Tuesday, July 07, 2026

उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए बड़ी राहत: हाईकोर्ट के फैसले से प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति का रास्ता हुआ साफ

वर्षों से लंबित पदोन्नति विवाद पर आया ऐतिहासिक निर्णय, हजारों शिक्षकों को मिलेगा लाभ
वर्षों से अटका था पदोन्नति का मामला- हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
  • अब खुल सकता है पदोन्नति का मार्ग
  • शिक्षकों के लंबे संघर्ष को मिली सफलता
  • शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
  • शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा।
  • विद्यालयों में नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी।
  • विषय विशेषज्ञ प्रवक्ताओं की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी।
आगे क्या? निष्कर्ष

उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक समाचार सामने आया है। लंबे समय से प्रवक्ता (Lecturer) पदों पर पदोन्नति को लेकर चल रहे तकनीकी विवाद पर अब उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत प्रदान की है। यह निर्णय न केवल वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को गति देगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

एलटी (LT) संवर्ग से प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति को लेकर शिक्षा विभाग में कई वर्षों से तकनीकी एवं कानूनी विवाद बना हुआ था। वरिष्ठता निर्धारण को लेकर विभिन्न व्याख्याओं के कारण पदोन्नति प्रक्रिया लगातार प्रभावित हो रही थी। परिणामस्वरूप अनेक योग्य शिक्षक समय पर पदोन्नति से वंचित रहे और विभाग में अनेक प्रवक्ता पद रिक्त बने रहे।

इस विवाद के समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर कानूनी कार्यवाही हुई और मामला अंततः उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय तक पहुँचा।

समाचार के अनुसार, हाईकोर्ट ने स्पेशल बोर्ड की याचिका संख्या 362 का निस्तारण करते हुए 21 अप्रैल 2022 के ट्रिब्यूनल के आदेश को निरस्त कर दिया है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 21 नवम्बर 1995 के शासनादेश के आधार पर 1 अक्टूबर 1990 से कार्यरत एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता का निर्धारण किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार द्वारा 26 जून 2025 तथा 27 नवम्बर 2025 को जारी अधिसूचनाओं को भी आधार माना गया है।

इस निर्णय से वर्षों से चली आ रही वरिष्ठता संबंधी असमंजस की स्थिति समाप्त होने की उम्मीद है और विभाग अब पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगा।

हाईकोर्ट के निर्णय के बाद शिक्षा विभाग में एलटी से प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। विभाग अब वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देकर रिक्त पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ कर सकता है।

इसका सीधा लाभ उन शिक्षकों को मिलेगा जो वर्षों से अपनी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे। साथ ही विद्यालयों में रिक्त प्रवक्ता पदों के भरने से विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

यह निर्णय केवल एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि शिक्षकों के लंबे संघर्ष की सफलता भी माना जा रहा है। समाचार के अनुसार, राजकीय विनियमितीकृत माध्यमिक शिक्षक समिति, उत्तराखण्ड के प्रतिनिधियों ने इसे वर्षों की सामूहिक लड़ाई का परिणाम बताया है।

समिति के अनुसार, अनेक शिक्षक नेताओं एवं प्रतिनिधियों ने लगातार इस मुद्दे को उठाया और कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके परिणामस्वरूप आज यह सकारात्मक निर्णय सामने आया है। यह उपलब्धि उन सभी शिक्षकों के धैर्य, एकजुटता और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

पदोन्नति केवल वेतन वृद्धि का विषय नहीं होती, बल्कि यह शिक्षकों के अनुभव, योग्यता और कार्य के सम्मान का प्रतीक भी है। समय पर पदोन्नति मिलने से—

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) भी शिक्षकों के व्यावसायिक विकास और समयबद्ध कैरियर प्रगति पर विशेष बल देती है। ऐसे में यह निर्णय राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग पर होंगी कि वह न्यायालय के आदेश के अनुरूप वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देकर पदोन्नति प्रक्रिया को कितनी शीघ्रता से पूर्ण करता है। यदि विभाग समयबद्ध कार्रवाई करता है, तो लंबे समय से प्रतीक्षारत हजारों शिक्षकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय का यह निर्णय राज्य के शिक्षा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे न केवल वर्षों पुराना पदोन्नति विवाद समाप्त होने की दिशा में बढ़ेगा, बल्कि योग्य शिक्षकों को उनके अधिकार मिलने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

