एस.सी.ई.आर.टी.
उत्तराखण्ड में बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान (FLN) के
अन्तर्गत सत्र 2026-27 में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम के
अन्तर्गत सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण के लिए समग्र शिक्षा उत्तराखण्ड के
पीएमयू के निर्देशन में मुख्य संदर्भदाता कार्यशाला का आयोजन दिनाँक 31 अगस्त से 3 सितम्बर 2026 तक
किया गया। कार्यशाला में प्रत्येक जनपद के डायट्स से एफ.एल.एन.
समन्वयक,
सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण समन्वयक तथा
राज्य तथा जनपदों के समग्र शिक्षा के समन्वयकों के द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम में रूम टु रीड, सम्पर्क, अजीम प्रेमजी
फाउण्डेशन, सिम्पल एजूकेशन फाउण्डेशन, हिमोत्थान आदि
सहयोगी संस्थाओं के द्वारा भी सहयोग प्रदान किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए इस
बार विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम से राज्य स्तर पर प्रशिक्षण आवश्यकताओं का संकलन कर आवश्यकताओं का विश्लेषण किया गया तथा इनके आधार पर
प्रशिक्षण साहित्य का विकास किया गया।
निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना
गर्ब्याल ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास में मदद करता
है तथा शिक्षकों को उनके कार्यक्षेत्र में राष्ट्र एवं वैश्विक स्तर पर होने वाले
परिवर्तानों से अवगत कराता है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी परख
सर्वेक्षण में राज्य के प्रदर्शन में सुधार में सहायक होगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम
शिक्षकों को स्थानीय संदर्भ में कक्षा-शिक्षण को संवर्धित करने में सहायक होता है।
कार्यशाला में अपर निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी.
उत्तराखण्ड पद्मेन्द्र सकलानी ने कहा कि इस बार का प्रशिक्षण कार्यक्रम
शिक्षकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशिक्षण
साहित्य में में उन बिन्दुओं को शामिल
किया गया
है जो शिक्षकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं
से सम्बन्धित हैं। यह प्रशिक्षण शिक्षकों की शिक्षण तथा
विद्यार्थियों की अधिगम दक्षता के विकास में सहायक होगा।
उप निदेशक विनोद सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम की
प्रक्रिया में वृद्धि करने में सहायक होगा। विकासखण्ड स्तर पर आयोजित होने वाले
प्रशिक्षण में जनपद के समग्र शिक्षा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इस बार के
प्रशिक्षण कार्यक्रम को गतिविधिपूर्ण बनाने पर फोकस किया गया है।
सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानन्द बिजल्वाण ने कहा कि प्रशिक्षण साहित्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राज्य की पाठ्यचर्या के अनुरूप तैयार किया गया है। प्रशिक्षण में राष्ट्रीय तथा राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के आधार पर दक्षता आधारित आकलन को फोकस किया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से कक्षा-शिक्षण को गतिविधिपूर्ण बनाने के तरीकों को शामिल किया गया है, इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी गतिविधिपूर्ण रखा गया है। एस.सी.ई.आर.टी. में एफ.एल.एन. प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला ने प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला और कहा कि प्रशिक्षण की आवश्यकताओं का चिन्हांकन किया गया है। प्रशिक्षण आवश्यकताओं के चिन्हांकन के लिए राज्य के विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम से आयोजित सर्वेक्षण में 19500 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया था। इस हेतु राज्य स्तर पर समग्र शिक्षा एवं एस.सी.ई.आर.टी. द्वारा 100 से अधिक बिन्दुओं की प्रशिक्षण आवश्यकताओं की प्रश्नावली तैयार की गयी। वर्ष 2026-27 में प्राथमिक स्तर के प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों के लिए पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का राज्य स्तर पर डिजायन किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रभावी और सफल बनाने के लिए अनुश्रवण की योजना तैयार की गयी है।
