Wednesday, September 30, 2026

SCERTs/SIEs Directors’ Conference 2026 का समापन

 

उत्तराखण्ड–लक्षद्वीप की साझेदारी Peer Learning का उदाहरण; e-Srijan MOOCs, Hackathon 3.0, Inclusive Education और Audio Books की पहल साझा

नई दिल्ली, 30 सितम्बर 2026।

NCERT के तत्वावधान में Department of Teacher Education द्वारा आयोजित तीन दिवसीय Annual Conference of Directors of SCERTs & SIEs 2026-27 का आज CIET-NCERT सभागार, नई दिल्ली में सार्थक विचार-विमर्श, अंतर-राज्यीय सहयोग और भविष्य के क्रियान्वयन की रूपरेखा के साथ समापन हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिवस का मुख्य फोकस “Implementation” रहा, जिसमें विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को जोड़ी (Pair) के रूप में कार्य करते हुए एक-दूसरे की श्रेष्ठ शैक्षिक पहलों का अध्ययन करने तथा उनसे सीखकर State-specific Implementation Framework तैयार करने का अवसर दिया गया।

सम्मेलन के Concept Note में भी स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य केवल राज्यों की Best Practices की पहचान करना नहीं, बल्कि peer learning, interstate collaboration और State-specific Implementation Frameworks के माध्यम से साझा अनुभवों को ठोस संस्थागत कार्रवाई में बदलना है। 

अंतिम दिवस: ‘Shared Experiences’ से आगे बढ़कर ‘Implementation’ पर जोर

30 सितम्बर के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दिवस की शुरुआत Check-in & Reflection से हुई। इसके बाद Developing State-specific Implementation Framework, राज्यों द्वारा जोड़ी में कार्य (Work in Pairs), प्रमुख निष्कर्षों को साझा करने तथा अंत में Valedictory Session की व्यवस्था की गई थी। इस प्रकार सम्मेलन के तीन दिनों की यात्रा Reflection → Shared Learning → Implementation की दिशा में आगे बढ़ी।

इस प्रक्रिया में राज्यों ने केवल अपनी उपलब्धियाँ प्रस्तुत नहीं कीं, बल्कि यह विचार किया कि एक राज्य की सफल पहल को दूसरे राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, भाषाई और संस्थागत परिस्थितियों के अनुरूप किस प्रकार अपनाया और अनुकूलित किया जा सकता है।

अंतिम दिवस की एक विशेष गतिविधि के अंतर्गत उत्तराखण्ड और लक्षद्वीप को Pair Group के रूप में साथ कार्य करने का अवसर मिला। दोनों की भौगोलिक एवं जनसांख्यिकीय परिस्थितियाँ अत्यंत भिन्न हैं। एक ओर उत्तराखण्ड में पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुँचाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर लक्षद्वीप की द्वीपीय भौगोलिक परिस्थितियाँ शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए अलग प्रकार की चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं।

इन्हीं भिन्नताओं ने इस साझेदारी को और अधिक उपयोगी बनाया। दोनों पक्षों ने इस बात पर विचार किया कि भूगोल अलग होने के बावजूद डिजिटल और ब्लेंडेड माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण तथा गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों की पहुँच कैसे मजबूत की जा सकती है।

उत्तराखण्ड की ओर से e-Srijan आधारित ऑनलाइन MOOCs एवं डिजिटल प्रशिक्षण मॉडल, जबकि लक्षद्वीप की ओर से उसके offline teacher-training modules और स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण अनुभवों को साझा किया गया।

लक्षद्वीप में e-Srijan MOOCs के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा

SCERT उत्तराखण्ड की ओर से निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण,  बंदना गर्ब्याल ने e-Srijan के अंतर्गत संचालित MOOCs, उनकी संरचना, प्रशिक्षण प्रक्रिया तथा शिक्षक क्षमता संवर्धन में डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग के प्रमुख पहलुओं को लक्षद्वीप के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया।