अब अपेक्षा की जा रही है कि शिक्षा विभाग शीघ्र ही आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही पूर्ण कर पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ करेगा, जिससे शिक्षकों का विश्वास और शिक्षा व्यवस्था दोनों मजबूत होंगे।

मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति परीक्षा 2026–27: उत्तराखण्ड के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक सशक्त कदम

 

राज्यभर में 85% उपस्थिति के साथ शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई छात्रवृत्ति परीक्षा

Dr Harish C Badoni- Scholarship Dept SCERT

उत्तराखण्ड में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड द्वारा 07 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति परीक्षा 2026–27 का सफल आयोजन किया गया। यह परीक्षा केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि राज्य के मेधावी विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उन्हें आगे की शिक्षा के लिए प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल ने कहा कि  यह परीक्षा राज्य के राजकीय, राजकीय सहायता प्राप्त एवं स्थानीय निकायों के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 6 एवं कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर प्राप्त हो सके।

राज्यव्यापी स्तर पर भव्य आयोजन

इस वर्ष परीक्षा का आयोजन उत्तराखण्ड के सभी 95 विकासखंडों में स्थापित 370 परीक्षा केन्द्रों पर किया गया। इतने व्यापक स्तर पर परीक्षा का सफल संचालन राज्य की शिक्षा व्यवस्था की दक्षता और प्रशासनिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी के अनुसार यह परीक्षा की गोपनीयता, निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक परीक्षा केन्द्र पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई। परीक्षा के दौरान सभी केन्द्रों पर शांतिपूर्ण, व्यवस्थित एवं अनुशासित वातावरण बनाए रखा गया, जिससे विद्यार्थियों को बिना किसी व्यवधान के परीक्षा देने का अवसर मिला।

इस परीक्षा के समन्वयक डॉ हरीश बडोनी एवं राकेश रावत ने कहा कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता एवं शैक्षणिक उपलब्धियों का समग्र मूल्यांकन करने के उद्देश्य से परीक्षा को दो भागों में आयोजित किया गया।

प्रथम पाली – मानसिक योग्यता परीक्षण (MAT)

  • कक्षा 6: प्रातः 10:00 बजे से 11:30 बजे तक
  • कक्षा 9: प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक

इस परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान कौशल एवं मानसिक दक्षता का मूल्यांकन किया गया।

द्वितीय पाली – शैक्षणिक अभिक्षमता परीक्षण (SAT)

  • कक्षा 6: दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक
  • कक्षा 9: दोपहर 1:30 बजे से 3:30 बजे तक

इस चरण में विद्यार्थियों की पाठ्यक्रम आधारित विषयगत समझ एवं शैक्षणिक योग्यता का आकलन किया गया।

ऑनलाइन आवेदन प्रणाली: डिजिटल उत्तराखण्ड की दिशा में एक और कदम

इस वर्ष छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः SCERT उत्तराखण्ड के छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन सम्पन्न कराई गई।

यह पहल राज्य सरकार की डिजिटल शिक्षा एवं ई-गवर्नेंस के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों एवं विद्यालयों के लिए आवेदन प्रक्रिया सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनी।

इस वर्ष कुल:

  • 88,351 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया
  • कक्षा 6: 41,249 विद्यार्थी
  • कक्षा 9: 47,102 विद्यार्थी

पंजीकृत विद्यार्थियों में से 75,306 विद्यार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया, जो लगभग 85 प्रतिशत उपस्थिति को दर्शाता है। यह आँकड़ा विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच इस योजना की लोकप्रियता तथा शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को प्रतिबिंबित करता है।

छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया

मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत परीक्षा परिणाम के आधार पर प्रत्येक विकासखंड से शीर्ष 10 प्रतिशत प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का चयन छात्रवृत्ति के लिए किया जाएगा।

यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि राज्य के प्रत्येक क्षेत्र के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समान अवसर प्राप्त हों तथा प्रतिभा का सम्मान स्थानीय स्तर पर भी किया जा सके।

योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को निम्नानुसार प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी—

कक्षाप्रतिमाह छात्रवृत्ति
कक्षा 6₹600
कक्षा 7₹700
कक्षा 8₹800
कक्षा 9 एवं 10₹900

निर्धारित शैक्षणिक मानकों एवं योजना की शर्तों को पूर्ण करने पर ही छात्रवृत्ति का लाभ निरंतर प्राप्त होगा। 

Monday, July 06, 2026

महानिदेशक आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में विद्यालयी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न

 

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड में आज महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोंडे (IAS) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा में हो रहे गुणात्मक परिवर्तन, नवाचार आधारित पहल, डिजिटल सुधार, नीति क्रियान्वयन तथा भारत सरकार एवं शासन की प्राथमिकताओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करना था। बैठक में आगामी शासन स्तर की समीक्षा एवं सचिव, उत्तराखण्ड सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमुख बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम का शुभारम्भ निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण  बंदना गर्ब्याल  द्वारा महानिदेशक का स्वागत करते हुए किया गया। बैठक का संचालन एवं मॉडरेशन उप परियोजना निदेशक अजीत भंडारी ने किया।

बैठक के प्रमुख उद्देश्य

बैठक में निम्न प्रमुख विषयों पर विस्तृत समीक्षा की गई—

  • विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार की वर्तमान स्थिति।

  • PGI (Performance Grading Index) में राज्य की रैंकिंग सुधारने की रणनीति।

  • ड्रॉपआउट दर, GER (Gross Enrolment Ratio) एवं Retention Rate की समीक्षा।

  • विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं की प्रगति।

  • नवाचार आधारित कार्यक्रमों एवं डिजिटल शिक्षा सुधारों की समीक्षा।

  • शासन द्वारा मांगी गई सूचनाओं एवं आगामी कार्ययोजना पर चर्चा।

प्रमुख बिंदुओं पर समीक्षा

बैठक में शासन द्वारा अपेक्षित विभिन्न नवाचारों एवं परिवर्तनकारी पहलों की प्रस्तुति पर विशेष चर्चा हुई। इनमें प्रमुख रूप से—

  • विद्यालयी शिक्षा में संचालित अभिनव कार्यक्रम।

  • गेम-चेंजर परियोजनाएँ।

  • तकनीकी नवाचार एवं AI आधारित पहल।

  • वेबसाइट एवं पोर्टलों का उन्नयन।

  • डिजिटल गवर्नेंस एवं ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार।

  • ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम।

  • राज्य स्तरीय हैकाथॉन एवं नवाचार प्रतियोगिताएँ।

  • SCERT द्वारा विकसित डिजिटल शिक्षण मॉडल एवं श्रेष्ठ प्रथाएँ।

महानिदेशक ने निर्देश दिए कि इन सभी नवाचारों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाए ताकि उन्हें राज्य की उपलब्धियों के रूप में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।

PGI सुधार हेतु विशेष निर्देश

महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने स्पष्ट किया कि राज्य की PGI रैंकिंग में सुधार सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए उन्होंने MIS समन्वयक  मुकेश बहुगुणा को निर्देशित किया कि—

  • एक सप्ताह के भीतर UDISE डेटा का व्यापक सत्यापन एवं अद्यतन कार्य पूरा किया जाए।

  • आवश्यकता अनुसार NIOS सहित संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित किया जाए।

  • विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों (Dropout Students) का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए।

  • ऐसा डैशबोर्ड विकसित किया जाए जिससे ड्रॉपआउट की वास्तविक स्थिति का नियमित विश्लेषण किया जा सके।

विद्यालयी आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान

प्रदेश के विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए महानिदेशक ने निर्देश दिए कि—

  • जिन विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है, उनकी प्राथमिकता सूची तैयार की जाए।

  • आवश्यक संसाधनों एवं निर्माण कार्यों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।

