Tuesday, September 29, 2026

NCERT Director’s Conference का द्वितीय दिवस: अकादमिक संवाद, डिजिटल शिक्षा और प्रधानमंत्री संग्रहालय की यात्रा

 

NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ पैनल डिस्कशन में राज्यों ने साझा किए अनुभव एवं सुझाव; PME Vidya, DIKSHA और NISHTHA के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर

नई दिल्ली, 29 सितम्बर 2026।

NCERT परिसर, नई दिल्ली में आयोजित Director’s Conference के द्वितीय दिवस की शुरुआत अकादमिक विमर्श, राज्यों के अनुभवों और राष्ट्रीय स्तर पर संचालित शैक्षिक पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित महत्वपूर्ण Panel Discussion with Heads of Departments of NCERT के साथ हुई।

देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से आए निदेशकों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इस सत्र को राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षिक विचार-विमर्श और अनुभव-साझाकरण का महत्वपूर्ण मंच बनाया।

NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ सार्थक पैनल डिस्कशन

द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में NCERT के Curriculum, Teacher Education तथा Research सहित विभिन्न अकादमिक विभागों के विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों, योजनाओं, अनुसंधान कार्यों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा आगामी पहलों के संबंध में जानकारी साझा की।

पैनल डिस्कशन की विशेषता यह रही कि यह केवल प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं था। विभिन्न राज्यों से आए निदेशकों एवं प्रतिभागियों को अपने अनुभव, चुनौतियाँ और सुझाव रखने का अवसर दिया गया। Question–Answer Session के माध्यम से राज्यों की जमीनी आवश्यकताओं, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या, शोध, डिजिटल शिक्षा तथा राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर खुलकर चर्चा हुई।

इस संवाद ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर विकसित शैक्षिक नीतियों, संसाधनों और कार्यक्रमों की वास्तविक सफलता तभी संभव है, जब NCERT और राज्यों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग बना रहे।

शैक्षिक शोध को राज्यों से जोड़ने पर विशेष चर्चा

Research से संबंधित सत्र में प्रोफेसर भारद्वाज द्वारा NCERT के शोध कार्यों, Research Documents तथा शोध से संबंधित प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।

राज्यों को NCERT के शोध-आधारित कार्यक्रमों एवं प्रशिक्षण अवसरों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विशेष रूप से यह रेखांकित किया गया कि शिक्षा के क्षेत्र में लिए जाने वाले निर्णय केवल अनुभव या परंपरागत धारणाओं पर आधारित न होकर Evidence-Based Research और वास्तविक शैक्षिक आंकड़ों से समर्थित होने चाहिए। NCERT स्वयं भी अनुसंधान, शिक्षक-शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा राज्यों को अकादमिक सहयोग प्रदान करने जैसे क्षेत्रों में कार्य करता है।

नए पाठ्यक्रम में Learning Outcomes और Competencies पर जोर

प्रो रंजना रंजना अरोड़ा  Curriculum Department की ओर से वर्तमान में विकसित किए जा रहे पाठ्यक्रम एवं संबंधित दस्तावेजों के विषय में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। विशेष रूप से Learning Outcomes (LOs) और Competencies को नए पाठ्यक्रम एवं शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से प्रभावी रूप से जोड़ने पर चर्चा हुई। संबंधित दस्तावेजों को तैयार होने के बाद NCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

यह पहल महत्वपूर्ण है क्योंकि Competency-Based Education का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं है कि विद्यार्थी ने पाठ्यपुस्तक का कितना भाग पढ़ा, बल्कि यह समझना है कि विद्यार्थी अर्जित ज्ञान और कौशल का वास्तविक परिस्थितियों में किस प्रकार उपयोग कर सकता है।

इस दृष्टिकोण से Learning Outcomes, Competencies, Teaching-Learning Process और Assessment के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना विद्यालयी शिक्षा में गुणात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Teacher Education: शिक्षक को परिवर्तन का प्रमुख माध्यम मानने पर बल

Teacher Education से जुड़े विचार-विमर्श में शिक्षक-प्रशिक्षण को बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक, परिणामोन्मुखी और सतत बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। कान्फ्रन्स समन्वयक प्रो शरद सिन्हा ने कहा कि आज शिक्षक की भूमिका केवल विषय-वस्तु को कक्षा तक पहुँचाने की नहीं है। शिक्षक को डिजिटल संसाधनों, competency-based learning, नवीन आकलन पद्धतियों, ICT और बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं से निरंतर अपडेट रहना आवश्यक है।

इसीलिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर की संस्थाओं के बीच शिक्षक-प्रशिक्षण, प्रशिक्षण सामग्री, शोध तथा डिजिटल संसाधनों को लेकर मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया गया।

PM eVIDYA, DIKSHA और NISHTHA: राष्ट्रीय कार्यक्रमों को अंतिम विद्यालय तक पहुँचाने पर जोर

