Thursday, October 01, 2026

SCERT उत्तराखण्ड की राष्ट्रीय उपलब्धि: SKOCH Education Gold Award अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी को किया भेंट

 

e-Srijan के माध्यम से बड़े पैमाने पर शिक्षक प्रशिक्षण की राष्ट्रीय पहचान; अब नए MOOCs, आधुनिक फीचर्स और अधिक सशक्त डिजिटल प्रशिक्षण की ओर SCERT

देहरादून, 1 अक्टूबर 2026। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड की डिजिटल शिक्षक-प्रशिक्षण पहल e-Srijan को प्राप्त प्रतिष्ठित SKOCH Award – Education Gold 2026 की उपलब्धि को आज SCERT परिवार के साथ साझा किया गया। अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल ने यह प्रतिष्ठित गोल्ड अवॉर्ड अपर निदेशक, SCERT उत्तराखण्ड,  पद्मेंद्र सकलानी को भेंट करते हुए राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक क्षमता संवर्धन और तकनीक आधारित प्रशिक्षण को बड़े स्तर तक पहुँचाने में उनके नेतृत्व एवं सहयोग के लिए बधाई दी।

यह पुरस्कार SCERT उत्तराखण्ड की पहल “Revolutionising Teacher Training at Scale: Success Story of ICT Massive Open Online Course via e-Srijan” के लिए प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि इस बात को रेखांकित करती है कि सुनियोजित डिजिटल प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट और MOOCs के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षकों तक सतत व्यावसायिक विकास के अवसर पहुँचाए जा सकते हैं।

इस अवसर पर सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण, IT एवं तकनीकी टीम के सदस्यों सहित SCERT के अन्य सहयोगी भी उपस्थित रहे। सभी ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि को पूरे SCERT परिवार और उत्तराखण्ड के शिक्षक समुदाय की सामूहिक सफलता बताया।

अवॉर्ड भेंट करते हुए निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल  ने कहा:

“SKOCH Education Gold Award SCERT उत्तराखण्ड की पूरी टीम, हमारे शिक्षकों और डिजिटल शिक्षा से जुड़े सभी सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों का सम्मान है। e-Srijan के माध्यम से हमारा उद्देश्य केवल ऑनलाइन प्रशिक्षण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक शिक्षक तक गुणवत्तापूर्ण, उपयोगी और आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण पहुँचाना है। यह राष्ट्रीय सम्मान हमें भविष्य में और अधिक नवाचारी MOOCs विकसित करने तथा डिजिटल शिक्षक-प्रशिक्षण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए प्रेरित करता है।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान SCERT के लिए उपलब्धि के साथ-साथ एक नई जिम्मेदारी भी है। परिषद का प्रयास रहेगा कि तकनीक और AI आधारित संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रशिक्षण को अधिक interactive, accessible, inclusive और outcome-oriented बनाया जाए।

“राष्ट्रीय सम्मान हमें गुणवत्ता के अगले स्तर तक जाने की प्रेरणा देता है” — अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी

अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी ने गोल्ड अवॉर्ड प्राप्त करते हुए SCERT की पूरी टीम को बधाई दी और कहा:

“इतने बड़े स्तर पर शिक्षकों के प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक संचालित करना टीमवर्क, निरंतर मॉनिटरिंग और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। SKOCH Gold Award इस सामूहिक प्रयास की राष्ट्रीय स्वीकृति है। अब हमारी प्राथमिकता इस उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए e-Srijan और MOOCs को और अधिक प्रभावी, कौशल-आधारित तथा शिक्षक-केंद्रित बनाना है, ताकि प्रशिक्षण का वास्तविक प्रभाव कक्षा-कक्ष और विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव में दिखाई दे।”

उन्होंने विशेष रूप से प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपयोगिता और कौशल विकास पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।

e-Srijan: बड़े स्तर पर शिक्षक क्षमता संवर्धन का डिजिटल मॉडल

SCERT उत्तराखण्ड द्वारा विकसित VSK से e-Srijan MOOCs ने शिक्षक प्रशिक्षण को समय और स्थान की सीमाओं से आगे ले जाने का प्रयास किया है। ICT से प्रारंभ हुई इस पहल का विस्तार आगे Artificial Intelligence enabled Teaching-Learning, School Administration तथा विभिन्न आवश्यकता-आधारित डिजिटल प्रशिक्षण क्षेत्रों तक किया गया।

ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉडल के माध्यम से शिक्षकों को अपनी सुविधा के अनुसार सीखने, डिजिटल संसाधनों का उपयोग करने, गतिविधियों और आकलन में प्रतिभाग करने तथा प्रशिक्षण पूर्ण करने का अवसर मिलता है। इससे राज्य स्तर पर प्रशिक्षण को scalable और अधिक सुलभ बनाने में सहायता मिली है।

SKOCH Gold की उपलब्धि के बाद SCERT की योजना e-Srijan प्लेटफॉर्म को केवल course-delivery portal तक सीमित न रखते हुए इसे एक अधिक व्यापक Digital Teacher Professional Development Ecosystem के रूप में विकसित करने की है।

आने वाले चरण में पोर्टल को अपग्रेड करते हुए नए MOOCs के साथ बेहतर learner dashboard, course progress tracking, interactive assessment, multimedia content, automated/dynamic certification, mobile-friendly learning, analytics, feedback mechanism तथा AI-enabled learning support जैसे फीचर्स को चरणबद्ध रूप से जोड़ा जा सकता है।

नए MOOCs में Ethical & Responsible AI in Education, AI आधारित Lesson Planning एवं Assessment, 2D/3D Animation एवं Multimedia Content Creation, Inclusive Education एवं Assistive Technologies, Road Safety, AI के माध्यम से Communication एवं English Skills, Research Writing तथा Educational Game Design जैसे समकालीन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान प्रस्तावित है।

इसका उद्देश्य शिक्षक को केवल डिजिटल उपकरणों का उपयोगकर्ता बनाना नहीं, बल्कि उसे डिजिटल कंटेंट निर्माता, नवाचारी शिक्षक और तकनीक-सक्षम शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का नेतृत्वकर्ता बनाना है।

आगे—कक्षा तक प्रभाव पहुँचाना अगला लक्ष्य

SKOCH Education Gold Award ने SCERT उत्तराखण्ड के डिजिटल शिक्षक-प्रशिक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर पहचान प्रदान की है। लेकिन इस पहल की वास्तविक सफलता इस बात में होगी कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और कौशल विद्यालय तथा कक्षा-कक्ष तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुँचते हैं।

इसी दृष्टि से आगामी MOOCs को अधिक practice-oriented, competency-based और classroom-linked बनाने पर जोर दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक केवल प्रमाणपत्र प्राप्त न करें, बल्कि सीखे गए कौशल को lesson planning, assessment, content creation, inclusive teaching और विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने में लागू कर सकें—यह e-Srijan के अगले चरण की महत्वपूर्ण दिशा होगी।

एक उपलब्धि, पूरी टीम का सम्मान

निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल द्वारा SKOCH Education Gold Award को अपर निदेशक  पद्मेंद्र सकलानी को भेंट किया जाना इस उपलब्धि को SCERT की पूरी टीम के साथ साझा करने का प्रतीक बना। यह सम्मान उन अधिकारियों, अकादमिक विशेषज्ञों, तकनीकी टीम, कोर्स समन्वयकों, कंटेंट डेवलपर्स, मास्टर ट्रेनर्स और हजारों शिक्षकों के सामूहिक प्रयास को समर्पित है, जिन्होंने e-Srijan को बड़े स्तर के डिजिटल शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया।

Wednesday, September 30, 2026

SCERTs/SIEs Directors’ Conference 2026 का समापन

 

उत्तराखण्ड–लक्षद्वीप की साझेदारी Peer Learning का उदाहरण; e-Srijan MOOCs, Hackathon 3.0, Inclusive Education और Audio Books की पहल साझा

नई दिल्ली, 30 सितम्बर 2026।

NCERT के तत्वावधान में Department of Teacher Education द्वारा आयोजित तीन दिवसीय Annual Conference of Directors of SCERTs & SIEs 2026-27 का आज CIET-NCERT सभागार, नई दिल्ली में सार्थक विचार-विमर्श, अंतर-राज्यीय सहयोग और भविष्य के क्रियान्वयन की रूपरेखा के साथ समापन हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिवस का मुख्य फोकस “Implementation” रहा, जिसमें विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को जोड़ी (Pair) के रूप में कार्य करते हुए एक-दूसरे की श्रेष्ठ शैक्षिक पहलों का अध्ययन करने तथा उनसे सीखकर State-specific Implementation Framework तैयार करने का अवसर दिया गया।

