Monday, July 06, 2026

महानिदेशक आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में विद्यालयी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न

 

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड में आज महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोंडे (IAS) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में हो रहे गुणात्मक परिवर्तन, नवाचार आधारित पहल, डिजिटल सुधार, नीति क्रियान्वयन तथा भारत सरकार एवं शासन की प्राथमिकताओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करना था। बैठक में आगामी शासन स्तर की समीक्षा एवं सचिव, उत्तराखण्ड सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमुख बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम का शुभारम्भ निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण  बंदना गर्ब्याल  द्वारा महानिदेशक का स्वागत करते हुए किया गया। बैठक का संचालन एवं मॉडरेशन उप परियोजना निदेशक अजीत भंडारी ने किया।

बैठक के प्रमुख उद्देश्य

बैठक में निम्न प्रमुख विषयों पर विस्तृत समीक्षा की गई—

  • विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार की वर्तमान स्थिति।

  • PGI (Performance Grading Index) में राज्य की रैंकिंग सुधारने की रणनीति।

  • ड्रॉपआउट दर, GER (Gross Enrolment Ratio) एवं Retention Rate की समीक्षा।

  • विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं की प्रगति।

  • नवाचार आधारित कार्यक्रमों एवं डिजिटल शिक्षा सुधारों की समीक्षा।

  • शासन द्वारा मांगी गई सूचनाओं एवं आगामी कार्ययोजना पर चर्चा।

प्रमुख बिंदुओं पर समीक्षा

बैठक में शासन द्वारा अपेक्षित विभिन्न नवाचारों एवं परिवर्तनकारी पहलों की प्रस्तुति पर विशेष चर्चा हुई। इनमें प्रमुख रूप से—

  • विद्यालयी शिक्षा में संचालित अभिनव कार्यक्रम।

  • गेम-चेंजर परियोजनाएँ।

  • तकनीकी नवाचार एवं AI आधारित पहल।

  • वेबसाइट एवं पोर्टलों का उन्नयन।

  • डिजिटल गवर्नेंस एवं ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार।

  • ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम।

  • राज्य स्तरीय हैकाथॉन एवं नवाचार प्रतियोगिताएँ।

  • SCERT द्वारा विकसित डिजिटल शिक्षण मॉडल एवं श्रेष्ठ प्रथाएँ।

महानिदेशक ने निर्देश दिए कि इन सभी नवाचारों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाए ताकि उन्हें राज्य की उपलब्धियों के रूप में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।

PGI सुधार हेतु विशेष निर्देश

महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने स्पष्ट किया कि राज्य की PGI रैंकिंग में सुधार सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए उन्होंने MIS समन्वयक  मुकेश बहुगुणा को निर्देशित किया कि—

  • एक सप्ताह के भीतर UDISE डेटा का व्यापक सत्यापन एवं अद्यतन कार्य पूरा किया जाए।

  • आवश्यकता अनुसार NIOS सहित संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित किया जाए।

  • विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों (Dropout Students) का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए।

  • ऐसा डैशबोर्ड विकसित किया जाए जिससे ड्रॉपआउट की वास्तविक स्थिति का नियमित विश्लेषण किया जा सके।

विद्यालयी आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान

प्रदेश के विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए महानिदेशक ने निर्देश दिए कि—

  • जिन विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है, उनकी प्राथमिकता सूची तैयार की जाए।

  • आवश्यक संसाधनों एवं निर्माण कार्यों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।

  • प्रत्येक जिले से नियमित प्रगति रिपोर्ट प्राप्त की जाए।

FLN एवं Learning Outcomes में सुधार

सभी निदेशकों  को निर्देशित करते हुए महानिदेशक ने कहा कि—

  • Foundational Literacy and Numeracy (FLN) में सुधार हेतु विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।

  • Learning Outcomes को बढ़ाने के लिए सुधारात्मक परियोजनाएँ प्रारम्भ की जाएँ।

  • शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को परिणामोन्मुख बनाया जाए।

  • सभी अकादमिक कार्यक्रमों की स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित कर उनका नियमित अनुश्रवण किया जाए।

अपर निदेशक अकादमिक को महानिदेशक ने कहा कि—

  • छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सुधार लाया जाए।

  • निपुण भारत मिशन के कार्यक्रमों को और अधिक परिणामकारी बनाया जाए।

  • SCERT द्वारा संचालित सभी नवाचार कार्यक्रमों के लिए एक सुनियोजित रोडमैप तैयार किया जाए।

  • नवाचारों के परिणामों का नियमित मूल्यांकन भी सुनिश्चित किया जाए।

समावेशी एवं समान शिक्षा पर जोर

उपनिदेशक अजीत भंडारी को निर्देशित किया गया कि— 

  • UDISE डेटा की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।

  • Inclusive Education एवं Equity से जुड़े सभी संकेतकों पर विशेष ध्यान दिया जाए।

  • प्रत्येक जिले की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की जाए।

शिक्षक रेशनलाइजेशन पर चर्चा

बैठक में प्रदेशभर में शिक्षकों की उपलब्धता एवं छात्र संख्या की समीक्षा की गई।

निर्णय लिया गया कि—

  • जहाँ शिक्षक संख्या आवश्यकता से अधिक है तथा

  • जहाँ छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षक कम हैं,

वहाँ Teacher Rationalization Policy के अंतर्गत संतुलित समायोजन हेतु विस्तृत परियोजना तैयार की जाएगी।

इस कार्य के लिए संयुक्त निदेशक  जे. पी. काला को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।

छात्रवृत्ति एवं ड्रॉपआउट पर सुझाव

बैठक के दौरान सह उपनिदेशक (समग्र शिक्षा) प्रद्युम्न रावत ने—

  • ड्रॉपआउट दर कम करने,

  • जोखिम वाले विद्यार्थियों की शीघ्र पहचान करने,

संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए, जिन पर गंभीरता से विचार किया गया। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उप परियोजना निदेशक पल्लवी नैन एवं फातिमा ने विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, समन्वय एवं सुधारात्मक उपायों पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। SCERT द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में—

  • सहायक निदेशक – डॉ. के. एन. बिजल्वाण

  • SCERT के सुनील भट्ट

  • SCERT आईटी विभाग से रमेश प्रसाद बड़ोनी

  • महानिदेशक कार्यालय, प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा तथा समग्र शिक्षा के अन्य अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के समापन पर महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने सभी अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों से आह्वान किया कि प्रत्येक अधिकारी अगली समीक्षा बैठक में कम-से-कम तीन नवाचारी विचार (Innovative Ideas) लेकर आए तथा उनके क्रियान्वयन की स्पष्ट योजना भी प्रस्तुत करे।

उन्होंने कहा कि केवल विचार प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके मापनीय परिणाम (Outcomes) भी दिखाई देने चाहिए।

उन्होंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि विद्यालयी शिक्षा विभाग को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने के लिए टीम भावना, नवाचार, तकनीकी उपयोग और समयबद्ध कार्यसंस्कृति को प्राथमिकता दें।

यह समीक्षा बैठक केवल योजनाओं की प्रगति की समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यालयी शिक्षा में डेटा-आधारित निर्णय, तकनीकी नवाचार, गुणवत्तापूर्ण अधिगम, समावेशी शिक्षा, शिक्षक क्षमता विकास और प्रशासनिक सुधार को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई। बैठक से स्पष्ट संदेश मिला कि उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा विभाग आगामी वर्षों में परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली, नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।