पैनल डिस्कशन के दौरान Joint Director, CIET-NCERT, प्रो. अमरेंद्र बेहरा द्वारा डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में संचालित महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों—विशेष रूप से PM eVIDYA, DIKSHA तथा NISHTHA—को रेखांकित किया गया।

उन्होंने राज्यों में इन कार्यक्रमों की प्रगति, उपयोग और विस्तार के संदर्भ में चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म और शैक्षिक संसाधनों का लाभ अधिक से अधिक शिक्षकों और विद्यार्थियों तक पहुँचना चाहिए।

DIKSHA के माध्यम से डिजिटल सामग्री और शिक्षक-शिक्षा से संबंधित e-content उपलब्ध कराने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया गया है। NCERT के आधिकारिक दस्तावेजों में DIKSHA के लिए school तथा teacher education e-content के विकास हेतु दिशा-निर्देश भी उपलब्ध हैं।

इसी प्रकार NISHTHA को शिक्षक एवं विद्यालय प्रमुखों के व्यापक क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के रूप में विकसित किया गया है और इसके विभिन्न चरण elementary, secondary, foundational तथा vocational education जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित किए गए हैं।

चर्चा का महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता केवल उस पर सामग्री उपलब्ध करा देने से सुनिश्चित नहीं होती। आवश्यक है कि राज्य स्तर से लेकर SCERT–DIET–District–Block–School और Teacher तक उसका प्रभावी dissemination, orientation, utilisation और monitoring सुनिश्चित किया जाए।


राज्यों के अनुभव और सुझाव बने सम्मेलन की महत्वपूर्ण कड़ी

इस Director’s Conference की एक प्रमुख विशेषता विभिन्न राज्यों के बीच cross-learning रही।

राज्यों से आए निदेशकों एवं प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की परिस्थितियों, उपलब्धियों तथा चुनौतियों से जुड़े प्रश्न और सुझाव साझा किए। इससे चर्चा केवल राष्ट्रीय नीतियों के प्रस्तुतीकरण तक सीमित न रहकर वास्तविक राज्य स्तरीय क्रियान्वयन से जुड़ सकी।

प्रोफेसर शरद सिन्हा द्वारा भी सम्मेलन के उद्देश्यों, अकादमिक विषयों तथा विभिन्न सत्रों से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उनके समन्वयन में आयोजित संवाद ने प्रतिभागियों को NCERT की विभिन्न पहलों को व्यापक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान किया।

दोपहर बाद प्रधानमंत्री संग्रहालय का शैक्षिक भ्रमण


द्वितीय दिवस के अकादमिक सत्रों के पश्चात प्रतिभागियों के लिए प्रधानमंत्री संग्रहालय, तीन मूर्ति परिसर, नई दिल्ली का भ्रमण आयोजित किया गया।

यह भ्रमण सम्मेलन के औपचारिक अकादमिक वातावरण से आगे बढ़कर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास, नेतृत्व और स्वतंत्रता के बाद की विकास यात्रा को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर बना।

भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को समर्पित संग्रहालय

नई दिल्ली के ऐतिहासिक Teen Murti Estate में स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन 14 अप्रैल 2022 को किया गया था। इसका उद्देश्य स्वतंत्र भारत की यात्रा को देश के प्रधानमंत्रियों के जीवन, नेतृत्व, निर्णयों और योगदान के माध्यम से प्रस्तुत करना है। सरकारी जानकारी के अनुसार संग्रहालय में 43 galleries विकसित की गई थीं और इसमें स्वतंत्रता संघर्ष तथा संविधान निर्माण से लेकर स्वतंत्र भारत की विभिन्न विकास यात्राओं को समाहित किया गया है।

संग्रहालय मुख्यतः दो भवनों में विस्तारित है। Building-I में ऐतिहासिक Teen Murti भवन, पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित दीर्घा, संविधान से संबंधित galleries, Toshakhana तथा उनके निजी जीवन से जुड़े हिस्से शामिल हैं। Building-II में बाद के प्रधानमंत्रियों के व्यक्तिगत जीवन तथा उनके कार्यकाल के दौरान हुए सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों से संबंधित प्रस्तुतियाँ विकसित की गई हैं।

बाद में संग्रहालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित gallery भी विकसित की गई, जिसमें शासन, पर्यावरण, विकास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, विज्ञान, सांस्कृतिक विरासत, सुरक्षा और जनभागीदारी जैसे विषयों को interactive displays के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

इतिहास को केवल पढ़ना नहीं—अनुभव करना

प्रधानमंत्री संग्रहालय की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में इसकी digital और immersive technology है। यहाँ इतिहास को केवल तस्वीरों और लिखित विवरणों के माध्यम से प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि Holograms, Virtual Reality, Augmented Reality, multimedia interactive kiosks और experiential installations जैसी तकनीकों का उपयोग भी किया गया है।

इस कारण संग्रहालय विशेष रूप से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए यह समझने का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है कि इतिहास, संग्रहालय शिक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी को मिलाकर experiential learning किस प्रकार विकसित की जा सकती है।

