Tuesday, February 03, 2026

“रतब्याणी : भोर का समय” का तृतीय अंक लॉन्च

डिजिटल नवाचार, शैक्षिक चिंतन और वैश्विक पाठकों तक पहुँच

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखंड के आईटी विभाग द्वारा प्रकाशित ई-मैगज़ीन रतब्याणी : भोर का समय” का तृतीय अंक (Volume–3) औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया गया है। इस द्विवार्षिक (Bi-Annual) ई-मैगज़ीन का विमोचन निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड – बंदना गर्ब्याल द्वारा किया गया।

रतब्याणी : भोर का समय” केवल एक ई-मैगज़ीन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विद्यालयी शिक्षा में हो रहे नवाचारों, डिजिटल पहलों, शोध, अनुभवों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों का एक सशक्त मंच बनकर उभरी है। इसका तृतीय अंक इस बात का प्रमाण है कि राज्य की शैक्षिक व्यवस्था तकनीक-समर्थित, नवाचार-केंद्रित और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप निरंतर आगे बढ़ रही है –

रतब्याणी “भोर का समय” Vol 3: में शिक्षा के विविध और समसामयिक आयामों को समाहित किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं—

  • ICT एवं AI आधारित समावेशी शिक्षा पहलें
  • MOOC 2.0 के अंतर्गत 47,000+ शिक्षकों की भागीदारी और उपलब्धियाँ
  • Innovate Uttarakhand Hackathon 2.0 और छात्रों-शिक्षकों के नवाचारी समाधान
  • Mission Karmayogi एवं Capacity Building Units (CBU)
  • DIKSHA पोर्टल हेतु ई-कंटेंट निर्माण पर शोध लेख
  • विद्यालयी नवाचार, श्रेष्ठ शैक्षिक अभ्यास, शोध आलेख, साहित्यिक रचनाएँ एवं अनुभव आधारित लेख

डॉ के एन बीजलवाण सहायक निदेशक ने समीक्षक के रूप मे कहा कि यह अंक रतब्याणी “भोर का समय” Vol 3 -शैक्षिक शोध, नीति, व्यवहार और तकनीक के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण करता है, जिससे शिक्षक, विद्यार्थी, शैक्षिक प्रशासक और शोधार्थी सभी लाभान्वित होते हैं

डिजिटल, ओपन और वैश्विक पहुँच

रतब्याणी : भोर का समय” को डिजिटल OER (Open Educational Resource) के रूप में प्रकाशित किया गया है, जिससे यह दुनिया भर के पाठकों के लिए सुलभ है। यह ई-मैगज़ीन Live View और Flip Book दोनों स्वरूपों में उपलब्ध है, जिससे पाठकों को एक इंटरैक्टिव और आधुनिक पठन अनुभव प्राप्त होता है।

ई-मैगज़ीन को Innovate Uttarakhand Portal पर देखा जा सकता है:
 https://innovateuttarakhand.com/magazine/

निदेशक गर्ब्याल  द्वारा अपने संदेश में SCERT उत्तराखंड के आईटी विभाग, संपादकीय टीम और शिक्षकों के सतत प्रयासों की सराहना की गई है। यह ई-मैगज़ीन राज्य की डिजिटल शिक्षा यात्रा, नवाचार संस्कृति और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संवाद को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का माध्यम बन रही है रतब्याणी “भोर का समय” Vol 3

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी ने कहा कि द्विवार्षिक रूप से प्रकाशित “रतब्याणी : भोर का समय” का तृतीय अंक न केवल SCERT उत्तराखंड की उपलब्धियों का दस्तावेज़ है, बल्कि यह भविष्य की शिक्षा के लिए विचार, नवाचार और प्रेरणा का एक सशक्त स्रोत भी है। यह ई-मैगज़ीन शिक्षक-समुदाय, विद्यार्थियों और शिक्षा-प्रेमियों के लिए संवाद और ज्ञान-विस्तार का एक विश्वसनीय डिजिटल मंच बन चुकी है।

Monday, February 02, 2026

निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल की अध्यक्षता में Mission Karmayogi के ACBP पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन

 

SCERT उत्तराखंड के अपर निदेशक सभागार में निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल की  अध्यक्षता में Mission Karmayogi के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का उद्देश्य Capacity Building Plan तथा भविष्य की वार्षिक योजना (Annual Capacity Building Plan – ACBP) की रूपरेखा पर विचार-विमर्श करना था।

