Thursday, June 11, 2026

डी.एल.एड. प्रथम सेमेस्टर मॉडल प्रश्नपत्र निर्माण हेतु राज्यस्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ

Arun Thapliyal DElEd Dept , टिहरी गढ़वाल, 11 जून 2026

उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर (नैनीताल) के तत्वावधान में आयोजित डी.एल.एड. प्रथम सेमेस्टर मॉडल प्रश्नपत्र निर्माण हेतु दो दिवसीय  (11 व 12 जून 2026) राज्यस्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ आज जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), टिहरी गढ़वाल में संपन्न हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं परख (PARAKH) की अनुशंसाओं के अनुरूप सेवापूर्व शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में मूल्यांकन एवं प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, दक्षतामूलक तथा भविष्य उन्मुख बनाना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ डी.एल.एड. प्रशिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात डायट टिहरी के प्राचार्य द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम समन्वयक/शोध अधिकारी नमिता पांडेय ने सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला के प्रमुख बिंदुओं से परिचित कराया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  सी.पी. रतूड़ी, संयुक्त सचिव, उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद ,नैनीतालने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में मूल्यांकन संबंधी दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भावी शिक्षकों को केवल ज्ञान आधारित नहीं, बल्कि दक्षता आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं के लिए तैयार करने हेतु प्रश्नपत्र निर्माण में आवश्यक सुधार समय की मांग है। उन्होंने परख (PARAKH) द्वारा सुझाए गए मानकों के अनुरूप मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।


इस अवसर पर परिषद की उप सचिव सुषमा गौरव ने कार्यशाला की रूपरेखा, उद्देश्यों, अपेक्षित प्रतिफलों तथा आगामी कार्ययोजना से प्रतिभागियों को विस्तारपूर्वक अवगत कराया।

एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड से प्रतिभाग कर रहे अरुण थपलियाल, प्रवक्ता, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मूल्यांकन को केवल परीक्षा तक सीमित न मानकर अधिगम सुधार के व्यापक उपकरण के रूप में देखने की आवश्यकता है। उन्होंने मूल्यांकन साक्षरता (Assessment Literacy) को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि बदलते सामाजिक परिदृश्य एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति की संस्तुतियों के अनुरूप सक्षम, संवेदनशील एवं नवाचारी शिक्षकों का निर्माण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र निर्माण में किए जा रहे नवाचारों एवं परिवर्तनों को प्रशिक्षण प्रक्रिया के माध्यम से प्रशिक्षुओं के व्यवहारगत परिवर्तन में रूपांतरित करना डायट संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

कार्यशाला में प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) से सेवापूर्व शिक्षक शिक्षा विभाग के प्रवक्ताओं द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। आगामी सत्रों में प्रतिभागियों द्वारा डी.एल.एड. प्रथम सेमेस्टर के विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, एन.सी.एफ.टी.ई. तथा परख के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मॉडल प्रश्नपत्रों का निर्माण एवं समीक्षा कार्य किया जाएगा। कार्यक्रम में परिषद, एस.सी.ई.आर.टी., डायट टिहरी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।