सम्मेलन के Concept Note में भी स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य केवल राज्यों की Best Practices की पहचान करना नहीं, बल्कि peer learning, interstate collaboration और State-specific Implementation Frameworks के माध्यम से साझा अनुभवों को ठोस संस्थागत कार्रवाई में बदलना है। 

अंतिम दिवस: ‘Shared Experiences’ से आगे बढ़कर ‘Implementation’ पर जोर

30 सितम्बर के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिवस की शुरुआत Check-in & Reflection से हुई। इसके बाद Developing State-specific Implementation Framework, राज्यों द्वारा जोड़ी में कार्य (Work in Pairs), प्रमुख निष्कर्षों को साझा करने तथा अंत में Valedictory Session की व्यवस्था की गई थी। इस प्रकार सम्मेलन के तीन दिनों की यात्रा Reflection → Shared Learning → Implementation की दिशा में आगे बढ़ी।

इस प्रक्रिया में राज्यों ने केवल अपनी उपलब्धियाँ प्रस्तुत नहीं कीं, बल्कि यह विचार किया कि एक राज्य की सफल पहल को दूसरे राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, भाषाई और संस्थागत परिस्थितियों के अनुरूप किस प्रकार अपनाया और अनुकूलित किया जा सकता है।

अंतिम दिवस की एक विशेष गतिविधि के अंतर्गत उत्तराखण्ड और लक्षद्वीप को Pair Group के रूप में साथ कार्य करने का अवसर मिला। दोनों की भौगोलिक एवं जनसांख्यिकीय परिस्थितियाँ अत्यंत भिन्न हैं। एक ओर उत्तराखण्ड में पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुँचाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर लक्षद्वीप की द्वीपीय भौगोलिक परिस्थितियाँ शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए अलग प्रकार की चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं।

इन्हीं भिन्नताओं ने इस साझेदारी को और अधिक उपयोगी बनाया। दोनों पक्षों ने इस बात पर विचार किया कि भूगोल अलग होने के बावजूद डिजिटल और ब्लेंडेड माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण तथा गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों की पहुँच कैसे मजबूत की जा सकती है।

उत्तराखण्ड की ओर से e-Srijan आधारित ऑनलाइन MOOCs एवं डिजिटल प्रशिक्षण मॉडल, जबकि लक्षद्वीप की ओर से उसके offline teacher-training modules और स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण अनुभवों को साझा किया गया।

लक्षद्वीप में e-Srijan MOOCs के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा

SCERT उत्तराखण्ड की ओर से निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण,  बंदना गर्ब्याल ने e-Srijan के अंतर्गत संचालित MOOCs, उनकी संरचना, प्रशिक्षण प्रक्रिया तथा शिक्षक क्षमता संवर्धन में डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग के प्रमुख पहलुओं को लक्षद्वीप के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया।

यह उल्लेखनीय है कि सम्मेलन के आधिकारिक Concept Note में भी Uttarakhand के e-Srijan MOOC को डिजिटल एवं AI-आधारित शिक्षा के संदर्भ में एक उदाहरण के रूप में रेखांकित किया गया है। इसमें e-Srijan द्वारा दूरस्थ पहाड़ी जिलों के शिक्षकों तक structured, self-paced professional learning पहुँचाने का उल्लेख किया गया है।

चर्चा के दौरान लक्षद्वीप की ओर से उत्तराखण्ड की Best Practices, विशेष रूप से e-Srijan के ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को लक्षद्वीप में भी उपयोग करने की संभावनाओं में रुचि व्यक्त की गई। इसके लिए दोनों पक्षों द्वारा आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों, प्रशिक्षण सामग्री और क्रियान्वयन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक साझा Framework/Work Plan विकसित करने पर विचार किया गया।

यह पहल भविष्य में SCERT-to-SCERT knowledge sharing का एक उपयोगी मॉडल बन सकती है, जहाँ किसी राज्य द्वारा विकसित गुणवत्तापूर्ण डिजिटल संसाधनों का दूसरे राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग किया जा सके।

