Wednesday, June 10, 2026

सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम (Social Emotional Learning - SEL) की दिशा में उत्तराखंड

 

आज की शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं रह गई है। बदलते सामाजिक परिवेश, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों और जीवन कौशलों की आवश्यकता को देखते हुए विद्यालयों में सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम (Social Emotional Learning - SEL) का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए 9 जून 2026 को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), देहरादून के सभागार में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में उत्तराखंड के सभी जनपदों से मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO), जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) तथा उप शिक्षा अधिकारी (Dy. EO) सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम की अवधारणा को प्रभावी रूप से लागू करने हेतु जिला स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कुंडे द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और आत्मविश्वासी नागरिक तैयार करना है जो जीवन की चुनौतियों का सकारात्मक ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने विद्यालयों में सामाजिक एवं भावनात्मक कौशलों के विकास को वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए निदेशक, अकादमिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण (ART),  वंदना गर्ब्याल ने सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, सहयोग, संवाद कौशल तथा सकारात्मक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला है। उन्होंने विशेष रूप से पीएम श्री विद्यालयों में SEL आधारित गतिविधियों को प्रभावी रूप से लागू करने पर बल दिया।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने SEL के विभिन्न आयामों, विद्यालयी वातावरण में इसके एकीकरण, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक व्यवहार निर्माण तथा समावेशी शिक्षा से इसके संबंधों पर विस्तृत चर्चा की। विभिन्न प्रस्तुतियों और संवाद सत्रों के माध्यम से यह साझा किया गया कि किस प्रकार सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सहयोगात्मक सोच और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रोत्साहित कर सकता है।

यह कार्यशाला उत्तराखंड में एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई, जहाँ विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को भी समान महत्व दिया जाए। भविष्य में SEL के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से राज्य के विद्यालयों में अधिक सकारात्मक, समावेशी, सुरक्षित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण वातावरण विकसित होने की अपेक्षा है।