उत्तराखंड अकादमिक निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने इस संग्राहलय के बारे मे कहा कि Building-I में संविधान निर्माण से संबंधित galleries भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे के विकास को समझने का अवसर देती हैं। इसके साथ ही Toshakhana Gallery में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण उपहार एवं artifacts प्रदर्शित किए गए हैं।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री संग्रहालय में 100 से अधिक वैश्विक artefacts और memorabilia प्रदर्शित हैं।

ऐसी वस्तुएँ केवल संग्रहणीय सामग्री नहीं हैं; वे भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों, कूटनीतिक संपर्कों और विभिन्न कालखंडों की ऐतिहासिक स्मृतियों से भी परिचित कराती हैं।

Anubhuti Zone: इतिहास के साथ तकनीक का अनूठा संगम

संग्रहालय का Anubhuti Zone विशेष रूप से आकर्षक है। इसमें Augmented Reality और अन्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से visitor engagement के कई अनुभव विकसित किए गए हैं।

इनमें Selfie with Prime Minister, Letter from Prime Minister, Unity Chain, Stroll/Walk with Prime Minister और AI आधारित interactive experiences जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर virtual/interactive experiences और संग्रहालय का 360-degree virtual tour भी उपलब्ध है।

इस प्रकार प्रधानमंत्री संग्रहालय पारंपरिक संग्रहालय की अवधारणा से आगे बढ़कर एक ऐसा Digital Learning Space बनता है जहाँ इतिहास, नेतृत्व, लोकतंत्र और तकनीक एक साथ दिखाई देते हैं।


शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एक Living Learning Laboratory

शैक्षिक दृष्टि से प्रधानमंत्री संग्रहालय का भ्रमण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा।

विद्यालयों में इतिहास, नागरिक शास्त्र, राजनीति विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, ICT और experiential learning को प्रायः अलग-अलग विषयों के रूप में देखा जाता है। प्रधानमंत्री संग्रहालय यह दिखाता है कि इन सभी को एक ही learning experience में एकीकृत किया जा सकता है।

विद्यार्थियों के लिए ऐसी यात्राएँ पाठ्यपुस्तक में पढ़े गए संविधान, लोकतंत्र, नेतृत्व, स्वतंत्र भारत के विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरराष्ट्रीय संबंध तथा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन जैसे विषयों को वास्तविक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान कर सकती हैं।

NCERT परिसर में  रात्रिभोज

प्रधानमंत्री संग्रहालय के ज्ञानवर्धक भ्रमण के पश्चात सभी प्रतिभागी पुनः NCERT परिसर लौटे। दिनभर की अकादमिक गतिविधियों और भ्रमण के बाद NCERT के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी की ओर से प्रतिभागियों के लिए रात्रिभोज की व्यवस्था की गई।

रात्रिभोज केवल औपचारिक आतिथ्य का अवसर नहीं रहा, बल्कि विभिन्न राज्यों से आए शिक्षा अधिकारियों, निदेशकों और प्रतिभागियों के बीच अनौपचारिक संवाद एवं अनुभव साझा करने का भी अवसर बना।

दिन के औपचारिक सत्रों में जिन विषयों पर चर्चा हुई थी, उन पर अनौपचारिक रूप से विचार साझा किए गए और विभिन्न राज्यों की शैक्षिक पहलों, चुनौतियों तथा नवाचारों पर भी बातचीत हुई।

अकादमिक संवाद से सहयोग की ओर बढ़ता सम्मेलन

Director’s Conference के द्वितीय दिवस ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—राष्ट्रीय स्तर पर विकसित नीतियों और कार्यक्रमों की वास्तविक शक्ति उनके राज्य, जिला और विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

एक ओर NCERT के विभागाध्यक्षों के साथ Curriculum, Learning Outcomes, Competencies, Teacher Education और Research पर गंभीर अकादमिक चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर PM eVIDYA, DIKSHA और NISHTHA जैसे कार्यक्रमों के अधिक प्रभावी dissemination एवं utilisation पर राज्यों की भूमिका को रेखांकित किया गया।

प्रधानमंत्री संग्रहालय के भ्रमण ने इस पूरे दिन में एक और आयाम जोड़ा—शिक्षा केवल conference room, curriculum document या textbook तक सीमित नहीं है; संग्रहालय, ऐतिहासिक स्थल और डिजिटल अनुभव भी प्रभावशाली learning spaces बन सकते हैं। दिन का समापन NCERT परिसर में आत्मीय रात्रिभोज, परस्पर संवाद और अनुभव-साझाकरण के साथ हुआ। इस प्रकार Director’s Conference का द्वितीय दिवस “Dialogue, Research, Digital Education, Experiential Learning और National–State Collaboration” का सार्थक संगम बनकर सामने आया—जो आने वाले समय में राष्ट्रीय शैक्षिक पहलों को राज्यों के अंतिम विद्यालय और विद्यार्थी तक पहुँचाने की साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

प्रथम दिवस -कान्फ्रन्स -स्रोत - facebook एनसीईआरटी पेज