SCERT उत्तराखण्ड के IT Initiatives की विस्तृत जानकारी

SCERT उत्तराखण्ड के IT विभाग से रमेश प्रसाद बडोनी द्वारा e-Srijan एवं अन्य डिजिटल पहलों के व्यावहारिक क्रियान्वयन की प्रक्रिया को विस्तार से साझा किया गया। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि ऑनलाइन कोर्स को किस प्रकार तैयार किया जाता है, प्रशिक्षण सामग्री को डिजिटल स्वरूप दिया जाता है, शिक्षकों तक पहुँचाया जाता है तथा बड़े स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण को व्यवस्थित किया जा सकता है।

उत्तराखण्ड ने अन्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे SCERT उत्तराखण्ड द्वारा विकसित IT एवं डिजिटल शिक्षा पहलों को देखें, अपने संदर्भ में उनकी उपयोगिता का अध्ययन करें और जहाँ संभव हो, सहयोग एवं सहभागिता की संभावनाएँ विकसित करें।

Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में अन्य राज्यों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को सहभागिता का आमंत्रण

इसी क्रम में सम्मेलन के मंच से Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 की जानकारी भी साझा की गई। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया कि वे अपने यहाँ के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों तक Hackathon 3.0 की जानकारी पहुँचाएँ तथा नवाचार, समस्या-समाधान और रचनात्मकता से जुड़े इस मंच के साथ सहभागिता की संभावनाओं को बढ़ाएँ।

इस पहल का उद्देश्य राज्यों के बीच केवल तैयार सामग्री का आदान-प्रदान करना नहीं, बल्कि students and teachers को innovation ecosystem से जोड़ना और राज्यों के बीच collaborative innovation culture विकसित करना भी है।

Inclusive Education और Audio Books की पहल भी साझा

सम्मेलन के दौरान SCERT उत्तराखण्ड की ओर से Inclusive Education से जुड़ी डिजिटल सामग्री एवं Audio Books के उपयोग और विकास की जानकारी भी अन्य राज्यों के साथ साझा की गई।

विशेष रूप से समावेशी शिक्षा में तकनीक के माध्यम से ऐसे संसाधनों को विकसित करने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया गया जो विभिन्न प्रकार की शैक्षिक आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ हों।

यह सम्मेलन के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप भी है, क्योंकि Concept Note SCERTs/SIEs की भूमिका को केवल प्रशिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि technology integration, multilingualism, local context, research, innovation और equitable educational opportunities को बढ़ावा देने वाली अकादमिक संस्थाओं के रूप में देखता है। 

उत्तराखण्ड–लक्षद्वीप Pair Discussion ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—भारत में शिक्षा की परिस्थितियाँ एक जैसी नहीं हैं, इसलिए समाधान भी पूरी तरह एक जैसे नहीं हो सकते।

उत्तराखण्ड के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्र और लक्षद्वीप की द्वीपीय परिस्थितियाँ अलग हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल पहुँच, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सामग्री और विद्यार्थियों तक बेहतर शिक्षण संसाधन पहुँचाने का लक्ष्य साझा है।

इसी कारण एक राज्य की Best Practice को हूबहू अपनाने के बजाय उसे दूसरे राज्य की परिस्थितियों के अनुसार contextualise, adapt और implement करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

यह दृष्टिकोण Conference Concept Note की उस मूल भावना के अनुरूप है जिसमें SCERTs/SIEs को स्थानीय भाषाई, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संदर्भों के अनुरूप राष्ट्रीय शैक्षिक नीतियों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण अकादमिक संस्था माना गया है। 

Work Plan से वास्तविक क्रियान्वयन की ओर

समापन समारोह में कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शारद सिन्हा द्वारा प्रतिभागी राज्यों से अपने-अपने Work Plans/Implementation Frameworks साझा करने तथा Feedback Forms जमा करने का आग्रह किया गया।

राज्यों से यह भी अपेक्षा व्यक्त की गई कि वे अपनी वास्तविक आवश्यकताओं—चाहे वे infrastructure, teacher training, academic support, capacity building अथवा innovative ideas को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने से संबंधित हों—को सामने रखें, ताकि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थाओं के बीच सहयोग को और प्रभावी बनाया जा सके।

Conference Concept Note के अनुसार भी इस तीन दिवसीय आयोजन के प्रमुख अपेक्षित परिणामों में SCERTs/SIEs को मजबूत करने हेतु साझा राष्ट्रीय framework, राज्यों की Best Practices का documented compendium, State-specific Implementation Frameworks तथा National NCERT-SCERT/SIE Excellence Network (NSEN) को सुदृढ़ करना शामिल है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

