देहरादून, 16 जून 2026
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखण्ड के सभागार में दिनांक 16 जून 2026 को राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (National Population Education Project - NPEP) की कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बन्दना गर्ब्याल, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, एससीईआरटी उत्तराखण्ड द्वारा की गई।
राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित तथा एनसीईआरटी, नई दिल्ली द्वारा संचालित एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसका प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में जनसंख्या संबंधी मुद्दों, स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरणीय संतुलन तथा सतत विकास पर जनसंख्या के प्रभावों के प्रति जागरूकता विकसित करना है। यह कार्यक्रम विद्यालयी शिक्षा के माध्यम से युवाओं को जिम्मेदार, संवेदनशील एवं जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में कार्य करता है।
बैठक के दौरान वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार द्वारा अनुमोदित गतिविधियों एवं बजट पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही वर्ष 2025-26 में संचालित कार्यक्रमों, गतिविधियों एवं व्यय विवरण का विस्तृत प्रस्तुतिकरण भी किया गया।
राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना के अंतर्गत संचालित प्रमुख गतिविधियों में शिक्षकों एवं शिक्षक-प्रशिक्षकों के लिए उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम, संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन, जन-जागरूकता अभियान, वाद-विवाद, निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण, प्रश्नोत्तरी एवं भूमिका-अभिनय प्रतियोगिताएँ, शिक्षण-अधिगम सामग्री का विकास एवं प्रसार, अनुसंधान, मूल्यांकन एवं अनुश्रवण गतिविधियाँ तथा किशोर शिक्षा कार्यक्रम (Adolescence Education Programme - AEP) का संचालन शामिल हैं।
बैठक का एक प्रमुख आकर्षण वर्ष 2025-26 में संचालित शोध अध्ययन “A Study on the Effectiveness of the School Health and Wellness Programme on Health and Well-Being of Class IX Students in Government Secondary Schools of Uttarakhand” पर हुई विस्तृत चर्चा रही। अध्ययन के निष्कर्षों एवं अनुशंसाओं के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना (Road Map) तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने विद्यालयों में स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए अपने विचार रखे। प्रमुख प्रतिभागियों में के. एस. रावत, अपर निदेशक, महानिदेशालय विद्यालयी शिक्षा उत्तराखण्ड; नागेन्द्र बर्त्वाल, प्रभारी अपर निदेशक, एससीईआरटी उत्तराखण्ड; डॉ. के. एन. बिजल्वाण, सहायक निदेशक, एससीईआरटी उत्तराखण्ड; डॉ. अरिता सक्सेना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग उत्तराखण्ड; कृष्णा जयाडा, बाल विकास विभाग; आशीष मोहन, वित्त अधिकारी, समग्र शिक्षा देहरादून; डॉ. आरती रौथाण, मनोवैज्ञानिक, साईं इंस्टीट्यूट देहरादून तथा दीपक रतूड़ी, प्रवक्ता, डायट टिहरी शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. उषा कटियार, प्रवक्ता, एससीईआरटी उत्तराखण्ड द्वारा किया गया। इस अवसर पर एससीईआरटी परिवार से सुनील भट्ट, संजय भट्ट, देवराज राणा, हिमानी थापा रौतेला एवं नविता भण्डारी भी उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल ने कहा कि जनसंख्या शिक्षा केवल आंकड़ों और तथ्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में जीवन कौशल, स्वास्थ्य जागरूकता, लैंगिक संवेदनशीलता, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व तथा सतत विकास की समझ विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया ताकि कार्यक्रम के उद्देश्यों को विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सके।