यह उल्लेखनीय है कि सम्मेलन के आधिकारिक Concept Note में भी Uttarakhand के e-Srijan MOOC को डिजिटल एवं AI-आधारित शिक्षा के संदर्भ में एक उदाहरण के रूप में रेखांकित किया गया है। इसमें e-Srijan द्वारा दूरस्थ पहाड़ी जिलों के शिक्षकों तक structured, self-paced professional learning पहुँचाने का उल्लेख किया गया है।

चर्चा के दौरान लक्षद्वीप की ओर से उत्तराखण्ड की Best Practices, विशेष रूप से e-Srijan के ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को लक्षद्वीप में भी उपयोग करने की संभावनाओं में रुचि व्यक्त की गई। इसके लिए दोनों पक्षों द्वारा आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों, प्रशिक्षण सामग्री और क्रियान्वयन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक साझा Framework/Work Plan विकसित करने पर विचार किया गया।

यह पहल भविष्य में SCERT-to-SCERT knowledge sharing का एक उपयोगी मॉडल बन सकती है, जहाँ किसी राज्य द्वारा विकसित गुणवत्तापूर्ण डिजिटल संसाधनों का दूसरे राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग किया जा सके।

SCERT उत्तराखण्ड के IT Initiatives की विस्तृत जानकारी

SCERT उत्तराखण्ड के IT विभाग से रमेश प्रसाद बडोनी द्वारा e-Srijan एवं अन्य डिजिटल पहलों के व्यावहारिक क्रियान्वयन की प्रक्रिया को विस्तार से साझा किया गया। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि ऑनलाइन कोर्स को किस प्रकार तैयार किया जाता है, प्रशिक्षण सामग्री को डिजिटल स्वरूप दिया जाता है, शिक्षकों तक पहुँचाया जाता है तथा बड़े स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण को व्यवस्थित किया जा सकता है।

उत्तराखण्ड ने अन्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे SCERT उत्तराखण्ड द्वारा विकसित IT एवं डिजिटल शिक्षा पहलों को देखें, अपने संदर्भ में उनकी उपयोगिता का अध्ययन करें और जहाँ संभव हो, सहयोग एवं सहभागिता की संभावनाएँ विकसित करें।

Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 में अन्य राज्यों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को सहभागिता का आमंत्रण

इसी क्रम में सम्मेलन के मंच से Innovate Uttarakhand Hackathon 3.0 की जानकारी भी साझा की गई। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया कि वे अपने यहाँ के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों तक Hackathon 3.0 की जानकारी पहुँचाएँ तथा नवाचार, समस्या-समाधान और रचनात्मकता से जुड़े इस मंच के साथ सहभागिता की संभावनाओं को बढ़ाएँ।

इस पहल का उद्देश्य राज्यों के बीच केवल तैयार सामग्री का आदान-प्रदान करना नहीं, बल्कि students and teachers को innovation ecosystem से जोड़ना और राज्यों के बीच collaborative innovation culture विकसित करना भी है।

Inclusive Education और Audio Books की पहल भी साझा

सम्मेलन के दौरान SCERT उत्तराखण्ड की ओर से Inclusive Education से जुड़ी डिजिटल सामग्री एवं Audio Books के उपयोग और विकास की जानकारी भी अन्य राज्यों के साथ साझा की गई।

विशेष रूप से समावेशी शिक्षा में तकनीक के माध्यम से ऐसे संसाधनों को विकसित करने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया गया जो विभिन्न प्रकार की शैक्षिक आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ हों।

यह सम्मेलन के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप भी है, क्योंकि Concept Note SCERTs/SIEs की भूमिका को केवल प्रशिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि technology integration, multilingualism, local context, research, innovation और equitable educational opportunities को बढ़ावा देने वाली अकादमिक संस्थाओं के रूप में देखता है। 

उत्तराखण्ड–लक्षद्वीप Pair Discussion ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—भारत में शिक्षा की परिस्थितियाँ एक जैसी नहीं हैं, इसलिए समाधान भी पूरी तरह एक जैसे नहीं हो सकते।

उत्तराखण्ड के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्र और लक्षद्वीप की द्वीपीय परिस्थितियाँ अलग हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल पहुँच, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सामग्री और विद्यार्थियों तक बेहतर शिक्षण संसाधन पहुँचाने का लक्ष्य साझा है।