NEP 2020 के अनुरूप SCERTs/SIEs को Centres of Excellence बनाने की दिशा

तीन दिवसीय सम्मेलन ने NEP 2020 के आलोक में SCERTs एवं SIEs की बदलती भूमिका पर भी विशेष जोर दिया। Concept Note में SCERTs/SIEs को भविष्य में ऐसे Centres of Excellence के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है जहाँ research, reflection, innovation, collaboration और continuous professional development शैक्षिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनें। 

इस दृष्टि से सम्मेलन ने राष्ट्रीय नीतियों को केवल दस्तावेजों तक सीमित न रखते हुए उन्हें पाठ्यचर्या, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, मूल्यांकन, अनुसंधान और विद्यालयी स्तर के वास्तविक क्रियान्वयन से जोड़ने की आवश्यकता को सामने रखा।

तीन दिनों का संदेश—‘Sharing Best Practices to Building Shared Solutions’

28 से 30 सितम्बर तक आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने, सफल मॉडलों को साझा करने और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की दिशा में साथ लाना रही।

पहले दिन राज्यों की Best Practices और Shared Priorities पर विमर्श हुआ, दूसरे दिन NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ संवाद और Shared Experiences पर चर्चा हुई, जबकि अंतिम दिन इस सीख को State-specific Implementation Framework में परिवर्तित करने की दिशा में कार्य किया गया। आधिकारिक कार्यक्रम में भी तीसरे दिन को स्पष्ट रूप से “Implementation” के रूप में निर्धारित किया गया था। 

उत्तराखण्ड और लक्षद्वीप के बीच विकसित संवाद ने इस उद्देश्य को व्यावहारिक रूप दिया—पहाड़ और द्वीप भले ही भौगोलिक रूप से अलग हों, लेकिन शिक्षा में नवाचार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण सीख पहुँचाने का लक्ष्य उन्हें एक साझा मंच पर जोड़ता है।

Annual Conference of Directors of SCERTs & SIEs 2026-27 का समापन इसी संकल्प के साथ हुआ कि राज्यों की श्रेष्ठ प्रथाएँ केवल प्रस्तुतियों तक सीमित न रहें, बल्कि आपसी सहयोग, साझा संसाधनों और स्पष्ट Work Plans के माध्यम से विद्यालयों और शिक्षकों तक पहुँचें—और NEP 2020 की परिकल्पना को धरातल पर वास्तविक शैक्षिक परिवर्तन में बदलें।

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Tuesday, September 29, 2026

NCERT Director’s Conference का द्वितीय दिवस: अकादमिक संवाद, डिजिटल शिक्षा और प्रधानमंत्री संग्रहालय की यात्रा

 

NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ पैनल डिस्कशन में राज्यों ने साझा किए अनुभव एवं सुझाव; PME Vidya, DIKSHA और NISHTHA के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर

नई दिल्ली, 29 सितम्बर 2026।

NCERT परिसर, नई दिल्ली में आयोजित Director’s Conference के द्वितीय दिवस की शुरुआत अकादमिक विमर्श, राज्यों के अनुभवों और राष्ट्रीय स्तर पर संचालित शैक्षिक पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित महत्वपूर्ण Panel Discussion with Heads of Departments of NCERT के साथ हुई।

देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से आए निदेशकों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इस सत्र को राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षिक विचार-विमर्श और अनुभव-साझाकरण का महत्वपूर्ण मंच बनाया।

NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ सार्थक पैनल डिस्कशन

द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में NCERT के Curriculum, Teacher Education तथा Research सहित विभिन्न अकादमिक विभागों के विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों, योजनाओं, अनुसंधान कार्यों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आगामी पहलों के संबंध में जानकारी साझा की।

पैनल डिस्कशन की विशेषता यह रही कि यह केवल प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं था। विभिन्न राज्यों से आए निदेशकों एवं प्रतिभागियों को अपने अनुभव, चुनौतियाँ और सुझाव रखने का अवसर दिया गया। Question–Answer Session के माध्यम से राज्यों की जमीनी आवश्यकताओं, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या, शोध, डिजिटल शिक्षा तथा राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर खुलकर चर्चा हुई।

इस संवाद ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर विकसित शैक्षिक नीतियों, संसाधनों और कार्यक्रमों की वास्तविक सफलता तभी संभव है, जब NCERT और राज्यों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग बना रहे।

