Wednesday, September 23, 2026

व्यावसायिक शिक्षा एवं ‘कौशल बोध’ पर पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला

 

उद्यमशील सोच, आकलन, करियर जागरूकता और स्थानीय कौशल पर केंद्रित रहे सत्र

देहरादून, 23 सितम्बर 2026।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड में पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (PSSCIVE), भोपाल के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के अनुरूप मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ‘कौशल बोध’ के संचालन हेतु आयोजित पाँच दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला के अंतर्गत मंगलवार को विभिन्न अकादमिक, व्यावहारिक एवं गतिविधि-आधारित सत्र आयोजित किए गए।

कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों एवं संदर्भदाताओं को इस प्रकार तैयार करना है कि वे व्यावसायिक शिक्षा को केवल व्यवसायों की जानकारी तक सीमित न रखते हुए उसे करके सीखने (Learning by Doing), परियोजना-आधारित अधिगम, स्थानीय संसाधनों, कार्य-जगत, उद्यमशीलता तथा भविष्य के कौशलों से जोड़ सकें।

विद्यार्थियों के आकलन एवं मूल्यांकन पर विशेष सत्र

कार्यशाला के प्रथम सत्र में PSSCIVE, भोपाल के प्रो. (डॉ.) रवि आहूजा द्वारा ‘कौशल बोध’ के अंतर्गत विद्यार्थियों के आकलन एवं मूल्यांकन पर विस्तार से चर्चा की गई।

उन्होंने बताया कि व्यावसायिक शिक्षा में मूल्यांकन केवल विद्यार्थियों के सैद्धांतिक ज्ञान पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके व्यावहारिक कौशल, सहभागिता, कार्य-प्रक्रिया, समस्या समाधान क्षमता तथा सीखने के प्रतिफलों को भी समुचित महत्व दिया जाना चाहिए।

विभिन्न गतिविधियों एवं प्रदर्शनों के माध्यम से प्रतिभागियों को कौशल-आधारित आकलन की तकनीकों और व्यावहारिक मूल्यांकन की विधियों से परिचित कराया गया।

उद्यमशील मानसिकता और बाजार की समझ

द्वितीय सत्र में SCERT उत्तराखंड के सुनील भट्ट द्वारा ‘उद्यमशील मानसिकता एवं उद्यमशील सोच’ विषय पर गतिविधि-आधारित सत्र संचालित किया गया।

इस दौरान प्रतिभागियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किसी उत्पाद अथवा सेवा की विशेषताओं और उपयोगिता को प्रभावी ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जाए तथा बाजार में उसकी पहचान एवं ब्रांडिंग किस प्रकार विकसित की जा सकती है।


प्रतिभागियों ने विक्रेता और ग्राहक की भूमिकाएँ निभाते हुए व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लिया। इसके माध्यम से उन्हें उत्पाद प्रस्तुतीकरण, ग्राहक की आवश्यकता को समझने, प्रभावी संवाद, सही प्रश्न पूछने तथा अपने विचार को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का अनुभव प्राप्त हुआ।

सत्र में उद्यमशील मानसिकता के विकास में 21वीं सदी के कौशलों—संचार, सहयोग, सृजनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान एवं निर्णय क्षमता की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

विद्यार्थियों के विचार से उद्यम तक

विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच विकसित करने की दिशा में बिजनेस सपोर्ट फंड की अवधारणा तथा विद्यार्थियों के अनुभवों एवं उपलब्धियों को भी साझा किया गया।

इस क्रम में विद्यार्थी ध्रुव वर्मा की सफलता की कहानी के माध्यम से बताया गया कि उचित अवसर, मार्गदर्शन और उद्यमशील सोच विद्यार्थियों को अपने विचारों को वास्तविक कार्य एवं संभावनाओं में बदलने के लिए किस प्रकार प्रेरित कर सकती है।

प्रतिभागियों को उत्तराखंड सरकार द्वारा विद्यार्थियों के कौशल, नवाचार एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी भी दी गई। इनमें हैकथॉन, MOOCs तथा कौशल एवं नवाचार आधारित अन्य कार्यक्रमों पर विशेष चर्चा हुई।

करियर जागरूकता और My Career Advisor App

कार्यशाला के तृतीय सत्र में प्रो. (डॉ.) आशीष सोनी द्वारा करियर जागरूकता पर सत्र आयोजित किया गया।

