शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को परीक्षाओं के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना भी है। इसी सोच को साकार करने की दिशा में कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखंड के विद्यालयों में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य विद्यार्थियों में उद्यमशील मानसिकता (Entrepreneurial Mindset) विकसित करना तथा उन्हें 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से सशक्त बनाना है।
राज्य स्तर पर विशेष रिसोर्स ग्रुप (State Resource Group) की तीन दिवसीय कार्यशाला के सफल आयोजन के बाद अब कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण चरण प्रारंभ हो चुका है। इसी क्रम में एससीईआरटी, उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के 50 से अधिक शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण आगे चलकर प्रदेश के विद्यालयों में कौशलम् कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की मजबूत आधारशिला बनेगा।
शिक्षक बनेंगे परिवर्तन के वाहक
किसी भी शैक्षिक परिवर्तन की सफलता उसके शिक्षकों पर निर्भर करती है। यही कारण है कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को केवल कार्यक्रम की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे संदर्भदाता (Master Trainer) के रूप में तैयार करना है जो अपने-अपने जनपदों और विद्यालयों में अन्य शिक्षकों का मार्गदर्शन कर सकें।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कौशलम् कार्यक्रम की अवधारणा, उद्देश्य, शिक्षण-पद्धति, गतिविधि-आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम तथा विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण की पूरी रूपरेखा सहभागितापूर्ण और व्यवहारिक अनुभवों पर आधारित है, जिससे शिक्षक स्वयं सीखते हुए दूसरों को सीखाने के लिए सक्षम बन सकें।
केवल नौकरी नहीं, अवसरों का निर्माण करने की सोच
कौशलम् कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह विद्यार्थियों को केवल Job Seeker बनने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें Job Giver बनने की दिशा में प्रेरित करता है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में समस्या-समाधान, नवाचार, नेतृत्व, सहयोग, संचार कौशल, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित करने पर विशेष बल दिया जाता है।
आज के बदलते वैश्विक परिवेश में ये कौशल न केवल रोजगार के लिए आवश्यक हैं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की आधारशिला भी हैं।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, बंदना गर्ब्याल ने कौशलम् कार्यक्रम की आवश्यकता और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना भी है।
सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजल्वाण ने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभवों और नवीन शिक्षण पद्धतियों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करें, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी अपने भीतर छिपी क्षमताओं को पहचान सके और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सके।
"करके सीखना" ही सफलता की कुंजी
कार्यक्रम में अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने गतिविधि-आधारित शिक्षण और Learning by Doing (करके सीखना) की अवधारणा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी स्वयं गतिविधियों में भाग लेते हैं, समस्याओं का समाधान खोजते हैं और अपने अनुभवों से सीखते हैं, तभी वास्तविक अधिगम संभव होता है।
कौशलम् कार्यक्रम इसी अनुभवात्मक शिक्षण दृष्टिकोण को विद्यालयों तक पहुँचाने का प्रयास है।
गढ़वाल मंडल के इस प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद अगले चरण में कुमाऊँ मंडल के मास्टर ट्रेनरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, दिनेशपुर में आयोजित किया जाएगा। इस प्रकार कौशलम् कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तराखंड में विस्तारित किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक विद्यालय तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम का समन्वयन राज्य कौशलम समन्वयक सुनील भट्ट द्वारा किया गया। प्रथम सत्र में उन्होंने प्रतिभागियों को कार्यक्रम की पृष्ठभूमि, उद्देश्यों, प्रशिक्षण की रूपरेखा तथा आगामी कार्ययोजना से विस्तारपूर्वक परिचित कराया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण केवल तीन दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कौशल आधारित, अनुभवात्मक और नवाचार-प्रधान शिक्षण की दिशा में कौशलम् कार्यक्रम उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ऐसी शैक्षिक संस्कृति विकसित करने का प्रयास है जहाँ विद्यार्थी जिज्ञासु हों, समस्याओं का समाधान खोजने वाले हों, नवाचार करें और आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य का निर्माण करें।
इस प्रशिक्षण में सन्दर्भदाता के रूप में मैकगिल विश्वविद्यालय कनाडा से आसिया और उद्यम लर्निंग फाउंडेशन से अरविन्द बिष्ट, प्रियंका, ममता खत्री, यामिनी, दिवाकर, कुणाल, लक्ष्य और एस. सी. ई. आर. टी उत्तराखंड से डॉ. दिनेश रतूड़ी, शुभ्रा सिंघल, डॉ. मनोज कुमार शुक्ला और गोपाल घुघत्याल सन्दर्भदाता के रूप में सेवा दे रहे हैं।