ता की सशक्त पहल

रिपोर्ट सुनिल भट्ट, प्रवक्ता SCERT उत्तराखण्ड 

आज आयोजित राज्य स्तरीय शैक्षिक सेमिनार में प्रदेशभर से आए शिक्षकों द्वारा अपनी उत्कृष्ट शैक्षिक गतिविधियों, नवाचारी शिक्षण पद्धतियों एवं कक्षा-कक्षीय अनुभवों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। यह सेमिनार शिक्षकों के लिए न केवल अपने अनुभव साझा करने का मंच रहा, बल्कि एक-दूसरे से सीखने और अपने पेशेवर कौशल को सुदृढ़ करने का भी सशक्त अवसर सिद्ध हुआ।

बच्चों के सीखने में सकारात्मक और सतत प्रगति सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की पेशेवर क्षमता संवृद्धि की निरंतरता अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विद्यालयी शिक्षा की सीखने–सिखाने की प्रक्रिया में सम्मिलित प्रत्येक शिक्षक के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने कक्षा-कक्षीय अनुभवों, चुनौतियों और प्रयोगों के माध्यम से अपनी पेशेवर दक्षताओं को निरंतर समृद्ध करता रहे।

पेशेवर क्षमता संवर्धन की विभिन्न अधिगम विधाओं में सामूहिक साझेदारी एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है। इस प्रक्रिया में शिक्षक एक-दूसरे के अनुभव सुनते हैं, किए गए प्रयासों से सीखते हैं, सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं और सफल प्रयोगों को सराहते हैं। यह न केवल सीखने की प्रक्रिया को और अधिक पुष्ट करता है, बल्कि शिक्षकों को अपनी कक्षा में अपनाने योग्य नई शिक्षण विधाओं से भी परिचित कराता है।

विगत चार वर्षों से निदेशालय अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण तथा अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा शिक्षकों की इस साझाकरण प्रक्रिया को “शिक्षक सेमिनार” के रूप में संस्थानीकृत करना एक अत्यंत सराहनीय पहल है। राज्यभर के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से आए शिक्षक विकासखंड, जिला एवं राज्य स्तर पर आयोजित सेमिनारों के माध्यम से अपनी शिक्षण पद्धतियों और कक्षा-कक्षीय अभ्यासों को साझा कर रहे हैं, जिससे समूह में सीखने और एक-दूसरे से सीखने की संस्कृति को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है।

इस प्रक्रिया के उत्साहजनक परिणाम विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में निरंतर वृद्धि के रूप में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। विद्यालय भ्रमण, बाल चौपाल, बाल शोध मेलों तथा अन्य शैक्षिक गतिविधियों के दौरान छात्र–छात्राओं से संवाद में यह परिवर्तन अनुभव करना अत्यंत सुखद और प्रेरणादायक है।

प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी राज्य स्तरीय शिक्षक सेमिनार के लिए चयनित विषय “प्रारंभिक शिक्षा में प्रभावी शिक्षण प्रक्रियाएँ” अत्यंत प्रासंगिक है। इस विषय पर चयनित शिक्षक–शिक्षिकाओं द्वारा लिखे गए अपने अनुभवों, अभ्यासों और शिक्षण प्रविधियों को पुस्तिका के रूप में प्रकाशित करने का निर्णय एक सराहनीय और दूरदर्शी कदम है।

इस संपूर्ण प्रक्रिया में अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। फाउंडेशन के सतत मार्गदर्शन, तकनीकी एवं अकादमिक सहयोग के परिणामस्वरूप ही यह राज्य स्तरीय शिक्षक सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। यह साझेदारी राज्य में शिक्षक पेशेवर विकास और शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।

उक्त पुस्तिका के संपादन एवं प्रकाशन में योगदान देने वाले सभी शिक्षक–शिक्षिकाओं, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन तथा निदेशालय अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के सहयोगी अभिकर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। साथ ही, राज्य स्तरीय तीन दिवसीय शिक्षक सेमिनार के सफल एवं सार्थक आयोजन हेतु अग्रिम शुभकामनाएँ।

कौशल बोध के सशक्त क्रियान्वयन की दिशा में एक और कदम

 रिपोर्ट सुनिल भट्ट, प्रवक्ता SCERT उत्तराखण्ड 

SCERT उत्तराखण्ड एवं उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के मध्य MOU हस्ताक्षर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना को धरातल पर उतारने की दिशा में राज्य अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 30 जनवरी 2026 को उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए लागू किए जा रहे ‘कौशल बोध’ विषय के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु की गई है।

‘कौशल बोध’ केवल एक पाठ्य विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में व्यावसायिक समझ, उद्यमशील सोच और जीवनोपयोगी कौशलों के विकास का माध्यम है। NEP 2020 के अनुरूप इस विषय का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रारंभिक अवस्था से ही कार्य-जगत से जोड़ना, Learning by Doing की अवधारणा को मजबूत करना और श्रम की गरिमा के प्रति सम्मान विकसित करना है।