राज्य स्तरीय मुख्य संदर्भदाता प्रशिक्षण के बाद डायट्स में मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण आयोजित किया जायेगा। तैयार किये गये मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा विकासखण्ड स्तर पर प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों को पाँच दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। प्रशिक्षण से पूर्व एन्ट्री बिहेवियर की जाँच के लिए प्रशिक्षण पूर्व आकलन तथा प्रशिक्षण की प्रभाविता जाँच के लिए प्रशिक्षण पश्चात आकलन किया गया जो जनपद तथा ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण में भी होगा।
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दिवस |
प्रथम सत्र (9.45 AM-11.30 AM) |
द्वितीय सत्र (11.45 AM-01.00 PM) |
तृतीय सत्र (02.45 PM-03.30 PM) |
चतुर्थ सत्र (03.45 PM-05.00 PM) |
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प्रथम दिवस |
स्वागत, परिचय एवं निपुण गीत &
प्रतिज्ञा, प्रशिक्षण पूर्व मूल्यांकन |
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय/राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के
सन्दर्भ में नवीन
पाठ्यपुस्तकों का अभिमुखीकरण |
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय/राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के
सन्दर्भ में नवीन
पाठ्यपुस्तकों का अभिमुखीकरण |
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय/ राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के सन्दर्भ
में नवीन
पाठ्यपुस्तकों का अभिमुखीकरण |
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द्वितीय दिवस |
बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान – शिक्षण अधिगम
प्रक्रिया |
परख एवं दक्षता आधारित प्रश्नों का निर्माण (कक्षा 1 से 5
तक), अभ्यास एवं आकलन, (जारी....) |
परख एवं दक्षता आधारित प्रश्नों का निर्माण (कक्षा 1 से 5
तक), अभ्यास एवं आकलन (जारी....) |
परख एवं दक्षता आधारित प्रश्नों का निर्माण (कक्षा 1 से 5
तक), अभ्यास एवं आकलन |
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तृतीय दिवस |
विद्यालय संस्कृति और पुस्तकालय |
जादुई पिटारा पर अभिमुखीकरण |
डिजिटल शिक्षण सामग्री का उपयोग (PM e- Vidhya, DIKSHA, NROER, I- Got Karm yogi, Swift chat,
Parakh, Daisy, etc.) |
डिजिटल शिक्षण सामग्री का उपयोग (PM e- Vidhya, DIKSHA, NROER, I- Got Karm yogi, Swift chat,
Parakh, Daisy, etc.) |
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चतुर्थ दिवस |
बहु कक्षा एवं बहुस्तरीय कक्षा शिक्षण रणनीतियां एवं अनुभवात्मक अधिगम
(जारी..) |
बहु कक्षा एवं बहुस्तरीय कक्षा शिक्षण रणनीतियां एवं अनुभवात्मक अधिगम
(जारी..) |
स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health and Hygene) |
विद्यालय संस्कृति एवं जेंडर संवेदीकरण |
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पंचम दिवस |
सामुदायिक सहयोग एवं विद्यालय विकास योजना |
आचरण के सिद्धान्त |
तम्बाकू मुक्त शिक्षण संस्थान एवं मोबाइल की लत से बचाव |
पोस्ट टेस्ट एवं समापन सत्र |
प्रशिक्षण कार्यक्रम में समग्र शिक्षा
उत्तराखण्ड से समन्वयक-एफ.एल.एन. तथा समन्वयक-पैडागॉजी ने भी प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण कार्यशाला में एस.सी.ई.आर.टी. से विषय विशेषज्ञ के रूप में
अरूण थपलियाल, गंगा घुघत्याल, डॉ. मनोज कुमार शुक्ला, डॉ. रंजन कुमार भट्ट, मनोज
किशोर बहुगुणा, शुभ्रा सिंघल, डॉ. कपिल देव सेमवाल, मनोज किशोर बहुगुणा, अखिलेश
डोभाल आदि संकाय सदस्यों ने मार्गदर्शन किया।
कार्यशाला मे टंकण एवं वित्तीय
प्रबंधन में राकेश तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी योगदान दिया।