बैठक की शुरुआत उप-निदेशक, विद्यालय शिक्षा (माध्यमिक) पंकज शर्मा द्वारा की गई। इसके पश्चात पूर्व निर्धारित एजेंडा बिंदुओं पर बिंदुवार चर्चा की गई। चर्चा के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि Capacity Building Unit (CBU) में कौन-कौन से अधिकारी एवं विशेषज्ञ किन-किन उत्तरदायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा उनकी भूमिकाएँ क्या होंगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि Mission Karmayogi पोर्टल पर वार्षिक क्षमता संवर्धन योजना किस प्रकार तैयार की जाएगी। इसके अंतर्गत Functional, Behavioural एवं Domain आधारित दक्षताओं को Training Needs Assessment (TNA) के माध्यम से चिन्हित किया जाएगा तथा संबंधित डोमेन के अनुसार पाठ्यक्रमों (Courses) का निर्माण किया जाएगा।

यह तय किया गया कि Mission Karmayogi के अंतर्गत SCERT उत्तराखंड प्रशिक्षण योजना (Training Plan) तैयार करेगा, जिसमें SIMAT, समस्त DIETs, प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशालय तथा जनपदों के शिक्षा अधिकारी सहयोग प्रदान करेंगे।

बैठक में यह प्रस्ताव भी रखा गया कि राज्य स्तर पर Mission Karmayogi प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा, जिसमें सतत रूप से कार्य करने वाले तकनीकी एवं विषय-विशेषज्ञ नियुक्त किए जाएंगे। यह प्रकोष्ठ पोर्टल प्रबंधन के साथ-साथ कोर्स निर्माण, संचालन एवं संपादन में सहयोग करेगा। इस कार्य में बाह्य एजेंसियों एवं विभागीय उच्चाधिकारियों की भूमिका भी निरंतर बनी रहेगी।

निर्णयानुसार, महानिदेशक विद्यालय शिक्षा इस Capacity Building Unit के अध्यक्ष तथा सचिव, अकादमिक /निदेशक इसके पदेन सचिव रहेंगे। बैठक में अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी , सचिव उत्तराखण्ड बोर्ड परीक्षा, वीरेंद्र सेमल्टी ,उपसचिव सी पी रतुड़ी, उपनिदेशक प्रारम्भिक शैलेन्द्र चौहान , सहायक निदेशक डॉ के एन बिजलवान एवं विभिन्न जनपदों से आए शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, DIET प्राचार्य एवं निदेशालय के अधिकारी उपस्थित रहे। चर्चा के दौरान विशेष रूप से भविष्य में बजट प्रावधानों में कोर्स निर्माण हेतु वित्तीय व्यवस्था किए जाने के सुझावों को भी संज्ञान में लिया गया।

महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड द्वारा जारी आदेश संख्या iGOT/305, दिनांक 02 फरवरी 2026 के अनुसार Mission Karmayogi परियोजना के अंतर्गत क्षमता निर्माण इकाई (Capacity Building Unit – CPU) समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक के क्रम में विभागीय स्तर पर वार्षिक क्षमता योजना (Annual Capacity Plan – ACP) तैयार किए जाने का निर्णय लिया गया। ACP निर्माण हेतु नामित अधिकारियों एवं विशेषज्ञों को 03 फरवरी 2026 से 05 फरवरी 2026 तक SCERT उत्तराखंड, देहरादून में उपस्थित रहकर विभागीय समिति से समन्वय स्थापित करते हुए योजना का प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश अपर निदेशक, महानिदेशालय, उत्तराखंड द्वारा निर्गत किया गया। ACP निर्माण हेतु नामित अधिकारियों में डॉ. सुरेन्द्र सिंह नेगी (खंड शिक्षा अधिकारी, द्वाराहाट, पौड़ी),  मदन मोहन जोशी (सलाहकार, विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड), डॉ. विनोद कुमार ध्यानी (जूनियर प्रोफेशनल, CMAT) तथा डॉ. जगमोहन सिंह बिष्ट (जूनियर प्रोफेशनल, SCERT देहरादून) शामिल हैं।

Mission Karmayogi : SCERT उत्तराखंड – Capacity Building Framework (Block)

A. संस्थागत संरचना (Institutional Framework)

  • SCERT उत्तराखंड : ट्रैनिंग Apex Capacity Building Unit (CBU)
  • सहयोगी इकाइयाँ : SIEMAT एवं समस्त DIETs
  • अध्यक्ष : महानिदेशक, विद्यालय शिक्षा
  • पदेन सचिव : निदेशक, अकादमिक 

B. योजना का आधार (Planning Base)

  • Training Needs Assessment (TNA)
  • भूमिका-आधारित दक्षता मानचित्रण
  • छात्र अधिगम डेटा एवं संस्थागत समीक्षा

