Saturday, July 25, 2026

25 जुलाई 2026: SCERT उत्तराखंड में अमर शहीद श्रीदेव सुमन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि


आज राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तराखंड (SCERT) के सभागार में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराखंड की जनचेतना के अमर नायक श्रीदेव सुमन के स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल, अपर निदेशक पद्मेंद्र सकलानी तथा सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानंद बिजलवाण की गरिमामयी उपस्थिति रही। SCERT उत्तराखंड के सभी संकाय सदस्यों, अन्य कार्मिकों, शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं ने अमर शहीद श्रीदेव सुमन के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण नमन किया।


कार्यक्रम के दौरान सभागार का वातावरण श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना से परिपूर्ण रहा। उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कार्मिकों ने श्रीदेव सुमन के त्याग, संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

मंच से डॉ. दिनेश रतूड़ी ने श्रीदेव सुमन के जीवन, संघर्ष, विचारों और ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि श्रीदेव सुमन का जीवन अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध साहसपूर्ण संघर्ष का अनुपम उदाहरण है।

उन्होंने अपने देश, प्रदेश और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि सत्य, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और मानवीय गरिमा की स्थापना के लिए किया गया महान प्रयास था।

डॉ. दिनेश रतूड़ी ने कहा कि श्रीदेव सुमन का जीवन विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। कठिन परिस्थितियों, यातनाओं और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने सत्य तथा न्याय का मार्ग नहीं छोड़ा। उनका बलिदान हमें यह संदेश देता है कि जनहित और न्याय के लिए किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।

इस अवसर पर निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल ने श्रीदेव सुमन के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के ऐसे महान क्रांतिकारियों, जननायकों और स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन एवं संघर्ष को विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम से भी जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि श्रीदेव सुमन के जीवन और योगदान को ‘हमारी विरासत एवं विभूतियां’ कक्षा 6 की सहायक पुस्तक में एक पाठ के रूप में शामिल किया गया है। इससे विद्यार्थियों को उत्तराखंड के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, जनसंघर्ष और बलिदान की समृद्ध परंपरा के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। 

निदेशक अकादमिक ने सभी शिक्षकों, अधिकारियों और कार्मिकों से आह्वान किया कि श्रीदेव सुमन को केवल स्मृति दिवस के अवसर पर ही याद न किया जाए, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को अपने जीवन तथा कार्य व्यवहार में भी अपनाया जाए।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भीतर सत्य, साहस, कर्तव्यनिष्ठा, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना विकसित करने के लिए श्रीदेव सुमन का जीवन अत्यंत प्रेरणादायक है।

श्रीदेव सुमन का जीवन हमें देता है अमूल्य संदेश

श्रीदेव सुमन का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और न्याय का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। व्यक्तिगत हित से ऊपर समाज, प्रदेश और राष्ट्र के हित को रखना ही सच्ची देशभक्ति है।

उनके जीवन से हमें अन्याय के विरुद्ध साहसपूर्वक आवाज उठाने, समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने और जनसेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने की प्रेरणा मिलती है।

युवाओं के लिए उनका जीवन अनुशासन, आत्मबल, दृढ़ संकल्प और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनका संघर्ष उत्तराखंड की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण अध्याय है।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित सभी अधिकारियों, संकाय सदस्यों, शिक्षकों और कार्मिकों को श्रीदेव सुमन के जीवन-मूल्यों से पुनः जुड़ने का अवसर मिला।

सभी ने शिक्षा, समाज और प्रदेश के विकास में ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महान क्रांतिकारियों के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज में न्याय, समानता तथा मानवता की स्थापना के लिए कार्य करें।

अमर शहीद श्रीदेव सुमन को शत-शत नमन।  उनका त्याग, संघर्ष और बलिदान उत्तराखंड की चेतना में सदैव जीवित रहेगा।