शैक्षिक शोध को राज्यों से जोड़ने पर विशेष चर्चा

Research से संबंधित सत्र में प्रोफेसर भारद्वाज द्वारा NCERT के शोध कार्यों, Research Documents तथा शोध से संबंधित प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।

राज्यों को NCERT के शोध-आधारित कार्यक्रमों एवं प्रशिक्षण अवसरों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विशेष रूप से यह रेखांकित किया गया कि शिक्षा के क्षेत्र में लिए जाने वाले निर्णय केवल अनुभव या परंपरागत धारणाओं पर आधारित न होकर Evidence-Based Research और वास्तविक शैक्षिक आंकड़ों से समर्थित होने चाहिए। NCERT स्वयं भी अनुसंधान, शिक्षक-शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा राज्यों को अकादमिक सहयोग प्रदान करने जैसे क्षेत्रों में कार्य करता है।

नए पाठ्यक्रम में Learning Outcomes और Competencies पर जोर

प्रो रंजना रंजना अरोड़ा  Curriculum Department की ओर से वर्तमान में विकसित किए जा रहे पाठ्यक्रम एवं संबंधित दस्तावेजों के विषय में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। विशेष रूप से Learning Outcomes (LOs) और Competencies को नए पाठ्यक्रम एवं शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से प्रभावी रूप से जोड़ने पर चर्चा हुई। संबंधित दस्तावेजों को तैयार होने के बाद NCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

यह पहल महत्वपूर्ण है क्योंकि Competency-Based Education का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि विद्यार्थी ने पाठ्यपुस्तक का कितना भाग पढ़ा, बल्कि यह समझना है कि विद्यार्थी अर्जित ज्ञान और कौशल का वास्तविक परिस्थितियों में किस प्रकार उपयोग कर सकता है।

इस दृष्टिकोण से Learning Outcomes, Competencies, Teaching-Learning Process और Assessment के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना विद्यालयी शिक्षा में गुणात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Teacher Education: शिक्षक को परिवर्तन का प्रमुख माध्यम मानने पर बल

Teacher Education से जुड़े विचार-विमर्श में शिक्षक-प्रशिक्षण को बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक, परिणामोन्मुखी और सतत बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। कान्फ्रन्स समन्वयक प्रो शरद सिन्हा ने कहा कि आज शिक्षक की भूमिका केवल विषय-वस्तु को कक्षा तक पहुँचाने की नहीं है। शिक्षक को डिजिटल संसाधनों, competency-based learning, नवीन आकलन पद्धतियों, ICT और बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं से निरंतर अपडेट रहना आवश्यक है।

इसीलिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर की संस्थाओं के बीच शिक्षक-प्रशिक्षण, प्रशिक्षण सामग्री, शोध तथा डिजिटल संसाधनों को लेकर मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया गया।

PM eVIDYA, DIKSHA और NISHTHA: राष्ट्रीय कार्यक्रमों को अंतिम विद्यालय तक पहुँचाने पर जोर

पैनल डिस्कशन के दौरान Joint Director, CIET-NCERT, प्रो. अमरेंद्र बेहरा द्वारा डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में संचालित महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों—विशेष रूप से PM eVIDYA, DIKSHA तथा NISHTHA—को रेखांकित किया गया।

उन्होंने राज्यों में इन कार्यक्रमों की प्रगति, उपयोग और विस्तार के संदर्भ में चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म और शैक्षिक संसाधनों का लाभ अधिक से अधिक शिक्षकों और विद्यार्थियों तक पहुँचना चाहिए।

DIKSHA के माध्यम से डिजिटल सामग्री और शिक्षक-शिक्षा से संबंधित e-content उपलब्ध कराने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया गया है। NCERT के आधिकारिक दस्तावेजों में DIKSHA के लिए school तथा teacher education e-content के विकास हेतु दिशा-निर्देश भी उपलब्ध हैं।

इसी प्रकार NISHTHA को शिक्षक एवं विद्यालय प्रमुखों के व्यापक क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के रूप में विकसित किया गया है और इसके विभिन्न चरण elementary, secondary, foundational तथा vocational education जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित किए गए हैं।

चर्चा का महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता केवल उस पर सामग्री उपलब्ध करा देने से सुनिश्चित नहीं होती। आवश्यक है कि राज्य स्तर से लेकर SCERT–DIET–District–Block–School और Teacher तक उसका प्रभावी dissemination, orientation, utilisation और monitoring सुनिश्चित किया जाए।


