Friday, June 05, 2026

विश्व पर्यावरण दिवस पर SCERT उत्तराखंड में विचार संगोष्ठी का आयोजन

 

देहरादून, 5 जून 2026

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर SCERT उत्तराखंड के सभागार में एक विचार संगोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा व्यक्तिगत स्तर पर अपनाए जाने वाले व्यवहारिक उपायों पर विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम में निदेशक अकादमिक एवं प्रशिक्षण, वंदना गर्ब्याल  द्वारा सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर इसे जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया गया। उनके मार्गदर्शन में सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण द्वारा संगोष्ठी का संचालन किया गया।

संगोष्ठी में तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई—

  1. वर्तमान समय में पर्यावरण के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ।

  2. पर्यावरण संरक्षण हेतु किए जा सकने वाले छोटे-छोटे व्यवहारिक प्रयास।

  3. दैनिक जीवन में अपनाई जाने वाली ऐसी आदतें जो पर्यावरण को सतत एवं संतुलित बनाए रखने में सहायक हों।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संकाय सदस्यों एवं कार्मिकों  को अपने विचार रखने के लिए खुला मंच प्रदान किया गया। सर्वप्रथम प्रवक्ता शुभ्रा सिंघल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बचपन से ही स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन की आदतों को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने प्लास्टिक बैग के स्थान पर जूट एवं कपड़े के थैलों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

रवि दर्शन तोपवाल ने उत्तराखंड की पर्यावरणीय विरासत का उल्लेख करते हुए चिपको आंदोलन और गौरा देवी के योगदान को स्मरण किया तथा वन संरक्षण की दिशा में समाज की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।

प्रवक्ता सुशील गैरोला  ने कारपूलिंग, साइकिल के उपयोग तथा अनावश्यक प्रिंटिंग को कम करने जैसे उपाय सुझाए। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कदम भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रवक्ता मनोज बहुगुणा ने त्योहारों के दौरान होने वाले प्रदूषण को कम करने पर जोर देते हुए विशेष रूप से दीपावली में पटाखों के सीमित उपयोग की आवश्यकता बताई। अन्य वक्ताओं ने भी दैनिक जीवन की उन आदतों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को प्रभावित करती हैं।

डॉ. दिनेश रतूड़ी ने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, नैतिक मूल्यों तथा यजुर्वेद में वर्णित प्रकृति संरक्षण संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता बताई।

शिव प्रकाश वर्मा, विनय थपलियाल , डॉ अवनीश उनियाल , अखिलेश डोभाल , डॉ आलोक प्रभा , नमिता सिंह , डॉ मनोज शुक्ला , सौरभ जोशी एवं की अन्य प्रवक्ताओं ने संगोष्ठी में  देश-विदेश के ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए, जहाँ व्यक्तियों और समुदायों ने वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आई टी प्रवक्ता ने डिजिटल युग में बढ़ते कार्बन उत्सर्जन पर चर्चा करते हुए  डिजिटल कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने अनावश्यक डेटा स्टोरेज, अत्यधिक अपलोडिंग-डाउनलोडिंग तथा उच्च गुणवत्ता वाले बड़े वीडियो फ़ाइलों के अनियंत्रित साझा करने से बचने की सलाह दी।

कार्यक्रम के समापन चरण में डॉ. के एन बीजल्वान  ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रसिद्ध 3R सिद्धांत – Reduce, Reuse और Recycle को अपनाने का संदेश दिया और इसे सतत जीवनशैली का आधार बताया।

अंत में निदेशक  वंदना गर्ब्याल को डॉ संजीव चेतन द्वारा निर्मित पर्यावरण पेंटिंग भेंट की । निदेशक ने सभी प्रतिभागियों द्वारा व्यक्त विचारों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों या अभियानों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने होंगे। उन्होंने सभी से पर्यावरण हितैषी आदतों को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्यों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने विचार साझा किए। विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह संगोष्ठी पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।