C. दक्षता डोमेन (Competency Domains)

Behavioural Competencies

  • व्यावसायिक नैतिकता
  • संप्रेषण एवं नेतृत्व
  • सहयोग एवं परिवर्तन प्रबंधन
Functional Competencies
  • शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया
  • मूल्यांकन एवं अकादमिक पर्यवेक्षण
  • विद्यालय योजना एवं प्रबंधन
Domain Competencies
  • विषयगत दक्षता
  • NEP-2020 एवं NCF
  • समावेशी शिक्षा एवं FLN
  • डिजिटल पेडागॉजी
  • DIKSHA / LMS
  • ई-कंटेंट निर्माण एवं साइबर सुरक्षा

D. क्रियान्वयन रणनीति (Implementation Strategy)

  • वार्षिक ACBP का निर्माण
  • Mission Karmayogi पोर्टल पर अपलोड
  • ऑनलाइन, मिश्रित एवं प्रत्यक्ष प्रशिक्षण
  • सतत मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन

E. अपेक्षित परिणाम (Expected Outcomes)

  • एकीकृत क्षमता संवर्धन पारिस्थितिकी तंत्र
  • शिक्षकों एवं शैक्षिक नेतृत्व की दक्षता में वृद्धि
  • NEP-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन
  • परिणाम-आधारित एवं सतत व्यावसायिक विकास

एक खेल, एक संकल्प—नशामुक्त भविष्य: 2026

 


खेलों के माध्यम से नशा उन्मूलन (Sports Against Substance Abuse)

— एक सशक्त पहल, एक सुरक्षित भविष्य की ओर

वैश्विक स्तर पर मादक पदार्थों (Substance Abuse) का दुरुपयोग एक गंभीर सामाजिक चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है। इसका दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति विशेष तक सीमित न रहकर उसके परिवार, समाज और राष्ट्र की सामाजिक-आर्थिक संरचना को भी प्रभावित करता है। नवीन अध्ययनों के अनुसार माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 12 से 18 वर्ष की आयु के बच्चे इस समस्या के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं। अनावश्यक जिज्ञासा, साथियों का दबाव, उचित मार्गदर्शन एवं जागरूकता की कमी, तथा कई बार सामाजिक-आर्थिक और मनोवैज्ञानिक परिस्थितियाँ उन्हें नशे की ओर धकेल देती हैं।

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2047 तक नशामुक्त भारत का संकल्प तथा माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य को नशामुक्त बनाने हेतु जन-भागीदारी का आह्वान, हम सभी के लिए एक स्पष्ट दिशा और जिम्मेदारी तय करता है। ऐसे में शिक्षा जगत, शिक्षक, अभिभावक और समाज—सभी की संयुक्त भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

उत्तराखण्ड में वर्तमान परिस्थितियाँ

देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार, रुद्रपुर, काशीपुर, कोटद्वार, रुड़की, अल्मोड़ा, नैनीताल, मसूरी और श्रीनगर जैसे शहर जो कभी शिक्षा और संस्कारों के केंद्र माने जाते थे, आज नशा तस्करी के उभरते हुए गढ़ बनते जा रहे हैं। यह समस्या अब केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर छोटे कस्बों और दूरस्थ गाँवों तक फैल चुकी है।

नशा तस्करी के संगठित नेटवर्क में कई बार बच्चों का दुरुपयोग भी किया जा रहा है। एक ओर बच्चे नशे की लत के शिकार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे तस्करी के जाल में भी फँसाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर स्थिति अत्यंत भयावह और चिंताजनक है, जिसमें विशेषज्ञों के अनुसार तत्काल एवं समन्वित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

खेलों की चमत्कारिक और सकारात्मक भूमिका

इन विषम परिस्थितियों में खेल एक प्रभावी, सशक्त और टिकाऊ समाधान के रूप में सामने आते हैं। खेल न केवल बच्चों के शारीरिक विकास में सहायक होते हैं, बल्कि उनमें अनुशासन, टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास तथा मानसिक मजबूती जैसे गुणों का भी विकास करते हैं।

अध्ययनों से स्पष्ट है कि जो विद्यार्थी नियमित रूप से खेलों और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में संलग्न रहते हैं, उनके नशे की गिरफ्त में आने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है। पढ़ाई और खेलों में व्यस्त विद्यार्थी के पास नकारात्मक गतिविधियों के लिए न समय होता है और न ही रुचि।

इस संदर्भ में शिक्षक—विशेषकर खेल शिक्षक—की भूमिका अत्यंत निर्णायक हो जाती है। इतिहास साक्षी है कि सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में शिक्षकों ने सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। आज फिर वही अवसर हमारे सामने है।