राज्यों के अनुभव और सुझाव बने सम्मेलन की महत्वपूर्ण कड़ी

इस Director’s Conference की एक प्रमुख विशेषता विभिन्न राज्यों के बीच cross-learning रही।

राज्यों से आए निदेशकों एवं प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की परिस्थितियों, उपलब्धियों तथा चुनौतियों से जुड़े प्रश्न और सुझाव साझा किए। इससे चर्चा केवल राष्ट्रीय नीतियों के प्रस्तुतीकरण तक सीमित न रहकर वास्तविक राज्य स्तरीय क्रियान्वयन से जुड़ सकी।

प्रोफेसर शरद सिन्हा द्वारा भी सम्मेलन के उद्देश्यों, अकादमिक विषयों तथा विभिन्न सत्रों से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उनके समन्वयन में आयोजित संवाद ने प्रतिभागियों को NCERT की विभिन्न पहलों को व्यापक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान किया।

दोपहर बाद प्रधानमंत्री संग्रहालय का शैक्षिक भ्रमण


द्वितीय दिवस के अकादमिक सत्रों के पश्चात प्रतिभागियों के लिए प्रधानमंत्री संग्रहालय, तीन मूर्ति परिसर, नई दिल्ली का भ्रमण आयोजित किया गया।

यह भ्रमण सम्मेलन के औपचारिक अकादमिक वातावरण से आगे बढ़कर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास, नेतृत्व और स्वतंत्रता के बाद की विकास यात्रा को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर बना।

भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को समर्पित संग्रहालय

नई दिल्ली के ऐतिहासिक Teen Murti Estate में स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन 14 अप्रैल 2022 को किया गया था। इसका उद्देश्य स्वतंत्र भारत की यात्रा को देश के प्रधानमंत्रियों के जीवन, नेतृत्व, निर्णयों और योगदान के माध्यम से प्रस्तुत करना है। सरकारी जानकारी के अनुसार संग्रहालय में 43 galleries विकसित की गई थीं और इसमें स्वतंत्रता संघर्ष तथा संविधान निर्माण से लेकर स्वतंत्र भारत की विभिन्न विकास यात्राओं को समाहित किया गया है।

संग्रहालय मुख्यतः दो भवनों में विस्तारित है। Building-I में ऐतिहासिक Teen Murti भवन, पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित दीर्घा, संविधान से संबंधित galleries, Toshakhana तथा उनके निजी जीवन से जुड़े हिस्से शामिल हैं। Building-II में बाद के प्रधानमंत्रियों के व्यक्तिगत जीवन तथा उनके कार्यकाल के दौरान हुए सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों से संबंधित प्रस्तुतियाँ विकसित की गई हैं।

बाद में संग्रहालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित gallery भी विकसित की गई, जिसमें शासन, पर्यावरण, विकास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, विज्ञान, सांस्कृतिक विरासत, सुरक्षा और जनभागीदारी जैसे विषयों को interactive displays के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

इतिहास को केवल पढ़ना नहीं—अनुभव करना

प्रधानमंत्री संग्रहालय की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में इसकी digital और immersive technology है। यहाँ इतिहास को केवल तस्वीरों और लिखित विवरणों के माध्यम से प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि Holograms, Virtual Reality, Augmented Reality, multimedia interactive kiosks और experiential installations जैसी तकनीकों का उपयोग भी किया गया है।

इस कारण संग्रहालय विशेष रूप से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए यह समझने का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है कि इतिहास, संग्रहालय शिक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी को मिलाकर experiential learning किस प्रकार विकसित की जा सकती है।

उत्तराखंड अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने इस संग्राहलय के बारे मे कहा कि Building-I में संविधान निर्माण से संबंधित galleries भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे के विकास को समझने का अवसर देती हैं। इसके साथ ही Toshakhana Gallery में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण उपहार एवं artifacts प्रदर्शित किए गए हैं।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री संग्रहालय में 100 से अधिक वैश्विक artefacts और memorabilia प्रदर्शित हैं।

ऐसी वस्तुएँ केवल संग्रहणीय सामग्री नहीं हैं; वे भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों, कूटनीतिक संपर्कों और विभिन्न कालखंडों की ऐतिहासिक स्मृतियों से भी परिचित कराती हैं।

