Wednesday, August 12, 2026

एफ.एल.एन. के अन्तर्गत शिक्षण सामग्री एवं प्रशिक्षण साहित्य निर्माण कार्यशाला

 

डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला

 एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड में बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान (FLN) के अन्तर्गत सत्र 2026-27 के लिए शिक्षण एवं प्रशिक्षण साहित्य विकास कार्यशाला दिनाँक 10 अगस्त से 17 अगस्त 2026 तक संचालित की जा रही है, जिसमें कक्षा 1 एवं 2 की शिक्षक संदर्शिका और वर्कबुक का रिव्यू तथा कक्षा 3 से 5 तक के लिए शिक्षक संदर्शिका तथा हिन्दी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन विषयों की वर्कबुक का विकास किया जा रहा है। कार्यशाला में प्रत्येक जनपद के डायट्स से एफ.एल.एन. समन्वयक तथा विद्यालयों से अनुभवी शिक्षकों के द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। कार्यशाला में रूम टु रीड, सम्पर्क, अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन, सिम्पल एजूकेशन फाउण्डेशन आदि सहयोगी संस्थाओं के द्वारा भी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। विद्या समीक्षा केन्द्र के द्वारा राज्य स्तर पर प्रशिक्षण आवश्यकताओं के संकलन का विस्तारपूर्वक विश्लेषण की शेयरिंग की गयी।

निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल ने कहा कि कार्यशाला में विकसित साहित्य का उद्देश्य बच्चों के अधिगम में वृद्धि तथा शिक्षकों का सतत व्यावसायिक विकास होना चाहिये। दक्षता आधारित प्रश्नों का इस साहित्य में अधिकाधिक समावेश किया जाना चाहिये।

कार्यशाला में अपर निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड पद्मेन्द्र सकलानी ने कहा कि शिक्षण एवं प्रशिक्षण साहित्य इस प्रकार का विकसित किया जाय जो बच्चों को सीखने के लिए सहायक हो। प्रशिक्षण में उन बिन्दुओं को शामिल किया जाय जो शिक्षकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं से सम्बन्धित हो। तैयार किया जाने वाला साहित्य विद्यार्थियों की दक्षता के विकास में सहायक हो। उप निदेशक विनोद सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण साहित्य विद्यालयों में शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया में वृद्धि करने वाला होना चाहिये। सहायक निदेशक डॉ. कृष्णानन्द बिजल्वाण ने कहा कि शिक्षण एवं प्रशिक्षण साहित्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राज्य की पाठ्यचर्या के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इस वर्ष के प्रशिक्षण के लिए राज्य के द्वारा विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम से प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान की गयी है। 

एस.सी.ई.आर.टी. में एफ.एल.एन. प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. राकेश चन्द्र गैरोला ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला और कहा कि इस वर्ष शिक्षकों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं के चिन्हांकन के लिए लगभग 19 हजार शिक्षकों से आवश्यकताओं का संकलन किया गया। इस हेतु राज्य स्तर पर समग्र शिक्षा एवं एस.सी.ई.आर.टी. द्वारा 100 से अधिक बिन्दुओं की प्रश्नावली तैयार कार्यशाला में प्रथम चार दिवस शिक्षक संदर्शिका, वर्कबुक तथा वर्कशीट का विकास किया जा रहा है। शेष चार दिवसों में प्रशिक्षण आवश्यकताओं के संकलन के आधार पर प्राथमिक स्तर के प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण साहित्य का निर्माण किया जायेगा।

प्रशिक्षण साहित्य के विकास के बाद राज्य स्तर पर केआरपी प्रशिक्षण आयोजित किया जायेगा जो जनपदों में मास्टर ट्रेनर तैयार करेंगे। मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा विकासखण्ड स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।

कार्यशाला में एस.सी.ई.आर.टी. से विषय विशेषज्ञ के रूप में अरूण थपलियाल, गंगा घुघत्याल, डॉ. मनोज कुमार शुक्ला, डॉ. रंजन कुमार भट्ट, मनोज किशोर बहुगुणा, शुभ्रा सिंघल, डॉ. कपिल देव सेमवाल, मनोज किशोर बहुगुणा, अखिलेश डोभाल आदि संकाय सदस्य मार्गदर्शन कर रहे हैं। साहित्य विकास के टंकण एवं वित्तीय प्रबंधन में राकेश तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी योगदान प्रदान कर रहे हैं।