उन्होंने My Career Advisor App के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न करियर विकल्पों से परिचित कराने तथा उनकी रुचियों, क्षमताओं एवं भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप करियर संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की।


इस क्रम में ऑनलाइन माध्यम से भी सत्र आयोजित किए गए तथा प्रतिभागियों को बताया गया कि विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों में समय रहते करियर जागरूकता विकसित करना उनके भविष्य के शैक्षिक एवं व्यावसायिक निर्णयों में सहायक हो सकता है।


स्थानीय कौशल को विद्यालय से जोड़ने की पहल

‘कौशल बोध’ के अंतर्गत जीवन रूप (Life Forms), मशीन एवं सामग्री (Machines and Materials) तथा मानव सेवाएँ (Human Services) जैसे कार्य-क्षेत्रों को स्थानीय परिवेश एवं परियोजना-आधारित अधिगम से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।

स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को विद्यालयी व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से रिंगाल (Small Bamboo) से विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण में दक्ष कुलदीप कुमार को विशेष संदर्भदाता के रूप में आमंत्रित किया गया।

रिंगाल शिल्प का Hands-on अनुभव

कुलदीप कुमार द्वारा रिंगाल से विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं अपने हाथों से रिंगाल पर कार्य करते हुए इस पारंपरिक कौशल की बारीकियों को समझा।

इस गतिविधि का उद्देश्य केवल एक स्थानीय शिल्प को जानना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि स्थानीय कारीगरों, स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और समुदाय को विद्यालयी शिक्षा से जोड़कर विद्यार्थियों के लिए सार्थक एवं जीवनोपयोगी परियोजनाएँ किस प्रकार विकसित की जा सकती हैं।

इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों को स्थानीय आजीविका, उद्यमशीलता, पर्यावरण, संसाधनों के उपयोग और कार्य-जगत को नजदीक से समझने का अवसर प्रदान कर सकती हैं।

24 सितम्बर को क्षेत्रीय भ्रमण एवं एक्सपोज़र विजिट

पाँच दिवसीय कार्यशाला के अगले चरण में 24 सितम्बर 2026 को प्रतिभागियों के लिए क्षेत्रीय भ्रमण एवं Exposure Visit आयोजित की जाएगी।

इसके अंतर्गत प्रतिभागियों को कृषि विज्ञान केंद्र/हर्बल क्षेत्र, विकासनगर में कृषि, स्थानीय संसाधनों एवं आजीविका से संबंधित व्यावहारिक अनुभव प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न लर्निंग सेंटर्स के माध्यम से इको-टूरिज्म, स्थानीय कौशल एवं आजीविका की संभावनाओं को समझने का अवसर भी मिलेगा।

मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार हो रहे प्रतिभागी

कार्यशाला में PSSCIVE भोपाल, SCERT उत्तराखंड तथा उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के विशेषज्ञ समन्वित रूप से प्रतिभागियों के क्षमता संवर्धन के लिए कार्य कर रहे हैं।

कार्यशाला में प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर/संदर्भदाता के रूप में तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये प्रतिभागी अपने विद्यालयों एवं विकासखंडों में अन्य शिक्षकों को सहयोग प्रदान करते हुए व्यावसायिक शिक्षा तथा ‘कौशल बोध’ के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

‘करके सीखने’ से भविष्य के कौशलों की ओर

कार्यशाला का मूल उद्देश्य व्यावसायिक शिक्षा को केवल किसी व्यवसाय अथवा रोजगार की जानकारी तक सीमित रखना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ‘करके सीखने’, स्थानीय संसाधनों एवं कार्य-जगत से जुड़ने, समस्याओं के समाधान खोजने, उद्यमशील सोच विकसित करने तथा भविष्य के लिए आवश्यक कौशल अर्जित करने के अवसर प्रदान करना है।

‘कौशल बोध’ के माध्यम से विद्यालय और स्थानीय समुदाय के बीच एक ऐसा शैक्षिक संबंध विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय ज्ञान, पारंपरिक कौशल, आधुनिक तकनीक, नवाचार, करियर जागरूकता और उद्यमशीलता एक-दूसरे के पूरक बन सकें।

इस प्रकार व्यावसायिक शिक्षा विद्यार्थियों के लिए केवल एक विषय न रहकर जीवन, कौशल और भविष्य की दुनिया से जुड़ने का व्यावहारिक माध्यम बन सकती है।