बच्चों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशन

1. संवेदनशील आयु में उपयुक्त मार्गदर्शन

कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी भावनात्मक, सामाजिक और शारीरिक विकास के संक्रमणकाल में होते हैं। इस अवस्था में खेल, रचनात्मक गतिविधियाँ और शिक्षक की सकारात्मक उपस्थिति उन्हें सही दिशा देकर नशे जैसी बुराइयों से दूर रख सकती है।

2. समय का सृजनात्मक एवं सकारात्मक उपयोग

जब बच्चे खेल, क्लब गतिविधियाँ, कला, संगीत, NSS/NCC, वाद-विवाद, समूह चर्चा, क्विज़ आदि में सक्रिय रहते हैं, तो वे नकारात्मक प्रभावों से स्वाभाविक रूप से दूर रहते हैं। विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम, कौशल-निर्माण गतिविधियाँ और सामुदायिक सहभागिता उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देती हैं।

3. जीवन कौशल का विकास

खेलों और सह-शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में निर्णय-क्षमता, समस्या-समाधान, संचार कौशल, भावनात्मक नियंत्रण और टीमवर्क जैसे जीवन कौशल विकसित होते हैं। वे अनुचित दबाव के सामने “ना” कहना, जिम्मेदार व्यवहार अपनाना और चुनौतियों से जूझना सीखते हैं।

इस कार्यशाला में माया खगड़ियाल, डॉ. संजय रावत, डॉ. माधवी अवस्थी (मनोचिकित्सक), डॉ. अरुण शर्मा, डॉ. सिद्धांत माथुर, मुख्य शिक्षा अधिकारी कुंवर सिंह रावत, DIET प्राचार्य डॉ. अजंता बिष्ट, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आलोक मिश्रा ने अपने प्रेरक विचार रखे। कार्यक्रम में 120 से अधिक शारीरिक शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों ने सहभागिता की।
एससीईआरटी से कार्यक्रम के विशेषज्ञ एवं समन्वयक गोपाल सिंह घुघत्याल एवं  सुनील भट्ट द्वारा विस्तृत प्रस्तुतिकरण भी दिया गया।

4. शिक्षक और समाज की सकारात्मक भूमिका

शिक्षक, वरिष्ठ विद्यार्थी और समाज के जिम्मेदार नागरिक बच्चों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत बन सकते हैं। बच्चे स्वाभाविक रूप से अपने बड़ों के आचरण का अनुसरण करते हैं। सकारात्मक उदाहरण, अनुशासन और संवेदनशील व्यवहार उन्हें सही मार्ग पर अग्रसर करता है।

कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य

  1. नशा उन्मूलन में खेलों की प्रभावी भूमिका को स्थापित करना।

  2. छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं समुदाय को नशा-विरोधी अभियान से जोड़ना।

  3. नियमित जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देना।

  4. खेलों द्वारा आत्म-देखभाल, फिटनेस और मानसिक सुदृढ़ता को बढ़ावा देना।

  5. संवाद कौशल, टीमवर्क और सामाजिक सामंजस्य को सशक्त बनाना।

विद्यालय में खेल शिक्षक (व्यायाम) की प्रस्तावित कार्य-योजना

  1. Substance Abuse के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाना तथा विद्यार्थियों को खेलों एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना।

  2. नशे से प्रभावित बच्चों की पहचान करना, साथ ही उनकी पहचान को पूर्णतः गोपनीय रखना।

  3. प्रभावित बच्चों को नशामुक्ति हेतु सक्रिय सहयोग प्रदान करना—जिसमें प्रधानाचार्य, अन्य शिक्षक, SMC एवं PTA की सहभागिता सुनिश्चित हो।

  4. बच्चों के सुचारू पुनर्वास (Smooth Rehabilitation) एवं मुख्यधारा में पुनः एकीकरण (Reintegration) में सक्रिय योगदान देना।

यह निर्विवाद सत्य है कि खेल एक स्वस्थ जीवन-शैली की नींव रखते हैं। खेलों में व्यस्त बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होते हैं तथा किसी भी प्रकार के व्यसनों से दूर रहते हैं। खेल, क्विज़, वाद-विवाद, विज्ञान प्रतियोगिता, पोस्टर, कला, नृत्य, गायन, समाचार वाचन, नैतिक वचनों के पाठन जैसी विविध गतिविधियाँ बच्चों को सकारात्मक, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बनाती हैं।

स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं नशामुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संगठनों की सहभागिता से यह अभियान और अधिक प्रभावी बनता है। बन्दना गर्ब्याल निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण तथा पदमेन्द्र सकलानी अपर निदेशक SCERT के मार्गदर्शन में संपादित यह कार्यशाला, नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरक कदम है।