Wednesday, September 03, 2025

5 सितंबर को दिया जाएगा : शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार 2024: प्रदेश के 13 शिक्षक होंगे सम्मानित

देहरादून, 3 सितम्बर 2024 – उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 13 उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार 2024 के लिए किया गया है। यह सम्मान राज्य सरकार की ओर से उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने नवाचार, समर्पण और रचनात्मक शैक्षिक प्रयासों से विद्यार्थियों और समाज में विशेष पहचान बनाई है। निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने पुरस्कृत होने वाले योग्यतम शिक्षकों को शुभकामनायें दी । अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी  ने यह सम्मान पाने वाले चयनित शिक्षकों को उनके समर्पण के लिए बधाइयाँ देते हुए कहा कि अन्य लोगों को इन्सपाइर होने की जरूरत है। 

राज्य स्तर पर गठित चयन समिति ने प्राथमिक, माध्यमिक, प्रशिक्षण संस्थान तथा संस्कृत शिक्षा से जुड़े शिक्षकों के कार्यों का मूल्यांकन करते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना है। इन शिक्षकों को आगामी 5 सितम्बर, शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

प्राथमिक शिक्षा से चयनित शिक्षक

  1. डॉ. चंदन प्रसाद गोड़ – रा.प्रा.वि. शालवन, चम्पावत

  2. रश्मि राणा – रा.प्रा.वि. स्याली, बमोरी, टिहरी गढ़वाल

  3. रमेश लाल राणा – रा.प्रा.वि. काफली, उत्तरकाशी

  4. डॉ. वीरेन्द्र सिंह – रा.प्रा.वि. इन्द्रेशपुरम, हरिद्वार

  5. कल्पना भण्डारी – रा.प्रा.वि. घंडियाल, टिहरी गढ़वाल

  6. तिली बडोला – रा.प्रा.वि. नौगांव पंजरो, चम्पावत

  7. सुमन गुसाईं – रा.प्रा.वि. पनियाली, पौड़ी गढ़वाल

  8. देवदान सिंह खंडवाल – रा.प्रा.वि. चौफुला, सेरा गांव, रुद्रप्रयाग

  9. डॉ. निसार खान – रा.प्रा.वि. गाजी, अल्मोड़ा

माध्यमिक शिक्षा से चयनित शिक्षक

  1. पुष्कर सिंह मनेरी – पं. का. सु. विद्यालय, चंडीगढ़ गढ़वाल

  2. गीता बिष्ट जोशी – रा.इ.का. जखोल, उत्तरकाशी

  3. डॉ. नूतन भट्ट – रा.इ.का. देहरादून

  4. प्रकाश चन्द्र उपाध्याय – रा.इ.का. बाफना, चम्पावत

  5. दीपक चन्द्र मिंट – रा.इ.का. तारखेत, अल्मोड़ा

पुरस्कार का महत्व

शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार उत्तराखंड सरकार की ओर से स्थापित एक विशिष्ट सम्मान है, जिसका उद्देश्य उन शिक्षकों को प्रोत्साहित करना है जो अपने क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं। इस पुरस्कार के अंतर्गत सम्मानित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और नगद राशि प्रदान की जाएगी।

इस वर्ष चयनित 13 शिक्षक उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था की वह धुरी हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी विद्यार्थियों तक ज्ञान, प्रेरणा और मूल्यों को पहुंचाने का कार्य किया है। 5 सितम्बर को जब इन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा, तब यह क्षण न केवल उनके लिए बल्कि पूरे शैक्षिक जगत के लिए गर्व का अवसर होगा।

उत्तराखंड में पठन संस्कृति को बढ़ावा: बुक वैन की शिक्षा विभाग ने एक नई अनोखी पहल

 

उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और सराहनीय पहल की शुरुआत हुई। SCERT उत्तराखंड और रूम टू रीड (Room to Read) के सहयोग से रीडिंग कैम्पेन के तहत बुक वैन को रवाना किया गया।

इस कार्यक्रम में निदेशक बन्दना गर्ब्याल ने बुक वैन को हरी झंडी दिखाकर इस यात्रा की शुरुआत की। इस मौके पर पर निदेशक पदमेंद्र सकलानी, अपर  परियोजना निदेशक कुलदीप गैरोल, डॉ. के.एन. बिजलवाण और रूम टू रीड की प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