Anubhuti Zone: इतिहास के साथ तकनीक का अनूठा संगम

संग्रहालय का Anubhuti Zone विशेष रूप से आकर्षक है। इसमें Augmented Reality और अन्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से visitor engagement के कई अनुभव विकसित किए गए हैं।

इनमें Selfie with Prime Minister, Letter from Prime Minister, Unity Chain, Stroll/Walk with Prime Minister और AI आधारित interactive experiences जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर virtual/interactive experiences और संग्रहालय का 360-degree virtual tour भी उपलब्ध है।

इस प्रकार प्रधानमंत्री संग्रहालय पारंपरिक संग्रहालय की अवधारणा से आगे बढ़कर एक ऐसा Digital Learning Space बनता है जहाँ इतिहास, नेतृत्व, लोकतंत्र और तकनीक एक साथ दिखाई देते हैं।


शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एक Living Learning Laboratory

शैक्षिक दृष्टि से प्रधानमंत्री संग्रहालय का भ्रमण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा।

विद्यालयों में इतिहास, नागरिक शास्त्र, राजनीति विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, ICT और experiential learning को प्रायः अलग-अलग विषयों के रूप में देखा जाता है। प्रधानमंत्री संग्रहालय यह दिखाता है कि इन सभी को एक ही learning experience में एकीकृत किया जा सकता है।

विद्यार्थियों के लिए ऐसी यात्राएँ पाठ्यपुस्तक में पढ़े गए संविधान, लोकतंत्र, नेतृत्व, स्वतंत्र भारत के विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरराष्ट्रीय संबंध तथा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन जैसे विषयों को वास्तविक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान कर सकती हैं।

NCERT परिसर में  रात्रिभोज

प्रधानमंत्री संग्रहालय के ज्ञानवर्धक भ्रमण के पश्चात सभी प्रतिभागी पुनः NCERT परिसर लौटे। दिनभर की अकादमिक गतिविधियों और भ्रमण के बाद NCERT के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी की ओर से प्रतिभागियों के लिए रात्रिभोज की व्यवस्था की गई।

रात्रिभोज केवल औपचारिक आतिथ्य का अवसर नहीं रहा, बल्कि विभिन्न राज्यों से आए शिक्षा अधिकारियों, निदेशकों और प्रतिभागियों के बीच अनौपचारिक संवाद एवं अनुभव साझा करने का भी अवसर बना।

दिन के औपचारिक सत्रों में जिन विषयों पर चर्चा हुई थी, उन पर अनौपचारिक रूप से विचार साझा किए गए और विभिन्न राज्यों की शैक्षिक पहलों, चुनौतियों तथा नवाचारों पर भी बातचीत हुई।

अकादमिक संवाद से सहयोग की ओर बढ़ता सम्मेलन

Director’s Conference के द्वितीय दिवस ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—राष्ट्रीय स्तर पर विकसित नीतियों और कार्यक्रमों की वास्तविक शक्ति उनके राज्य, जिला और विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

एक ओर NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ Curriculum, Learning Outcomes, Competencies, Teacher Education और Research पर गंभीर अकादमिक चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर PM eVIDYA, DIKSHA और NISHTHA जैसे कार्यक्रमों के अधिक प्रभावी dissemination एवं utilisation पर राज्यों की भूमिका को रेखांकित किया गया।

प्रधानमंत्री संग्रहालय के भ्रमण ने इस पूरे दिन में एक और आयाम जोड़ा—शिक्षा केवल conference room, curriculum document या textbook तक सीमित नहीं है; संग्रहालय, ऐतिहासिक स्थल और डिजिटल अनुभव भी प्रभावशाली learning spaces बन सकते हैं। दिन का समापन NCERT परिसर में आत्मीय रात्रिभोज, परस्पर संवाद और अनुभव-साझाकरण के साथ हुआ। इस प्रकार Director’s Conference का द्वितीय दिवस “Dialogue, Research, Digital Education, Experiential Learning और National–State Collaboration” का सार्थक संगम बनकर सामने आया—जो आने वाले समय में राष्ट्रीय शैक्षिक पहलों को राज्यों के अंतिम विद्यालय और विद्यार्थी तक पहुँचाने की साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

प्रथम दिवस -कान्फ्रन्स -स्रोत - facebook एनसीईआरटी पेज