कौशल बोध विषय के शैक्षणिक ढांचे के निर्माण हेतु पूर्व में NCERT द्वारा PSSCIVE, भोपाल के सुझावों के आधार पर कार्य किया गया है। अब इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उद्यम लर्निंग फाउंडेशन जैसी अनुभवी सहयोगी संस्था के साथ यह साझेदारी राज्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

उल्लेखनीय है कि उद्यम लर्निंग फाउंडेशन पूर्व से ही राज्य में संचालित ‘कौशलम् (Kaushalam)’ कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 9 से 10 के विद्यार्थियों के साथ सफलतापूर्वक कार्य कर रही है, जहाँ छात्रों को उद्यमिता की मानसिकता, समस्या समाधान, नवाचार एवं 21वीं सदी के कौशलों के लिए तैयार किया जा रहा है। अब यही अनुभव मिडिल स्कूल स्तर तक विस्तारित होगा।

MOU के प्रमुख उद्देश्य

  • व्यावसायिक अनुभव: कम उम्र से ही विद्यार्थियों को विविध कौशलों और कार्य क्षेत्रों से परिचित कराना।

  • श्रम की गरिमा: प्रत्येक प्रकार के कार्य के प्रति सम्मान और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।

  • उद्यमी मानसिकता: रटने की प्रवृत्ति के बजाय करके सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना।

इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड बंदना गर्ब्याल के मार्गदर्शन में पद्मेंद्र सकलानी (अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड) एवं  रोहित गुप्ता (राज्य प्रबंधक, उद्यम लर्निंग फाउंडेशन) द्वारा किए गए।

इस अवसर पर डॉ. के. एन. बिजल्वाण (सहायक निदेशक),  सुनील भट्ट (समन्वयक – कौशल बोध) तथा अरविन्द बिष्ट (उद्यम लर्निंग फाउंडेशन) सहित अन्य अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

यह MOU न केवल शिक्षक प्रशिक्षण, साहित्य निर्माण (शिक्षक संदर्शिका) और अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करेगा, बल्कि राज्य के विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, कुशल और भविष्य के लिए तैयार नागरिक बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार भी प्रदान करेगा।

Wednesday, January 28, 2026

देश के DIKSHA समन्वयकों एवं तकनीकी सदस्यों के लिए तीन दिवसीय शैक्षिक संवर्धन कार्यशाला शुरू -2026

 

e-Content विकास एवं DIKSHA 2.0 को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

देहरादून | 28–30 जनवरी 2026

भारत सरकार की राष्ट्रीय डिजिटल शैक्षिक अवसंरचना DIKSHA (Digital Infrastructure for Knowledge Sharing) को और अधिक प्रभावी, समावेशी एवं शिक्षक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से केन्द्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET–NCERT) एवं SCERT उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में “Three Days Workshop / Capacity Building Programme for DIKSHA Coordinators on e-Content Development” का आयोजन 28 से 30 जनवरी 2026 तक एन.जे. पोर्टिको, देहरादून में सफलतापूर्वक शुभारंभ किया गया । 

यह कार्यशाला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप DIKSHA को एक सशक्त Learning Management System (LMS) के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही, जिसमें देशभर से राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के DIKSHA समन्वयकों एवं तकनीकी प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

DIKSHA: एक डिजिटल रिपॉज़िटरी से AI-सक्षम LMS तक की यात्रा

DIKSHA ने बीते वर्षों में केवल डिजिटल कंटेंट साझा करने वाले प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर एक AI-सक्षम, अनुकूली और शिक्षार्थी-केंद्रित डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम का स्वरूप ले लिया है। इस तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्यों/UTs की टीमों को:

  • e-Textbook (ETB) निर्माण
  • LMS आधारित कोर्स विकास
  • कंटेंट माइग्रेशन
  • बहुभाषी डिजिटल सामग्री विस्तार
  • और DIKSHA 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यावहारिक रूप से सशक्त बनाना था 

उद्घाटन सत्र: 

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में SCERT उत्तराखण्ड के आर पी. बडोनी  ने कार्यक्रम होस्ट एवं एंकर के रूप में सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल के स्वागत सम्बोधन मे सभी अधिकारियों का देहरादून आगमन पर हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की गई इसके  पश्चात:

  • प्रो. इन्दु कुमार (हेड-DICT, CIET-NCERT) ने कार्यशाला का उद्देश्य, संरचना एवं अपेक्षित परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
  • बंदना गार्ब्याल (निदेशक अकादमिक शोध, SCERT उत्तराखण्ड) ने CIET–NCERT और SCERT के बीच सहयोग को “डिजिटल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय–राज्य साझेदारी का सशक्त मॉडल” बताया।
  • प्रो. अमेन्द्र बेहरा (संयुक्त निदेशक, CIET) ने ऑनलाइन माध्यम से DIKSHA के राष्ट्रीय समन्वय और राज्यों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
  • हरि कुमार (निदेशक, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार ) ने ऑनलाइन संबोधन में DIKSHA को भारत के डिजिटल शिक्षा भविष्य का मेरुदंड बताया।
  • डॉ. रेजाउल करीम (सहा प्रो. CIET-NCERT) ने DIKSHA की संकल्पना, तकनीकी संरचना और आगे की दिशा पर चर्चा की।

अंत में पद्मेन्द्र सकलानी (अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड) द्वारा सभी राज्यों के प्रतिनिधि एवं CIET-NCERT के अधिकारीयों का धन्यवाद करते हुए शभकनाएं दी और बेहतर परिणामों की अपेखा के लिए कार्य करने पर जोर देने का भी आग्रह  किया । इस करकर्म मे उपनिदेशक अजीत भण्डारी ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दी । 

सत्रवार प्रमुख बिंदु:

सत्र 1: भारत में ICT पहल एवं DIKSHA

प्रो. इन्दु कुमार (CIET-NCERT)

इस सत्र में 1972 से लेकर NEP 2020 एवं PM e-VIDYA तक भारत में ICT की यात्रा को रेखांकित किया गया। DIKSHA की प्रमुख विशेषताएँ—

  • अनुकूली शिक्षण (Adaptive Learning)
  • व्यक्तिगत कंटेंट वितरण
  • समावेशी डिजिटल टूल्स  पर विशेष चर्चा हुई

सत्र 2: डिजिटल संसाधन एवं समृद्ध पाठ्यपुस्तक (ETB) विकास

प्रस्तुति: डॉ. रेजाउल करीम

इस सत्र में प्रतिभागियों को DIKSHA 1.0 पर समृद्ध पाठ्यपुस्तक निर्माण का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया। विशेष रूप से:

  • राज्य-विशिष्ट कंटेंट का अवलोकन
  • QR कोड निर्माण एवं वर्गीकरण

का लाइव डेमो डॉ. श्वेता तिवारी (परामर्शदाता, NCERT) द्वारा प्रस्तुत किया गया।

सत्र 3: Personalized Adaptive Learning Framework

प्रस्तुति: डॉ. रेजाउल करीम एवं PMU टीम

इस सत्र में DIKSHA 2.0 के LMS फीचर्स, कोर्स स्ट्रक्चर, असेसमेंट सिस्टम और शिक्षार्थी-केंद्रित डिज़ाइन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

सत्र 4: LMS आधारित कोर्स निर्माण

Pathikrit Diksha PMU–DIKSHA- टीम 

प्रतिभागियों ने स्वयं LMS पर कोर्स तैयार करने की प्रक्रिया को समझा, जिससे राज्यों को अपने स्तर पर गुणवत्तापूर्ण डिजिटल कोर्स विकसित करने में सहायता मिलेगी।

सहभागितापूर्ण गतिविधि

कार्यक्रम के दौरान प्रो. इन्दु कुमार द्वारा Kahoot के माध्यम से एक इंटरैक्टिव क्विज़ आयोजित की गई, जिसने प्रतिभागियों के बीच सीखने की प्रक्रिया को रोचक एवं सहभागितापूर्ण बना दिया।

अगले दिवसों पर राज्य स्तरीय प्रस्तुति, कार्ययोजना एवं भविष्य की राह

तीसरे दिन लगभग 34 राज्यों/UTs एवं CABs द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी  जिसमे  प्रगति ,चुनौतियाँ, श्रेष्ठ अभ्यास और भविष्य की कार्ययोजनाएँ को साझा किया जाएगा 

यह तीन दिवसीय कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि डिजिटल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय–राज्य सहयोग का एक सशक्त मंच सिद्ध होगी । इससे न केवल राज्यों की तकनीकी एवं शैक्षणिक क्षमता में वृद्धि होगी , बल्कि DIKSHA को “One Nation, One Digital Learning Platform” के रूप में और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में ठोस कार्ययोजना बनेगी .

उत्तराखण्ड एस सी ई आर टी के आई टी विभाग के सहायक निदेशक कैलाश डँगवाल ने आयोजन व्यवस्थाओं के प्रवंधन मे सहयोग दिया ताकि सभी सत्रों का संचालन सतत चल सकें , अन्य सहयोगी प्रतिभागीयो मे प्रवक्ता पुष्पा  असवाल, अनुज्ञा पैन्यूली , शिव प्रकाश वर्मा, रमेश पंत , सुशील गैरोला,  तकनीकी टीम से विनय उनियाल , रजत छिब्बर , श्रेय  गुसाईं , अचल थापली , अतुल कथैत, विनोद चौहान, हिमानी भट्ट , सौरभ जोशी आदि ने कार्यशाला संचालन मे योगदान दिया ।