Monday, June 08, 2026

आकांक्षा कोंडे ने संभाला महानिदेशक का दायित्व: उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा के लिये प्रयास

 

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग को नई नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक ऊर्जा प्राप्त हुई है। वर्ष 2018 बैच की आईएएस आकांक्षा कोंडे ने विद्यालयी शिक्षा विभाग के महानिदेशक (Director General School Education) का पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग के तीनों प्रमुख निदेशालयों—माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा तथा अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण (SCERT)—की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित कर विभागीय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

बैठक में निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती तथा प्राथमिक शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित कार्यक्रमों, उपलब्धियों एवं वर्तमान प्रगति की विस्तृत प्रस्तुति दी। विभागीय अधिकारियों ने राज्य में चल रही विभिन्न शैक्षिक योजनाओं, नवाचारों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए संचालित पहलों की जानकारी साझा की।

समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न विभागाध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों, उपलब्धियों तथा सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही इन चुनौतियों के समाधान हेतु तैयार की गई रणनीतियों और आगामी कार्ययोजनाओं को भी प्रस्तुत किया गया। बजट प्रबंधन, प्रस्तावित योजनाओं, प्रशिक्षण गतिविधियों तथा विभागीय कार्यक्रमों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस अवसर पर डॉ के एन बिजलवान सहायक निदेशक ने एससीईआरटी उत्तराखंड द्वारा संचालित नवाचारी कार्यक्रमों को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। आईटी विभाग की ओर से राज्यभर के शिक्षकों के लिए संचालित ऑनलाइन MOOCs पाठ्यक्रम, AI एवं ICT आधारित क्षमता विकास कार्यक्रम, इनोवेट उत्तराखंड हैकाथॉन, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विकास तथा तकनीकी नवाचारों से संबंधित पहलों की जानकारी साझा की गई। इन कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों में नवाचार, डिजिटल दक्षता और समस्या समाधान कौशल विकसित करने के प्रयासों को रेखांकित किया गया।

बैठक के दौरान महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने सभी अधिकारियों एवं विभागीय प्रतिनिधियों को अपने कार्यक्रमों का सुव्यवस्थित एवं प्रभावी संचालन जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा, समयबद्ध रिपोर्टिंग तथा परिणाम-आधारित कार्य संस्कृति को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर यदि किसी योजना या कार्यक्रम के क्रियान्वयन में बाधा आती है अथवा उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, तो उसे निर्धारित रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से तत्काल निदेशालय और महानिदेशक कार्यालय तक पहुंचाया जाए, ताकि समय रहते उसका समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि विभाग के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी समन्वित प्रयासों के माध्यम से राज्य की विद्यालयी शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नई नेतृत्व टीम के मार्गदर्शन में शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल नवाचार, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है।

आकांक्षा कोंडे का यह पहला समीक्षा संवाद केवल विभागीय कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विद्यालयी शिक्षा के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी, नवाचारी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।