पहल का उद्देश्य

इस बुक वैन का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पठन-पाठन की आदत को बढ़ावा देना और पुस्तकों को उनके नजदीक तक पहुँचाना है। यह वैन राज्य के विभिन्न विद्यालयों और समुदायों तक पहुँचकर बच्चों को रोचक कहानियों, चित्र पुस्तकों और ज्ञानवर्धक साहित्य से जोड़ेगी।

शिक्षा में पठन संस्कृति का महत्व

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में भाषा और पठन कौशल को सीखने की बुनियाद माना गया है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए SCERT उत्तराखंड इस अभियान के माध्यम से बच्चों को न केवल बेहतर पाठक बनाने का प्रयास कर रहा है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, सृजनशीलता और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने का भी लक्ष्य है।


सामूहिक प्रयास का परिणाम

यह पहल केवल पुस्तकों के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन है जो शिक्षकों, छात्रों और समुदायों को एकजुट करता है। आने वाले समय में यह वैन बच्चों के लिए ज्ञान और कल्पनाशक्ति की एक चलती-फिरती लाइब्रेरी साबित होगी। यह पहल निश्चित ही प्रदेश के बच्चों में पठन की संस्कृति को नई ऊर्जा देगी और शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत बनाने में अहम योगदान करेगी।


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Saturday, August 30, 2025

डॉ. मनोज कुमार शुक्ला : राष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक योगदान की गौरवशाली उपलब्धि

 

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखण्ड, देहरादून के शैक्षिक शोध, सर्वे एवं मूल्यांकन विभाग में प्रवक्ता गणित के पद पर कार्यरत डाॅ. मनोज कुमार शुक्ला को हाल ही में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि प्राप्त हुई है।

उनका चयन सिक्किम राज्य बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एण्ड स्किल एजुकेशन (SBOSSE) में माध्यमिक स्तर के गणित लेखक के रूप में किया गया है। उनके द्वारा लिखित गणित के पाठ माध्यमिक स्तर की दो पुस्तकों – मैथमेटिक्स वॉल्यूम 1 एवं मैथमेटिक्स वॉल्यूम 2 में सम्मिलित किए गए हैं, जिन्हें अब सिक्किम राज्य के छात्र-छात्राएँ अध्ययन करेंगे। यह उपलब्धि न केवल डॉ. शुक्ला के व्यक्तिगत परिश्रम और समर्पण का प्रमाण है, बल्कि SCERT उत्तराखण्ड परिवार के लिए गर्व का विषय भी है कि उसके अकादमिक सदस्य अन्य राज्यों की पाठ्यपुस्तक लेखन प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, डॉ. शुक्ला का चयन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में गठित पाठ्यचर्या क्षेत्र समूहः व्यावसायिक शिक्षा में भी किया गया है। इस अंतर्गत उन्होंने कक्षा 3 से 12 तक की व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम निर्माण में योगदान दिया है। साथ ही इस वर्ष NCERT द्वारा कक्षा 6 हेतु विकसित नई पाठ्यपुस्तक “कौशल बोध” में भी वे लेखक के रूप में जुड़े हैं।

अधिक जानकारी के किए क्लिक करें - https://www.bosse.ac.in/



SCERT में रहते हुए डॉ. मनोज कुमार शुक्ला ने गणित पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम निर्माण, गणित पाठ्यपुस्तक और प्रशिक्षण मॉड्यूल विकास, गणित प्रयोगशाला की स्थापना, BTC एवं D.El.Ed. पाठ्यक्रम निर्माण तथा राज्य विज्ञान महोत्सव एवं इंस्पायर अवार्ड कार्यक्रमों के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया जैसे अनेक शैक्षिक कार्य सफलतापूर्वक संपादित किए हैं। इसके साथ ही NCERT की गणित पुस्तक एवं DIKSHA के प्रशिक्षण मॉड्यूल में भी वे लेखक के रूप में योगदान दे चुके हैं। विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्हें मुख्य संदर्भदाता के रूप में भी आमंत्रित किया जाता रहा है।



डॉ. शुक्ला गणित विषय में परास्नातक तथा एम.एड. हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने शिक्षाशास्त्र (Education) विषय में U-SET एवं NET परीक्षा उत्तीर्ण की है। अब तक उनके 6 शोध पत्र राष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. मनोज कुमार शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तित्व और शैक्षिक दक्षता का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखण्ड SCERT परिवार के लिए भी अपार गौरव का क्षण है।