  • प्रत्येक जिले से नियमित प्रगति रिपोर्ट प्राप्त की जाए।

FLN एवं Learning Outcomes में सुधार

सभी निदेशकों  को निर्देशित करते हुए महानिदेशक ने कहा कि—

  • Foundational Literacy and Numeracy (FLN) में सुधार हेतु विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।

  • Learning Outcomes को बढ़ाने के लिए सुधारात्मक परियोजनाएँ प्रारम्भ की जाएँ।

  • शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को परिणामोन्मुख बनाया जाए।

  • सभी अकादमिक कार्यक्रमों की स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित कर उनका नियमित अनुश्रवण किया जाए।

अपर निदेशक अकादमिक को महानिदेशक ने कहा कि—

  • छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सुधार लाया जाए।

  • निपुण भारत मिशन के कार्यक्रमों को और अधिक परिणामकारी बनाया जाए।

  • SCERT द्वारा संचालित सभी नवाचार कार्यक्रमों के लिए एक सुनियोजित रोडमैप तैयार किया जाए।

  • नवाचारों के परिणामों का नियमित मूल्यांकन भी सुनिश्चित किया जाए।

समावेशी एवं समान शिक्षा पर जोर

उपनिदेशक अजीत भंडारी को निर्देशित किया गया कि— 

  • UDISE डेटा की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।

  • Inclusive Education एवं Equity से जुड़े सभी संकेतकों पर विशेष ध्यान दिया जाए।

  • प्रत्येक जिले की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की जाए।

शिक्षक रेशनलाइजेशन पर चर्चा

बैठक में प्रदेशभर में शिक्षकों की उपलब्धता एवं छात्र संख्या की समीक्षा की गई।

निर्णय लिया गया कि—

  • जहाँ शिक्षक संख्या आवश्यकता से अधिक है तथा

  • जहाँ छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षक कम हैं,

वहाँ Teacher Rationalization Policy के अंतर्गत संतुलित समायोजन हेतु विस्तृत परियोजना तैयार की जाएगी।

इस कार्य के लिए संयुक्त निदेशक  जे. पी. काला को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।

छात्रवृत्ति एवं ड्रॉपआउट पर सुझाव

बैठक के दौरान सह उपनिदेशक (समग्र शिक्षा) प्रद्युम्न रावत ने—

  • ड्रॉपआउट दर कम करने,

  • जोखिम वाले विद्यार्थियों की शीघ्र पहचान करने,

संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए, जिन पर गंभीरता से विचार किया गया। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उप परियोजना निदेशक पल्लवी नैन एवं फातिमा ने विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, समन्वय एवं सुधारात्मक उपायों पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। SCERT द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में—

  • सहायक निदेशक – डॉ. के. एन. बिजल्वाण

  • SCERT के सुनील भट्ट

  • SCERT आईटी विभाग से रमेश प्रसाद बड़ोनी

  • महानिदेशक कार्यालय, प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा तथा समग्र शिक्षा के अन्य अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के समापन पर महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने सभी अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों से आह्वान किया कि प्रत्येक अधिकारी अगली समीक्षा बैठक में कम-से-कम तीन नवाचारी विचार (Innovative Ideas) लेकर आए तथा उनके क्रियान्वयन की स्पष्ट योजना भी प्रस्तुत करे।

उन्होंने कहा कि केवल विचार प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके मापनीय परिणाम (Outcomes) भी दिखाई देने चाहिए।

उन्होंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि विद्यालयी शिक्षा विभाग को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने के लिए टीम भावना, नवाचार, तकनीकी उपयोग और समयबद्ध कार्यसंस्कृति को प्राथमिकता दें।

यह समीक्षा बैठक केवल योजनाओं की प्रगति की समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यालयी शिक्षा में डेटा-आधारित निर्णय, तकनीकी नवाचार, गुणवत्तापूर्ण अधिगम, समावेशी शिक्षा, शिक्षक क्षमता विकास और प्रशासनिक सुधार को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई। बैठक से स्पष्ट संदेश मिला कि उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा विभाग आगामी वर्षों में परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली, नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।