इसी कारण एक राज्य की Best Practice को हूबहू अपनाने के बजाय उसे दूसरे राज्य की परिस्थितियों के अनुसार contextualise, adapt और implement करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

यह दृष्टिकोण Conference Concept Note की उस मूल भावना के अनुरूप है जिसमें SCERTs/SIEs को स्थानीय भाषाई, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संदर्भों के अनुरूप राष्ट्रीय शैक्षिक नीतियों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण अकादमिक संस्था माना गया है। 

Work Plan से वास्तविक क्रियान्वयन की ओर

समापन समारोह में कार्यक्रम समन्वयक प्रो. शारद सिन्हा द्वारा प्रतिभागी राज्यों से अपने-अपने Work Plans/Implementation Frameworks साझा करने तथा Feedback Forms जमा करने का आग्रह किया गया।

राज्यों से यह भी अपेक्षा व्यक्त की गई कि वे अपनी वास्तविक आवश्यकताओं—चाहे वे infrastructure, teacher training, academic support, capacity building अथवा innovative ideas को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने से संबंधित हों—को सामने रखें, ताकि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थाओं के बीच सहयोग को और प्रभावी बनाया जा सके।

Conference Concept Note के अनुसार भी इस तीन दिवसीय आयोजन के प्रमुख अपेक्षित परिणामों में SCERTs/SIEs को मजबूत करने हेतु साझा राष्ट्रीय framework, राज्यों की Best Practices का documented compendium, State-specific Implementation Frameworks तथा National NCERT-SCERT/SIE Excellence Network (NSEN) को सुदृढ़ करना शामिल है। DocScanner 28 Sept 2026 21-13

NEP 2020 के अनुरूप SCERTs/SIEs को Centres of Excellence बनाने की दिशा

तीन दिवसीय सम्मेलन ने NEP 2020 के आलोक में SCERTs एवं SIEs की बदलती भूमिका पर भी विशेष जोर दिया। Concept Note में SCERTs/SIEs को भविष्य में ऐसे Centres of Excellence के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है जहाँ research, reflection, innovation, collaboration और continuous professional development शैक्षिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनें। 

इस दृष्टि से सम्मेलन ने राष्ट्रीय नीतियों को केवल दस्तावेजों तक सीमित न रखते हुए उन्हें पाठ्यचर्या, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, मूल्यांकन, अनुसंधान और विद्यालयी स्तर के वास्तविक क्रियान्वयन से जोड़ने की आवश्यकता को सामने रखा।

तीन दिनों का संदेश—‘Sharing Best Practices to Building Shared Solutions’

28 से 30 सितम्बर तक आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने, सफल मॉडलों को साझा करने और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की दिशा में साथ लाना रही।

पहले दिन राज्यों की Best Practices और Shared Priorities पर विमर्श हुआ, दूसरे दिन NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ संवाद और Shared Experiences पर चर्चा हुई, जबकि अंतिम दिन इस सीख को State-specific Implementation Framework में परिवर्तित करने की दिशा में कार्य किया गया। आधिकारिक कार्यक्रम में भी तीसरे दिन को स्पष्ट रूप से “Implementation” के रूप में निर्धारित किया गया था। 

उत्तराखण्ड और लक्षद्वीप के बीच विकसित संवाद ने इस उद्देश्य को व्यावहारिक रूप दिया—पहाड़ और द्वीप भले ही भौगोलिक रूप से अलग हों, लेकिन शिक्षा में नवाचार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण सीख पहुँचाने का लक्ष्य उन्हें एक साझा मंच पर जोड़ता है।

Annual Conference of Directors of SCERTs & SIEs 2026-27 का समापन इसी संकल्प के साथ हुआ कि राज्यों की श्रेष्ठ प्रथाएँ केवल प्रस्तुतियों तक सीमित न रहें, बल्कि आपसी सहयोग, साझा संसाधनों और स्पष्ट Work Plans के माध्यम से विद्यालयों और शिक्षकों तक पहुँचें—और NEP 2020 की परिकल्पना को धरातल पर वास्तविक शैक्षिक परिवर्तन में बदलें।

Feedback